Riteish Deshmukh Raja Shivaji: Salman, Abhishek Worked For Free

51 मिनट पहले कॉपी लिंक रितेश देशमुख इन दिनों अपनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्य गाथा है, जिसे रितेश ने बतौर एक्टर, राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पर्दे पर उतारा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रितेश ने फिल्म से जुड़े कई इमोशनल किस्से शेयर किए और एक पिता, एक बेटे व एक फिल्ममेकर के तौर पर अपनी भावनाएं सामने रखीं। उन्होंने सबसे बड़ा खुलासा कास्ट की फीस को लेकर किया। रितेश ने बताया कि सलमान खान, अभिषेक बच्चन और विद्या बालन जैसे बड़े सितारों ने इस ऐतिहासिक फिल्म के लिए एक भी रुपया नहीं लिया। अभिषेक ने तो फीस की जगह रितेश की मां के हाथ का बना ‘ठेचा’ (महाराष्ट्रीयन डिश) मांगा। रितेश ने अपने 10 साल के संघर्ष, पिता विलासराव देशमुख की दी गई सीख और खुद पर लगे कॉमेडी एक्टर का टैग तोड़ने पर भी खुलकर बात की। राजा शिवाजी फिल्म के प्रोड्यूसर्स जियो स्टूडियो और मुंबई फिल्म कंपनी हैं। सवाल: सलमान खान, अभिषेक बच्चन और विद्या बालन जैसे एक्टर्स ने फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली? जवाब: हां, यह बिल्कुल सच है। हम एक मराठी फिल्म को बड़े स्तर पर बनाने की कोशिश कर रहे थे। जब मैंने अभिषेक बच्चन को कहानी सुनाई और बताया कि मैं इसे डायरेक्ट कर रहा हूं और यह छत्रपति शिवाजी महाराज पर है, तो उन्होंने कहा- “मुझे पैसे नहीं चाहिए, मुझे बस तुम्हारी मां के हाथ का बना ठेचा चाहिए।” विद्या बालन, बोमन ईरानी, फरदीन खान किसी ने भी पैसे नहीं लिए। यहां तक कि जेनेलिया और मैंने भी एक्टिंग, डायरेक्शन या प्रोडक्शन की कोई फीस चार्ज नहीं की। सबने यह फिल्म महाराज छत्रपति शिवाजी के प्रति सम्मान और आस्था के चलते की है। सवाल: सलमान खान का ‘जीवा महाले’ वाले कैमियो के लिए कैसे राजी किया? जवाब: सलमान भाऊ ने तो खुद मुझसे कहा था कि- “तुम फिल्म बना रहे हो, तो मेरे लिए भी एक रोल लिखना। मेरे बिना तुम फिल्म नहीं बनाओगे।” उनका प्यार ही ऐसा है। मैंने सोचा कि अगर वो आ रहे हैं, तो उनके फैंस को स्क्रीन पर उन्हें देखकर मजा आना चाहिए। जब मैंने उन्हें जीवा महाले के किरदार में स्क्रीन पर उतारा और अब लोगों के जो रिएक्शन आ रहे हैं, उनके फोटोज वायरल हो रहे हैं, उसे देखकर मुझे बतौर डायरेक्टर बहुत खुशी हो रही है। मुझे लगता है मैं उनकी पर्सनैलिटी के साथ न्याय कर पाया। सवाल: ‘राजा शिवाजी’ आपके लिए सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसे बनाने में 10 साल कैसे लगे? जवाब:10 साल पहले हमने छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्म बनाने का सोचा था। कई बार कोशिश की, लेकिन सितारे जैसे एक साथ नहीं आ पा रहे थे। 2016 से 2019 तक कोशिश की, फिर कोविड आ गया। आखिरकार 2023 में काम शुरू हुआ और अब 26 में यह रिलीज हुई है। महाराज हमारे लिए पहले सुपरहीरो हैं, हमारा गौरव हैं। ऐसे में उनके रचे इतिहास को सही तरीके से पर्दे पर लाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी, क्योंकि लोगों की आस्था उनसे जुड़ी है। सवाल: ट्रेलर लॉन्च पर आप बहुत इमोशनल हो गए थे, जेनेलिया की आंखों में भी आंसू थे। उस वक्त क्या महसूस हो रहा था? जवाब: जब आप किसी प्रोजेक्ट पर सालों काम करते हैं और देखते हैं कि संजय दत्त, अभिषेक बच्चन जैसे लोग बिना किसी स्वार्थ के आपकी मदद करने चले आते हैं, तो आप भावुक हो जाते हैं। मुझे लगा कि जिंदगी में मैंने जो भी रिश्ते कमाए हैं, आज वो सब महाराज जी के प्रति अपने कर्तव्य के रूप में मेरे साथ खड़े हैं। ये उसी का इमोशन था। सवाल: तीन घंटे की फिल्म में महाराज के इतने बड़े जीवन को समेटना कितना मुश्किल था? जवाब: उनका जीवन और कीर्ति इतनी विशाल है कि एक फिल्म में सब कुछ नहीं बांधा जा सकता। इसलिए हमने एक हिस्सा चुना। हमने सोचा कि यह दिखाएं कि उनका जन्म उसी वक्त और उसी हालात में क्यों हुआ? जैसे श्रीकृष्ण का जन्म उसी कारागृह में होना तय था, वैसे ही उस वक्त के अंधकार को मिटाने के लिए महाराज का जन्म हुआ। यह कहानी जितनी उनकी है, उतनी ही उनके परिवार की भी है कि उनके माता-पिता और भाई किस दौर से गुजरे। सवाल: ऐतिहासिक सच्चाई और सिनेमैटिक लिबर्टी के बीच बैलेंस कैसे बनाया? जवाब: इतिहास में तारीखें और घटनाएं दर्ज होती हैं, लेकिन उनके बीच के धागे और इमोशंस नहीं। महाराज और उनके बड़े भाई शंभूराजे के बीच क्या बातें होती थीं, माता जीजाबाई के साथ उनका कैसा रिश्ता था… ये सब साहित्य में नहीं मिलता। ऐसे में हमें मान-मर्यादा को सामने रखकर वो रिश्ते गढ़ने पड़े, ताकि इतिहास से कोई छेड़छाड़ न हो और दर्शकों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। सवाल: महाराज का किरदार निभाते वक्त आपके अंदर कैसा इमोशनल ट्रांसफॉर्मेशन चल रहा था? जवाब: लिखते वक्त ही मुझे समझ आ गया था कि महाराज सिर्फ बैटलफील्ड में एग्रेसिव नहीं थे, बल्कि बहुत संवेदनशील भी थे। वो दूर की सोचते थे। गनीमी कावा (गोरिल्ला वारफेयर) सिर्फ हथियारों की लड़ाई नहीं, बल्कि माइंड गेम भी था। अगर आपको बड़ी छलांग लगानी है तो दो कदम पीछे लेने ही पड़ते हैं। मैंने पर्दे पर उनके उसी शांत और रणनीतिक विजन को जीने की कोशिश की है। सवाल: फिल्म को लेकर अब तक का सबसे प्यारा फीडबैक किससे मिला? जवाब: सबसे सुकून देने वाला फीडबैक छत्रपति संभाजी राजे के परिवार से मिला। उन्होंने फिल्म देखी और हमारी तारीफ की। जब उनके परिवार ने कहा कि उन्हें हमारा काम पसंद आया, तो मेरे सीने से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया। ऐसा लगा कि हमने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा ली। सवाल: ‘एक विलेन’ और ‘रेड 2’ जैसी फिल्मों से आपने खुद पर लगे ‘कॉमेडी एक्टर’ के टैग को कैसे तोड़ा? जवाब: कॉमेडी जॉनर ने मुझे इंडस्ट्री में टिके रहने में बहुत मदद की। एक वक्त था जब मेरी कॉमेडी फिल्में लगातार हिट हो रही थीं। लेकिन सिनेमा वक्त के साथ बदलता है। अगर आप एक ही फ्रेम में अटके रहेंगे, तो आउटडेटेड हो जाएंगे। खुद को अपग्रेड करना जरूरी था, इसलिए मैंने सीरियस और निगेटिव रोल्स किए।
