मझौली में ऑटो-ई-रिक्शा की आमने-सामने से टक्कर:10 घायल; दो की हालत गंभीर, पंचायच कार्यालय के सामने हुआ हादसा

सीधी जिले के मझौली क्षेत्र में बुधवार शाम एक सड़क हादसे में 10 लोग घायल हो गए। जनपद पंचायत मझौली कार्यालय के सामने एक ऑटो और ई-रिक्शा की आमने-सामने की टक्कर में यह हादसा हुआ। घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, एक ऑटो मझौली की ओर जा रहा था, जबकि सामने से एक ई-रिक्शा आ रहा था। दोनों वाहन तेज रफ्तार में थे और अनियंत्रित होकर आपस में भिड़ गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें सवार सभी यात्री घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय निवासी महेंद्र साहू ने बताया कि तेज गति और साइड लेने के प्रयास में यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने मिलकर घायलों को तत्काल मझौली अस्पताल पहुंचाया, जिसके लिए निजी वाहनों और मोटरसाइकिलों का उपयोग किया गया। मझौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. संदीप शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में 10 घायलों को भर्ती किया गया है। उनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि पहचान स्पष्ट होने पर जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वहीं, थाना प्रभारी मझौली विशाल शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और वाहन चालकों का नियंत्रण खोना सामने आया है। घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। गंभीर रूप से घायल दो व्यक्तियों को जिला अस्पताल सीधी रेफर किया गया है।
पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026: मैट्रिज़ ने बीजेपी को स्पष्ट बढ़त की भविष्यवाणी की, टीएमसी को बड़ा झटका | भारत समाचार

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 20:00 IST मैट्रिज की ओर से जारी अनुमान के मुताबिक, बीजेपी को 146 से 161 सीटें मिलने का अनुमान है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दाएं) और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी (बाएं) (फाइल छवि: पीटीआई) एग्जिट पोल पश्चिम बंगाल 2026: पश्चिम बंगाल की लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर झुकती दिख रही है, एग्जिट पोल के अनुमानों से संकेत मिलता है कि भगवा खेमा राज्य में अगली सरकार बनाने के लिए मजबूत स्थिति में है। मैट्रिज की ओर से जारी अनुमान के मुताबिक, बीजेपी को 146 से 161 सीटें मिलने का अनुमान है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लगभग 120 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि अन्य पार्टियां लगभग 6 से 10 सीटें हासिल कर सकती हैं। वोटवाइब-सीएनएन न्यूज18 बीजेपी के पक्ष में है CNN-News18 के लिए VoteVibe द्वारा किए गए एग्जिट पोल (चरण 1 के लिए) में भी बीजेपी को आगे रखा गया है। अनुमानों के अनुसार, इस चरण में भाजपा को 152 सीटों में से 93 के मध्य बिंदु के साथ 88 से 98 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि टीएमसी+ गठबंधन को 51 से 61 सीटें (मध्य बिंदु 56) हासिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस 2 से 4 सीटों के साथ हाशिए पर रहने की संभावना है. अनुमानों से पता चलता है कि एससी, एसटी, ओबीसी और उच्च जाति के हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत समर्थन के कारण पहले चरण में भाजपा को संरचनात्मक लाभ है, और मालदा को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में वह आगे चल रही है, जहां टीएमसी ने अपने समेकित मुस्लिम मतदाता आधार के कारण प्रभुत्व बरकरार रखा है। दोनों सर्वेक्षण क्या संकेत देते हैं? दोनों एग्जिट पोल सर्वेक्षण 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए स्पष्ट लाभ की ओर इशारा करते हैं, हालांकि प्रभुत्व की अलग-अलग डिग्री के साथ। मैट्रिज़ प्रक्षेपण भाजपा के मजबूत राज्यव्यापी प्रदर्शन का सुझाव देता है, जिससे वह तृणमूल कांग्रेस पर आरामदायक सीट अंतर के साथ सरकार बनाने की दौड़ में काफी