₹5000 Pension After 60, Know Details

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक अटल पेंशन योजना (APY) को आज यानी 9 मई को 11 साल हो गए हैं। ये स्कीम मई 2015 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 60 साल का होने पर हर महीने 1,000 से लेकर 5,000 रुपए की पेंशन मिलती है। हम आपको अटल पेंशन योजना के बारे में बता रहे हैं… 20 साल के लिए करना होता है निवेश अटल पेंशन योजना के तहत 60 साल का होने पर हर महीने 1000 से लेकर 5000 रुपए की पेंशन मिलती है। इसमें 18 साल से 40 साल तक का व्यक्ति इसमें निवेश कर सकता है। कोई शख्स इस स्कीम को लेता है तो उसे कम से कम 20 साल निवेश करना होगा। आपकी पेंशन के हिसाब से तय होगा निवेश का अमाउंट इस योजना में निवेश के लिए आपके अमाउंट से कितना कटेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन चाहते हैं। 1 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन लेने के लिए सब्स्क्राइबर को 42 से लेकर 210 रुपए प्रतिमाह तक भुगतान करना होगा। यह 18 साल की उम्र में स्कीम लेने पर होगा। वहीं, यदि कोई सब्स्क्राइबर 40 साल की उम्र में स्कीम लेता है तो उसे 291 से लेकर 1,454 रुपए प्रतिमाह तक का कॉन्ट्रीब्यूशन करना होगा। सब्स्क्राइबर जितना ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन करेगा, उसे रिटायरमेंट के बाद उतनी ही ज्यादा पेंशन मिलेगी। यहां देखें अटल पेंशन योजना में कितने पैसे जमा करने पर कितनी पेंशन मिलेगी अगर 18 साल का कोई व्यक्ति हर महीने… 42 रुपए जमा करें, तो उसे 60 साल के बाद हर महीने 1000 रुपए पेंशन मिलेगी। 84 रुपए जमा करें, तो 2000 रुपए पेंशन मिलेगी। 126 रुपए जमा करें, तो 3000 रुपए पेंशन मिलेगी। 168 रुपए जमा करें, तो 4000 रुपए पेंशन मिलेगी। 210 रुपए जमा करें, तो 5000 रुपए पेंशन मिलेगी। अगर 40 साल का कोई व्यक्ति हर महीने… 291 रुपए जमा करे, तो उसे 60 साल के बाद हर महीने 1000 रुपए पेंशन मिलेगी। 582 रुपए जमा करे, तो 2000 रुपए पेंशन मिलेगी। 873 रुपए जमा करे, तो 3000 रुपए पेंशन मिलेगी। 1164 रुपए जमा करे, तो 4000 रुपए पेंशन मिलेगी। 1454 रुपए जमा करे, तो 5000 रुपए पेंशन मिलेगी। नोट: 19 से 39 साल के लोगों के लिए भी अलग-अलग अमाउंट तय किया गया है, आप इसे ऑनलाइन या बैंक जाकर पता कर सकते हैं। अपनी सुविधा के हिसाब से दे सकते हैं किस्त इस योजना के तहत इन्वेस्टर्स मंथली, क्वाटरली या सेमी-एनुअल यानी 6 माह की अवधि में निवेश कर सकते हैं। कॉन्ट्रीब्यूशन ऑटो-डेबिट हो जाएगा, यानी आपके अकाउंट से तय राशि अपने आप कट जाएगी और आपके पेंशन खाते में जमा हो जाएगी। सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को मिलेगी पेंशन सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद उसके स्पाउस (जीवनसाथी) को समान पेंशन का भुगतान किया जाएगा और सबस्क्राइबर और स्पाउस दोनों के निधन पर 60 साल की आयु तक जमा की गई पेंशन राशि नॉमिनी को वापस कर दी जाएगी। वहीं अगर 60 साल से पहले ग्राहक की मृत्यु के मामले में उसका जीवनसाथी APY खाते में योगदान जारी रख सकता है। ग्राहक का पति या पत्नी वही पेंशन राशि प्राप्त करने का हकदार होगा जो ग्राहक को मिलनी थी। वहीं अगर वो चाहे तो ऐसा न करके APY खाते में जमा पूरा पैसा निकाल सकता है। टैक्सपेयर को नहीं मिलता योजना का लाभ अटल पेंशन योजना टैक्सपेयर्स के लिए नहीं है। यानी की अगर आप इनकम टैक्स चुकाते हैं तो इस योजना में अकाउंट नहीं खोल सकेंगे। ये नियम सरकार ने 1 अक्टूबर 2022 से लागू किया है। अटल पेंशन योजना से जुड़े सवाल-जवाब सवाल 1: क्या सेविंग्स अकाउंट के बिना भी APY अकाउंट खोल सकते हैं? जवाब: नहीं, इस स्कीम के लिए सेविंग्स बैंक अकाउंट होना जरूरी है। सवाल 2: मंथली कॉन्ट्रिब्यूशन की तारीख कैसे तय होती है? जवाब: पहली इन्वेस्टमेंट की तारीख के आधार पर यह तय होती है। सवाल 3: क्या सब्सक्राइबर्स को नॉमिनी रखना जरूरी है? जवाब: हां, नॉमिनी रखना जरूरी है। सवाल 4: अटल पेंशन योजना के कितने अकाउंट खोल सकते हैं? जवाब: अटल पेंशन योजना का एक ही अकाउंट खोलने की इजाजत है। सवाल 5: अगर अकाउंट में मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन के लिए बैलेंस नहीं है तो क्या होगा? जवाब: मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन करने के लिए आपके अकाउंट में बैलेंस नहीं होने पर जुर्माना लगेगा। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रेसलर विनेश 26 जून तक डोमेस्टिक कॉम्पिटिशन नहीं खेल पाएंगी:डोपिंग नियमों के उल्लंघन पर बैन, कहा था- मैं बृजभूषण के शोषण की पीड़ित

