Saturday, 13 Jun 2026 | 04:53 PM

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ग्वालियर में भोजपुरी अभिनेता रियाज हुसैन उर्फ राजा पर FIR:भोजपुरी मूवी के लिए किया था साइन, 2 लाख रुपए लेकर एक्टर ने नहीं दी शूटिंग की डेट

ग्वालियर में भोजपुरी अभिनेता रियाज हुसैन उर्फ राजा पर FIR:भोजपुरी मूवी के लिए किया था साइन, 2 लाख रुपए लेकर एक्टर ने नहीं दी शूटिंग की डेट

ग्वालियर में भोजपुरी फिल्म अभिनेता रियाज हुसैन उर्फ राजा भोजपुरिया के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। झांसी रोड थाना पुलिस ने एक फिल्म प्रोड्यूसर की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि अभिनेता ने फिल्म में काम करने के नाम पर साइनिंग अमाउंट लिया, लेकिन शूटिंग के लिए तारीख नहीं दी। शिकायतकर्ता मैसर्स मेट्रोज प्रोडक्शन के प्रोपराइटर ओमप्रकाश कुकरेजा निवासी विजय नगर हैं। उनके अधिवक्ता कांति प्रकाश मिलिंद ने बताया कि ओमप्रकाश फिल्म निर्माण का कार्य करते हैं। उन्होंने भोजपुरी अभिनेता राजा भोजपुरिया से फिल्म साइन करने के लिए संपर्क किया था। दोनों के बीच पहले से परिचय होने के कारण अभिनेता ने सहमति जताई और साइनिंग अमाउंट के रूप में रकम मांगी। किस्तों में भेजे 2 लाख रुपए शिकायत के अनुसार वर्ष 2023 में ओमप्रकाश ने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से आरोपी के खाते में अलग-अलग तारीखों पर कुल 2 लाख रुपए ट्रांसफर किए। इसमें 20 अगस्त और 27 अगस्त 2023 को 1-1 लाख रुपए भेजे गए। इसके बाद 20 सितंबर को 50 हजार रुपए, 2 अक्टूबर को 25 हजार रुपए और 17 अक्टूबर को 25 हजार रुपए भेजे गए। शूटिंग डेट मांगने पर टालमटोल रकम भेजने के बाद प्रोड्यूसर ने फिल्म शूटिंग के लिए तारीख मांगी, लेकिन आरोपी लगातार व्यस्तता का हवाला देकर टालता रहा। कई बार संपर्क करने के बाद भी जब कोई तारीख नहीं दी गई, तब शिकायतकर्ता को धोखाधड़ी का संदेह हुआ। पैसे मांगने पर धमकी का आरोप ओमप्रकाश का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी भड़क गया। उसने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट डालकर उनकी सामाजिक व व्यापारिक छवि खराब करने की कोशिश की। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर शिकायतकर्ता ने पहले झांसी रोड थाने में शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट की शरण ली। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने रियाज हुसैन उर्फ राजा भोजपुरिया के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें…

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें…

News18 एग्जिट पोल 2026: बंगाल बीजेपी के पक्ष में, केरल बहुत करीब, तमिलनाडु चाकू की नोक पर | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 20:30 IST सीएनएन-न्यूज18 के एग्जिट पोल अनुमानों में पश्चिम बंगाल और असम में बीजेपी को आगे, तमिलनाडु में एआईएडीएमके+ को थोड़ा आगे और केरल में यूडीएफ को एलडीएफ से थोड़ा आगे दिखाया गया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में एग्जिट पोल के रुझान आने शुरू हो गए हैं। News18 एग्जिट पोल 2026, परिणाम की भविष्यवाणी: पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 2026 विधानसभा चुनाव औपचारिक रूप से आज (29 अप्रैल) समाप्त हो गए। अब मतदान समाप्त होने के साथ, ध्यान तेजी से प्रचार अभियानों और मतदान केंद्रों से हटकर केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम के बहुप्रतीक्षित एग्जिट पोल परिणामों पर केंद्रित हो गया है। एग्ज़िट पोल नतीजे 2026 लाइव अपडेट का पालन करें मतदान के बाद, प्रमुख राजनीतिक प्रश्न अब राष्ट्रीय बातचीत पर हावी हैं। क्या भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकती है? क्या अभिनेता विजय तमिलनाडु के मजबूत डीएमके-एआईएडीएमके राजनीतिक परिदृश्य में सेंध लगाने में कामयाब होंगे? असम में, क्या मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भाजपा को मजबूत जनादेश दिलाएंगे, या कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन वापस पा सकेगी? इस बीच, केरल में चर्चा इस बात पर है कि क्या वामपंथी लगातार तीसरी बार दुर्लभ कार्यकाल हासिल कर सकते हैं। सीएनएन-न्यूज18 इन सवालों का जवाब देने के लिए यहां है। हालाँकि, एग्ज़िट पोल केवल एक सांकेतिक स्नैपशॉट पेश करते हैं, अंतिम परिणाम नहीं और इन्हें सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल (चरण 1) पश्चिम बंगाल (चरण 1) के लिए एग्जिट पोल अनुमानों से पता चलता है कि भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच कांटे की टक्कर है, जिसमें भाजपा को मामूली बढ़त हासिल है। वोटवाइब द्वारा विशेष रूप से जारी अनुमानों के अनुसार सीएनएन-न्यूज18इस चरण में बीजेपी को 152 सीटों में से 93 के मध्य बिंदु के साथ 88 से 98 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि टीएमसी+ गठबंधन को 51 से 61 सीटें (मध्य