Saturday, 19 Sep 2026 | 11:56 PM

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समझाया: हिमंत बिस्वा सरमा की तीसरी पारी ‘मियां’ के दुश्मन! बदरुद्दीन की जीत से 34.22% मुस्लिम आबादी को फ़ायदा क्यों नहीं?

समझाया: हिमंत बिस्वा सरमा की तीसरी पारी 'मियां' के दुश्मन! बदरुद्दीन की जीत से 34.22% मुस्लिम आबादी को फ़ायदा क्यों नहीं?

असम में हिमंत बिस्वा सरमा की तीसरी जीत में सिर्फ सत्य ही नहीं बची, बल्कि एक नए और नाटकीय राजनीतिक युग की शुरुआत भी की गई है। 126 में से 82 में शामिल होने वाली बीजेपी के सीएम हिमंत ने सोलो में सोलो के खिलाफ कई दावे किए। दूसरी ओर, बदरुद्दीन अजमल की जीत और उनकी पार्टी एआईयूडीएफ के सफा ने असम की मुस्लिम राजनीति में एक अहम बदलाव का संकेत दिया है। लेकिन इससे कम्यूनिटी को फ़ायदा उठाने वाला अब एक बड़ा सवाल बदल गया है। कैसे? हिमंत बिस्वा सरमा ने आदिवासियों के खिलाफ दिया बड़ा बयान हिमंत बिस्वा सरमा ने दादी को ‘मियां’ कहा और एक के बाद एक कई सिद्धांत और सख्त बातें बताईं: गोली मारने का संकेत: उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया (बाद में इसे हटा दिया गया), जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों पर राइफल से गोली चलाने का आरोप लगाया गया था। इस पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. ‘जेल जाने को तैयार’: ओलाज़ी की याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए सरमा ने कहा, ‘मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं, मुझे क्या करना है? मुझे किसी भी वीडियो के बारे में नहीं पता…लेकिन मैं बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ हूं और उनके बारे में बताता हूं।’ ‘नॉन-कोऑपरेशन’ की खोज: फरवरी 2026 में उन्होंने ‘गैर-सहयोग’ (असहयोग) और ‘सविनय अज्ञेय’ का विरोध करते हुए बैलर मूल के नारे लगाए, ताकि ऐसा रंगीन बनाया जाए जिसमें ‘वे असम में न रह जाएं’। उन्होंने लोगों से अपील की, ‘रिक्शा पर सवार होने से पहले सोचिए कि आप लोग रिश्तेदार रिक्शा पर चढ़ रहे हैं।’ ‘खुद ही चले जाओ’ की रणनीति: मार्च 2026 में उन्होंने कहा कि वे ऐसा ‘दबाव’ बनाना चाहते हैं ताकि बंगाली भाषी मुस्लिम ‘खुद ही चले जाएं।’ उन्होंने कहा कि बेदाखली, सरकारी खजाने से निवेशकों और अवैध घुसपैठियों पर रबर की गोलियां चलाने जैसे उपाय किए जा सकते हैं। विशेष चेतावनी: सरमा ने यह भी कहा, ‘अगर असम में मुस्लिम आबादी 50% पार कर गई तो गैर-मुस्लिम जीवित नहीं बचेंगे।’ क्या मुख्यमंत्री की तीसरी पारी की मुश्किलें और बढ़ेंगी? सरमा और उनकी सरकार की क्लस्टर कंपार्टमेंट और भविष्य के वादों को देखते हुए, असम के पैरालिड, बैलर मूल के पैरालिड के लिए अगले पांच साल 3 कारणों से बेहद मुश्किल हो सकती है: विधानसभा में राजनीतिक हाशियाकरण: 2023 के प्रिसिमन के बाद, जिन प्रिस्क्राइब पर क्लासिक्स का प्रभाव पड़ा, उनकी संख्या 35 से 35 के रूप में 20 रह गयी। बीजेपी ने 2026 के चुनाव में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया. मुस्लिम वोट पूरी तरह से विभाजित पार्टी कांग्रेस और एआईयूडीएफ की तरह ही अलग-अलग हिस्सों में बंटे हुए हैं। कठोर वाल्व का प्रभाव: भाजपा के संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के खिलाफ ‘लव जिहाद’ और ‘भूमि जिहाद’ को खत्म करने वाला कानून बनाने का वादा किया गया है। साथ ही, अवैध घुसपैठियों (जिसका समुद्री तट पर मुस्लिम होते हैं) से जमीन खाली कराना और ‘मिशन बससंधारा’ के तहत भूमि अधिकार देने की बात कही गई है। बेख़ौफ़ और प्रोडक्शन का जारी रहना: सरमा ने सबसे पहले ही साफ कहा था कि पिछले साल 1.5 लाख की राहत में से ज्यादा जमीन को हटा दिया गया था और यह अभियान जारी रहेगा। ‘पुशबैक’ नीति के तहत हजारों लोगों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है, जिसमें कई भारतीय नागरिक भी पीड़ित हैं। तो क्या बदरुद्दीन अजमल की जीत का फायदा नहीं मिलेगा? बदरुद्दीन अजमल ने नव-निर्मित बिन्ना कांड़ी सीट से 35,380 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन यह उनकी पार्टी एआईयूडीएफ के लिए एक बड़ी तबाही को छुपाना नहीं है। पार्टी को केवल 2 सर्वश्रेष्ठ मिलीं, जिसने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है। इससे: सीमित लाभ: 2024 के आम चुनाव में अपनी धुबरी सीट के बाद राज्य की राजनीति में वापसी के लिए अजमल के लिए एक बड़ी जीत है। लेकिन सिर्फ दो नामचीन विधानसभाओं के साथ मजबूत प्रतिरोध कायम करना बेहद मुश्किल है। ऐतिहासिक गिरावट: कभी प्रतिभा के ‘रक्षक’ के रूप में देखने वाली एआईयूडीएफ का पतन 2018 में एनआरसी का ड्राफ्ट जारी होने के बाद शुरू हुआ। इसमें करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए थे, जिनमें शामिल थे बंगाली मुसलमान। पार्टी अपने इसी वोट बैंक की रक्षा करने में नाकाम रही। कांग्रेस की ओर पलायन: असम कांग्रेस ने बीजेपी के ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ से बचने के लिए एआईयूडीएफ से गठबंधन तोड़ने की घोषणा की. नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम मौलाना ने एआईयूडीएफ को कांग्रेस से अलग करने का रुख अपनाया। बीजेपी के प्रचंड जीत और हिमंत बिस्वा सरमा की बेबाक रणनीति ने एक ऐसा माहौल जरूर बनाया है, जहां वे अपने जमींन को और जगह से लागू कर सकते हैं। बदरुद्दीन अजमल की जीत एक मशहूर फिल्म जरूर है, लेकिन असम की मशहूर हस्तियों से किसी बड़े राजनीतिक फायदे की उम्मीद बहुत कम है। अगले पाँच पूर्वी समुदायों के सामने राजनीतिक हाशियाकरण और कठोर विरोधियों की चुनौती सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

