गर्मी में पेट, स्किन और बालों की हर परेशानी का देसी इलाज है बड़हर, जानें जबरदस्त फायदे

Last Updated:May 09, 2026, 23:58 IST मौसम बदलते ही पाचन खराब होना, त्वचा का रूखापन और बाल झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. ऐसे समय में सही खानपान शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. बड़हर एक ऐसा देसी फल है, जिसे आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना जाता है. यह कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है और गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ इम्युनिटी मजबूत करने में भी सहायक माना जाता है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही शरीर में कई तरह के बदलाव महसूस होने लगते हैं. तेज धूप, बढ़ता तापमान और मौसम में अचानक बदलाव का असर सबसे पहले पाचन, त्वचा और बालों पर दिखाई देता है. इन दिनों कई लोग पेट की गड़बड़ी, स्किन ड्राईनेस और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं. ऐसे समय में खानपान का सही चुनाव बेहद जरूरी माना जाता है. प्रकृति में ऐसे कई मौसमी फल मौजूद हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. उन्हीं में से एक है बड़हर, जिसे आयुर्वेद में बेहद गुणकारी फल माना जाता है. बड़हर को कई क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. यह फल स्वाद के साथ-साथ पोषण के मामले में भी काफी खास माना जाता है. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, पोटैशियम और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देने और ठंडक बनाए रखने वाला फल माना जाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार मौसमी बदलाव के दौरान शरीर की इम्युनिटी कमजोर होने लगती है. ऐसे में पोषण से भरपूर फल शरीर को जरूरी ताकत देने में मदद कर सकते हैं. बड़हर का सेवन खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए फायदेमंद माना जाता है. पाचन को बेहतर बनाने में मददगारगर्मी के मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं. ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना खाने से कब्ज, गैस और अपच जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. बड़हर में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. यह आंतों को स्वस्थ रखने और पेट को हल्का महसूस कराने में सहायक माना जाता है. कुछ लोग इसे गर्मियों में पेट को शांत रखने वाले फल के रूप में भी शामिल करते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद कर सकता है. त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंदगर्मी में तेज धूप और पसीने की वजह से त्वचा बेजान और रूखी दिखने लगती है. विटामिन ए और विटामिन सी से भरपूर बड़हर स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है. माना जाता है कि इसके पोषक तत्व त्वचा को पोषण देने के साथ गर्मी में होने वाले दाने और खुजली जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक हो सकते हैं. इसके अलावा आयरन और अन्य मिनरल्स बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. मौसम बदलने के दौरान बाल झड़ने की समस्या को कम करने के लिए भी लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं. इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगारमौसम बदलते ही सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बेहद जरूरी माना जाता है. बड़हर में मौजूद पोषक तत्व और प्राकृतिक गुण इम्युनिटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. यही वजह है कि आयुर्वेद में इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी फल माना गया है. कई तरीकों से कर सकते हैं सेवनबड़हर का इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से किया जाता है. कुछ लोग इसे सब्जी बनाकर खाते हैं, तो कई जगह इसका अचार भी काफी पसंद किया जाता है. इसके सूखे टुकड़ों का इस्तेमाल मसालों में भी किया जाता है. इसका हल्का खट्टा-मीठा स्वाद गर्मियों में काफी ताजगी देने वाला माना जाता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
गर्मियों में ठंडाई रेसिपी: गर्मी में शरीर को दें ठंडी-ठंडी ठंडी, घर में बनाएं 5 मिनट में तैयार; चीनी की भी कोई ज़रूरत नहीं