आगे है। इस बीच, वोटवाइब-सीएनएन न्यूज18 के अनुमान से पता चलता है कि भाजपा पहले चरण में अधिकांश सीटों पर आगे चल रही है, जिसे प्रमुख सामाजिक समूहों और अधिकांश क्षेत्रों में व्यापक समर्थन का समर्थन प्राप्त है। दोनों सर्वेक्षण भाजपा के पक्ष में गति का संकेत देते हैं; चरण-वार डेटा में कम अंतर यह भी उजागर करता है कि प्रतियोगिता प्रतिस्पर्धी बनी हुई है और अभी भी दूसरे चरण में बदलाव से प्रभावित हो सकती है। एग्ज़िट पोल मतदान के बाद के सर्वेक्षणों पर आधारित होते हैं और इन्हें अंतिम के बजाय सांकेतिक माना जाना चाहिए। वास्तविक फैसला तभी सामने आएगा जब वोटों की गिनती होगी. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 20:00 IST न्यूज़ इंडिया पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026: मैट्रीज़ ने बीजेपी को स्पष्ट बढ़त की भविष्यवाणी की, टीएमसी के लिए बड़ा झटका अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)मैट्रिज एग्जिट पोल(टी)वोटवाइब सीएनएन न्यूज18 सर्वे(टी)बीजेपी सीट अनुमान(टी)टीएमसी सीट अनुमान(टी)चरण 1 एग्जिट पोल
तुरई मूंग दाल सब्जी रेसिपी: घर पर बनाएं तुरई मूंग दाल की सब्जी, बच्चे भी शौक से खाएंगे; नोट बनाने की सबसे आसान रेसिपी

आवश्यक सामग्री: 2 तुरई, ½ कप मूंग दाल, 1 छोटा कटा प्याज, 1 टमाटर, 2-3 हरी मिर्च, 1 छोटा मोटा अदरक-लहसुन पेस्ट, ½ छोटा काला हल्दी पाउडर, 1 छोटा मोटा धनिया पाउडर, छवि: फ्रीपिक ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, नमक का स्वाद, 2 बड़ा चम्मच तेल, हरा धनिया। तुरई मूंग दाल की सब्जी एक स्टेक, टेस्टी और आसान डिश है, जिसे आप रोजाना खाने में शामिल कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले मूंग दाल को धोकर 15-20 मिनट के लिए डुबाकर, ताकि वो जल्दी पक जाए। कच्चे ही में तेल गर्म करें। इसमें जीरा शामिल है। छवि: फ्रीपिक जब जीरा चटकने लगे तो मशालें पेंसिलें रंगीन होने तक भुन लें। अब अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च का छोटा सा टुकड़ा। फिर टमाटर डेमोक्रेट नरोत्तम तक। छवि: फ्रीपिक अब हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक अच्छी तरह मिला लें। कटी हुई तुरई और भीगी हुई मूंग दाल। सबसे अच्छा दोस्त से करें। यह सब्जी गर्मियों में शरीर को ठंडक और पोषण दोनों प्रदान करती है। छवि: एआई थोड़ा सा पानी डालें, ऊपरकर मध्यम आंच पर 10-15 मिनट तक बिग बॉस, जब तक दाल और तुरई दोनों न हो जाएं। अंत में हरा धनिया मोनोलैस गैस बंद कर दिया। छवि: फ्रीपिक गर्म-गरम तुरई मूंग दाल की सब्जी को रोटी या चावल के साथ सर्व करें. फ़्लोरिडा तो ऊपर से छोटी-छोटी घी का स्वाद और बढ़ाया जा सकता है। अगर बच्चा सब्जी नहीं खाता है, तो इसे थोड़ा मैश करके पराठे के साथ लाएँ। छवि: एआई ज्यादा स्वाद के लिए इसमें थोड़ा सा घी या नींबू का रस भी डाल सकते हैं. कम दाम में बनी ये सब्जी पेट के लिए बहुत सस्ती है। छवि: एआई
दाद हो या फोड़े-फुंसी…तुरंत मिलेगा आराम, चुटकियों में हटेगा पुराने से पुराना मस्सा, आप भी नहीं जानते होंगे मदार के इतने फायदे

Last Updated:April 29, 2026, 19:48 IST Madar Benefits : हमारे गांवों और खेत-खलिहानों में आसानी से मिलने वाला मदार का पौधा (जिसे आक या अकौआ भी कहा जाता है) सिर्फ एक सामान्य झाड़ी नहीं. पुराने समय से ही आयुर्वेद में इसका उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. मदार का पौधा सूखी और बंजर जमीन पर भी उग जाता है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि मदार के पौधे में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इसका रस तेज और जहरीला हो सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से ही करना चाहिए. मदार का पौधा त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में लाभकारी है. आयुर्वेद में इसका उपयोग लंबे समय से दाद, खुजली और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता रहा है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि मदार के पौधे