साउथ सुपरस्टार प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर अटकलों पर मेकर्स ने अपडेट जारी किया है। सोशल मीडिया पर खबरें थीं कि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है। आधिकारिक बयान में साफ किया गया कि ‘स्पिरिट’ तय समय पर ही रिलीज होगी। मेकर्स के मुताबिक, ‘स्पिरिट’ 5 मार्च 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। प्रोडक्शन टीम ने बताया कि फिल्म का काम प्लान के अनुसार आगे बढ़ रहा है। रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि प्रभास की यह फिल्म सलमान खान की Eid 2027 पर रिलीज होने वाली फिल्म SVC63 (वर्किंग टाइटल) से क्लैश कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा था कि मेकर्स बॉक्स ऑफिस टकराव से बचने के लिए ‘स्पिरिट’ को दिसंबर 2027 तक पोस्टपोन करने पर विचार कर रहे हैं। अब मेकर्स के बयान के बाद साफ है कि फिल्म तय तारीख पर ही रिलीज होगी। ‘स्पिरिट’ को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसे पैन-वर्ल्ड एक्शन एंटरटेनर बताया जा रहा है। फिल्म में प्रभास लीड रोल में नजर आएंगे। निर्देशन की कमान संदीप रेड्डी वांगा संभाल रहे हैं। इससे पहले संदीप और निर्माता भूषण कुमार की जोड़ी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुकी है। फिल्म में तृप्ति डिमरी, विवेक ओबेरॉय और ऐश्वर्या देसाई भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘स्पिरिट’ को 8 भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

