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Darsheel Safary interview, talked about aamir khan and taare zameen par

Darsheel Safary interview, talked about aamir khan and taare zameen par

5 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक तारे जमीन से स्टारडम हासिल करने वाले दर्शील सफारी जल्द ही फिल्म कृष्णा और चिट्ठी में नजर आने वाले हैं। फिल्म 29 मई को रिलीज हो रही है। हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दर्शील ने अपने करियर, परफेक्शन के दबाव, आमिर खान से मिली सीख, थिएटर, सोशल मीडिया और जिंदगी के संघर्षों पर खुलकर बात की। दर्शील ने बताया कि ‘तारे जमीन पर’ की सफलता के बाद उन्होंने खुद पर ही बहुत ज्यादा दबाव बना लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक वह फेल होने के डर में जीते रहे, लेकिन थिएटर ने उन्हें दोबारा खुद से जोड़ा। सवाल- अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं, तारे जमीन पर से जो आपने छाप छोड़ी, क्या प्रेशर था कि हर परफॉर्मेंस वैसी ही हो? जवाब- 100%। वो कहते हैं ना कि आपने जिस चीज के लिए अपनी पूरी लाइफ लगाई हो, 20-25 साल काम किया हो, पूरी जी-जान लगाई और लोगों ने उसे पसंद किया, लेकिन मेरे लिए ये सब पहले ही हो गया। पहली ही बॉल पर सिक्स जैसा। बस मुझे बोला गया था कि इसको सिक्स बोलते हैं तो मैंने बल्ला घुमा दिया और हो गया। फिर मेरे लिए एक रिवर्स अंडरस्टैंडिंग शुरू होने लगी, क्योंकि फिर सब कुछ वैसा ही करना था। वो मैच कैसे करते हैं। तब मैं कहीं भी जाता था, जिनसे भी मिलता था, मैं उनके घर का बेटा बन गया था। तो अब मुझे ये मैच करना था, एक्सपेक्टेशन बैठ गई। आप मंजिल तक पहुंचे थे, अब आपको दोबारा वही सब हासिल करना है। मेरे लिए पिछले 15 साल डिस्कवरी के रहे। एक्सेप्ट करने के रहे। जो बातें 15 साल पहले समझ नहीं आती थीं वो फिर मुझे बाद में समझ आने लग गईं। पेंडमिक के बाद थोड़ा कॉन्फिडेंस फिर से शुरू हुआ कि अब मैं शुरुआत कर सकता हूं चीजों को ट्राई करने में, फिर से मुझे फिल्मों में काम मिलने लगा। वेब सीरीज में ज्यादा एड्स में थोड़ा कम काम किया। अब लगा कि हां अब मैं ट्रैक पर आ चुका हूं। ये फ्लो मिला है, ये मोमेंटम मिला है, इस पर अभी और कैसे बिल्ड कर सकता हूं और बैकग्राउंड नॉइज बंद कर दिया मैंने। सवाल- बैकग्राउंड नॉइस जो है कहीं ना कहीं वो आपके ऊपर लोड ज्यादा डालता गया? जवाब- बिल्कुल। और ये प्रेशर अनफॉर्चूनेटली मुझे है, हाल ही में मैं सोच रहा था, किसी ने मुझ पर वर्बली डाला ही नहीं है। ना मेरे पेरेंट्स, ना मेरे टीचर्स, ना मेरे दोस्त। किसी ने नहीं है। मुझसे सिर्फ ये सवाल पूछा जाता था कि अगला क्या है। मैं खुद ही अपने आप पर वो प्रेशर डालता था। आप फेलियर से डर जाते हो कि मुझे अभी फेल होना नहीं है हरगिज। अब कोशिश नहीं करूंगा तो पता नहीं चलेगा फेलियर क्या है, सक्सेस क्या है। तो ये सारी चीजें हो रही थीं और बहुत टाइम निकल गया उसमें। कई साल गए। उसी दौरान मैं थिएटर कर रहा था। तो थिएटर में तो और क्रिटिकल हो गया था। मैंने अपना वो बैकग्राउंड नॉइस जो आपको बता रहा हूं उस पर थोड़ा कंट्रोल लाना शुरू किया। और जब अच्छा कंट्रोल आ गया तो लाइफ बहुत बेहतरीन हो गई मेरे लिए। सवाल- आपने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ काम किया है, परफेक्शन वाला जो प्रेशर है उसने आपको कहीं ना कहीं एक गिल्ट भी दिया। जवाब- 100%। ये बड़ी डरावनी सी चीज होती है। एक बात मानी जाती है कि परफेक्शन का मतलब है कि आप एक भी एरर नहीं होने देंगे और आपका ऑब्जरवेशन इतना स्ट्रांग है। अब ये मैं नहीं कहूंगा कि मैंने आमिर सर से सीखा क्योंकि मैं बहुत छोटा था ये समझने के लिए कि परफेक्शन का मतलब भी क्या होगा, स्पेलिंग भी नहीं पता होगा। लेकिन बिल्कुल कहीं ना कहीं एक स्टैण्डर्ड सेट हो गया है दिमाग में कि मुझे यहां पहुंचना है और मुझे ये करना है। अब ये करना कैसे है, क्या करना है उसका कोई गाइडेंस नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। वो आपको खुद को ही डिस्कवर करना है। थिएटर करते हुए रियलाइज हुआ कि मैंने इतना टाइम निकाल दिया है। मां ने मुझे गाइड किया कि हर चीज का एक सही टाइम आता है। सवाल- वो लम्हा याद है जब पहली बार सैकड़ों लोगों के बीच में आप सेलेक्ट हुए थे? जवाब- नहीं। मैंने जब ऑडिशन दिया था तब मुझे ऑडिशन का मतलब नहीं पता था। मुझे लगा शूटिंग चालू हो गई है। मैं स्कूल यूनिफॉर्म में था। मैंने सबको बोलना शुरू कर दिया था कि मैं फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं। सवाल- क्या क्या बताया गया था ऑडिशन मैं जाने से पहले? जवाब- यही कि सीन है, ये लाइंस हैं तुम्हारी, तुम ऐसा सोचो कि तुम अब विंडो के बाहर देख रहे हो और तुम्हें कुछ एक बहुत प्यारी सी मछली दिख रही है कोई तालाब या कोई पॉटहोल में और उसमें पानी भरा हुआ है। सवाल- खिड़की से देखने वाले सीन की इमेज आज भी याद है जवाब- मैं लड़का ही ऐसा था जो बहुत डिस्ट्रैक्टेड था और मैं घूम जाता था इन चीजों में। तो मेरे लिए बहुत आसान था। फिर कहा टीचर डांटने वाली है तो तुम देख लेना क्या है। मुझे इसका कोई नॉलेज नहीं था। मुझे किसी ने चिल्लाया, मैंने बोला अरे भाई चिल्ला क्यों रहा है? क्या हो गया? मेरे लिए वो टीचर सीन फिल्म नहीं था। जेन्युइन इमोशन था। फिल्म मेरी परफॉरमेंस मेरे अकेले की नहीं थी। वो आमिर सर की भी थी, अमोल गुप्ते सर का भी थी। मैं ये भी मानता हूं कि कहीं ना कहीं सभी आर्टिस्ट की थी जिन्होंने सपोर्ट दिया है। सवाल- पहली बार अमोल गुप्ते से कब मुलाकात हुई? जवाब- ये बहुत फनी था। मैं शामक दावर की डांस क्लास में था। उनकी टीम के दो लोग थे। उन्होंने हाय कहा। वैसे तो अनजान लोगों को हाय नहीं बोलते, लेकिन मैं उल्टा था। मैं खुद अनजान लोगों से बात करने जाता था। मैं चला गया अमोल जी से बात करने। इतने स्वीटहार्ट पर्सन हैं, वो मुझे कहते थे दर्शील यार मैं तुझे

