गुणवत्ता में कमी पर मंत्री सारंग सख्त:स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स निर्माण में लापरवाही पर अधिकारियों को लगाई फटकार

बरखेड़ा नाथू स्थित अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी सामने आने पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने एमपीआरडीसी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। हैंडओवर प्रक्रिया पर सख्ती, बिना सत्यापन नहीं होगा स्वीकार मंत्री ने कॉम्पलेक्स के हैंडओवर-टेकओवर प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना तकनीकी वेरिफिकेशन के किसी भी निर्माण को स्वीकार न किया जाए। साथ ही, मरम्मत योग्य कार्यों का विस्तृत फ्लो चार्ट तैयार कर चरणबद्ध योजना बनाई जाए, ताकि काम में गति और स्पष्टता बनी रहे। मूलभूत सुविधाओं के साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर समीक्षा बैठक में मंत्री ने पानी, बिजली, स्वच्छता, पार्किंग और आईटी सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासनिक भवन, सर्वर रूम, आईटी रूम और आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिससे कॉम्पलेक्स का संचालन व्यवस्थित हो सके। थर्ड पार्टी ऑडिट से होगी निष्पक्ष जांच निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मंत्री सारंग ने थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा होगी और परियोजना की विश्वसनीयता बनी रहेगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने कॉम्पलेक्स में सोलर एनर्जी के उपयोग को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के अन्य खेल परिसरों के लिए भी सोलर व्यवस्था की व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्माण पर जोर मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरे स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें और मध्यप्रदेश खेलों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सके। इसके अलावा उन्होंने परिसर में स्पष्ट साइनेज व्यवस्था विकसित करने के लिए अलग प्रोजेक्ट प्लान तैयार करने को कहा। खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधा के लिए उपयुक्त स्थान पर कैफेटेरिया बनाने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा विद्युत व्यवस्था, फायर सेफ्टी, हॉर्टिकल्चर, अतिरिक्त प्रवेश द्वार और बाउंड्री वॉल के साथ समानांतर सड़क निर्माण के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाने को कहा गया। पार्किंग और सुरक्षा पर विशेष फोकस बैठक में बताया गया कि सभी ब्लॉकों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग विकसित की जा रही है। अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप उपकरण लगाए जा रहे हैं और अतिरिक्त प्रवेश द्वार से आपात सेवाओं की पहुंच आसान होगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी एजेंसी को भुगतान से पहले खेल विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होगा और उपकरणों की खरीदी से पहले विभागीय अनुमोदन जरूरी रहेगा।
पेरी-पेरी पराठा: पेरी-पेरी आलू का पराठा, चीज के साथ स्वाद हो दोगुना; स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है

पेरी पेरी आलू पराठा रेसिपी: भारतीय रसोई में अक्सर ‘आलू का पराठा’ होता है। लेकिन अब समय के साथ-साथ जायके के शौकीनों ने पहाथे में भी कुछ बदलाव दिए हैं। आजकल सोशल मीडिया और फूड ब्लॉग्स पर ‘पेरी-पेरी आलू पराठा’ का जबरदस्त ट्रेंड चल रहा है। अगर आप भी पारंपरिक स्वाद से हटकर कुछ चटपटा और ‘चीजी’ का स्वाद लेना चाहते हैं, तो यह रेसिपी खास आपके लिए है। पेरी-पेरी सुविधा साधारण पैराथे से कितनी भिन्न है? आमतौर पर आलू के पराठे में धनिया, मिर्च और गरम मसाला का उपयोग होता है। हालाँकि, अफ़्रीकी-पुर्तागली संस्करण में पेरी-पेरी का तड़का लगाया जाता है। इसमें मौजूद पनीर और मोजेरेला चीजें एक मखमली मजबूती (बनावट) देती हैं, जो हर बच्चे में एक अलग ही अनुभव कराता है। 