साउथ सुपरस्टार प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर अटकलों पर मेकर्स ने अपडेट जारी किया है। सोशल मीडिया पर खबरें थीं कि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है। आधिकारिक बयान में साफ किया गया कि ‘स्पिरिट’ तय समय पर ही रिलीज होगी। मेकर्स के मुताबिक, ‘स्पिरिट’ 5 मार्च 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। प्रोडक्शन टीम ने बताया कि फिल्म का काम प्लान के अनुसार आगे बढ़ रहा है। रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि प्रभास की यह फिल्म सलमान खान की Eid 2027 पर रिलीज होने वाली फिल्म SVC63 (वर्किंग टाइटल) से क्लैश कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा था कि मेकर्स बॉक्स ऑफिस टकराव से बचने के लिए ‘स्पिरिट’ को दिसंबर 2027 तक पोस्टपोन करने पर विचार कर रहे हैं। अब मेकर्स के बयान के बाद साफ है कि फिल्म तय तारीख पर ही रिलीज होगी। ‘स्पिरिट’ को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसे पैन-वर्ल्ड एक्शन एंटरटेनर बताया जा रहा है। फिल्म में प्रभास लीड रोल में नजर आएंगे। निर्देशन की कमान संदीप रेड्डी वांगा संभाल रहे हैं। इससे पहले संदीप और निर्माता भूषण कुमार की जोड़ी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुकी है। फिल्म में तृप्ति डिमरी, विवेक ओबेरॉय और ऐश्वर्या देसाई भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘स्पिरिट’ को 8 भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

तमिलनाडु में सरकार ने बनाई दौड़ तेज, विजय ने पेश किया दावा, जानें क्या है यहां नंबर गेम?

तमिलनाडु में सरकार ने बनाई दौड़ तेज, विजय ने पेश किया दावा, जानें क्या है यहां नंबर गेम?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद मोटरसाइकिल की हलचल तेज हो गई। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने रविवार को राज्य सरकार में पद से हटाये जाने का दावा पेश किया. उनकी पार्टीगा तमिल वेत्री कज़गम (टीवीके) 234 रथ असेंबली में सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई है, जिससे नई सरकार के गठन को लेकर नई सरकार बनी और तेजी से उभरी। राज्यपाल से मुलाकात, प्रस्तुत सरकार बनाने का दावाविजय चेन्नई स्थित लोक भवन स्थापना के गवर्नर आर.एन. रवि से मिले। इस दौरान उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की सरकार बनाने का दावा पेश किया और सहायक समर्थकों को अपनी पार्टी में समय-समय पर विधानसभा में बहुमत साबित करने का प्रस्ताव दिया। इस बैठक में नई सरकार गठन की दिशा में पहला बड़ा संवैधानिक कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूरहाल ही में चुनाव में टीवीके ने 108वीं बार शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालाँकि, सरकार ने पार्टी के लिए ज़रूरी 118 दस्तावेज़ के दस्तावेज़ अभी भी दूर हैं, जिससे उसे सहयोगी संस्थान के समर्थन की ज़रूरत है। विधायक दल के नेताओं ने जीत हासिल कीचुनाव के बाद विजय ने अपने नवनिर्वाचित और वरिष्ठ नेताओं की एक साथ बैठक की। इसके बाद सभी बैश ने एकमत से अपने विधायक दल का नेता चुना, जिससे गवर्नर के सामने दावा पेश करने का रास्ता साफ हो गया। समर्थन के लिए तेज़ हुई अनौपचारिक बातचीतचुनाव के बाद चेन्नई में राजनीतिक सहयोगी तेज हैं। कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थकों के साथ समर्थन देने का संकेत दे दिया है, जबकि बाहुबली दल और अन्य छोटे क्षेत्रीय दल भी अधिक चर्चा कर रहे हैं। वहीं, फिलीपीन डीएमके, जिसे इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, ने भी हार के बाद अपनी रणनीति पर विचार शुरू किया है। अन्य वाद्ययंत्रों का प्रदर्शनइस चुनाव में डीएमके ने 59, एआईएडीएमके ने 47, कांग्रेस ने 5 और 4 पायदान बनाए हैं. इसके अलावा IUML, CPI, VCK और CPM को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी, DMDK और AMMK ने 1-1 सीट पर जीत दर्ज की।

क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए गन्ने का जूस पीना फायदेमंद? डाइटिशियन से जान लीजिए