Ram Charan Interview, Peddi Actor Talk Aboout Sprituality, family and devoation, said will never join politics

Ram Charan Interview, Peddi Actor Talk Aboout Sprituality, family and devoation, said will never join politics

7 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक ग्लोबल स्टार राम चरण 4 जून को रिलीज होने वाली फिल्म पेद्दी में नजर आने वाले हैं। फिल्म रिलीज से पहले राम चरण ने दैनिक भास्कर से बातचीत में स्प्रिचुएलिटी, अनुशासन और राजनीति पर बात की है। जब राम चरण से पूछा गया कि क्या उन्हें कभी पिता की लीगेसी आगे बढ़ाने का प्रेशर महसूस होता है, तो उन्होंने कहा कि वो एक फिल्मी परिवार से आते हैं और उनके लिए ये आम बात है। सवाल- आप 41 दिनों तक अयप्पा दीक्षा लेते हैं, नंगे पांव चलना, काले कपड़े पहनना। ग्लोबल स्टार के तौर पर इस कनेक्शन को बढ़ाने के लिए क्या करते हैं? राम चरण- मैं खुश हूं कि सबको ये पसंद आ रहा है। मैं सलाह दूंगा कि सबको अयप्पा दीक्षा जरूर लेनी चाहिए। ये किसी धर्म या गॉड के बारे में नहीं है, ये हमारे जीने का तरीका है। ये सबसे अनुशासित तरीका है जिंदगी का। इसलिए हर साल 2 बार करता हूं, जिससे साल भर एनर्जी रहती है। ये पूरी तरह बैलेंस करता है। सवाल- हनुमान जी के भक्त हैं, आप? राम चरण- मेरे नाम ही हनुमान है, हनुमान मेरे लिए भाई, दोस्त, फादर, मेरे लिए सब कुछ हैं। सवाल- उपासना जो आपका सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम हैं, वो कहती हैं कि आप बहुत अनुशासित हैं, कभी ऐसा नहीं लगता कि ये डेडिकेशन छोड़कर आम दिन रहे? राम चरण- इतना भी डिसिप्लिन नहीं हूं। हर दिन लगता है कि लेट उठूं, लेट सोऊं फिल्म देखकर। रोज छोले भटूरे खाने का मन होता है, बिरयानी खाने का मन होता है। लेकिन क्या करूं, प्रोड्यूसर ऐसा करने नहीं देते। चिरंजीवी सर, डैड घर में रहते हैं, तो सोने नहीं देते, पूछते हैं जिम क्यों नहीं आया। तो अगर हमें कोई पुश करने वाला होता है तो रिलेक्स करने का कोई टाइम नहीं होता। पत्नी उपासना के साथ राम चरण की तस्वीर। सवाल- चिरंजीवी क्या आपको फिल्म से जुड़ी टिप्स देते हैं? राम चरण- बहुत कम टिप्स देते हैं। वो मानते हैं कि हर एक्टर की अपनी जर्नी होती है। जब उन्हें कुछ बहुत पसंद आता है, तब ही वो बात करते हैं, वर्ना उनका मानना है कि मैं खुद अपनी राह चुनुंगा। हर एक्टर के लिए डिसिप्लिन जरूरी है। दुनिया के हर सक्सेसफुल इंसान और एक्टर के लिए डिसिप्लिन जरूरी है। अगर डिसिप्लिन नहीं है तो कामयाबी जल्दी धुंधली हो जाती है। सवाल- आमतौर पर पिता हमेशा सामने तारीफ करने से कतराते हैं, लेकिन दूसरों के सामने करते हैं, क्या आपके साथ भी ऐसा ही है? राम चरण- मेरे पिता थोड़े अलग हैं। जो बच्चों को हमेशा बोलते रहते हैं कि अच्छा काम किया। बुरा काम किया तो कम बोलते हैं। वो तारीफ हमेशा करते हैं। सवाल- पिता का कोई ऐसा कॉम्प्लिमेंट, जो हमेशा याद रहेगा? राम चरण- ये कुश्ती की जो बॉडी बनी है, वो फिल्म के लिए ही मत रखना, हमेशा ऐसे ही रहना। वो वाकई बहुत तारीफ करते हैं, जो मैंने 14 महीने की मेहनत की है उसकी। ये वो चीज है, जिसकी पिता सराहना करते हैं। सवाल- पिता की लीगेसी आगे बढ़ाने के लिए प्रेशर फील करते हैं? राम चरण- फ्रैंकली कभी नहीं। हम लोग एंटरटेनमेंट फैमिली में पैदा हुए हैं। तो हमारे लिए ये कोई नई चीज नहीं थी। हम सिर्फ अच्छे काम के लिए तड़पते हैं, स्टारडम हमें पुश नहीं करता। सवाल- आपके लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट क्या है? राम चरण- मगधीरा और रंगस्थलम, इन दो फिल्मों ने मुझे एक्टर के तौर पर बनाया। फिल्म मगधीरा 2009 में रिलीज हुई थी। सवाल- आपका परिवार राजनीति में भी बड़ा नाम है, विजय को भी देखें, आपके अंकल (पवन कल्याण) भी आंध्रप्रदेश सरकार में रहे, फैंस को उम्मीद है आप भी राजनीति में आएं? राम चरण- नहीं नहीं। बिल्कुल नहीं। मैं बस एंटरटेनमेंट फील्ड में बेस्ट बनना चाहता हूं। जाहिर तौर पर मेरे डैड और अंकल ने पॉलिटिक्स में कदम रखा, लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहता। मेरे लिए दो नांव में सवार होना बहुत मुश्किल है। फिल्म पेद्दी के बारे में- फिल्म पेद्दी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। इससे पहले रविवार को मुंबई के बीकेसी में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था, जहां फिल्म की पूरी स्टारकास्ट मौजूद रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Habit Of Not Saying No Impact; Emotional Physical Fatigue