Riteish Deshmukh Raja Shivaji: Salman, Abhishek Worked For Free

6 घंटे पहले कॉपी लिंक रितेश देशमुख इन दिनों अपनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्य गाथा है, जिसे रितेश ने बतौर एक्टर, राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पर्दे पर उतारा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रितेश ने फिल्म से जुड़े कई इमोशनल किस्से शेयर किए और एक पिता, एक बेटे व एक फिल्ममेकर के तौर पर अपनी भावनाएं सामने रखीं। उन्होंने सबसे बड़ा खुलासा कास्ट की फीस को लेकर किया। रितेश ने बताया कि सलमान खान, अभिषेक बच्चन और विद्या बालन जैसे बड़े सितारों ने इस ऐतिहासिक फिल्म के लिए एक भी रुपया नहीं लिया। अभिषेक ने तो फीस की जगह रितेश की मां के हाथ का बना ‘ठेचा’ (महाराष्ट्रीयन डिश) मांगा। रितेश ने अपने 10 साल के संघर्ष, पिता विलासराव देशमुख की दी गई सीख और खुद पर लगे कॉमेडी एक्टर का टैग तोड़ने पर भी खुलकर बात की। राजा शिवाजी फिल्म के प्रोड्यूसर्स जियो स्टूडियो और मुंबई फिल्म कंपनी हैं। सवाल: सलमान खान, अभिषेक बच्चन और विद्या बालन जैसे एक्टर्स ने फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली? जवाब: हां, यह बिल्कुल सच है। हम एक मराठी फिल्म को बड़े स्तर पर बनाने की कोशिश कर रहे थे। जब मैंने अभिषेक बच्चन को कहानी सुनाई और बताया कि मैं इसे डायरेक्ट कर रहा हूं और यह छत्रपति शिवाजी महाराज पर है, तो उन्होंने कहा- “मुझे पैसे नहीं चाहिए, मुझे बस तुम्हारी मां के हाथ का बना ठेचा चाहिए।” विद्या बालन, बोमन ईरानी, फरदीन खान किसी ने भी पैसे नहीं लिए। यहां तक कि जेनेलिया और मैंने भी एक्टिंग, डायरेक्शन या प्रोडक्शन की कोई फीस चार्ज नहीं की। सबने यह फिल्म महाराज छत्रपति शिवाजी के प्रति सम्मान और आस्था के चलते की है। सवाल: सलमान खान का ‘जीवा महाले’ वाले कैमियो के लिए कैसे राजी किया? जवाब: सलमान भाऊ ने तो खुद मुझसे कहा था कि- “तुम फिल्म बना रहे हो, तो मेरे लिए भी एक रोल लिखना। मेरे बिना तुम फिल्म नहीं बनाओगे।” उनका प्यार ही ऐसा है। मैंने सोचा कि अगर वो आ रहे हैं, तो उनके फैंस को स्क्रीन पर उन्हें देखकर मजा आना चाहिए। जब मैंने उन्हें जीवा महाले के किरदार में स्क्रीन पर उतारा और अब लोगों के जो रिएक्शन आ रहे हैं, उनके फोटोज वायरल हो रहे हैं, उसे देखकर मुझे बतौर डायरेक्टर बहुत खुशी हो रही है। मुझे लगता है मैं उनकी पर्सनैलिटी के साथ न्याय कर पाया। सवाल: ‘राजा शिवाजी’ आपके लिए सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसे बनाने में 10 साल कैसे लगे? जवाब:10 साल पहले हमने छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्म बनाने का सोचा था। कई बार कोशिश की, लेकिन सितारे जैसे एक साथ नहीं आ पा रहे थे। 2016 से 2019 तक कोशिश की, फिर कोविड आ गया। आखिरकार 2023 में काम शुरू हुआ और अब 26 में यह रिलीज हुई है। महाराज हमारे लिए पहले सुपरहीरो हैं, हमारा गौरव हैं। ऐसे में उनके रचे इतिहास को सही तरीके से पर्दे पर लाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी, क्योंकि लोगों की आस्था उनसे जुड़ी है। सवाल: ट्रेलर लॉन्च पर आप बहुत इमोशनल हो गए थे, जेनेलिया की आंखों में भी आंसू थे। उस वक्त क्या महसूस हो रहा था? जवाब: जब आप किसी प्रोजेक्ट पर सालों काम करते हैं और देखते हैं कि संजय दत्त, अभिषेक बच्चन जैसे लोग बिना किसी स्वार्थ के आपकी मदद करने चले आते हैं, तो आप भावुक हो जाते हैं। मुझे लगा कि जिंदगी में मैंने जो भी रिश्ते कमाए हैं, आज वो सब महाराज जी के प्रति अपने कर्तव्य के रूप में मेरे साथ खड़े हैं। ये उसी का इमोशन था। सवाल: तीन घंटे की फिल्म में महाराज के इतने बड़े जीवन को समेटना कितना मुश्किल था? जवाब: उनका जीवन और कीर्ति इतनी विशाल है कि एक फिल्म में सब कुछ नहीं बांधा जा सकता। इसलिए हमने एक हिस्सा चुना। हमने सोचा कि यह दिखाएं कि उनका जन्म उसी वक्त और उसी हालात में क्यों हुआ? जैसे श्रीकृष्ण का जन्म उसी कारागृह में होना तय था, वैसे ही उस वक्त के अंधकार को मिटाने के लिए महाराज का जन्म हुआ। यह कहानी जितनी उनकी है, उतनी ही उनके परिवार की भी है कि उनके माता-पिता और भाई किस दौर से गुजरे। सवाल: ऐतिहासिक सच्चाई और सिनेमैटिक लिबर्टी के बीच बैलेंस कैसे बनाया? जवाब: इतिहास में तारीखें और घटनाएं दर्ज होती हैं, लेकिन उनके बीच के धागे और इमोशंस नहीं। महाराज और उनके बड़े भाई शंभूराजे के बीच क्या बातें होती थीं, माता जीजाबाई के साथ उनका कैसा रिश्ता था… ये सब साहित्य में नहीं मिलता। ऐसे में हमें मान-मर्यादा को सामने रखकर वो रिश्ते गढ़ने पड़े, ताकि इतिहास से कोई छेड़छाड़ न हो और दर्शकों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। सवाल: महाराज का किरदार निभाते वक्त आपके अंदर कैसा इमोशनल ट्रांसफॉर्मेशन चल रहा था? जवाब: लिखते वक्त ही मुझे समझ आ गया था कि महाराज सिर्फ बैटलफील्ड में एग्रेसिव नहीं थे, बल्कि बहुत संवेदनशील भी थे। वो दूर