Salman Khans New Look for Eid 2027 Film

48 मिनट पहले कॉपी लिंक सलमान खान एक बार फिर बड़े पर्दे पर दमदार वापसी की तैयारी में हैं। इस बार चर्चा सिर्फ उनकी नई फिल्म की नहीं, बल्कि उनके जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन की भी हो रही है। खबर है कि सलमान के नए लुक के पीछे वही नाम है, जिसने हाल ही में धुरंधर में अपने मेकअप और प्रोस्थेटिक्स से लोगों को चौंका दिया था। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्माता दिल राजू और निर्देशक वामशी पेडिपल्ली की अपकमिंग एक्शन एंटरटेनर के लिए मेकर्स ने मशहूर मेकअप आर्टिस्ट प्रीतिशील सिंह को टीम में शामिल किया है। प्रीतिशील सिंह वही आर्टिस्ट हैं, जिनके काम की ‘धुरंधर’ में काफी तारीफ हुई थी। अब उन्होंने सलमान खान के लिए भी ऐसा लुक तैयार किया है, जिसे पहले कभी स्क्रीन पर नहीं देखा गया। सूत्रों की मानें तो फिल्म में सलमान खान कई अलग-अलग अवतारों में नजर आएंगे। इन लुक्स को बेहद डिटेलिंग के साथ डिजाइन किया गया है, ताकि हर किरदार और एक्शन सीक्वेंस में उनका स्क्रीन प्रेजेंस अलग दिखाई दे। सलमान खुद भी अपने इस मेकओवर से काफी खुश बताए जा रहे हैं और फिल्म को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं। फिल्म में सलमान के साथ साउथ स्टार नयनतारा नजर आएंगी। दोनों पहली बार स्क्रीन शेयर करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शूटिंग के दौरान दोनों की केमिस्ट्री काफी अच्छी देखने को मिल रही है और मेकर्स को उम्मीद है कि यह फ्रेश जोड़ी दर्शकों को पसंद आएगी। फिल्म की शूटिंग फिलहाल मुंबई में चल रही है। हालांकि अभी तक फिल्म के टाइटल का ऑफिशियल ऐलान नहीं हुआ है। इस फिल्म को अस्थायी नाम SVC63 दिया गया है, लेकिन कहा जा रहा है कि अगले दो हफ्तों में इसका टाइटल लॉन्च वीडियो रिलीज किया जाएगा। मेकर्स को भरोसा है कि फिल्म का टाइटल और सलमान का नया लुक सोशल मीडिया पर बड़ा चर्चा का विषय बनेगा। दिल राजू के प्रोडक्शन में बन रही यह फिल्म ईद 2027 के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
इंडोनेशिया बना क्रिकेट का नया हब:स्कूलों में दी जा रही ट्रेनिंग, ढाई लाख लोग खेल रहे, स्टेडियम का निर्माण

बैडमिंटन के लिए मशहूर इंडोनेशिया क्रिकेट की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाने में जुटा है। वही इंडोनेशिया, जिसने ओलिंपिक में बैडमिंटन के जरिए आठ गोल्ड जीते और दुनिया को कई बड़े खिलाड़ी दिए, अब क्रिकेट में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहा है। यह मानना मुश्किल लगता है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों से ज्यादा टी20 कोई और देश खेल सकता है, लेकिन 2025 में इंडोनेशिया ने ऐसा कर दिखाया। उसकी पुरुष टीम ने एक साल में 45 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले, जो किसी टीम द्वारा एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा हैं। इंडोनेशिया ने कंबोडिया के खिलाफ नौ मैचों की सीरीज 8-0 से जीती। पिछले चार वर्षों में क्रिकेट ने वहां तेजी से जगह बनाई है। 17 हजार से ज्यादा द्वीपों और करीब 28 करोड़ आबादी वाले इस देश में अब ढाई लाख से ज्यादा लोग क्रिकेट खेल रहे हैं। इंडोनेशिया क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अभिराम एस यादव कहते हैं ‘क्रिकेट अब राष्ट्रीय खेल महोत्सव का हिस्सा है और ओलिंपिक में क्रिकेट की वापसी ने खेल को नई ताकत दी है। सरकार भी अब क्रिकेट को गंभीरता से देखने लगी है।’ इंडोनेशिया अब अपने क्रिकेट ढांचे को भी मजबूत कर रहा है। बाली में देश का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का टर्फ मैदान तैयार हो रहा है, जहां राष्ट्रीय क्रिकेट एकेडमी भी बनेगी। उम्मीद है कि 2027 से वहां आईसीसी के बड़े क्वालिफायर मैच आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों में क्रिकेट की ट्रेनिंग दी जा रही है। देश के 482 कोच और 335 अंपायरों को आईसीसी फाउंडेशन कोर्स एक्रेडिटेशन मिला है। क्रिकेट की यह कहानी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि संघर्ष और जुनून से भी भरी हुई है। देश के 38 में से 21 प्रांतों में क्रिकेट खेला जा रहा है। यहां मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध, ईसाई और कैथोलिक खिलाड़ी एक ही टीम में खेलते हैं। कई महिला खिलाड़ी हिजाब पहनकर मैदान में उतरती हैं। इस पूरी कहानी का सबसे भावुक चेहरा तेज गेंदबाज मैक्सी कोडा हैं। छोटे से द्वीप में पेड़ काटने का काम करने वाले कोडा हर सप्ताह नाव से जकार्ता पहुंचते हैं, मैच खेलते हैं और फिर काम पर लौट जाते हैं। क्रिकेट के बड़े देशों के बीच इंडोनेशिया छोटा नाम हो सकता है, लेकिन वहां जो जुनून दिखाई दे रहा है, उसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक ओवर में 5 विकेट का रिकॉर्ड इंडोनेशियाई गेंदबाज के नाम इंडोनेशिया की महिला टीम पुरुषों से ज्यादा सफल है। उसने 2023 में देश को पहली बार अंडर-19 वर्ल्ड कप तक पहुंचाया। दक्षिण-पूर्व एशियाई खेलों में भी टीम लगातार मेडल जीत रही है। महिला टीम फिलहाल दुनिया में 22वें स्थान पर है। देश ने कुछ अनोखे रिकॉर्ड भी बनाए हैं। इंडोनेशिया के गेंदबाज गेडे प्रियंदाना टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ओवर में पांच विकेट लेने वाले पहले खिलाड़ी बने। वहीं, टीनएजर गेंदबाज रोहमालिया ने महिला टी20 में बिना रन दिए 7 विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