Habit Of Not Saying No Impact; Emotional Physical Fatigue

18 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल– मैं 34 साल की शादीशुदा महिला हूं और स्कूल टीचर हूं। मेरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि मैं किसी को ‘ना’ नहीं कह पाती। घर हो या ऑफिस, मैं हमेशा दूसरों की जरूरतों को अपनी जरूरतों से पहले रखती हूं। ऑफिस में सहकर्मी अक्सर अपना काम भी मुझसे करवा लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मैं मना नहीं करूंगी। ससुराल वालों की भी हर बात मान लेती हूं। भले ही उससे मुझे मानसिक-शारीरिक थकान हो रही हो। मैं जानती हूं, लोग मुझे यूज करते हैं, लेकिन फिर भी मना करने में गिल्ट होता है। मैं खुद को बदलना चाहती हूं। इस आदत से बाहर कैसे निकलूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। मदद करना अच्छी बात है, लेकिन जब दूसरों को खुश रखने के लिए आप अपनी जरूरतों और मानसिक शांति को नजरअंदाज करने लगें, तो यह आदत बोझ बन सकती है। “ना” कहना गलत नहीं, बल्कि इमोशनल हेल्थ के लिए जरूरी है। समस्या की असली जड़ कहां हैं? क्या आप हर बात पर “हां” कहती हैं। जब दिल “ना” कहना चाहता है, तब भी आपके मुंह से “हां” निकल जाता है। अगर आप ऐसा महसूस करती हैं, तो यह समझना जरूरी है कि समस्या सिर्फ आपकी “अच्छाई” नहीं है। असली समस्या यह है कि आप भीतर से तो मना करना चाहती हैं, लेकिन कर नहीं पाती हैं। इसलिए हर बार “हां” कह देती हैं। धीरे-धीरे इसका असर दिखाई देने लगता है और आप– थकने लगती हैं। मन में चिड़चिड़ापन आता है। लोगों पर गुस्सा आता है। खुद पर भी गुस्सा आता है। मानसिक और शारीरिक थकान के साथ कई बार खुद पर भी नाराजगी होने लगती है। फिर भी अगली बार आप दोबारा “हां” कह देती हैं। यही चक्र बार-बार चलता रहता है। इसके पीछे अक्सर कुछ गहरे डर काम करते हैं, जैसेकि- “अगर मैंने मना किया तो लोग बुरा मान जाएंगे।” “अच्छी बहू, पत्नी या टीचर वही है, जो हमेशा सबके काम आए।” “किसी बात के लिए ना कहना असल में स्वार्थी होना होता है।” “अगर मैंने बाउंड्री ड्रॉ कर दी तो लोग मुझे पसंद नहीं करेंगे।” यानी बाहर से तो आप लोगों की मदद कर रही हैं, लेकिन अंदर से आपके कारण कुछ और हैं। आपके मन में डर और गिल्ट है और आपको सबके अप्रूवल की जरूरत है। यानी की आपकी “हां” मदद के लिए कही गई “हां” नहीं, बल्कि गिल्ट और डर से कही गई “हां” है। इमोशनल पैटर्न आप सोचती हैं, “मैं तो बस सबका भला चाहती हूं।” लेकिन कई बार इसके पीछे सिर्फ मदद करने की भावना नहीं होती, बल्कि कुछ गहरे इमोशनल पैटर्न भी काम कर रहे होते हैं। हो सकता है कि आप टकराव से बचना चाहती हों। हो सकता है कि आपको रिजेक्शन या लोगों की नाराजगी का डर हो। हो सकता है, दूसरों की नाराजगी सहना आपके लिए मुश्किल हो। हो सकता है, आपने बचपन से यही सीखा हो कि प्यार और तारीफ पाने के लिए हमेशा “हां” कहना जरूरी है। ऐसे में धीरे-धीरे यह सिर्फ एक आदत नहीं रहती, बल्कि आपकी पहचान का हिस्सा बन जाती है। फिर आप अपनी जरूरतों से पहले दूसरों की उम्मीदों को पूरा करने लगती हैं, चाहे इसके बदले आपको मानसिक थकान और भीतर ही भीतर नाराजगी क्यों न महसूस हो। अपने मनोविज्ञान को समझें करें एक जरूरी सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां हम आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहे हैं। इसमें 10 ब्लैंक कॉलम हैं। यहां आपको पिछले 7 दिनों की वो 10 सिचुएशंस लिखनी हैं, जब आपने ‘हां’ कहा। जैसकि– पूजा ने बाजार जाने को कहा तो मैं उसके साथ चली गई। प्रभा ने स्कूल में अपनी क्लास लेने के लिए कहा तो मैंने हां कर दी। सभी सिचुएशंस से जुड़े 5 सवाल हैं, जैसेकि– 1. क्या मैं सचमुच यह करना चाहती थी? 2. मना करने पर कितना गिल्ट होता? 3. कितना डर था कि सामने वाला नाराज होगा? 4. हां कहने के बाद कितनी थकान या पछतावा हुआ? 5. इससे मेरे काम, आराम या स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा? इन पांचों सवालों को आपको 0 से 4 के स्केल पर रेट करना है, अपना टोटल स्कोर निकालना है और अंत में अपने स्कोर की एनालिसिस करनी है। डिटेल्स नीचे ग्राफिक में देखिए– 4 हफ्ते का CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान सप्ताह 1 अपनी आदत को समझें लक्ष्य: इस हफ्ते का लक्ष्य खुद को बदलना नहीं, बल्कि अपनी आदत को समझना है। ध्यान दें कि आप किन परिस्थितियों में बिना मन के “हां” कह देती हैं। हर बार “हां” कहने के बाद ये बातें नोट करें: सिचुएशन क्या थी? यानी सामने कौन था और क्या कहा गया? उस समय मन में क्या विचार आए? जैसे— “अगर मना किया तो बुरा मान जाएंगे।” आपने क्या महसूस किया? जैसे— डर, guilt, घबराहट या दबाव। आपने सामने वाले से क्या कहा? आप वास्तव में क्या कहना चाहती थीं? इस हफ्ते की छोटी प्रैक्टिस तुरंत जवाब देने की बजाय यह वाक्य बोलने की आदत डालें: “मैं सोचकर बताऊंगी।” “अभी तुरंत जवाब देना मुश्किल है।” “मुझे थोड़ा समय चाहिए।” यह छोटा-सा पॉज आपको बिना सोचे “हां” कहने से रोकने में मदद करेगा। सप्ताह 2: अपने विचारों को चुनौती दें लक्ष्य: हरेक गिल्ट को पहचानना और उसे परखना। कई बार हमारा डर सच नहीं, सिर्फ एक आदत होता है। एक उदाहरण: विचार: “अगर मैंने मना किया तो लोग मुझे बुरा समझेंगे।” अब खुद से ये सवाल पूछिए: क्या इसका कोई ठोस सबूत है? क्या हर हेल्दी रिश्ता एक “ना” से टूट जाता है? क्या सामने वाला सच में इतना नाराज होगा, या ये सिर्फ मेरा डर है? क्या मैं किसी और को सलाह दूंगी कि वह हमेशा सबकी बात माने? क्या मैं दूसरों को खुश रखने के लिए खुद को लगातार थका रही हूं? अब एक नया बैलेंस्ड थॉट बनाइए। पुरानी सोच की जगह ज्यादा रियलिस्टिक और हेल्दी सोच विकसित करिए: “ना कहना गलत नहीं है।” “मेरी जरूरतें भी महत्त्वपूर्ण हैं।” “हर बार उपलब्ध रहना जरूरी नहीं है।” “खुद हमेशा परेशान रहने से बेहतर है, दूसरों को थोड़ा निराश करना।” सप्ताह 3: छोटे-छोटे

