Wednesday, 06 May 2026 | 09:32 AM

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खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

अभिनेता गौरव खन्ना इन दिनों स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गौरव ने अपनी जिंदगी के संघर्षों, मुंबई आने के सफर और बिना गॉडफादर के मुकाम हासिल करने पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 22 साल पहले जब वे बिना किसी प्लान के कानपुर से पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आए थे, तब से लेकर अब तक उनमें क्या बदलाव आए हैं। इसके साथ ही गौरव ने नए शो को लेकर परिवार के रिएक्शन, रोहित शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव और जिंदगी में जोखिम लेने की अपनी आदत पर भी चर्चा की। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ में हिस्सा लेने जा रहे हैं, फैंस को आपसे काफी उम्मीदें हैं? जवाब: बड़ा अच्छा लगता है जब दर्शक इतना भरोसा दिखाते हैं। पिछले रियलिटी शो (बिग बॉस) में लोगों ने मुझे मेरे असली रूप में देखा। अभी तक वे मुझे सिर्फ किरदारों से जानते थे, लेकिन अब वे असली गौरव (जीके) को जानते हैं। मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूं और उन्हें एंटरटेन करता रहूं। सवाल: इस शो में जीके (गौरव खन्ना) क्या खास करने वाले हैं? जवाब: जीके इस शो में स्टंट करेगा। जीके जिस भी शो में जाता है, वहां जो भी रिक्वायरमेंट होती है, वो जरूर पूरी करता है। सवाल: शो के लिए आपकी क्या तैयारी है? जवाब: मैं कभी कुछ सोचकर नहीं जाता। मैं खुद को उस परिस्थिति में डालता हूं और रिक्वायरमेंट के हिसाब से परफॉर्म करने की कोशिश करता हूं। मुझे स्टंट्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, मैं पहली बार यह सब कर रहा हूं। सवाल: शो का ऑफर आने पर घर वालों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: मेरे माता-पिता कानपुर में रहते हैं और बहुत साधारण लोग हैं। जब मेरी मां को पता चला तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने कहा- “तुम क्यों जा रहे हो? तुम्हें क्या जरूरत है, करियर तो अच्छा खासा चल रहा है।” उन्होंने ऐसा ही मास्टरशेफ और बिग बॉस के टाइम भी कहा था। मैंने उन्हें इस बार भी नहीं बताया था। सच कहूं तो शो का कॉन्ट्रैक्ट साइन करने वाला मैं सबसे आखिरी इंसान था। सवाल: फिर आपने शो करने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि तुम्हें यह करना चाहिए। मुझे लगा कि एक-दो शो जीतने के बाद हम अक्सर अपने कंफर्ट जोन में चले जाते हैं। लेकिन मजा तो इसी में है कि खुद को परखा जाए। मैं कॉर्पोरेट लाइन से एक्टर बना और फिर रियलिटी शोज में आया। जब तक कुछ नया करने का जज्बा है, लाइफ में ग्रोथ होती रहेगी। पत्नी आकांक्षा का रिएक्शन भी बिंदास था, उसने तुरंत कहा- “करो!” सवाल: लाइफ में आपने अब तक का सबसे बड़ा जोखिम क्या लिया है? जवाब: अपने कंफर्ट जोन को छोड़ना। सबसे पहले अपने घर को छोड़कर इतने बड़े शहर (मुंबई) में आना, वह भी बिना किसी प्लान के। मुझे कोई इल्म नहीं था कि मैं एक्टिंग करूंगा। ना किसी को जानता था, ना कोई परिवार था, ना ही कोई गाइडेंस या गॉडफादर था। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि लाइफ में काफी रिस्क लिए हैं। सवाल: उस गौरव को क्या कहेंगे जो सालों पहले बिना किसी जुगाड़ के मुंबई आया था? जवाब: मैं उसे बस यही कहूंगा कि “खुद पर विश्वास रख।” आज भी मुझे वही चीज काम आती है जो 20 साल पहले आई थी। अगर मैं उस समय अपने विश्वास से डगमगा जाता, तो शायद मैं इस लाइन में कभी नहीं आता और कॉर्पोरेट में ही रह जाता। मुझे लाइफ में रिग्रेट नहीं करना है, बस कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करना है। सवाल: रोहित शेट्टी के साथ काम करने को लेकर क्या सोच रहे हैं? जवाब: मैं उनसे बिग बॉस के एक वीकेंड का वार में मिला था। उनकी वाइब एक बड़े भाई जैसी है, जो मजाक-मजाक में बड़ी बातें समझा देते हैं। उनकी गाइडेंस में स्टंट सीखना इस शो को करने की एक बड़ी वजह है। वाट तो लगेगी, ऐसा नहीं है कि मैं पत्थर का बना हूं और मुझे डर नहीं लगता। डर सबको लगता है, बस उसे ही ओवरकम करना है। सवाल: शो में पुराने दोस्त और को-कंटेस्टेंट्स भी मिलेंगे, उनके साथ कैसा समीकरण रहेगा? जवाब: फराहना के साथ मेरी अच्छी बॉन्डिंग है। ऋत्विक, रुबीना, जैस्मीन और विशाल को भी जानता हूं। इसके अलावा हर्ष भी कानपुर से हैं, तो इस बार शो में दो कानपुरी होंगे। मुझे उम्मीद है कि हर्ष के साथ अच्छी बॉन्डिंग बनेगी, वो हंसाएगा तो मेंटली हम थोड़े रिलैक्स रहेंगे। सवाल: हाइट, पानी या कीड़े… आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? जवाब: पता नहीं, मुझे लगता है कि ये हर स्टंट में डराएंगे। मैंने सुना है कि इस बार शो का लेवल बहुत बड़ा होने वाला है। अगर मेरी वाट लगेगी तो सबकी लगेगी। मैं बस यह सोचकर शांत रहूंगा कि मैदान सबके लिए बराबर है।