मीट मेवे, इंफ और खजूर जैसे नी से तैयार सौ यह ठंडी बॉडी को ठंडक देने के साथ-साथ एनर्जी भी देती है। छवि: फ्रीपिक सामग्री: 2 चम्मच ठंडा दूध, 8-10 बादाम, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 छोटा चम्मच सौंफ, 4-5 काली मिर्च, 2 इलायची, 4-5 खजूर, थोड़ा सा गुलाब जल, कुछ बर्फ के टुकड़े, पिस्ता और बादाम छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले बादाम, खरबूजे के बीज, सौंफ, काली मिर्च और इलायची को 10-15 मिनट के लिए पानी में डुबोकर रखें। अगर जल्दी बने तो गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। छवि: एआई अब पिज़्ज़ा में भीगी हुई साड़ी सामान। इसके साथ खजूर और थोड़ा सा दूध के लिए फार्मासिस्ट पेस्ट तैयार कर लें। इसके बाद बचा हुआ ठंडा दूध और गुलाब जल आर्किटेक्चर एक बार फिर ब्लेंड करें। छवि: फ्रीपिक आपकी पसंदीदा-ठांडी स्वादिष्ट कूलाई तैयार है। अब इसे प्लास्टिक में डालें, ऊपर से बर्फ, कटा हुआ पिस्ता और बादाम डालें और सर्व करें। ठंडे शरीर को अंदर से ठंडक मिलती है। छवि: फ्रीपिक गर्मी में डाईहाइड्रेशन से बचाव होता है। खजूर की वजह से नैचुरल द्वीपसमूह है। बादाम और बीज शरीर को ऊर्जा देते हैं। पेट ठंडा और ठंडा महसूस होता है। छवि: फ्रीपिक अगर आपका वजन कम कर रहे हैं तो फुल क्रीम दूध की जगह लो फैट दूध का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं बर्फ से ढकेलने पर ज्यादा ठंडा पसंद नहीं है। छवि: एआई घर की बनी यह टोकरी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएगी। गर्मी में जब भी कुछ ठंडा और स्टेक ड्रिंकिंग का मन हो तो इस आसान रेसिपी को जरूर ट्राई करें। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट) ठंडाई रेसिपी(टी) मसाला ठंडाई रेसिपी(टी) ठंडाई रेसिपी(टी) ठंडाई कैसे बनाएं(टी) समर ड्रिंक(टी) समर ड्रिंक रेसिपी(टी) बादाम ठंडाई(टी) ड्राई फ्रूट ठंडाई
ठंडा और सेफ करने के चक्कर में बिगाड़ रहे हैं फलों की सेहत! फ्रिज में भूलकर भी न रखें ये 5 Fruits

Last Updated:May 09, 2026, 22:20 IST Fruits Storage Tips in fridge: गर्मियों में फल खराब न हों, इसलिए ज्यादातर लोग उन्हें फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन हर फल को ठंडा रखना सही नहीं होता. कुछ फल ऐसे होते हैं, जिनका स्वाद, टेक्सचर और पोषण फ्रिज में रखने से खराब होने लगता है. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 फलों के बारे में, जिन्हें भूलकर भी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. ख़बरें फटाफट फलों को स्टोर करने की टिप्स. गर्मियों में फल जल्दी खराब न हों, इसलिए ज्यादातर लोग उन्हें सीधे फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन हर फल को ठंडे तापमान में रखना सही नहीं माना जाता. TOI की रिपोर्ट के अनुसार कुछ फल ऐसे होते हैं, जिन्हें फ्रिज में रखने से उनका स्वाद, टेक्सचर और पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं. खासकर ट्रॉपिकल फलों में ठंडा तापमान उनकी प्राकृतिक पकने की प्रक्रिया को बिगाड़ सकता है. ऐसे में फल बाहर से ठीक दिखते हैं, लेकिन अंदर से खराब होने लगते हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 फलों के बारे में जिन्हें फ्रिज में रखने से बचना चाहिए. केलाकेला उन फलों में शामिल है जिन्हें फ्रिज में रखने की सलाह नहीं दी जाती. ठंडा तापमान केले की प्राकृतिक रिपनिंग प्रक्रिया को रोक सकता है. कई बार फ्रिज में रखा केला बाहर से काला पड़ जाता है और अंदर से मुलायम या पानी जैसा हो जाता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केले को कमरे के तापमान पर रखना ज्यादा बेहतर होता है ताकि उसका स्वाद और टेक्सचर सही बना रहे. आमआम को भी बिना पके सीधे फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. ठंडा तापमान उसकी मिठास और खुशबू को कम कर सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार कच्चे या आधे पके आम को पहले बाहर सामान्य तापमान पर पकने देना चाहिए. पूरी तरह पकने के बाद जरूरत हो तो कुछ दिनों के लिए फ्रिज में रखा जा सकता है. पपीतापपीता भी ट्रॉपिकल फल है और इसे जल्दी फ्रिज में रखने से उसकी पकने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कच्चा पपीता ठंड में सही तरीके से नहीं पक पाता और उसका स्वाद फीका हो सकता है. वहीं ज्यादा ठंड में रखने से उसका टेक्सचर भी खराब हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स पहले इसे बाहर पकाने और फिर सीमित समय के लिए ठंडा रखने की सलाह देते हैं. तरबूजपूरा तरबूज लंबे समय तक फ्रिज में रखने से उसका स्वाद और टेक्सचर प्रभावित हो सकता है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार बहुत ज्यादा ठंडा तापमान उसके एंटीऑक्सीडेंट्स पर भी असर डाल सकता है. हालांकि कटे हुए तरबूज को जरूर फ्रिज में रखना चाहिए ताकि उसमें बैक्टीरिया न पनपें. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि साबुत तरबूज को ठंडी और सूखी जगह पर रखना बेहतर माना जाता है. आड़ू और प्लमआड़ू, प्लम और नेक्टरीन जैसे स्टोन फ्रूट्स को भी तुरंत फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. ये फल पेड़ से टूटने के बाद भी पकते रहते हैं. अगर इन्हें जल्दी फ्रिज में रख दिया जाए तो इनका स्वाद फीका और टेक्सचर रूखा हो सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इन्हें पहले कमरे के तापमान पर पकाना चाहिए और बाद में जरूरत पड़ने पर फ्रिज में रखना चाहिए. आखिर क्यों जरूरी है सही स्टोरेज?हर फल की अपनी अलग स्टोरेज जरूरत होती है. कुछ फलों में एथिलीन नाम का प्राकृतिक हार्मोन होता है, जो पकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है. फ्रिज का कम तापमान इस प्रक्रिया को धीमा या खराब कर सकता है. यही वजह है कि कई फल अपना असली स्वाद और पोषण खो देते हैं. एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि कटे हुए फलों को हमेशा फ्रिज में रखना चाहिए, क्योंकि बाहर रखने से उनमें बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सा फल कब और कैसे स्टोर करना चाहिए. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
थलपति की कांटेदार राह: विजय और स्थिर कार्यकाल के बीच 10 बड़ी बाधाएं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 22:03 IST तमिलनाडु में सिल्वर स्क्रीन से सचिवालय तक का संक्रमण विजय के लिए संरचनात्मक और राजनीतिक बाधाओं का एक जटिल सेट लेकर आया है हनीमून अवधि से परे जीवित रहने के लिए, टीवीके को अपनी ‘स्थापना-विरोधी’ और ‘द्रमुक-विरोधी’ बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा। फ़ाइल चित्र अभिनेता-राजनेता विजय का मुख्यमंत्री पद पर ऐतिहासिक आरोहण तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक आदर्श बदलाव का प्रतीक होगा। हालाँकि, सिल्वर स्क्रीन से सचिवालय तक का संक्रमण अपने साथ संरचनात्मक और राजनीतिक बाधाओं का एक जटिल सेट लेकर आता है। जैसा कि तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) बागडोर संभालने की तैयारी कर रहा है, निम्नलिखित दस चुनौतियाँ विजय के पहले प्रशासन की सफलता या विफलता को परिभाषित करेंगी। 1. राजनीतिक स्थिरता सिद्ध करना हालाँकि टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन वह अकेले बहुमत से पीछे रह गई, जिसके कारण कांग्रेस, वामपंथी दलों और वीसीके पर निर्भरता जरूरी हो गई। यह गठबंधन अंकगणित तत्काल कमजोरियाँ पैदा करता है, जिसमें प्रमुख मंत्रालयों के लिए लगातार सौदेबाजी और सहयोगियों से नीतिगत प्रभाव शामिल है। राज्यपाल की गहन जांच के दौरान एक नाजुक गठबंधन को आगे बढ़ाना पहले 6 से 12 महीनों को विजय की जीवित रहने की प्रवृत्ति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बना देगा। 2. सिनेमा से शासन तक संक्रमण एमजी रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे दिग्गजों के नक्शेकदम पर चलते हुए, विजय को अब व्यापक लोकप्रियता को प्रशासनिक विश्वसनीयता में बदलना होगा। शासन के लिए चुनाव प्रचार से अलग कौशल की आवश्यकता होती है – विशेष रूप से एक जटिल नौकरशाही का प्रबंधन करना, कैबिनेट गुटों को संभालना और बजट अनुशासन में महारत हासिल करना। विश्लेषक इस बात पर बंटे हुए हैं कि क्या जनता ने टीवीके की संगठनात्मक गहराई के लिए मतदान किया या केवल “विजय प्रतीक” के लिए। 3. एक मजबूत प्रशासनिक टीम का निर्माण एक उभरते हुए संगठन के रूप में, टीवीके में पहली बार चुने गए विधायक और अपेक्षाकृत अनुभवहीन जिला नेता मौजूद हैं। द्रमुक या अन्नाद्रमुक के विपरीत, टीवीके के पास दशकों पुरानी प्रशासनिक मशीनरी का अभाव है। सक्षम मंत्रियों को ढूंढना जो एक पेशेवर शासन संरचना स्थापित करते हुए आंतरिक शक्ति केंद्रों को बनने से रोक सकें, नए मुख्यमंत्री के लिए एक कठिन काम होगा। 4. द्रमुक को एक मजबूत विपक्ष के रूप में संभालना अपने चुनावी झटके के बावजूद, एमके स्टालिन और डीएमके राज्य के संस्थागत ढांचे में गहराई से जमे हुए हैं। एक विशाल कैडर नेटवर्क, स्थानीय निकाय की ताकत और एक परिष्कृत मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र के साथ, द्रमुक के एक आक्रामक विपक्ष होने की उम्मीद है। अनुभवहीन टीवीके सरकार के हर कदम को राजनीतिक माइक्रोस्कोप के तहत रखा जाएगा। 5. एआईएडीएमके गतिशीलता का प्रबंधन अन्नाद्रमुक, हालांकि कमजोर हो गई है, फिर भी थेवर बेल्ट में एक महत्वपूर्ण ग्रामीण वोट बैंक और प्रभाव बरकरार रखा है। पर्दे के पीछे की बातचीत और अन्नाद्रमुक विधायकों के बीच संभावित गुटीय आंदोलनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि तमिलनाडु का राजनीतिक माहौल अत्यधिक अस्थिर और अप्रत्याशित रहेगा। 