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट पर 26 जून तक डोमेस्टिक कॉम्पिटिशन खेलने पर बैन लगा दिया है। WFI ने शनिवार को विनेश को नोटिस भेजकर कहा कि उन्होंने WFI के नियमों, डोप नियमों और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों का उल्लंघन किया है। WFI का कहना है कि विनेश ने संन्यास से वापसी के लिए छह महीने पहले सूचना नहीं दी। विनेश के व्यवहार से देश को शर्मिंदगी हुई है और भारतीय कुश्ती की छवि खराब हुई है। अगस्त 2024 में हुए पेरिस ओलिंपिक में ओवर वेट पाए जाने पर विनेश फोगाट को डिसक्वालीफाई किया गया था। तब उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान किया था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया। दूसरा, 18 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु में हुए डोप टेस्ट में शामिल न होने पर इसी महीने 4 मई को इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने विनेश फोगाट को नोटिस जारी किया था। पिछले हफ्ते पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण पर फिर आरोप लगाए थे विनेश फोगाट ने 3 मई को WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए थे। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके विनेश ने कहा था, यूपी के गोंडा में 10 से 12 मई के बीच सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट हो रहा है। आज कुछ मजबूरियों के चलते मैं कहना चाहती हूं कि बृजभूषण शरण के खिलाफ कंप्लेंट करने वाले उन 6 विक्टिम में मैं भी शामिल हूं। मेरी गवाही भी कोर्ट में चल रही है। मेरा उसके घर (गोंडा) में जाकर कॉम्पिटीशन लड़ना मुश्किल होगा। मुझे नहीं लगता कि मैं अपना 100% दे पाऊंगी। एक लड़की के लिए ये काफी मुश्किल होगा। मैं और मेरी टीम कॉम्पिटीशन लड़ेगी, अगर किसी के साथ कुछ गलत होता है तो इसकी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी। बता दें कि करीब 3 साल पहले विनेश ने बृजभूषण पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसे लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ धरना भी दिया था। विनेश हरियाणा के जुलाना से कांग्रेस विधायक हैं। बृजभूषण भाजपा के पूर्व सांसद हैं। वर्तमान में उनका एक बेटा यूपी से सांसद और एक विधायक है। पहले पढ़िए, विनेश ने क्या बातें कहीं थी… पिछले डेढ़ साल से मैट से दूर थी विनेश ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा- आप सब को नमस्कार। जैसा की सभी को पता है कि पिछले डेढ़ साल से मैं रेस्लिंग मैट से काफी दूर थी। लेकिन अब कुछ महीनों से मैं रेसलिंग की तैयारियां कर रह रही हूं। बड़ी मेहनत और ईमानदारी से मेहनत कर रही हूं। जैसे मैंने पहले देश के लिए मेडल जीते, परमात्मा के आशीर्वाद से, आप सबके सहयोग से फिर से रेसलिंग मैट पर जाऊं और देश के लिए ढेर सारे मेडल जीतूं और देश के तिरंगे का मान बनाए रखूं। एक महीने पहले कॉम्पिटीशन अनाउंस हुआ विनेश ने आगे कहा कि मैं आप सबके साथ वीडियो के माध्यम से कुछ बातें साझा करना चाहती हूं। आज से करीब एक महीना पहले रेसलिंग फेडरेशन ने एक कॉम्पिटीशन का अनाउंसमेंट किया गया। यह टूर्नामेंट जहां पर ऑर्गनाइज करवाया जा रहा है, वो गोंडा यूपी है। जहां बृजभूषण का घर है। वहां उसका प्राइवेट कॉलेज है। वहां पर मेहनत करने वाले हर खिलाड़ी को उसका हक मिलेगा, यह बड़ा नामुमकिन और बहुत इम्पॉसिबल चीज है। सरकार ने सब बृजभूषण के सहारे छोड़ा विनेश ने कहा, कौन रेफरी, किसके मैच में जाएगा। कौन रेफरी कितने पॉइंट देगा, कौन मैच चेयरमैन कहां पर बैठेगा, किसको जितवाना है, किसको हरवाना है। ये सब बृजभूषण और उसके लोगों द्वारा कंट्रोल किया जाएगा। सरकार और हमारा खेल मंत्रालय मूक दर्शक बनकर इस चीज को देख रहा है। कोई खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा, मानो बृजभूषण को फ्री हैंड दिया हुआ है कि तुम जो मर्जी करो। चाहे तुम महिला पहलवानों के साथ कुछ करो या तुम कुश्ती जगत के साथ कुछ भी करो। हम तुम्हारे साथ में खड़े हैं। सभी मेहनती खिलाड़ियों का वजन सही से चेक किया जाएगा, उनकी मेहनत का असल रिजल्ट मैट पर निकलकर आएगा, ऐसा मुझे नहीं लगता। केस कोर्ट में पेंडिंग है विनेश ने कहा कि आज से तीन साल पहले हमने सेक्सुअल हैरेसमेंट के खिलाफ भी आवाज उठाई थी। उससे संबंधित केस कोर्ट में पेंडिंग है। 6 महिला खिलाड़ियों ने उसमें शिकायत और गवाही दी थी, उस केस में गवाहियां चल रही है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि किसी भी पीड़ित की पहचान को सार्वजनिक न किया जाए, क्योंकि उनकी गरिमा और मान सम्मान की बात होती है। आज कुछ मजबूरियां ऐसी है कि मैं आप सभी को कुछ बताना चाहती हूं। मैं अभी नहीं बोलना चाहती थी, क्योंकि कोर्ट में केस पेडिंग है। देश के सामने सब सच्चाई सामने आ जाएगी। मैं बताना चाहती हूं कि उन 6 में से एक विक्टिम मैं खुद हूं, जिन्होंने शिकायत दी थी। अब जानिए क्या है यौन उत्पीड़न का पूरा मामला… बृजभूषण पर लगाए थे यौन उत्पीड़न के आरोप 18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। विनेश फोगाट ने रोते हुए कहा था- बृजभूषण शरण सिंह और कोच नेशनल कैंप में महिला रेसलर्स का यौन उत्पीड़न करते हैं। बृजभूषण खिलाड़ियों के होटल में रुकते थे, जो नियमों के खिलाफ है। टोक्यो ओलिंपिक में हार के बाद WFI के अध्यक्ष ने मुझे खोटा सिक्का कहा था। बृजभूषण बोले थे- आरोप सही हुए तो फांसी पर लटक जाऊंगा इन आरोपों पर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण ने सफाई देते हुए कहा था- किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने धरने को स्पॉन्सर्ड बताते हुए इसके पीछे हरियाणा कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को बताया था। उन्होंने कहा था कि अब ये खिलाड़ी नेशनल लेवल पर भी खेलने योग्य नहीं रहे। —————- यह खबर भी पढ़ें… विनेश फोगाट ने ओलिंपिक 2028 के लिए संन्यास वापस लिया: कहा- आग कभी खत्म नहीं होती; पेरिस ओलिंपिक में 100g वजन बढ़ने से डिसक्वालिफाई हुई थीं विनेश
विजय से परे: सुवेंदु अधिकारी शीर्ष पर, भाजपा की बंगाल लिटमस परीक्षा शुरू | व्याख्याकार समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 15:02 IST बंगाल ने सिर्फ नई सरकार के लिए मतदान नहीं किया है; इसने एक जटिल, राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य पर शासन करने की भाजपा की क्षमता की कड़ी परीक्षा ली है पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो लंबे समय तक वाम मोर्चा और बाद में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाले राज्य में एक नाटकीय राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है। शपथ ग्रहण से भाजपा को 207 सीटों पर शानदार जीत मिली। लेकिन बंगाल में, सत्ता जीतना अक्सर आसान हिस्सा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस जनादेश को दीर्घकालिक राजनीतिक स्थिरता में बदला जा सकता है। द टेलीग्राफ के मुताबिक, बंगाल ने सिर्फ नई सरकार के लिए वोट नहीं किया है; इसने एक जटिल, राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य पर शासन करने की भाजपा की क्षमता पर एक उच्च-स्तरीय “लिटमस टेस्ट” रखा है। यह भी पढ़ें | भाजपा की बंगाल विजय को बनने में 15 साल लगे: इसके उदय के पीछे के वास्तुकारों पर एक नजर भगवा पार्टी के लिए, गहरे राजनीतिक इतिहास, मजबूत पहचान की राजनीति और बड़ी अल्पसंख्यक आबादी वाले राज्य में शासन प्रदान करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। यह बदलाव “बंगाल जीतने” से “बंगाल चलाने” की ओर है, जहां कानून और व्यवस्था, नौकरियों और औद्योगिक पुनरुद्धार से जुड़ी उम्मीदें एजेंडे पर हावी होंगी। नई सरकार से तात्कालिक अपेक्षाओं में से एक स्थिरता और कानून का शासन बहाल करना होगा, विशेष रूप से राज्य में राजनीतिक हिंसा और प्रतिशोध की राजनीति के पिछले चक्रों के संदर्भ में। चुनाव परिणाम घोषित होने और भाजपा जश्न के मूड में होने के ठीक बाद, अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की बंगाल में उनके आवास के पास अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना राज्य में राजनीतिक हिंसा की गंभीर याद दिलाती है और यह भी स्पष्ट करती है कि भाजपा की पहली चुनौती शांति बनाए रखना होगी। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में राजनीतिक हिंसा को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा था कि जनादेश से पता चलता है कि “लोकतंत्र की जीत हुई है” और सभी दलों को लोगों के फैसले का सम्मान करना चाहिए और राज्य में शांति और स्थिरता की दिशा में काम करना चाहिए। कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि यह क्षण “बदलाव (परिवर्तन), न कि बदला (बदला)” और “भविष्य (भविष्य), न कि भय (डर)” का आह्वान करता है। यह भी पढ़ें | भाजपा की पहली पश्चिम बंगाल जीत आंकड़ों से कहीं बड़ा पुरस्कार है: 2 कारण बताए गए मतदाता अक्सर पुलिस व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा नियंत्रण और शासन में तत्काल सुधार की उम्मीद करते हैं। बंगाल की प्रशासन जैसी जटिल व्यवस्था में त्वरित, दृश्य परिवर्तन लाना एक बड़ी परीक्षा होगी। द टेलीग्राफ के मुताबिक, बीजेपी की सफलता सिर्फ सत्ता बनाए रखने से नहीं आंकी जाएगी, बल्कि इससे भी आंकी जाएगी कि क्या वह उस राज्य में समावेशी विकास कर सकती है, जहां अल्पसंख्यक आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके लिए “लिटमस टेस्ट” यह होगा कि क्या पार्टी वैचारिक स्थिति से आगे बढ़ सकती है और शासन का प्रदर्शन कर सकती है जिसे निष्पक्ष, व्यापक-आधारित और आर्थिक रूप से परिवर्तनकारी माना जाता है। राज्य में अर्थव्यवस्था भी एक समस्या बनी हुई है। बंगाल के मतदाताओं ने पिछली सरकारों के तहत उद्योग और रोजगार में स्थिरता पर बार-बार निराशा व्यक्त की है। भाजपा को अब आर्थिक पुनरुद्धार की वह उम्मीद विरासत में मिली है, खासकर नौकरियों, प्रवासन और औद्योगीकरण पर। यह भी पढ़ें | पश्चिम बंगाल: कैसे बीजेपी के वोट शेयर में बढ़ोतरी ने 15 साल की नाटकीय बढ़त को बढ़ावा दिया सीधे शब्दों में कहें तो यह क्षण भाजपा के लिए अवसर और जोखिम दोनों है। पिछली सरकारों के खिलाफ वर्षों की सत्ता विरोधी लहर के बाद परिवर्तन के लिए बंगाल के जनादेश में अवसर निहित है। जोखिम बंगाल के इतिहास में उच्च राजनीतिक अपेक्षाओं और तीव्र मतदाता प्रतिक्रिया में निहित है जब सरकारें काम पूरा करने में विफल रहती हैं। एक व्यापक जीत आम तौर पर उच्च उम्मीदें पैदा करती है। दृश्य परिवर्तन में कोई भी देरी तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रिया में बदल सकती है। बंगाल भाजपा के लिए सिर्फ एक और चुनावी जीत नहीं है; यह एक सिद्ध भूमि है. पार्टी के पास अब यह प्रदर्शित करने का मौका है कि क्या वह भारत के सबसे राजनीतिक रूप से जटिल राज्यों में से एक में भारी जीत को एक स्थिर शासन मॉडल में बदल सकती है। संदेश स्पष्ट है: बंगाल में, जीत की शक्ति केवल शुरुआत है। असली परीक्षा यह है कि क्या भाजपा सभी के लिए शासन कर सकती है, और समय के साथ उस जनादेश को कायम रख सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना समाचार समझाने वाले जीत से परे: सुवेंदु अधिकारी शीर्ष पर, भाजपा की बंगाल लिटमस परीक्षा शुरू अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
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कांग्रेस MP राहुल गांधी ने शनिवार को BJP सरकार पर बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने बिहार में प्रदर्शन कर रहे टीचर उम्मीदवारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। कांग्रेस नेता ने X पर एक पोस्ट में लिखा- कल पटना में टीचर उम्मीदवार जो अपने रोजगार के अधिकार के लिए शांति से विरोध कर रहे थे, उन्हें बिहार पुलिस ने फिर से बेरहमी से पीटा। बेरोजगार युवाओं को BJP का जवाब: लाठियां। बेरोजगारी आज भारत में सबसे बड़ी बीमारी है और इसका सबसे बुरा असर बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने लिखा- लाखों युवा, डिग्री और हुनर लेकर दर-दर भटक रहे हैं। लेकिन BJP सरकार को न तो उनकी परवाह है और न ही आपकी। जब युवा अपना हक मांगने के लिए सड़कों पर उतरते हैं तो उन्हें नौकरी नहीं दी जाती बल्कि उनकी पीठ पर लाठियां बरसाई जाती हैं। भारत के युवा BJP के झूठ से तंग आ चुके हैं। वे अब चुप नहीं रहेंगे। कांग्रेस हर मोड़ पर उनके साथ खड़ी है।
डायबिटीज और खांसी में रामबाण है बोगनवेलिया की चाय, जानिए इसे पीने के अद्भुत फायदे और औषधीय गुण