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Last Updated:May 06, 2026, 18:12 IST Sugarcane Juice and Diabetes: गर्मियों में गन्ने के रस को डिहाइड्रेशन का किंग माना जाता है. गन्ने का जूस प्राकृतिक शुगर से भरपूर होता है, जो डायबिटीज मरीजों का ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है. डाइटिशियन की मानें तो शुगर के मरीजों को गन्ने का रस सीमित मात्रा और एक्सपर्ट की सलाह से ही पीना चाहिए. शुगर के मरीजों को गन्ने का रस बेहद कम मात्रा में ही पीना चाहिए. Can Diabetics Drink Sugarcane Juice: गर्मियों के मौसम में ठंडा-ठंडा गन्ने का जूस पीकर बड़ी राहत मिलती है. अक्सर सड़क किनारे गन्ने का जूस आसानी से मिल जाता है और लोग इसका जमकर आनंद लेते हैं. गन्ने का जूस स्वादिष्ट होता है और इसे पीने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है. गन्ने का जूस शरीर को ठंडक देता है और इसे पीकर लोग तरोताजा महसूस करते हैं. अधिकतर लोग गन्ने का जूस मजे से पीते हैं, लेकिन जब बात डायबिटीज के मरीजों की आती है, तो जेहन में कई सवाल आने लगते हैं. क्या गन्ने का जूस शुगर के मरीजों के लिए सुरक्षित है? इस बारे में एक्सपर्ट से हकीकत जान लेते हैं. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की सीनियर डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर होती है, जिससे यह शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है. इस जूस में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कुछ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं, जो सामान्य लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. हालांकि डायबिटीज के मरीजों के लिए इसकी नेचुरल शुगर समस्या बन सकती है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है. गन्ने के जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा ज्यादा होता है. यह खून में शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है. जिन लोगों का शुगर लेवल अनकंट्रोल है, उन्हें गन्ने का जूस अवॉइड करना चाहिए. एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज के जिन मरीजों का शुगर लेवल कंट्रोल में है, वे कम मात्रा में कभी-कभीर गन्ने का जूस पी सकते हैं. इससे शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आएगा. इसके अलावा बाजार में मिलने वाले गन्ने के जूस की साफ-सफाई भी एक बड़ा मुद्दा है. कई बार जूस बनाने में इस्तेमाल होने वाला पानी या मशीन साफ नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. डायबिटीज के मरीजों की इम्यूनिटी पहले से कमजोर हो सकती है, इसलिए उन्हें बाहर का जूस पीने में सावधानी बरतनी चाहिए. डाइटिशियन की सलाह यही है कि डायबिटीज के मरीज गन्ने के जूस को नियमित डाइट का हिस्सा न बनाएं. अगर पीना हो तो बहुत सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से ही लें. डायबिटीज के मरीज गन्ने के जूस की जगह ऐसी ड्रिंक्स पी सकते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करें. शुगर के मरीज बिना चीनी वाला नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी, ग्रीन टी और बिना चीनी की हर्बल टी पी सकते हैं. इसके अलावा सब्जियों का जूस जैसे करेला, टमाटर या खीरा जूस भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इनमें शुगर कम होती है और पोषक तत्व भरपूर होते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

विजय के टीवीके के उम्मीदवार एक वोट से जीते, आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर लिखी ऐसी बात

विजय के टीवीके के उम्मीदवार एक वोट से जीते, आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर लिखी ऐसी बात