UP CM Yogi Meets Governor; Cabinet Expansion Next Week

योगी कैबिनेट का रविवार को दूसरी बार विस्तार होगा। दोपहर 3 बजे 5-6 नए मंत्री शपथ लेंगे। सीएम योगी शनिवार शाम करीब साढ़े 6 बजे राज्यपाल से आनंदीबेन पटेल से मिलने पहुंचे हैं। योगी ने राज्यपाल को नए बनने वाले मंत्रियों की लिस्ट सौंपी है। . कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो रविवार को शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या बढ़ भी सकती है। सपा से बगावत करने वाले विधायक मनोज पांडेय और पूजा पाल का मंत्री बनना लगभग तय है। इनके अलावा नाई समाज से एमएलसी रामचंद्र प्रधान, विश्वकर्मा समाज से वाराणसी के भाजपा एमएलएसी हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया जा सकता है। जाट समाज से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को जगह मिल सकती है। ब्राह्मण समाज से पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा, भाजपा के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला भी मंत्री पद की दौड़ में हैं। इनके अलावा कृष्णा पासवान को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। अभी सीएम योगी को मिलाकर कुल 54 मंत्री हैं। इस तरह 6 मंत्री और बन सकते हैं। योगी 2.0 का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव- 2024 से ठीक पहले 5 मार्च, 2024 को हुआ था। जनभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करते सीएम योगी। उन्होंने राज्यपाल को लालचंद राम की लिखी पुस्तक ‘भारतीय ज्ञान परंपरा अवधारणा’ भेंट की। अब उन चेहरों को जानिए, जो बन सकते हैं मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी: यूपी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी यूपी के प्रमुख जाट चेहरों में शामिल हैं। मुरादाबाद के रहने वाले हैं। संघ और भाजपा संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे। 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य (MLC) बने। अभी भी एमएलसी हैं। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 2019 में कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज बने। मनोज पांडेय: रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक हैं। 2012-17 में सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 2022 में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए। विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक भी रहे। मनोज पांडेय अवध और पूर्वांचल में बड़े ब्राह्मण नेता हैं। यह 12 मई, 2024 की तस्वीर है। जब गृहमंत्री अमित शाह सपा विधायक मनोज पांडे के घर रायबरेली पहुंचे थे। पूजा पाल: 2022 में सपा के टिकट पर कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से विधायक बनीं। वह 2025 में यूपी विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहीं। उनके पति राजू पाल की 2005 में हत्या हुई थी। इसके बाद वह लंबे समय से न्याय और राजनीतिक संघर्ष में सक्रिय रही हैं। 2024 राज्यसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट दिया था। करीब एक साल पहले पूजा पाल ने लखनऊ में सीएम योगी से मुलाकात की थी। यह फोटो सीएम ऑफिस से पोस्ट की गई थी। डॉ. महेंद्र सिंह: मध्यप्रदेश भाजपा के प्रभारी हैं। 2017 से 2022 तक योगी सरकार में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और जलशक्ति मंत्री रह चुके हैं। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भी रहे हैं। असम में पहली बार उनके प्रभारी रहते ही भाजपा की सरकार बनी थी। सीएम योगी के साथ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के भी भरोसेमंद हैं। आशा मौर्य: सीतापुर की महमूदाबाद सीट से भाजपा विधायक हैं। 1990 में भाजपा से जुड़ीं। 1995 और 2000 में लखनऊ के ठाकुरगंज क्षेत्र से लगातार 2 बार पार्षद चुनी गईं। 2017 में भाजपा ने उन्हें महमूदाबाद विधानसभा से प्रत्याशी बनाया। लेकिन, सपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह वर्मा से 1906 वोटों से हार गई थीं। 