Vijay Thalapathy Success Story Facts Explained; Tamil Nadu CM Divorce Affair

Vijay Thalapathy Success Story Facts Explained; Tamil Nadu CM Divorce Affair

21 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक विजय की फिल्मों की रिलीज तमिलनाडु में किसी त्योहार जैसी मानी जाती है। फैंस बड़े कटआउट, दूध चढ़ाने और पटाखों के साथ सेलिब्रेट करते हैं। साउथ सुपरस्टार थलापति विजय की कहानी फिल्मों की सफलता के साथ संघर्ष, आलोचना, पारिवारिक विवाद और राजनीति तक पहुंचने की भी रही है। करियर की शुरुआत में उनके लुक्स, आवाज और एक्टिंग का मजाक उड़ाया गया। लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद वह एक्टिंग छोड़ने का सोचने लगे थे। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को लवर बॉय इमेज से निकालकर फैमिली स्टार और फिर तमिल सिनेमा के बड़े मास सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया। घिल्ली, थुप्पाक्की और सरकार जैसी फिल्मों में राजनीतिक और सामाजिक संदेशों ने उनकी अलग पहचान बनाई। इसी दौरान पिता एस.ए. चंद्रशेखर से राजनीतिक संगठन को लेकर विवाद भी चर्चा में रहा। बाद में विजय ने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) लॉन्च की और अब वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं थलापति विजय के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। थलापति विजय का बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि साउथ सिनेमा के बड़े सितारों में गिने जाने वाले थलापति विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। उनका जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में हुआ था। वह ऐसे परिवार से आते हैं, जिसका फिल्म इंडस्ट्री से गहरा संबंध रहा है। उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर तमिल फिल्मों के जाने-माने निर्देशक रहे हैं, जबकि मां शोभा चंद्रशेखर सिंगर, राइटर और प्रोड्यूसर रही हैं। घर में फिल्मी माहौल होने की वजह से विजय बचपन से कैमरा और सिनेमा की दुनिया के करीब रहे। हालांकि उनका बचपन पूरी तरह ग्लैमर से भरा नहीं था। छोटी बहन विद्या का कम उम्र में निधन हो गया था। कई इंटरव्यूज और तमिल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद विजय काफी शांत और अंतर्मुखी हो गए थे। फैंस मानते हैं कि उन्होंने बहन की याद में कई निजी प्रोजेक्ट्स में विद्या नाम का इस्तेमाल किया। पढ़ाई बीच में छोड़ी, एक्टिंग को चुना विजय ने शुरुआती पढ़ाई चेन्नई के फातिमा मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल और बाललोक मैट्रिकुलेशन स्कूल से की थी। इसके बाद उन्होंने लोयोला कॉलेज में विजुअल कम्युनिकेशन कोर्स में एडमिशन लिया। लेकिन उसी दौरान फिल्मों में उनकी व्यस्तता बढ़ने लगी। उन्होंने महसूस किया कि उनका पूरा फोकस एक्टिंग पर जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी। विजय के पास कोई बड़ी प्रोफेशनल डिग्री नहीं है, लेकिन बाद के वर्षों में कई संस्थानों ने उन्हें मानद सम्मान दिए। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाला यह लड़का आगे चलकर करोड़ों लोगों का सुपरस्टार बनेगा। पेरेंट्स के साथ विजय की तस्वीर। पिता की फिल्म से डेब्यू, लेकिन शुरुआत रही मुश्किल विजय ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट वेट्री, कुटुम्बम, नान सिगप्पु मनिथन, वसंत रागम, सत्तम ओरु विलयाट्टु और इधु एंगाल नीती जैसी फिल्मों में काम किया। इनमें से अधिकांश फिल्मों का निर्देशन उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने किया था। इसके बाद विजय ने 1992 में फिल्म ‘नालैया थीरपु’ से लीड एक्टर के रूप में करियर शुरू किया था। लुक्स और आवाज का मजाक उड़ाया गया हालांकि शुरुआत उनके लिए बेहद कठिन रही। शुरुआती फिल्मों के फ्लॉप होने के साथ विजय को उनके लुक्स, आवाज और एक्टिंग के लिए आलोचना सहनी पड़ी। उस दौर की कई मैगजीन्स में लिखा गया कि वह हीरो मटेरियल नहीं हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय ने बाद में कहा था कि लोग उनके लुक्स और आवाज का मजाक उड़ाते थे। एक्टिंग छोड़ने तक का मन बना लिया था। विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि इंडस्ट्री के कई लोगों ने उन्हें लॉन्च करने के फैसले पर सवाल उठाए थे। लगातार आलोचना से विजय इतने परेशान हो गए थे कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन परिवार, खासकर उनके पिता ने उन्हें हिम्मत दी और मेहनत जारी रखने की सलाह दी। बहन की मौत ने बदल दिया स्वभाव विजय की जिंदगी में बहन विद्या की मौत सबसे बड़ा भावनात्मक झटका मानी जाती है। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, पहले विजय काफी शरारती थे, लेकिन बहन के निधन के बाद उनमें गंभीरता आ गई। इसी दौर में उनका फिल्मों और किताबों की तरफ झुकाव बढ़ा। कई फिल्म समीक्षकों का मानना है कि उनकी फिल्मों में दिखाई देने वाली इमोशनल डेप्थ उनके निजी संघर्षों से जुड़ी रही। इंडस्ट्री में शुरुआती रिजेक्शन और आलोचना के बावजूद विजय टूटे नहीं। उन्होंने डांस, स्क्रीन प्रेजेंस, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी पर लगातार मेहनत की। यही मेहनत आगे चलकर उनकी पहचान बनी। विजय की फिल्मों में अक्सर आम जनता, सिस्टम और सामाजिक मुद्दों से जुड़े मैसेज देखने को मिलते हैं। ‘लवर बॉय’ से बने फैमिली स्टार 1996 में रिलीज हुई ‘पूवे उनाक्कागा’ विजय के करियर का पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। यह उनके करियर की पहली बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म थी। इस रोमांटिक-ड्रामा फिल्म ने विजय को तमिल सिनेमा का बड़ा स्टार बना दिया और उनकी छवि स्थापित रोमांटिक हीरो की बन गई। वह फैमिली ऑडियंस और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए। इसके बाद उन्होंने कई रोमांटिक और फैमिली फिल्में कीं। धीरे-धीरे उनकी इमेज लवर बॉय स्टार के रूप में बनने लगी। उस दौर में विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी सरलता और साफ छवि मानी जाती थी। वह बाकी स्टार्स की तरह ज्यादा विवादों में नहीं रहते थे और मीडिया से सीमित बातचीत करते थे। बिहाइंडवुड्स के एक पुराने इंटरव्यू में विजय ने कहा था- ‘मैं ज्यादा बोलने वाला इंसान नहीं हूं।’ यही रिजर्व्ड पर्सनैलिटी आगे चलकर उनकी पब्लिक इमेज का अहम हिस्सा बनी। घिल्ली और थुप्पाक्की ने बनाया ‘मास सुपरस्टार’ 2003 की थिरुमलाई और 2004 की ब्लॉकबस्टर घिल्ली ने विजय की इमेज पूरी तरह बदल दी। अब वह सिर्फ रोमांटिक हीरो नहीं रहे, बल्कि मास एक्शन स्टार बन गए। उनकी एंट्री, डांस स्टेप्स और पंच डायलॉग्स युवाओं के बीच लोकप्रिय होने लगे। इसके बाद थुप्पाक्की, मर्सल, मास्टर और लियो जैसी फिल्मों ने उनके स्टारडम को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। खास बात यह रही कि विजय ने आलोचनाओं का जवाब विवादों से नहीं दिया। उन्होंने अपने काम से लोगों की सोच बदली।