India Acquires S-400 Missile Squadrons

India Acquires S-400 Missile Squadrons

नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक एस-400 मिसाइल के एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। भारत सरकार एस-400 मिसाइलों के 5 नए स्क्वॉड्रन खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। इस हिसाब से करीब 32 बड़ी मिसाइलें मिलेंगी। पिछले साल 7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में हमारे एयर डिफेंस सिस्टम की एस-400 मिसाइलों ने पाकिस्तान में 300 किलोमीटर अंदर घुसकर कहर बरपाया था, अब हमारे रक्षा बेड़े में अब उनकी तादाद बढ़ने जा रही है। खरीदी की दिशा में रूस के साथ चर्चा में सकारात्मक प्रगति हुई है। वायु सेना के लिए 5 एस-400 का पहला सौदा 2018 में हुआ था। 3 सिस्टम्स मिल चुके हैं। दो सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में खर्च हुई बैटरी की मिसाइलों की भरपाई होनी है। इसके बाद नए स्क्वॉड्रन आएंगे। इस तरह दोनों सौदे करीब एक लाख करोड़ रुपए के होंगे। डीआरडीओ एस-400 जैसी ही इंटरसेप्टर मिसाइलें बना रहा है। यह प्रोजेक्ट कुशा है। इसमें एम-1, 2 और 3 मिसाइलें बन रहीं हैं, जिनकी रेंज 105 से 350 किमी होगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था अगले 6 महीने में मिलेंगी पहले सौदे की दो स्क्वॉड्रन एस-400 दोतरफा प्रहार करती है। पहला: ध्वनि की गति से 3 से 14 गुना गति से 400 किमी दूर तक हमला करती हैं। दूसरा: दुश्मन की तरफ से आ रही बैलिस्टिक मिसाइलों को 4.8 किमी प्रति सेकंड की गति से मार गिराती है। मैक 15 गति वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इसकी रेंज से बच नहीं पातीं। पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई थी। दूसरी पर सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बनी थी। इनकी आपूर्ति का रोडमैप बन गया है। युद्ध के कारण रूस से डिलेवरी में देरी हो रही थी। अब भारत को आश्वस्त किया गया है कि आने वाले 6 महीने में शेष दो स्क्वैड्रन सप्लाई कर दिए जाएंगे। अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करना सबसे बड़ी जरूरत है रिटा. एयर वाइस मार्शल संजय भटनागर (स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एवं ऑफेंसिव ऑपरेशन्स) के मुताबिक वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों का विश्लेषण करने के बाद कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान ने 7-8 मई 2025 की दरम्यानी रात दो घंटे में 800 ड्रोन्स की बौछार की थी। ऐसे में ड्रोन्स को काउंटर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। चीन के पास 4 हजार सैटेलाइट हैं और इनमें भी 480 सर्विलांस के लिए हैं। हमें भी अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करने हैं। अभी भारत के पास इस काम के लिए 6 सैटेलाइट हैं। अब 52 उपग्रहों का सिस्टम तैयार हो रहा है। S-400 डिफेंस सिस्टम क्या है? S-400 ट्रायम्फ रूस का एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। यह हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है। इस सिस्टम की खासियत क्या है? S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है। इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है। ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है। S-400 की एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं। S-400 में 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है। कहां तैनात हैं एस-400? एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है। पहली स्क्वाड्रन – पंजाब में तैनात की गई है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। यह पाकिस्तान और चीन दोनों की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के लिए है। दूसरी स्क्वाड्रन – सिक्किम (चीन सीमा) में तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी। यहां से चिकन नेक पर भी निगरानी रखी जाती है। तीसरी स्क्वाड्रन- राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली। इस स्क्वाड्रन से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा मजबूत होती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

One Password for 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions

One Password for 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions

Hindi News National India Public WiFi: One Password For 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions नई दिल्ली21 मिनट पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी कॉपी लिंक देश भर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। प्रतिकात्मक इमेज सरकार पीएम-वाणी की विफलता से सबक लेते हुए एक नया और एडवांस पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाना है। अब यूजर्स को हर हॉटस्पॉट के लिए अलग ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। देश भर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने इसका परामर्श-पत्र जारी करके लोगों से सुझाव मंगाए हैं। सार्वजनिक वाई-फाई को सुरक्षित बनाने के लिए ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3’ जैसे मानक लागू होंगे। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षित यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर मिलेगा। पेपर के अनुसार, मौजूदा वाई फाई सिस्टम इसलिए नहीं चला क्योंकि यह यूजर की जरूरत नहीं बन पाया। साथ ही ऑपरेटर की कमाई नहीं बनी। एडवांस पब्लिक वाई-फाई सिस्टम से जुड़ी 6 जरूरी सवाल क्या सेवा फ्री होगी- यह नेटवर्क बेसिक इस्तेमाल के लिए फ्री होगा। हालांकि, जो लोग हाई-स्पीड इंटरनेट चाहते हैं, उनके लिए छोटे रिचार्ज वाउचर्स से ‘पेड वाई-फाई’ का विकल्प होगा। कैसे फायदेमंद होगा- स्टेशन/बाजार जैसे इलाकों में मोबाइल नेटवर्क पर बहुत दबाव रहता है, जिससे पेमेंट अटक जाते हैं। पब्लिक वाई-फाई इस ट्रैफिक को संभाल लेगा, जिससे इंटरनेट स्पीड बेहतर मिलेगी। ऑपरेटरों के लिए क्या- नए मॉडल में कंपनियां विज्ञापन दिखाकर या डेटा एनालिटिक्स के जरिए कमाई कर सकेंगी। सरकार उन्हें आर्थिक मदद भी देगी ताकि उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। डेटा एनालिटिक्स का इसमें क्या रोल है- कंपनियों को पता होगा कि कहां, किस तरह के विज्ञापन दिखाने हैं और कहां लोग पैसा खर्च करके तेज इंटरनेट चाहते हैं। निजी-सरकारी कंपनियां क्या मिलकर काम करेंगी- हां, भारत नेट (सरकारी) और प्राइवेट फाइबर लाइनों का साझा इस्तेमाल होगा, जिससे नेटवर्क का जाल तेजी से बिछाया जा सके। डिजिटल इंडिया के लिए ये क्यों जरूरी है- मोबाइल नेटवर्क अकेले बढ़ती डेटा डिमांड नहीं संभाल सकते। शिक्षा, ऑनलाइन इलाज जैसी सेवाएं सभी तक पहुंचाने को मजबूत वाई-फाई जरूरी है। सस्ते इंटरनेट से डिजिटल इंफ्रा मजबूत होगा बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक यह न केवल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराकर डिजिटल इंफ्रा को भी मजबूत करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो महंगे डेटा प्लान नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि वाई-फाई हाई-डेटा उपयोग जैसे वीडियो, क्लाउड और एआई आधारित सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करता है। ई-गवर्नेंस जैसी सेवाओं तक पहुंच के लिए भी ये आवश्यक है। ……………………… यह खबर भी पढ़े… बुजुर्गों पर साइबर खतरा, ये 5 उपाय करेंगे सुरक्षा: स्कैमर्स के भावनात्मक दबाव में न आएं, कॉल आए तो परिजन या एक्सपर्ट को बताएं अमेजन ने नया फीचर लॉन्च किया है, जिसमें यूजर प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछकर बातचीत भी कर सकते हैं। कंपनी ने अपने फीचर Hear the Highlights में नया Join the Chat विकल्प जोड़ा है। इसकी मदद से यूजर किसी प्रोडक्ट की ऑडियो समरी सुनते समय टेक्स्ट या आवाज में सवाल पूछ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यूजर पूछ सकता है कि क्या यह कॉफी मशीन बच्चों के लिए ठीक है? एआई प्रोडक्ट डिटेल, कस्टमर रिव्यू और उपलब्ध जानकारी से जवाब देता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

One Password for 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions

One Password for 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions

Hindi News National India Public WiFi: One Password For 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions नई दिल्ली6 मिनट पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी कॉपी लिंक देश भर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। प्रतिकात्मक इमेज सरकार पीएम-वाणी की विफलता से सबक लेते हुए एक नया और उन्नत पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाना है। अब यूजर्स को हर हॉटस्पॉट के लिए अलग ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। देशभर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने इसका परामर्श-पत्र जारी करके लोगों से सुझाव मंगाए हैं। सार्वजनिक वाई-फाई को सुरक्षित बनाने के लिए ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3’ जैसे मानक लागू होंगे। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षित यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर मिलेगा। कमाई का मॉडल बनाना मकसद पेपर के अनुसार, मौजूदा वाई फाई सिस्टम इसलिए नहीं चला क्योंकि यह यूजर की जरूरत नहीं बन पाया। साथ ही ऑपरेटर की कमाई नहीं बनी। इसलिए सरकार प्रस्तावित वाईफाई सिस्टम को ऑपरेटर के लिए कमाई का मॉडल बनाना चाहती है। इसके लिए विज्ञापन-आधारित मॉडल, पेड प्लान व सब्सिडी (वायबिलिटी गैप फंडिंग) जैसे विकल्प दिए जाएंगे। ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट और गांवों में कम लागत वाला ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा। देश की 140 करोड़ की आबादी में अभी महज 2% लोग पब्लिक वाई-फाई उपयोग करते हैं। दक्षिण कोरिया में 80%, अमेरिका में 70%, यूरोप-चीन में 60% व इंग्लैंड में 50% आबादी पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करती है। ट्राई द्वारा प्रस्तावित यह नया ढांचा न सिर्फ इंटरनेट की पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते डेटा के दबाव को भी कम करेगा। सस्ते इंटरनेट से डिजिटल इंफ्रा मजबूत होगा बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक यह न केवल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराकर डिजिटल इंफ्रा को भी मजबूत करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो महंगे डेटा प्लान नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि वाई-फाई हाई-डेटा उपयोग जैसे वीडियो, क्लाउड और एआई आधारित सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करता है। ई-गवर्नेंस जैसी सेवाओं तक पहुंच के लिए भी ये आवश्यक है। ……………………… यह खबर भी पढ़े… बुजुर्गों पर साइबर खतरा, ये 5 उपाय करेंगे सुरक्षा: स्कैमर्स के भावनात्मक दबाव में न आएं, कॉल आए तो परिजन या एक्सपर्ट को बताएं अमेजन ने नया फीचर लॉन्च किया है, जिसमें यूजर प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछकर बातचीत भी कर सकते हैं। कंपनी ने अपने फीचर Hear the Highlights में नया Join the Chat विकल्प जोड़ा है। इसकी मदद से यूजर किसी प्रोडक्ट की ऑडियो समरी सुनते समय टेक्स्ट या आवाज में सवाल पूछ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यूजर पूछ सकता है कि क्या यह कॉफी मशीन बच्चों के लिए ठीक है? एआई प्रोडक्ट डिटेल, कस्टमर रिव्यू और उपलब्ध जानकारी से जवाब देता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा। भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था। TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं। भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। भाजपा को तृणमूल के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा भाजपा को बंगाल में कुल 2,92,24,804 और तृणमूल को 2,60,13,377 वोट मिले। दोनों दलों के बीच कुल वोट का अंतर 32,11,427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोटों की बढ़त मिली। एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता। हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। …………………… पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा। भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था। TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं। भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। भाजपा को तृणमूल के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा भाजपा को बंगाल में कुल 2,92,24,804 और तृणमूल को 2,60,13,377 वोट मिले। दोनों दलों के बीच कुल वोट का अंतर 32,11,427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोटों की बढ़त मिली। एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता। हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। …………………… पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…