2022 के चुनाव में इसी सीट से उन्होंने जीत हासिल की। श्रीकांत शर्मा: मथुरा सीट से भाजपा विधायक हैं। दिल्ली के कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन करने के दौरान एबीवीपी से जुड़े। जुलाई, 2014 में अमित शाह ने उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय मीडिया सेल का प्रभारी बनाया। 2017 में योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मथुरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद ऊर्जा मंत्री बनाया गया था। कृष्णा पासवान: फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में संघर्ष भरे जीवन की शुरुआत करने वाली कृष्णा पासवान जिले की प्रमुख दलित नेताओं में गिनी जाती हैं। वह 4 बार विधायक और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। यूपी भाजपा का विश्वसनीय महिला चेहरा मानी जाती हैं। गोविंद नारायण शुक्ला: विधान परिषद सदस्य (MLC) और वर्तमान में यूपी भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं। अमेठी से ताल्लुक रखने वाले गोविंद नारायण शुक्ला 2021 में निर्विरोध MLC चुने गए थे। वर्तमान में वह गोरखपुर क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। सुरेंद्र दिलेर: अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। भाजपा के प्रमुख दलित युवा नेताओं में शामिल हैं। वह हाथरस के पूर्व भाजपा सांसद राजवीर सिंह दिलेर के पुत्र हैं। उनके बाबा किशन लाल दिलेर 6 बार विधायक और 4 बार सांसद रहे हैं। उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर एक बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं। हंसराज विश्वकर्मा: भाजपा से विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं। पिछड़ा वर्ग की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले हंसराज विश्वकर्मा पिछले 34 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं। 1989 में बूथ स्तर से राजनीतिक सफर शुरू किया। राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। 2019 लोकसभा और 2022 विधानसभा चुनाव में वाराणसी में भाजपा की बड़ी जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। रामचंद्र प्रधान: भाजपा MLC हैं। राजनीतिक जीवन की शुरुआत बसपा से की। लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ के महामंत्री भी रहे। मायावती सरकार में उन्हें MLC और राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। साल- 2013 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। इसके बाद संगठन में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई। वह भाजपा उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं। ब्राह्मणों की नाराजगी सबसे बड़ी चिंता, बन सकते हैं 2 मंत्री शंकराचार्य विवाद, UGC के नए नियम, पुलिस भर्ती एग्जाम में ‘पंडित’ शब्द को लेकर विवादित प्रश्न जैसे मुद्दों के चलते ब्राह्मण समाज में नाराजगी का माहौल है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सरकार और संगठन की समन्वय बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए कहा था। मंत्रिमंडल
आम की चटनी रेसिपी: गरमा गरम खाने का स्वाद बढ़ाओगे आम की खट्टी-मीठी चटनी, रोटी-पराठा सबके साथ साधारण टेस्टी; विधि नोट करें

सामग्री: 2 कच्चा आम, गुड़, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच हल्दी, 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच काला नमक, 1 छोटा चम्मच काला नमक, 1/2 छोटा चम्मच नमक, 1/2 छोटा चम्मच हल्दी, 2 बड़ा चम्मच तेल, छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले कच्चे आम को धोकर झलक लें और छोटे-छोटे बच्चों में काट लें। अब एक चटनी में तेल गर्म करें। इसमें राय और सौंफ नोबेल तडकने डेम। छवि: फ्रीपिक इसके बाद केट ने आम बोला और 2-3 मिनट तक प्रभाव भून लिया। अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च, नमक और काला नमक के टुकड़े अच्छी तरह से मिलते हैं। फिर थोड़ा सा पानी और आम को नर होने तक का मौका मिला। छवि: एआई जब आम मसाला निकलता है, तब गुड़ या चीनी दाल निकलती है। गुड़ को पिघलाने तक इसे नॉमिनल नॉमिनल पर स्केल पर रखें। अंत में अंतिम रूप से जीरा पाउडर और गैस बंद कर दिया गया। तैयार है आपकी स्वादिष्ट खट्टी-मीठी आम की रेसिपी। छवि: फ्रीपिक इस विकल्प को आप पराठे, पूरी, दाल-चावल, मसाला या समोसे के साथ भी खा सकते हैं। गर्मियों में इसका स्वाद बेहद लाजवाब लगता है। छवि: एआई आम के खाने के फायदे: यह गर्मी में खाने का स्वाद बढ़ाता है और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। शरीर को ताजगी महसूस होती है। साथ ही, बच्चों के टिफ़िन के लिए भी महान पद है। छवि: फ्रीपिक अगर आपने अभी तक घर पर आम की दुकान नहीं बनाई है तो इस आसान रेसिपी को जरूर देखें। इसका खट्टी-मीठा स्वाद हर किसी को पसंद आएगा। छवि: फ्रीपिक