तमिलनाडू की तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर टीवीके (टीवीके) के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर नेकेके केआर पेरियाकरुप्पन को एक वोट से हराया। तमिलनाडु सरकार में मंत्री रह चुके पेरियाकरुप्पन के हार की चर्चा अब पूरे देश में होने लगी है। देश के जाने-माने उद्योगपति और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता को लेकर बार-बार चर्चा में रहने वाले आनंद महिंद्रा ने इसे वोट की सबसे बड़ी ताकत बताई। तिरुपट्टूर विधानसभा सीट पर टीवीके उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर को 83375 वोटो तो स्टूडेंटके 83374 वोट मिला। 1 वोट से जीतने वाले उम्मीदवार के लिए क्या बोले आनंद महिंद्रा? आनंद महिंद्रा एक्स ने पोस्ट कर लिखा, ‘हाल के राज्यों के चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। मेरे लिए इस चुनाव में सबसे यादगार तिरुपत्तूर विधानसभा की रही बात. तमिलनाडु के इस एक चुनावी क्षेत्र में दो प्रमुख वोटों के बीच 1,66,000 से ज्यादा वोट डाले गए थे. कांग्रेस की बात ये है कि जीत-हार का फैसला और इतिहास सिर्फ एक वोट से बदल गया. यह तस्वीर देश और दुनिया के हर स्कूल में दिखाई देती है। ताकि हर बच्चा यह समझ सके कि जब वह बड़ा होगा तो उसके पास जो सबसे बड़ी ताकत होगी, वह ‘एक’ की ताकत होगी। उनकी एक वोट की ताकत.’ हाल के राज्य चुनावों के नतीजे किसी भी पैमाने पर नाटकीय रहे हैं। लेकिन मेरे लिए यह छवि चुनाव का सबसे अविस्मरणीय परिणाम रहेगी। तमिलनाडु के इस निर्वाचन क्षेत्र में दो प्रमुख उम्मीदवारों के बीच 166,000 से अधिक वोट पड़े। और इतिहास… pic.twitter.com/85UtN3VkZC -आनंद महिंद्रा (@आनंदमहिंद्रा) 6 मई 2026 विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया तमिल विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने 108 रेसों में प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। इस बीच उन्होंने बुधवार (6 मई 2026) को राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। अगली सरकार के गठन को लेकर हो रही अटकलों के बीच वे राज्यपाल विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात करेंगे। इस दौरान विजय के साथ टीवी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें ‘बुस्सी’ आनंद, केए सेंगोट्टैयन, अधव अर्जुन और अरुण राज शामिल थे। तमिल चुनाव में टीवीके का शानदार प्रदर्शन टीवीके ने हाल ही में लॉटरी असेंबली इलेक्शन में 108वीं वर्षगांठ शानदार इलेक्शन की शुरुआत की और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। हालाँकि, पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 पदों के अंत से भी कम राह देखी। चुनाव नतीजों के बाद विजय ने नए चुने गए विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की। इसके बाद, टीवीके के प्रसारण ने मंगलवार (5 मई 2026) को एकमत से उनके प्रमुख दल के नेता का चयन किया, जिससे उनके लिए राज्यपाल के सामने दावा पेश करने का रास्ता साफ हो गया। ये भी पढ़ें: राहुल गांधी का ‘हाथ’ विजय के साथ, कांग्रेस पार्टी TVK का समर्थन