6. आर्थिक और रोजगार का दबाव जनता की उम्मीदें आसमान पर हैं, खासकर युवाओं के लिए रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास के संबंध में। हालाँकि, विजय को महत्वपूर्ण राजकोषीय दबाव और भारी कल्याण सब्सिडी बोझ का सामना करने वाला राज्य विरासत में मिला है। शहरी बुनियादी ढांचे के तनाव और पड़ोसी राज्यों से औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का मतलब है कि युवा मतदाताओं द्वारा अपेक्षित “तेज़ बदलाव” को पूरा करना मुश्किल होगा। 7. फैनबेस की अपेक्षाओं का प्रबंधन करना यह विजय की सबसे अनोखी चुनौती बनी हुई है। उनके मुख्य समर्थक सिनेमाई परिवर्तन की उम्मीद करते हैं – स्वच्छ शासन और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई एक फिल्म की पटकथा की गति से की जाती है। हकीकत में, प्रशासन के पहिये धीरे-धीरे चलते हैं, और सिनेमाई अपेक्षा और नौकरशाही वास्तविकता के बीच कोई भी कथित अंतर तेजी से सार्वजनिक निराशा का कारण बन सकता है। 8. केंद्र-राज्य संबंध भाजपा के खिलाफ विजय की प्रचार स्थिति यह सुनिश्चित करती है कि नई दिल्ली के साथ उनके संबंधों पर करीब से नजर रखी जाएगी। संघर्ष के बारहमासी क्षेत्रों में घर्षण की संभावना है: एनईईटी, जीएसटी बकाया, भाषा नीति और संघीय अधिकार। सरकार गठन के दौरान लोकभवन के साथ हालिया तनाव से पता चलता है कि राज्यपाल के साथ बातचीत राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहेगी। 9. कानून एवं व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा सत्ता में बदलाव से अक्सर कैडर संघर्ष, विरोध लामबंदी और राजनीतिक दलबदल शुरू हो जाता है। अनुभवहीन राजनीतिक प्रबंधकों के नेतृत्व वाली सरकार के लिए, शुरुआती महीनों को अक्सर कानून-व्यवस्था परीक्षणों द्वारा परिभाषित किया जाता है। प्रतिद्वंद्वी दलों की दबाव रणनीति से निपटते हुए शांति बनाए रखना नए गृह मंत्री के लिए अग्निपरीक्षा होगी। 10. एक विशिष्ट विचारधारा को परिभाषित करना हनीमून अवधि से परे जीवित रहने के लिए, टीवीके को अपनी “स्थापना-विरोधी” और “द्रमुक-विरोधी” बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा। असली सवाल यह है: टीवीके शासन मॉडल क्या है? आर्थिक नीति, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक आउटरीच के लिए एक स्पष्ट ढांचे के बिना, दीर्घकालिक राजनीतिक गति को बनाए रखना एक संघर्ष होगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया थलपति की कांटेदार राह: विजय और स्थिर कार्यकाल के बीच 10 बड़ी बाधाएं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक
ओरी बोले- 24 घंटे कंगना रनोट संग रह सकता हूं:खतरों के खिलाड़ी 15 में दिखेंगे, कहा- मोटिवेशन नहीं सिर्फ एक्शन पर भरोसा करता हूं

सोशल मीडिया सेंसेशन ओरहान अवात्रामणि उर्फ ओरी अब स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में नजर आने वाले हैं। अपने अनोखे अंदाज, फनी जवाबों और वायरल पर्सनैलिटी के लिए मशहूर ओरी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में शो, डर, मोटिवेशन, सोशल मीडिया इमेज और अपनी निजी सोच को लेकर खुलकर बातें कीं। बातचीत के दौरान ओरी ने बताया कि उन्हें पानी या खतरनाक स्टंट्स से डर नहीं लगता और वे मोटिवेशन की बजाय एक्शन में भरोसा करते हैं। साथ ही उन्होंने ‘ओरी टच’, सेलिब्रिटी फ्रेंडशिप्स और रोहित शेट्टी के साथ अपनी केमिस्ट्री को लेकर भी मजेदार जवाब दिए। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ में जाने को लेकर एक्साइटेड ज्यादा हैं या नर्वस? जवाब: सच बोलूं तो मुझे डर महसूस नहीं हो रहा। मैं काफी कॉन्फिडेंट हूं। सवाल: रियल लाइफ में किसी चीज से डर लगता है? जवाब: नहीं। मुझे किसी चीज से खास डर नहीं लगता। सवाल: आपने पहले कभी ‘खतरों के खिलाड़ी’ देखा था? जवाब: नहीं, मैंने कभी शो फॉलो नहीं किया। सवाल: शो में हाइट, पानी और खतरनाक स्टंट होते हैं। इनमें से सबसे मुश्किल क्या लग रहा है? जवाब: लोग बार-बार पानी का नाम ले रहे हैं, लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि पानी से डर कैसे लग सकता है। पानी डरावना नहीं होता। सवाल: आपकी जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव रहे। ऐसी कौन-सी चीज है जो आपको आगे बढ़ने की ताकत देती है? जवाब: मैं मोटिवेशन में विश्वास नहीं करता। अगर आप सिर्फ मोटिवेशन के भरोसे काम करेंगे, तो एक दिन मोटिवेशन खत्म हो जाएगा और काम भी रुक जाएगा। जो करना है, वो इसलिए करो क्योंकि आपको करना है। सवाल: फिर आपके हिसाब से काम करने की असली वजह क्या होनी चाहिए? जवाब: सिर्फ यही कि आपको वो काम करना है। मैं ज्यादा सोचता नहीं, बस कर देता हूं। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ करने के पीछे सबसे बड़ी वजह क्या रही? जवाब: मैं थोड़ा बोर हो गया था। लगा कुछ नया करना चाहिए, तो मैंने हां कह दिया। सवाल: क्या ये आपका पहला रियलिटी शो है? जवाब: हां, बिल्कुल। मैं खुद को ‘रियलिटी शो वर्जिन’ कहता हूं। ये मेरा पहला शो है और शायद आखिरी भी। सवाल: ऐसा क्या था जिसने आपको इस शो के लिए मना लिया? जवाब: जब मैंने देखा कि अविनाश मिश्रा भी शो कर रहे हैं, तो मैंने सोचा मैं भी कर लेता हूं। सवाल: क्या आपने अविनाश को बिग बॉस में फॉलो किया था? जवाब: नहीं, मैं बिग बॉस नहीं देखता। लेकिन उनकी आंखें बहुत अच्छी हैं। सवाल: क्या आप अगली बार बिग बॉस में जाएंगे? जवाब: शायद। सवाल: सोशल मीडिया पर लोग आपको जानते हैं, लेकिन असली ओरी कौन है? जवाब: अंदर से मैं बिल्कुल नॉर्मल इंसान हूं। दो फेफड़े, एक दिल, एक पेट… बाकी सबकी तरह ही। सवाल: अगर आपको 24 घंटे बिना फोन किसी सेलिब्रिटी के साथ एक कमरे में रहना पड़े, तो किसे चुनेंगे? जवाब: कंगना रनोट। उनसे लंबी बातचीत करना दिलचस्प होगा। सवाल: क्या आप सारा अली खान के अच्छे दोस्त हैं? जवाब:अच्छा दोस्त था। अभी नहीं हूं। सवाल: क्या आप अमृता सिंह के बहुत करीबी हैं? जवाब: अभी नहीं। सवाल: किसी सेलिब्रिटी से डर लगता है? जवाब: नहीं, किसी से नहीं। सवाल: अपने बारे में सुना सबसे अजीब या मजेदार रूमर कौन-सा था? जवाब: शायद जो लोग रूमर कहते हैं, उनमें से कई सच भी होते हैं। सवाल: लोग कहते हैं कि आपका ‘टच’ काफी फेमस है। आखिर ये कॉन्सेप्ट क्या है? जवाब: लोग कहते हैं कि जब मैं उनके कंधे या सिर पर हाथ रखता हूं, तो उन्हें अलग एनर्जी महसूस होती है। कोई कहता है स्ट्रेस कम हो गया, कोई कहता है अच्छा महसूस हुआ। अब ये लोग कहते हैं, मैं नहीं। सवाल: क्या कोई ऐसा सेलिब्रिटी है जिसके साथ आपका वो ‘ओरी टच’ अभी बाकी है? जवाब: हमारे ऑनरेबल पीएम। उनसे मिलना चाहूंगा। सवाल: शो में दर्शकों को ओरी का कौन-सा नया रूप देखने मिलेगा? जवाब: मेरा सबसे फिट और पतला वर्जन। मैंने शो के लिए काफी वजन कम किया है, क्योंकि टीवी पर इंसान ज्यादा भारी दिखता है। सवाल: रोहित शेट्टी के साथ आपकी बॉन्डिंग कैसी रहने वाली है? जवाब: वो तो शो देखकर ही पता चलेगा। मुझे खुद भी इंतजार है।
सत्तू की बर्फी रेसिपी: गर्मी में ऊर्जा का अनोखा सत्तू की बर्फी, बिना चीनी के होगी तैयार; नोट करें मिनट वाली शुगर फ्री रेसिपी

सत्तू में प्रोटीन, चारे और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं मिनटों में तैयार होने वाली आसान सत्तू बर्फी की रेसिपी। छवि: फ्रीपिक सामग्री: 1 कप सत्तू, 1/2 कप देसी घी, 8-10 बीज खजूर, 2 बड़े टुकड़े कटे हुए बादाम, 2 बड़े टुकड़े कटे हुए काजू, 1 छोटा बादाम पाउडर, 2 बड़े टुकड़े दूध, छोटे सा पिस्ता छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले खजूर को छोटी-छोटी सजावट में काटें। अब एक पैन में घी गर्म करें और 4-5 मिनट तक सत्तू का मिश्रण बनाएं। छवि: एआई जब सत्तू से जोसेफ आने लगे, तब कटे हुए डोकलाम डॉल्स शामिल थे। अब प्लास्टर में खजूर और दूध के प्लास्टर पेस्ट तैयार कर लें। छवि: एआई इस पेस्ट को भुने हुए सत्तू में पकौड़े और अच्छे तरह के मसाले बने रहें ताकि मिश्रण एकसार हो जाए। अंतिम में इलायची पाउडर दाल। अब एक प्लेट या ट्रे में थोड़ा सा घी मिलाकर फैलाएं और ऊपर से पिस्ता डाल दें। छवि: एआई इसे 15-20 मिनट के लिए सेट करें। फिर से बाज़ारे आकार में काट लें। आपकी मशीनरी और टेस्टी सत्तू की बर्फी तैयार है। इससे शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलती है। लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। छवि: एआई बिना होने के चीनी की वजह से यह मिठाई स्वादिष्ट व्यंजन है। गर्मी में शरीर को ठंडक की सलाह में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक यदि आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह बर्फ सीमित मात्रा में ही स्थिर है। वहीं, बीमार व्यक्ति भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका सेवन करें। छवि: फ्रीपिक
लंदन भेजने के नाम पर अहमदाबाद के परिवार का अपहरण:दुबई पहुंचने के बाद संपर्क टूटा; एजेंटों ने बेटे की फोटो भेजकर 1 करोड़ मांगे

गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाला एक गुजराती परिवार विदेश भेजने के नाम पर एजेंटों के जाल में फंस गया। परिवार के चार सदस्य पति, पत्नी और उनके दो बेटे 20 अप्रैल को लंदन जाने के लिए निकले थे, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उनका परिवार से संपर्क टूट गया। परिजनों का आरोप है कि एजेंटों ने चारों को बंधक बना लिया है और उन्हें छोड़ने के बदले 1 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी जा रही है। परिजनों के मुताबिक आरोपियों ने परिवार को डराने के लिए एक बेटे की खून से लथपथ तस्वीर भी भेजी है। साथ ही महिला की एक ऑडियो क्लिप भेजी गई, जिसमें वह रोते हुए पैसे देने की गुहार लगा रही है। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि परिवार को केन्या या इथियोपिया के किसी अज्ञात स्थान पर बंधक बनाकर रखा गया है। दिल्ली, श्रीलंका होते हुए दुबई पहुंचे जानकारी के मुताबिक गोमतीपुर इलाके के रहने वाले परिवार ने लंदन जाने के लिए एजेंट से संपर्क किया था। एजेंट ने प्रति व्यक्ति 25 लाख रुपए में लंदन पहुंचाने का सौदा तय किया था। कुल 1 करोड़ रुपए का पैकेज बनाया गया था। तय हुआ था कि लंदन पहुंचने के बाद पैसे दिए जाएंगे। 20 अप्रैल को एजेंट परिवार को पहले दिल्ली ले गया। वहां कुछ दिन रुकने के बाद उन्हें श्रीलंका भेजा गया और फिर दुबई पहुंचाया गया। दुबई तक परिवार लगातार संपर्क में था, लेकिन उसके बाद अचानक सभी के फोन बंद हो गए। विदेशी नंबर से आया कॉल, खुद को बताया बाबा खान परिवार के लोगों ने बताया कि दुबई के बाद एक विदेशी नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बाबा खान बताया और डेढ़ करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। बाद में रकम घटाकर 1 करोड़ और फिर 70 लाख रुपए तक लाने की बात कही गई। बेटे की खून से लथपथ फोटो भेजी परिजनों ने बताया कि आरोपियों ने दबाव बनाने के लिए परिवार को एक बेटे की खून से लथपथ फोटो भेजी। इसके अलावा महिला की एक ऑडियो क्लिप भी भेजी गई, जिसमें वह अपनेी बेटी से कह रही है कि एक बेटे को मार दिया गया है, अगर दो घंटे में पैसे नहीं मिले तो दूसरे बेटे को भी ले जाएंगे। गोमतीपुर थाने में शिकायत दर्ज मामले में परिवार ने गोमतीपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के बाद अहमदाबाद पुलिस, क्राइम ब्रांच जांच में जुट गए हैं। पुलिस ने अहमदाबाद के एक एजेंट को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पूछताछ में वलसाड के एक अन्य एजेंट का नाम सामने आया है। उसे पकड़ने के लिए पुलिस टीम रवाना की गई है। मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क की आशंका पुलिस कॉल और मैसेज की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में मानव तस्करी और अवैध तरीके से विदेश भेजने वाले बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और परिवार को आखिर किस देश में बंधक बनाकर रखा गया है।
आपके टूथपेस्ट के नीचे बना ये रंगीन निशान क्या बताता है? सच जानकर रह जाएंगे हैरान

Last Updated:May 09, 2026, 21:38 IST क्या आपने कभी अपने टूथपेस्ट की ट्यूब के नीचे बने छोटे रंगीन बॉक्स पर ध्यान दिया है? सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि इन रंगों से पता चलता है कि टूथपेस्ट हर्बल है, केमिकल वाला है या मेडिकेटेड. यही वजह है कि कई लोग टूथपेस्ट खरीदते समय इन कलर कोड्स को देखकर ही फैसला लेने लगते हैं. लेकिन क्या सच में इन रंगों का टूथपेस्ट की क्वालिटी से कोई संबंध होता है? आइए जानते हैं इसका असली सच… ख़बरें फटाफट टूथपेस्ट की ट्यूब के नीचे जो छोटा रंगीन बॉक्स दिखाई देता है. सुबह की शुरुआत ज्यादातर लोगों की टूथपेस्ट और ब्रश से होती है, लेकिन क्या आपने कभी टूथपेस्ट की ट्यूब के नीचे बने छोटे रंगीन बॉक्स पर ध्यान दिया है? सोशल मीडिया पर लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि हरा रंग मतलब पूरी तरह हर्बल टूथपेस्ट, काला मतलब ज्यादा केमिकल वाला, लाल मतलब नेचुरल और केमिकल का मिश्रण और नीला मतलब मेडिकेटेड टूथपेस्ट होता है. यही वजह है कि कई लोग टूथपेस्ट खरीदते समय इन रंगों को देखकर फैसला लेने लगे हैं. हालांकि सच्चाई इससे काफी अलग है. इन रंगों का असली काम कुछ और ही होता है. TOI की रिपोर्ट के अनुसार, टूथपेस्ट की ट्यूब के नीचे जो छोटा रंगीन बॉक्स दिखाई देता है, उसे तकनीकी भाषा में “आई मार्क” कहा जाता है. इसका इस्तेमाल फैक्ट्री में मशीनों के लिए किया जाता है. जब टूथपेस्ट की ट्यूब तैयार होती है, तब मशीन इसी निशान को पहचानकर ट्यूब को सही जगह से काटती और सील करती है. यानी इसका टूथपेस्ट के अंदर मौजूद सामग्री या उसकी गुणवत्ता से कोई सीधा संबंध नहीं होता. कई बार अलग-अलग कंपनियां अपनी पैकेजिंग डिजाइन के हिसाब से अलग रंग इस्तेमाल करती हैं. इसलिए सिर्फ रंग देखकर यह तय करना कि टूथपेस्ट पूरी तरह हर्बल है या नहीं, सही तरीका नहीं माना जाता. फिर टूथपेस्ट खरीदते समय किन बातों पर ध्यान दें?