माखनलाल सरकार, जिनसे मोदी ने आशीर्वाद लिया, फिर गले लगाया:74 साल पहले श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़े, कश्मीर में तिरंगा आंदोलन में जेल गए

पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ समारोह में पहुंचे। कोलकाता में हुए कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी के 98 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार से मुलाकात की। मोदी ने मंच पर पहुंचते ही माखनलाल को गले लगाया, नमस्ते किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। माखनलाल की पत्नी पुतुल सरकार ने बताया कि वह बहुत खुश हैं और भावुक हैं। उन्होंने कहा- ‘हमारा पति इतना बड़ा सम्मान पाया, देखकर अच्छा लगा।’ उन्होंने कहा- वह 16 साल की उम्र से ही RSS के साथ जुड़ गए थे। सुबह-सुबह वह शाखा के लिए जाते थे। फिर बीच में कभी समय मिला तो नाश्ते-खाने के लिए आते थे, फिर निकल जाते थे। उनके इतने वर्षों के संघर्ष को जब आज मंच पर सम्मानित किया गया तो हमें बहुत खुशी मिली। मोदी और माखनलाल सरकार की 4 तस्वीरें… 1. पीएम मोदी ने माखनलाल सरकार को शॉल ओढ़ाया 2. मोदी और माखनलाल सरकार ने एक-दूसरे को गले लगाया 3. पीएम ने वरिष्ठ कार्यकर्ता से हाथ मिलाकर अभिवादन किया 4. मोदी ने माखनलाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया परिवार बोला- बाबा को राष्ट्रगान गाने के लिए भी गिरफ्तार किया पीएम मोदी द्वारा सम्मान मिलने पर माखनलाल सरकार के परिवार ने खुशी जताई। उनकी बहू मीनू सरकार ने इसे परिवार के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि माखनलाल सरकार ने दशकों तक पार्टी और विचारधारा के लिए काम किया। परिवार ने उनके कई त्याग और संघर्ष देखे हैं। परिवार ने बताया कि 98 साल की उम्र में भी माखनलाल बेहद सादा जीवन जी रहे हैं। BJP नेताओं ने भी उन्हें पार्टी के समर्पित और संघर्षशील कार्यकर्ताओं में शामिल बताया। माखनलाल सरकार के बड़े बेटे माणिक सरकार ने बताया कि उनके बाबा को एक समय राष्ट्रगान गाने के कारण भी गिरफ्तार किया गया था। उस समय RSS पर प्रतिबंध लगा हुआ था। राजनीतिक करियर : 2026 में भाजपा का पहला सीएम सुवेंदु अधिकारी शनिवार को पश्चिम बंगाल में BJP के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। सुवेंदु ने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद सुवेंदु, पीएम के पास गए और उन्हें झुककर प्रणाम किया। बीजेपी के गठन के बाद 1982 में पार्टी ने बंगाल में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। पार्टी को खाता खोलने में 34 साल लगे और 2016 में उसने 3 सीटें जीतें। तब पार्टी का वोट शेयर 10.3% था। 2021 में भाजपा ने 38.4% वोट शेयर के साथ 77 सीटें हासिल कीं। इस बार पार्टी ने 45.84% वोट शेयर के साथ 207 सीटें हासिल कीं। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्रोफाइल बदला, पूर्व सीएम की जगह 15वीं, 16वीं, 17वीं विधानसभा का सीएम लिखा पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बदलते ही पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्रोफाइल बदल दिया। उन्होंने बायो में लिखा, ‘फाउंडर चेयरपर्सन ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और 15वीं,16वीं,17वीं विधानसभा की मुख्यमंत्री। पूरी खबर पढ़ें…
मदर्स डे 2026: इस बार मदर्स डे पर मां का दिल जीतने वाले 4 डायनामिक सरप्राइजेमोडिअम का पता लगाएं

मातृ दिवस आश्चर्य विचार: मदर्स डे सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि वह निस्वार्थ प्रेम और त्याग को सम्मान देने का दिन है, जो एक मां अपने बच्चों और परिवार के लिए जीवनभर करती है। साल 2026 में मदर्स डे को और भी खास बनाने के लिए आपको किसी सब्जी तोहफ़े की ज़रूरत नहीं है, बल्कि आपके छोटे-छोटे प्रयास और समय उनके सबसे बड़े उपहार साबित हो सकते हैं। अगर आप इस बार अपनी मां के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान देखना चाहते हैं, तो आप इन बेहतरीन इंस्टालेशन से उन्हें सरप्राइज़ कर सकते हैं। घर पर प्लान करें ‘डिनर डेट’ और मूवी नाइट बार-बार माँ की रसोई की डायरी में ही उलचली रहती हैं। इस मदर्स डे पर उन्हें किचन से छुट्टी मिल गई और उनके लिए उनकी पसंद का खाना खुद बताया। घर को गुब्बारों और कैंडल्स से सजाकर एक बेहतरीन डिनर डेट का शानदार तैयार करें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ उनकी पसंदीदा फिल्म देखने का ‘मूवी नाइट’ प्लान करें, यह उनके लिए एक सार्वभौम भरा समय होगा। आप अपनी और माँ की पुरानी स्थिति का उपयोग करके एक ‘मेमोरी वॉल’ तैयार कर सकते हैं। डिम लाइट्स और वाद्य संगीत के बीच पुरानी यादों को ताज़ा करना उन्हें याद दिलाना और खुश कर देगा। इसके साथ ही, आप उन्हें