बिंदु 56) हासिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस 2 से 4 सीटों के साथ हाशिए पर रहने की संभावना है. पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल परिणाम 2026 लाइव अपडेट का पालन करें अनुमानों से पता चलता है कि एससी, एसटी, ओबीसी और उच्च जाति के हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत समर्थन के कारण पहले चरण में भाजपा को संरचनात्मक लाभ है, और मालदा को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में वह आगे चल रही है, जहां टीएमसी ने अपने समेकित मुस्लिम मतदाता आधार के कारण प्रभुत्व बरकरार रखा है। तमिलनाडु तमिलनाडु के लिए एग्जिट पोल के अनुमानों से पता चलता है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी, जिसमें सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाले ब्लॉक पर अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को थोड़ी बढ़त मिलेगी। वोटवाइब द्वारा विशेष रूप से जारी अनुमानों के अनुसार सीएनएन-न्यूज18234 सदस्यीय विधानसभा में एआईएडीएमके+ को 114 से 124 सीटें जीतने का अनुमान है, जिसका मध्यबिंदु 119- आराम से बहुमत के निशान 118 से ऊपर है। तमिलनाडु एग्जिट पोल परिणाम 2026 के लाइव अपडेट का पालन करें DMK+ गठबंधन को 103 से 113 सीटें (मध्य बिंदु 108) मिलने की उम्मीद है, जो एक करीबी लड़ाई का संकेत है, जबकि अभिनेता विजय की TVK 4 से 10 सीटों के साथ मामूली शुरुआत कर सकती है। वोट शेयर का अनुमान संकीर्ण बना हुआ है, एआईएडीएमके+ 39.9 प्रतिशत और डीएमके+ 38.9 प्रतिशत है, इसके बाद टीवीके 15.8 प्रतिशत है। केरल केरल के लिए एग्जिट पोल के अनुमानों से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को बढ़त के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत मिलता है। वोटवाइब द्वारा विशेष रूप से जारी एग्जिट पोल अनुमानों के अनुसार सीएनएन-न्यूज18यूडीएफ वोट शेयर में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) से आगे निकल गया है। हालाँकि, मार्जिन बेहद संकीर्ण है और त्रुटि की सांख्यिकीय सीमा के भीतर है, जिससे अंतिम परिणाम निश्चितता के बहुत करीब है। केरल एग्जिट पोल परिणाम 2026 लाइव अपडेट का पालन करें सीटों के संदर्भ में, अनुमानों से पता चलता है कि यूडीएफ 140 सदस्यीय विधानसभा में 70 से 80 सीटों के बीच जीत सकता है, 75 के मध्य-बिंदु अनुमान के साथ – 71 के बहुमत के निशान से थोड़ा ऊपर। एलडीएफ को 58 से 68 सीटों के बीच सुरक्षित रहने का अनुमान है, जो दर्शाता है कि वह सत्ता बरकरार रखने से पीछे रह सकता है। एनडीए के एक छोटे खिलाड़ी बने रहने की उम्मीद है, जिसका अनुमान 0 से 4 सीटों के बीच है। असम असम में, एग्जिट पोल के अनुमान भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की निर्णायक जीत की ओर इशारा करते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं। वोटवाइब द्वारा विशेष रूप से जारी अनुमानों के अनुसार सीएनएन-न्यूज18एनडीए ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन पर महत्वपूर्ण बढ़त बना ली है, जो पूर्वोत्तर राज्य में सत्ता में अपेक्षाकृत आरामदायक वापसी की ओर इशारा करता है। असम एग्जिट पोल परिणाम 2026 लाइव अपडेट का पालन करें सीटों का अनुमान एनडीए को प्रमुख स्थिति में रखता है, 126 सदस्यीय विधानसभा में 90 से 100 सीटों का अनुमान है, जो बहुमत के निशान 64 से काफी ऊपर है, मध्य बिंदु अनुमान 95 सीटों का है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले असम सोनमिलिटो मोर्चा (एएसएम) को 23 से 33 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि एआईयूडीएफ को 0 से 6 सीटों की अनुमानित संख्या के साथ सीमांत रहने की उम्मीद है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 20:30 IST न्यूज़ इंडिया News18 एग्जिट पोल 2026: बंगाल बीजेपी के पक्ष में, केरल बहुत करीब, तमिलनाडु चाकू की नोक पर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

पुडुचेरी एग्जिट पोल 2026: पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के बाद ‘पोल ऑफ पोल्स’ में एनडीए को बढ़त, कांग्रेस गठबंधन पीछे

पुडुचेरी एग्जिट पोल 2026: पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के बाद 'पोल ऑफ पोल्स' में एनडीए को बढ़त, कांग्रेस गठबंधन पीछे

