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टाइम मैगजीन के शीर्ष 100 परोपकारियों में भारतीय और भारतवंशी:गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे नाडर; बच्चों को कुपोषण से निकाल लाए मेहता बंधु, शाह

टाइम मैगजीन के शीर्ष 100 परोपकारियों में भारतीय और भारतवंशी:गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे नाडर; बच्चों को कुपोषण से निकाल लाए मेहता बंधु, शाह

टाइम मैगजीन ने 2026 की टाइम 100 फिलैन्थ्रॉपी लिस्ट जारी की है। इसके मुताबिक दानवीर अब पारंपरिक समाज सेवा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी अकूत दौलत से समाज और व्यवस्था की सूरत बदल रहे हैं। इसमें भारतीय व भारतवंशी भी हैं। मेहता बंधु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ झीलों-प्रकृति का संरक्षण कर रहे हैं, तो नाडर जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाकर अमेरिका तक भेज रहे हैं। भारतवंशी राजीव शाह बच्चों को शुद्ध खाना दिलवाने का प्रण ले चुके हैं, तो वहीं दीपक भार्गव बुनियादी अधिकारों की राह मजबूत कर रहे हैं। जानिए इन्हें… शिव नाडर- किसानों व मजदूरों के बच्चों को चुनकर मुफ्त में पढ़ा रहे एचसीएल टेक्नोलॉजीज के 80 वर्षीय फाउंडर का विजन ‘क्रिएटिव फिलैन्थ्रॉपी’ पर टिका है, जहां पारदर्शिता सबसे अहम है। शिक्षा को बदलाव की चाबी मानने वाले नाडर ‘विद्याज्ञान’ बोर्डिंग स्कूलों के जरिए यूपी के ग्रामीण इलाकों से गरीब किसानों-मजदूरों के होनहार बच्चों को चुनकर मुफ्त पढ़ाते हैं। इस साल दो बच्चों को अमेरिका भेजा। पिछले 5 वर्षों में 4 बार देश के ‘शीर्ष दानदाता’ रहे। 2025 में अकेले 2660 करोड़ रु. दिए। यूनिवर्सिटी, म्यूजियम व अस्पतालों को अब तक ₹14,000 करोड़ दे चुके हैं। सुधीर-समीर मेहता – पौने दो लाख बच्चों का हेल्थ चेकअप करवा चुके 1.17 लाख करोड़ से बड़े साम्राज्य वाले ‘टोरेंट ग्रुप’ के मालिक मेहता बंधुओं ने 2024 में पिता उत्तमभाई नत्थूलाल मेहता की जन्मशती पर 5 हजार करोड़ रु. दान करने का महा-संकल्प लिया था। इसी मुहिम के तहत अहमदाबाद में 30 हजार वर्गफुट का न्यूरो-रिहैबिलिटेशन केंद्र शुरू किया गया है। इनके ‘यूएनएम फाउंडेशन’ ने 10 साल में पौने दो लाख बच्चों की सेहत की जांच की, 70 हजार नौनिहालों को कुपोषण से मुक्ति दिलाई है। बच्चों के लिए अस्पताल भी खोला है। राजीव शाह – 30 करोड़ अफ्रीकियों को बिजली से जोड़ने का मिशन चला रहे राजीव जे. शाह भारतीय मूल के अमेरिकी नेता हैं, जो 2017 से 5.5 लाख करोड़ वाले रॉकफेलर फाउंडेशन के प्रेसिडेंट हैं। यूट्यूबर मि.बीस्ट के साथ मिलकर केन्या में स्कूल किचन खोला। 1 लाख भोजन थाली का लक्ष्य है। फाउंडेशन ने मिशन 300 शुरू किया है, इसमें 2030 तक 30 करोड़ अफ्रीकियों को बिजली से जोड़ना और बच्चों के लिए 8 हजार करोड़ की राशि से पौष्टिक और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना है। बराक ओबामा प्रशासन में यूएसएड के प्रमुख रहे शाह कहते हैं,‘हर जिंदगी कीमती है। दीपक भार्गव- दुनियाभर में परोपकार से लोकतंत्र को मजबूत बनाने में जुटे लंबे समय तक एक्टिविस्ट रहे। 2024 में ‘फ्रीडम टुगेदर फाउंडेशन’ की कमान संभाली। भारतीय मूल के भार्गव मानते हैं कि बुनियादी अधिकारों व लोकतंत्र पर मंडराते खतरों के इस दौर में परोपकार का तरीका भी असाधारण होना चाहिए। आमतौर पर ट्रस्ट संपत्ति का 5% ही दान करते हैं, पर भार्गव ने इसे 10% तक पहुंचाया। 2025 में संस्था ने ₹3,300 करोड़ रु. दिए, जिसमें 70% लोकतंत्र की मजबूती में लगा। मैकआर्थर फाउंडेशन के साथ मिलकर दुनियाभर में ‘दान की स्वतंत्रता’ की पैरवी कर रहे हैं।