Bougainvillea Tea Benefits : अक्सर हमारे घरों की दीवारों और बालकनी की शोभा बढ़ाने वाला गुलाबी बोगनवेलिया सिर्फ एक सजावटी पौधा नहीं है, बल्कि आयुर्वेद और मेक्सिकन पारंपरिक चिकित्सा (Té de bugambilia) में एक शक्तिशाली औषधि भी है. क्या आप जानते हैं कि इसके रंगीन फूलों और पत्तियों से बनी चाय खांसी, जुकाम और यहाँ तक कि डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याओं में रामबाण साबित हो सकती है? मेक्सिको में यह एक लोकप्रिय स्वास्थ्य पेय है, जो न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी बेजोड़ है. आइए, इस ब्लॉग में विस्तार से जानते हैं कि कैसे बोगनवेलिया की चाय आपकी सेहत को बदल सकती है. मेक्सिको में यह एक लोकप्रिय स्वास्थ्य पेय है, जो न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी बेजोड़ है. बोगनवेलिया चाय के औषधीय गुण और फायदे-बोगनवेलिया, जिसे हम ‘कागज के फूल’ के नाम से भी जानते हैं, औषधीय गुणों का भंडार है. वैज्ञानिक शोधों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार, इस पौधे के विभिन्न हिस्सों (फूल, पत्तियां और तना) का उपयोग शरीर के अलग-अलग विकारों को दूर करने के लिए किया जाता है. 1. खांसी और जुकाम में राहतबोगनवेलिया की चाय का सबसे प्रमुख लाभ श्वसन तंत्र पर होता है. इसमें ‘एक्सपेक्टोरेंट’ गुण होते हैं, जो फेफड़ों में जमे बलगम को ढीला कर बाहर निकालने में मदद करते हैं. पुरानी खांसी, फ्लू और गले की खराश (Sore Throat) में इसकी गरम चाय पीने से तुरंत आराम मिलता है. मेक्सिकन लोक चिकित्सा में इसे ‘ब्रोंकाइटिस’ के इलाज के लिए एक प्रभावी घरेलू नुस्खा माना जाता है. 2. डायबिटीज (Type 2) में फायदेमंदडायबिटीज के मरीजों के लिए बोगनवेलिया की पत्तियां किसी वरदान से कम नहीं हैं. विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, इसकी पत्तियों में ‘पिनिटोल’ (Pinitol) नामक तत्व पाया जाता है, जिसमें इंसुलिन जैसा प्रभाव होता है.यह रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. नियमित रूप से (डॉक्टर की सलाह पर) इसकी पत्तियों का अर्क या चाय लेने से टाइप 2 डायबिटीज के प्रबंधन में काफी मदद मिलती है. 3. पाचन और पेट की समस्याएंबोगनवेलिया की पत्तियां पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में कारगर हैं. यदि आप दस्त (Diarrhea) या पेट में एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसकी चाय एक प्राकृतिक उपचार हो सकती है. यह पेट की अम्लता को कम कर पाचन क्रिया को शांत करती है. 4. लो बीपी में लाभकारीजहाँ इसकी पत्तियां शुगर के लिए हैं, वहीं इसके फूलों का अर्क ‘लो ब्लड प्रेशर’ (Low Blood Pressure) के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा इसका तना (Stems) हेपेटाइटिस जैसी लिवर संबंधी समस्याओं के उपचार में सहायता करता है. जबकि ल्यूकोरिया (Leucorrhoea) महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या में फायदेमंद होता है. कैसे तैयार करें यह चाय? आवश्यक सामग्री:बोगनवेलिया के फूल: 10-12 (ताजे या सूखे हुए, गहरे गुलाबी या बैंगनी रंग के फूल सबसे अच्छे होते हैं).पानी: 2 कप.नींबू का रस: आधा चम्मच (स्वाद और विटामिन C के लिए).शहद या गुड़: स्वादानुसार (डायबिटीज के मरीज इसका उपयोग न करें).दालचीनी का टुकड़ा: 1 छोटा (वैकल्पिक, बेहतर पाचन के लिए). बनाने की विधि: फूलों की सफाई करें: सबसे पहले बोगनवेलिया के ताजे फूलों को चुनें. ध्यान रखें कि आप केवल रंगीन पंखुड़ियों का उपयोग करें. फूलों के बीच में मौजूद छोटे सफेद हिस्से (पुंकेसर) को निकाल दें और पंखुड़ियों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि धूल या मिट्टी निकल जाए.पानी उबालें: एक पैन में 2 कप पानी डालें और इसे मध्यम आंच पर गरम होने दें. अगर आप दालचीनी डालना चाहते हैं, तो इसी समय डाल दें.फूल डालें: जब पानी उबलने लगे, तो इसमें साफ की हुई बोगनवेलिया की पंखुड़ियां डाल दें.धीमी आंच पर पकाएं: आंच धीमी कर दें और इसे 3 से 5 मिनट तक उबलने दें. आप देखेंगे कि धीरे-धीरे फूलों का रंग फीका पड़ने लगेगा और पानी एक सुंदर गुलाबी या गहरे रंग में बदल जाएगा.छान लें: जब पानी आधा रह जाए या रंग गहरा हो जाए, तो गैस बंद कर दें. चाय को एक कप में छान लें.सर्व करें: अब इसमें नींबू का रस मिलाएं. नींबू डालते ही चाय का रंग और भी चमकीला और आकर्षक हो जाता है. अगर आप शुगर के मरीज नहीं हैं, तो इसमें थोड़ा शहद मिला सकते हैं.सेवन का तरीका: खांसी और गले की खराश के लिए इसे गुनगुना (Warm) ही पिएं. बेहतर परिणामों के लिए दिन में 1-2 बार इसका सेवन किया जा सकता है. यह चाय न केवल आपकी इम्युनिटी बढ़ाएगी, बल्कि आपको हाइड्रेटेड रखने में भी मदद करेगी. View this post on Instagram
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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 38 मिनट पहले कॉपी लिंक कांग्रेस MP राहुल गांधी ने शनिवार को BJP सरकार पर बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने बिहार में प्रदर्शन कर रहे टीचर उम्मीदवारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। कांग्रेस नेता ने X पर एक पोस्ट में लिखा- कल पटना में टीचर उम्मीदवार जो अपने रोजगार के अधिकार के लिए शांति से विरोध कर रहे थे, उन्हें बिहार पुलिस ने फिर से बेरहमी से पीटा। बेरोजगार युवाओं को BJP का जवाब: लाठियां। बेरोजगारी आज भारत में सबसे बड़ी बीमारी है और इसका सबसे बुरा असर बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने लिखा- लाखों युवा, डिग्री और हुनर लेकर दर-दर भटक रहे हैं। लेकिन BJP सरकार को न तो उनकी परवाह है और न ही आपकी। जब युवा अपना हक मांगने के लिए सड़कों पर उतरते हैं तो उन्हें नौकरी नहीं दी जाती बल्कि उनकी पीठ पर लाठियां बरसाई जाती हैं। भारत के युवा BJP के झूठ से तंग आ चुके हैं। वे अब चुप नहीं रहेंगे। कांग्रेस हर मोड़ पर उनके साथ खड़ी है। आज की अन्य खबरें… पुणे में NCP(SP) नेता पर स्याही फेंकी गई, पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी पुणे में एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता विकास लवांडे पर हुए हमले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जानकारी के अनुसार, जब वे एक धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे थे, तब उन पर स्याही फेंकी गई और पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। हमलावरों का आरोप है कि लवांडे ने वारकरी संप्रदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस घटना के विरोध में लवांडे ने पुलिस स्टेशन पर धरना दिया, वहीं विधायक रोहित पवार ने इस हमले की निंदा करते हुए उनके लिए सुरक्षा की मांग की है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
दिलजीत बोले- राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं:पोस्ट शेयर कर अफवाहों का खंडन किया, कहा- म्यूजिक और फिल्मों पर ही पूरा फोकस रहेगा

पंजाबी सिंगर और एक्टरदिलजीत दोसांझ ने राजनीति में आने की खबरों पर सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि दिलजीत पंजाब की राजनीति में एंट्री कर सकते हैं। अब उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। दिलजीत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कदे वी नहीं।” यानी उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि वे सिर्फ एक कलाकार हैं और उनका फोकस म्यूजिक, फिल्मों और एंटरटेनमेंट पर ही है। दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर दिलजीत को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इसकी वजह यह थी कि वे लगातार इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पंजाब और पंजाबी संस्कृति को प्रमोट करते नजर आ रहे हैं। कई यूजर्स उन्हें पंजाब की नई आवाज और संभावित राजनीतिक चेहरा बताने लगे थे। दिलजीत दोसांझ को दूसरा थलापति विजय कहने लगे। हालांकि दिलजीत ने अपने पोस्ट के जरिए साफ कर दिया कि वे राजनीति से दूर ही रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका पूरा ध्यान अपने काम और फैंस को एंटरटेन करने पर है। दिलजीत इससे पहले भी कई मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखते रहे हैं। हाल के महीनों में वे पंजाब, पंजाबी भाषा और संस्कृति को लेकर खुलकर बात करते नजर आए थे। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर उनके राजनीति में आने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। वर्कफ्रंट की बात करें तो दिलजीत इन दिनों अपने म्यूजिक टूर और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। वे लगातार इंटरनेशनल कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं और पंजाबी म्यूजिक को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिलाने में जुटे हैं।
दिलजीत बोले- राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं:पोस्ट शेयर कर अफवाहों का खंडन किया, कहा- म्यूजिक और फिल्मों पर ही पूरा फोकस रहेगा