में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग इसके पत्तों और दूध (सफेद रस) का इस्तेमाल घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. खासतौर पर इसके दूध का उपयोग मस्से हटाने के लिए किया जाता है. अगर सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो यह धीरे-धीरे मस्सों को सुखा कर हटा देगा. हालांकि, इसका असर व्यक्ति की त्वचा और समस्या की गंभीरता पर भी निर्भर करता है. आयुर्वेद के अनुसार, मदार का पौधा जोड़ों के दर्द और सूजन में भी उपयोगी है. गांवों में लोग इसके पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांधते हैं, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिलती है. माना जाता है कि सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका उपयोग करने से फायदा मिल सकता है. हालांकि, इसका रस तेज और जहरीला हो सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गांवों में आज भी लोग मदार के पत्तों का उपयोग जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए करते हैं. इसके ताजे पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांध दिया जाता है. इससे सूजन कम होती है और दर्द में आराम मिलता है. खासतौर पर बुजुर्ग लोग इस घरेलू उपाय को काफी प्रभावी मानते हैं. यह तरीका सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण इलाकों में ज्यादा प्रचलित है. हालांकि, इसका उपयोग करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में मदार की जड़ और छाल का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने के लिए किया जाता है. माना जाता है कि सीमित मात्रा में इसका सही तरीके से इस्तेमाल गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है. ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग पारंपरिक ज्ञान के आधार पर इसका उपयोग करते हैं. हालांकि, यह एक शक्तिशाली पौधा है और इसका गलत सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए बिना किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. मदार का पौधा सिर्फ औषधीय गुणों के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी काफी महत्त्वपूर्ण है. हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा में इसके फूल चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि मदार के फूल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. गांवों में लोग इसे आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं और इसके पौधे को सम्मान देते हैं. कुछ पारंपरिक उपचारों में मदार के फूल और पत्तों का उपयोग दमा (अस्थमा) और खांसी जैसी समस्याओं में किया जाता है. गांवों में लोग इसके सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर सीमित मात्रा में इस्तेमाल करते हैं. माना जाता है कि यह श्वसन तंत्र को राहत देने और सांस लेने में आसानी पैदा करने में सहायक हो सकता है. हालांकि, यह उपाय पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है और हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसलिए इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि किसी तरह के दुष्प्रभाव से बचा जा सके. मदार के पौधे का उपयोग छोटे-मोटे घावों को भरने के लिए भी किया जाता है.इसके औषधीय गुण घाव को जल्दी भरने और संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, मदार का रस तेज और संभावित रूप से जहरीला होता है, जिससे कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी हो सकती है. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. डॉ. अभिषेक बताते हैं कि मदार के इतने फायदे होने के बावजूद इसका उपयोग बहुत सोच-समझकर करना चाहिए. इसके पौधे से निकलने वाला सफेद दूध जहरीला होता है, जो त्वचा पर जलन या एलर्जी पैदा कर सकता है. अगर यह आंखों में चला जाए तो गंभीर समस्या हो सकती है. इसलिए इसका इस्तेमाल करते समय हाथों में दस्ताने पहनना और आंखों से दूर रखना जरूरी है. First Published : April 29, 2026, 19:48 IST