तमिलनाडु के सीएम विजय को कल्याणकारी वादों और राजकोषीय वास्तविकता के बीच संतुलन बनाने का सामना करना पड़ रहा है | न्यूज18

तमिलनाडु के सीएम विजय को कल्याणकारी वादों और राजकोषीय वास्तविकता के बीच संतुलन बनाने का सामना करना पड़ रहा है | न्यूज18

विजय ने आधिकारिक तौर पर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है, जो राज्य में एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन की शुरुआत है। हालाँकि, नए प्रशासन को तत्काल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें ₹10 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज का बोझ, महत्वाकांक्षी चुनावी वादों को पूरा करने का दबाव और विभाजित राजनीतिक माहौल में गठबंधन की उम्मीदों को प्रबंधित करने की जटिलताएं शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विजय के शासन पर कड़ी नजर रखी जाएगी क्योंकि उनकी सरकार कल्याणकारी प्रतिबद्धताओं, आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विकास और राजकोषीय प्रबंधन को संतुलित करने का प्रयास करती है। नए सीएम को ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद मजबूत विपक्षी हमलों और बढ़ती जनता की उम्मीदों से निपटने की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। n18oc_India18oc_PoliticsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 16 मई, 2026, 13:26 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज इंडिया

कान्ये वेस्ट का दिल्ली कॉन्सर्ट कैंसिल:पहली बार भारत में परफॉर्म करने वाले थे रैपर, ऑर्गनाइजर बोले- सुरक्षा हमारी प्राथमिकता

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इंटरनेशनल रैपर कान्ये वेस्ट (ये) का भारत में होने वाला कॉन्सर्ट कैंसिल कर दिया गया है। रैपर भारत में पहला कॉन्सर्ट 23 मई को नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होना था। इससे पहले यह शो 29 मार्च के लिए तय किया गया था, जिसे बाद में रीशेड्यूल किया गया था। इवेंट ऑर्गनाइजर ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर एक बयान में कॉन्सर्ट कैंसिल करने की घोषणा की। बयान में कहा गया कि अधिकारियों के निर्देशों के कारण यह लाइव इन इंडिया इवेंट नहीं हो पाएगा। ऑर्गनाइजर ने कहा कि महीनों की तैयारी के बाद, यह भारत में अब तक के सबसे बड़े लाइव कॉन्सर्ट्स में से एक होने वाला था, लेकिन मौजूदा सेंसिटिव हालात को देखते हुए पब्लिक सेफ्टी को प्रायोरिटी दी गई है। पोस्ट में यह भी जानकारी दी गई कि टिकट खरीदने वाले लोगों को पूरा रिफंड दिया जाएगा। वहीं, नई तारीख और वेन्यू को लेकर कान्ये वेस्ट की टीम के साथ बातचीत जारी है। कान्ये वेस्ट को 2003 में उनके गाने ‘थ्रू द वायर’ से पहचान मिली थी। उनका पहला एल्बम 2004 में रिलीज हुआ था। उनके फेमस गाने ‘नाइज इन पेरिस’, ‘बाउंड 2’ और ‘हरिकेन’ हैं। इससे पहले ग्लोबल सिंगर शकीरा का अप्रैल में होने वाला ‘फीडिंग इंडिया कॉन्सर्ट’ पोस्टपोन किया गया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया था। शकीरा का मुंबई में 10-11 अप्रैल और दिल्ली में 15 अप्रैल को परफॉर्म करने का शेड्यूल था। अभी तक कॉन्सर्ट की नई तारीखों का एलान नहीं किया गया है। सुरक्षा कारणों से लिया गया था फैसला कॉन्सर्ट ऑर्गनाइजर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा था, ‘मौजूदा जियो पॉलिटिकल स्थिति और क्षेत्रीय तनाव के कारण शकीरा का कॉन्सर्ट अगले नोटिस तक पोस्टपोन किया जा रहा है। हमारे लिए फैंस, आर्टिस्ट और प्रोडक्शन टीम की सुरक्षा सबसे ऊपर है।’ ऑर्गनाइजर्स ने कहा था कि वे शकीरा की टीम के साथ मिलकर नई तारीखों पर काम कर रहे हैं और जैसे ही कुछ फाइनल होगा, उसकी जानकारी दी जाएगी। 32 हजार रुपए तक थी टिकट की कीमत शकीरा के इस कॉन्सर्ट को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज था, क्योंकि वे 2007 के बाद पहली बार भारत आने वाली थीं। इसके टिकट काफी महंगे बिके थे। मुंबई में सबसे महंगा ‘HSBC स्टारस्ट्रक लाउंज पास’ 32,000 रुपए का था। इसमें 28,500 रुपए की टिकट के साथ जीएसटी और बुकिंग फीस शामिल थी। वहीं, प्लैटिनम लाउंज का टिकट 24,500 रुपए और वीआईपी सेक्शन का टिकट 14,500 रुपए का था। दिल्ली में भी स्टारस्ट्रक लाउंज की कीमत करीब 30,500 रुपए रखी गई थी। जिन लोगों ने टिकट बुक किए थे, ऑर्गनाइजर्स ने उन्हें रिफंड का भरोसा दिया था। डिस्ट्रिक्ट की तरफ से कहा गया था कि जिन्होंने भी टिकट्स खरीदी थीं, उन्हें पूरा पैसा वापस मिलेगा। यह रिफंड उसी ‘ओरिजनल पेमेंट मोड’ में क्रेडिट किया जाएगा। किसी भी सवाल या समस्या के लिए ऑर्गनाइजर्स ने एक आधिकारिक ईमेल आईडी भी जारी की है।

मालदीव में इटली के 5 गोताखोरों की मौत:समुद्र के नीचे गहरी गुफाओं की खोज में निकले थे, सिर्फ एक का शव मिला

मालदीव में इटली के 5 गोताखोरों की मौत:समुद्र के नीचे गहरी गुफाओं की खोज में निकले थे, सिर्फ एक का शव मिला

मालदीव के वावू एटोल में इटली के 5 गोताखोरों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा डाइविंग हादसा बताया है। सभी डाइवर्स 50 मीटर गहराई में मौजूद गुफाओं की खोज के लिए गए थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अब तक सिर्फ एक शव बरामद हुआ है। खराब मौसम और समुद्र की कठिन परिस्थितियों की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है। अधिकारियों के मुताबिक बाकी चार डाइवर्स के शव अब भी गुफा के अंदर होने की आशंका है। सर्च ऑपरेशन शनिवार को फिर शुरू किया जाएगा। मालदीव सरकार ने मृतकों की पहचान मोनिका मोंटेफाल्कोने, जॉर्जिया सोमाकाल, फेडेरिको गुआल्तिएरी, म्यूरियल ओडेनिनो और जियानलुका बेनेडेट्टी के रूप में की है। यह टीम ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ नाम की बोट से समुद्र में गई थी। यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा से जुड़े थे चार डाइवर्स रिपोर्ट्स के मुताबिक पांच में से कम से कम चार डाइवर्स इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा से जुड़े थे। जियानलुका बेनेडेट्टी यॉट पर बोट ऑपरेशंस मैनेजर थे। उनका शव ही अब तक बरामद किया जा सका है। मोनिका मोंटेफाल्कोने मरीन बायोलॉजिस्ट और यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा में ट्रॉपिकल मरीन इकोलॉजी और अंडरवॉटर साइंस की प्रोफेसर थीं। इटली की मीडिया के मुताबिक वह मालदीव में एक आइलैंड मॉनिटरिंग कैंपेन की साइंटिफिक डायरेक्टर भी थीं। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी बेटी जॉर्जिया सोमाकाल को भी समुद्र और डाइविंग में दिलचस्पी थी। उन्होंने उसी यूनिवर्सिटी से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। 31 साल की म्यूरियल ओडेनिनो मरीन बायोलॉजिस्ट और इकोलॉजिस्ट थीं। उन्होंने कई वैज्ञानिक रिसर्च पेपर भी लिखे थे। वहीं, 31 साल के फेडेरिको गुआल्तिएरी ने हाल ही में मरीन बायोलॉजी और इकोलॉजी में डिग्री पूरी की थी। वह सर्टिफाइड स्कूबा डाइविंग इंस्ट्रक्टर भी थे। बेनेडेट्टी पहले बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में काम करते थे। बाद में उन्होंने डाइविंग के शौक के चलते 2017 में मालदीव शिफ्ट होने का फैसला किया और बोट ऑपरेशंस मैनेजर बन गए। खराब मौसम से रुका रेस्क्यू ऑपरेशन रेस्क्यू अधिकारियों के मुताबिक बेनेडेट्टी का शव अंडरवॉटर केव सिस्टम के प्रवेश द्वार के पास मिला। बाकी डाइवर्स के गुफा के अंदर फंसे होने की आशंका है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, जिस केव सिस्टम में डाइवर्स गए थे, उसमें तीन बड़े चैम्बर्स हैं, जो पतले रास्तों से जुड़े हुए हैं। रेस्क्यू टीम अब तक दो चैम्बर्स की तलाशी ले चुकी है। डायविंग की सुरक्षित समय सीमा की वजह से ऑपरेशन सीमित रखना पड़ा। मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद हुसैन शरीफ ने बताया कि शुक्रवार को आठ डाइवर्स ने सर्च ऑपरेशन में हिस्सा लिया। वे जोड़ी बनाकर गुफा के गहरे हिस्सों तक पहुंचे, लेकिन मौसम खराब होने के बाद मिशन रोकना पड़ा। इसी बीच, इटली सरकार ने कहा है कि वह डाइवर्स अलर्ट नेटवर्क नाम की स्पेशलिस्ट डाइविंग संस्था के साथ मिलकर शवों को वापस लाने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। मौत की वजह अब तक साफ नहीं डाइवर्स की मौत की असली वजह अब तक सामने नहीं आई है। हालांकि, जांच एजेंसियां और डाइविंग एक्सपर्ट्स कई संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। मालदीव पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या खराब मौसम की वजह से पानी के अंदर विजिबिलिटी बहुत कम हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे के समय 25 से 30 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं। इटली के अखबार ला रिपब्लिका के मुताबिक, खराब मौसम के कारण विजिबिलिटी घटने से डाइवर्स गुफा के अंदर रास्ता भटक गए होंगे। मोनिका मोंटेफाल्कोने के पति कार्लो सोमाकाल ने इटली की मीडिया से कहा कि डायविंग के दौरान कोई अनपेक्षित घटना हुई होगी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी दुनिया की सबसे अनुभवी डाइवर्स में थीं और वह कभी अपनी बेटी या टीम को खतरे में नहीं डालतीं। जांचकर्ता इस संभावना पर भी काम कर रहे हैं कि एक डाइवर कहीं फंस गया हो और बाकी साथी उसे बचाने की कोशिश में ऑक्सीजन खत्म होने या घबराहट का शिकार हो गए हों। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ डाइविंग एक्सपर्ट्स ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी की आशंका भी जता रहे हैं। यह स्थिति तब होती है, जब डाइविंग टैंक में मौजूद गैस का मिश्रण गहराई के हिसाब से सही नहीं होता और ज्यादा दबाव में ऑक्सीजन जहरीली हो जाती है। अंडरवॉटर केव डाइविंग क्यों खतरनाक मानी जाती है केव डाइविंग को बेहद तकनीकी और खतरनाक गतिविधि माना जाता है। इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग, एडवांस उपकरण और सख्त सुरक्षा नियमों की जरूरत होती है। डाइविंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अंडरवॉटर गुफाओं में रास्ता भटकने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। हल्की सी मिट्टी या तलछट भी पानी में फैल जाए तो विजिबिलिटी लगभग शून्य हो सकती है। 50 मीटर की गहराई तक जाना सामान्य स्कूबा डाइविंग लिमिट से काफी ज्यादा माना जाता है। 40 मीटर से नीचे की डाइविंग को टेक्निकल डाइविंग कैटेगरी में रखा जाता है। इसके लिए अलग ट्रेनिंग और खास उपकरण जरूरी होते हैं। मालदीव में सामान्य रिक्रिएशनल डाइविंग की सीमा 30 मीटर तय है। BBC के मुताबिक, मालदीव में डाइविंग और स्नॉर्कलिंग हादसे बहुत कम होते हैं।

बिना महंगे प्रोडक्ट्स के चाहिए ग्लोइंग स्किन? अपनाएं ये 8 घरेलू उपाय, घर बैठे पा सकते हैं दमकती त्वचा

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Last Updated:May 16, 2026, 13:23 IST गर्मी और धूल-मिट्टी के कारण त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आने लगती है. ऐसे में कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू और प्राकृतिक उपाय अपनाना पसंद करते हैं. एलोवेरा, शहद, गुलाब जल, खीरे का रस और बेसन-हल्दी जैसे आसान घरेलू नुस्खे त्वचा को ताजगी और निखार देने में मददगार माने जाते हैं. एलोवेरा जेल को त्वचा की देखभाल के लिए एक प्राकृतिक और फायदेमंद उपाय माना जाता है. वैद्य आशुतोष कुमार के अनुसार, इसमें मौजूद गुण त्वचा को ठंडक और ताजगी देने में मदद कर सकते हैं. यह त्वचा को प्राकृतिक नमी प्रदान करता है, जिससे चेहरा अधिक फ्रेश और स्वस्थ नजर आ सकता है. इस्तेमाल के लिए ताजा एलोवेरा की पत्ती से जेल निकालकर उसे सीधे चेहरे पर लगाएं. इसके बाद हल्के हाथों से कुछ मिनट तक मसाज करें और 10 से 15 मिनट तक इसे त्वचा पर लगा रहने दें. अंत में साफ पानी से चेहरा धो लें. नियमित उपयोग से त्वचा साफ, मुलायम और तरोताजा दिख सकती है. हालांकि, जिन लोगों को त्वचा से जुड़ी एलर्जी या समस्या है, उन्हें इस्तेमाल से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए. बेसन और हल्दी का फेस पैक लंबे समय से घरेलू स्किन केयर उपायों में इस्तेमाल किया जाता रहा है. कई लोग त्वचा की सफाई और निखार के लिए इसे अपनाते हैं. इसे तैयार करने के लिए एक चम्मच बेसन में चुटकी भर हल्दी और थोड़ा पानी या गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को चेहरे पर समान रूप से लगाएं और कुछ देर सूखने के लिए छोड़ दें. फेस पैक सूखने के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें. माना जाता है कि यह फेस पैक त्वचा को साफ करने, अतिरिक्त तेल हटाने और चेहरे को ताजगी देने में मदद कर सकता है. साथ ही यह त्वचा पर जमी धूल-मिट्टी को हटाने में भी सहायक माना जाता है. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. यदि जलन, खुजली या एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें. त्वचा की देखभाल के लिए शहद को एक आसान और प्राकृतिक घरेलू उपाय माना जाता है. शहद में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को नमी देने और उसे मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. यही वजह है कि कई लोग इसे अपनी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाते हैं. इस्तेमाल के लिए चेहरे पर थोड़ी मात्रा में शहद लगाकर हल्के हाथों से पूरे चेहरे पर फैलाएं. इसके बाद इसे कुछ मिनट तक लगा रहने दें, ताकि त्वचा इसे अच्छी तरह सोख सके. फिर गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. माना जाता है कि इससे त्वचा साफ, मुलायम और ताजगी भरी महसूस हो सकती है. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा की संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है. अगर जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर विशेषज्ञ से सलाह लें. Add News18 as Preferred Source on Google चेहरे की सफाई के लिए कच्चे दूध का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू उपाय के रूप में किया जाता रहा है. कई लोग इसे प्राकृतिक क्लींजर की तरह उपयोग करते हैं. माना जाता है कि कच्चा दूध त्वचा पर जमी धूल, गंदगी और अतिरिक्त तेल को साफ करने में मदद कर सकता है. इस्तेमाल के लिए रुई की मदद से थोड़ा कच्चा दूध चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं. इसके बाद कुछ मिनट तक इसे चेहरे पर लगा रहने दें, ताकि त्वचा इसे अच्छी तरह सोख सके. फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. माना जाता है कि इससे चेहरा साफ, मुलायम और ताजगी भरा महसूस हो सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है. अगर त्वचा पर जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर विशेषज्ञ की सलाह लें. त्वचा की देखभाल के लिए खीरे का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू उपाय के रूप में किया जाता रहा है. खीरा त्वचा को ठंडक पहुंचाने और ताजगी का एहसास दिलाने के लिए जाना जाता है. खासकर गर्मी के मौसम में कई लोग इसे अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल करते हैं. इस्तेमाल के लिए खीरे का ताजा रस निकालकर कॉटन या हल्के हाथों से चेहरे पर लगाएं. इसके बाद कुछ मिनट तक इसे चेहरे पर लगा रहने दें और फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. माना जाता है कि इससे त्वचा तरोताजा और फ्रेश महसूस हो सकती है. साथ ही गर्मी के कारण होने वाली थकान और रूखेपन का एहसास कम करने में भी यह सहायक माना जाता है. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है. यदि त्वचा पर जलन, खुजली या एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें. चेहरे पर बर्फ की हल्की सिकाई करना एक आसान और लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है. कई लोग त्वचा को ठंडक और ताजगी देने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. माना जाता है कि बर्फ की सिकाई से चेहरा फ्रेश महसूस हो सकता है और त्वचा को आराम मिल सकता है. इस्तेमाल के लिए बर्फ के टुकड़े को सीधे त्वचा पर लगाने की बजाय किसी साफ कपड़े में लपेट लें. इसके बाद इसे चेहरे पर हल्के हाथों से कुछ सेकंड तक लगाएं. ध्यान रखें कि बर्फ को लंबे समय तक एक ही जगह पर न रखें और सीधे त्वचा पर लगाने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा में जलन या नुकसान हो सकता है. हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से करें. यदि त्वचा पर लालपन, जलन या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर दें. टमाटर का रस भी कई लोगों की ओर से घरेलू स्किन केयर उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. टमाटर में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए कुछ लोग चेहरे पर इसका रस लगाना पसंद करते हैं.

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल ₹5 सस्ता हुआ:पेट्रोल ₹409.78 और हाई-स्पीड डीजल ₹409.58 लीटर मिल रहा, भारत में कल ₹3 महंगे हुए थे

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल ₹5 सस्ता हुआ:पेट्रोल ₹409.78 और हाई-स्पीड डीजल ₹409.58 लीटर मिल रहा, भारत में कल ₹3 महंगे हुए थे

पाकिस्तान सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर की कटौती की है। नई कीमतें आज यानी 16 मई से लागू हो गई हैं। इस कटौती के बाद अब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत ₹409.78 प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत ₹409.58 प्रति लीटर पर आ गई है। हाल के दिनों में लगातार बढ़ी कीमतों के बाद इस कमी से मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के बजट को थोड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पेट्रोल का सीधा असर मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी गाड़ियों पर पड़ता है। हर हफ्ते शुक्रवार रात को तय हो रहे दाम पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ समय से हर हफ्ते शुक्रवार रात को पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा कर रही है। दरअसल, 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध (जो फिलहाल थमा हुआ है) के बाद से ही देश में ईंधन संकट गहराया हुआ है। पिछले हफ्ते ही ₹15 तक बढ़ाए थे दाम: मार्च में लगा था ₹55 प्रति लीटर का बड़ा झटका भले ही सरकार ने ₹5 की राहत दी है, लेकिन ठीक एक हफ्ते पहले सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में ₹14.92 और डीजल में ₹15 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद, सरकार ने 6 मार्च को पेट्रोल-डीजल ₹55 प्रति लीटर महंगा कर दिया था। 2 अप्रैल को पेट्रोल में 43% और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 55% की बढ़ोतरी की थी। भारत में भी पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए भारत में 15 मई पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी हैं। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने होंगे। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

दिग्विजय सिंह बोले- मैं घोर सनातनी हूं:उषा ठाकुर से कहा-क्या तुमने नर्मदा परिक्रमा की है? पूर्व मंत्री बोलीं-पक्के सनातनी हैं, तो मानते क्यों नहीं

दिग्विजय सिंह बोले- मैं घोर सनातनी हूं:उषा ठाकुर से कहा-क्या तुमने नर्मदा परिक्रमा की है? पूर्व मंत्री बोलीं-पक्के सनातनी हैं, तो मानते क्यों नहीं

मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कह रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म का मानने वाला हूं। मेरे कहने के बाद ही आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया, पहले आप लोग सिर्फ हिंदू-हिंदू धर्म करती थीं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार देर रात पूर्व मंत्री उषा ठाकुर से मुलाकात में यह बात कही। भोजशाला फैसले के बाद वे इंदौर पहुंचे थे। उषा ठाकुर बीजेपी विधायक और कट्टर हिंदुत्व छवि वाली नेता हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं जितना सनातनी हूं… क्या तुमने कभी नर्मदा परिक्रमा की है? क्या तुम एकादशी का व्रत करती हो?” इस पर ठाकुर ने कहा, “आप व्यक्तिगत रूप से तो पक्के सनातनी हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं करते।” जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं सार्वजनिक रूप से ही तो कह रहा हूं, अब और कैसे सार्वजनिक करूं? मैं सही सनातनी हूं।” दिग्विजय बोले- अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भोजशाला फैसले पर कहा था कि फैसले का अध्ययन किया जाएगा और देश के नियमों व प्रचलनों के अनुसार आगे कदम उठने चाहिए। जामिया मस्जिद, बनारस और अन्य तीन मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। भोजशाला एएसआई प्रोटेक्टेड साइट है, इसलिए वहां पूजा-अनुष्ठान की अनुमति का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में कई दावों का जिक्र नहीं है, इसलिए पूरे फैसले की गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द के संकट के समय सिर्फ एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं। कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही सभी निर्णय होना चाहिए। अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का होगा। पढ़िए दिग्विजय और उषा ठाकुर के बीच की पूरी बातचीत… उषा ठाकुर : जी, बड़े भाई हैं ये। दिग्विजय सिंह : मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कह रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म का मानने वाला हूं। मेरे कहने के बाद आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया, पहले हिंदू-हिंदू धर्म करती थीं। मैंने इसकी शुरुआत की थी। उषा ठाकुर : हम अनादि काल से सनातनी हैं। दिग्विजय सिंह : अनादि काल से सनातनी तो तुम हो। हम उसके दुश्मन नहीं हैं। मैं जितना सनातनी हूं… तूने नर्मदा परिक्रमा की है क्या? उषा ठाकुर : नहीं करी। दिग्विजय सिंह : तू एकादशी का व्रत करती है क्या? उषा ठाकुर : आप बड़े भाई हैं। मैंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से पक्के सनातनी हैं, पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते। दिग्विजय सिंह : मैं सार्वजनिक रूप से कह तो रहा हूं, और कैसे सार्वजनिक करूं? उषा ठाकुर : हां, मैं आपका धन्यवाद देती हूं। बहुत अच्छी बात है। दिग्विजय सिंह : मैं सही सनातनी हूं। उषा ठाकुर : तो आपको हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। दिग्विजय सिंह : तूने कैसे मान लिया कि मैंने विरोध किया? उषा ठाकुर : अब ये किसी ने बोला। दिग्विजय सिंह : किसी ने बोला…! ये खबर भी पढ़ें… अयोध्या जाने के सवाल पर दिग्विजय बोले- अहं ब्रह्मस्मि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह से भास्कर ने पूछा, आप राम मंदिर दर्शन के लिए कब जा रहे हैं? दिग्विजय बोले- अद्वैत वेदांत क्या है? अहं ब्रह्मास्मि, मेरे में ही ब्रह्म है। इसलिए मुझे कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है। मेरे ह्रदय में ही नारायण विराजमान हैं। पढ़ें पूरी खबर…

Super El Nino 2026 Impact Forecast; Drought Crisis

Super El Nino 2026 Impact Forecast; Drought Crisis

Hindi News National Super El Nino 2026 Impact Forecast; Drought Crisis | IMD Rajasthan MP Monsoon Alert कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच अल-नीनो के एक्टिव होने की बात सामने आ रही है। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (नोआ) के अनुसार यह मई-जुलाई के दौरान ही दस्तक दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के अनुसार, प्रशांत महासागर में तापमान तेजी से बढ़ने के कारण यह खतरनाक मौसमी स्थिति इस बार पूरे मॉनसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने जारी अनुमान में यह संभावना 61% थी, जो अब बढ़कर 82% हो गई है। भारतीय मौसम विभाग के चीफ मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि इसका सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ेगा। इससे देश में सूखे का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा। अल-नीनो क्या होता है, 3 ग्राफिक्स से समझें अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा तब वह भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। नोआ के नई अपडेट के मुताबिक इस साल मई से जुलाई के दौरान अल नीनो डेवलप होने की 82% संभावना है। इसके सर्दियों (दिसंबर 2026 से फरवरी 2027) तक जारी रहने की 96% आशंका है। जबकि, इसके ‘स्ट्रॉन्ग’ या ‘वेरी स्ट्रॉन्ग’ रहने की करीब 67% आशंका है। इससे, कमजोर मानसून, सूखे और हीटवेव की आशंका अब ज्यादा हो गई है। दुनिया पर अल-नीनो का असर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होती। भीषण गर्मी पड़ती है। इंडोनेशिया, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में नमी खत्म होने से सूखा पड़ता है और जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है। मध्य प्रशांत क्षेत्र में समुद्र का तापमान बढ़ने से भारी बारिश और चक्रवात की स्थिति बनती है। भारत के कौन से इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने का सबसे ज्यादा खतरा है, जिससे लंबे सूखे और कृषि नुकसान की आशंका बढ़ सकती है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान अगस्त-सितंबर के दौरान सबसे संवेदनशील राज्यों में माने जा रहे हैं। वहीं मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य मानसूनी क्षेत्रों में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। हालांकि लद्दाख, राजस्थान के कुछ हिस्से, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के उत्तरी इलाके, जिनमें तेलंगाना भी शामिल है, बड़े बारिश घाटे से अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकते हैं। ज्यादा बारिश के बावजूद दुनिया सूख रही दुनिया में कुल मिलाकर बारिश बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीन और इकोसिस्टम ज्यादा सूखे हो रहे हैं। नेचर में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, अब बारिश साल भर में बराबर बंटने के बजाय बड़े और ज्यादा तेज तूफानी दौर में हो रही है। इनके बीच लंबे ड्राई स्पेल आ रहे हैं। नतीजा यह कि एक साथ बहुत ज्यादा पानी गिरने पर मिट्टी उतना सोख नहीं पाती, पानी सतह पर जमा होता है और जल्दी भाप बनकर उड़ जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Super El Nino 2026 Impact Forecast; Drought Crisis

Super El Nino 2026 Impact Forecast; Drought Crisis

Hindi News National Super El Nino 2026 Impact Forecast; Drought Crisis | IMD Rajasthan MP Monsoon Alert 5 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच अल-नीनो के एक्टिव होने की बात सामने आ रही है। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (नोआ) के अनुसार यह मई-जुलाई के दौरान ही दस्तक दे सकता है। नोआ ने बताया कि प्रशांत महासागर में तापमान तेजी से बढ़ने के कारण यह खतरनाक मौसमी स्थिति इस बार पूरे मॉनसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने जारी अनुमान में यह संभावना 61% थी, जो अब बढ़कर 82% हो गई है। भारतीय मौसम विभाग के चीफ मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि इसका सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ेगा। इससे देश में सूखे का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा। अल-नीनो क्या होता है, 3 ग्राफिक्स से समझें अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा। अल-नीनो की संभावना 82% बढ़ी, दुनिया पर असर नोआ के नई अपडेट के मुताबिक इस साल मई से जुलाई के दौरान अल नीनो डेवलप होने की 82% संभावना है। इसके सर्दियों (दिसंबर 2026 से फरवरी 2027) तक जारी रहने की 96% आशंका है। जबकि, इसके ‘स्ट्रॉन्ग’ या ‘वेरी स्ट्रॉन्ग’ रहने की करीब 67% आशंका है। इससे, कमजोर मानसून, सूखे और हीटवेव की आशंका अब ज्यादा हो गई है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होती। भीषण गर्मी पड़ती है। इंडोनेशिया, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में नमी खत्म होने से सूखा पड़ता है और जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है। मध्य प्रशांत क्षेत्र में समुद्र का तापमान बढ़ने से भारी बारिश और चक्रवात की स्थिति बनती है। भारत के कौन से इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने का सबसे ज्यादा खतरा है, जिससे लंबे सूखे और कृषि नुकसान की आशंका बढ़ सकती है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान अगस्त-सितंबर के दौरान सबसे संवेदनशील राज्यों में माने जा रहे हैं। वहीं मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य मानसूनी क्षेत्रों में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। हालांकि लद्दाख, राजस्थान के कुछ हिस्से, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के उत्तरी इलाके, जिनमें तेलंगाना भी शामिल है, बड़े बारिश घाटे से अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकते हैं। ज्यादा बारिश के बावजूद दुनिया सूख रही दुनिया में कुल मिलाकर बारिश बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीन और इकोसिस्टम ज्यादा सूखे हो रहे हैं। नेचर में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, अब बारिश साल भर में बराबर बंटने के बजाय बड़े और ज्यादा तेज तूफानी दौर में हो रही है। इनके बीच लंबे ड्राई स्पेल आ रहे हैं। नतीजा यह कि एक साथ बहुत ज्यादा पानी गिरने पर मिट्टी उतना सोख नहीं पाती, पानी सतह पर जमा होता है और जल्दी भाप बनकर उड़ जाता है। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… मानसून 26 मई को केरलम पहुंचेगा: तय समय से 5 दिन पहले; महाराष्ट्र के 4 शहरों में पारा 45°C पार, राजस्थान का फलोदी सबसे गर्म मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि मानसून केरलम में 26 मई को दस्तक दे सकता है। आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, फिर देश के दूसरे हिस्सों को कवर करने के लिए उत्तर की ओर बढ़ता है। पिछले साल मानसून 24 मई को आया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Mamata Banerjees Appeal: Rebuild TMC, Will Paint Offices Herself

Mamata Banerjees Appeal: Rebuild TMC, Will Paint Offices Herself

Hindi News National Mamata Banerjees Appeal: Rebuild TMC, Will Paint Offices Herself | Kolkata 24 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी ने कोलकाता में अपने आवास पर कार्यकर्ताओं से बैठक की। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं से TMC के संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हम पार्टी दफ्तरों को दोबारा खोलेंगे, उन्हें रंगेंगे और मजबूती से काम पर लौटेंगे। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी दफ्तरों को पेंट करने के लिए तैयार हूं। इसके बाद उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, वे पूरी तरह आजाद हैं और वे किसी को भी जबरदस्ती रोक कर रखने में यकीन नहीं रखतीं। बैठक के दौरान ममता के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। कोलकाता में हुई बैठक में अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। ममता ने कहा- जनादेश लूटा गया ममता ने कहा कि चुनाव के नतीजों में भले ही TMC को 80 सीटें मिली हों, लेकिन यह जनादेश की लूट है। इससे उनका हौसला नहीं टूटेगा। बैठक के दौरान 21 मई को फालता सीट पर होने वाले उपचुनाव के उम्मीदवार भी मौजूद थे। दरअसल, फालता में 29 अप्रैल को वोटिंग हुई थी, लेकिन EVM छेड़खानी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने वहां दोबारा वोटिंग कराने का फैसला किया। 4 मई को आए 293 सीटों के नतीजों में BJP को 207 सीटें मिली थीं। TMC 31 सीटों के नतीजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘बंगाल में सीटों पर जीत का अंतर SIR में कटे वोटों से कम मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।’ TMC ने दावा किया कि हालिया विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत का अंतर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने बागची की उस टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है। भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन पर जीत वाली 176 सीटों में भाजपा की 128 सीटें हैं। वहीं, 30 हजार से ज्यादा मार्जिन पर जीत वाली 117 सीटों में भाजपा की 79 सीटें हैं। तृणमूल की 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है। 2021 में भाजपा की 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम ​मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में ऐसी 93.5% थीं। साल 2021 में 121 सीटों पर तृणमूल की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 94 पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दर्शाते हैं। इस बार भाजपा की 25 सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए या अयोग्य घोषित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है। ——————————————– ये खबर भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…