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने राजनीति में आने की खबरों पर सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि दिलजीत पंजाब की राजनीति में एंट्री कर सकते हैं। अब उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। दिलजीत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कदे वी नहीं।” यानी उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि वे सिर्फ एक कलाकार हैं और उनका फोकस म्यूजिक, फिल्मों और एंटरटेनमेंट पर ही है। दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर दिलजीत को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इसकी वजह यह थी कि वे लगातार इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पंजाब और पंजाबी संस्कृति को प्रमोट करते नजर आ रहे हैं। कई यूजर्स उन्हें पंजाब की नई आवाज और संभावित राजनीतिक चेहरा बताने लगे थे। दिलजीत दोसांझ को दूसरा थलापति विजय कहने लगे। हालांकि दिलजीत ने अपने पोस्ट के जरिए साफ कर दिया कि वे राजनीति से दूर ही रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका पूरा ध्यान अपने काम और फैंस को एंटरटेन करने पर है। दिलजीत इससे पहले भी कई मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखते रहे हैं। हाल के महीनों में वे पंजाब, पंजाबी भाषा और संस्कृति को लेकर खुलकर बात करते नजर आए थे। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर उनके राजनीति में आने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। वर्कफ्रंट की बात करें तो दिलजीत इन दिनों अपने म्यूजिक टूर और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। वे लगातार इंटरनेशनल कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं और पंजाबी म्यूजिक को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिलाने में जुटे हैं।
कॉउचर से कैबिनेट तक: मिलिए डिजाइनर से भाजपा नेता बनीं अग्निमित्रा पॉल से, जो अब टीम सुवेंदु का हिस्सा हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 14:19 IST पॉल को राजनीतिक सफलता 2021 के विधानसभा चुनावों में मिली जब उन्होंने आसनसोल दक्षिण सीट जीती और खुद को बंगाल के औद्योगिक क्षेत्र में एक उभरते भगवा चेहरे के रूप में स्थापित किया। अग्निमित्र पॉल ने पश्चिम बंगाल कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक, अग्निमित्रा पॉल को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल में भाजपा की पहली सरकार में राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। उनका शामिल होना पूर्व फैशन डिजाइनर के राजनीतिक उत्थान में एक और मील का पत्थर है, जो फैशन की दुनिया से फ्रंटलाइन राजनीति में स्थानांतरित हो गया। पश्चिम बंगाल में पार्टी के आक्रामक विस्तार के दौरान 2019 में भाजपा में शामिल होने से पहले पॉल ने पहली बार एक प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर के रूप में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, वह जल्द ही राज्य में भाजपा की सबसे मुखर महिला नेताओं में से एक बनकर उभरीं, जो अक्सर राजनीतिक बहस और सड़क अभियानों में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का मुकाबला करती थीं। उन्हें राजनीतिक सफलता 2021 के विधानसभा चुनावों में मिली जब उन्होंने आसनसोल दक्षिण सीट जीती और खुद को बंगाल के औद्योगिक क्षेत्र में एक उभरते भगवा चेहरे के रूप में स्थापित किया। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, तब से, उन्होंने भाजपा की राज्य इकाई में विशेष रूप से महिलाओं और शहरी मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच पहुंच में एक प्रमुख संगठनात्मक भूमिका निभाई है। एनडीटीवी के अनुसार, भाजपा के अभियान के दौरान राजनीतिक हलकों में पॉल की चर्चा संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी की गई थी, जो पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती दृश्यता को दर्शाता है। उनका उदय बंगाल में एक युवा और अधिक मुखर नेतृत्व को पेश करने के भाजपा के प्रयास से निकटता से जुड़ा हुआ है। वहीं, उनका राजनीतिक करियर भी विवादों से अछूता नहीं रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि कई आपराधिक मामले, जो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलन अभियानों के दौरान झड़पों से जुड़े हैं, पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ दर्ज किए गए हैं, जो कि बंगाल के जुझारू राजनीतिक परिदृश्य में असामान्य नहीं है। अब भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले पॉल से उम्मीद की जाती है कि वह बंगाल में पार्टी के शासन की कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, खासकर महिला केंद्रित आउटरीच और शहरी राजनीतिक संदेश पर। उनका शामिल होना पार्टी के पारंपरिक कैडर आधार से परे अपील करने में सक्षम नए सार्वजनिक चेहरों के साथ वैचारिक लामबंदी को संतुलित करने के भाजपा के प्रयास का भी संकेत देता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कॉउचर से कैबिनेट तक: मिलिए डिजाइनर से भाजपा नेता बनीं अग्निमित्रा पॉल से, जो अब टीम सुवेंदु का हिस्सा हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अग्निमित्र पॉल(टी)बीजेपी पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी सरकार(टी)पश्चिम बंगाल कैबिनेट मंत्री(टी)आसनसोल दक्षिण विधायक(टी)बीजेपी महिला नेता(टी)बंगाल राजनीति(टी)तृणमूल कांग्रेस प्रतिद्वंद्विता
अमेरिका ने वेनेजुएला का हाईली एनरिच्ड यूरेनियम निकाला:13.5 किलो न्यूक्लियर मटेरियल वॉशिंगटन लाया गया, अब इसे अमेरिका खुद प्रोसेस करेगा

अमेरिका ने वेनेजुएला से 13.5 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम हटाया है। यह यूरेनियम कई साल से वहां के एक पुराने रिसर्च रिएक्टर में रखा था। अमेरिका ने शुक्रवार को बताया कि यूरेनियम को कराकास के पास मौजूद साइट से हटाया गया और फिर सुरक्षित तरीके से अमेरिका भेजा गया। यह ऑपरेशन अमेरिका, वेनेजुएला, ब्रिटेन और IAEA ने मिलकर किया। US डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक यूरेनियम को जमीन और समुद्र के रास्ते अमेरिका पहुंचाया गया। इसे अब साउथ कैरोलाइना के सवाना रिवर परमाणु साइट में प्रोसेस किया जाएगा। अमेरिकी एजेंसी नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NNSA) ने कहा कि यह ऑपरेशन दक्षिण अमेरिका और US की सुरक्षा के लिए अहम है। एजेंसी के मुताबिक वेनेजुएला का RV-1 रिसर्च रिएक्टर कई दशक तक न्यूक्लियर रिसर्च के लिए इस्तेमाल होता था। 1991 में रिसर्च बंद होने के बाद भी वहां हाईली एनरिच्ड यूरेनियम रखा रहा। अमेरिका ने 6 हफ्ते से कम समय में मिशन को अंजाम दिया अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह काम छह हफ्तों से भी कम समय में पूरा हुआ। यूरेनियम को खास कंटेनर में पैक किया गया। इसके बाद करीब 100 मील सड़क के रास्ते बंदरगाह तक ले जाया गया। वहां से ब्रिटेन की न्यूक्लियर ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशंस कंपनी के जहाज से अमेरिका भेजा गया। NNSA के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. मैट नेपोली भी इस मिशन की निगरानी के लिए वेनेजुएला पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि टीम के अनुभव की वजह से यह ऑपरेशन सफल रहा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी ऑपरेशन की पुष्टि की। एजेंसी ने कहा कि यह जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन था। NNSA के मुताबिक 1996 से अब तक एजेंसी दुनिया के कई देशों से 7,350 किलो से ज्यादा हाईली एनरिच्ड यूरेनियम और प्लूटोनियम हटाने या सुरक्षित करने का काम कर चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन लंबे समय से ईरान के पास मौजूद हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को लेकर दबाव बना रहा है। ईरान के पास ऐसा करीब 408 किलो यूरेनियम बताया जाता है। हालांकि, अमेरिका अब तक उसे हटाने में सफल नहीं हुआ है। वेनेजुएला में अमेरिका का दखल बढ़ रहा अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में भी बदलाव देखने को मिला है। हाल के महीनों में CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ समेत कई अमेरिकी अधिकारी वेनेजुएला पहुंचे। सात साल बाद दोनों देशों के बीच कमर्शियल फ्लाइट भी शुरू हुई है। अमेरिकी दूतावास भी फिर से खोला गया है। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका अब वहां ऊर्जा और खनन सेक्टर में कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कुछ लोकतंत्र समर्थक समूह ट्रम्प प्रशासन की इस नीति की आलोचना भी कर रहे हैं।