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित टीवीके और अन्य दार्शनिकों का प्रभाव सीमित रह सकता है। पुडुचेरी एग्जिट पोल 2026: पुडुचेरी की 30 वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में एक अलग-अलग चुनावी पोल सामने आया है और अब एक साझा रुझान की ओर इशारा किया जा रहा है। पोल ऑफ पोल्स के समग्र विश्लेषण में एनडीए अब स्पष्ट बढ़त के साथ उभरता दिख रहा है। 30 विधानसभा वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 16 है और ज्यादातर सर्वे एनडीए को आंकड़े के आंकड़ों के पार ले जाकर नजर आ रहे हैं. तीन शिक्षण में दिखाएँ एनडीए बहुमत का पात्र तीन प्रमुख सूत्रधार- एक्सिस माई इंडिया, पीपल्स पल्स और प्रजा पोल – के आंकड़ों को देखें तो इसमें भारतीय जनता पार्टी नीट एनडीए की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। एक्सिस माई इंडिया के मुताबिक, एनडीए को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं, जो उसे बहुमत की लाइन पर या उसके ऊपर है। पीपल्स पल्स भी एनडीए को 16 से 20 फ़्रैंचाइज़ी के फ़्लोरिडा में ले जाता है, जबकि प्रजा पोल ने सबसे आक्रामक बयान देते हुए एनडीए को 19 से 25 फ़्लोरिडा तक पहुँचाया है। इन सर्वेक्षणों का प्रमाणिक संकेत यही है कि एनडीए पुदुचेरी में सरकार बनाने की स्थिति में है। यह भी पढ़ें: पोल ऑफ पोल्स एलोकिट पोल 2026: बंगाल में डगमगा रही ममता बनर्जी की सरकार, बीजेपी को मिल रही बहुमत से बढ़त मंझधार में फंसी कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की नाव दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के इन अध्ययनों में पीछे की ओर नजर डाली गई है। एक्सिस माय इंडिया उसे 6 से 8 तीर्थयात्रा देता है, जबकि पीपल्स पल्स के अनुसार उसे 10 से 12 लाभ मिल सकते हैं, यह उसके लिए अपेक्षाकृत बेहतर परिदृश्य है। वहीं, प्रजा पोल का अनुमान 6 से 10 के बीच है। कुल मिलाकर, कांग्रेस गठबंधन के लिए चित्र इलेक्ट्रानिक दिखते हैं, हालांकि कुछ सर्वेक्षणों में उन्हें गंगा तट तक पहुंचने की संभावना भी दिखाई गई है। पुडुचेरी में टीवीके इसका भी सीमित प्रभाव हो सकता है इस चुनाव में एक दिलचस्प निवेशक टीवीके (तमिलगा वेत्री कज़गम) की भी उपस्थिति है। एक्सिस माय इंडिया उसे 2 से 4 दर्शनीय स्थलों की यात्रा का अनुमान देता है, लेकिन पीपल्स पल्स और प्रजा पोल दोनों ही उसे कोई सीट नहीं देते। इसका मतलब यह है कि टीवीके की भूमिका सीमित हो सकती है और उसका प्रभाव कुछ हद तक सीमित हो सकता है। अन्य आश्रम और आश्रमों की बात करें, तो उनकी किताब में 0 से 3 आश्रम जाने का अनुमान है। हालाँकि, यह संख्या कम है, लेकिन टुकड़े टुकड़े की स्थिति में ये आरक्षण संरचना के अनुपात प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस के दिन की शुरूआत में रिवर्सफेर की उम्मीद होगी अलग-अलग सर्वेक्षणों में बहुमत के आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन दिशा एक ही है कि एनडीए बहुमत के करीब है या उनके ऊपर है। राजनीतिक सूचकांकों के, छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि और सीमित मूल्यों के आधार पर गणित तेजी से प्रभावित होता है। ऐसे में 2-3 रिजर्व का अंतर भी शक्ति का संतुलन बदला जा सकता है। इंग्लैण्ड पोल के ये रुझान एनडीए के पक्ष में सरकार बनने की संभावना को मजबूत कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस एलायंस को एकजुट करने के दिन किसी उलटफेर की उम्मीद की जाएगी। यानी कि अगर हम देखें तो पुडुचेरी में ‘पोल ऑफ एक्जिट पोल’ एनडीए को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। अनुमान के मुताबिक, एनडीए 18 बहुमत के साथ है, जबकि कांग्रेस 9 बहुमत पर नजर रख रही है। टीवीके को 2 और अन्य के 1 सीट जाने का अनुमान है, जिससे एनडीए की सरकार का गठन दिख रहा है। यह भी पढ़ें समझाया: केरल के मुख्यमंत्री की रेस में शशि थरूर किशन लैंडिंग पर? किसे अगला सीएम बनाने की चाहत, जानें जनता का मूड

India, China Yet to Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful

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Hindi News Sports FIFA World Cup 2026: India, China Yet To Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक फीफा वर्ल्ड कप 2026 11 जून से 26 जुलाई तक खेला जाएगा। भारत-चीन में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक किसी भी कंपनी ने नहीं खरीदे हैं। मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका में भी राइट्स के लिए कोई कंपनी इंटरनेस्ट नहीं दिखा रही। अगर यहीं स्थिति रही, तो दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट को नहीं देख पाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक क्यों नहीं खरीदे गए? फीफा ने शुरुआत में मैचों के राइट्स के लिए $100 मिलियन (948 करोड़ रुपए) की मांग की थी। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो इसका प्राइज घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 332 करोड़ रुपए) कर दिए हैं। भारत या दूसरे देशों में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स नहीं खरीदने जाने की तीन बड़ी वजह है… भारत के हिसाब से मैचों की टाइमिंग सही नहींभारत में फुटबॉल फैंस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय की है। टूूर्नामेंट में खेने जाने वाले 104 मैचों में सिर्फ 14 ही रात 12 बजे से पहले शुरू होंगे। फाइनल सहित बाकी सभी मैच भारतीय समय के अनुसार रात 12 बजे बाद शुरू होंगे। 2022 वर्ल्ड कप में 64 में से 44 मैच रात मिडनाइट से पहले शुरू हुए थे।