की सोचते थे। गनीमी कावा (गोरिल्ला वारफेयर) सिर्फ हथियारों की लड़ाई नहीं, बल्कि माइंड गेम भी था। अगर आपको बड़ी छलांग लगानी है तो दो कदम पीछे लेने ही पड़ते हैं। मैंने पर्दे पर उनके उसी शांत और रणनीतिक विजन को जीने की कोशिश की है। सवाल: फिल्म को लेकर अब तक का सबसे प्यारा फीडबैक किससे मिला? जवाब: सबसे सुकून देने वाला फीडबैक छत्रपति संभाजी राजे के परिवार से मिला। उन्होंने फिल्म देखी और हमारी तारीफ की। जब उनके परिवार ने कहा कि उन्हें हमारा काम पसंद आया, तो मेरे सीने से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया। ऐसा लगा कि हमने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा ली। सवाल: ‘एक विलेन’ और ‘रेड 2’ जैसी फिल्मों से आपने खुद पर लगे ‘कॉमेडी एक्टर’ के टैग को कैसे तोड़ा? जवाब: कॉमेडी जॉनर ने मुझे इंडस्ट्री में टिके रहने में बहुत मदद की। एक वक्त था जब मेरी कॉमेडी फिल्में लगातार हिट हो रही थीं। लेकिन सिनेमा वक्त के साथ बदलता है। अगर आप एक ही फ्रेम में अटके रहेंगे, तो आउटडेटेड हो जाएंगे। खुद को अपग्रेड करना जरूरी था, इसलिए मैंने सीरियस और निगेटिव रोल्स किए।
Summer Eye Infection Risk Factors; UV Rays

Hindi News Lifestyle Summer Eye Infection Risk Factors; UV Rays | Eye Allergy Irritation Care Tips 19 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक गर्मियों में तेज धूप और गर्म हवा आंखों को प्रभावित करती है। इससे आंखों में जलन और रेडनेस की समस्या हो सकती है। आमतौर पर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये किसी बड़ी परेशानी का संकेत भी हो सकता है। अल्ट्रावायलेट एक्सपोजर, डिहाइड्रेशन और धूल-मिट्टी आंखों को प्रभावित करते हैं। इससे आई-इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिए गर्मियों में आई एलर्जी के केस बढ़ जाते हैं। आज ‘जरूरत की खबर’ में समझेंगे कि गर्मी का आंखों पर क्या असर पड़ता है। साथ ही जानेंगे कि- किन लोगों को आई-इन्फेक्शन का रिस्क ज्यादा होता है? आई इन्फेक्शन से बचने के आसान टिप्स क्या हैं? एक्सपर्ट: डॉ. श्रेया गुप्ता, कंसल्टेंट, ऑप्थेल्मोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- गर्मियों में ज्यादा टेम्परेचर और तेज धूप का आंखों पर क्या असर पड़ता है? जवाब- गर्मियों में ये तीन चीजें होती हैं- धूप तेज होती है, तापमान बहुत ज्यादा होता है। अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों का असर बढ़ जाता है। वातावरण में नमी, धूल-मिट्टी और प्रदूषण बढ़ जाते हैं। ये तीनों फैक्टर आंखों पर ये प्रभाव डालते हैं- तेज धूप में अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों की बाहरी परत (कॉर्निया) और लेंस को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लंबे समय में मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है। गर्मी और लू से आंखों की नमी जल्दी कम होती है, जिससे ड्राईनेस, जलन और रेडनेस बढ़ती है। तेज रोशनी में आंखें खोलना मुश्किल होता है और सिर या आंखों में दर्द हो सकता है। लंबे समय तक धूप में रहने से विजन कुछ समय के लिए धुंधला हो सकता है। गर्मियों में धूल, पसीना और प्रदूषण बढ़ता है, जिससे आंखों में एलर्जी, खुजली और इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- समर सीजन में आंखों से जुड़ी क्या समस्याएं ज्यादा बढ़ जाती हैं? जवाब- गर्मियों में तापमान बढ़ने से आंखों की नमी जल्दी कम हो जाती है, जिससे ड्राईनेस बढ़ती है। गर्मियों में होने वाली सभी आई प्रॉब्लम्स नीचे ग्राफिक में देखें- सवाल- आंखों के कौन-से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए? क्या गर्मियों में ये ज्यादा गंभीर हो सकते हैं? जवाब- आंखों में लगातार दर्द या तेज जलन होना सामान्य नहीं है। अचानक धुंधला या कम दिखाई देना किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ग्राफिक में दिए लक्षणों को इग्नोर न करें, गर्मियों में ये गंभीर हो सकते हैं- सवाल- आंखों के संक्रमण और एलर्जी के मुख्य रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- गर्मियों में ज्यादा तापमान और पसीने से आंखों के आसपास बैक्टीरिया व वायरस बढ़ सकते हैं। धूल-मिट्टी और प्रदूषण आंखों की सतह को इरिटेट करके एलर्जिक रिएक्शन बढ़ाते हैं। UV किरणें आंखों की प्रोटेक्टिव लेयर को कमजोर कर सकती हैं। गंदे हाथों से आंख छूने या तौलिया-रूमाल शेयर करने से संक्रमण फैलता है। स्विमिंग पूल के क्लोरीन या दूषित पानी से आंखों में जलन व इन्फेक्शन हो सकता है। सभी रिस्क फैक्टर्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- डिहाइड्रेशन होने पर आई हेल्थ और विजन कम्फर्ट पर क्या असर पड़ता है? जवाब- शरीर में पानी कम होने से आंखों पर ये प्रभाव पड़ते हैं- इससे आंखों में ड्राईनेस हो सकती है। आंखों का लुब्रिकेशन घटने से असहजता बढ़ती है। पलक झपकाने पर चुभन या किरकिरापन महसूस हो सकता है। लंबे समय तक डिहाइड्रेशन से फोकस करने में कठिनाई हो सकती है। इससे विजन कम्फर्ट कम हो सकता है। आंखों की सतह पर माइक्रो-डैमेज का रिस्क बढ़ सकता है। सवाल- किन लोगों को समर सीजन में आई प्रॉब्लम्स का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगाें को रिस्क ज्यादा होता है- जो तेज धूप या गर्म वातावरण में काम करते हैं। जो एयर-कंडीशन या सूखे वातावरण में लंबे समय तक रहते हैं। जो कॉन्टैक्ट लेंस यूज करते हैं। छोटे बच्चे, जो अपनी आंखों की सेफ्टी नहीं रख सकते हैं। बुजुर्ग, जिनकी आंखों में आंसू बनने की क्षमता कम हो गई