अगर आप सही टूथपेस्ट चुनना चाहते हैं तो सबसे पहले उसके इंग्रीडिएंट्स पढ़ने चाहिए. एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट दांतों को कैविटी से बचाने में मदद कर सकता है. हालांकि छोटे बच्चों के लिए फ्लोराइड की मात्रा सीमित होना जरूरी माना जाता है. इसके अलावा कई व्हाइटनिंग टूथपेस्ट में ज्यादा एब्रैसिव तत्व होते हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. जिन लोगों के दांत संवेदनशील होते हैं, उन्हें सेंसिटिविटी वाले टूथपेस्ट चुनने की सलाह दी जाती है. हर्बल टूथपेस्ट क्या सच में बेहतर होते हैं?आजकल मार्केट में नीम, लौंग, तुलसी और बबूल जैसे तत्वों वाले हर्बल टूथपेस्ट काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. ये मसूड़ों और मुंह की सफाई के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन हर हर्बल टूथपेस्ट हर व्यक्ति के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं. कुछ लोगों को ज्यादा तेज फ्लेवर या कुछ तत्वों से एलर्जी भी हो सकती है. इसलिए सिर्फ “हर्बल” लिखा देखकर कोई भी प्रोडक्ट चुन लेना सही नहीं माना जाता. दांतों की जरूरत और समस्या के हिसाब से टूथपेस्ट चुनना ज्यादा जरूरी होता है. सिर्फ टूथपेस्ट नहीं, ब्रश करने का तरीका भी जरूरीडेंटिस्ट्स का मानना है कि सिर्फ महंगा या सही टूथपेस्ट इस्तेमाल करना ही काफी नहीं होता. अगर ब्रश सही तरीके से नहीं किया जाए तो दांतों में प्लाक और कैविटी की समस्या हो सकती है. दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना, जीभ साफ करना और समय-समय पर डेंटल चेकअप करवाना भी जरूरी माना जाता है. सोशल मीडिया के हर दावे पर भरोसा न करेंइंटरनेट पर वायरल होने वाली हर जानकारी सच हो, यह जरूरी नहीं. टूथपेस्ट के कलर कोड वाला दावा भी उन्हीं मिथकों में से एक है, जिसे लोग बिना जांचे-परखे सही मान लेते हैं. इसलिए किसी भी हेल्थ या पर्सनल केयर प्रोडक्ट को खरीदने से पहले सही जानकारी लेना बेहद जरूरी है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
‘अनियंत्रित व्यवहार’: केरल के मुख्यमंत्री के सस्पेंस के कारण कांग्रेस कार्यकर्ताओं में विरोध, पोस्टर युद्ध | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 21:27 IST सस्पेंस के बीच, केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीसन और रमेश चेन्निथला के समर्थक अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के समर्थन में फ्लेक्स बोर्ड लगा रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता वीडी सतीसन के समर्थकों ने उन्हें सीएम उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने के लिए विरोध मार्च निकाला। (पीटीआई) केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के सत्ता में आने के पांच दिन बाद भी, सबसे पुरानी पार्टी ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के चेहरे का चयन नहीं किया है, जिसने वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के प्रति वफादार कांग्रेस कैडरों के भीतर अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है – ये सभी शीर्ष पद के दावेदार हैं। विभिन्न नेताओं का समर्थन करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केरल में व्यापक रैलियां कीं, बड़े-बड़े बोर्ड लगाए और अपने पसंदीदा नेता की नियुक्ति की मांग करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट की बाढ़ ला दी। एक रिपोर्ट के अनुसार, सतीसन को ले जा रहे समर्थकों ने कोझिकोड में प्रदर्शन किया और उन्हें “किंगमेकर” और “बाहुबली” के रूप में चित्रित किया। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस। तिरुवनंतपुरम में केसी वेणुगोपाल के पोस्टर फाड़े जाने और उनकी जगह सतीसन के बैनर लगाए जाने के बाद समर्थन प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया है। कांग्रेस ने ऐसे प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इडुक्की में सतीसन का समर्थन करने वाले चार पदाधिकारियों को हटा दिया है. यह लड़ाई किसी सार्वजनिक पोस्टर तक सीमित नहीं है. सतीसन के कई समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व से वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं करने का आग्रह किया है। अन्य पोस्टों में तर्क दिया गया कि वेणुगोपाल को सतीसन से बेहतर समर्थन प्राप्त था, और कुछ ने चेन्निथला को “जनता का मुख्यमंत्री” कहा। अनियंत्रित व्यवहार के खिलाफ कांग्रेस की अपील जबकि कई वरिष्ठ नेता कथित तौर पर वेणुगोपाल का समर्थन कर रहे हैं, उन्होंने तर्क दिया है कि मुख्यमंत्री का चयन जनता के दबाव के बजाय पार्टी की आम सहमति के आधार पर किया जाना चाहिए। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में केरल में सरकार गठन पर चर्चा के लिए तीन घंटे की बैठक की। सतीसन, वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला ने भी कार्यकर्ताओं से कोई फ्लेक्स युद्ध या विरोध प्रदर्शन नहीं करने की अपील की है। यह भी पढ़ें: सतीसन, चेन्निथला, वेणुगोपाल: कांग्रेस के अंदर केरल के मुख्यमंत्री पर चर्चा चेन्निथला ने कहा, “सभी ने अपने विचार व्यक्त किए और राहुलजी ने उन्हें धैर्यपूर्वक सुना। मुख्यमंत्री पर अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिया जाएगा, और जो भी निर्णय होगा वह सभी को स्वीकार होगा।” केरल कांग्रेस की प्रभारी दीपा दासमुंशी ने कहा कि “अनियंत्रित व्यवहार” पार्टी की संस्कृति का हिस्सा नहीं है और समर्थकों से इस तरह के आचरण से बचने का आग्रह किया। जनता की अपील के बाद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई इलाकों से पोस्टर हटा दिए हैं. वेणुगोपाल ने कहा कि हालांकि इसमें कुछ भी गलत नहीं है कि लोगों का एक वर्ग एक निश्चित नेता को पसंद करता है, लेकिन दूसरों की छवि खराब करने वाले अभियान बंद किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं। उन्हें ख़त्म किया जाना चाहिए।” सीएम चेहरे पर सस्पेंस! कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतीं, जिससे राज्य में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के 10 साल के शासन का अंत हो गया। अकेले कांग्रेस ने 63 सीटें हासिल कीं. यूडीएफ अभियान का नेतृत्व करने के बाद विपक्ष के नेता वीडी सतीसन को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी दौड़ में हैं, जबकि वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला प्रमुख दावेदार बने हुए हैं। कांग्रेस विधायक दल ने विधायकों और गठबंधन सहयोगियों से परामर्श के बाद सीएम पद पर अंतिम फैसला लेने के लिए पार्टी आलाकमान को अधिकृत किया। एआईसीसी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन ने तिरुवनंतपुरम में निर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कीं। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘अनियंत्रित व्यवहार’: केरल के मुख्यमंत्री के सस्पेंस के कारण कांग्रेस कार्यकर्ताओं में विरोध, पोस्टर युद्ध छिड़ गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री का चयन(टी)कांग्रेस नेतृत्व की खींचतान(टी)यूडीएफ सरकार केरल(टी)वीडी सतीसन दावेदार(टी)केसी वेणुगोपाल सीएम पद की दौड़(टी)रमेश चेन्निथला समर्थन(टी)कांग्रेस की आंतरिक प्रतिद्वंद्विता(टी)केरल विधानसभा चुनाव
फ्रिज में पानी के रिसाव की समस्या: फ्रिज के नीचे से बह रहा है पानी? ना बुलाए मैकेनिक, इन देसी जुगाड़ से करें ठीक; बचेंगे पैसे

यूपीजे पाइप का जाम होना। फ़िरोज़ का दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं हुआ। डिफ्रॉस्ट ट्रे में कचरा जमा होना। फ़िरोज़ का अधिकांश कूल सेट होना। रबर गैसकेट ख़राब होना। इन वजहों से ही फ़रिश्ता से मिलता है पानी का रिश्ता। छवि: फ्रीपिक सरकारी पाइप को साफ करें: कई बार फर्म के अंदर मौजूद सर्फेस होल में बर्फ या मिट्टी फंस जाती है। इससे बाहर का पानी लगता है। सबसे पहले फ़र्ज़ी बंद करें। पीछे की तरफ मौजूद यूट्यूबेज पाइप देखें। छवि: एआई पूर्ण स्टिक या कॉटन बड से मुलायम हाथ साफ करें। गुनगुना पानी मैकेनिकल चेक करें कि पाइप खुला है या नहीं। इस आसान तरीके से दूर हो सकती है लाइकेज की समस्या। छवि: फ्रीपिक फ़र्ज़ी का दरवाज़ा ठीक से बंद करें: अगर फ़र्ज़ी का दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं होता है, तो अंदर की ओर देखें। यही सिद्धांत बाद में पानी जैसा दिखता है। छवि: फ्रीपिक दरवाज़े की रबर को साफ-सुथरे कपड़े से पोछें। देखिए कि रबर असेंबल या फटी हुई तो नहीं है। जरूरत पड़े तो रबड़ बदलवा लें। छवि: फ्रीपिक तापमान अधिकतम कम न रखें: कई लोग फ़र्ज़ी को बहुत ज़्यादा कूल कर देते हैं। इससे अंदर बर्फ जमती है और बाहर बर्फ पिघलने लगती है। छवि: एआई फ़िरोज़ का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस रहा। रेफ़्रिजरेटर को सबसे ज़्यादा लो टेम्परेचर पर न की आवश्यकता है। फ़िरोज़ के नीचे पानी का आउटलेट हमेशा बड़ी कंपनी का संकेत नहीं होता है। छवि: फ्रीपिक फ़्रिज़ के पीछे एक ट्रे होती है जिसमें पानी जमा होता है। गंदगी भर जाए, तो पानी बाहर निकल सकता है। फ़र्ज़ी बंद करके पीछे की ओर ट्रे। गुनगुने पानी से साफ करें। कारखाने के बाद वापस ला दिया। छवि: फ्रीपिक पुरानी फिल्मों में, पाइप टूटना या बेहतर लीकेज हो, तो ऐसी स्थिति में साथियों की मदद से बेहतर जीवन मिलता है। कई बार साफ-सफाई और सही देखभाल से यह समस्या आसानी से ठीक हो जाती है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)फ्रिज लीकेज शब्दावली(टी)फ्रिज रिसाव की समस्या(टी)फ्रिज सेवा(टी)फ्रिज से पानी का रिसाव(टी)फ्रिज सर्विस टिप्स