कंपनियों को डर है कि इतनी रात को बहुत कम लोग मैच देखेंगे। चीन और बाकी देशों के साथ भी यहीं दिक्कत है।2022 कतर वर्ल्ड कप के मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से पहले शुरु हुए थे। कंपटीशन की कमी और क्रिकेट का असर2022 वर्ल्ड कप के लिए वायकॉम18 ने लगभग 62 मिलियन डॉलर (450 से 500 करोड़ रुपए) दिए थे। वहीं सोनी ने 2014 और 2018 के लिए 90 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपए) खर्च किए थे। अब ब्रॉडकास्टिंग कंपनी वायकॉम18 और हॉटस्टार का विलय हो चुका है। इससे मार्केट में कंप्टीशन घटा है।दूसरी बड़ी वजह है कि फीफा, IPL खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही शुरु हो रहा है। भारत में कंपनियां अपना सारा मार्केटिंग बजट आईपीएल पर खर्च कर देती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स मार्केट में 89% पैसा क्रिकेट पर खर्च होता है, बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11% बचता है।IPL भारत में स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मार्केट है। भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं चलताभारत एक ऐसा बाजार है जहां लोग खेल देखने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते। यहां तक की फ्री में देखने के लिए थर्ड पार्टी एप तक इस्तेमाल करते हैं। 2022 वर्ल्ड कप जियोसिनेमा पर मुफ्त दिखाया गया था। फ्री की आदत की वजह से चैनलों के लिए पैसा वसूलना मुश्किल हो गया है। खरीददार नहीं मिला तो FIFA क्या करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘जियो-स्टार’ जानबूझकर आखिरी वक्त का इंतजार कर रहा है, ताकि FIFA राइट्स के रेट और कम कर दे। अगर कोई नहीं खरीदता, तो फीफा अपने खुद के ऐप ‘FIFA+’ पर मैचों को स्ट्रीम कर सकता है। एक आखिरी रास्ता यह है कि सरकार इसे ‘राष्ट्रीय महत्व’ का खेल घोषित कर दूरदर्शन पर दिखाए, लेकिन इसके लिए भी किसी प्राइवेट कंपनी का साथ होना जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News Sports FIFA World Cup 2026: India, China Yet To Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक फीफा वर्ल्ड कप 2026 11 जून से 26 जुलाई तक खेला जाएगा। भारत-चीन में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक किसी भी कंपनी ने नहीं खरीदे हैं। मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका में भी राइट्स के लिए कोई कंपनी इंटरनेस्ट नहीं दिखा रही। अगर यहीं स्थिति रही, तो दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट को नहीं देख पाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक क्यों नहीं खरीदे गए? फीफा ने शुरुआत में मैचों के राइट्स के लिए $100 मिलियन (948 करोड़ रुपए) की मांग की थी। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो इसका प्राइज घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 332 करोड़ रुपए) कर दिए हैं। भारत या दूसरे देशों में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स नहीं खरीदने जाने की तीन बड़ी वजह है… भारत के हिसाब से मैचों की टाइमिंग सही नहींभारत में फुटबॉल फैंस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय की है। टूूर्नामेंट में खेने जाने वाले 104 मैचों में सिर्फ 14 ही रात 12 बजे से पहले शुरू होंगे। फाइनल सहित बाकी सभी मैच भारतीय समय के अनुसार रात 12 बजे बाद शुरू होंगे। 2022 वर्ल्ड कप में 64 में से 44 मैच रात मिडनाइट से पहले शुरू हुए थे।कंपनियों को डर है कि इतनी रात को बहुत कम लोग मैच देखेंगे। चीन और बाकी देशों के साथ भी यहीं दिक्कत है।2022 कतर वर्ल्ड कप के मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से पहले शुरु हुए थे। कंपटीशन की कमी और क्रिकेट का असर2022 वर्ल्ड कप के लिए वायकॉम18 ने लगभग 62 मिलियन डॉलर (450 से 500 करोड़ रुपए) दिए थे। वहीं सोनी ने 2014 और 2018 के लिए 90 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपए) खर्च किए थे। अब ब्रॉडकास्टिंग कंपनी वायकॉम18 और हॉटस्टार का विलय हो चुका है। इससे मार्केट में कंप्टीशन घटा है।दूसरी बड़ी वजह है कि फीफा, IPL खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही शुरु हो रहा है। भारत में कंपनियां अपना सारा मार्केटिंग बजट आईपीएल पर खर्च कर देती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स मार्केट में 89% पैसा क्रिकेट पर खर्च होता है, बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11% बचता है।IPL भारत में स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मार्केट है। भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं चलताभारत एक ऐसा बाजार है जहां लोग खेल देखने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते। यहां तक की फ्री में देखने के लिए थर्ड पार्टी एप तक इस्तेमाल करते हैं। 