है। जो एलर्जी-प्रोन हैं और जिनकी आंखें सेंसिटिव हैं। जो ऐसे मेडिकेशन पर हैं, जिससे आंखों की ड्राईनेस बढ़ती है। सवाल- अगर पहले से ड्राई आई, एलर्जी की समस्या है तो गर्मियों में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- इसके लिए ये सावधानियां बरतना जरूरी है- आंखों को धूल और धूप से बचाने के लिए प्रोटेक्टिव सनग्लासेस पहनें। डॉक्टर द्वारा बताई दवा या आई ड्रॉप लें। आंखों को रगड़ने की आदत से बचें, इससे सूजन बढ़ सकती है। आंखें और चेहरा नियमित रूप से साफ रखें। एलर्जी ट्रिगर्स जैसे पोलन (परागकण) या धुएं से दूर रहें। जरूरत पड़ने पर ठंडी पट्टी से आंखों को आराम दें। सवाल- गर्मियों में आई-हेल्थ के लिए डाइट और हाइड्रेशन कैसा होना चाहिए? जवाब- इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें- रोज 2.5-3 लीटर तक पानी या फ्लूइड लेना फायदेमंद है। खीरा, ककड़ी, संतरा, तरबूज जैसे हाई-वॉटर कंटेंट फूड्स लेना फायदेमंद है। एंटीऑक्सिडेंट युक्त फल आंखों की सेल्स को नुकसान से बचाते हैं। विटामिन-A और ल्यूटिन युक्त हरी सब्जियां विजन को सपोर्ट करती हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड आई हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। भोजन में बहुत ज्यादा नमक और शुगर से बचना जरूरी है। सवाल- आंखों को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में कौन-से छोटे-छोटे बदलाव फायदेमंद हो सकते हैं? जवाब- आंखों को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में ये बदलाव करें- लगातार स्क्रीन न देखें, ताकि आंखों को आराम मिल सके। रोज आंखों की हल्की एक्सरसाइज या पामिंग टेक्नीक अपनाएं। पर्याप्त नींद लें। इससे आंखों की रिकवरी और टियर फिल्म बैलेंस रहता है। पर्सनल हाइजीन बनाए रखें। इससे इन्फेक्शन का खतरा कम होता है। मेकअप या लेंस इस्तेमाल के बाद आंखों को सही तरीके से साफ करें। रोजाना कुछ समय नेचुरल रोशनी में बिताएं। ये आंखों के लिए फायदेमंद है। सवाल- जो लोग आउटडोर काम करते हैं या ज्यादा धूप में रहते हैं, उन्हें क्या अतिरिक्त सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- आउटडोर काम करने वाले लोग ये सावधानियां बरतें- काम के दौरान बीच-बीच में छांव या ठंडी जगह पर ब्रेक लें। सिर और आंखों को ढकने के लिए कैप या स्कार्फ यूज करें। अगर धूल भरे इलाके में काम करते हैं तो सेफ्टी गॉगल्स पहनें। दिनभर शरीर का तापमान और फ्लूइड बैलेंस बनाए रखें। पसीना आने पर
कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की फौज:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है। इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं। ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया। उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है। बदलाव: आतंकी घटनाएं 27.5% घटीं पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है। हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं। पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है। अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। आतंकियों काे मारने में कामयाबी पिछले साल दिसंबर में सेना ने डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाए। सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जिलों में फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई। फोकस खास तौर पर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है, जहां इमरजेंसी में सुरक्षा बलों को पहुंचने में वक्त लगता है। डोडा और आसपास के जिलों में महिलाएं भी वीडीजी नेटवर्क से जुड़ी हैं और गांव की सुरक्षा व निगरानी में हिस्सा ले रही हैं। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई। पूरी खबर पढ़ें…
कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की ‘फौज’:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है। इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं। ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया। उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है। बदलाव: आतंकी घटनाएं 27.5% घटीं पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है। हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं। पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है। अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। आतंकियों काे मारने में कामयाबी पिछले साल दिसंबर में सेना ने डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाए। सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जिलों में फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई। फोकस खास तौर पर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है, जहां इमरजेंसी में सुरक्षा बलों को पहुंचने में वक्त लगता है। डोडा और आसपास के जिलों में महिलाएं भी वीडीजी नेटवर्क से जुड़ी हैं और गांव की सुरक्षा व निगरानी में हिस्सा ले रही हैं। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई। पूरी खबर पढ़ें…
Nashik TCS Case: Accused Nida Khan Detained