1. चटपटी स्टफिंग बनाना एक बड़े प्लास्टिक में आलू लेकर उन्हें अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें कद्दूकस किया हुआ पनीर, चीज, कटा हुआ प्याज और मिर्च डाला जाता है। इसके बाद पेरी-पेरी मसाला और बाकी मसाला मिश्रण को तैयार कर लें। ध्यान रहे कि चीज पिज्जा से निकला और कद्दू बनाया गया ताकि वह अंदर अच्छी तरह से सेट हो जाए। 2. आटा और बेलने का तरीका इकाइयों के विश्लेषण में प्रभाव नमक और तेल स्थिरांक नर गुंथ लें। अब आटे की एक छोटी लोई लेकर उसे प्रभाव बेलें और बीच में आलू-चीज़ का मिश्रण। इसे चारों तरफ से बंद करें हाथों से बेलें ताकि पराठा फटे नहीं। 3. क्रिस्पी फिनिश गरम तवे पर पराठे को डालें और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सेकें। आखिरी में बटर या देसी घी इसे सुनहरा और कुरकुरा होने तक खराब कर देता है। इसे आप पुदीने की बची हुई चिप्स, मीठी दही या बच्चों के पसंदीदा टमाटर केचप के साथ बना सकते हैं। यह खाने में तो स्वादिष्ट है ही साथ ही, इसमें मौजूद व्यंजन और टुकड़ों के आटे की वजह से यह एक प्रयोगशाला भी बनी हुई है। (टैग्सटूट्रांसलेट)पेरी पेरी आलू पराठा(टी)मसालेदार नाश्ता रेसिपी(टी)पनीर पनीर पराठा(टी)स्वस्थ भारतीय नाश्ता(टी)आसान पराठा रेसिपी
डिप्टी सीएम बोले:पत्रकारों की मांगों पर सरकार करेगी निर्णय:पटवारी बोले: यह सरकार नहीं सुनेगी तो हमारी पार्टी समाधान करेगी

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा राजधानी के समन्वय भवन में एक विशाल प्रांतीय सम्मेलन और रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने उप-मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पत्रकार सुरक्षा कानून को तत्काल लागू करने की मांग की। डिप्टी सीएम बोले- समस्याओं का होगा समाधान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पत्रकार सुरक्षा कानून पर अब तक कमेटी न बन पाने के विषय में मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया। शुक्ल ने कहा, “लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पत्रकारिता का सशक्त होना जरूरी है। आपकी मांगों पर चरणबद्ध तरीके से विचार कर उन्हें पूरा किया जाएगा।” पटवारी बोले- सरकार नहीं सुनेगी तो हमारी पार्टी समाधान करेगी कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पत्रकारों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने देश भर में पत्रकारों पर हो रहे हमलों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि आज पत्रकारों को सुरक्षा की मांग करनी पड़ रही है, जो चिंताजनक है। पटवारी ने तंज कसते हुए कहा कि यदि वर्तमान सरकार मांगें पूरी नहीं करती है, तो भविष्य में उनकी पार्टी इन्हें प्राथमिकता से पूरा करेगी। लिफ्ट हादसे के बावजूद डटे रहे पत्रकार कार्यक्रम के दौरान एक लिफ्ट गिरने की घटना भी हुई, जिसमें आयोजन समिति के संयोजक रिजवान अहमद सिद्दीकी सहित कुछ अन्य साथी घायल हुए। इसके बावजूद, घायलों ने कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई। मध्या एडवरटाइजिंग के सुशील अग्रवाल ने घायल पत्रकारों के उपचार का जिम्मा उठाया।
सराफा व्यापारियों ने बरगी हादसे के मृतकों को दी श्रद्धांजलि:जबलपुर के सराफा चौक पर हुई सभा; क्रूज स्टाफ पर कार्रवाई की मांग

जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के बाद शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है। सराफा एसोसिएशन जबलपुर ने सराफा चौक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस दौरान मृतकों को मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सभा में सराफा परिवार से जुड़े प्रमुख व्यवसायी प्रकाश जोहरी, नीतू सोनी और लापता विराज सोनी को याद किया गया। व्यापारियों ने बताया कि हादसे के दौरान नीतू सोनी ने अन्य लोगों को लाइफ जैकेट पहनाने में मदद की, लेकिन खुद जैकेट नहीं पहन सकीं, जिससे उनकी जान चली गई। इस घटना को लेकर व्यापारियों में गहरा आक्रोश देखा गया। क्रूज के जिम्मेदार कर्मचारियों पर हो कार्रवाई सराफा एसोसिएशन ने प्रशासन से क्रूज के जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि हादसे के समय क्रूज स्टाफ ने यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी की और अपनी जान बचाने की कोशिश करते हुए पर्यटकों को संकट में छोड़ दिया। ये रहे मौजूद श्रद्धांजलि सभा में मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राजा सराफ, जबलपुर अध्यक्ष नवीन सराफ, पूर्व अध्यक्ष सुरेश सराफ, अजय वक्तावर, मंत्री अमित अग्रवाल, उपाध्यक्ष महेंद्र ओसवाल, सहसचिव केके सुहाने सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में सर्राफा व्यापारियों ने एकत्र होकर मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना प्रकट की और हादसे के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई।
मां का दूध ही नहीं है काफी! जानिए न्यू बॉर्न बेबी को कब, क्या और कैसे खिलाएं वरना रुक सकती है ग्रोथ

शिशु के जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक मां का दूध ही सबसे संपूर्ण आहार माना जाता है. इसमें बच्चे के लिए जरूरी पोषण, पानी और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व मौजूद होते हैं. इसलिए इस समय तक बच्चे को अलग से पानी, शहद या कोई ठोस चीज देने की जरूरत नहीं होती. लेकिन छह महीने पूरे होने के बाद बच्चे की शारीरिक और मानसिक जरूरतें बढ़ने लगती हैं, इसलिए सिर्फ दूध पर्याप्त नहीं रहता. ऐसे समय में पूरक आहार यानी ऊपरी भोजन शुरू करना जरूरी हो जाता है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसका शरीर तेजी से विकास करता है. इस दौरान दिमाग, हड्डियों और मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा, आयरन, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत होती है. यही कारण है कि छह महीने की उम्र के बाद मां के दूध के साथ-साथ ठोस या अर्ध-ठोस आहार शुरू करने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर पूरक आहार शुरू करना बच्चे की ग्रोथ और इम्यूनिटी के लिए बेहद जरूरी होता है. शुरुआत किन चीजों से करेंजब बच्चा छह महीने का हो जाए, तो दिन में 2 से 3 बार हल्का और मुलायम खाना देना शुरू किया जा सकता है. शुरुआत ऐसे भोजन से करनी चाहिए जो आसानी से पच जाए. जैसे दलिया, पतली खिचड़ी, मूंग दाल, उबला और मैश किया हुआ आलू, गाजर, लौकी या मसला हुआ केला और सेब. ध्यान रखें कि खाना बहुत ज्यादा पतला न हो, बल्कि थोड़ा गाढ़ा और मुलायम हो ताकि बच्चा उसे निगल सके और धीरे-धीरे खाने की आदत सीख सके. नया खाना कैसे शुरू करेंशुरुआत में एक समय पर सिर्फ एक नई चीज ही बच्चे को दें. फिर उसे लगातार 3 से 4 दिन तक देखें कि कहीं बच्चे को एलर्जी, गैस, उल्टी या पेट की परेशानी तो नहीं हो रही. अगर सब ठीक रहे तो धीरे-धीरे दूसरी चीजें शामिल की जा सकती हैं. इस दौरान मां का दूध पहले की तरह जारी रखना चाहिए, क्योंकि यह अभी भी बच्चे के लिए जरूरी पोषण का बड़ा स्रोत होता है. 9 से 12 महीने के बच्चे का भोजनजब बच्चा 9 से 12 महीने का हो जाता है, तब वह हाथ से चीजें पकड़ने और खाने की कोशिश करने लगता है. इस उम्र में उसे थोड़ी विविधता वाला भोजन दिया जा सकता है. नरम फल, छोटे टुकड़ों में कटी उबली सब्जियां, दही, खिचड़ी और हल्का घर का खाना दिया जा सकता है. इस समय दिन में 3 बार मुख्य भोजन और 1 से 2 बार हल्का नाश्ता देना सही माना जाता है. 12 से 24 महीने तक क्या खिलाएंएक साल के बाद बच्चा धीरे-धीरे परिवार के खाने में शामिल होने लगता है. बस उसका खाना नरम, कम मसालेदार और छोटे टुकड़ों में होना चाहिए. इस उम्र में 3 मुख्य भोजन और 2 हल्के स्नैक्स दिए जा सकते हैं. साथ ही बच्चे को खुद खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि उसकी आदत और मोटर स्किल्स विकसित हों. किन चीजों से रखें दूरीबच्चे के भोजन में रोज अलग-अलग फूड ग्रुप शामिल होने चाहिए, जैसे अनाज, दालें, फल, सब्जियां, दूध और प्रोटीन युक्त चीजें. वहीं ज्यादा चीनी, नमक, पैकेज्ड जूस, चॉकलेट, तली चीजें और जंक फूड से बचाना चाहिए. सही समय पर सही भोजन देने से बच्चे का विकास बेहतर होता है और वह स्वस्थ आदतें सीखता है.
BPSC AEDO Exam Cancelled | Bihar Cheating Scandal; Bluetooth Use

BPSC ने शुक्रवार को सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा रद्द कर दी है। एग्जाम में गड़बड़ी और कदाचार को लेकर 6 जिलों में 8 FIR दर्ज हुई थी। जिसके बाद आयोग ने इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। . इसके साथ ही आयोग ने 32 अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित भी कर दिया गया है, जो अब आयोग की किसी भी आगामी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इस परीक्षा के लिए 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरा था। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई केंद्रों पर ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करने की कोशिशों को नाकाम किया। जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों और अभ्यर्थियों ने मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने का षड्यंत्र रचा था। प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोरी अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। नालंदा पुलिस ने एग्जाम के दौरान कैंडिडेट को गिरफ्तार किया। इनको आंसर लिखवाया जा रहा था। कौन-कौन सी परीक्षाएं हुईं रद्द सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 87/2025): 14 अप्रैल से 21 अप्रैल तक आयोजित सभी 9 पालियों की परीक्षा रद्द। सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 108/2025): 23 अप्रैल को आयोजित लिखित परीक्षा रद्द। आयोग जल्द ही इन परीक्षाओं के आयोजन की नई तिथियों की घोषणा करेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। 3 चरणों में हुई थी परीक्षा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले AEDO की वेकैंसी बिहार में पहली बार आई। परीक्षा कंडक्ट कराने की जिम्मेवारी BPSC को दी गई। फॉर्म भरने के लिए 100 रुपए की फी थी। कुल 935 पदों के लिए करीब 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भर दिया। इस कारण BPSC ने तीन चरणों में परीक्षा ली। पहले चरण की परीक्षा 14-15 अप्रैल को हुई। दूसरे चरण की परीक्षा 17-18 अप्रैल को हुई। तीसरे चरण की परीक्षा 20-21 अप्रैल को हुई। इसके लिए सभी 38 जिलों में 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। पेपर लीक से समझौता नहीं बता दें 3 चरणों में हुई इस परीक्षा की शुरुआत के ठीक एक दिन पहले मुंगेर DM को मिली एक सूचना ने मास्टर साहब के सारे मास्टर प्लान पर पानी फेर दिया। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में 6 जिलों में 8 FIR दर्ज की गई। मामले में 36 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। सबसे अधिक 22 गिरफ्तारी मुंगेर से हुई है। 12 दिन बाद भी EOU को ‘मास्टर’ नहीं मिल पाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान प्रश्न-पत्र लीक होने या सोशल मीडिया पर वायरल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। न ही किसी प्रश्न-पत्र की कोई सीरीज बाहर मिली है। इसके बावजूद, सोशल मीडिया और समाचारों में आई खबरों और कुछ केंद्रों पर हुई गड़बड़ी की कोशिशों को देखते हुए आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है। आयोग का मानना है कि परीक्षा की गरिमा और ईमानदारी से बढ़कर कुछ भी नहीं है। सवालों का जवाब देने के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप पुलिस ने 20 साल के सुजल के मोबाइल फोन को खंगाला और उससे पूछताछ की। तब पहली बार उसने ‘मास्टर’ का नाम लिया। सुजल ने पुलिस को बताया- ‘मास्टर’ ने ‘एम मुंगेर’ नाम से एक वॉट्सएप ग्रुप में उसके मोबाइल नंबर को जोड़ा था। इसी ग्रुप में उन 20 कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड को भेजा गया था, जिसकी कॉपी पुलिस ने उसके जब्त बैग से बरामद की थी। इन सभी कैंडिडेट्स का परीक्षा केंद्र मुंगेर ही था। सेटिंग के तहत परीक्षा के दौरान सभी कैंडिडेट्स को सारे सवालों का सही जवाब बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर उपलब्ध कराने वाले थे। ये पहला वॉट्एप ग्रुप था। ‘मास्टर’ ने ‘मुंगेर सॉल्यूशन’ नाम से दूसरा व्हाट्सएप ग्रुप भी बना रखा था। इस ग्रुप में ‘मास्टर’ खुद सवालों का सही जवाब भेजने वाला था। जवाब मिलने के बाद हमारे लोग उसे कैंडिडेट तक पहुंचाते। इसके एवज में सुजल और उसके मददगार साथियों को पैसा मिलने वाला था।
नारियल लस्सी रेसिपी: गर्मी में सादी नहीं, घर पर नारियल की लस्सी, कैसे होगी शरीर में ठंडक-कूल; विधि नोट करें

1 मई 2026 को 21:17 IST पर अपडेट किया गया गर्मियों के लिए नारियाल की लस्सी रेसिपी: गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक देने वाली की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में अगर आप रोज वही सादी लस्सी पी-पीकर बोर हो गए हैं, तो इस बार नारियल की लस्सी जैसा कुछ नया सितारा लें। इसका सिर्फ स्वाद ही अलग और मजेदार होता है, बल्कि शरीर को तुरंत ठंडक भी मिलती है। नारियल में मौजूद पोषक तत्व और दही की ठंडक मिलकर इसे एक प्रत्यक्ष समर ड्रिंक बनाते हैं। तो जानिए इसे घर पर बनाने की विधि सबसे आसान। अनुसरण करना : सामग्री:1 कप ताजा दही, ½ कप नारियल का दूध, 2-3 चीनी चीनी, ½ कप ठंडा पानी या बर्फ के टुकड़े, 1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर, तुरंत से कटे हुए स्वादिष्ट नुस्खे छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले दही को अच्छे से फेंट लें ताकि कोई पेट न रहे। अब नारियल का दूध डालें और गुड से मिक्स करें। इसके बाद चीनी, इलायची पाउडर और ठंडा पानी या बर्फ डालें। छवि: फ्रीपिक सभी को प्लास्टर में 1-2 मिनट तक ब्लेंड करें। तैयार लस्सी को बोतलों में डालकर ऊपर से ग्लूकोस से सजाएं। यह लस्सी शरीर को तुरंत ठंडक प्रदान करती है और आहार से बचाती है। छवि: एआई इसके अलावा पाचन के लिए हानिकारक होता है। साथ ही, ऊर्जावान स्तर को बनाया गया है। अधिक मात्रा में क्रीमी स्वाद के लिए जेनरेटर दही का प्रयोग करें। यदि आप कार्मिक चाहते हैं तो चीनी की जगह शहद डाल सकते हैं। छवि: फ्रीपिक इसे और ताज़ा बनाने के लिए ऊपर से थोड़ा सा गुलाब जल भी डाल सकते हैं. इसका स्वाद और ठंडक दोनों आपको ताज़ा महसूस कराएंगे। छवि: फ्रीपिक गर्मियों में जब भी कुछ ठंडा और स्टेक ड्रिंक का मन करे, तो बाजार के ड्रिंक घर की बनी यह कोको लस्सी जरूर ट्राई कर सकते हैं। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित : समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 1 मई 2026 को 21:16 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)नारियल की लस्सी रेसिपी(टी)नारियल की लस्सी(टी)नारियल लस्सी(टी)नारियल लस्सी रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए नारियल लस्सी रेसिपी(टी)लस्सी रेसिपी(टी)नारियल रेसिपी(टी)दही रेसिपी(टी)दही रेसिपी(टी)नारियल लस्सी बनाने की विधि
टीएमसी ने ईवीएम स्ट्रांगरूम में सीसीटीवी निगरानी को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की, 4 मांगें गिनाईं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 21:15 IST टीएमसी ने कई स्ट्रॉन्गरूम में “अत्यधिक संदिग्ध” सीसीटीवी निगरानी पर कड़ी आपत्ति जताई, जहां ईवीएम और वीवीपैट संग्रहीत हैं, और ईसीआई को दोषी ठहराया। ममता बनर्जी की टीएमसी ने चुनाव आयोग पर वोटों में हेराफेरी का आरोप लगाया है. (पीटीआई) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल के सामने कई स्ट्रॉन्गरूम में “अत्यधिक संदिग्ध” सीसीटीवी निगरानी पर कड़ी आपत्ति जताई, जहां ईवीएम और वीवीपैट रखे गए हैं। पार्टी ने एक्स पर कहा, “यह @ECISVEEP के अपने दिशानिर्देशों का प्रत्यक्ष और जानबूझकर उल्लंघन है, जो स्पष्ट रूप से निरंतर रिकॉर्डिंग और अधिकृत पार्टी प्रतिनिधियों के लिए 24×7 निर्बाध सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य करता है।” ऐसा तब हुआ जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने दूसरे चरण के मतदान के बाद चुनाव सामग्री के प्रबंधन में बड़ी खामियों का आरोप लगाया। पार्टी ने बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) और चुनाव आयोग पर मिलकर काम करने का आरोप लगाया. आज हमारा प्रतिनिधिमंडल मिला @सीईओवेस्टबंगाल और कई स्ट्रांग रूमों में जहां मतदान वाली ईवीएम और वीवीपीएटी संग्रहीत हैं, सीसीटीवी निगरानी में बार-बार और अत्यधिक संदिग्ध व्यवधानों के संबंध में कड़ी आपत्ति दर्ज की। यह प्रत्यक्ष और जानबूझकर किया गया उल्लंघन है। @ECISVEEP अपना… pic.twitter.com/AfVKrtSHR6 – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 1 मई 2026 टीएमसी की चार मांगों की सूची टीएमसी ने चुनाव आयोग से चार मांगों की एक सूची तैयार की, जो हैं: राज्य के प्रत्येक स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी की खराबी, व्यवधान, या डाउनटाइम के सभी मामलों की पूरी रिपोर्ट तुरंत संकलित करें। व्यवधान की सभी अवधियों को दर्शाने वाले विस्तृत लॉग के साथ पूर्ण, असंपादित सीसीटीवी रिकॉर्डिंग प्रदान करें। वास्तविक समय की निगरानी और हर चूक के लिए जवाबदेही के साथ सभी सीसीटीवी प्रणालियों को पूर्ण, निर्बाध कार्यक्षमता में बहाल करें। ईसीआई प्रोटोकॉल के अनुसार अधिकृत प्रतिनिधियों के लिए निगरानी फ़ीड तक निरंतर और अप्रतिबंधित पहुंच सुनिश्चित करें। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया टीएमसी ने ईवीएम स्ट्रांगरूम में सीसीटीवी निगरानी को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की, 4 मांगें गिनाईं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)तृणमूल कांग्रेस का विरोध(टी)सीसीटीवी निगरानी चूक(टी)ईवीएम वीवीपैट सुरक्षा(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी
गढ़ीमलहरा बस स्टैंड पर ट्रक ने पिता-पुत्र को कुचला:इलाज कराने आए थे; तेज रफ्तार बना हादसे का कारण

छतरपुर जिले के गढ़ीमलहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बस स्टैंड पर शुक्रवार को एक अनियंत्रित ट्रक ने बाइक सवार पिता-पुत्र को बेरहमी से कुचल दिया। हादसे में तीन वर्षीय मासूम और उसके पिता की मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गढ़ीमलहरा थाना क्षेत्र के ग्राम गनेशपुरा निवासी 35 वर्षीय जितेंद्र यादव अपने 3 साल के पुत्र तनिश यादव को इलाज दिलाने के लिए बाइक से गढ़ीमलहरा आए थे। जैसे ही वे गढ़ीमलहरा बस स्टैंड के पास पहुंचे, तभी एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी और उन्हें कुचल दिया। हादसे के तत्काल बाद राहगीरों की मदद से दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत 3 वर्षीय तनिश को मृत घोषित कर दिया। वहीं, गंभीर रूप से घायल जितेंद्र सिंह यादव को प्राथमिक उपचार के बाद ट्रोमा वार्ड में भर्ती किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और ट्रक को जब्त कर लिया है। जिला अस्पताल में दोनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
AIIMS की रिसर्च ने बढ़ाई माता-पिता की टेंशन! 2 साल से पहले बच्चे को मोबाइल दिया तो हो सकता है बड़ा खतरा

देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS New Delhi में बच्चों की सेहत को लेकर हुई एक रिसर्च ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को जरूरत से ज्यादा मोबाइल या स्क्रीन दिखाना उनके मानसिक और व्यवहारिक विकास पर असर डाल सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती उम्र में अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर बच्चों में भाषा विकास, सामाजिक व्यवहार और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसी वजह से छोटे बच्चों के लिए मोबाइल फोन को मनोरंजन का साधन बनाने से बचने की सलाह दी जा रही है. विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के बाद पहले दो साल बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए बेहद अहम होते हैं. इस समय बच्चा अपने आसपास के माहौल, माता-पिता के चेहरे के भाव, आवाज, स्पर्श और बातचीत से सीखता है. अगर इस उम्र में बच्चे का अधिक समय मोबाइल स्क्रीन के सामने बीतता है, तो उसकी सीखने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ मामलों में ऐसे बच्चों में बोलने में देरी, आंखों से कम संपर्क करना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, सामाजिक गतिविधियों में रुचि कम होना और दोहराव वाली हरकतें देखने को मिल सकती हैं. ये लक्षण ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि सिर्फ मोबाइल देखने से ऑटिज्म होना सीधे तौर पर तय नहीं माना जाता. जन्म लेने के बाद इतने महीने तक दूर रखें फोनबाल तंत्रिका विज्ञान विभाग की प्रोफेसर शेफाली गुलाटी ने माता-पिता को स्क्रीन टाइम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉक्टरों ने बताया कि, जन्म से 18 महीने तक बच्चों को मोबाइल, टैबलेट या टीवी स्क्रीन से यथासंभव दूर रखना चाहिए. 18 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए भी स्क्रीन टाइम सीमित और निगरानी में होना चाहिए. अगर स्क्रीन दिखाई भी जाए तो शैक्षिक और इंटरैक्टिव कंटेंट हो, और माता-पिता की मौजूदगी में हो. बच्चे को अकेले मोबाइल देकर चुप कराने की आदत लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है. बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होने से क्या होता है?डॉक्टरों का कहना है कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होता है, उनमें शारीरिक और मानसिक गतिविधियां ज्यादा होती हैं. ऐसे बच्चे खेलते हैं, दौड़ते हैं, चीजों को छूकर सीखते हैं, लोगों से बातचीत करते हैं और नई आवाजों व चेहरों को पहचानते हैं. यही गतिविधियां दिमागी विकास को मजबूत बनाती हैं. इसलिए बच्चों को मोबाइल देने के बजाय कहानी सुनाना, रंग-बिरंगे खिलौनों से खेलाना, आउटडोर एक्टिविटी कराना और परिवार के साथ समय बिताना ज्यादा फायदेमंद है. धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करेंअगर बच्चा पहले से मोबाइल का आदी हो चुका है, तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि अचानक मोबाइल पूरी तरह बंद न करें. धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करें और उसकी जगह दूसरे रोचक विकल्प दें. जैसे ड्राइंग, ब्लॉक्स, किताबें, म्यूजिक, पार्क में खेलना या परिवार के साथ बातचीत. अचानक मोबाइल छीनने पर बच्चे में चिड़चिड़ापन, रोना या गुस्सा बढ़ सकता है. कब करना पड़ सकता है न्यूरोडेवलपमेंट से संपर्क?विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर बच्चे में बोलने में देरी, सामाजिक व्यवहार में बदलाव, आंख मिलाने में कमी, या समझने की क्षमता कमजोर लगे तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या न्यूरोडेवलपमेंट विशेषज्ञ से संपर्क करें. शुरुआती पहचान होने पर थेरेपी, बिहेवियर सपोर्ट और मेडिकल देखभाल से काफी सुधार संभव है. माता-पिता की जागरूकता और सही समय पर कदम उठाना ही बच्चों के बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी है.








