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3 सदस्य, 3 पार्टियाँ, 3 जीत: तमिलनाडु, पुडुचेरी में लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के परिवार की बड़ी जीत | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 12:38 IST मार्टिन परिवार, जो अपने बड़े लॉटरी व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध मार्टिन ग्रुप चलाता है, हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दाता रहा है। इन तीन सदस्यों में सबसे ताकतवर आधव अर्जुन रेड्डी हैं, जो विजय के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंटों में से एक हैं। विधानसभा चुनाव 2026: भारत के लॉटरी किंग के नाम से मशहूर व्यवसायी सैंटियागो मार्टिन के परिवार के तीन सदस्यों ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव जीता है, जो विभिन्न दलों में जीत के साथ एक दुर्लभ राजनीतिक क्षण है। मार्टिन की पत्नी, दामाद और बेटे, लीमा रोज़ मार्टिन, आधव अर्जुन और जोस चार्ल्स मार्टिन ने क्रमशः तीन अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ा और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। लीमा ने एआईएडीएमके के टिकट पर तमिलनाडु के लालगुडी निर्वाचन क्षेत्र से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,500 से अधिक मतों से हराया। परिणाम महत्वपूर्ण है क्योंकि लालगुडी, जिसे लंबे समय तक द्रमुक का गढ़ माना जाता था, दो दशकों से अधिक समय के बाद अन्नाद्रमुक में स्थानांतरित हो गया। मार्टिन के दामाद और अभिनेता विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के वरिष्ठ नेता आधव अर्जुन ने 17,000 से अधिक वोटों से जीतकर विकीवक्कम निर्वाचन क्षेत्र से निर्णायक जीत हासिल की। उनकी जीत नवगठित टीवीके के बढ़ते राजनीतिक पदचिह्न को जोड़ती है। पुडुचेरी में सैंटियागो मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन ने कामराज नगर सीट 10,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीती। उन्होंने अपनी ही पार्टी लाचिया जननायक काची (एलजेके) के टिकट पर चुनाव लड़ा, जिसने चुनावी शुरुआत की और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ गठबंधन किया। विधानसभा चुनाव परिणाम 2026 अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने पहली बार दमदार प्रदर्शन किया है और 108 सीटों के साथ स्पष्ट रूप से सबसे आगे बनकर उभरी है। द्रमुक 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है, उसके बाद अन्नाद्रमुक 47 सीटों पर है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई है। यह फैसला राज्य में एक तीव्र राजनीतिक मंथन का प्रतीक है, जिसमें टीवीके ने अपने पहले चुनावी प्रदर्शन में खुद को प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया है। इस बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने पुडुचेरी में सत्ता बरकरार रखी। 30 सदस्यीय पुडुचेरी विधानसभा में एनआर कांग्रेस ने 12 सीटें और भाजपा ने चार सीटें जीतीं। मार्टिन परिवार के बारे में सब कुछ मार्टिन परिवार, जो अपने बड़े लॉटरी व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध मार्टिन ग्रुप चलाता है, हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दाता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, समूह ने चुनावी बांड के माध्यम से विभिन्न राजनीतिक दलों को लगभग 1,300 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। जबकि समूह को अतीत में प्रवर्तन एजेंसियों की जांच का भी सामना करना पड़ा है, पार्टी लाइनों से परे परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ चुनावी सफलता तमिलनाडु और पुडुचेरी के राजनीतिक परिदृश्य में इसकी बढ़ती उपस्थिति को उजागर करती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया 3 सदस्य, 3 पार्टियां, 3 जीत: तमिलनाडु, पुडुचेरी में लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के परिवार की बड़ी जीत अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सैंटियागो मार्टिन परिवार चुनाव जीतता है(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम(टी)पुडुचेरी विधानसभा चुनाव(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम टीवीके(टी)एआईएडीएमके बनाम डीएमके(टी)भारत के लॉटरी किंग(टी)राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए

सोना आज ₹543 सस्ता, ₹1.47 लाख पर आया:चांदी ₹618 गिरकर ₹2.39 लाख पर आई; यह इस साल 9 हजार रुपए महंगी हुई

सोना आज ₹543 सस्ता, ₹1.47 लाख पर आया:चांदी ₹618 गिरकर ₹2.39 लाख पर आई; यह इस साल 9 हजार रुपए महंगी हुई