Water Crisis 2026; Summer Nautapa Water Shortage Storage Tips And Methods

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35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक गर्मियों में तेज धूप और पसीने की वजह से प्यास ज्यादा लगती है। साथ ही नहाने, खाना पकाने और साफ-सफाई जैसे रोजमर्रा के कामों में भी पानी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में सही तरीके से पर्याप्त मात्रा में पानी स्टोर करना जरूरी हो जाता है। थोड़ी सी लापरवाही से नहाने, खाना पकाने और साफ-सफाई जैसे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि थोड़ी-सी प्लानिंग और कुछ आसान आदतों से इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज हम पानी को सही तरीके से स्टोर करने के आसान टिप्स समझेंगे। साथ ही जानेंगे- गर्मियों में पानी की किल्लत क्यों हाेती है? गर्मियों में घर में कितने पानी का स्टोरेज होना चाहिए? एक्सपर्ट: रामबाबू तिवारी, जल संरक्षण विशेषज्ञ, 75+ तालाबों को पुनर्जीवित करने वाले एक्टिविस्ट सवाल- गर्मियों में पानी की किल्लत क्यों हाेती है? जवाब– इसके कई कारण हैं- डेली खाने-पीने, नहाने, कूलर में डालने और खेती के कामों में पानी की खपत बढ़ जाती है। शहरों में एक साथ ज्यादा पानी इस्तेमाल होने से सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। जरूरत से ज्यादा बोरवेल और ट्यूबवेल चलाने से ग्राउंड वाटर सोर्स नीचे चला जाता है। बारिश कम होने और लगातार पानी की खपत से ग्राउंड वाटर सोर्स सीमित हो जाते हैं। कई घरों में पर्याप्त पानी स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती तो समस्या होती है। सवाल- गर्मियों में पानी स्टोर करना क्यों जरूरी है? जवाब- गर्मियों में पानी की जरूरत बढ़ती है, लेकिन सप्लाई कम होती है। इसलिए पानी स्टोर करने से मदद मिलती है, जैसे- गर्मी में प्यास ज्यादा लगती है। इसलिए घर में एक्स्ट्रा पीने का पानी रखना चाहिए। नहाने, खाना बनाने और साफ-सफाई जैसे जरूरी काम के लिए भी पानी स्टोर करना जरूरी है। पाइपलाइन खराब होने, बिजली सप्लाई बाधित होने या अन्य इमरजेंसी में स्टोर किया पानी बैकअप का काम करता है। बार-बार पानी भरने की परेशानी से बचने और सभी जरूरतें बिना तनाव के पूरी करने के लिए पानी स्टोर करके रखना जरूरी है। सवाल- गर्मियों में घर में कितने पानी का स्टोरेज होना चाहिए? जवाब- जल संरक्षण विशेषज्ञ रामबाबू तिवारी बताते हैं कि गर्मियों में पानी का स्टोरेज परिवार के सदस्यों की संख्या और जरूरत पर निर्भर करता है। एक व्यक्ति को पीने से लेकर बेसिक इस्तेमाल तक औसतन 100-135 लीटर पानी की जरूरत होती है। ड्रिंकिंग वॉटर औसतन 5-7 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से स्टोर करना चाहिए। अचानक सप्लाई बंद होने की स्थिति को देखते हुए हर घर में 2-3 दिन का पानी स्टोर होना चाहिए। अगर घर में 4 लोग हैं तो रोज लगभग 500-600 लीटर पानी लग सकता है। ऐसे में कम-से-कम 1000-1500 लीटर स्टोरेज रखना सुरक्षित माना जाता है। अगर कूलर, गार्डनिंग या ज्यादा पानी वाले काम हैं तो स्टोरेज क्षमता और बढ़ानी चाहिए। सवाल- पानी स्टोर करने के सही तरीके क्या हैं? जवाब- पानी स्टोर करते समय साफ-सफाई का खास ख्याल रखना जरूरी है, ताकि पानी दूषित न हो। पानी हमेशा साफ, ढके हुए और फूड-ग्रेड बर्तनों में स्टोर करना चाहिए। स्टोरेज कंटेनर को नियमित रूप से धोना और सुखाना जरूरी है, ताकि उसमें बैक्टीरिया या काई न जमे। वाटर स्टोरेज का सही तरीका ग्राफिक में देखिए- सवाल- पानी कितने समय तक स्टोर किया जा सकता है? जवाब- साफ और ढके हुए कंटेनर में रखा पानी आमतौर पर 1-2 दिन तक सुरक्षित रहता है। ध्यान रखने वाली बातें- पीने का पानी साफ और ढके हुए बर्तन में सीमित समय तक ही स्टोर करना चाहिए। आमतौर पर फिल्टर या उबला हुआ पानी 24 से 48 घंटे तक सुरक्षित माना जाता है। इसके बाद उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। अगर पानी का स्वाद, स्मेल या रंग बदलने लगे, तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पानी स्टोर करने वाले बर्तन की नियमित सफाई जरूरी है। सवाल- पानी दूषित होने से कैसे बचाएं? जवाब- दूषित पानी पीने से डायरिया, उल्टी या इन्फेक्शन जैसी समस्याओं का रिस्क बढ़ता है। इसलिए पानी को हमेशा साफ बर्तनों में स्टोर करें और लंबे समय से रखा पानी इस्तेमाल करने से बचें। साथ ही ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें- सवाल- डेली लाइफ में पानी की बचत कैसे करें? जवाब- रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके काफी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है। बेवजह नल खुला न छोड़ें, लीकेज तुरंत ठीक कराएं और जरूरत के अनुसार ही पानी इस्तेमाल करें। इसके अलावा ग्राफिक में दी गई कुछ बाताें का ध्यान रखें- सवाल- क्या प्लास्टिक कंटेनर में लंबे समय तक पानी स्टोर करना सही है? जवाब- नहीं, केवल फूड-ग्रेड प्लास्टिक ही सुरक्षित होता है। धूप में रखने से केमिकल रिलीज हो सकते हैं। बार-बार इस्तेमाल से बोतल खराब हो सकती है। लंबे समय के लिए स्टील या कांच बेहतर विकल्प है। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- टेंपरेचर बढ़ने पर बढ़ता गुस्सा, चिड़चिड़ापन:समझें ब्रेन और इमोशंस पर हीट का असर, जानें दिमाग को कैसे शांत रखें ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गर्मियों में मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के केस 8% तक बढ़ जाते हैं। डिहाइड्रेशन, खराब स्लीप पैटर्न और डेली रूटीन में बदलाव मिलकर ‘मेंटल बैलेंस’ को प्रभावित करते हैं। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

IPL 2026 | Gujarat Titans Beat CSK, Shubman Gill 6000 Runs, Kamboj Record Sixes

IPL 2026 | Gujarat Titans Beat CSK, Shubman Gill 6000 Runs, Kamboj Record Sixes

अहमदाबाद15 मिनट पहले कॉपी लिंक गुजरात टाइटंस ने IPL 2026 के 66वें मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को 89 रन से हरा दिया। यह चेन्नई की IPL इतिहास में सबसे बड़ी हार रही। मैच में शुभमन गिल और साई सुदर्शन ने पहली विकेट के लिए 10वीं बार शतकीय साझेदारी की। अंशुल कंबोज के नाम एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के खाने का अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हुआ। चेन्नई-गुजरात मैच के टॉप रिकॉर्ड्स-मोमेंट्स… 1. दिग्गजों के क्लब में पहुंची युवा भारतीय जोड़ी गुजरात के ओपनर्स गिल और सुदर्शन ने पहले विकेट के लिए 125 रनों की साझेदारी की। इन दोनों ने IPL में 10वीं बार 100 या इससे रनों की साझेदारी की है। टी-20 क्रिकेट में इससे पहले विराट कोहली-एबी डिविलियर्स, बाबर आजम-मोहम्मद रिजवान और क्रिस गेल-कोहली ही 10 बार सेंचुरी पार्टनरशिप कर पाए हैं। गिल और सुदर्शन की ओपनिंग जोड़ी ने मेंस टी-20 क्रिकेट में सबसे कम 46 पारियों में 10वीं शतकीय साझेदारी की। दोनों ने चेन्नई के खिलाफ 125 रन जोड़े। क्रिस गेल और विराट कोहली की जोड़ी 63 पारियों में 10 सेंचुरी पार्टनरशिप के साथ दूसरे नंबर पर है। 2. गिल ने टी-20 में 6 हजार रन पूरे किए गिल ने मेंस टी-20 क्रिकेट में 6 हजार रन पूरे किए। उन्होंने 185 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की। गिल सबसे तेज 6 हजार रन पूरे करने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में 7वें नंबर पर हैं। क्रिस गेल 162 पारियों के साथ पहले नंबर पर हैं। 3. IPL इतिहास की दूसरी सबसे सफल ओपनिंग जोड़ी IPL में बतौर ओपनिंग जोड़ी सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में गिल और सुदर्शन दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। दोनों ने 1942 रन जोड़े हैं। उन्होंने विराट कोहली और फाफ डु प्लेसिस की जोड़ी को पीछे छोड़ा। डेविड वॉर्नर और शिखर धवन 2220 रन के साथ टॉप पर हैं। 4. गिल-सुदर्शन ने लगातार दूसरे सीजन 600+ रन बनाए गिल और सुदर्शन ने IPL के लगातार दूसरे सीजन में 600 से ज्यादा रन बनाए। दोनों ने चेन्नई के खिलाफ फिफ्टी लगाई। गुजरात के ओपनर्स ने 2025 में भी 600 से ज्यादा रन बनाए थे। लगातार सबसे ज्यादा सीजन यह आंकड़ा पार करने वालों में क्रिस गेल, डेविड वार्नर, केएल राहुल और विराट कोहली शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने लगातार 3 सीजन 600 से ज्यादा रन बनाए थे। 5. सुदर्शन ने लगातार पांचवी फिफ्टी लगाई सुदर्शन ने IPL 2026 में लगातार 5वीं फिफ्टी लगाई। चेन्नई के खिलाफ उन्होंने 84 रन बनाए। सुदर्शन यह कीर्तिमान हासिल करने वाले चौथे खिलाड़ी हैं। उनसे पहले वीरेंद्र सहवाग, जोस बटलर और डेविड वॉर्नर लगातार 5-5 फिफ्टी लगा चुके हैं। 6. कंबोज ने एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स दिए कंबोज IPL में एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के देने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनकी गेंद पर इस सीजन 34 छक्के लगे हैं। इस लिस्ट में गुजरात के राशिद खान 33 छक्कों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। 7. सिराज ने पारी की पहली गेंद पर विकेट लिया मोहम्मद सिराज ने चेन्नई की पहली गेंद पर ही संजू सैमसन को कैच आउट कराया। वे पारी की पहली गेंद पर विकेट लेने वाले गुजरात के दूसरे गेंदबाज बने। उनसे पहले मोहम्मद शमी यह कारनामा दो बार कर चुके हैं। शमी ने 2022 में केएल राहुल और 2023 में फिल सॉल्ट को पहली गेंद पर आउट किया था। 8. चेन्नई की IPL में सबसे बड़ी हार गुजरात से मिली 89 रन की हार चेन्नई की IPL इतिहास की सबसे बड़ी हार रही। इससे पहले 2013 में मुंबई ने उसे 60 रन से हराया था। 9. गुजरात ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की गुजरात की 89 रन की जीत IPL इतिहास में रन के लिहाज से टीम की सबसे बड़ी जीत रही। इससे पहले टीम की सबसे बड़ी जीत इसी साल सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 82 रन की थी। यहां से टॉप-5 मोमेंट्स… 1. सैमसन को चोट की वजह से बाहर जाना पड़ा गुजरात की पारी के दूसरे ओवर में संजू सैमसन इंजरी के कारण मैदान से बाहर चले गए। स्पेंसर जॉनसन की तीसरी गेंद लेग-स्टंप से काफी बाहर थी। साई सुदर्शन फ्लिक करने गए, लेकिन गेंद बल्लेबाज और विकेटकीपर को छकाते हुए बाउंड्री के बाहर चली गई। बॉल रोकने के लिए डाइव लगाते समय संजू चोटिल हो गए। इसके बाद फिजियो उन्हें मैदान से बाहर ले गए। फिर उर्विल पटेल ने विकेटकीपिंग संभाली। संजू दूसरी पारी में बैटिंग के लिए उतरे, हालांंकि पहली गेंद पर आउट हुए। 2. शिवम दुबे ने पीछे भागते हुए कैच पकड़ा पहली पारी के 13वें ओवर में शिवम दुबे ने पीछे भागते हुए कैच पकड़ा। जॉनसन के ओवर की दूसरी गेंद पर गिल का बल्ले का बाहरी किनारा लगा और गेंद मिड-विकेट की ओर गई। वहां शिवम ने पीछे भागते हुए कैच लपका। शिवम ने 64 रन बनाकर खेल रहे शुभमन का कैच पकड़ा। 3. राहुल तेवतिया पहली गेंद पर ही रनआउट हुए गुजरात की पारी के 19वें ओवर में राहुल तेवतिया पहली गेंद पर ही रनआउट हो गए। कंबोज की दूसरी गेंद पर सुदर्शन का विकेट गिरने के बाद तेवतिया बल्लेबाजी के लिए उतरे। उन्होंने पहली गेंद मिड-ऑफ की ओर खेलकर सिंगल लेने की कोशिश की। ऋतुराज गायकवाड ने नॉन-स्ट्राइकर एंड पर डायरेक्ट थ्रो मारा। रिप्ले में तेवतिया क्रीज से कुछ इंच दूर दिखे और बिना खाता खोले लौटना पड़ा। गायकवाड के डायरेक्ट थ्रो पर बिना खाता खोले तेवतिया पवेलियन लौटे। 4. गायकवाड सिक्स लगाने के बाद अगली गेंद पर बोल्ड हुए दूसरी पारी के तीसरे ओवर में गायकवाड ने मोहम्मद सिराज की पहली गेंद पर स्क्वायर लेग के ऊपर से सिक्स लगाया। सिराज ने अगली ही गेंद पर गायकवाड को बोल्ड कर दिया। गायकवाड 16 रन बनाकर आउट हुए। सिक्स लगाने के बाद अगली गेंद पर सिराज ने गिल्लियां बिखेर दी। 5. रबाडा ने लगातार दो गेंद पर विकेट लेकर चेन्नई की पारी समेटी पारी के 14वें ओवर में कगिसो रबाडा ने दो गेंदों पर दो विकेट लिए। उन्होंने दूसरी गेंद पर नूर अहमद को कॉट एंड बोल्ड किया। इसके बाद चौथी गेंद पर स्पेंसर जॉनसन को जोस बटलर के हाथों कैच कराया। इसके साथ ही चेन्नई ऑलआउट हो गई और गुजरात ने जीत दर्ज की। रबाडा ने नूर का अपनी ही