अपने हाथों से एक पत्र (पर्सनलाइज्ड लेटर) लिखकर भी दे सकते हैं, जिसमें आप उन बातों का ज़िक्र करें जो आप बार-बार नहीं कहते। आप घर पर ही ‘स्पा सेशन’ के लिए मां की थकान बरकरार रख सकते हैं। उन्हें हेड मसाज या पैदल यात्री आरामदायक सेवाएं प्रदान करती हैं। अगर उन्हें घूमना पसंद है, तो किसी भी शांत और सुंदर जगह पर पेंटिंग प्लान बनाना एक शानदार विचार होगा। हैंडमेड भगवान और सरप्राइज़ पार्टी पोस्ट बाजार के भगवानों के थोक हाथों से बने तोहफे जैसे कस्टमाइज मग या फोटो फ्रेम मां के दिल के सबसे करीब होते हैं। अगर आपकी मां को लोगों से पसंद-जुलना पसंद है, तो करीबी रिश्तेदारों के साथ एक छोटी सी सरप्राइज गेट-टुगेदर पार्टी भी रखी जा सकती है। मदर्स डे सलाम का असली मकसद मां को यह बताना है कि वह हमारे जीवन में बहुत जरूरी हैं। आपके छोटे से सरप्राइज और उन्हें दिया गया थोड़ा सा वक्त इस दिन उनके लिए हमेशा के लिए यादगार बना दिया गया। (टैग्सटूट्रांसलेट)माँ
UN Warns of Further Price Hikes as Supply Chains Disrupt

Hindi News Business US Iran War Impact: UN Warns Of Further Price Hikes As Supply Chains Disrupt नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध का असर दुनियाभर की रसोई पर दिखने लगा है। यूनाइटेड नेशंस (UN) की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले तीन साल में सबसे ऊपर पहुंच गई हैं। वहीं, फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) की ओर से शुक्रवार को जारी डेटा के अनुसार, अप्रैल में फूड कमोडिटी प्राइस इंडेक्स में 1.6% की बढ़ोत्तरी हुई है। यह पिछले साल से 2.5% ज्यादा है। इस उछाल की मुख्य वजह वेजिटेबल ऑयल (खाने का तेल), मीट और अनाज की सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी मुश्किलें ईरान युद्ध अब अपने 10वें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। हॉर्मुज रूट बंद है। इस रास्ते से डीजल और फर्टिलाइजर (खाद) जैसे खेती के लिए जरूरी सामान की आवाजाही रुक गई है। खाद और ईंधन महंगा होने से किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा। वेजिटेबल ऑयल और मीट की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ीं रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर वनस्पति तेलों पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बायो-फ्यूल की मांग बढ़ी है, जिससे वेजिटेबल ऑयल इंडेक्स मार्च के मुकाबले 5.9% चढ़ गया है। यह जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं, मीट इंडेक्स में 1.2% की बढ़त हुई है, जो अब तक का ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। अनाज की कीमतों में भी 0.8% की तेजी देखी गई है। अभी कंपनियां स्टॉक बेच रहीं, आगे और बढ़ेगी महंगाई FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो ने एक इंटरव्यू में बताया कि एग्री-फूड इंडस्ट्री फिलहाल इसलिए बची हुई है, क्योंकि कंपनियां पुराना स्टॉक बेच रही हैं। उन्होंने कहा, “जैसे ही कच्चे माल और एनर्जी की बढ़ी हुई लागत कंपनियों के खातों में पहुंचेगी, उपभोक्ता (Consumer) के तौर पर हमें महंगाई का तगड़ा झटका लगेगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह तनाव 90 दिनों से ऊपर खिंचता है, तो 2026 के अंत और 2027 में ‘ग्लोबल फूड क्राइसिस’ (खाद्य संकट) की संभावना काफी बढ़ जाएगी। अनाज की पैदावार कम होने की आशंका खराब मौसम और 2026 में गेहूं की बुआई कम होने की खबरों ने भी अनाज के दाम बढ़ा दिए हैं। खाद की बढ़ती कीमतों की वजह से किसान अब ऐसी फसलें उगाने पर विचार कर रहे हैं, जिनमें फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कम होता हो। विशेषज्ञों का मानना है कि कमोडिटी मार्केट में आई इस तेजी का असर रिटेल मार्केट तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन खाने की महंगाई बढ़ना अब तय है। 20 जरूरी चीजों में से 16 के दाम 36% तक बढ़े बैंक ऑफ बड़ौदा के ‘एसेंशियल कमोडिटी इंडेक्स’ के मुताबिक, भारत में अप्रैल महीने में महंगाई सूचकांक सालाना 1.1% और मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा। यह अगस्त, 2025 के बाद सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी है। बीते महीने आम जरूरत की 20 में से 16 वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं हैं। खाने के तेल, टमाटर और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में 36% तक बढ़ोतरी ने अप्रैल में रिटेल महंगाई 4% तक पहुंचा दी है। आगामी महीनों में महंगाई और बढ़ने का जोखिम बना हुआ है क्योंकि मई में भी कीमतें बढ़ रही हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… साबुन-बिस्किट से लेकर तेल तक सब महंगा होगा: डाबर, HUL सहित FMCG कंपनियां दाम बढ़ाएंगी; पैकेजिंग और कच्चे माल की लागत बढ़ी FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी डाबर इंडिया ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। कंपनी का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल की बढ़ती कीमतों और मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है। डाबर के अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और नेस्ले जैसी कंपनियां भी महंगाई के दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में आपके घर का बजट बिगड़ सकता है और साबुन, तेल, बिस्किट जैसे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