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 5 मई (मंगलवार) को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 543 रुपए गिरकर 1.47 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं एक किलो चांदी 618 रुपए गिरकर 2.39 लाख रुपए पर आ गई है। सोमवार को इसकी कीमत 2.40 लाख रुपए प्रति किलो थी। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 5 मई, 2026 सोना इस साल 14 हजार और चांदी 9 हजार रुपए महंगी 2026 में सोना अब तक 14 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.47 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इस साल चांदी 9 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब बढ़कर 2.39 लाख रुपए पर पहुंच गई है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

सोना आज ₹543 सस्ता, ₹1.47 लाख पर आया:चांदी ₹618 गिरकर ₹2.39 लाख पर आई; यह इस साल 9 हजार रुपए महंगी हुई

सोना आज ₹543 सस्ता, ₹1.47 लाख पर आया:चांदी ₹618 गिरकर ₹2.39 लाख पर आई; यह इस साल 9 हजार रुपए महंगी हुई

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 5 मई (मंगलवार) को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 543 रुपए गिरकर 1.47 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं एक किलो चांदी 618 रुपए गिरकर 2.39 लाख रुपए पर आ गई है। सोमवार को इसकी कीमत 2.40 लाख रुपए प्रति किलो थी। सोना इस साल 14 हजार और चांदी 9 हजार रुपए महंगी 2026 में सोना अब तक 14 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.47 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इस साल चांदी 9 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब बढ़कर 2.39 लाख रुपए पर पहुंच गई है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

क्या है हंता वायरस जिसने ली 3 लोगों की जान? जानें इस घातक वायरस के लक्षण और बचाव से जुड़ी जानकारी