Darsheel Safary interview, talked about aamir khan and taare zameen par

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1 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक तारे जमीन से स्टारडम हासिल करने वाले दर्शील सफारी जल्द ही फिल्म कृष्णा और चिट्ठी में नजर आने वाले हैं। फिल्म 29 मई को रिलीज हो रही है। हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दर्शील ने अपने करियर, परफेक्शन के दबाव, आमिर खान से मिली सीख, थिएटर, सोशल मीडिया और जिंदगी के संघर्षों पर खुलकर बात की। दर्शील ने बताया कि ‘तारे जमीन पर’ की सफलता के बाद उन्होंने खुद पर ही बहुत ज्यादा दबाव बना लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक वह फेल होने के डर में जीते रहे, लेकिन थिएटर ने उन्हें दोबारा खुद से जोड़ा। सवाल- अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं, तारे जमीन पर से जो आपने छाप छोड़ी, क्या प्रेशर था कि हर परफॉर्मेंस वैसी ही हो? जवाब- 100%। वो कहते हैं ना कि आपने जिस चीज के लिए अपनी पूरी लाइफ लगाई हो, 20-25 साल काम किया हो, पूरी जी-जान लगाई और लोगों ने उसे पसंद किया, लेकिन मेरे लिए ये सब पहले ही हो गया। पहली ही बॉल पर सिक्स जैसा। बस मुझे बोला गया था कि इसको सिक्स बोलते हैं तो मैंने बल्ला घुमा दिया और हो गया। फिर मेरे लिए एक रिवर्स अंडरस्टैंडिंग शुरू होने लगी, क्योंकि फिर सब कुछ वैसा ही करना था। वो मैच कैसे करते हैं। तब मैं कहीं भी जाता था, जिनसे भी मिलता था, मैं उनके घर का बेटा बन गया था। तो अब मुझे ये मैच करना था, एक्सपेक्टेशन बैठ गई। आप मंजिल तक पहुंचे थे, अब आपको दोबारा वही सब हासिल करना है। मेरे लिए पिछले 15 साल डिस्कवरी के रहे। एक्सेप्ट करने के रहे। जो बातें 15 साल पहले समझ नहीं आती थीं वो फिर मुझे बाद में समझ आने लग गईं। पेंडमिक के बाद थोड़ा कॉन्फिडेंस फिर से शुरू हुआ कि अब मैं शुरुआत कर सकता हूं चीजों को ट्राई करने में, फिर से मुझे फिल्मों में काम मिलने लगा। वेब सीरीज में ज्यादा एड्स में थोड़ा कम काम किया। अब लगा कि हां अब मैं ट्रैक पर आ चुका हूं। ये फ्लो मिला है, ये मोमेंटम मिला है, इस पर अभी और कैसे बिल्ड कर सकता हूं और बैकग्राउंड नॉइज बंद कर दिया मैंने। सवाल- बैकग्राउंड नॉइस जो है कहीं ना कहीं वो आपके ऊपर लोड ज्यादा डालता गया? जवाब- बिल्कुल। और ये प्रेशर अनफॉर्चूनेटली मुझे है, हाल ही में मैं सोच रहा था, किसी ने मुझ पर वर्बली डाला ही नहीं है। ना मेरे पेरेंट्स, ना मेरे टीचर्स, ना मेरे दोस्त। किसी ने नहीं है। मुझसे सिर्फ ये सवाल पूछा जाता था कि अगला क्या है। मैं खुद ही अपने आप पर वो प्रेशर डालता था। आप फेलियर से डर जाते हो कि मुझे अभी फेल होना नहीं है हरगिज। अब कोशिश नहीं करूंगा तो पता नहीं चलेगा फेलियर क्या है, सक्सेस क्या है। तो ये सारी चीजें हो रही थीं और बहुत टाइम निकल गया उसमें। कई साल गए। उसी दौरान मैं थिएटर कर रहा था। तो थिएटर में तो और क्रिटिकल हो गया था। मैंने अपना वो बैकग्राउंड नॉइस जो आपको बता रहा हूं उस पर थोड़ा कंट्रोल लाना शुरू किया। और जब अच्छा कंट्रोल आ गया तो लाइफ बहुत बेहतरीन हो गई मेरे लिए। सवाल- आपने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ काम किया है, परफेक्शन वाला जो प्रेशर है उसने आपको कहीं ना कहीं एक गिल्ट भी दिया। जवाब- 100%। ये बड़ी डरावनी सी चीज होती है। एक बात मानी जाती है कि परफेक्शन का मतलब है कि आप एक भी एरर नहीं होने देंगे और आपका ऑब्जरवेशन इतना स्ट्रांग है। अब ये मैं नहीं कहूंगा कि मैंने आमिर सर से सीखा क्योंकि मैं बहुत छोटा था ये समझने के लिए कि परफेक्शन का मतलब भी क्या होगा, स्पेलिंग भी नहीं पता होगा। लेकिन बिल्कुल कहीं ना कहीं एक स्टैण्डर्ड सेट हो गया है दिमाग में कि मुझे यहां पहुंचना है और मुझे ये करना है। अब ये करना कैसे है, क्या करना है उसका कोई गाइडेंस नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। वो आपको खुद को ही डिस्कवर करना है। थिएटर करते हुए रियलाइज हुआ कि मैंने इतना टाइम निकाल दिया है। मां ने मुझे गाइड किया कि हर चीज का एक सही टाइम आता है। सवाल- वो लम्हा याद है जब पहली बार सैकड़ों लोगों के बीच में आप सेलेक्ट हुए थे? जवाब- नहीं। मैंने जब ऑडिशन दिया था तब मुझे ऑडिशन का मतलब नहीं पता था। मुझे लगा शूटिंग चालू हो गई है। मैं स्कूल यूनिफॉर्म में था। मैंने सबको बोलना शुरू कर दिया था कि मैं फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं। सवाल- क्या क्या बताया गया था ऑडिशन मैं जाने से पहले? जवाब- यही कि सीन है, ये लाइंस हैं तुम्हारी, तुम ऐसा सोचो कि तुम अब विंडो के बाहर देख रहे हो और तुम्हें कुछ एक बहुत प्यारी सी मछली दिख रही है कोई तालाब या कोई पॉटहोल में और उसमें पानी भरा हुआ है। सवाल- खिड़की से देखने वाले सीन की इमेज आज भी याद है जवाब- मैं लड़का ही ऐसा था जो बहुत डिस्ट्रैक्टेड था और मैं घूम जाता था इन चीजों में। तो मेरे लिए बहुत आसान था। फिर कहा टीचर डांटने वाली है तो तुम देख लेना क्या है। मुझे इसका कोई नॉलेज नहीं था। मुझे किसी ने चिल्लाया, मैंने बोला अरे भाई चिल्ला क्यों रहा है? क्या हो गया? मेरे लिए वो टीचर सीन फिल्म नहीं था। जेन्युइन इमोशन था। फिल्म मेरी परफॉरमेंस मेरे अकेले की नहीं थी। वो आमिर सर की भी थी, अमोल गुप्ते सर का भी थी। मैं ये भी मानता हूं कि कहीं ना कहीं सभी आर्टिस्ट की थी जिन्होंने सपोर्ट दिया है। सवाल- पहली बार अमोल गुप्ते से कब मुलाकात हुई? जवाब- ये बहुत फनी था। मैं शामक दावर की डांस क्लास में था। उनकी टीम के दो लोग थे। उन्होंने हाय कहा। वैसे तो अनजान लोगों को हाय नहीं बोलते, लेकिन मैं उल्टा था। मैं खुद अनजान लोगों से बात करने जाता था। मैं चला गया अमोल जी से बात करने। इतने स्वीटहार्ट पर्सन हैं, वो मुझे कहते थे दर्शील यार मैं तुझे