Hindi News National Nashik TCS Case: Accused Nida Khan Detained | Sexual Harassment Allegations नासिक6 घंटे पहले कॉपी लिंक निदा खाने की एंटीसिपेटरी बेल 2 मई को खारिज हो चुकी है। नासिक TCS केस में पुलिस ने मुख्य आरोपी निदा खान को गुरुवार रात छत्रपति संभाजीनगर से हिरासत में लिया। निदा पर सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं। इससे पहले 2 मई को नासिक कोर्ट ने निदा की एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज की थी। प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी है। इस दौरान निदा फरार चल रही थी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिसर ने बताया था कि निदा खान इस केस की मुख्य आरोपियों में से एक हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। FIR के अनुसार, निदा पर आरोप है कि उसने महिला कर्मचारियों को बुर्का पहनने की सलाह दी थी। मामले की जांच नासिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच कर रही है। इस मामले में अब तक 9 FIR दर्ज हुई हैं, जो महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी हैं। SIT ने इस मामले में अब तक एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। निदा खान की 2 मई को एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज हो चुकी है। निदा ने कोर्ट में प्रेग्नेंसी का हवाला दिया था, लेकिन राहत नहीं निदा ने एंटीसिपेटरी बेल के लिए अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया था। मामले पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) ने पिछले महीने बयान में कहा था कि कंपनी किसी भी तरह के हैरेसमेंट और जबरदस्ती के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी पर काम करती है। अब जानिए क्या है पूरा मामला… TCS के नासिक ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए। SIT से जुड़े सोर्स कहते हैं, ‘पहली FIR 26 मार्च को देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। इसके बाद 8 और महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई। इनके बयानों से यौन शोषण, जोर-जबरदस्ती और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का पैटर्न सामने आया है। 9 में से 3 पीड़ित महिलाओं की FIR मिली… पहली पीड़ित सीनियर पूछते- हनीमून पर कहां गई, क्या-क्या किया पीड़ित महिला ने 2 अप्रैल को नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में FIR कराई है। उसके मुताबिक, जून 2025 से 31 मार्च 2026 तक वो TCS ऑफिस में एसोसिएट थी। पति काम के सिलसिले में पुणे में रहते हैं। FIR में उसने बताया, ‘24 जून 2025 को मुझे 3 महीने के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया गया। रजा मेमन का मेरी ट्रेनिंग से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी वो मेरे पास आकर पर्सनल लाइफ के बारे में पूछते। कहते थे कि पति के साथ क्यों नहीं रहती, हनीमून पर कहां गई थी। वहां क्या किया, कैसे किया। रजा मेमन के साथ शाहरुख कुरैशी भी था।‘ ट्रेनिंग में आसिफ अंसारी भी अक्सर मेरे पास आ जाता। सटकर बैठता और गलत तरह से छूता। कभी जांघ या कंधे पर हाथ रख देता। एक दिन लंच के वक्त हाथ गोद में रख दिया। फिर बोला- अगर कोई फिजिकल नीड हो, तो बताओ, पूरा कर दूंगा। महिला ने बताया, ‘सीनियर तौसीफ अत्तार ने भी गलत बर्ताव किया। वो भी टीम में नहीं था, फिर भी पास आकर खाने के लिए पूछता। अश्लील तरीके में पूछता, ‘क्या संतरे लाई हो। छोटे वाले लाई हो या बड़े वाले।’ वो चेहरा सटाता और छूता था। जब सवाल किया, तो कहा, ‘क्या तुम्हें आगे नहीं बढ़ना।‘ पीड़ित के मुताबिक, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तार और शफी शेख ने उसे फिजिकली और मेंटली टॉर्चर किया। हिंदू देवी-देवताओं को अपशब्द कहे, जिससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। उसने HR सेल में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। तब उसने मुंबई नाका थाने में शिकायत की। पुलिस को मिली 9 पीड़ितों की FIR के मुताबिक, 18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों को टारगेट किया गया। दूसरी पीड़ित ‘ईश्वर वही जो अदृश्य है, हिंदू देवी-देवता झूठे’ मुंबई नाका पुलिस स्टेशन पर दर्ज शिकायत के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 तक उसका ऑफिस में यौन उत्पीड़न हुआ। महिला कंपनी में क्रेडिट कार्ड कस्टमर्स की शिकायतें सुनती थी। उसने बताया, ‘तौसीफ अत्तार अपने धर्म को ऊंचा दिखाता और हिंदू धर्म को नीचा। वो कहता कि सच्चा ईश्वर वही है, जो अदृश्य है। हिंदू धर्म में देवता दिखते हैं, इसलिए झूठे हैं।‘ ‘दिसंबर 2025 की बात है। मैं लंच के बाद छाछ पी रही थी, तभी तौसीफ आया और पूछा- ‘क्या पी रही हो?’ मैंने कहा- ‘छाछ पी रही हूं।’ उसने अजीब नजरों से देखा और कहा- मेरे पास भी छाछ है, क्या पीना चाहोगी। ये कहते हुए उसने प्राइवेट पार्ट की ओर इशारा किया।’ ये FIR भी 2 अप्रैल को नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई। तीसरी पीड़ित भगवान कृष्ण और शिव को लेकर गलत बातें कीं तीसरी FIR में पीड़ित ने बताया, ‘मैं दिसंबर 2024 में ऑफिस में थी। तब शफी शेख काम के बहाने पास आकर बैठ गया और जानबूझकर मेरे पैर से अपना पैर रगड़ने की कोशिश की। फिर मेरा कीपैड इस्तेमाल करने के बहाने गलत तरह से छुआ। मैंने कुर्सी दूर कर ली, तो हंसते हुए चला गया।‘ ‘फरवरी 2026 में तौसीफ ने मेरे धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश की। उसने कहा कि कृष्ण ने 16 हजार महिलाओं से शादी की, इससे पता चलता है कि कृष्ण कैसे थे। क्या भगवान शंकर को ये नहीं पता था कि गणेश पार्वती के बेटे हैं। अगर नहीं पता था तो देवी पार्वती को बेटा कैसे हुआ। उन्होंने गणेश का सिर क्यों काट दिया।‘ निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था। गिरफ्तार HR मैनेजर अश्विनी चेनानी ने तौसीफ अत्तार से 38 बार, दानिश शेख से 1 बार, रजा मेमन से 22 बार और आपत्तिजनक चैट की थी। पीड़ित लड़कियों ने जब आरोपियों के खिलाफ शिकायत की तो अश्विनी ने शिकायत
Nashik TCS Case: Accused Nida Khan Detained

Hindi News National Nashik TCS Case: Accused Nida Khan Detained | Sexual Harassment Allegations नासिककुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक निदा खाने की एंटीसिपेटरी बेल 2 मई को खारिज हो चुकी है। नासिक TCS केस में पुलिस ने मुख्य आरोपी निदा खान को गुरुवार रात छत्रपति संभाजीनगर से हिरासत में लिया। निदा पर सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं। इससे पहले 2 मई को नासिक कोर्ट ने निदा की एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज की थी। प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी है। इस दौरान निदा फरार चल रही थी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिसर ने बताया था कि निदा खान इस केस की मुख्य आरोपियों में से एक हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। FIR के अनुसार, निदा पर आरोप है कि उसने महिला कर्मचारियों को बुर्का पहनने की सलाह दी थी। मामले की जांच नासिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच कर रही है। इस मामले में अब तक 9 FIR दर्ज हुई हैं, जो महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी हैं। SIT ने इस मामले में अब तक एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। निदा खान की 2 मई को एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज हो चुकी है। निदा ने कोर्ट में प्रेग्नेंसी का हवाला दिया था, लेकिन राहत नहीं निदा ने एंटीसिपेटरी बेल के लिए अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया था। मामले पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) ने पिछले महीने बयान में कहा था कि कंपनी किसी भी तरह के हैरेसमेंट और जबरदस्ती के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी पर काम करती है। अब जानिए क्या है पूरा मामला… TCS के नासिक ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए। SIT से जुड़े सोर्स कहते हैं, ‘पहली FIR 26 मार्च को देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। इसके बाद 8 और महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई। इनके बयानों से यौन शोषण, जोर-जबरदस्ती और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का पैटर्न सामने आया है। 9 में से 3 पीड़ित महिलाओं की FIR मिली… पहली पीड़ित सीनियर पूछते- हनीमून पर कहां गई, क्या-क्या किया पीड़ित महिला ने 2 अप्रैल को नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में FIR कराई है। उसके मुताबिक, जून 2025 से 31 मार्च 2026 तक वो TCS ऑफिस में एसोसिएट थी। पति काम के सिलसिले में पुणे में रहते हैं। FIR में उसने बताया, ‘24 जून 2025 को मुझे 3 महीने के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया गया। रजा मेमन का मेरी ट्रेनिंग से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी वो मेरे पास आकर पर्सनल लाइफ के बारे में पूछते। कहते थे कि पति के साथ क्यों नहीं रहती, हनीमून पर कहां गई थी। वहां क्या किया, कैसे किया। रजा मेमन के साथ शाहरुख कुरैशी भी था।‘ ट्रेनिंग में आसिफ अंसारी भी अक्सर मेरे पास आ जाता। सटकर बैठता और गलत तरह से छूता। कभी जांघ या कंधे पर हाथ रख देता। एक दिन लंच के वक्त हाथ गोद में रख दिया। फिर बोला- अगर कोई फिजिकल नीड हो, तो बताओ, पूरा कर दूंगा। महिला ने बताया, ‘सीनियर तौसीफ अत्तार ने भी गलत बर्ताव किया। वो भी टीम में नहीं था, फिर भी पास आकर खाने के लिए पूछता। अश्लील तरीके में पूछता, ‘क्या संतरे लाई हो। छोटे वाले लाई हो या बड़े वाले।’ वो चेहरा सटाता और छूता था। जब सवाल किया, तो कहा, ‘क्या तुम्हें आगे नहीं बढ़ना।‘ पीड़ित के मुताबिक, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तार और शफी शेख ने उसे फिजिकली और मेंटली टॉर्चर किया। हिंदू देवी-देवताओं को अपशब्द कहे, जिससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। उसने HR सेल में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। तब उसने मुंबई नाका थाने में शिकायत की। पुलिस को मिली 9 पीड़ितों की FIR के मुताबिक, 18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों को टारगेट किया गया। दूसरी पीड़ित ‘ईश्वर वही जो अदृश्य है, हिंदू देवी-देवता झूठे’ मुंबई नाका पुलिस स्टेशन पर दर्ज शिकायत के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 तक उसका ऑफिस में यौन उत्पीड़न हुआ। महिला कंपनी में क्रेडिट कार्ड कस्टमर्स की शिकायतें सुनती थी। उसने बताया, ‘तौसीफ अत्तार अपने धर्म को ऊंचा दिखाता और हिंदू धर्म को नीचा। वो कहता कि सच्चा ईश्वर वही है, जो अदृश्य है। हिंदू धर्म में देवता दिखते हैं, इसलिए झूठे हैं।‘ ‘दिसंबर 2025 की बात है। मैं लंच के बाद छाछ पी रही थी, तभी तौसीफ आया और पूछा- ‘क्या पी रही हो?’ मैंने कहा- ‘छाछ पी रही हूं।’ उसने अजीब नजरों से देखा और कहा- मेरे पास भी छाछ है, क्या पीना चाहोगी। ये कहते हुए उसने प्राइवेट पार्ट की ओर इशारा किया।’ ये FIR भी 2 अप्रैल को नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई। तीसरी पीड़ित भगवान कृष्ण और शिव को लेकर गलत बातें कीं तीसरी FIR में पीड़ित ने बताया, ‘मैं दिसंबर 2024 में ऑफिस में थी। तब शफी शेख काम के बहाने पास आकर बैठ गया और जानबूझकर मेरे पैर से अपना पैर रगड़ने की कोशिश की। फिर मेरा कीपैड इस्तेमाल करने के बहाने गलत तरह से छुआ। मैंने कुर्सी दूर कर ली, तो हंसते हुए चला गया।‘ ‘फरवरी 2026 में तौसीफ ने मेरे धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश की। उसने कहा कि कृष्ण ने 16 हजार महिलाओं से शादी की, इससे पता चलता है कि कृष्ण कैसे थे। क्या भगवान शंकर को ये नहीं पता था कि गणेश पार्वती के बेटे हैं। अगर नहीं पता था तो देवी पार्वती को बेटा कैसे हुआ। उन्होंने गणेश का सिर क्यों काट दिया।‘ निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था। गिरफ्तार HR मैनेजर अश्विनी चेनानी ने तौसीफ अत्तार से 38 बार, दानिश शेख से 1 बार, रजा मेमन से 22 बार और आपत्तिजनक चैट की थी। पीड़ित लड़कियों ने जब आरोपियों के खिलाफ शिकायत की तो अश्विनी ने
थायराइड कंट्रोल करने का तरीका, हेल्दी फूड चुनें, इन फूड्स से करें परहेज

Last Updated:May 08, 2026, 01:20 IST थायराइड कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे सिर्फ दवाओं से ही नियंत्रित किया जा सके. सही खानपान, नियमित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. चलिए यहां समझते हैं किन फूड्स के सेवन और परहेज से इस बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है. ख़बरें फटाफट थायराइड की समस्या होने पर थकान, बाल झड़ने, मूड स्विंग जैसे लक्षण नजर आते हैं. थायराइड की समस्या आज के समय में बहुत आम हो गई है, खासकर महिलाओं में यह ज्यादा देखी जाती है. यह एक हार्मोन से जुड़ी बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्रंथि (जो गले के पास होती है) शरीर के लिए जरूरी हार्मोन या तो बहुत ज्यादा बनाने लगती है या बहुत कम. दोनों ही स्थितियों में शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं, जैसे वजन बढ़ना या घटना, थकान, बाल झड़ना, मूड बदलना और कमजोरी महसूस होना. इस समस्या के बढ़ने का एक बड़ा कारण खराब जीवनशैली है. गलत खानपान, नींद की कमी, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इसका मुख्य कारण माने जाते हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ दवाओं से ही थायराइड ठीक हो जाएगा, लेकिन सच यह है कि दवाओं के साथ-साथ सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना भी बहुत जरूरी होता है. अगर खानपान सही न हो, तो दवाओं का असर भी सीमित हो सकता है. थायराइड में क्या खाना चाहिए?– सबसे पहले सब्जियों की बात करें तो लौकी, तोरी, परवल, कद्दू, गाजर, बीन्स और सभी हरी पत्तेदार सब्जियां बहुत अच्छी मानी जाती हैं. ये सब्जियां शरीर के लिए हल्की होती हैं और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालतीं. साथ ही इनमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं.– फलों में अनार, पपीता, सेब, नाशपाती और अमरूद को शामिल किया जा सकता है. ये फल शरीर को विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है.– दालों की बात करें तो मूंग दाल, मसूर दाल और कुल्थी की दाल अच्छी मानी जाती हैं. ये हल्की होती हैं और आसानी से पच जाती हैं. साथ ही इनमें प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में होता है, जो शरीर की मांसपेशियों और ऊर्जा के लिए जरूरी है. थायराइड में क्या नहीं खाना चाहिए?– सबसे पहले गोभी वर्ग की सब्जियां जैसे फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रोकली आदि को सीमित करना चाहिए, क्योंकि ये कुछ मामलों में थायराइड हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं. इसी तरह सोयाबीन और सोया उत्पाद भी कुछ लोगों में समस्या बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनका सेवन कम करने की सलाह दी जाती है.– फलों में केला, आम, चीकू और अंगूर को ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए. ये फल शुगर और कैलोरी में अधिक हो सकते हैं, जिससे वजन और हार्मोनल बैलेंस पर असर पड़ सकता है. तेल के मामले में बार-बार गर्म किया हुआ तेल बहुत नुकसानदायक होता है.– इसके अलावा मूंगफली का तेल और रिफाइंड तेल का ज्यादा उपयोग भी शरीर के लिए अच्छा नहीं माना जाता. ये तेल शरीर में सूजन और अन्य समस्याएं बढ़ा सकते हैं. थायराइड के मरीजों को देसी घी, नारियल तेल और सरसों का तेल सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए.– दालों में राजमा, छोले और सोया चंक्स का ज्यादा सेवन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ये भारी होते हैं और पाचन में समय लेते हैं, जिससे थायराइड के मरीजों को परेशानी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Bombay HC Upholds Acquittal in Sohrabuddin Encounter Case; 22 Accused Acquitted

Hindi News National Bombay HC Upholds Acquittal In Sohrabuddin Encounter Case; 22 Accused Acquitted नई दिल्ली8 घंटे पहले कॉपी लिंक 23 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन उनकी पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम का बस से अपहरण हुआ था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को साल 2005 के सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ केस में सभी 22 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा है। इस मामले में सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी हत्या हो गई थी। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की बेंच ने सोहराबुद्दीन के भाइयों, रुबाबुद्दीन, नयाबुद्दीन की अपीलों को खारिज कर दिया। जिन 22 को आरोपमुक्त किया गया है, उनमें गुजरात व राजस्थान पुलिस के जूनियर लेवल के अफसर थे। उन पर आरोप था कि वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने इन तीनों का अपहरण किया और बाद में फर्जी मुठभेड़ में उन्हें मार गिराया। बाकी एक आरोपी गुजरात के एक फार्महाउस का मालिक था, जहां सोहराबुद्दीन और कौसर बी को उनकी हत्या से पहले अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस साक्ष्यों के संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस केस में अमित शाह, आईपीएस डीजी वंजारा, आईएएस राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन पहले ही बरी हो चुके हैं। सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी की हत्या वंबर 2005 में की गई थी। फाइल अब जानिए क्या है पूरा मामला चश्मदीद समेत 3 हत्याएं, 201 में 92 गवाह मुकरे 23 नवंबर 2005: सोहराबुद्दीन, पत्नी कौसर बी और तुलसीराम का बस से अपहरण। 26 नवंबर: सोहराबुद्दीन की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। 29 नवंबर: सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। दिसंबर 2006: चश्मदीद गवाह तुलसीराम की अन्य मुठभेड़ में मौत। 2007-2010: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुजरात सीआईडी के बाद जांच सीबीआई को दी गई। 2012-2013: निष्पक्ष सुनवाई के लिए केस मुंबई ट्रांसफर। तीनों हत्याओं के ट्रायल एक साथ जोड़े गए। 2014-2017: वरिष्ठ आईपीएस अफसर सबूतों के अभाव में आरोपमुक्त हो गए। दिसंबर 2018: विशेष सीबीआई कोर्ट ने 210 में से 92 गवाहों के मुकर जाने के कारण शेष 22 को बरी किया। 2019-2025: शेख के भाइयों ने बरी किए जाने के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… सुवेंदु अधिकारी के पीए के आखिरी 90 मिनट: हमलावरों ने स्कॉर्पियो के सामने कार लाकर रास्ता रोका; गोलियां मारीं, 2 सीने में, एक पेट में लगी पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात 10.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। 42 साल के चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम जा रहे थे, जहां वे किराए के घर में अकेले रहते थे। हमलावर ने उन्हें सीने में दो और एक पेट में गोली मारी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bombay HC Upholds Acquittal in Sohrabuddin Encounter Case; 22 Accused Acquitted

Hindi News National Bombay HC Upholds Acquittal In Sohrabuddin Encounter Case; 22 Accused Acquitted नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक 23 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन उनकी पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम का बस से अपहरण हुआ था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को साल 2005 के सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ केस में सभी 22 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा है। इस मामले में सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी हत्या हो गई थी। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की बेंच ने सोहराबुद्दीन के भाइयों, रुबाबुद्दीन, नयाबुद्दीन की अपीलों को खारिज कर दिया। जिन 22 को आरोपमुक्त किया गया है, उनमें गुजरात व राजस्थान पुलिस के जूनियर लेवल के अफसर थे। उन पर आरोप था कि वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने इन तीनों का अपहरण किया और बाद में फर्जी मुठभेड़ में उन्हें मार गिराया। बाकी एक आरोपी गुजरात के एक फार्महाउस का मालिक था, जहां सोहराबुद्दीन और कौसर बी को उनकी हत्या से पहले अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस साक्ष्यों के संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस केस में अमित शाह, आईपीएस डीजी वंजारा, आईएएस राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन पहले ही बरी हो चुके हैं। सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी की हत्या वंबर 2005 में की गई थी। फाइल अब जानिए क्या है पूरा मामला चश्मदीद समेत 3 हत्याएं, 201 में 92 गवाह मुकरे 23 नवंबर 2005: सोहराबुद्दीन, पत्नी कौसर बी और तुलसीराम का बस से अपहरण। 26 नवंबर: सोहराबुद्दीन की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। 29 नवंबर: सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। दिसंबर 2006: चश्मदीद गवाह तुलसीराम की अन्य मुठभेड़ में मौत। 2007-2010: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुजरात सीआईडी के बाद जांच सीबीआई को दी गई। 2012-2013: निष्पक्ष सुनवाई के लिए केस मुंबई ट्रांसफर। तीनों हत्याओं के ट्रायल एक साथ जोड़े गए। 2014-2017: वरिष्ठ आईपीएस अफसर सबूतों के अभाव में आरोपमुक्त हो गए। दिसंबर 2018: विशेष सीबीआई कोर्ट ने 210 में से 92 गवाहों के मुकर जाने के कारण शेष 22 को बरी किया। 2019-2025: शेख के भाइयों ने बरी किए जाने के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… सुवेंदु अधिकारी के पीए के आखिरी 90 मिनट: हमलावरों ने स्कॉर्पियो के सामने कार लाकर रास्ता रोका; गोलियां मारीं, 2 सीने में, एक पेट में लगी पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात 10.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। 42 साल के चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम जा रहे थे, जहां वे किराए के घर में अकेले रहते थे। हमलावर ने उन्हें सीने में दो और एक पेट में गोली मारी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…