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

वर्ष 1951-52 में देश का पहला आम चुनाव हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 489 में से 364 पर कब्ज़ा जमाया था और उसका वोट शेयर करीब 45% था। यह वह दौर था जब एक विचारधारा पार्टी पूरे देश की साक्षात् मूर्ति पर थी। लेकिन आज 70 साल बाद, वामपंथी कांग्रेस चार राज्यों की सरकार से सीमेन्ट तक जा पहुंची है। कभी देश की दिशा और दशा करने वाली यह 140 साल पुरानी पार्टी की गिनती अब आखिरी सांसों में हो रही है या यह एक नई शुरुआत का इंतजार है? 400 से अधिक सबसे पवित्र कैथोलिक गांव-गांव उपनगरीय कांग्रेस कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुसार नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेताओं को तैयार किया। 1952 से 2014 के बीच करीब 50 साल तक सबसे ज्यादा समय तक पार्टी ने केंद्र की सत्ता संभाली। 1984 के चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड 400 से अधिक वोट मिले। यह वह समय था जब कांग्रेस का जनाधार हिंदू बहुसंख्यक समाज से लेकर अल्पसंख्यकों और ईसाई समुदाय तक का विघटन हुआ था। पार्टी का संगठन गांव-गांव तक मजबूत था और ‘कांग्रेस व्यवस्था’ नाम से एक संपूर्ण व्यवस्था व्यवस्था थी। कांग्रेस पार्टी की शुरुआत कब और कैसे हुई? मान्यताओं का मानना ​​है कि कांग्रेस का वास्तविक पतन 1989 के बाद शुरू हुआ, जब वह केंद्र की पूर्ण बहुमत की सत्ता से बाहर हो गई और उसे गठबंधन की राजनीति पर अविश्वास प्रस्ताव मिला। संगठन के आरोप, संगठन में आंतरिक गुटबाजी और क्षेत्रीय आश्रमों के उदय ने पार्टी की जड़ों को खोखला करना शुरू कर दिया। फिर 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस का तख्तापलट हो गया और वह सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गईं, जबकि उनका वोट शेयर 19.3% रह गया था। 2019 में मामूली सुधार के बाद 2024 में पार्टी ने 99 सीटें और 21.26% वोट शेयर हासिल किया, लेकिन फिर भी वह मोदी लहर के आगे बौनी साबित हुई। असली हकीकत: सिर्फ 4 राज्यों की सरकार 2026 की ताजा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास इस वक्त सिर्फ चार राज्यों में ही अपनी सरकार है। 2026 के चुनाव में केरल में बड़ी जीत के बाद, कांग्रेस को अब तीन दक्षिण राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के अलावा उत्तर भारत में सिर्फ हिमाचल प्रदेश की सत्ता हासिल है। झारखंड में वह झामुमो के साथ गठबंधन में सरकार का हिस्सा है, लेकिन वहां नेतृत्व रसेल सोरेन के पास है। बिहार और तमिल जैसे राज्यों में पार्टी या तो छोटे सहयोगियों की भूमिका है या पूरी तरह से हाशिए पर है। वहीं, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में कांग्रेस का जनाधार या तो खत्म हो चुका है या बेहद कमजोर है। कांग्रेस के पांच बड़े कारण क्या हैं? कांग्रेस के पतन को किन्हीं एक-दो कारणों से नहीं समझा जा सकता है, इसके पीछे एक सु-संयुक्त लोकोमोटिव प्रक्रिया है: आदर्श नेतृत्व और मार्गदर्शन कलह: राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी को 95वीं बहुमत से हार का सामना करना पड़ रहा है। आंतरिक गुटबाजी और हाईकमैन का ग्राउंड स्ट्रिप से कटाव पार्टी लगातार खराब हो रही है। आपदा का संकट: भाजपा ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति के रूप में पेश किया, जिससे हिंदू बहुल मुस्लिमों का विश्वास खोद दिया गया। भाजपा का उदय और ध्रुवीकरण: 2014 के बाद कांग्रेस को उत्तर भारत में किसी भी तरह से गठबंधन में डायरेक्ट सीट नहीं मिली, क्योंकि बीजेपी धार्मिक आधार पर मजबूत ध्रुवीकरण करने में सफल रही है। दल-बदल और पार्टी छोड़ने का नारा: 2014 के बाद सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। यह रुझान 2017 से 2021 के बीच अपने चरम पर था। गठबंधन की राजनीति में विश्वास: इंडिया अलायंस के सहयोगी दल, नैयर वह सैद्धांतिक कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जिससे कि एकजुटता एकता खत्म हो गई है। तो क्या ख़त्म होने वाली है कांग्रेस पार्टी? इस सवाल का जवाब आसान नहीं है. हालांकि इंडिया गठबंधन सिर्फ 6 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश तक पहुंच गया है और कई बीजेपी नेता इसे ‘केरल के बाहर न के बराबर’ बता रहे हैं। इसके बावजूद राजनीति में भविष्यवाणी करना मुश्किल है। 2024 के आम चुनाव में मिल 99 ने यह साबित कर दिया कि पार्टी में अभी भी लड़ने की ताकतें बाकी हैं। दक्षिण भारत में पार्टी का जबरदस्त प्रभाव और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी पार्टियों ने जोश भरा है। लेकिन पार्टी के भविष्य के बारे में वह इस बात पर अड़े हुए हैं कि अपनी योजनाओं को कितनी जल्दी दूर किया जाए। कांग्रेस को एक मजबूत संगठन खड़ा करना, जातिगत और क्षेत्रीय ग्राफों को फिर से साधना और एक स्पष्ट परिभाषा तय करना होगा। ये वे कलाकार हैं जो राष्ट्रवादी पार्टी में शामिल होंगे। अगर यह कांग्रेस कर पाती नाकाम रही, तो इतिहास की कहानी में अपनी कहानी एक ‘हरे अतीत’ तक सीमेन्ट कर रहेगी।

गुरुग्राम में रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे शिखर धवन:पत्नी सोफी शाइन भी साथ, दोनों ने मैरिज डॉक्यूमेंट्स पर साइन किए

गुरुग्राम में रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे शिखर धवन:पत्नी सोफी शाइन भी साथ, दोनों ने मैरिज डॉक्यूमेंट्स पर साइन किए

पूर्व इंडियन क्रिकेटर शिखर धवन ने बुधवार को गुरुग्राम पहुंचकर मैरिज रजिस्ट्रड करा ली। पत्नी सोफी साइन के साथ ऑफिस पहुंचकर शिखर ने मैरिज डॉक्यूमेंट साइन किए। इस दौरान शिखर के फैमिली मेंबर और पंडित भी मौजूद रहे। इस खबर को अपडेट कर रहे है…

‘भ्रष्ट लोगों ने पार्टी पर कब्ज़ा कर लिया’: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर टीएमसी नेताओं की ममता से राय | भारत समाचार

SRH vs PBKS Live Score, IPL 2026: Follow match updates and scorecard from Hyderabad. (Picture Credit: X/@IPL)