2022 वर्ल्ड कप जियोसिनेमा पर मुफ्त दिखाया गया था। फ्री की आदत की वजह से चैनलों के लिए पैसा वसूलना मुश्किल हो गया है। खरीददार नहीं मिला तो FIFA क्या करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘जियो-स्टार’ जानबूझकर आखिरी वक्त का इंतजार कर रहा है, ताकि FIFA राइट्स के रेट और कम कर दे। अगर कोई नहीं खरीदता, तो फीफा अपने खुद के ऐप ‘FIFA+’ पर मैचों को स्ट्रीम कर सकता है। एक आखिरी रास्ता यह है कि सरकार इसे ‘राष्ट्रीय महत्व’ का खेल घोषित कर दूरदर्शन पर दिखाए, लेकिन इसके लिए भी किसी प्राइवेट कंपनी का साथ होना जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के चलते चर्चा में बनी हुई है। मितुल पटेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज वासुदेवा, निहारिका रायजादा, कुणाल भान और अपर्णा घोषाल अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में डायरेक्टर और कास्ट ने अपनी जर्नी, किरदारों और फिल्म के इमोशनल पहलुओं पर खुलकर बात की है। मितुल पटेल ने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें परेश रावल के एक इंटरव्यू से मिली, जिसमें जीवन और मृत्यु से जुड़े एक कठिन फैसले का जिक्र था। उनका कहना है कि यह फिल्म एक ऐसे विषय को सामने लाती है, जिस पर आमतौर पर लोग बात करने से बचते हैं। आपकी फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आप सबसे युवा डायरेक्टर के तौर पर सामने आए हैं इस पूरे सफर और रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स को आप कैसे देखते हैं? मितुल पटेल- यह मेरे लिए अभी भी थोड़ा अवास्तविक सा महसूस होता है। तीन साल की मेहनत के बाद जब फिल्म रिलीज हुई और लोगों तक पहुंची, तो एक अलग ही सुकून मिला। इस पूरी जर्नी ने मुझे बहुत ग्राउंडेड और हंबल बना दिया है। फेस्टिवल्स में हमें पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका था, लेकिन थिएटर में जब दर्शक फिल्म से जुड़ते हैं और इमोशनली रिएक्ट करते हैं, तो वो और भी खास होता है। मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देखें और इससे कनेक्ट करें क्योंकि यही इस कहानी की सबसे बड़ी जीत होगी। इस फिल्म का विषय काफी संवेदनशील और ‘ग्रे’ एरिया वाला है आपको इस कहानी का विचार कहां से आया और आपने इसे फिल्म में बदलने का फैसला क्यों किया? मितुल पटेल- करीब साढ़े तीन साल पहले मैंने परेश रावल का एक इंटरव्यू देखा था। उसमें उन्होंने अपनी मां के कोमा में होने और उस मुश्किल फैसले के बारे में बात की थी कि क्या हम किसी की जिंदगी बढ़ा रहे हैं या उसकी मौत को लंबा कर रहे हैं। उनकी एक बात मेरे अंदर रह गई कि उनकी मां ने शायद खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी ताकि उन्हें गिल्ट न रहे। मुझे लगा कि यह एक ऐसा विषय है जिसमें कोई एक सही जवाब नहीं है। हर इंसान अपने नजरिए से सही है। इसलिए मैंने सोचा कि इस फिल्म के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाए जाएं, ताकि दर्शक खुद को इन किरदारों में देखें और अपने जवाब खोजें। अपर्णा जी, आपने इस फिल्म में मां का किरदार निभाया है जो काफी इमोशनल और चुनौतीपूर्ण है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और इस विषय पर आपकी अपनी सोच क्या है? अपर्णा घोषाल- यह रोल सच में बहुत इमोशनल और अप-डाउन से भरा हुआ था। खासकर जब किरदार बेड पर है और उस स्थिति में है, तो उसमें खुद को डालना आसान नहीं था। यह एक ट्रॉमेटिक स्थिति है, और उसमें ढलने में थोड़ा समय लगा। जहां तक विषय की बात है, यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। ‘मौत’ एक सार्वभौमिक सच है, लेकिन हम उसे कैसे फेस करते हैं या कब स्वीकार करते हैं यह बहुत बड़ा सवाल है। यूथेनेशिया जैसा विषय आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही इस फिल्म की खूबसूरती है कि यह लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। राज वासुदेवा, इस फिल्म से जुड़ने की आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई और एक्टर व प्रोड्यूसर के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा? राज वासुदेवा- उस समय मैं हॉलैंड में था और मेरे परिवार में एक ऐसी घटना हुई थी जिससे मैं इस विषय से जुड़ पाया। मैं अच्छी स्क्रिप्ट्स की तलाश में था और तभी अजय ने मुझे इस फिल्म की एक लाइन भेजी। वह तुरंत मेरे दिल को छू गई क्योंकि मैं खुद उस स्थिति से जुड़ा हुआ था। फिर हम मिले और पहले इसे शॉर्ट फिल्म बनाने का सोचा, लेकिन कहानी इतनी बड़ी थी कि हमने इसे फीचर फिल्म में बदल दिया। एक्टर के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज इमोशनल सीन थे उनमें घुसना आसान था क्योंकि माहौल बहुत रियल था, लेकिन बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। निहारिका रायजादा, आपका किरदार ‘जिया’ कई रिश्तों और भावनाओं के बीच फंसा हुआ है इस किरदार को निभाने की प्रक्रिया कैसी रही और क्या आप इस कहानी से पर्सनली जुड़ पाईं? निहारिका रायजादा- मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन के जरिए चुना गया था। पर्सनल लेवल पर मैं इस विषय से जुड़ी हूं क्योंकि कोविड के दौरान मेरी नानी के साथ ऐसा अनुभव हुआ था। जब भी मैं इस फिल्म के बारे में बात करती हूं, वो यादें वापस आ जाती हैं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। कुणाल भान, आपके किरदार में एक हल्की-फुल्की शरारत के साथ गहराई भी दिखाई देती है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आप इससे कितना रिलेट कर पाए? कुणाल भान- जब मुझे इस फिल्म का ऑडिशन मिला, तभी मुझे लगा कि मुझे इसका हिस्सा बनना है क्योंकि यह एक बहुत जरूरी कहानी है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मेरा किरदार बाहर से थोड़ा शरारती और नटखट है, जैसा अक्सर छोटे भाई होते हैं, लेकिन उसके अंदर एक प्रैक्टिकल और इमोशनल साइड भी है। उसकी जर्नी काफी साइलेंट है, वो अपने भाव गानों और अपने तरीके से व्यक्त करता है। मैं पूरी तरह से इस स्थिति से रिलेट नहीं कर पाया, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते, मजाक और गलतफहमियां ये सब मेरे असली जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। हाल ही में देश में यूथेनेशिया से जुड़े फैसलों पर चर्चा बढ़ी है ऐसे समय में आपकी फिल्म का आना कितना मायने रखता है? मितुल पटेल- हमारी फिल्म तो पहले ही बन चुकी थी, लेकिन यह एक दिलचस्प संयोग है कि हाल ही में इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। मुझे लगता है कि इससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ेगी और वे इस विषय पर बात करने के लिए तैयार होंगे। हमारी कोशिश यही है कि लोग ‘डिग्निटी इन डाइंग’ और ‘एंड-ऑफ-लाइफ केयर’ जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत करें।

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के चलते चर्चा में बनी हुई है। मितुल पटेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज वासुदेवा, निहारिका रायजादा, कुणाल भान और अपर्णा घोषाल अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में डायरेक्टर और कास्ट ने अपनी जर्नी, किरदारों और फिल्म के इमोशनल पहलुओं पर खुलकर बात की है। मितुल पटेल ने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें परेश रावल के एक इंटरव्यू से मिली, जिसमें जीवन और मृत्यु से जुड़े एक कठिन फैसले का जिक्र था। उनका कहना है कि यह फिल्म एक ऐसे विषय को सामने लाती है, जिस पर आमतौर पर लोग बात करने से बचते हैं। आपकी फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आप सबसे युवा डायरेक्टर के तौर पर सामने आए हैं इस पूरे सफर और रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स को आप कैसे देखते हैं? मितुल पटेल- यह मेरे लिए अभी भी थोड़ा अवास्तविक सा महसूस होता है। तीन साल की मेहनत के बाद जब फिल्म रिलीज हुई और लोगों तक पहुंची, तो एक अलग ही सुकून मिला। इस पूरी जर्नी ने मुझे बहुत ग्राउंडेड और हंबल बना दिया है। फेस्टिवल्स में हमें पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका था, लेकिन थिएटर में जब दर्शक फिल्म से जुड़ते हैं और इमोशनली रिएक्ट करते हैं, तो वो और भी खास होता है। मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देखें और इससे कनेक्ट करें क्योंकि यही इस कहानी की सबसे बड़ी जीत होगी। इस फिल्म का विषय काफी संवेदनशील और ‘ग्रे’ एरिया वाला है आपको इस कहानी का विचार कहां से आया और आपने इसे फिल्म में बदलने का फैसला क्यों किया? मितुल पटेल- करीब साढ़े तीन साल पहले मैंने परेश रावल का एक इंटरव्यू देखा था। उसमें उन्होंने अपनी मां के कोमा में होने और उस मुश्किल फैसले के बारे में बात की थी कि क्या हम किसी की जिंदगी बढ़ा रहे हैं या उसकी मौत को लंबा कर रहे हैं। उनकी एक बात मेरे अंदर रह गई कि उनकी मां ने शायद खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी ताकि उन्हें गिल्ट न रहे। मुझे लगा कि यह एक ऐसा विषय है जिसमें कोई एक सही जवाब नहीं है। हर इंसान अपने नजरिए से सही है। इसलिए मैंने सोचा कि इस फिल्म के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाए जाएं, ताकि दर्शक खुद को इन किरदारों में देखें और अपने जवाब खोजें। अपर्णा जी, आपने इस फिल्म में मां का किरदार निभाया है जो काफी इमोशनल और चुनौतीपूर्ण है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और इस विषय पर आपकी अपनी सोच क्या है? अपर्णा घोषाल- यह रोल सच में बहुत इमोशनल और अप-डाउन से भरा हुआ था। खासकर जब किरदार बेड पर है और उस स्थिति में है, तो उसमें खुद को डालना आसान नहीं था। यह एक ट्रॉमेटिक स्थिति है, और उसमें ढलने में थोड़ा समय लगा। जहां तक विषय की बात है, यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। ‘मौत’ एक सार्वभौमिक सच है, लेकिन हम उसे कैसे फेस करते हैं या कब स्वीकार करते हैं यह बहुत बड़ा सवाल है। यूथेनेशिया जैसा विषय आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही इस फिल्म की खूबसूरती है कि यह लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। राज वासुदेवा, इस फिल्म से जुड़ने की आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई और एक्टर व प्रोड्यूसर के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा? राज वासुदेवा- उस समय मैं हॉलैंड में था और मेरे परिवार में एक ऐसी घटना हुई थी जिससे मैं इस विषय से जुड़ पाया। मैं अच्छी स्क्रिप्ट्स की तलाश में था और तभी अजय ने मुझे इस फिल्म की एक लाइन भेजी। वह तुरंत मेरे दिल को छू गई क्योंकि मैं खुद उस स्थिति से जुड़ा हुआ था। फिर हम मिले और पहले इसे शॉर्ट फिल्म बनाने का सोचा, लेकिन कहानी इतनी बड़ी थी कि हमने इसे फीचर फिल्म में बदल दिया। एक्टर के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज इमोशनल सीन थे उनमें घुसना आसान था क्योंकि माहौल बहुत रियल था, लेकिन बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। निहारिका रायजादा, आपका किरदार ‘जिया’ कई रिश्तों और भावनाओं के बीच फंसा हुआ है इस किरदार को निभाने की प्रक्रिया कैसी रही और क्या आप इस कहानी से पर्सनली जुड़ पाईं? निहारिका रायजादा- मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन के जरिए चुना गया था। पर्सनल लेवल पर मैं इस विषय से जुड़ी हूं क्योंकि कोविड के दौरान मेरी नानी के साथ ऐसा अनुभव हुआ था। जब भी मैं इस फिल्म के बारे में बात करती हूं, वो यादें वापस आ जाती हैं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। कुणाल भान, आपके किरदार में एक हल्की-फुल्की शरारत के साथ गहराई भी दिखाई देती है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आप इससे कितना रिलेट कर पाए? कुणाल भान- जब मुझे इस फिल्म का ऑडिशन मिला, तभी मुझे लगा कि मुझे इसका हिस्सा बनना है क्योंकि यह एक बहुत जरूरी कहानी है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मेरा किरदार बाहर से थोड़ा शरारती और नटखट है, जैसा अक्सर छोटे भाई होते हैं, लेकिन उसके अंदर एक प्रैक्टिकल और इमोशनल साइड भी है। उसकी जर्नी काफी साइलेंट है, वो अपने भाव गानों और अपने तरीके से व्यक्त करता है। मैं पूरी तरह से इस स्थिति से रिलेट नहीं कर पाया, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते, मजाक और गलतफहमियां ये सब मेरे असली जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। हाल ही में देश में यूथेनेशिया से जुड़े फैसलों पर चर्चा बढ़ी है ऐसे समय में आपकी फिल्म का आना कितना मायने रखता है? मितुल पटेल- हमारी फिल्म तो पहले ही बन चुकी थी, लेकिन यह एक दिलचस्प संयोग है कि हाल ही में इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। मुझे लगता है कि इससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ेगी और वे इस विषय पर बात करने के लिए तैयार होंगे। हमारी कोशिश यही है कि लोग ‘डिग्निटी इन डाइंग’ और ‘एंड-ऑफ-लाइफ केयर’ जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत करें।

Union Bank 1865 Jobs Recruitment 2026

Union Bank 1865 Jobs Recruitment 2026

5 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 1865 पदों पर भर्ती की, बिहार में हवलदार इंस्ट्रक्टर के 122 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने की। साथ में IIT भिलाई में नॉन टीचिंग के 47 पदों पर निकली ओपनिंग्स की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 1865 पदों पर भर्ती, आवेदन आज से शुरू यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। बैंक ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फीस जमा करने की लास्ट डेट भी 19 मई तय की गई है। स्टेट वाइस वैकेंसी डिटेल्स : स्टेट का नाम पदों की संख्या उत्तर प्रदेश 335 आंध्र प्रदेश 303 महाराष्ट्र 196 तेलंगाना 164 कर्नाटक 131 मध्य प्रदेश 116 तमिलनाडु 95 बिहार 60 गुजरात 58 ओडिशा 58 पश्चिम बंगाल 56 दिल्ली (NCT) 48 केरल 39 झारखंड 34 राजस्थान 32 हरियाणा 30 असम 29 छत्तीसगढ़ 25 पंजाब 21 उत्तराखंड 10 चंडीगढ़ 6 गोवा 5 दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव 2 जम्मू और कश्मीर 2 सिक्किम 2 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 1 हिमाचल प्रदेश 1 लद्दाख 1 लक्षद्वीप 1 मेघालय 1 नागालैंड 1 पुदुचेरी 1 त्रिपुरा 1 कुल 1865 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्रेजुएशन की डिग्री। ग्रेजुएशन का रिजल्ट 1 अप्रैल 2026 या उससे पहले जारी हो जाना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 20 साल अधिकतम : 28 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम लोकल लैंग्वेज टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम स्टाइपेंड : ग्रामीण या सेमी-अर्बन (अर्ध-शहरी) एरिया : 15,000 रुपए प्रतिमाह शहरी क्षेत्र में पोस्टिंग होने पर : 18,000 रुपए प्रतिमाह मेट्रो सिटी में पोस्टिंग होने पर : 20,000 रुपए प्रतिमाह फीस : कैटेगरी का नाम एग्जाम फीस