Wednesday, 06 May 2026 | 08:35 AM

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Khabar Hatke- UP Youth Arrested for Bones Theft; Crocodile Arrested; Supermodel Statue

Khabar Hatke- UP Youth Arrested for Bones Theft; Crocodile Arrested; Supermodel Statue

उत्तर प्रदेश में प्रेमिका को वश में करने के लिए युवक ने जलती हुई चिता से हड्डियां और खोपड़ी चुरा ली। वहीं, साउथ अफ्रीका में एक मगरमच्छ को आदमी निगलने के शक में पकड़ कर एयरलिफ्ट लिया गया। उधर, जर्मनी की सुपरमॉडल ने खुद को संगमरमर की मूर्ति में बदल लिय . यूपी में ही एक युवक ने डीएम को 17 बार फोन कर हालचाल पूछा, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं, राजस्थान में एक खाली पड़े फ्लैट से 4 घंटे में 250 कैब बुक हो गईं। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

Sunglasses UV Protection: Summer Eye Safety Tips

Sunglasses UV Protection: Summer Eye Safety Tips

24 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक गर्मियों में घर से बाहर निकलना चैलेंजिंग होता है। लेकिन रोजमर्रा के काम से बाहर निकलना मजबूरी है। तेज धूप में बाहर निकलते समय आंखों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे जलन, धुंधलापन और लॉन्ग टर्म में आंखों से जुड़ी बीमारियों का रिस्क होता है। ऐसे में सनग्लासेस आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। सही सनग्लासेस धूप, धूल और हानिकारक UV किरणों से बचाते हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि गर्मियों में सनग्लासेस पहनना क्यों जरूरी है और इसे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। एक्सपर्ट: डॉ. श्रेया गुप्ता, कंसल्टेंट, ऑप्थेल्मोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- क्या गर्मियों में सनग्लासेस पहनना जरूरी है? जवाब- हां, यह आंखों को हानिकारक UV किरणों, तेज रोशनी और धूल से बचाता है। इससे जलन, ड्राईनेस और अन्य समस्याओं का रिस्क कम होता है। सवाल- अल्ट्रावायलेट किरणों का आंखों पर क्या असर पड़ता है? जवाब- सूर्य की रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। नीचे दिए ग्राफिक में इसका असर देखिए- सवाल- क्या सनग्लासेस अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाते हैं? जवाब- हां, सही क्वालिटी के सनग्लासेस UV किरणों से बचाते हैं। खासतौर पर ‘UV400’ प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस आंखों को हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षित रखते हैं। सवाल- क्या सिर्फ तेज धूप में ही सनग्लासेस लगाना जरूरी है या हल्की धूप में भी लगाना चाहिए? जवाब- सनग्लासेस हल्की धूप में भी पहनना चाहिए। UV किरणें बादलों या हल्की धूप में भी मौजूद रहती हैं। इसलिए बाहर निकलते समय सनग्लासेस लगाना बेहतर है। सवाल- तेज धूप में बिना सनग्लासेस बाहर निकलने से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- सनग्लासेस न पहनने से आंखें सीधे UV किरणों और तेज रोशनी के संपर्क में आती हैं। इससे आंखों को कई नुकसान हो सकते हैं। जैसेकि- तेज जलन और रेडनेस। पानी आना और ड्राईनेस। सिरदर्द और आंखों में थकान। नजर में धुंधलापन। लंबे समय में कॉर्निया को नुकसान। मोतियाबिंद का खतरा। धीरे-धीरे नजर में कमजोरी। लंबे समय में रेटिना डैमेज का रिस्क। सवाल- क्या सस्ते या लोकल सनग्लासेस नुकसानदायक हो सकते हैं? जवाब- हां, इनमें UV प्रोटेक्शन नहीं होता है। ये सिर्फ रोशनी कम करते हैं, जिससे आई बॉल(पुतली) फैल जाती है और हानिकारक UV किरणें आंखों में प्रवेश कर सकती हैं। इससे आंखों को डैमेज का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- किस तरह के सनग्लासेस गर्मियों के लिए सबसे बेहतर होते हैं? जवाब- ‘UV400’ या ‘100% UV प्रोटेक्शन’ वाले सनग्लासेस सबसे अच्छे होते हैं। ये आंखों को हानिकारक किरणों से बचाते हैं। धूप की चकाचौंध कम करने के लिए पोलराइज्ड लेंस बेहतर हैं। बेहतर विजन के लिए ग्रे, ब्राउन या हरे रंग के लेंस चुन सकते हैं। आंखों के पूरे कवरेज के लिए बड़े फ्रेम या रैपअराउंड स्टाइल बेहतर है। सवाल- सनग्लासेस आंखों को किन समस्याओं से बचाते हैं? जवाब- सनग्लासेस UV किरणों, तेज रोशनी और धूल से बचाकर कई समस्याओं से सुरक्षा देते हैं। UV सनग्लासेस के सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को गर्मियों में सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए, क्योंकि उन्हें UV किरणें ज्यादा प्रभावित करती हैं। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए, किन्हें सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए- सवाल- सनग्लासेस खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- सनग्लासेस खरीदते समय सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि क्वालिटी और प्रोटेक्शन को प्राथमिकता देना चाहिए। इससे आंखों को सही सेफ्टी मिलती है। इसलिए सनग्लासेस खरीदते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या लंबे समय तक सनग्लासेस पहनने से आंखों पर कोई बुरा असर पड़ता है? जवाब- नहीं, सही क्वालिटी के सनग्लासेस से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। ये आंखों को UV किरणों, धूल और तेज रोशनी से बचाकर सुरक्षा देते हैं। हालांकि खराब क्वालिटी या बिना UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सनग्लासेस से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- बादल होने पर भी UV किरणों का खतरा रहता है? जवाब- हां, बादलों के बावजूद UV किरणें जमीन तक पहुंचती हैं, इसलिए हमेशा आंखों की सुरक्षा जरूरी है। सवाल- क्या सुबह-शाम की धूप में भी UV किरणों का खतरा रहता है? जवाब- हां, सुबह-शाम UV तीव्रता कम होती है, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता है। सवाल- क्या हरेक सनग्लास UV किरणों से प्रोटेक्ट करता है? जवाब- नहीं, केवल UV400 या 100% UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस ही सही सुरक्षा देते हैं। सवाल- क्या सनग्लासेस आंखों को ड्राईनेस और इरिटेशन से बचाते हैं? जवाब- हां, ये धूल, हवा और तेज रोशनी से बचाकर ड्राईनेस और जलन कम करते हैं। सवाल- क्या सनग्लासेस पहनने से आंखों की थकान कम होती है? जवाब- हां, ये तेज रोशनी की चुभन कम करते हैं, जिससे आंखों पर तनाव घटता है। सवाल- क्या कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को भी सनग्लासेस लगाने चाहिए? जवाब- हां, कॉन्टैक्ट लेंस पूरी तरह अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा नहीं देते, इसलिए उन्हें भी सनग्लासेस लगाने चाहिए। ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गर्मियों में न खाएं ये 10 चीजें: डाइटीशियन से जानें इनके हेल्दी विकल्प, सादा और ताजा खाएं, लिक्विड डाइट पर जोर दें गर्मियों में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं। इसलिए खानपान में भी बदलाव की जरूरत होती है। लेकिन लोग स्वाद के लिए अक्सर डीप फ्राइड और स्पाइसी फूड खाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। ऐसे में फिट और एनर्जेटिक रहने के लिए यह जानना जरूरी है कि गर्मियों में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

अभिनेता गौरव खन्ना इन दिनों स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गौरव ने अपनी जिंदगी के संघर्षों, मुंबई आने के सफर और बिना गॉडफादर के मुकाम हासिल करने पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 22 साल पहले जब वे बिना किसी प्लान के कानपुर से पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आए थे, तब से लेकर अब तक उनमें क्या बदलाव आए हैं। इसके साथ ही गौरव ने नए शो को लेकर परिवार के रिएक्शन, रोहित शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव और जिंदगी में जोखिम लेने की अपनी आदत पर भी चर्चा की। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ में हिस्सा लेने जा रहे हैं, फैंस को आपसे काफी उम्मीदें हैं? जवाब: बड़ा अच्छा लगता है जब दर्शक इतना भरोसा दिखाते हैं। पिछले रियलिटी शो (बिग बॉस) में लोगों ने मुझे मेरे असली रूप में देखा। अभी तक वे मुझे सिर्फ किरदारों से जानते थे, लेकिन अब वे असली गौरव (जीके) को जानते हैं। मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूं और उन्हें एंटरटेन करता रहूं। सवाल: इस शो में जीके (गौरव खन्ना) क्या खास करने वाले हैं? जवाब: जीके इस शो में स्टंट करेगा। जीके जिस भी शो में जाता है, वहां जो भी रिक्वायरमेंट होती है, वो जरूर पूरी करता है। सवाल: शो के लिए आपकी क्या तैयारी है? जवाब: मैं कभी कुछ सोचकर नहीं जाता। मैं खुद को उस परिस्थिति में डालता हूं और रिक्वायरमेंट के हिसाब से परफॉर्म करने की कोशिश करता हूं। मुझे स्टंट्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, मैं पहली बार यह सब कर रहा हूं। सवाल: शो का ऑफर आने पर घर वालों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: मेरे माता-पिता कानपुर में रहते हैं और बहुत साधारण लोग हैं। जब मेरी मां को पता चला तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने कहा- “तुम क्यों जा रहे हो? तुम्हें क्या जरूरत है, करियर तो अच्छा खासा चल रहा है।” उन्होंने ऐसा ही मास्टरशेफ और बिग बॉस के टाइम भी कहा था। मैंने उन्हें इस बार भी नहीं बताया था। सच कहूं तो शो का कॉन्ट्रैक्ट साइन करने वाला मैं सबसे आखिरी इंसान था। सवाल: फिर आपने शो करने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि तुम्हें यह करना चाहिए। मुझे लगा कि एक-दो शो जीतने के बाद हम अक्सर अपने कंफर्ट जोन में चले जाते हैं। लेकिन मजा तो इसी में है कि खुद को परखा जाए। मैं कॉर्पोरेट लाइन से एक्टर बना और फिर रियलिटी शोज में आया। जब तक कुछ नया करने का जज्बा है, लाइफ में ग्रोथ होती रहेगी। पत्नी आकांक्षा का रिएक्शन भी बिंदास था, उसने तुरंत कहा- “करो!” सवाल: लाइफ में आपने अब तक का सबसे बड़ा जोखिम क्या लिया है? जवाब: अपने कंफर्ट जोन को छोड़ना। सबसे पहले अपने घर को छोड़कर इतने बड़े शहर (मुंबई) में आना, वह भी बिना किसी प्लान के। मुझे कोई इल्म नहीं था कि मैं एक्टिंग करूंगा। ना किसी को जानता था, ना कोई परिवार था, ना ही कोई गाइडेंस या गॉडफादर था। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि लाइफ में काफी रिस्क लिए हैं। सवाल: उस गौरव को क्या कहेंगे जो सालों पहले बिना किसी जुगाड़ के मुंबई आया था? जवाब: मैं उसे बस यही कहूंगा कि “खुद पर विश्वास रख।” आज भी मुझे वही चीज काम आती है जो 20 साल पहले आई थी। अगर मैं उस समय अपने विश्वास से डगमगा जाता, तो शायद मैं इस लाइन में कभी नहीं आता और कॉर्पोरेट में ही रह जाता। मुझे लाइफ में रिग्रेट नहीं करना है, बस कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करना है। सवाल: रोहित शेट्टी के साथ काम करने को लेकर क्या सोच रहे हैं? जवाब: मैं उनसे बिग बॉस के एक वीकेंड का वार में मिला था। उनकी वाइब एक बड़े भाई जैसी है, जो मजाक-मजाक में बड़ी बातें समझा देते हैं। उनकी गाइडेंस में स्टंट सीखना इस शो को करने की एक बड़ी वजह है। वाट तो लगेगी, ऐसा नहीं है कि मैं पत्थर का बना हूं और मुझे डर नहीं लगता। डर सबको लगता है, बस उसे ही ओवरकम करना है। सवाल: शो में पुराने दोस्त और को-कंटेस्टेंट्स भी मिलेंगे, उनके साथ कैसा समीकरण रहेगा? जवाब: फराहना के साथ मेरी अच्छी बॉन्डिंग है। ऋत्विक, रुबीना, जैस्मीन और विशाल को भी जानता हूं। इसके अलावा हर्ष भी कानपुर से हैं, तो इस बार शो में दो कानपुरी होंगे। मुझे उम्मीद है कि हर्ष के साथ अच्छी बॉन्डिंग बनेगी, वो हंसाएगा तो मेंटली हम थोड़े रिलैक्स रहेंगे। सवाल: हाइट, पानी या कीड़े… आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? जवाब: पता नहीं, मुझे लगता है कि ये हर स्टंट में डराएंगे। मैंने सुना है कि इस बार शो का लेवल बहुत बड़ा होने वाला है। अगर मेरी वाट लगेगी तो सबकी लगेगी। मैं बस यह सोचकर शांत रहूंगा कि मैदान सबके लिए बराबर है।

Vietnam President Tu Lam Visits Bodh Gaya

Vietnam President Tu Lam Visits Bodh Gaya

Hindi News Career Vietnam President Tu Lam Visits Bodh Gaya | May 6 Current Affairs 37 मिनट पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. 5 राज्यों के विधान सभा चुनाव के रिजल्ट घोषित 5 मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। इसमें 3 राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी। पश्चिम बंगाल में 293 सीट का रिजल्ट जारी हुआ और पहली बार बीजेपी को 207 सीटों के साथ बहुमत मिला। पश्चिम बंगाल में 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट के चुनाव रद्द कर दिए गए थे, जिसपर 21 मई को दोबारा मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में 3 बार से सत्ता में रहीं ममता बेनर्जी की पार्टी TMC हार गई। तमिलनाडु में 234 सीटों पर चुनाव हुआ था और जहां एक्टर विजय की TVK पार्टी ने 108 सीटें जीती। असम में 126 सीटों पर चुनाव हुआ। भाजपा ने 89 पर चुनाव लड़ा और 82 सीटें जीतीं। भाजपा लगातार तीसरी बार असम में सरकार बनाएगी।। केरलम में 140 सीटों पर चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस ने 62 सीटें जीतीं। वहीं, पुडुचेरी में NDA की मौजूदा सरकार की वापसी हुई। पीएम मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। 2. वियतनाम के राष्ट्रपति टू लैम भारत दौरे पर आए 5 मई को वियतनाम के राष्ट्रपति टू लैम भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर बिहार के गया पहुंचे हैं। उनके साथ एक हाई लेवल डेलिगेशन भी भारत आया है। हाई लेवल डेलिगेशन में वियतनाम सरकार के कई मंत्री और सीनियर ऑफिसर शामिल हैं। वियतनामी राष्ट्रपति टू लैम पहले दिन नई दिल्ली पहुंचे हैं। टू लैम इस यात्रा के दौरान बोधगया के महाबोधि टेंपल पहुंचे। ये भारत और वियतनाम के बीच बौद्ध संबंधों को बताता है। वे इस यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ आपसी हित के मुद्दों पर बात करेंगे। लैम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेंगे। गुरुवार को राष्ट्रपति टू लैम मुंबई का दौरा करेंगे। वियतनाम के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ये राष्ट्रपति टू लैम की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। राष्ट्रपति लैम की ये दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे ले जाने की 10वीं वर्षगांठ है। नेताओं के बीच बातचीत से मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलने और भारत और वियतनाम के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। राष्ट्रपति टू लैम महाबोधि मंदिर पहुंचे, जहां पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. भारत के दो पत्रकारों को पुलित्जर पुरस्कार मिला 4 मई को पुलित्जर पुरस्कार की घोषणा की गई है। इसमें भारत के दो पत्रकार आनंद आर.के और सुपर्णा शर्मा को इलस्‍ट्रेटेड रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला है। पुलित्जर पुरस्कार देश में साइबर अपराध का पर्दाफाश करने वाली एक फोटो स्टोरी की रिपोर्टिंग के लिए दिया गया है। पत्रकारों ने ये रिपोर्ट ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की थी। इस रिपोर्ट में साइबर अपराध और मानव तस्करी का खुलासा किया गया था। इसमें बताया गया था कि कैसे अपराधी भारत समेत कई देशों के लोगों को फंसाकर कैंपों में कैद कर लेते हैं और उनसे दूसरे देशों के लोगों के साथ धोखाधड़ी करवाते हैं। आनंद मुंबई के एक इलस्ट्रेटर और विज़ुअल आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं। वहीं, सुपर्णा शर्मा भारत में एक फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं। हनोई के रिपोर्टर अनिरूद्ध घोषाल को इंटरनेशनल रिपोर्टिंग कैटेगरी में ये अवॉर्ड दिया गया है। अनिरूद्ध ने अपनी रिपोर्टिंग में अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे सर्विलांस इक्विपमेंट की जांच की थी। ये इक्विपमेंट पहले सिलिकॉन वैली में बनाए गए थे और बाद में चीन में इन्हें डेवलप किया गया था। इस रिपोर्ट सीरीज में यह भी बताया गया कि चीन और अन्य देश इन उपकरणों का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। इसे अमेरिका में कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा दिया जाता है। पुरस्कार के साथ 15,000 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि प्रदान की जाती है। पुलित्जर पुरस्कार मुख्य रूप से पत्रकारिता, साहित्य और संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जाता है। पुलित्जर पुरस्कार की स्थापना 1917 में समाचार पत्र प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के बाद की गई थी। ये पुरस्कार 23 अलग-अलग कैटेगरी में दिया जाता है। गोबिंद बिहारी लाल 1937 में यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे। पुलित्जर प्राइज वेबसाइट के मुताबिक आनंद आरके आनंद आरके मुंबई में स्थित एक चित्रकार और विजुअल आर्टिस्ट हैं। आनंद ने 2011 में सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से ग्रेजुएशन किया। आनंद ने इमेज कॉमिक्स के ग्राफिक उपन्यास ‘ब्लू इन ग्रीन’ के लिए आर्टिस्ट जॉन पियर्सन के साथ बेस्ट पेंटर/मल्टीमीडिया आर्टिस्ट के लिए 2021 में आइजनर पुरस्कार जीता। आनंद ने ‘ग्रैफिटीज वॉल’ (डार्क हॉर्स कॉमिक्स), ‘रेडियो एपोकैलिप्स’ (वॉल्ट), और ‘रिसरेक्शन मैन’ (डीसी कॉमिक्स) बनाईं। इसके साथ ही आनंद ने बूम जैसे पब्लिशर्स के लिए स्टूडियोज, 2000AD, टिनी ओनियन और इमेज कॉमिक्स के कवर डिजाइन किए। आनंद ने हुंडई, द इंडियन नेवी, इमेजिनएफएक्स मैगजीन और हेवी मेटल मैगजीन के लिए भी काम किया है। पुलित्जर प्राइज वेबसाइट के मुताबिक सुपर्णा शर्मा सुपर्णा एक फ्रीलांसर पत्रकार और संपादक हैं, वे तीन दशकों से ज्यादा से इस फील्ड में है। सुपर्णा ने अपने करियर में क्राइम, नेशनल डिजास्टर और करप्शन को कवर किया है। 2023 में सुपर्णा ने अल-जजीरा के लिए की उनकी एक इंवेस्टिगेशन में उन्होंने दो सीनियर सिटीजन की मौत के साथ भारत में अरबों डॉलर की एलडर केयर कम्युनिटी के लालच और लापरवाही के सच को उजागर किया था। सुपर्णा ने देश में रेसलर चीफ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद भारत की शीर्ष महिला पहलवानों द्वारा झेले गए सेक्ससुअल हैरेसमेंट पर भी रिपोर्ट की थी। सुपर्णा ने देश में कैसे कुछ खास संस्थानों के ग्रेजुएट्स ने वोटर और चुनावों में हेरफेर करने में मदद पर भी एक रिपोर्ट की थी। सुपर्णा अल जजीरा, रोलिंग स्टोन इंडिया, बीबीसी अफ्रीका, द इंडियन एक्सप्रेस और फ्रंटलाइन के लिए स्टोरी कर चुकी हैं। सुपर्णा द एशियन एज के एडिटर, द टाइम्स ऑफ

Emotional Manipulation: Relationship Stress Advice

Emotional Manipulation: Relationship Stress Advice

Hindi News Lifestyle Emotional Manipulation: Relationship Stress Advice | Psychologist Jaya Sukul Tips 41 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल- मैं एक सरकारी बैंक में कैशियर हूं। कुछ महीनों से एक लड़की के साथ रिलेशनशिप में हूं। हमारे बीच सब अच्छा है, लेकिन वो अपनी जरूरतें सीधे बोलने की बजाय इशारों में कहती है। जैसे- ‘मेरे पास बाहर जाने के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं।’ ‘उस लड़की की वॉच कितनी अच्छी है।’ ‘उस लड़की का बैग कितना प्यारा लग रहा है।’ कई बार वो अपने फाइनेंशियल या पर्सनल स्ट्रेस भी ऐसे ही बताती है, ताकि मैं खुद मदद की पेशकश करूं। शुरू में मैंने किया भी, लेकिन अब मैं मेंटली थक गया हूं। क्या वह जानबूझकर ऐसा करती है ताकि मैं गिल्ट महसूस करूं? क्या ये इमोशनल इंफ्लुएंस है? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने इतने स्पष्ट शब्दों में सवाल पूछा। इसी तरह हेल्दी रिलेशनशिप के लिए भी स्पष्ट संवाद जरूरी है। आपने लिखा कि आपकी पार्टनर हर बात इशारों में कहती है। ऐसी स्थिति में थकान महसूस होना स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और प्रैक्टिकल सॉल्यूशन पर बात करते हैं। पार्टनर बता रहा है या पहेली बुझा रहा है? रिलेशनशिप में अपनी बात रखना हर किसी का हक है, लेकिन उसे कहने का तरीका स्पष्ट होना चाहिए। बार-बार बातों को घुमाना और खुद को ‘बेचारा’ दिखाना इमोशनल मैनिपुलेशन है। यह स्थिति धीरे-धीरे रिश्ते की सहजता को खत्म कर सकती है। ग्राफिक में दिए उदाहरणों से समझें कि ‘मैनिपुलेशन’ और ‘हेल्दी कम्युनिकेशन’ में क्या फर्क है- मैनिपुलेशन की साइकोलॉजी अगर किसी रिलेशनशिप में एक पार्टनर हर बार इशारों में बात कहता है, तो दूसरा ‘डिकोडिंग मोड’ में चला जाता है। इसे ‘डिसीजन फटीग’ भी कहते हैं, जहां व्यक्ति हर वक्त यह सोचकर तनाव में रहता है कि सामने वाले की किस बात का क्या मतलब है। आपने लिखा कि आपकी गर्लफ्रेंड अपनी डिमांड्स इसी तरह रखती है। इसके बावजूद अगर आप सभी डिमांड्स पूरी कर रहे हैं तो आपको सेल्फ-एसेसमेंट करना चाहिए। कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ के शिकार तो नहीं, अपना सेल्फ-एसेसमेंट करें रिश्तों में कभी-कभी हम वह सब भी करने लगते हैं, जो नहीं करना चाहते। इसकी वजह ‘गिल्ट’ हो सकती है। नीचे दिए एसेसमेंट टेस्ट से समझिए कि कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ में तो नहीं जा रहे हैं। कैसे करें? नीचे ग्राफिक में 7 सवाल दिए गए हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़ें और अपनी स्थिति के अनुसार खुद को 0 से 3 के बीच नंबर दें- 0: बिल्कुल नहीं 1: कभी-कभार 2: अक्सर 3: हमेशा/हर बार फिर स्कोर एनालिसिस करें- सभी सवालों के नंबरों को जोड़ लें और अपना टोटल स्कोर देखें। अगर स्कोर 15 से ऊपर है, तो यह ‘क्रॉनिक गिल्ट ट्रिप’ का संकेत है। इसका मतलब है कि आपको अपनी बाउंड्रीज तय करने और खुद पर काम करने की सख्त जरूरत है। अगर स्कोर 6-14 के बीच है तो सतर्क हो जाएं और सुधार करें। अगर स्कोर 1-5 के बीच है तो कोई समस्या नहीं है। प्रेम का मतलब अटकलें लगाना नहीं है आपने लिखा कि वह अपनी पर्सनल बातें शेयर करते समय भी यही तरीका फॉलो करती है। साइकोलॉजी के मुताबिक, कुछ लोग ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि ‘ना’ की गुंजाइश खत्म हो जाए। उन्हें लगता है कि चीजें सीधे मांगने पर मना किया जा सकता है। इसलिए वे अपनी बात कहने के लिए इशारों का सहारा लेते हैं। लेकिन किसी भी रिश्ते में यह तरीका हेल्दी नहीं है। रिलेशनशिप में यह तरीका टॉक्सिक है कभी-कभी लोग अनजाने में भी इस तरह बिहेव करते हैं। ऐसा हो सकता है कि उन्होंने बचपन से इसी तरह अपनी बातें मनवाई हों। इसे ‘लर्न्ड बिहेवियर’ कहते हैं। लेकिन एडल्ट रिलेशनशिप में यह तरीका ‘टॉक्सिक’ है। आपको भी यह समझना होगा कि हेल्दी और टॉक्सिक बिहेवियर में क्या फर्क है- समझदार आदमी को क्या करना चाहिए? नीचे दिए 6 पॉइंट्स से समझें कि इस सिचुशन में क्या करना चाहिए- बाउंड्री सेट करें: अपनी आर्थिक और मानसिक सीमाओं को स्पष्ट करें। बताएं कि आप क्या कर सकते हैं और क्या आपकी क्षमता से बाहर है। खुलकर बातचीत करें: जब वह इशारों में बात करे तो बहुत ही सौम्यता से कहें, “मैं समझ नहीं पा रहा कि तुम क्या कहना चाह रही हो, क्या तुम खुलकर बताओगी?” पार्टनर को अपनी बात सीधे कहने के लिए प्रोत्साहित करें। पैसे का दिखावा न करें: रिश्ते में गिफ्ट्स से ज्यादा अहमियत समय और इमोशनल सपोर्ट को दें। शर्मिंदगी महसूस न करें: अगर आप कोई डिमांड पूरी नहीं कर पाते तो उसे अपनी असफलता न मानें। गर्लफ्रेंड को ‘क्राउन’ न समझें: उसे अपना पार्टनर मानें। एक साथी अपनी जरूरतों के लिए दूसरे पर दबाव नहीं डालता, बल्कि मिलकर समाधान निकालता है। शोशेबाजी न करें: बाहरी चमक-धमक की बजाय रिश्ते की गहराई और सच्चाई पर ध्यान दें। अंतिम सलाह कोई रिश्ता ‘माइंड रीडिंग’ से नहीं, बल्कि ‘स्पष्ट संवाद’ से सुंदर बनता है। अगर पार्टनर की बातें पहेली बन जाएं, तो उन्हें सुलझाने की बजाय खुलकर बात करें। विनम्रता से अपनी बाउंड्रीज बताएं और खुद को भी अनावश्यक गिल्ट से मुक्त रखें। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया: हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। ये अच्छी बात है कि आप अपनी भावनाओं को लेकर अवेयर हैं और जल्दबाजी में किसी फैसले से पहले इसे समझना चाहते हैं। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

अभिनेता गौरव खन्ना इन दिनों स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गौरव ने अपनी जिंदगी के संघर्षों, मुंबई आने के सफर और बिना गॉडफादर के मुकाम हासिल करने पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 22 साल पहले जब वे बिना किसी प्लान के कानपुर से पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आए थे, तब से लेकर अब तक उनमें क्या बदलाव आए हैं। इसके साथ ही गौरव ने नए शो को लेकर परिवार के रिएक्शन, रोहित शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव और जिंदगी में जोखिम लेने की अपनी आदत पर भी चर्चा की। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ में हिस्सा लेने जा रहे हैं, फैंस को आपसे काफी उम्मीदें हैं? जवाब: बड़ा अच्छा लगता है जब दर्शक इतना भरोसा दिखाते हैं। पिछले रियलिटी शो (बिग बॉस) में लोगों ने मुझे मेरे असली रूप में देखा। अभी तक वे मुझे सिर्फ किरदारों से जानते थे, लेकिन अब वे असली गौरव (जीके) को जानते हैं। मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूं और उन्हें एंटरटेन करता रहूं। सवाल: इस शो में जीके (गौरव खन्ना) क्या खास करने वाले हैं? जवाब: जीके इस शो में स्टंट करेगा। जीके जिस भी शो में जाता है, वहां जो भी रिक्वायरमेंट होती है, वो जरूर पूरी करता है। सवाल: शो के लिए आपकी क्या तैयारी है? जवाब: मैं कभी कुछ सोचकर नहीं जाता। मैं खुद को उस परिस्थिति में डालता हूं और रिक्वायरमेंट के हिसाब से परफॉर्म करने की कोशिश करता हूं। मुझे स्टंट्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, मैं पहली बार यह सब कर रहा हूं। सवाल: शो का ऑफर आने पर घर वालों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: मेरे माता-पिता कानपुर में रहते हैं और बहुत साधारण लोग हैं। जब मेरी मां को पता चला तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने कहा- “तुम क्यों जा रहे हो? तुम्हें क्या जरूरत है, करियर तो अच्छा खासा चल रहा है।” उन्होंने ऐसा ही मास्टरशेफ और बिग बॉस के टाइम भी कहा था। मैंने उन्हें इस बार भी नहीं बताया था। सच कहूं तो शो का कॉन्ट्रैक्ट साइन करने वाला मैं सबसे आखिरी इंसान था। सवाल: फिर आपने शो करने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि तुम्हें यह करना चाहिए। मुझे लगा कि एक-दो शो जीतने के बाद हम अक्सर अपने कंफर्ट जोन में चले जाते हैं। लेकिन मजा तो इसी में है कि खुद को परखा जाए। मैं कॉर्पोरेट लाइन से एक्टर बना और फिर रियलिटी शोज में आया। जब तक कुछ नया करने का जज्बा है, लाइफ में ग्रोथ होती रहेगी। पत्नी आकांक्षा का रिएक्शन भी बिंदास था, उसने तुरंत कहा- “करो!” सवाल: लाइफ में आपने अब तक का सबसे बड़ा जोखिम क्या लिया है? जवाब: अपने कंफर्ट जोन को छोड़ना। सबसे पहले अपने घर को छोड़कर इतने बड़े शहर (मुंबई) में आना, वह भी बिना किसी प्लान के। मुझे कोई इल्म नहीं था कि मैं एक्टिंग करूंगा। ना किसी को जानता था, ना कोई परिवार था, ना ही कोई गाइडेंस या गॉडफादर था। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि लाइफ में काफी रिस्क लिए हैं। सवाल: उस गौरव को क्या कहेंगे जो सालों पहले बिना किसी जुगाड़ के मुंबई आया था? जवाब: मैं उसे बस यही कहूंगा कि “खुद पर विश्वास रख।” आज भी मुझे वही चीज काम आती है जो 20 साल पहले आई थी। अगर मैं उस समय अपने विश्वास से डगमगा जाता, तो शायद मैं इस लाइन में कभी नहीं आता और कॉर्पोरेट में ही रह जाता। मुझे लाइफ में रिग्रेट नहीं करना है, बस कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करना है। सवाल: रोहित शेट्टी के साथ काम करने को लेकर क्या सोच रहे हैं? जवाब: मैं उनसे बिग बॉस के एक वीकेंड का वार में मिला था। उनकी वाइब एक बड़े भाई जैसी है, जो मजाक-मजाक में बड़ी बातें समझा देते हैं। उनकी गाइडेंस में स्टंट सीखना इस शो को करने की एक बड़ी वजह है। वाट तो लगेगी, ऐसा नहीं है कि मैं पत्थर का बना हूं और मुझे डर नहीं लगता। डर सबको लगता है, बस उसे ही ओवरकम करना है। सवाल: शो में पुराने दोस्त और को-कंटेस्टेंट्स भी मिलेंगे, उनके साथ कैसा समीकरण रहेगा? जवाब: फराहना के साथ मेरी अच्छी बॉन्डिंग है। ऋत्विक, रुबीना, जैस्मीन और विशाल को भी जानता हूं। इसके अलावा हर्ष भी कानपुर से हैं, तो इस बार शो में दो कानपुरी होंगे। मुझे उम्मीद है कि हर्ष के साथ अच्छी बॉन्डिंग बनेगी, वो हंसाएगा तो मेंटली हम थोड़े रिलैक्स रहेंगे। सवाल: हाइट, पानी या कीड़े… आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? जवाब: पता नहीं, मुझे लगता है कि ये हर स्टंट में डराएंगे। मैंने सुना है कि इस बार शो का लेवल बहुत बड़ा होने वाला है। अगर मेरी वाट लगेगी तो सबकी लगेगी। मैं बस यह सोचकर शांत रहूंगा कि मैदान सबके लिए बराबर है।

India Acquires S-400 Missile Squadrons

India Acquires S-400 Missile Squadrons

नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक एस-400 मिसाइल के एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। भारत सरकार एस-400 मिसाइलों के 5 नए स्क्वॉड्रन खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। इस हिसाब से करीब 32 बड़ी मिसाइलें मिलेंगी। पिछले साल 7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में हमारे एयर डिफेंस सिस्टम की एस-400 मिसाइलों ने पाकिस्तान में 300 किलोमीटर अंदर घुसकर कहर बरपाया था, अब हमारे रक्षा बेड़े में अब उनकी तादाद बढ़ने जा रही है। खरीदी की दिशा में रूस के साथ चर्चा में सकारात्मक प्रगति हुई है। वायु सेना के लिए 5 एस-400 का पहला सौदा 2018 में हुआ था। 3 सिस्टम्स मिल चुके हैं। दो सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में खर्च हुई बैटरी की मिसाइलों की भरपाई होनी है। इसके बाद नए स्क्वॉड्रन आएंगे। इस तरह दोनों सौदे करीब एक लाख करोड़ रुपए के होंगे। डीआरडीओ एस-400 जैसी ही इंटरसेप्टर मिसाइलें बना रहा है। यह प्रोजेक्ट कुशा है। इसमें एम-1, 2 और 3 मिसाइलें बन रहीं हैं, जिनकी रेंज 105 से 350 किमी होगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था अगले 6 महीने में मिलेंगी पहले सौदे की दो स्क्वॉड्रन एस-400 दोतरफा प्रहार करती है। पहला: ध्वनि की गति से 3 से 14 गुना गति से 400 किमी दूर तक हमला करती हैं। दूसरा: दुश्मन की तरफ से आ रही बैलिस्टिक मिसाइलों को 4.8 किमी प्रति सेकंड की गति से मार गिराती है। मैक 15 गति वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इसकी रेंज से बच नहीं पातीं। पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई थी। दूसरी पर सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बनी थी। इनकी आपूर्ति का रोडमैप बन गया है। युद्ध के कारण रूस से डिलेवरी में देरी हो रही थी। अब भारत को आश्वस्त किया गया है कि आने वाले 6 महीने में शेष दो स्क्वैड्रन सप्लाई कर दिए जाएंगे। अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करना सबसे बड़ी जरूरत है रिटा. एयर वाइस मार्शल संजय भटनागर (स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एवं ऑफेंसिव ऑपरेशन्स) के मुताबिक वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों का विश्लेषण करने के बाद कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान ने 7-8 मई 2025 की दरम्यानी रात दो घंटे में 800 ड्रोन्स की बौछार की थी। ऐसे में ड्रोन्स को काउंटर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। चीन के पास 4 हजार सैटेलाइट हैं और इनमें भी 480 सर्विलांस के लिए हैं। हमें भी अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करने हैं। अभी भारत के पास इस काम के लिए 6 सैटेलाइट हैं। अब 52 उपग्रहों का सिस्टम तैयार हो रहा है। S-400 डिफेंस सिस्टम क्या है? S-400 ट्रायम्फ रूस का एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। यह हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है। इस सिस्टम की खासियत क्या है? S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है। इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है। ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है। S-400 की एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं। S-400 में 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है। कहां तैनात हैं एस-400? एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है। पहली स्क्वाड्रन – पंजाब में तैनात की गई है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। यह पाकिस्तान और चीन दोनों की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के लिए है। दूसरी स्क्वाड्रन – सिक्किम (चीन सीमा) में तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी। यहां से चिकन नेक पर भी निगरानी रखी जाती है। तीसरी स्क्वाड्रन- राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली। इस स्क्वाड्रन से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा मजबूत होती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

One Password for 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions

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Hindi News National India Public WiFi: One Password For 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions नई दिल्ली21 मिनट पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी कॉपी लिंक देश भर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। प्रतिकात्मक इमेज सरकार पीएम-वाणी की विफलता से सबक लेते हुए एक नया और एडवांस पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाना है। अब यूजर्स को हर हॉटस्पॉट के लिए अलग ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। देश भर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने इसका परामर्श-पत्र जारी करके लोगों से सुझाव मंगाए हैं। सार्वजनिक वाई-फाई को सुरक्षित बनाने के लिए ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3’ जैसे मानक लागू होंगे। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षित यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर मिलेगा। पेपर के अनुसार, मौजूदा वाई फाई सिस्टम इसलिए नहीं चला क्योंकि यह यूजर की जरूरत नहीं बन पाया। साथ ही ऑपरेटर की कमाई नहीं बनी। एडवांस पब्लिक वाई-फाई सिस्टम से जुड़ी 6 जरूरी सवाल क्या सेवा फ्री होगी- यह नेटवर्क बेसिक इस्तेमाल के लिए फ्री होगा। हालांकि, जो लोग हाई-स्पीड इंटरनेट चाहते हैं, उनके लिए छोटे रिचार्ज वाउचर्स से ‘पेड वाई-फाई’ का विकल्प होगा। कैसे फायदेमंद होगा- स्टेशन/बाजार जैसे इलाकों में मोबाइल नेटवर्क पर बहुत दबाव रहता है, जिससे पेमेंट अटक जाते हैं। पब्लिक वाई-फाई इस ट्रैफिक को संभाल लेगा, जिससे इंटरनेट स्पीड बेहतर मिलेगी। ऑपरेटरों के लिए क्या- नए मॉडल में कंपनियां विज्ञापन दिखाकर या डेटा एनालिटिक्स के जरिए कमाई कर सकेंगी। सरकार उन्हें आर्थिक मदद भी देगी ताकि उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। डेटा एनालिटिक्स का इसमें क्या रोल है- कंपनियों को पता होगा कि कहां, किस तरह के विज्ञापन दिखाने हैं और कहां लोग पैसा खर्च करके तेज इंटरनेट चाहते हैं। निजी-सरकारी कंपनियां क्या मिलकर काम करेंगी- हां, भारत नेट (सरकारी) और प्राइवेट फाइबर लाइनों का साझा इस्तेमाल होगा, जिससे नेटवर्क का जाल तेजी से बिछाया जा सके। डिजिटल इंडिया के लिए ये क्यों जरूरी है- मोबाइल नेटवर्क अकेले बढ़ती डेटा डिमांड नहीं संभाल सकते। शिक्षा, ऑनलाइन इलाज जैसी सेवाएं सभी तक पहुंचाने को मजबूत वाई-फाई जरूरी है। सस्ते इंटरनेट से डिजिटल इंफ्रा मजबूत होगा बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक यह न केवल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराकर डिजिटल इंफ्रा को भी मजबूत करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो महंगे डेटा प्लान नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि वाई-फाई हाई-डेटा उपयोग जैसे वीडियो, क्लाउड और एआई आधारित सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करता है। ई-गवर्नेंस जैसी सेवाओं तक पहुंच के लिए भी ये आवश्यक है। ……………………… यह खबर भी पढ़े… बुजुर्गों पर साइबर खतरा, ये 5 उपाय करेंगे सुरक्षा: स्कैमर्स के भावनात्मक दबाव में न आएं, कॉल आए तो परिजन या एक्सपर्ट को बताएं अमेजन ने नया फीचर लॉन्च किया है, जिसमें यूजर प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछकर बातचीत भी कर सकते हैं। कंपनी ने अपने फीचर Hear the Highlights में नया Join the Chat विकल्प जोड़ा है। इसकी मदद से यूजर किसी प्रोडक्ट की ऑडियो समरी सुनते समय टेक्स्ट या आवाज में सवाल पूछ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यूजर पूछ सकता है कि क्या यह कॉफी मशीन बच्चों के लिए ठीक है? एआई प्रोडक्ट डिटेल, कस्टमर रिव्यू और उपलब्ध जानकारी से जवाब देता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News National India Public WiFi: One Password For 4 Lakh Hotspots? TRAI Seeks Suggestions नई दिल्ली6 मिनट पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी कॉपी लिंक देश भर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। प्रतिकात्मक इमेज सरकार पीएम-वाणी की विफलता से सबक लेते हुए एक नया और उन्नत पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाना है। अब यूजर्स को हर हॉटस्पॉट के लिए अलग ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। देशभर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने इसका परामर्श-पत्र जारी करके लोगों से सुझाव मंगाए हैं। सार्वजनिक वाई-फाई को सुरक्षित बनाने के लिए ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3’ जैसे मानक लागू होंगे। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षित यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर मिलेगा। कमाई का मॉडल बनाना मकसद पेपर के अनुसार, मौजूदा वाई फाई सिस्टम इसलिए नहीं चला क्योंकि यह यूजर की जरूरत नहीं बन पाया। साथ ही ऑपरेटर की कमाई नहीं बनी। इसलिए सरकार प्रस्तावित वाईफाई सिस्टम को ऑपरेटर के लिए कमाई का मॉडल बनाना चाहती है। इसके लिए विज्ञापन-आधारित मॉडल, पेड प्लान व सब्सिडी (वायबिलिटी गैप फंडिंग) जैसे विकल्प दिए जाएंगे। ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट और गांवों में कम लागत वाला ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा। देश की 140 करोड़ की आबादी में अभी महज 2% लोग पब्लिक वाई-फाई उपयोग करते हैं। दक्षिण कोरिया में 80%, अमेरिका में 70%, यूरोप-चीन में 60% व इंग्लैंड में 50% आबादी पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करती है। ट्राई द्वारा प्रस्तावित यह नया ढांचा न सिर्फ इंटरनेट की पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते डेटा के दबाव को भी कम करेगा। सस्ते इंटरनेट से डिजिटल इंफ्रा मजबूत होगा बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक यह न केवल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराकर डिजिटल इंफ्रा को भी मजबूत करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो महंगे डेटा प्लान नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि वाई-फाई हाई-डेटा उपयोग जैसे वीडियो, क्लाउड और एआई आधारित सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करता है। ई-गवर्नेंस जैसी सेवाओं तक पहुंच के लिए भी ये आवश्यक है। ……………………… यह खबर भी पढ़े… बुजुर्गों पर साइबर खतरा, ये 5 उपाय करेंगे सुरक्षा: स्कैमर्स के भावनात्मक दबाव में न आएं, कॉल आए तो परिजन या एक्सपर्ट को बताएं अमेजन ने नया फीचर लॉन्च किया है, जिसमें यूजर प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछकर बातचीत भी कर सकते हैं। कंपनी ने अपने फीचर Hear the Highlights में नया Join the Chat विकल्प जोड़ा है। इसकी मदद से यूजर किसी प्रोडक्ट की ऑडियो समरी सुनते समय टेक्स्ट या आवाज में सवाल पूछ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यूजर पूछ सकता है कि क्या यह कॉफी मशीन बच्चों के लिए ठीक है? एआई प्रोडक्ट डिटेल, कस्टमर रिव्यू और उपलब्ध जानकारी से जवाब देता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा। भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था। TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं। भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। भाजपा को तृणमूल के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा भाजपा को बंगाल में कुल 2,92,24,804 और तृणमूल को 2,60,13,377 वोट मिले। दोनों दलों के बीच कुल वोट का अंतर 32,11,427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोटों की बढ़त मिली। एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता। हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। …………………… पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…