हेल्थ टिप्स: अपच और एसिडिटी से बचना है तो भूलकर भी न फायदेमंद ये 8 चीजें

ग्रीष्मकालीन पाचन स्वास्थ्य युक्तियाँ: जैसे-जैसे ब्याज दर बढ़ रही है, उपभोक्ता में पेट से जुड़े प्रश्नों की संख्या में पूछताछ देखने को मिल रही है। अक्सर लोग इसे सिर्फ बाहरी गर्मी का असर मानते हैं, लेकिन हमारे शरीर की अंदरूनी स्लाइड और खान-पान में स्थिरता का असर नहीं होता। गर्मियों में क्यों होती है परेशानी? गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ना पर रक्त फ्लो त्वचा की तरफ सबसे अधिक होता है, इसलिए मस्तिष्क के माध्यम से शरीर को ठंडा रखा जा सकता है। इस प्रक्रिया में डाइजेस्टिव क्रैट्रिअक्स (पाचन ऑपरेशन) को मिलने वाली ब्लड स्ट्राक्रैट्स कम हो जाती है, जो उनकी स्कॉर्बिश प्लांट है। साथ ही, डायहाइड्रेशन के कारण पाचक एंजाइम भी ठीक से काम नहीं कर पाते। इन 8 चीज़ों को अपने अंदर से बाहर निकालें इन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना ही समझदारी है। अधिकांश तला-भूना: समोसे, पकौड़े और चिप्स. कैफीन: चाय और कॉफ़ी का अत्यधिक सेवन। जमे हुए पेय पदार्थ: ठंडा पेय और सोडा। अन्य भोजन: लाल मिर्च और गरम मसाला। लाल मीठा: इसे पचाने में शरीर को काफी पुराना पड़ा है। अकाण्ड खाद्य पदार्थ: दुकान बंद दुकान। बेवक़्त नमक: यह डिजाईन रिटर्न है। देर रात का भारी भोजन: यह मेटाबॉलिज़म को परेशान करता है। पेट को ठंडा करने का ये उपाय पाचन को बनाए रखने के लिए 15 घटकों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। तरल पदार्थ: नारियल का पानी, छाछ, नींबू का पानी और बेल का शरबत। फल और सामग्री: तरबूज़, खेड़ा, ककड़ी, लौकी, और पुदीना। प्रोबायोटिक्स: दही और लस्सी जो गट ब्रांड को स्थापित कर रहे हैं। खाने का सही तरीका गर्मियों में एक बार में छोटे-छोटे में भारी भोजन के बजाय छोटे-छोटे भोजन करें। अपने पेट का सिर्फ 70% हिस्सा ही भरें। अगर अपच, उल्टी या दस्त की समस्या 2-3 दिन से ज्यादा हो, तो इसे न करें, क्योंकि इससे फूड पॉइज़निंग या गंभीर संक्रमण हो सकता है। यह भी पढ़ें: बंगाल फतह के बाद कहां अपने दम पर अकेली बीजेपी की सरकार? मुख्यमंत्रियों की सूची देखें (टैग्सटूट्रांसलेट) ग्रीष्मकालीन पाचन स्वास्थ्य युक्तियाँ (टी) गर्मियों में एसिडिटी को रोकें (टी) पेट को ठंडा करने वाले खाद्य पदार्थ भारत (टी) गर्मी से थकावट के लक्षण (टी) गर्मियों में खाने से बचें
World Cup 2026 Opening Toronto BMO Field June 12

10 मिनट पहले कॉपी लिंक नोरा फतेही ने भारत, स्ट्रीट डांसर 3D और भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया जैसी फिल्मों में काम किया है। नोरा फतेही FIFA वर्ल्ड कप 2026 की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करने वाली पहली बॉलीवुड एक्ट्रेस बनेंगी। यह सेरेमनी 12 जून को कनाडा के टोरंटो में BMO फील्ड में होगी। FIFA वर्ल्ड कप के ऑफिशियल हैंडल ने नोरा फतेही के ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करने की जानकारी दी है। इससे पहले नोरा ने FIFA वर्ल्ड कप 2022 की क्लोजिंग सेरेमनी और ICC मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म किया था। अब वे पहली और एकमात्र बॉलीवुड कलाकार बनेंगी, जिन्होंने फुटबॉल और क्रिकेट के वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म किया है। नोरा फतेही ने 18 दिसंबर 2022 को फीफा वर्ल्ड कप 2022 की क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान आधिकारिक एंथम ‘लाइट द स्काई’ पर परफॉर्म किया था। नोरा फतेही ने 7 फरवरी 2026 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ICC पुरुष टी20 विश्व कप 2026 की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म किया था। तीन अलग-अलग ओपनिंग सेरेमनी आयोजित होंगी वर्ल्ड कप 2026 तीन देशों (अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा) में आयोजित हो रहा है, इसलिए फीफा ने प्रत्येक मेजबान देश के पहले मैच से पहले तीन अलग-अलग ओपनिंग सेरेमनी आयोजित करने की योजना बनाई है। कनाडा की सेरेमनी में बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी DJ संजॉय भी परफॉर्म करेंगे। संजॉय ने 2011 में बॉलीवुड फिल्म रा.वन के मशहूर गाने छम्मक छल्लो का एक आधिकारिक रीमिक्स तैयार किया था। नोरा और संजॉय के अलावा इस इवेंट में माइकल बुब्ले, एलानिस मोरिसेट, एलेसिया कारा, एलियाना, जेसी रेयेज, वेजीड्रीम और विलियम प्रिंस जैसे आर्टिस्ट शामिल होंगे। संजॉय देब को प्रोफेशनली DJ संजॉय के नाम से जाना जाता है। सिंगर कैटी पेरी भी वर्ल्ड कप में परफॉर्म करेंगी सिंगर कैटी पेरी अमेरिका में होने वाली ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करेंगी। पेरी ने इंस्टाग्राम पर यह खबर शेयर की। उन्होंने बताया कि वह 12 जून को अमेरिका के लॉस एंजिल्स में ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करेंगी। अमेरिकी सिंगर कैटी पेरी पहली बार FIFA मेन्स वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करेंगी। यह इवेंट कैलिफोर्निया के सोफी स्टेडियम में होगा, जहां अमेरिका और पैराग्वे के बीच मैच खेला जाएगा। कैटी पेरी के अलावा लिसा, टायला, अनिता और रेमा भी ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करेंगे। 11 जून को मेक्सिको सिटी में होने वाली ओपनिंग सेरेमनी में टायला, अलेजांद्रो फर्नांडेज, डैनी ओशन, लीला डाउन्स, बेलिंडा, जे बल्विन और बैंड लॉस एंजेलिस अजूल्स और माना परफॉर्म करेंगे। शकीरा ने नया गाना किया अनाउंस फीफा वर्ल्ड कप 2026 में शकीरा भी वापसी करेंगी। उन्होंने टूर्नामेंट के लिए नया गाना ‘दाई दाई’ अनाउंस किया है। इस गाने में नाइजीरियाई सिंगर बर्ना बॉय भी शामिल हैं। शकीरा का 2010 वर्ल्ड कप एंथम वाका वाका काफी फेमस हुआ था। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक होगा। टूर्नामेंट में कुल 104 मैच खेले जाएंगे। पहला मैच मेक्सिको सिटी में जबकि फाइनल न्यू जर्सी में आयोजित होगा। ……………… नोरा फतेही से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नोरा फतेही ने अश्लील गाने पर माफी मांगी: महिला आयोग से बोलीं- अब ऐसे आइटम सॉन्ग नहीं करूंगी; अश्लीलता फैलाने का इरादा नहीं था फिल्म ‘KD द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर’ में अश्लीलता फैलाने के मामले में गुरुवार को बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सामने पेश हुईं। नोरा ने आयोग को लिखित माफीनामा सौंपा और स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
लाल बंगाल से दक्षिण बंगाल तक: सुवेन्दु अधिकारी का उदय एक शासन परिवर्तन से अधिक क्यों है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 15:12 IST राज्य ने सिर्फ अपनी सरकार नहीं बदली है; इसने अपनी राजनीतिक सभ्यता की दिशा बदल दी है कोलकाता में बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी और उनके नए कैबिनेट सदस्यों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी। (न्यूज़18) 2011 में “पोरीबोर्टन” के चेहरे के रूप में अपने हजारों कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों के साथ राइटर्स बिल्डिंग तक मार्च करने वाली ममता बनर्जी से लेकर, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक खुले भगवा ट्रक में प्रवेश करने तक, जिसमें नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य भी शामिल थे – बंगाल की राजनीतिक यात्रा में एक नाटकीय परिवर्तन आया है। तस्वीरें खुद कहानी बयां करती हैं. पीएम मोदी ने मंच पर झुककर 98 वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता माखनलाल सरकार, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी के करीबी सहयोगी थे, के पैर छूए और अधिकारी को गर्मजोशी से गले लगाया; ये प्रतीकवाद, भावना और राजनीतिक संदेश से समृद्ध क्षण हैं। सड़क मार्च और वैचारिक लड़ाइयों के युग से लेकर आज के भव्य राजनीतिक तमाशे और व्यक्तित्व आधारित लामबंदी तक, पश्चिम बंगाल ने वास्तव में एक लंबा सफर तय किया है। फिर भी हर बदलाव के दौरान, एक चीज़ अपरिवर्तित रहती है। बंगाल की राजनीति अत्यंत भावनात्मक, गहन प्रतीकात्मक और जीवन से भी बड़ी बनी हुई है। पश्चिम बंगाल में सिर्फ शनिवार को सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। इसने एक सदियों पुराने राजनीतिक व्याकरण के पतन का गवाह बना, जो केवल राज्य के लिए था। यह भी पढ़ें | क्या सुवेंदु अधिकारी को वह चीज़ मिलेगी जो ज्योति बसु और ममता बनर्जी को बंगाल में मिलती थी? आजादी के बाद बंगाल की पहली भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में इस प्रतीकवाद को नजरअंदाज करना असंभव था। शपथ लेने वाले पहले पांच कैबिनेट मंत्रियों में महिला नेतृत्व, मटुआ समुदाय, ओबीसी ब्लॉक, उच्च जाति के हिंदू समाज और उत्तरी बंगाल के प्रतिनिधि शामिल थे, एक सावधानीपूर्वक तैयार किया गया सामाजिक गठबंधन जिसे भाजपा ने बंगाल में वर्षों तक इंजीनियरिंग में बिताया। यह महज आकस्मिक प्रकाशिकी या कैडर और नेताओं को खुश करने का प्रयास नहीं था। यह एक नई सामाजिक व्यवस्था के औपचारिक अनावरण जैसा लग रहा था। और इसके केंद्र में अधिकारी थे, जो कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट थे, बाद में उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी और अब बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री हैं। एक ही राजनीतिक जीवनकाल में, सिर्फ एक दशक में, अधिकारी ने बंगाल की राजनीति में सत्ता के लगभग हर स्तर पर यात्रा की है – सांसद, विधायक, ममता कैबिनेट में मंत्री, ममता के खिलाफ विपक्ष के नेता (एलओपी), और अब नबन्ना के भगवा अधिग्रहण का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति। समकालीन भारत में कुछ ही राजनेताओं ने वैचारिक प्रवासन को उनके जैसे नाटकीय ढंग से मूर्त रूप दिया है। उनका उदय उस राजनीति को भी मान्य करता है जिसे कई बार बंगाल में चुनावी रूप से असंभव कहकर खारिज कर दिया गया था – जाति की रेखाओं से परे आक्रामक हिंदू एकीकरण। मतपेटियों से परे दशकों तक, बंगाल की राजनीतिक पहचान वामपंथी बौद्धिकता, कल्याणकारी लोकलुभावनवाद, भाषाई क्षेत्रवाद और उदारवादी लोकाचार के साथ-साथ स्पष्ट राष्ट्रवाद के साथ सावधानीपूर्वक तैयार की गई असुविधा के आसपास बनी थी। यहां की राजनीति समुदाय से पहले वर्ग, आकांक्षा से पहले सब्सिडी और सभ्यतागत पहचान से पहले क्षेत्रीय गौरव के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पारिस्थितिकी तंत्र अब खुल गया है। नई बंगाल भाजपा केवल तृणमूल कांग्रेस की जगह नहीं ले रही है, एक ऐसी पार्टी जो भूमि आंदोलन से पैदा हुई थी, वैचारिक प्रतिबद्धता से रहित और एक नेता, एक व्यक्तित्व पंथ-दीदी द्वारा संचालित थी। भाजपा अब उस वामपंथी-समाजवादी वैचारिक पारिस्थितिकी तंत्र की भी जगह ले रही है जो लगभग आधी सदी तक राज्य पर हावी रहा। एक राज्य जो कभी समाजवादी-कम्युनिस्ट बयानबाजी और खैरात-भारी शासन द्वारा संचालित होता था, स्पष्ट रूप से एक अधिक संरक्षणवादी-पूंजीवादी सामाजिक कल्पना की ओर बढ़ रहा है, जहां व्यापार, धार्मिक दावे, सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय पहचान अब राजनीतिक रूप से अजीब विषय नहीं हैं। यह परिवर्तन चुनावी के साथ-साथ सांस्कृतिक भी है। एक समय था जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल की मुख्यधारा के राजनीतिक विमर्श में मुश्किल से ही शामिल होते थे। सरकारी आयोजनों में शायद ही कभी या कभी उनका आह्वान नहीं किया गया। उनकी विरासत अधिकतर वैचारिक क्षेत्रों में ही बची रही। अब, 98 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता, जिन्होंने कभी मुखर्जी के साथ काम किया था, को समारोह के दौरान सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया, यह छवि ऐतिहासिक संदेश से भरी हुई थी। बंगाल के भूले हुए दक्षिणपंथ को सिर्फ याद नहीं किया गया, उसे औपचारिक रूप से वैधता में बहाल किया गया। अधिकारी ने इस मंथन को अन्य लोगों से पहले समझ लिया। तृणमूल कांग्रेस के अंदर रहते हुए भी, उन्होंने बार-बार कैलिब्रेटेड हिंदुत्व संदेश, तेज धार्मिक स्थिति और एक बयानबाजी के माध्यम से आरएसएस-शैली राष्ट्रवाद के प्रति मनोवैज्ञानिक निकटता का संकेत दिया, जो लगातार तृणमूल की पुरानी नरम-क्षेत्रवादी शब्दावली से परे चला गया। उनका तृणमूल से जाना संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था, लेकिन वैचारिक रूप से इसकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी थी। जो बात इस परिवर्तन को असाधारण बनाती है वह है बंगाल का ऐतिहासिक संदर्भ। यह वह राज्य था जहां कम्युनिस्ट ट्रेड यूनियनों ने सड़कों को आकार दिया था, जहां राष्ट्रवाद को प्रकट धार्मिकता में लपेटकर अक्सर संदेह की दृष्टि से देखा जाता था, और जहां दिल्ली केंद्रित राजनीति ने पारंपरिक रूप से सांस्कृतिक प्रतिरोध को जन्म दिया था। आज, वही बंगाल पूरी तरह से राष्ट्रवादी उत्साह, बड़े पैमाने पर हिंदू एकजुटता और दक्षिणपंथी राजनीतिक शब्दावली को खुले तौर पर अपना रहा है। वह बदलाव रातोरात नहीं हुआ. यह परत-दर-परत पहुंचा – सीमा संबंधी चिंताओं, जनसांख्यिकीय बहसों, शरणार्थी राजनीति, चुनाव के बाद की हिंसा की कहानियों, कल्याणकारी थकान और भाजपा-आरएसएस पारिस्थितिकी तंत्र की निरंतर सामाजिक पैठ के माध्यम से। यही कारण है कि बंगाल 2026 को केवल सत्ता विरोधी चुनाव के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता है। 1947 के बाद यह पहली बार है जब बंगाल में भूमि आंदोलन की अगुवाई किए बिना एक नई पार्टी सत्ता में आई है। वाम मोर्चा भूमि सुधार आंदोलन, ऑपरेशन बर्गा पर सवार होकर सत्ता में आया और ममता बनर्जी को सिंगूर और नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण