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Hantavirus Outbreak Symptoms Causes : दुनिया अभी महामारियों के दौर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि एक और वायरस ‘हंता वायरस’ (Hantavirus) ने दस्तक दे दी है. हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर इस वायरस के कारण 3 लोगों की मौत की खबर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अलर्ट कर दिया है. यह वायरस चूहों से फैलता है और इसकी मृत्यु दर काफी अधिक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया ‘डिजीज आउटब्रेक न्यूज’ और विशेषज्ञों के अनुसार, अर्जेंटीना से दक्षिण अफ्रीका जा रहे क्रूज जहाज ‘MV Hondius’ पर यह संक्रमण फैला, जिसमें 3 यात्रियों की जान चली गई. तो चलिए जानते हैं कि यह वायरस क्‍या है, कितना खतरनाक है और बचाव का क्‍या तरीका है.  हंता वायरस असल में क्या है?जवाब: हंता वायरस विषाणुओं का एक परिवार है जो मुख्य रूप से चूहों (Rodents) के जरिए फैलता है. यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे डरावना बनाती है. यह इंसान के फेफड़ों (HPS) या किडनी (HFRS) पर सीधा हमला करता है. फेफड़ों में संक्रमण होने पर सांस लेना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे मरीज की मौत हो सकती है. यह चूहों से इंसानों तक कैसे पहुँचता है?जवाब: यह वायरस हवा के जरिए फैलता है, जिसे ‘एरोसोल’ (Aerosolization) प्रक्रिया कहते हैं. जब संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार सूख जाती है और धूल के कणों में मिल जाती है, तो वह हवा में तैरने लगती है. जब कोई व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वायरस सीधे उसके फेफड़ों में चला जाता है. इसके अलावा, संक्रमित सतह को छूने और फिर मुँह या नाक पर हाथ लगाने से भी यह फैल सकता है. क्या यह कोरोना की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है?जवाब: राहत की बात यह है कि हंता वायरस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. यह केवल चूहों के सीधे संपर्क या उनके दूषित वातावरण में रहने से होता है. हालांकि, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले ‘एंडिस’ (Andes) स्ट्रेन में इंसान से इंसान में फैलने के कुछ दुर्लभ मामले देखे गए हैं, लेकिन फिलहाल के मामले चूहों से ही संबंधित हैं. हंता वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?जवाब: इसके लक्षण शुरू में एक सामान्य फ्लू (Flu) की तरह दिखते हैं, जो भ्रम पैदा कर सकते हैं: -तेज बुखार और कंपकंपी (Chills).-हाथों-पैरों और पीठ की मांसपेशियों में तेज दर्द.-सिरदर्द, चक्कर आना और थकान.-पेट में दर्द, उल्टी या दस्त (डायरिया). सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. संक्रमण गंभीर होने पर क्या होता है?जवाब: संक्रमण के 4 से 10 दिनों के बाद ‘हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ (HPS) के लक्षण दिखते हैं: -फेफड़ों में पानी भर जाना.-सांस लेने में भारी तकलीफ (ऐसा महसूस होना जैसे छाती पर कोई बैठा हो).-खांसी और लो ब्लड प्रेशर.-किडनी का काम बंद करना (HFRS की स्थिति में). इसका मृत्यु दर (Death Rate) कितना है?जवाब: हंता वायरस को बहुत घातक माना जाता है. CDC (Centers for Disease Control) के अनुसार, हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) में मृत्यु दर 38% से 40% के बीच है. यानी, अगर  10 लोग इससे गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तो उनमें से 4 की जान जाने का खतरा रहता है. क्या इसका कोई इलाज या वैक्सीन है?जवाब: फिलहाल हंता वायरस का कोई विशेष इलाज, दवा (Specific drug) या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है. इलाज पूरी तरह से ‘सपोर्टिव केयर’ पर निर्भर करता है. मरीज को अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेटर या ‘ECMO’ मशीन पर रखा जाता है ताकि उसके फेफड़ों को काम करने में मदद मिल सके. जितनी जल्दी मेडिकल हेल्प मिलेगी, बचने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी. चूहों से खुद को कैसे बचाएं?जवाब: बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. घर की दीवारों या दरवाजों के छेदों को बंद करें ताकि चूहे अंदर न आ सकें. रसोई और खाने के सामान को हमेशा ढककर या एयरटाइट डिब्बों में रखें. अगर आप किसी पुराने कमरे या कबाड़खाने की सफाई कर रहे हैं, तो N95 मास्क और दस्ताने जरूर पहनें. चूहों के मल पर झाड़ू लगाने की जगह, उस पर ब्लीच या कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि धूल न उड़े. मास्क और सैनिटाइज़र कितने प्रभावी हैं?जवाब: हंता वायरस की बाहरी परत (Lipid envelope) बहुत कमजोर होती है. इसे साबुन, डिटर्जेंट या अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र से आसानी से खत्म किया जा सकता है. मास्क पहनने से हवा में मौजूद संक्रमित धूल के कण फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाते. डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?जवाब: अगर  आप किसी ऐसी जगह गए हैं जहाँ चूहे थे और उसके कुछ दिनों बाद आपको बुखार, शरीर में दर्द और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं और उन्हें चूहों के संपर्क वाली बात जरूर बताएं. क्या पालतू जानवरों से भी हंता वायरस फैलने का खतरा हैजवाब: राहत की बात यह है कि कुत्ते, बिल्ली या गाय-भैंस जैसे पालतू जानवर हंता वायरस से संक्रमित होकर इसे इंसानों में नहीं फैलाते. यह वायरस केवल विशिष्ट प्रजाति के जंगली चूहों (जैसे डियर माइस या राइस रैट) में ही पाया जाता है. हालांकि, बिल्लियाँ या कुत्ते शिकार के दौरान संक्रमित चूहों को घर के अंदर ला सकते हैं, जिससे घर के सदस्यों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अपने पालतू जानवरों की स्वच्छता का भी ध्यान रखें. क्या हंता वायरस ‘फूड पॉइजनिंग’ जैसा हो सकता है?जवाब: हंता वायरस के शुरुआती लक्षण जैसे पेट दर्द, उल्टी और दस्त अक्सर लोगों को ‘फूड पॉइजनिंग’ का भ्रम देते हैं. लेकिन अंतर यह है कि फूड पॉइजनिंग आमतौर पर कुछ घंटों या 1-2 दिन में ठीक हो जाती है, जबकि हंता वायरस के मामले में पेट की समस्याओं के साथ-साथ तेज बुखार बना रहता है और कुछ दिनों बाद सांस लेने में गंभीर तकलीफ शुरू हो जाती है. अगर पेट खराब होने के साथ सांस फूलने लगे, तो इसे साधारण फूड पॉइजनिंग समझने की गलती न करें. याद रखें कि हंता वायरस बेशक एक खतरनाक बीमारी है, लेकिन यह कोरोना की तरह पूरी दुनिया में एक साथ नहीं फैलती. यह उन्हीं इलाकों में खतरा पैदा करती

बीजेपी ने खत्म की क्षेत्रीय राजनीति: बीजेपी ने बनाई गठबंधन दी क्षत्रपों की राजनीति! तीन राज्यों में कमल खिलने से क्षेत्रीय प्रतियोगिता कैसे डूब गई?

बीजेपी ने खत्म की क्षेत्रीय राजनीति: बीजेपी ने बनाई गठबंधन दी क्षत्रपों की राजनीति! तीन राज्यों में कमल खिलने से क्षेत्रीय प्रतियोगिता कैसे डूब गई?

भारत की राजनीति में आज एक क्रांतिकारी बदलाव आया है जब 2026 के चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इन पुरातात्विक ने क्षेत्रीय आश्रमों के गढ़ विच्छेद के विवरण और स्पष्ट संकेत दिए कि अब ‘क्षत्रपों की प्रतिष्ठा’ का दौर समाप्त हो रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह साफ हो गया है कि अब पारंपरिक विचारधारा के बजाय विकास और सुशासन को तरजीह दे रहे हैं। इससे क्षेत्रीय क्षत्रपों की राजनीतिक पकड़ खराब हो रही है। पश्चिम बंगाल: ‘दीदी’ के 15 साल के शासन का अंत और भाजपा का ऐतिहासिक उदय पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने वह कर दिखाया जो कभी-कभी प्रभावशाली लगता था. ममता बनर्जी और उनकी सैद्धांतिक कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासन का अंत करते हुए बीजेपी ने 294 से 202 पर जीत हासिल की। बीजेपी ने 148 बहुमत के आंकड़ों को आसानी से पार कर लिया. टीएमसी 71 पार्टी में शामिल हुई। यह बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक परिवर्तन का प्रतीक बना। चुनाव प्रक्रिया से सूचीबद्ध एक महत्वपूर्ण आधार यह रहा कि राज्य में लगभग 27 लाख लाख के नाम वाले ढांचे से मनमाने ढंग से हटा दिया गया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और इसे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर गंभीर चोट के रूप में देखा गया। आलोचकों का मानना ​​​​है कि इस कदम ने विश्वनाथ को प्रभावित किया और यह आगे भी चिंता का विषय बना रहा। बीजेपी की इस जीत ने एक ऐसे राज्य में पार्टी की राह को मजबूत किया जो लंबे समय से अपने विस्तार का विरोध कर रही थी. पार्टी को इस चुनाव में 2021 में 38% वोट शेयर के साथ 45% वोट शेयर मिले, जबकि टीएमसी को 48% वोट शेयर के साथ 40.94% वोट मिले। इससे साफ है कि अब ‘दीदी’ की पसंद और उनके नेतृत्व वाली टीएमसी का आकर्षण आकर्षण बना हुआ है। असम: लगातार तीसरी बार बीजेपी का परचम और कांग्रेस का सफाया असम में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने लगातार तीन बार सरकार बनाकर इतिहास रचा। 126 कोलोराडो विधानसभा में एनडीए ने रिकॉर्ड 102वीं बार दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। बीजेपी ने 90 प्राइमरी सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उसके सहयोगी दल- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) ने 10-10 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह पहली बार है जब बीजेपी ने राज्य में अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। इससे पहले 2021 और 2016 में उन्हें 60-60 मंजिल मिली थी। दूसरी ओर, कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और केवल 23 सीटों पर आगे चल रही थी। एआईयूडीएफ और राइजोर दल जैसे सहयोगी आश्रम को 2-2 सीटें मिलीं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी जलुकबारी सीट पर 40,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की, जबकि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई अपनी जोरदार सीट से हार गए। बीजेपी की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय आश्रमों की पकड़ अब इतनी मजबूत नहीं रही और राष्ट्रीय पार्टियों पर भरोसा जताया जा रहा है। पुडुचेरी: एनडीए की वापसी और रंगासामी का बढ़ा कद पुडुचेरी में भी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने सत्ता में वापसी की। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी की अखिल भारतीय एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) ने 12 की बढ़त बनाई, जबकि बीजेपी को 4 पर जीत मिली। एनडीए ने कुल 30 लॉज़िट विधानसभाओं में से 18 लॉज़ेक्ट लाजवाब विधानसभाओं का आंकड़ा पार कर लिया है। यह पहली बार है जब केंद्र शासित प्रदेश में किसी सरकार को लगातार दूसरी बार चुना गया है। रंगासामी ने दो भाग- थट्टांचवडी और मंगलम से जीत दर्ज की। उनकी इस जीत ने एआईएनआरसी को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया और भविष्य में पुडुचेरी में पूर्ण राज्य की विचारधारा की मांग को बढ़ावा देने का मौका दिया। यह निष्कर्ष बताता है कि छोटे राज्यों में भी अब क्षेत्रीय दलों को भाजपा, राष्ट्रीय दलों के साथ मिलकर स्थापित किया जा रहा है, वे बाकी हाशिये पर चले जायेंगे। क्षत्रपों की नागरिकता का अंत और नया राजनीतिक यथार्थ इन त्रिलोकी राज्यों की कहानियों ने साफ कर दिया है कि ‘क्षत्रपों की राजकुमारी’ अब आपकी आखिरी सांसें गिन रही हैं: कभी-कभी राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तित्व का चेहरा रहनुमा ममता बनर्जी की करारी हार ने न सिर्फ अपनी पार्टी के पक्ष को संकट में डाल दिया है, बल्कि पूरे फर्म के खेमे में नेतृत्व का शून्य कर दिया है। असम में कांग्रेस अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है और क्षेत्रीय दल पूरी तरह से राजग की बैसाखी पर असंतुलित हो गए हैं। पुडुचेरी में भी एआईएनआरसी की सफलता बीजेपी के साथ गठबंधन के बिना संभव नहीं थी।