Sonam Raghuvanshi Murder Case | Brother Govind Denies Accusations; Indore News

सोनम के भाई गोविंद रघुवंशी ने कहा- मुझे ऐसा लगता है कि अब सुसाइड कर लेना चाहिए। इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी मर्डर केस में आरोपी सोनम रघुवंशी को शिलॉन्ग कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वो मंगलवार शाम को जेल से रिहा हो गई। उसकी रिहाई को लेकर राजा के परिवार ने सोनम के परिजन पर उससे मिले होने का आरोप लगाए थे। . इन आरोपों पर सोनम के भाई गोविंद रघुवंशी ने कहा- सोनम को जमानत दिलाने में मेरी कोई भूमिका नहीं है। मुझे सोनम से कोई मतलब नहीं है। गोविंद ने कहा- अगर मैं कुछ कहूंगा तो क्या आप मेरी बातों पर विश्वास करेंगे? हमारे पिताजी शिलॉन्ग से निकल चुके हैं और इंदौर आ रहे हैं। कोर्ट ने कहा था कि सोनम की रिहाई के वक्त घर का कोई सदस्य मौजूद होना चाहिए। जिस दिन जमानत मिली, उसी दिन फोन आया था तो जाना पड़ा। गोविंद रघुवंशी ने कहा- हमारा परिवार बिखर गया है। हम सब तरफ से अकेले हो गए हैं। मैं फाइटिंग कर-करके जीने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन वो पॉसिबल नहीं दिख रहा है। मुझे किसी से मतलब नहीं है। मेरा पेशेंस खत्म हो रहा है धीरे-धीरे। मुझे सोनम के किए का कोई आइडिया नहीं गोविंद ने कहा- आज भी सरकारी वकील ही सोनम के केस को देख रहे हैं। हमने किसी प्राइवेट वकील से संपर्क नहीं किया। मुझे सौ-दो सौ प्राइवेट वकीलों के कॉल आए। बोल रहे हैं कि हम आपके लिए फ्री में केस लड़ लेंगे। लेकिन मैंने आज तक इंटरेस्ट ही नहीं लिया कि कोई प्राइवेट वकील इसमें इन्वॉल्व हो। मुझे सोनम के किए का कभी भी कोई आइडिया नहीं रहा है। पुलिस प्रोसेस में क्या-क्या हुआ, मैंने इसमें आज तक कोई इंटरेस्ट नहीं लिया। मैं ऑलरेडी व्यापार से, परिवार से परेशान हूं। मार्केट में भी नहीं निकल पाता हूं। कहां नया इंटरेस्ट लूं कि क्या चल रहा है? गोविंद रघुवंशी ने कहा- मुझे सोनम से कोई मतलब नहीं है। लगता है कि सुसाइड कर लेना चाहिए गोविंद ने कहा- आप सोशल मीडिया उठाकर देख लीजिए। यूट्यूब चैनल देख लीजिए, सब जगह मुझे गालियां पड़ रही हैं। मुझे ऐसा लगता है कि अब सुसाइड कर लेना चाहिए। मुझे सोनम से मिलने में कोई इंटरेस्ट नहीं है। मैं व्यापार करना चाहता हूं। मेरा बिजनेस बहुत अच्छा चल रहा था, जो बंद हो गया। मैं उसके लिए परेशान हूं। मेरी वाइफ है, दो बच्चे हैं, उन्हें भी देखना है। मैं ऑलरेडी घाटे में हूं, कर्ज में डूबा हूं। आज भी राजा के परिवार के साथ खड़ा हूं गोविंद ने कहा- मैं आज भी राजा के परिवार के साथ खड़ा हूं, लेकिन वो मेरे ऊपर आरोप लगाते जा रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोप कंटिन्यू रहे तो मेरे लिए पॉसिबल नहीं है कि मैं उनके साथ खड़ा रहूं। मैंने विपिन जी से सोनम को लेकर बोल दिया था कि साहब मैं इसलिए जा रहा हूं, क्योंकि मेरी कुछ बैंकिंग प्रोसेस है। राजा की मां से लिपट कर रोए थे गोविंद सोनम की गिरफ्तारी के बाद गोविंद रघुवंशी राजा के घर भी पहुंचे थे। वे राजा की मां उमा रघुवंशी के गले लगकर रोए थे। कहा था कि सोनम ने गलती की है, उसे सजा-ए-मौत मिलनी चाहिए। गोविंद ने कहा था- राजा के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए। राजा की मां और भाई ने लगाए थे आरोप दरअसल, राजा की मां उमा रघुवंशी ने बुधवार को कहा था- मेरे बच्चे की हत्या करके उसे जमानत कैसे मिल सकती है? सोनम के परिवार वालों ने अंदर ही अंदर कुछ खेल किया है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने भी आरोप लगाया था कि सोनम के परिवार, खासकर उसके भाई गोविंद का उसे पूरा समर्थन है। यदि सोनम वापस जेल जाती है तो गोविंद इसका बदला ले सकता है। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जेल से छूटकर भी इंदौर नहीं आ पाएगी सोनम रघुवंशी इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा मोड़ आया है। मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में हनीमून के दौरान पति राजा के मर्डर की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के करीब 320 दिन बाद जमानत मिल गई है। हालांकि, अदालत ने शर्त रखी है कि ट्रायल के दौरान सोनम को शिलॉन्ग में ही रहना होगा। पढ़ें पूरी खबर…