Ram Charan Interview, Peddi Actor Talk Aboout Sprituality, family and devoation, said will never join politics

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2 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक ग्लोबल स्टार राम चरण 4 जून को रिलीज होने वाली फिल्म पेद्दी में नजर आने वाले हैं। फिल्म रिलीज से पहले राम चरण ने दैनिक भास्कर से बातचीत में स्प्रिचुएलिटी, अनुशासन और राजनीति पर बात की है। जब राम चरण से पूछा गया कि क्या उन्हें कभी पिता की लीगेसी आगे बढ़ाने का प्रेशर महसूस होता है, तो उन्होंने कहा कि वो एक फिल्मी परिवार से आते हैं और उनके लिए ये आम बात है। सवाल- आप 41 दिनों तक अयप्पा दीक्षा लेते हैं, नंगे पांव चलना, काले कपड़े पहनना। ग्लोबल स्टार के तौर पर इस कनेक्शन को बढ़ाने के लिए क्या करते हैं? राम चरण- मैं खुश हूं कि सबको ये पसंद आ रहा है। मैं सलाह दूंगा कि सबको अयप्पा दीक्षा जरूर लेनी चाहिए। ये किसी धर्म या गॉड के बारे में नहीं है, ये हमारे जीने का तरीका है। ये सबसे अनुशासित तरीका है जिंदगी का। इसलिए हर साल 2 बार करता हूं, जिससे साल भर एनर्जी रहती है। ये पूरी तरह बैलेंस करता है। सवाल- हनुमान जी के भक्त हैं, आप? राम चरण- मेरे नाम ही हनुमान है, हनुमान मेरे लिए भाई, दोस्त, फादर, मेरे लिए सब कुछ हैं। सवाल- उपासना जो आपका सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम हैं, वो कहती हैं कि आप बहुत अनुशासित हैं, कभी ऐसा नहीं लगता कि ये डेडिकेशन छोड़कर आम दिन रहे? राम चरण- इतना भी डिसिप्लिन नहीं हूं। हर दिन लगता है कि लेट उठूं, लेट सोऊं फिल्म देखकर। रोज छोले भटूरे खाने का मन होता है, बिरयानी खाने का मन होता है। लेकिन क्या करूं, प्रोड्यूसर ऐसा करने नहीं देते। चिरंजीवी सर, डैड घर में रहते हैं, तो सोने नहीं देते, पूछते हैं जिम क्यों नहीं आया। तो अगर हमें कोई पुश करने वाला होता है तो रिलेक्स करने का कोई टाइम नहीं होता। पत्नी उपासना के साथ राम चरण की तस्वीर। सवाल- चिरंजीवी क्या आपको फिल्म से जुड़ी टिप्स देते हैं? राम चरण- बहुत कम टिप्स देते हैं। वो मानते हैं कि हर एक्टर की अपनी जर्नी होती है। जब उन्हें कुछ बहुत पसंद आता है, तब ही वो बात करते हैं, वर्ना उनका मानना है कि मैं खुद अपनी राह चुनुंगा। हर एक्टर के लिए डिसिप्लिन जरूरी है। दुनिया के हर सक्सेसफुल इंसान और एक्टर के लिए डिसिप्लिन जरूरी है। अगर डिसिप्लिन नहीं है तो कामयाबी जल्दी धुंधली हो जाती है। सवाल- आमतौर पर पिता हमेशा सामने तारीफ करने से कतराते हैं, लेकिन दूसरों के सामने करते हैं, क्या आपके साथ भी ऐसा ही है? राम चरण- मेरे पिता थोड़े अलग हैं। जो बच्चों को हमेशा बोलते रहते हैं कि अच्छा काम किया। बुरा काम किया तो कम बोलते हैं। वो तारीफ हमेशा करते हैं। सवाल- पिता का कोई ऐसा कॉम्प्लिमेंट, जो हमेशा याद रहेगा? राम चरण- ये कुश्ती की जो बॉडी बनी है, वो फिल्म के लिए ही मत रखना, हमेशा ऐसे ही रहना। वो वाकई बहुत तारीफ करते हैं, जो मैंने 14 महीने की मेहनत की है उसकी। ये वो चीज है, जिसकी पिता सराहना करते हैं। सवाल- पिता की लीगेसी आगे बढ़ाने के लिए प्रेशर फील करते हैं? राम चरण- फ्रैंकली कभी नहीं। हम लोग एंटरटेनमेंट फैमिली में पैदा हुए हैं। तो हमारे लिए ये कोई नई चीज नहीं थी। हम सिर्फ अच्छे काम के लिए तड़पते हैं, स्टारडम हमें पुश नहीं करता। सवाल- आपके लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट क्या है? राम चरण- मगधीरा और रंगस्थलम, इन दो फिल्मों ने मुझे एक्टर के तौर पर बनाया। फिल्म मगधीरा 2009 में रिलीज हुई थी। सवाल- आपका परिवार राजनीति में भी बड़ा नाम है, विजय को भी देखें, आपके अंकल (पवन कल्याण) भी आंध्रप्रदेश सरकार में रहे, फैंस को उम्मीद है आप भी राजनीति में आएं? राम चरण- नहीं नहीं। बिल्कुल नहीं। मैं बस एंटरटेनमेंट फील्ड में बेस्ट बनना चाहता हूं। जाहिर तौर पर मेरे डैड और अंकल ने पॉलिटिक्स में कदम रखा, लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहता। मेरे लिए दो नांव में सवार होना बहुत मुश्किल है। फिल्म पेद्दी के बारे में- फिल्म पेद्दी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। इससे पहले रविवार को मुंबई के बीकेसी में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था, जहां फिल्म की पूरी स्टारकास्ट मौजूद रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