इंटिमेशन फीस टोटल सामान्य/ओबीसी पुरुष 600 रुपए 200 रुपए 944 रुपए सामान्य/ओबीसी महिला 400 रुपए 200 रुपए 708 रुपए एससी/एसटी 0 200 रुपए 236 रुपए पीडब्ल्यूबीडी (PwBD) 0 200 रुपए 236 रुपए ट्रांसजेंडर 0 200 रुपए 236 रुपए जरूरी डॉक्यूमेंट्स : 10वीं की मार्कशीट 12वीं की मार्कशीट ग्रेजुएशन / डिग्री / डिप्लोमा उम्मीदवार का फोटो और सिग्नेचर जाति प्रमाण पत्र उम्मीदवार का मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी आधार कार्ड एग्जाम पैटर्न : सब्जेक्ट टोटल क्वेश्चन टोटल मार्क्स जनरल/फायनेंशियल अवेयरनेस 25 25 जनरल इंग्लिश 25 25 क्वांटिटेटिव एंड रीजनिंग एप्टीट्यूड 25 25 कंप्यूटर नॉलेज 25 25 टोटल 100 100 ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट unionbankofindia.co.in पर जाएं। होम पेज पर भर्ती से संबंधित लिंक पर क्लिक करें। Click here for New Registration पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें। अन्य जानकारी अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। फॉर्म का एक प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक बिहार में हवलदार इंस्ट्रक्टर के 122 पदों पर भर्ती, BPSSC ने बिहार पुलिस हवलदार इंस्ट्रक्टर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी का नाम पदों की संख्या सामान्य 48 एससी 19 एसटी 2 ओबीसी ईडब्ल्यूएस 12 ईबीसी 22 बीसी 15 बीसी – डब्ल्यू (पिछड़े वर्ग की महिलाएं) 4 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल बिहार सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट सैलरी : 25,500 – 81,100 रुपए प्रतिमाह फीस : सभी वर्ग के लिए : 100 रुपए एग्जाम पैटर्न : एग्जाम टाइप ऑब्जेक्टिव कुल प्रश्नों की संख्या 100 कुल अंक 100 (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का) ड्यूरेशन 02 घंटे न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स 30% एग्जाम सिलेबस : लैंग्वेज: हिन्दी, अंग्रेजी। मैथ्स: बेसिक एरिदमेटिक सोशल साइंस : हिस्ट्री, जियोग्राफी, सिविक्स एंड इकोनॉमिक्स साइंस: फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, बॉटनी जनरल नॉलेज: जनरल नॉलेज एंड करेंट अफेयर्स ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट btsc.bihar.gov.in पर जाएं। होमपेज पर दिए गए भर्ती विज्ञापन पर क्लिक करें। ई ऑनलाइन पर क्लिक करके फॉर्म भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म भरकर फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. आईआईटी भिलाई में 47 पदों पर भर्ती, एज लिमिट 40 साल आईआईटी भिलाई में नॉन टीचिंग के 47 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या असिस्टेंट रजिस्ट्रार 2 जूनियर सुपरिटेंडेंट 4 जूनियर असिस्टेंट 15 टेक्निकल ऑफिसर 2 असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर 1 मेडिकल ऑफिसर 1 जूनियर टेक्निकल सुपरिटेंडेंट 3 जूनियर स्पोर्ट्स ऑफिसर 1 जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट 14 जूनियर मैकेनिक 4 कुल पदों की संख्या 47 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : असिस्टेंट रजिस्ट्रार : मास्टर डिग्री, 8 साल का अनुभव जूनियर सुपरिटेंडेंट : मास्टर डिग्री, 3 साल का अनुभव जूनियर असिस्टेंट : बैचलर डिग्री टेक्निकल ऑफिसर : एम टेक, एमई, 5 साल का एक्सपीरियंस असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर : बीटेक, एमई, 7 साल का एक्सपीरियंस मेडिकल ऑफिसर : एमबीबीएस, 3 साल का एक्सपीरियंस जूनियर टेक्निकल सुपरिटेंडेंट : बैचलर डिग्री जूनियर स्पोर्ट्स ऑफिसर : बीपीएड के साथ एक्सपीरियंस जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट : इंजीनियरिंग की डिग्री जूनियर मैकेनिक : इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ एक्सपीरियंस एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल आयु में छूट नियमों के अनुसार दी जाएगी। फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (समूह ए) : 1000 रुपए एससी,एसटी,पीडब्ल्यूडी (समूह ए) : 500 रुपए सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (समूह बी, सी) : 500 रुपए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/दिव्यांग (समूह बी, सी) : 250 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम स्किल टेस्ट इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल टेस्ट सैलरी : पद के अनुसार, लेवल – 3 – लेवल – 10 के अनुसार एग्जाम सिलेबस : जनरल टॉपिक्स : जनरल नॉलेज रीजनिंग क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड इंग्लिश, हिंदी टेक्निकल टॉपिक्स : इंजीनियरिंग सब्जेक्ट आई, नेटवर्किंग मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल कॉन्सेप्ट्स कंप्यूटर नॉलेज ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.ibitf.co.in पर जाएं। अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके डिटेल्स दर्ज