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 17:57 IST जवाहर सरकार ने कहा है कि पार्टी पर “भ्रष्ट लोगों ने कब्ज़ा कर लिया है” और केवल बाहरी कारकों के बजाय आंतरिक मुद्दों ने चुनावी हार में योगदान दिया। पूर्व टीएमसी राज्यसभा सांसद और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार। (पीटीआई फाइल फोटो) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक असंतोष सामने आया है, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने खुलेआम पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व निर्णयों पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने कहा है कि पार्टी पर “भ्रष्ट लोगों ने कब्जा कर लिया है” और केवल बाहरी कारकों के बजाय आंतरिक मुद्दों ने चुनावी हार में योगदान दिया। समाचार एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार में पीटीआईसरकार ने अपने “वायरल” इस्तीफे पत्र का उल्लेख किया, जो उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के साथ-साथ संस्थान से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पिछले सितंबर में राज्यसभा सांसद के रूप में पद छोड़ने के बाद सौंपा था। उन्होंने पार्टी ढांचे के भीतर गहरे विभाजन का संकेत देते हुए कहा, “मेरा इस्तीफा पत्र वायरल हो गया। मैंने भ्रष्टाचार, दादागिरी सूचीबद्ध की, ममता ने कहा कि यह प्रचार है; कुछ नापाक पार्टी नेता, एक क्विज मास्टर है, जिसने कुछ नहीं किया है, उसके पास अनुचित शक्ति है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘पार्टी पर भ्रष्ट लोगों का कब्जा’: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर टीएमसी नेताओं की ममता से राय अलग अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक असंतोष(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)टीएमसी चुनावी हार(टी)जवाहर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी का उदय(टी)टीएमसी आंतरिक संघर्ष(टी)चुनाव आयोग विवाद

Army Camp, BSF HQ Target; ADGPs Aunt, BJP Leader Linked to Murder Plot

Army Camp, BSF HQ Target; ADGPs Aunt, BJP Leader Linked to Murder Plot

. पंजाब में आज की सबसे बड़ी खबर जालंधर में BSF हेडक्वार्टर के बाहर ब्लास्ट से जुड़ी रही। CM भगवंत मान ने कहा कि चुनाव से पहले BJP ऐसे ब्लास्ट कराती रहती है। वहीं DGP ने कहा कि ये IED ब्लास्ट हो सकते हैं, जो टाइमर या रिमोट से किए गए हैं। इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें… इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. आर्मी कैंप-BSF हेडक्वार्टर के बाहर IED धमाके के VIDEO पंजाब में 3 घंटे के भीतर 2 जगह धमाके हुए। पहला धमाका मंगलवार रात पौने 8 बजे जालंधर में BSF हेडक्वार्टर के बाहर हुआ। इसके बाद अमृतसर में आर्मी कैंप में करीब 11 बजे ग्रेनेड अटैक किया गया। खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी नाम के खालिस्तानी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए DIG संदीप गोयल व उनके परिवार को टारगेट बताया। इसके बाद श्री आनंदपुर साहिब पहुंचे CM भगवंत मान ने कहा कि चुनाव से पहले BJP ऐसे छोटे-मोटे ब्लास्ट कराती रहती है। वह लोगों को डराकर वोट लेना चाहती है लेकिन पंजाबी डरने वाले नहीं हैं। ये BJP का स्टाइल है कि चुनाव वाले स्टेट में छोटे-मोटे ब्लास्ट या दंगे करा दो। वहीं ब्लास्ट की जांच करने अमृतसर पहुंचे DGP गौरव यादव ने कहा कि ये IED ब्लास्ट हो सकते हैं, जो टाइमर या रिमोट से किए गए हैं। इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। धमाके के पीछे ऑपरेशन सिंदूर की एनीवर्सरी वजह हो सकती है। उन्होंने खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी नाम के संगठन के अस्तित्व को नकारते हुए कहा कि इसके पीछे पाक ISI के लोग हैं (पढ़ें पूरी खबर) 2. बॉयफ्रेंड के सुसाइड के बाद गर्लफ्रेंड के नहाते चैटिंग, बेडरूम में न्यूड VIDEO लुधियाना में बॉयफ्रेंड के सुसाइड के बाद गर्लफ्रेंड संग वीडियो सामने आए हैं। युवक की मां ने दावा किया कि लड़की बेटे को अपने घर बुलाती थी और उसके साथ संबंध बनाती थी। इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि युवक के मोबाइल में लड़की के घर के बेडरूम का वीडियो है, जिसमें दोनों न्यूड हैं और मस्ती कर रहे हैं। यही नहीं गर्लफ्रेंड बाथरूम में नहाते हुए चैटिंग करती थी। मां ने कहा कि बेटे के मोबाइल में लड़की के 10 हजार से ज्यादा फोटो व वीडियो है। यही नहीं मोबाइल में दोनों के बीच की करीब दो ढाई साल की चैटिंग भी पड़ी है। दोनों इंस्टाग्राम और स्नैपचेट पर चैटिंग और वीडियो कॉलिंग करते थे। उसकी गर्लफ्रेंड ने बार-बार आत्महत्या का दबाव बनाया, ‘गोलियां खाकर मर जा’ जैसे मैसेज भेजे, जिसके बाद बेटे ने सुसाइड किया। हमारे पास उसके 10 हजार से ज्यादा प्राइवेट वीडियो व फोटो हैं। पुलिस इस मामले में FIR दर्ज कर चुकी है (पढ़ें पूरी खबर) 3. मोहाली में बेअदबी, सड़क पर बिखरे मिले अंग, माहौल तनावपूर्ण मोहाली में श्री गुटका साहिब की बेअदबी की गई। गुरुद्वारा सिंह शहीदां के पास स्थित माता साहिब कौर गुरुद्वारा के पास सड़क पर श्री गुटका साहिब के क्षतिग्रस्त अंग मिले हैं। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। गुस्साई सिख संगत ने एयरपोर्ट रोड जाम कर दिया। घटना का पता तब चला जब गुरुद्वारे में तैनात सेवादार ने श्री गुटका साहिब के अंगों को जमीन पर गिरा देखा। देखते ही देखते खबर पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। बेअदबी से नाराज लोगों ने इकट्‌ठा होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी के लिए प्रदर्शन करने लगे। पुलिस अफसरों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। अधिकारियों का कहना है कि नए बेअदबी कानून के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मोहाली सिटी-2 के DSP हरसिमरन सिंह बल ने कहा कि जो भी दोषी होगा उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा (पढ़ें पूरी खबर) 4. चंडीगढ़ में होंगे IPL के क्वालिफायर मुकाबले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के प्लेऑफ मुकाबलों का शेड्यूल जारी हो गया है। इसकी शुरुआत 26 मई को क्वालीफायर-1 मुकाबले से होगी। IPL 2026 का पहला प्लेऑफ मुकाबला यानी क्वालीफायर-1 धर्मशाला के एचपीसीए (HPCA) स्टेडियम में 26 मई को खेला जाएगा। इसमें पॉइंट्स टेबल की टॉप-2 टीमें आमने-सामने होंगी। इसके बाद टूर्नामेंट न्यू चंडीगढ़ के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शिफ्ट होगा। यहां 27 मई को एलिमिनेटर और 29 मई को क्वालीफायर-2 के मैच खेले जाएंगे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने मंगलवार को प्लेऑफ मुकाबलों का डिटेल जारी किया। IPL 2026 में 5 मई तक 48 मैच खेले जा चुके हैं। प्लेऑफ मुकाबले 70 मैच के बाद खेले जाएंगे। सीजन का ग्रैंड फिनाले 31 मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। मोदी स्टेडियम लगातार दूसरे साल खिताबी मुकाबले की मेजबानी करेगा। IPL 2025 का फाइनल भी यहीं खेला गया था, जिसमें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने पंजाब किंग्स को हराकर ट्रॉफी जीती थी। 5. ‘बच्चों हमें माफ कर दो’ लिखकर माता-पिता ने जहर निगला लुधियाना में दंपती ने देर रात जहर खाकर सुसाइड कर लिया। बेटा घर पहुंचा तो दोनों बेड पर बेसुध हालत में पड़े थे। उसने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला। जिसमें लिखा था- हम अपनी जिंदगी से दुखी होकर यह कदम उठा रहे है। इसमें किसी दोस्त या रिश्तेदार का हाथ नहीं है। ना ही परिवार पर कोई कार्रवाई की जाए। उन्होंने आगे लिखा- मेरे बेटे मेरी किसी से कोई देनदारी नहीं है और ना ही कोई जानकारी है। जो मैंने किया अपने सिर पर किया। इसलिए बच्चों को तंग परेशान ना किया जाए। मेरे बच्चों हमें माफ कर दो। हम तुम्हारा साथ नहीं दे सके। गरीबी में जन्म लिया, गरीबी में मर गए। मैं दोबारा बयान करता हूं कि मरने पर जो लिखा सच लिखा। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया है। फिलहाल थाना जोधां पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुसाइड