Religion Choice Right From Birth, Not By Marriage; Says Exclusion Discriminatory

Hindi News National SC: Religion Choice Right From Birth, Not By Marriage; Says Exclusion Discriminatory नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। नौ जजों की संविधान पीठ यह सुनवाई कर रही है। इसमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश, जैसे सबरीमाला मंदिर, और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर भी विचार हो रहा है। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… क्या है मामला? यह मामला 1986 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ दाऊदी बोहरा कम्युनिटी की PIL से जुड़ा है। इसमें 1962 के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 को रद्द कर दिया गया था। उस कानून के तहत किसी सदस्य को बहिष्कृत करना गैरकानूनी था। 1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर बहिष्कार का अधिकार समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(b) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने सुधारवादी बोहराओं की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि बहिष्कार सीधे तौर पर मानव गरिमा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके मुवक्किल के पिता असगर अली इंजीनियर खुद बहिष्कार के शिकार रहे थे। रामचंद्रन ने कहा कि दाऊदी बोहरा समुदाय में धार्मिक प्रमुख को “दाई” कहा जाता है, जिसे सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि बच्चे बालिग होने पर दाई के प्रति पूर्ण निष्ठा की शपथ लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर धर्म में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ नियम होते हैं। लेकिन असली सवाल सजा की सीमा और उसके मानव गरिमा पर असर का है। इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या याचिका आर्टिकल 32 के तहत 1962 के संविधान पीठ के फैसले को रद्द करने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट अपने ही पुराने फैसले को ऐसे कैसे नजरअंदाज कर सकता है। कॉन्सिट्यूशन बेंच का फैसला बदला तो यह गंभीर मुद्दा उन्होंने कहा, “हम भी सख्त नियमों से बंधे हैं। अगर हर आर्टिकल 32 की याचिका पर कॉन्सिट्यूशन बेंच के फैसले को बदला जाएगा, तो यह गंभीर मुद्दा है।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि कोर्ट कल सबरीमाला मामले में इसी तरह की याचिकाओं पर सवाल उठा रहा था। ऐसे में अब अलग रुख नहीं अपनाया जा सकता। इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन से भी सवाल किए थे। इसी NGO की याचिका पर सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इसी बीच, वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने पारसी महिला की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल 26(b) को ज्यादा महत्व दिया गया तो यह व्यक्तिगत धार्मिक अधिकारों को खत्म कर सकता है। खंबाटा के मुताबिक, आर्टिकल 26(b) का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं को सरकारी हस्तक्षेप से बचाना है, न कि व्यक्तियों के अधिकारों को दबाना। बता दें कि यह मामला 1962 के फैसले को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि अगर कोई पारसी महिला दूसरे धर्म में शादी करती है और उसे समुदाय से बाहर कर दिया जाता है, तो यह पहली नजर में भेदभाव लगता है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Religion Choice Right From Birth, Not By Marriage; Says Exclusion Discriminatory

Hindi News National SC: Religion Choice Right From Birth, Not By Marriage; Says Exclusion Discriminatory नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। नौ जजों की संविधान पीठ यह सुनवाई कर रही है। इसमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश, जैसे सबरीमाला मंदिर, और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर भी विचार हो रहा है। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… क्या है मामला? यह मामला 1986 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ दाऊदी बोहरा कम्युनिटी की PIL से जुड़ा है। इसमें 1962 के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 को रद्द कर दिया गया था। उस कानून के तहत किसी सदस्य को बहिष्कृत करना गैरकानूनी था। 1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर बहिष्कार का अधिकार समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(b) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने सुधारवादी बोहराओं की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि बहिष्कार सीधे तौर पर मानव गरिमा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके मुवक्किल के पिता असगर अली इंजीनियर खुद बहिष्कार के शिकार रहे थे। रामचंद्रन ने कहा कि दाऊदी बोहरा समुदाय में धार्मिक प्रमुख को “दाई” कहा जाता है, जिसे सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि बच्चे बालिग होने पर दाई के प्रति पूर्ण निष्ठा की शपथ लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर धर्म में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ नियम होते हैं। लेकिन असली सवाल सजा की सीमा और उसके मानव गरिमा पर असर का है। इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या याचिका आर्टिकल 32 के तहत 1962 के संविधान पीठ के फैसले को रद्द करने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट अपने ही पुराने फैसले को ऐसे कैसे नजरअंदाज कर सकता है। कॉन्सिट्यूशन बेंच का फैसला बदला तो यह गंभीर मुद्दा उन्होंने कहा, “हम भी सख्त नियमों से बंधे हैं। अगर हर आर्टिकल 32 की याचिका पर कॉन्सिट्यूशन बेंच के फैसले को बदला जाएगा, तो यह गंभीर मुद्दा है।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि कोर्ट कल सबरीमाला मामले में इसी तरह की याचिकाओं पर सवाल उठा रहा था। ऐसे में अब अलग रुख नहीं अपनाया जा सकता। इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन से भी सवाल किए थे। इसी NGO की याचिका पर सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इसी बीच, वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने पारसी महिला की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल 26(b) को ज्यादा महत्व दिया गया तो यह व्यक्तिगत धार्मिक अधिकारों को खत्म कर सकता है। खंबाटा के मुताबिक, आर्टिकल 26(b) का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं को सरकारी हस्तक्षेप से बचाना है, न कि व्यक्तियों के अधिकारों को दबाना। बता दें कि यह मामला 1962 के फैसले को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि अगर कोई पारसी महिला दूसरे धर्म में शादी करती है और उसे समुदाय से बाहर कर दिया जाता है, तो यह पहली नजर में भेदभाव लगता है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
खाना खाने के बाद पेट में सुई जैसी चुभन क्यों होती है? डॉक्टर से बताया क्या है यह बला और कैसे मिलेगा छुटकारा

Last Updated:May 06, 2026, 19:08 IST Pain in Stomach After Eating: कई लोगों को खाना खाने के बाद पेट में सुई जैसी चुभन होने लगती है. अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह पेट से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. डॉक्टर्स की मानें तो डाइजेशन से जुड़ी दिक्कत, इंजरी, इंफेक्शन या डिजीज के कारण पेट में चुभन हो सकती है. जांच के बाद सटीक कारण का पता लगाया जा सकता है. पेट में इंफेक्शन की वजह से भी सुई जैसी चुभन हो सकती है. Post-Meal Stomach Pain Causes: खाना खाने के बाद कई लोगों को अपने पेट में दिक्कत महसूस होती है. कुछ लोगों को एसिडिटी और गैस की शिकायत होती है, तो कुछ लोग सुई जैसी चुभन महसूस करते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो यह नॉर्मल नहीं है. इसका संकेत है कि आपके पेट में कुछ न कुछ गड़बड़ है. अक्सर लोग इस परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक यह समस्या रहे, तो डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए. कई बार छोटी-छोटी परेशानियां बड़ी बन जाती हैं. ऐसे में लापरवाही नहीं करनी चाहिए और वक्त रहते इलाज कराना चाहिए. ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर फिजीशियन डॉ. दिनेश कुमार त्यागी ने बताया खाना खाने के बाद पेट में सुई जैसी चुभन महसूस होना एक कॉमन समस्या है. कई लोग इसे इग्नोर कर देते हैं, लेकिन यह कई अलग-अलग कारणों से जुड़ी हो सकती है. डाइजेशन से जुड़ी समस्या, पेट में इंफेक्शन, इंजरी या किसी डिजीज की वजह से चुभन और दर्द महसूस हो सकता है. आमतौर पर पेट में चुभन का सबसे कॉमन कारण गैस और अपच है. जब खाना ठीक से पच नहीं पाता, तो गैस बनने लगती है, जिससे चुभन, दर्द या जलन जैसी समस्या हो सकती है. ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाने से यह समस्या और बढ़ जाती है. जल्दी-जल्दी खाना खाने या खाना खाते समय पानी ज्यादा पीने से भी पाचन पर असर पड़ता है. एक्सपर्ट के मुताबिक खाने के बाद पेट में चुभन का कारण एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स भी हो सकता है. जब पेट में एसिड ज्यादा बनता है, तो यह भोजन नली की तरफ आने लगता है, जिससे पेट और सीने में जलन या चुभन महसूस होती है. खाली पेट लंबे समय तक रहना, ज्यादा चाय-कॉफी पीना या अनियमित खान-पान इस समस्या को बढ़ा सकते हैं. कुछ मामलों में यह समस्या गैस्ट्राइटिस या अल्सर का संकेत भी हो सकती है. पेट की अंदरूनी परत में सूजन या घाव होने पर खाना खाने के बाद दर्द या चुभन बढ़ सकती है. इसके साथ उल्टी, काला मल या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. डॉक्टर ने बताया कि फूड इंटॉलरेंस या एलर्जी भी इसका कारण बन सकती है. कुछ लोगों को दूध, ग्लूटेन या किसी खास खाने से एलर्जी होती है, जिससे खाना खाने के बाद पेट में असहजता या चुभन हो सकती है. ऐसे में उस फूड को पहचानकर उससे दूरी बनाना जरूरी होता है. इसके अलावा कई तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पेट में सुई जैसी चुभन पैदा कर सकते हैं. ऐसे में डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए. अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और एंडोस्कोपी के जरिए कई समस्याओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है. अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है या दर्द ज्यादा तेज होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें. वैसे तो पेट में चुभन के सटीक कारण का पता लगाने के बाद ट्रीटमेंट किया जाता है. अगर आप इस समस्या से बचना चाहते हैं, तो खाना हमेशा धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं, ज्यादा ऑयली और मसालेदार खाने से बचें. जंक फूड अवॉइड करें और घर पर बना ताजा खाना खाएं. खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और हल्की वॉक करें, ताकि पाचन बेहतर हो सके. अगर किसी भी तरह की समस्या हो, तो डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
UP में ब्लास्ट करना चाह रहे 2 संदिग्ध आतंकी अरेस्ट:पाकिस्तानी गैंगस्टर ने कहा था- मैं तुम्हें इंडिया का हीरो बना दूंगा

यूपी में बुधवार को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी देश के संवेदनशील ठिकानों पर सीरियल धमाके और पुलिस टीम पर हमले की साजिश रच रहे थे। आरोपियों में बाराबंकी निवासी 23 साल का दानियान अशरफ और कुशीनगर का रहने वाला 20 साल का कृष्णा मिश्रा है। दोनों पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी, आबिद जट और हम्माद के संपर्क में थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि शहजाद भट्टी ने कहा था, मेरे कहने के अनुसार काम करोगे तो मैं तुम्हें इंडिया में हीरो बना दूंगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गैंगस्टर शहजाद भट्टी ने पंजाब में हुए धमाके की जिम्मेदारी ली है। पंजाब में मंगलवार की रात 3 घंटे के भीतर 2 जगह ब्लास्ट हुए थे। इंस्टाग्राम के जरिए स्लीपर सेल बना रहा आतंकी संगठन एटीएस के प्रवक्ता ने बताया, जानकारी मिली थी कि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम के जरिए भारतीय युवाओं को फुट सोल्जर और स्लीपर सेल के रूप में भर्ती कर रहे हैं। पूछताछ में पता चला कि आरोपी दानियाल और कृष्णा पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे। उनके फोन में शहजाद भट्टी, आबिद जट और हम्माद के नंबर थे। इनके पास से वीडियो कॉल, वॉइस नोट्स, व्हाट्सएप चैट और देश-विरोधी बातचीत के सबूत मिले हैं। पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी, आबिद जट और हम्माद के निर्देश पर इन युवाओं को अमीर बनने का लालच देकर कट्टरपंथी बनाया जा रहा था। इनका मकसद संवेदनशील संस्थानों, पुलिस थानों, चौकियों और पुलिसकर्मियों पर हमला कर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालना था। दानियाल ने गन की डिमांड की, कृष्णा को मर्डर का टास्क मिला कृष्णा अपने माता-पिता का इकलौता बेटा कृष्णा मिश्रा के पिता का नाम छोटेलाल मिश्रा है। वह कुशीनगर में थाना जटहन के हरपुर गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह कुशीनगर में ही थाना रविंद्रनगर के बेलवामिश्र में रह रहा था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। पिता छोटेलाल ने शराब की लत के कारण गांव की पैतृक संपत्ति बेच दी और रविंद्रनगर स्थित अपने हिस्से की जमीन पर घर बनवाया। उसकी मां लाली गृहिणी हैं, जबकि बहन सलोनी की शादी हो चुकी है। छोटेलाल ने चार ऑटो भी खरीदे थे, लेकिन किस्तें न चुका पाने के कारण वे जब्त हो गए। छोटेलाल का एक भाई BSF में हैं, दूसरा भाई अधिवक्ता है। एक अन्य भाई दुकान चलाते हैं। परिवार में एक चचेरा भाई बॉक्सिंग करता है, जबकि कुछ अन्य रिश्तेदार LLB की पढ़ाई कर रहे हैं। कृष्णा की पढ़ाई केवल तीसरी या चौथी कक्षा तक ही हुई है। उसे शराब पीने की भी आदत थी। उसके चचेरे भाई के अनुसार, फिलहाल वह दिल्ली में रहकर किसी कंपनी में काम कर रहा था। ATS ने कृष्णा को गोरखपुर और दानियाल को बाराबंकी से गिरफ्तार किया गया है। दानियान बाराबंकी में बदोसराय थाना क्षेत्र के किंतूर गांव का रहने वाला है। इनके पास से एक देशी पिस्तौल (9 एमएम), एक तमंचा .315 बोर, 6 जिंदा कारतूस (9 एमएम) और दो मोबाइल फोन बरामद किया है। खबर अपडेट हो रही है…
वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि टीएमसी चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने बंगाल में ‘जब्त’ किए गए पार्टी कार्यालयों पर दोबारा कब्जा कर लिया है भारत समाचार

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 18:58 IST वीडियो क्लिप के साथ व्यापक रूप से साझा किए गए पोस्ट में दावा किया गया है कि बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम तीन कांग्रेस कार्यालय पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा फिर से खोल दिए गए हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने पार्टी के झंडे फिर से लगाए जाने और समर्थकों के परिसर के बाहर इकट्ठा होने का सुझाव देने वाली क्लिप भी साझा कीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीडियो क्लिप के साथ व्यापक रूप से साझा किए गए पोस्ट में दावा किया गया है कि टीएमसी की चुनावी हार के बाद बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम तीन कांग्रेस कार्यालय पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा फिर से खोल दिए गए हैं। एक वायरल पोस्ट विशेष रूप से नादिया जिले के करीमनगर इलाके की एक घटना को संदर्भित करता है, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एक स्थानीय कार्यालय में प्रवेश करते और फिर से खोलते हुए देखा जाता है, पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि यह कार्यालय वर्षों से टीएमसी के नियंत्रण में था। बंगाल में लोकतंत्र बहाल करने में भाजपा का सबसे बड़ा उदाहरण। करीम पुर, नादिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आखिरकार वर्षों से टीएमसी के कब्जे से अपने पार्टी कार्यालय को पुनः प्राप्त कर लिया है। राहुल गांधी लगातार ममता टीएमसी का समर्थन कर रहे हैं, जबकि जमीन पर कांग्रेस कार्यकर्ता टीएमसी के तहत संघर्ष कर रहे थे… pic.twitter.com/EWDeagWOE – लाला (@FabulasGuy) 5 मई 2026 एक्स उपयोगकर्ताओं के पोस्ट के एक अन्य सेट में दावा किया गया है कि इसी तरह का विकास बैरकपुर में हुआ था, जहां टीएमसी शासन के दौरान एक कांग्रेस कार्यालय को “कब्जा” कर लिया गया था और बाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को “बहाल” कर दिया गया था। कुछ उपयोगकर्ताओं ने पार्टी के झंडे फिर से लगाए जाने और समर्थकों के परिसर के बाहर इकट्ठा होने का सुझाव देने वाली क्लिप भी साझा कीं, जो सरकार में बदलाव के बाद के घटनाक्रम को राजनीतिक उलटफेर बता रहा है। पश्चिम बंगाल के जंगीपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता अंततः अपने पार्टी कार्यालयों को पुनः प्राप्त कर रहे हैं जिन्हें टीएमसी ने 2011 में जब्त कर लिया था। टीएमसी के आतंक की कल्पना करें, फिर भी इन कांग्रेसियों में ममता बानो के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं है! pic.twitter.com/YlfyEtB3ot – बाला (@erbmjh) 5 मई 2026 एक व्यापक रूप से प्रसारित पोस्ट ने घटनाओं को “बीजेपी द्वारा बंगाल में लोकतंत्र बहाल करने” का एक उदाहरण बताया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव परिणाम के बाद “डर” कम होने से विपक्षी कार्यकर्ताओं को राजनीतिक स्थान पुनः प्राप्त करने की अनुमति मिली। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है, और पार्टी कार्यालयों के ऐसे किसी भी अधिग्रहण या फिर से खोलने के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। अलग से, वरिष्ठ टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में पार्टी के चुनावी झटके पर टिप्पणी की है। सरकार, जिन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार और हत्या मामले के बाद पिछले साल पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, ने राज्य में व्यापक राजनीतिक बदलावों को प्रतिबिंबित किया। सरकार ने कहा, “ममता बनर्जी एक तरह से पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए बढ़ावा देने वाली रही हैं। जब उन्होंने 1990 के दशक के अंत में अपनी पार्टी बनाई थी, तब भाजपा की राज्य में कोई उपस्थिति नहीं थी। यह उनके गठबंधन के माध्यम से था कि भाजपा ने पहली बार पैर जमाया और सीटें जीतना शुरू किया।” उन्होंने आगे कहा कि 2011 में सत्ता में आने के बाद टीएमसी नेतृत्व ने विपक्षी दलों को कमजोर करने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, “इन पार्टियों के कई नेता या तो उनके साथ शामिल हो गए या संरक्षण और राजनीतिक स्थान के लिए भाजपा में चले गए। समय के साथ, भाजपा को उनका विरोध करने वालों के लिए एक तरह की ‘जीवन बीमा पॉलिसी’ के रूप में देखा जाने लगा।” इस बीच, राज्य में पार्टी कार्यालय के “पुनर्ग्रहण” के वायरल दावों पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि टीएमसी चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने बंगाल में ‘जब्त’ किए गए पार्टी कार्यालयों पर दोबारा कब्जा कर लिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)कांग्रेस पार्टी कार्यालय(टी)टीएमसी शासन बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी(टी)वायरल सोशल मीडिया पोस्ट(टी)राजनीतिक सुधार बंगाल(टी)जवाहर सरकार साक्षात्कार(टी)ममता बनर्जी बीजेपी गठबंधन
Lans Klusener Praises Pitch, RCB Coach Eyes Next Match

लखनऊ7 मिनट पहले कॉपी लिंक लखनऊ के इकाना स्टेडियम में 7 मई को LSG और RCB के बीच IPL का मैच खेला जाएगा। मैच को लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। सबसे ज्यादा क्रेज RCB के धुआंधार बल्लेबाज विराट कोहली की है। स्टेडियम गेट पर उनकी 15 फीट ऊंची तस्वीर लगाई गई है। आज, बुधवार को दोनों टीम ने प्रैक्टिस की। स्टेडियम के बाहर शाम को बड़ी संख्या में फैंस विराट कोहली का पोस्टर लेकर खड़े रहे। जैसे ही खिलाड़ियों की बस पहुंची, फैंस ने चीयर्स किया। दोनों टीम की तरफ से मीडिया ब्रीफिंग भी हुई। दोनों ही टीम के कोच ने मैच को लेकर अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। मौसम को लेकर पिच को ढक दिया गया। देखिए 3 तस्वीरें… इकाना स्टेडियम में 7 मई को LSG और RCB के बीच IPL का मैच खेला जाएगा। मौसम को लेकर आज पिच ढक दी गई। आज दोनों टीमों ने प्रैटिक्स किया। विराट कोहली के फैंस पोस्टर लेकर पहुंचे। इकाना स्टेडियम के बाहर विराट कोहली की 15 फीट ऊंची तस्वीर लगाई गई है। ‘LSG टीम में टैलेंट की कोई कमी नहीं’ LSG के सहायक कोच लांच क्लूजनर ने बताया कि तीन-चार साल पहले इकाना की पिच स्पिन ट्रैक के लिए ज्यादा मुफीद थी, लेकिन पिछले दो सालों में क्रिकेट खेलने के लिए ये बेहतरीन विकेट बन चुका है। इसमें कोई दो राय नहीं कि हर लिहाज से उम्दा क्रिकेट यहां देखने को मिल रहा है। लांच क्लूजनर ने बताया कि टीम में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। इस ग्राउंड में अब तक सबसे कम छक्के लगे हैं। यहां का विकेट फास्ट है और ये बड़ा ग्राउंड है। अर्जुन तेंदुलकर से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया LSG की टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का बेहतरीन मिश्रण है। ‘स्क्वाड में ज्यादा चेंज करने की जरूरत नहीं’ RCB की तरफ से मीडिया ब्रीफिंग में हेड कोच मलोलन रंगराजन पहुंचे। उन्होंने बताया कि हम सिंगल मैच को ध्यान में रख कर अपना नेचुरल गेम खेल रहे हैं। न ही हम बहुत आगे का देखता है और न ही पिछले मैचों पर हम फोकस कर रहे हैं। फिलहाल, LSG के साथ होने वाले मैच पर ही हमारा फोकस है। अच्छी बात ये हैं कि हमें बहुत ज्यादा चेंजस करने की जरूरत नहीं है। 4 पेसर का हमारा पास ऑप्शन है। कुणाल पंड्या जैसे खिलाड़ियों का बेहतरीन परफॉर्म करना टीम के हित में हैं। मलोलन रंगराजन ने कहा- स्क्वाड में ज्यादा चेंज करने की जरूरत नहीं है। जितेश का किया सपोर्ट जितेश शर्मा के फॉर्म को लेकर हुए सवाल पर मलोलन रंगराजन ने बताया कि वो एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया हैं। देश के लिए खेला हैं और ये कोई चांस की बात नहीं हैं। उन्होंने परफॉर्म भी किया हैं। लंबे समय से IPL में भी परफॉर्म किया है। इसलिए उम्मीद हैं कि बहुत जल्द वो वापस फॉर्म में होंगे। बिहार छपरा से लखनऊ आए पवन ने बताया- मैं सिर्फ विराट कोहली को देखने लखनऊ आया हूं। 2 दिन पहले ही आ गया हूं। यहां होटल में रुका हूं। आदित्य ने कहा- विराट कोहली तो अपना राजा है। पॉलीटेक्निक के एग्जाम होने वाले हैं, लेकिन तैयारी छोड़कर उन्हें देखने चले आया। अभिषेक ने कहा कि सबकी जुबान पर बस एक ही नाम विराट कोहली है। प्रैक्टिस की 4 तस्वीरें देखिए… ————– संबंधित खबर भी पढ़िए… कोहली को देखने के लिए ₹50 हजार तक टिकट:लखनऊ में IPL मैच के रेट दोगुने; LSG से भिड़ंत से पहले विराट की 2 घंटे प्रैक्टिस IPL में लखनऊ सुपरजाएंट्स (LSG) के खिलाफ मुकाबले के लिए दिग्गज क्रिकेटर विराट कोहली लखनऊ पहुंच चुके हैं। 5 मई को उन्होंने इकाना स्टेडियम में 2 घंटे पसीना बहाया। इस दौरान विराट ने बल्लेबाजी करते हुए जमकर छक्के लगाए। स्पिनर्स के खिलाफ भी बैटिंग प्रैक्टिस की। पूरे स्टेडियम में बाउंड्री पर दौड़ लगाई। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
जब हमारी नाक का काम एक बड़े नथुने से ही चल सकता है तो दो छिद्र क्यों…है इसकी भी सॉलिड वजह

क्या आपने कभी ये सोचा कि अगर आपकी नाक में एक बड़े छेद से ही काम चल सकता है तो उसकी जगह दो नथुने क्यों होते हैं. अगर आप एक नाक बंद कर लें तो भी कुछ खास नहीं होता. ऐसे में ये सवाल तो मन में उठता ही है कि मुंह की तरह एक ही बड़ा छिद्र नाक में भी तो हो सकता है. लेकिन हकीकत ये है कि इसकी भी वजह तो है. साइंस ने बेहतर तरीके से इसका तर्क देते हुए इसे समझाया है. इसका जवाब नोज साइकल यानि नाशिका चक्र नामक एक आश्चर्यजनक रूप से जटिल प्रक्रिया में छिपा है. आपकी नाक के दोनों छिद्र एक समान रूप से काम करने की बजाय, दिन भर बारी-बारी से वायु प्रवाह को नियंत्रित करते हैं. यानि एक टाइम पर एक काम पर लगा होता है तो दूसरा शांत रहता है. कुछ घंटों बाद उनका रोल बदल जाता है. ये लगातार होने वाला बदलाव आपके शरीर को अधिक कुशलता से सांस लेने में मदद करता है. यहां तक कि गंध को महसूस करने की आपकी क्षमता को भी बढ़ाता है. हममे से किसी को इसका पता शायद नहीं लग पाता, लेकिन रोजाना नाक के इन दोनों छिद्रों का रोल हमारे आराम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जैसे कान दो होने से आवाज़ की दिशा पता चलती है, वैसे ही दो नथुने हल्के-फुल्के अंतर से गंध के स्रोत की दिशा बताने में मदद करते हैं (news18 ai image) हमारी नाक के छिद्र बारी-बारी से सांस कैसे लेते हैं हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से नाक से सांस लेने के लिए बना है. मुंह से सांस लेना आमतौर पर तभी शुरू होता है जब हमें अतिरिक्त हवा की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए व्यायाम के दौरान ऐसा होता है या जब नाक बंद हो जाती है. हालांकि नाक का काम केवल हवा को अंदर-बाहर करना ही नहीं है. ये फेफड़ों के लिए एक तैयारी कक्ष की तरह काम करती है. जब हवा इससे होकर गुजरती है, तो वह फिल्टर होती है, फिर शरीर के तापमान तक गर्म होती है. फिर उचित स्तर तक नमीयुक्त हो जाती है. जब तक ये आपके फेफड़ों तक पहुंचती है, तब तक यह पूरी तरह से अनुकूलित हो चुकी होती है. इस प्रक्रिया के बिना, हवा ठंडी और शुष्क रहेगी. अगर ऐसा हुआ तो हमारे श्वसन मार्ग में जलन और सूजन हो सकती है. दो नथुने क्या करते हैं दो नथुने होने से यह मुश्किल काम आसान हो जाता है. एक नथुना ज़्यादातर हवा को संभालता है, जबकि दूसरे को आराम करने का मौका मिलता है – जिससे नमी बनी रहती है और संतुलन कायम रहता है. अध्ययनों से पता चलता है कि दोनों नथुने कभी भी एक साथ बराबर काम नहीं करते. इसकी बजाय, ये बारी-बारी से काम करने वाली प्रणाली बेहतर तरीके से चलती रहती है. दोनों नथुने की सूंघने की क्षमता अलग-अलग कैसे सांस लेना और सूंघना आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. हर सांस के साथ गंध के छोटे-छोटे अणु नाक में जाते हैं, जहां वे बलगम में घुल जाते हैं. फिर मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं. हवा के दो अलग-अलग रास्ते होने से हमारे गंध सूंघने वाले सेल तक अधिक मात्रा में और लगातार हवा पहुंचती है. (news18 ai image) नाक जब सांस ले रही होती है, तब हर नथुने से हवा अलग-अलग गति से बहती है. जब कोई नथुना थोड़ा अधिक बंद होता है, तो हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है. इससे कुछ गंध के अणुओं को घुलने के लिए अधिक समय मिल जाता है, जिससे उन्हें पहचानना आसान हो जाता है. दूसरी ओर, अधिक खुले नथुने से वायु का प्रवाह तेज होता है, जिससे अलग अलग तरह के गंध अणुओं का पता लगाने में मदद मिलती है जो अधिक तेजी से घुल जाते हैं. सरल शब्दों में कहें तो हर नाक का छिद्र गंध को अपने-अपने तरीके से ग्रहण करता है. आपका मस्तिष्क इन संकेतों को मिलाकर गंध की एक अधिक समृद्ध और विस्तृत अनुभूति उत्पन्न करता है. तो कह सकते हैं कि दो नथुने हमारी गंध का पता लगाने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं. जैसे कान दो होने से आवाज़ की दिशा पता चलती है, वैसे ही दो नथुने हल्के-फुल्के अंतर से गंध के स्रोत की दिशा बताने में मदद करते हैं. (news18 ai image) बीमारी में छिपा हुआ सहयोगी सांस लेने और सूंघने के अलावा, हमारी नाकें हमें बीमारियों से बचाने में भी मदद कर सकती हैं. जब आपको सर्दी-जुकाम होता है, तो अक्सर एक नाक बंद हो जाती है जबकि दूसरी नाक से हवा का प्रवाह अधिक होता है. एक नाक जुकाम की स्थिति में बंद होने को ये मत मानिए कि ये दिक्कत वाली या नुकसान करने वाली बात है बल्कि ऐसा करके नाक आपकी सुरक्षा करती है. नाक बंद होने से नाक के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे वायरस के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनतीं. वायरस ठंडे वातावरण में पनपते हैं.इस लिहाज से, दो नथुने होने से एक अंतर्निर्मित बैकअप प्रणाली मिलती है, जो आपके शरीर को स्थिति से निपटने में मदद करती है और साथ ही संक्रमण के प्रसार को संभावित रूप से सीमित भी करती है. पहली नजर में, दो नथुने अनावश्यक लग सकते हैं लेकिन वास्तव में, वे एक सुव्यवस्थित प्रणाली बनाते हैं जो सांस लेने में सहायता करती है , गंध की अनुभूति को बढ़ाती है और यहां तक कि आपके शरीर की रक्षा प्रणाली में भी योगदान देती है.
‘बरखास्त करो, नहीं दी छुट्टी’, जिद पर अदीं ममता नई मिसाल से बोलीं- वस्त्रो काले कपड़े

पश्चिम बंगाल चुनाव के प्रस्ताव पर ऐतराज की पेशकश की गई पेशकश प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार कहा कि उनके जो उम्मीदवार मैदान में हैं, उन्हें जबरदस्ती हराया गया है। उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल पुलिस, सीआरपीएफ और मुख्य चुनाव अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के 1500 लोगों पर कब्ज़ा कर लिया गया। ताज़ा करो, नहीं द इज़्ज़त: ममता बनर्जी न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि ममता बनर्जी ने बिल्डरों के नवजोखिम बाजार के साथ बैठक में कहा, ‘बंगाल के बाद अब इंडिया अलायंस की टीम एकजुट है। मैंने नहीं छोड़ा दस्तावेज़. कृपया मुझे अंतिम रूप दें। मैं चाहता हूं कि यह काला दिन हो। हमें मजबूत होना होगा. विधान सभा के पहले दिन के सभी विधायक काले कपड़े के शौकीन। धोखा दिया है, उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है। मैं हंस रही हूं. मैंने उन्हें नैतिक रूप से हराया है। मैं एक आजाद पंछी हूं. मैंने सबके लिए काम किया है. हम भले ही हार गए हों, लेकिन हम लड़ेंगे।’ हिंसा को लाभ पहुंचाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी: टीएमसी वैज्ञानिक वैज्ञानिक और वैज्ञानिक घोष ने कहा, ‘हिंसा को लाभ पहुंचाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।’ बीजेपी ने जो कहा था और जो जमीन पर हो रहा है वह बिल्कुल उल्टा है। जो हिंसा हो रही है वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। ममता बनर्जी का इस्तीफा ना देना, उनका एक सिंबॉलिक प्रोटेस्ट है बीजेपी की ओर से लूट के खिलाफ मोर्चा। LoP कौन होगा या विधानसभा में हमारी पार्टी कैसे होगी ये सब बातें निर्णय लेने के लिए हमारे दोस्तों से कहा गया है, वो बोलेंगे हम विचार करेंगे। ‘विधानसभा में किस विधायक की क्या जिम्मेदारी है, इसके लिए हमने आपसे आग्रह किया है।’ बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वामपंथ से खारिज करते हुए मांग पर सवाल उठाए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने रविवार (6 मई 2026) को स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की भूमिका केवल चुनाव और चुनाव प्रचार तक ही सीमित है, इसकी आगे की प्रक्रिया पूरी तरह से संविधान के तहत आती है। ये भी पढ़ें: बंगाल में पहली बार बीजेपी की जीत पर अमेरिका से आया सवाल, जानिए क्या कहा पीएम मोदी ने (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026(टी)ममता बनर्जी न्यूज(टी)ममता बनर्जी का इस्तीफा(टी)पश्चिम बंगाल नई सरकार(टी)ममता बनर्जी न्यूज(टी)ममता बनर्जी न्यूज टुडे(टी)ममता इस्तीफा(टी)मुख्यमंत्री(टी)पश्चिम बंगाल(टी)ममता खबर
Mumbai Airport Metro Fire | Short Circuit Sparks Fear, All Passengers Safe

Hindi News National Mumbai Airport Metro Fire | Short Circuit Sparks Fear, All Passengers Safe 1 मिनट पहले कॉपी लिंक आग लगने के बाद मेट्रो स्टेशन का रास्ता बंद होने की यह फुटेज एक यात्री ने पोस्ट की है। मुंबई के अंधेरी ईस्ट में छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टी-2 के अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर बुधवार शाम 4:10 बजे आग लग गई। न्यूज एजेंसी PTI ने इसकी जानकारी दी है। हालांकि यह नहीं बताया गया कि आग कितनी भीषण है। अधिकारियों के मुताबिक एहतियात के तौर पर यात्रियों को बाहर निकाला गया और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ जगह इसे T1 टर्मिनल और कुछ पोस्ट में T2 मेट्रो स्टेशन बताया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार आग इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन या शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है। आग स्टेशन के टेक्निकल रूम में लगी शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग स्टेशन के टेक्निकल रूम में लगी थी, जिसे फायर ब्रिगेड ने 4:30 बजे तक बुझा दिया। धुएं के कारण कुछ समय के लिए ‘मेट्रो एक्वा लाइन 3’ को अभी बंद कर दिया गया था। लेकिन अब मेट्रो सेवाएं फिर से शुरू कर दी गई हैं। 9 अप्रैल को मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 में आग लगी थी 9 अप्रैल को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर गुरुवार शाम आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही थी। आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पावर हाउस के सीलिंग लेवल तक ही रही। वहां मौजूद इलेक्ट्रिक ट्रे, वायरिंग, केबल, इंस्टॉलेशन और इलेक्ट्रिक पैनल जल गए। एयरपोर्ट पर आग से जुड़ीं पिछली घटनाएं… 28 ऑक्टूबर 2025: दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर बस में आग लगी, एअर इंडिया का विमान नजदीक खड़ा था दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर एअर इंडिया के विमान से कुछ मीटर दूर खड़ी एक बस में आग लग गई थी। यह बस एअर इंडिया SATS एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की थी, जो कई एयरलाइंस के लिए ग्राउंड सर्विस देती है। आग लगने के समय बस में कोई यात्री मौजूद नहीं था। फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Mumbai Airport Metro Fire | Short Circuit Sparks Fear, All Passengers Safe

Hindi News National Mumbai Airport Metro Fire | Short Circuit Sparks Fear, All Passengers Safe 32 मिनट पहले कॉपी लिंक आग लगने के बाद मेट्रो स्टेशन का रास्ता बंद कर दिया गया। मुंबई के अंधेरी ईस्ट में छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टी-2 के अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर बुधवार शाम 4:10 बजे आग लग गई। अफसरों ने फौरन लोगों को बाहर निकाला और परिसर को खाली कर दिया गया। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। आग लगने के कारण मेट्रो एक्वा लाइन-3 के अंडरग्राउंड कॉरिडोर में आरे JVLR से कफ परेड के बीच मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित रहीं। नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि आग टेक्निकल रूम में लगी थी। हालांकि आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है। मेट्रो स्टेशन में धुआं से भर गया आग के बाद मेट्रो स्टेशन का B1 गेट बंद कर दिया गया। आग लगने से धुआं पूरे अंडरग्राउंड स्टेशन परिसर में फैल गया था, जिसके कारण दमकलकर्मियों को राहत और बचाव अभियान के दौरान ब्रीदिंग उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ा। मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MMRCL) ने इसे मामूली घटना बताया है। MMRCL ने एक बयान में कहा, ‘आज छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA)-T2 स्टेशन पर धुएं की एक मामूली घटना हुई, जिस पर मौके पर मौजूद टीम ने तुरंत काबू पा लिया।’ 9 अप्रैल को मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 में आग लगी थी 9 अप्रैल को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर गुरुवार शाम आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही थी। आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पावर हाउस के सीलिंग लेवल तक ही रही। वहां मौजूद इलेक्ट्रिक ट्रे, वायरिंग, केबल, इंस्टॉलेशन और इलेक्ट्रिक पैनल जल गए। एयरपोर्ट पर आग से जुड़ीं पिछली घटनाएं… 28 ऑक्टूबर 2025: दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर बस में आग लगी, एअर इंडिया का विमान नजदीक खड़ा था दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर एअर इंडिया के विमान से कुछ मीटर दूर खड़ी एक बस में आग लग गई थी। यह बस एअर इंडिया SATS एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की थी, जो कई एयरलाइंस के लिए ग्राउंड सर्विस देती है। आग लगने के समय बस में कोई यात्री मौजूद नहीं था। फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