आईपीएल के इस खिलाड़ी ने जीता बंगाल विधानसभा चुनाव, किस सीट से बीजेपी ने दी थी टिकटें, जानिए

आईपीएल के इस खिलाड़ी ने जीता बंगाल विधानसभा चुनाव, किस सीट से बीजेपी ने दी थी टिकटें, जानिए

बंगाल चुनाव परिणाम 2026: बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को जारी हो सकते हैं। बंगाल में 200 से ज्यादा सीटों पर जीत कर बीजेपी की सरकार बन रही है. बीजेपी में शामिल एक ऐसा नेता भी है जिसने कभी आईपीएल खेला था और 7 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. हम जिस खिलाड़ी की बात कर रहे हैं वो हैं भारत के पूर्व खिलाड़ी और तेज गेंदबाज अशोक डिंडा। उन्होंने क्रिकेट की पिच को राजनीति के पिच को छोड़ दिया। अशोक ने अपनी बॉलिंग और बॉलिंग एक्शन के लिए मशहूर थे। लेकिन, अब राजनीति की पिच पर वो भारतीय क्रिकेट टीम के नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के एक मंझे हुए खिलाड़ी हैं। बंगाल चुनाव में अशोक डिंडा को किस सीट पर मिली जीत? बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम 4 मई को जारी हुआ। 293 स्थापत्य कला में मोयना विधानसभा सीट भी शामिल है। इसी सीट से पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा को बीजेपी ने टिकट दिया था। 16241 में एसोसिएट से जीत मिली। अशोक डिंडा ने बंगाल की इस सीट पर लगातार दो बार अपनी जीत दर्ज की है। यह भी पढ़ें- बंगाल में ममता बनर्जी का किला कैसे टूटा, महिला वोट बैंक में सेंध से हिंदू उपदेश के ध्रुवीकरण तक सत्य गंवाने के 5 बड़े कारक अशोक डिंडा पहली बार 2008 में आईपीएल में खेले थे अशोक डिंडा ने 2008 में पहली बार आईपीएल खेला था। इसके बाद वो 5 अलग-अलग टीमों के साथ 2017 तक आईपीएल का हिस्सा रहे। उन्होंने आईपीएल के 9 साल के करियर में भारतीय टी20 लीग से कुल 7.63 करोड़ रुपये की कमाई की, ये पूरे 5 मैचों में मिली थी अपनी थी स्टाइल. डिंडा की आखिरी आईपीएल में 50 लाख राइजिंग पुणे सुपर जायंट्स से ओपनिंग के लिए मिली थी। डिंडा का सबसे बड़ा नाम आईपीएल में डेब्यू के बाद चौथे सीज़न में था, जब वो 2012 में पुणे वॉरियर्स इंडिया का हिस्सा थे। आईपीएल 2018 के ऑक्शन में अशोक डिंडा अनसोल्ड रहे। और साल 2021 में अशोक डिंडा ने क्रिकेट इतिहास को आखिरी बार कहा। यह भी पढ़ें- केरल विधानसभा चुनाव: चुनाव में मिली करारी हार कांग्रेस के लिए शशि थरूर का बड़ा संदेश, बीजेपी का दबदबा अशोक डिंडा की टीम इंडिया ने प्रदर्शन किया अशोक डिंडा पॉलिटिक्स में कमाल करने से पहले क्रिकेट ने दुनिया में धमाल मचाया था। डिंडा भारत के ऐसे खिलाड़ी हैं जो भारत के लिए 21 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल रहे हैं। उन्होंने अपनी शानदार पारी में 29 विकेट अपने नाम किये. वहीं आईपीएल के 9वें सीजन में उन्होंने 78 मैच खेले और 69 विकेट अपने नाम किए।

कचरा मैनेजमेंट में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर:भोपाल केस में SC की सख्ती, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना; सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