US-Israel Accused of Cloud Theft in Middle East; Drought Ends

30 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान युद्ध के बीच इराकी सांसद अब्दुल्ला अल-खैखानी ने अमेरिका और इजराइल पर मिडिल ईस्ट में बादल चुराने का आरोप लगाया है। अब्दुल्ला अल-खैखानी ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और इजराइल कई सालों से विमानों की मदद से मिडिल ईस्ट में बादलों को चुराते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण क्षेत्र में लंबे समय से सूखा पड़ रहा था। सांसद ने दावा किया कि अब अमेरिका और इजराइल ईरान के साथ युद्ध में मसरूफ हैं, इसलिए बारिश फिर से लौट आई है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर चर्चाएं और अफवाहें तेज हो गईं। मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी कोई तकनीक मौजूद नहीं है, जिससे बादलों की चोरी की जा सके। इराक मौसम विभाग के प्रवक्ता अम्र अल-जबीरी ने इस दावे को न वैज्ञानिक बताया और न ही तार्किक। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितंबर में ही अनुमान लगा लिया गया था कि 2026 इराक के लिए बारिश वाला साल रहेगा। विशेषज्ञों ने मौसम से जुड़े झूठे दावों और साजिश की थ्योरी से बचने की अपील की है। इराकी सासंद ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विमान क्षेत्र में बादलों को तोड़ते है जिसके कारण यहां सूखा पड़ता है। वायुमंडल में बदलाव कर सूखा पैदा करने का आरोप BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, खैखानी ने दावा किया कि “एटमॉस्फेरिक मॉडिफिकेशन वेपन” यानी ऐसे किसी हथियार का इस्तेमाल किया गया जिससे वायुमंडल में बदलाव कर जानबूझकर सूखा पैदा किया गया। इसी बीच, तुर्किये में भारी बारिश को भी कुछ लोग इसी साजिश से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि युद्ध के कारण अमेरिकी विमान तुर्किये के एयरस्पेस में नहीं जा पा रहे, इसलिए वहां लगातार बारिश हो रही है। यह पोस्ट एक मिलियन से ज्यादा बार देखा गया। कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि ईरान में दशकों से चल रहा सूखा, अमेरिका के ठिकानों पर हमले के पांच दिन के भीतर खत्म हो गया। एक्सपर्ट्स- मौसम को नियंत्रित करने वाली तकनीक मौजूद नहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे दावे भरोसे की कमी और जलवायु की समझ की कमी से पैदा होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम की दिशा या तीव्रता को सीधे नियंत्रित करने वाली कोई तकनीक मौजूद नहीं है। इसके उलट, मिडिल ईस्ट में बढ़ते चरम मौसम के पीछे जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र यूनिवर्सिटी के कावेह मदानी के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग को राजनीतिक हथियार की तरह पेश किया जा रहा है। क्लाउड सीडिंग में बादलों पर छोटे कैमिकल (जैसे सिल्वर आयोडाइड) कण डाले जाते हैं, ताकि बारिश हो सके। हालांकि वैज्ञानिक कहते हैं कि इसका असर बहुत सीमित होता है। यह मौजूदा बादलों से अधिकतम 15% तक ही बारिश बढ़ा सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि एक जगह क्लाउड सीडिंग करने से पड़ोसी इलाकों से बारिश छीन ली जाती है। खलीफा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डायना फ्रांसिस के मुताबिक, इसे ऐसे समझिए कि यह बादलों को हल्का सा धक्का देता है, मौसम को कंट्रोल नहीं करता। इस क्षेत्र में बारिश का पैटर्न अनियमित विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, हाल के दशकों में इस क्षेत्र का तापमान वैश्विक औसत से दोगुनी दर से बढ़ा है। इससे हीटवेव लंबी और ज्यादा तीव्र हो रही हैं और बारिश का पैटर्न भी अनियमित हो गया है। कुल बारिश कम हो रही है, लेकिन जब होती है तो बहुत तेज होती है, जिससे फ्लैश फ्लड या सूखे का खतरा बढ़ता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पानी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती है, जिससे इस तरह की अफवाहें तेजी से फैलती हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें… इजराइल में नेतन्याहू को हटाने एकजुट हुए दो पूर्व प्रधानमंत्री:अपनी पार्टी का विलय करेंगे, 2021 में बेनेट-लैपिड ने मिलकर बेंजामिन को हराया था इजराइल में दो पूर्व प्रधानमंत्रियों नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड ने मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनका मकसद लंबे समय से सत्ता में रहे नेतन्याहू को हटाना है। दोनों पहले भी 2021 में साथ आए थे और उन्होंने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को जोड़कर 12 साल से चली आ रही नेतन्याहू की सत्ता गिरा दी थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
असम पोल ऑफ एग्जिट पोल 2026: हिमंत की हैट्रिक! एनडीए के हाथों भारी नुकसान – बीजेपी को सहयोगियों की जरूरत नहीं | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 19:42 IST असम में रिकॉर्ड 85.9% मतदान – राज्य का अब तक का सबसे अधिक – बड़े पैमाने पर मतदाता जुटने का संकेत देता है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए समान रूप से मुश्किल हो सकता है। जलुकबारी पर सभी की निगाहें: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा अपने गृह क्षेत्र से फिर से चुनाव चाहते हैं क्योंकि एग्जिट पोल में बीजेपी की वापसी की भविष्यवाणी की गई है। (फाइल फोटो) असम पर एग्जिट पोल का फैसला लगभग सर्वसम्मत है। तीन प्रमुख सर्वेक्षणकर्ता – वोटवाइब फॉर सीएनएन-न्यूज18, जेवीसी, और चाणक्य स्ट्रैटेजीज – सभी ने 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को मजबूत बहुमत मिलने का अनुमान लगाया है, जिसमें सभी एजेंसियों को 88 से 101 सीटें मिलने का अनुमान है। वोटवाइब ने एनडीए को 90-100 सीटों पर, जेवीसी को 88-101 पर, और चाणक्य स्ट्रैटेजीज़ को 88-98 पर रखा है – सभी बहुमत के निशान 64 से ऊपर। इंडिया ब्लॉक को सभी चुनावों में 22-33 सीटों के बीच अनुमान लगाया गया है, जबकि एआईयूडीएफ को लगभग विनाश का सामना करना पड़ रहा है, तीन में से दो एजेंसियों ने इसे 0-3 सीटों पर पेश किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वोटवाइब ने भाजपा को 72-78 सीटों पर अकेले रहने का अनुमान लगाया है – जिससे यह संभावना बढ़ गई है कि हिमंत बिस्वा सरमा की पार्टी को इस समय सरकार बनाने के लिए अपने गठबंधन सहयोगियों की आवश्यकता नहीं होगी। इन अनुमानों की पृष्ठभूमि 9 अप्रैल को हुआ एक कड़ा मुकाबला है, जहां 126 निर्वाचन क्षेत्रों में 2.49 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने दो बिल्कुल विपरीत दृष्टिकोणों के बीच चुनाव किया। एक तरफ, हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए; दूसरी ओर, असम सोनमिलिटो मोर्चा – एक कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन, जिसका नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई कर रहे हैं। भाजपा के लिए, यह चुनाव एक दशक के शासन को मान्य करने और अभूतपूर्व लगातार तीसरा कार्यकाल हासिल करने के बारे में है। कांग्रेस के लिए, यह साबित करने के बारे में है कि असम बदलाव के लिए तैयार है। एनडीए की बढ़त क्षेत्रवार कैसे विभाजित होती है? वोटवाइब के क्षेत्रीय विभाजन से पता चलता है कि असम के पांच क्षेत्रों में भाजपा का प्रभुत्व लगभग पूरी तरह से है। ऊपरी असम की 35 सीटों में – पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ – एनडीए को 29-31 सीटें मिलने का अनुमान है, कांग्रेस को केवल 4-6 और एआईयूडीएफ को कोई सीट नहीं मिलेगी। उत्तरी असम भी ऐसी ही कहानी कहता है, जहां बीजेपी+ को 15 में से 12-14 सीटें मिलने का अनुमान है। मध्य असम की 19 सीटों में, एनडीए 13-15 पर आगे है, जबकि कांग्रेस 3-5 और एआईयूडीएफ 0-2 पर सीमित है। निचले असम की 44 सीटें – अपनी महत्वपूर्ण मुस्लिम आबादी को देखते हुए सबसे अधिक विवादित क्षेत्र – बीजेपी+ को 29-31, कांग्रेस+ को 12-14 और एआईयूडीएफ को 0-2 पर दिखाता है। यहां तक कि 13 सीटों वाले बंगाली बहुल क्षेत्र बराक घाटी में भी, बीजेपी+ कांग्रेस+ के 4-6 के मुकाबले 7-9 पर आगे है, एआईयूडीएफ को एक भी सीट नहीं मिलने का अनुमान है। बीजेपी को सत्ता में वापसी का भरोसा क्यों है? हिमंत बिस्वा सरमा के तहत, राज्य में राष्ट्रवाद, कल्याणकारी लोकलुभावनवाद और ताकतवर शासन पर केंद्रित राजनीति का विस्तार देखा गया है। समर्थकों के लिए, सरमा निर्णायक नेतृत्व और ढांचागत आधुनिकीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा कल्याण वितरण, सड़क और पुल निर्माण और हिंदू मतदाताओं के बीच पहचान मजबूत करने पर बहुत अधिक निर्भर रही है। अभियान को चलाने वाले मुख्य मुद्दों में पहचान की राजनीति, कल्याण वितरण और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। भाजपा-अकेले बहुमत सरमा के लिए एक व्यक्तिगत पुष्टि होगी – और एक संकेत है कि उनकी राजनीति के ब्रांड ने 2021 के स्वीप से भी कहीं अधिक जनादेश दिया है, जब एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं और भाजपा के पास 60 सीटें थीं। मतदाता किस बात को लेकर सबसे अधिक चिंतित हैं? सब कुछ बीजेपी के पक्ष में नहीं है. चाय श्रमिक कल्याण, भूमि अधिकार, युवा बेरोजगारी, बाढ़ भेद्यता और प्रवासन बहस जैसे मुद्दों ने कई विधानसभा सीटों पर मतदान व्यवहार को प्रभावित किया है। आलोचकों ने गुवाहाटी में शहरी बाढ़ और “सिंडिकेट राज” – रेत, कोयला और निर्माण सामग्री को नियंत्रित करने वाले अनौपचारिक एकाधिकार – के आरोपों को भी लगातार चिंता के रूप में चिह्नित किया है, जिसे विपक्ष ने पूरे अभियान में जारी रखा है। मुस्लिम मतदाताओं ने कैसे मतदान किया है, और क्या इससे कोई फर्क पड़ता है? यह शायद चुनाव की सबसे संरचनात्मक रूप से परिणामी कहानी है। असम की मुस्लिम आबादी – राज्य की लगभग एक तिहाई, जो धुबरी, बारपेटा, नागांव और मोरीगांव जैसे जिलों में केंद्रित है – ने कभी भी एकीकृत ब्लॉक के रूप में मतदान नहीं किया है, जो ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच विभाजित है। 2023 के परिसीमन अभ्यास ने इस समीकरण को महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया। प्रमुख चुनाव विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने असम परिसीमन को “सांप्रदायिक भेदभाव” के रूप में वर्णित किया, यह तर्क देते हुए कि इसने हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं को विभाजित करके मुस्लिम चुनावी प्रभाव को कमजोर कर दिया। इस बार कांग्रेस द्वारा एआईयूडीएफ से खुद को दूर करने के कारण, भाजपा विरोधी मुस्लिम वोट और अधिक विभाजित होता दिख रहा है – और एआईयूडीएफ के लगभग पतन के एग्जिट पोल अनुमानों से पता चलता है कि जिस पैमाने पर विपक्ष को जरूरत थी, उस पैमाने पर एकजुटता नहीं हो पाई। 2026 की तुलना 2021 से कैसे की जाती है? 2021 में, औपचारिक कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन ने मुस्लिम वोटों के एक बड़े हिस्से को मजबूत किया, फिर भी बीजेपी ने मजबूत हिंदू एकजुटता के माध्यम से सत्ता बरकरार रखी। इस बार, कांग्रेस ने बीजेपी के सांप्रदायिक ढांचे से बचने की उम्मीद में खुद को एआईयूडीएफ से दूर कर लिया – लेकिन इससे बीजेपी विरोधी वोटों के और अधिक बिखरने का खतरा है। यदि विपक्ष 2021 में संयुक्त मोर्चे के साथ भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं कर सका, तो 2026 में विभाजित मोर्चे ने कार्य को काफी कठिन
भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

भोपाल के एमपी नगर जोन-2 के सागर प्लाजा के लिफ्ट बुधवार की शाम को तीसरी मंजिल से गिर गई। इस हादसे में लिफ्ट में सवार सात लोगों को चोट आई हैं। सभी पत्रकार थे और अपने एक पत्रकार साथी से मिलकर लौट रहे थे। घायलों को नर्मदा और सेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे की सूचना एपमी नगर पुलिस को दे दी गई है। जानकारी के मुताबिक, पत्रकार रिजवान अहमद सिद्दीकी, सुशील त्रिपाठी, दिलीप भदोरिया, अनीता चौबे, प्रगति श्रीवास्तव, सादिया खान एक पत्रकार साथी से मिलने सागर प्लाजा स्थित ऑफिस में गए थे। वहां से लौटते समय तीसरी फ्लोर से लिफ्ट नीचे जा गिरी। हादसे में रिजवान अहमद सिद्दीकी और सुशील त्रिपाठी के पांव में गंभीर चोट है। सिद्दीकी का नर्मदा जबकि सुशील का सेज अस्पताल में इलाज चल रहा है।
भारतीय साड़ी में नजर आईं रिहाना:मुंबई ट्रिप के बाद ग्रीन-पिंक साड़ी और हैवी ज्वेलरी में दिए पोज

पॉप सिंगर रिहाना ने अपने मुंबई दौरे के बाद भारतीय साड़ी में फोटो शूट कराया है। रिहाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे ग्रीन और पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई हैं। इस देसी लुक साथ उन्होंने डायमंड और एमराल्ड (पन्ना) की हैवी ज्वेलरी भी पहनी है। वीडियो में रिहाना साड़ी पहनकर खुशी से पोज देती नजर आ रही हैं। उन्होंने अपनी ज्वेलरी को भी वीडियो में खास तौर पर फ्लॉन्ट किया है। रिहाना के इस लुक पर फैंस सोशल मीडिया पर खूब कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा पारंपरिक साड़ी और ज्वेलरी में रिहाना को देखना किसी सपने जैसा है, वे वाकई काफी सुंदर लग रही हैं। अंबानी के घर भी पहुंची थीं रिहाना रिहाना हाल ही में अपने ब्यूटी ब्रांड के एक प्रमोशनल इवेंट के सिलसिले में मुंबई आई थीं। यहां उन्होंने एक पॉप-अप स्टोर लॉन्च और एक प्राइवेट इवेंट में हिस्सा लिया। रिहाना प्राइवेट जेट से मुंबई पहुंचीं। इस दौरान वे रविवार को मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ भी गईं। अंबानी परिवार ने रिहाना का स्वागत बिल्कुल देसी अंदाज में किया। रिहाना ने परिवार के साथ खास लंच किया और घर के सदस्यों के साथ डांस करती भी नजर आईं। 2024 में पहली बार आई थीं भारत यह रिहाना का भारत का दूसरा दौरा था। इससे पहले वे साल 2024 में एक बड़ी शादी (अंबानी प्री-वेडिंग) में परफॉर्म करने के लिए जामनगर आई थीं। उस वक्त उन्होंने अपने पहले भारतीय परफॉर्मेंस से काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस दौरान रिहाना ने वादा किया था कि वे जल्द ही दोबारा भारत आएंगी और उन्होंने अपना यह वादा पूरा भी किया।
भारतीय साड़ी में नजर आईं पॉप सिंगर रिहाना:मुंबई ट्रिप के बाद ग्रीन-पिंक साड़ी और हैवी ज्वेलरी में दिए पोज

पॉप सिंगर रिहाना ने अपने मुंबई दौरे के बाद भारतीय साड़ी में फोटो शूट कराया है। रिहाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे ग्रीन और पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई हैं। इस देसी लुक साथ उन्होंने डायमंड और एमराल्ड (पन्ना) की हैवी ज्वेलरी भी पहनी है। वीडियो में रिहाना साड़ी पहनकर खुशी से पोज देती नजर आ रही हैं। उन्होंने अपनी ज्वेलरी को भी वीडियो में खास तौर पर फ्लॉन्ट किया है। रिहाना के इस लुक पर फैंस सोशल मीडिया पर खूब कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा पारंपरिक साड़ी और ज्वेलरी में रिहाना को देखना किसी सपने जैसा है, वे वाकई काफी सुंदर लग रही हैं। अंबानी के घर भी पहुंची थीं रिहाना रिहाना हाल ही में अपने ब्यूटी ब्रांड के एक प्रमोशनल इवेंट के सिलसिले में मुंबई आई थीं। यहां उन्होंने एक पॉप-अप स्टोर लॉन्च और एक प्राइवेट इवेंट में हिस्सा लिया। रिहाना प्राइवेट जेट से मुंबई पहुंचीं। इस दौरान वे रविवार को मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ भी गईं। अंबानी परिवार ने रिहाना का स्वागत बिल्कुल देसी अंदाज में किया। रिहाना ने परिवार के साथ खास लंच किया और घर के सदस्यों के साथ डांस करती भी नजर आईं। 2024 में पहली बार आई थीं भारत यह रिहाना का भारत का दूसरा दौरा था। इससे पहले वे साल 2024 में एक बड़ी शादी (अंबानी प्री-वेडिंग) में परफॉर्म करने के लिए जामनगर आई थीं। उस वक्त उन्होंने अपने पहले भारतीय परफॉर्मेंस से काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस दौरान रिहाना ने वादा किया था कि वे जल्द ही दोबारा भारत आएंगी और उन्होंने अपना यह वादा पूरा भी किया।