कचरा मैनेजमेंट में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर:भोपाल केस में SC की सख्ती, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना; सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को कोर्ट ने संकेत दिए कि कचरा प्रबंधन के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके। कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक कलेक्टरों को पावर देने का रोडमैप, कचरा छंटाई और प्रोसेसिंग की योजना और पेनाल्टी व मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर ठोस रिपोर्ट पेश करें। दरअसल, भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इस पर 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 16 मई 2025 से सुनवाई चल रही है। इस केस में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। सुनवाई में देशभर के चीफ सेक्रेटरी को बुलाया डॉ. सुभाष सी. पांडे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा गया कि ये केस भोपाल या इंदौर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है। इस सुनवाई में देश के विभिन्न मुख्य सचिवों को बुलाया गया था। कोर्ट ने साफ कहा है कि नियमों का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से लागू नहीं हो सकेगा। कुछ सीएस ने अपनी समस्याएं भी बताईं। कर्नाटक, एमपी, बिहार समेत अन्य मुख्य सचिवों से बात भी की। उन्होंने कहा कि नया प्लान बना रहे हैं। सभी चीफ सेक्रेटरी ने भरी हामी डॉ. पांडे ने बताया, कोर्ट ने कहा कि 1 साल के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन 1986 की धारा 5 का अधिकार कलेक्टर को दे रहे हैं। यानी, सभी अधिकारों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और निगम से लेकर कलेक्टरों को पॉवर देंगे। सभी चीफ सेक्रेटरी ने भी हामी भरी है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था डॉ. पांडे ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे। नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं। इस नियम के मकसद को पूरा करने के लिए ऐसे निर्देश जारी करना सही समझते हैं, जो न सिर्फ भोपाल नगर निगम पर बल्कि पूरे देश पर लागू हों। इसका कारण यह है कि लोकल बॉडीज द्वारा SWM रूल्स, 2016 के हिसाब से पालन की स्थिति कुछ हद तक या तो पालन कर रही हैं या नहीं। सालाना रिपोर्ट में स्थिति ठीक नहीं कोर्ट ने कहा था कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 बताती है कि देश में घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सहायक कामों से हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (TPD) पैदा होता है। भोपाल और इंदौर जैसे कई शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। जो कचरा बिना प्रोसेस किया जाता है, वह अक्सर बिना साइंटिफिक लैंडफिल या पुराने डंपसाइट में चला जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आज की पीढ़ी मौजूदा लागू करने की कमियों के बने रहने तक और ज्यादा कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती। पुराने कचरे के जमा होने, ग्राउंडवाटर और हवा के कंटैमिनेशन के लिए 1 अप्रैल से लागू मौजूदा आदेशों का तुरंत पालन करने की जरूरत है। जिम्मेदार प्रतिनिधि, समय की जरूरतों के हिसाब से जवाब देने वाले प्रतिनिधि भी होते हैं। नियम आसान हैं और इन्हें लोकल बॉडीज के एडमिनिस्ट्रेशन के साथ कॉरपोरेटर, काउंसलर/मेयर और उनके चेयरपर्सन और वार्ड सदस्यों को थोड़ी भागीदारी से सीखने और लागू करने की जरूरत है। भोपाल के केस के बारे में ये कहा पिछली सुनवाई के आखिरी में भोपाल निगम से जुड़े केस को लेकर कहा था कि आदमपुर छावनी डंप साइट के मामले में पुराने कचरे के लिए कुछ और पेपरवर्क पूरा करने की जरूरत है। टेंडर को फाइनल करने में कुछ और समय लगेगा, इसलिए वह इस मामले में टेंडर को फाइनल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगती हैं। उन्हें यह समय दिया जाता है। भोपाल की ग्राउंड रियलिटी तीन दिन पहले भी लग चुकी हैं आग तीन दिन पहले भी आदमपुर खंती में आग लग चुकी है। खंती में डंप लिगेसी वेस्ट के निपटारे का काम शुरू करने के लिए एक दिन पहले ही पूजा की गई थी। आग लिगेसी वेस्ट के साथ नए ड्राय वेस्ट में भी लगी थी। इस नए ड्राय वेस्ट का उपयोग एनटीपीसी के प्लांट में टोरिफाइड चारकोल बनाने में होना था। आग के कारण एक बार फिर इलाके में धुआं फैल गया और ग्रामीण दिन भर परेशान होते रहे। साइट पर 6.5 से 7.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट जमा खंती में डंप लिगेसी वेस्ट के निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने 26 मार्च को सौराष्ट्र एन्वायरो प्राइवेट लिमिटेड को वर्क ऑर्डर जारी किया। साइट पर 6.5 से 7.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट जमा है। कंपनी को इसके लिए 55 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

बंगाल के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 11:52 IST न्यूज18 विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बंगाल के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

Biocon Successor: Kiran Mazumdar Shaw Appoints Niece Clare

Biocon Successor: Kiran Mazumdar Shaw Appoints Niece Clare

Hindi News Business Biocon Successor: Kiran Mazumdar Shaw Appoints Niece Clare | AI & Biotech Focus मुंबई7 मिनट पहले कॉपी लिंक बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने कंपनी के लिए उत्तराधिकार योजना यानी सक्सेशन प्लान का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपनी भांजी क्लेयर मजूमदार को उत्तराधिकारी चुना है। फॉर्च्यून इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 37 साल की क्लेयर कंपनी के विकास के अगले फेज का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। किरण मजूमदार शॉ ने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी। उनकी अपनी कोई संतान नहीं है, इसलिए वे कंपनी को सुरक्षित हाथों में सौंपना चाहती थीं। उन्होंने बताया कि क्लेयर ने खुद को साबित किया है कि वे एक कंपनी चला सकती हैं। बिकारा थेरेप्यूटिक्स की फाउंडर और CEO भी हैं क्लेयर क्लेयर मजूमदार फिलहाल ‘बिकारा थेरेप्यूटिक्स’ की फाउंडर और CEO हैं। यह कंपनी बायोकॉन द्वारा ही इंक्यूबेट की गई थी और 2024 में नैस्डैक पर लिस्ट हुई है। बिकारा का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.6 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। क्लेयर के पास एमआईटी (MIT) और स्टैनफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी की डिग्री है और उन्होंने कैंसर बायोलॉजी में पीएचडी की है। बायोकॉन फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ की भांजी क्लेयर मजूमदार। फैमिली इकोसिस्टम का सपोर्ट, एआई और ऑन्कोलॉजी एक्सपर्ट्स की टीम भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किरण मजूमदार ने एक मजबूत फैमिली इकोसिस्टम तैयार किया है। क्लेयर के भाई एरिक मजूमदार कैलटेक में प्रोफेसर और एआई (AI) एक्सपर्ट हैं। वहीं उनके पति थॉमस रॉबर्ट्स मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। यह टीम बायोकॉन के भविष्य के विकास में अहम भूमिका निभाएगी। स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव, जेनेरिक्स और बायोलॉजिक्स बिजनेस का मर्जर बायोकॉन अपने ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव कर रही है। कंपनी ने अपने जेनेरिक्स और बायोलॉजिक्स व्यवसायों का मर्जर कर दिया है। इसके अलावा कर्ज कम करने और स्ट्रक्चर को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में कंपनी का 60% रेवेन्यू ‘बायोसिमिलर्स’ से आता है। बाजार में इसके 12 प्रोडक्ट्स पहले से मौजूद हैं और करीब 20 पाइपलाइन में हैं। बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ। उन्होंने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी। ग्रुप कंपनियों में नई लीडरशिप, जुलाई से कमान संभालेंगे नए CEO सिर्फ मुख्य कंपनी ही नहीं, बल्कि ग्रुप की अन्य कंपनियों में भी लीडरशिप में बदलाव हो रहा है। श्रीहास तांबे ने बायोकॉन बायोलॉजिक्स के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। वहीं, सिद्धार्थ मित्तल 1 जुलाई से सिनजीन इंटरनेशनल का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। फ्यूचर विजन, एआई और ओरिजिनल बायोलॉजिक ड्रग्स पर रहेगा जोर किरण मजूमदार शॉ के अनुसार, ग्रुप के भविष्य की ग्रोथ तीन स्तंभों पर टिकी होगी। इसमें डिफरेंशिएटेड बायोसिमिलर्स, ओरिजिनल बायोलॉजिक ड्रग्स और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) प्लेटफॉर्म्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल शामिल है। क्या होते हैं बायोसिमिलर्स?: बायोसिमिलर्स ऐसी दवाएं होती हैं जो किसी दूसरी कंपनी द्वारा पहले से बनाई गई ‘बायोलॉजिकल दवा’ (जो जीवित कोशिकाओं से बनी होती है) के लगभग समान होती हैं। जब किसी बड़ी दवा का पेटेंट खत्म हो जाता है, तो बायोसिमिलर्स को कम कीमत पर बाजार में उतारा जाता है, जिससे मरीजों का इलाज सस्ता हो जाता है। बायोकॉन इसी सेक्टर की ग्लोबल लीडर है। ये खबर भी पढ़ें… BHEL का मुनाफा 156% बढ़कर ₹1,290 करोड़ हुआ: रेवेन्यू में 37% की ग्रोथ, निवेशकों को हर शेयर पर ₹1.40 का डिविडेंड देने का ऐलान सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी BHEL का वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 156% बढ़कर 1,290.47 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 504.45 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… सेंसेक्स 550 अंक गिरकर 76,700 के स्तर पर आया: निफ्टी में भी 150 अंक की गिरावट, ये 23,950 के स्तर पर कारोबार कर रहा कॉपी लिंक शेयर सोना ₹2,163 गिरकर ₹1.48 लाख रुपए पर आया: BHEL का मुनाफा 156% बढ़कर ₹1,290 करोड़ हुआ, टाटा कर्व ईवी के नए X सीरीज मॉडल लॉन्च कॉपी लिंक शेयर इंपैक्ट फीचर: किफायती होम लोन से घर का सपना होगा पूरा, दस्तावेज भी कम लगेंगे, प्रक्रिया भी सरल कॉपी लिंक शेयर सोना ₹2000 सस्ता,10 ग्राम की कीमत ₹1.48 लाख: एक किलो चांदी ₹211 गिरकर ₹2.40 लाख पर आई, देखें अपने शहर में सोने के दाम Play video कॉपी लिंक शेयर

ममता बनर्जी की हार पर विवेक अग्निहोत्री हुए खुश:कहा- बंगाल में हमारे साथ मारपीट करवाई, हमले करवाए, अब लोग निडर सिर ऊंचा कर चलेंगे

ममता बनर्जी की हार पर विवेक अग्निहोत्री हुए खुश:कहा- बंगाल में हमारे साथ मारपीट करवाई, हमले करवाए, अब लोग निडर सिर ऊंचा कर चलेंगे

4 मई को पश्चिम बंगाल के चुनाव के नतीजे घोषित हुए, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी मतों से हार गईं। चुनाव का नतीजा आने के बाद अब द कश्मीर फाइल्स और द बंगाल फाइल्स बना चुके विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए उनकी हार पर खुशी जाहिर की है। उनका दावा है कि ममता बनर्जी ने उन्हें बंगाल से बैन किया था, जिसके चलते उन्हें बंगाल जाने की अनुमति नहीं दी गई और वो अवॉर्ड लेने तक नहीं जा सके। विवेक का कहना है कि बंगाल की जनता इसके बाद निडर होकर जिएगी। विवेक रंजन अग्निहोत्री ने द बंगाल फाइल्स की रिलीज रोके जाने से जुड़ा एक पुराना वीडियो जारी कर लिखा है, ‘दोबारा कभी नहीं। जो लोग नहीं जानते, उनके लिए, ममता बनर्जी ने मुझे बंगाल में रोक दिया था, जब द कश्मीर फाइल्स रिलीज हुई थी। इस फिल्म को सिनेमाघरों से हटा दिया गया था और उन्होंने कहा था कि मुझे बंगाल में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’ आगे विवेक ने लिखा, ‘पिछले साल, उन्होंने द बंगाल फाइल्स को भी पश्चिम बंगाल में पूरी तरह बैन कर दिया। हमारे ट्रेलर लॉन्च को रोक दिया गया। हम पर हमले हुए और मारपीट भी हुई। मेरे खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं। मुझे बंगाल में पूरी तरह से बैन कर दिया गया था। मैं तो अपना अवॉर्ड लेने के लिए गवर्नर के पास भी नहीं जा सका। लेकिन हमने हार नहीं मानी। चुनाव के दौरान हमने कोशिश की कि द बंगाल फाइल्स ज्यादा से ज्यादा लोगों तक (छुपकर) पहुंच सके।’ आखिर में विवेक रंजन अग्निहोत्री ने लिखा, ‘मुझे खुशी है कि हमने हार नहीं मानी और अपने तरीके से लड़ाई जारी रखी। और आखिर में यह बड़ी जीत मिली। बंगाल के महान लोगों को बधाई। अब आप बिना डर के, सिर ऊंचा करके चल सकते हैं।’ बता दें कि विवेक रंजन अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी फिल्म द बंगाल फाइल्स को बंगाल में बैन करने की मांग उठी थी। तब विवेक रंजन अग्निहोत्री ने फिल्म का ट्रेलर लॉन्च इवेंट कोलकाता में आयोजित किया। इवेंट के बीच ही कुछ लोगों ने वहां तोड़फोड़ कर ट्रेलर दिखाए जाने से रोक दिया। तब भी विवेक ने ममता बनर्जी पर इवेंट रुकवाने के आरोप लगाए थे।