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Darsheel Safary interview, talked about aamir khan and taare zameen par

Darsheel Safary interview, talked about aamir khan and taare zameen par

5 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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तारे जमीन से स्टारडम हासिल करने वाले दर्शील सफारी जल्द ही फिल्म कृष्णा और चिट्ठी में नजर आने वाले हैं। फिल्म 29 मई को रिलीज हो रही है। हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दर्शील ने अपने करियर, परफेक्शन के दबाव, आमिर खान से मिली सीख, थिएटर, सोशल मीडिया और जिंदगी के संघर्षों पर खुलकर बात की।

दर्शील ने बताया कि ‘तारे जमीन पर’ की सफलता के बाद उन्होंने खुद पर ही बहुत ज्यादा दबाव बना लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक वह फेल होने के डर में जीते रहे, लेकिन थिएटर ने उन्हें दोबारा खुद से जोड़ा।

सवाल- अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं, तारे जमीन पर से जो आपने छाप छोड़ी, क्या प्रेशर था कि हर परफॉर्मेंस वैसी ही हो?

जवाब- 100%। वो कहते हैं ना कि आपने जिस चीज के लिए अपनी पूरी लाइफ लगाई हो, 20-25 साल काम किया हो, पूरी जी-जान लगाई और लोगों ने उसे पसंद किया, लेकिन मेरे लिए ये सब पहले ही हो गया।

पहली ही बॉल पर सिक्स जैसा। बस मुझे बोला गया था कि इसको सिक्स बोलते हैं तो मैंने बल्ला घुमा दिया और हो गया।

फिर मेरे लिए एक रिवर्स अंडरस्टैंडिंग शुरू होने लगी, क्योंकि फिर सब कुछ वैसा ही करना था। वो मैच कैसे करते हैं। तब मैं कहीं भी जाता था, जिनसे भी मिलता था, मैं उनके घर का बेटा बन गया था।

तो अब मुझे ये मैच करना था, एक्सपेक्टेशन बैठ गई। आप मंजिल तक पहुंचे थे, अब आपको दोबारा वही सब हासिल करना है। मेरे लिए पिछले 15 साल डिस्कवरी के रहे। एक्सेप्ट करने के रहे। जो बातें 15 साल पहले समझ नहीं आती थीं वो फिर मुझे बाद में समझ आने लग गईं।

पेंडमिक के बाद थोड़ा कॉन्फिडेंस फिर से शुरू हुआ कि अब मैं शुरुआत कर सकता हूं चीजों को ट्राई करने में, फिर से मुझे फिल्मों में काम मिलने लगा। वेब सीरीज में ज्यादा एड्स में थोड़ा कम काम किया।

अब लगा कि हां अब मैं ट्रैक पर आ चुका हूं। ये फ्लो मिला है, ये मोमेंटम मिला है, इस पर अभी और कैसे बिल्ड कर सकता हूं और बैकग्राउंड नॉइज बंद कर दिया मैंने।

सवाल- बैकग्राउंड नॉइस जो है कहीं ना कहीं वो आपके ऊपर लोड ज्यादा डालता गया?

जवाब- बिल्कुल। और ये प्रेशर अनफॉर्चूनेटली मुझे है, हाल ही में मैं सोच रहा था, किसी ने मुझ पर वर्बली डाला ही नहीं है। ना मेरे पेरेंट्स, ना मेरे टीचर्स, ना मेरे दोस्त। किसी ने नहीं है। मुझसे सिर्फ ये सवाल पूछा जाता था कि अगला क्या है।

मैं खुद ही अपने आप पर वो प्रेशर डालता था। आप फेलियर से डर जाते हो कि मुझे अभी फेल होना नहीं है हरगिज। अब कोशिश नहीं करूंगा तो पता नहीं चलेगा फेलियर क्या है, सक्सेस क्या है। तो ये सारी चीजें हो रही थीं और बहुत टाइम निकल गया उसमें। कई साल गए।

उसी दौरान मैं थिएटर कर रहा था। तो थिएटर में तो और क्रिटिकल हो गया था। मैंने अपना वो बैकग्राउंड नॉइस जो आपको बता रहा हूं उस पर थोड़ा कंट्रोल लाना शुरू किया। और जब अच्छा कंट्रोल आ गया तो लाइफ बहुत बेहतरीन हो गई मेरे लिए।

सवाल- आपने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ काम किया है, परफेक्शन वाला जो प्रेशर है उसने आपको कहीं ना कहीं एक गिल्ट भी दिया।

जवाब- 100%। ये बड़ी डरावनी सी चीज होती है। एक बात मानी जाती है कि परफेक्शन का मतलब है कि आप एक भी एरर नहीं होने देंगे और आपका ऑब्जरवेशन इतना स्ट्रांग है। अब ये मैं नहीं कहूंगा कि मैंने आमिर सर से सीखा क्योंकि मैं बहुत छोटा था ये समझने के लिए कि परफेक्शन का मतलब भी क्या होगा, स्पेलिंग भी नहीं पता होगा। लेकिन बिल्कुल कहीं ना कहीं एक स्टैण्डर्ड सेट हो गया है दिमाग में कि मुझे यहां पहुंचना है और मुझे ये करना है। अब ये करना कैसे है, क्या करना है उसका कोई गाइडेंस नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। वो आपको खुद को ही डिस्कवर करना है।

थिएटर करते हुए रियलाइज हुआ कि मैंने इतना टाइम निकाल दिया है। मां ने मुझे गाइड किया कि हर चीज का एक सही टाइम आता है।

सवाल- वो लम्हा याद है जब पहली बार सैकड़ों लोगों के बीच में आप सेलेक्ट हुए थे?

जवाब- नहीं। मैंने जब ऑडिशन दिया था तब मुझे ऑडिशन का मतलब नहीं पता था। मुझे लगा शूटिंग चालू हो गई है। मैं स्कूल यूनिफॉर्म में था। मैंने सबको बोलना शुरू कर दिया था कि मैं फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं।

सवाल- क्या क्या बताया गया था ऑडिशन मैं जाने से पहले?

जवाब- यही कि सीन है, ये लाइंस हैं तुम्हारी, तुम ऐसा सोचो कि तुम अब विंडो के बाहर देख रहे हो और तुम्हें कुछ एक बहुत प्यारी सी मछली दिख रही है कोई तालाब या कोई पॉटहोल में और उसमें पानी भरा हुआ है।

सवाल- खिड़की से देखने वाले सीन की इमेज आज भी याद है

जवाब- मैं लड़का ही ऐसा था जो बहुत डिस्ट्रैक्टेड था और मैं घूम जाता था इन चीजों में। तो मेरे लिए बहुत आसान था। फिर कहा टीचर डांटने वाली है तो तुम देख लेना क्या है। मुझे इसका कोई नॉलेज नहीं था। मुझे किसी ने चिल्लाया, मैंने बोला अरे भाई चिल्ला क्यों रहा है? क्या हो गया? मेरे लिए वो टीचर सीन फिल्म नहीं था। जेन्युइन इमोशन था।

फिल्म मेरी परफॉरमेंस मेरे अकेले की नहीं थी। वो आमिर सर की भी थी, अमोल गुप्ते सर का भी थी। मैं ये भी मानता हूं कि कहीं ना कहीं सभी आर्टिस्ट की थी जिन्होंने सपोर्ट दिया है।

सवाल- पहली बार अमोल गुप्ते से कब मुलाकात हुई?

जवाब- ये बहुत फनी था। मैं शामक दावर की डांस क्लास में था। उनकी टीम के दो लोग थे। उन्होंने हाय कहा। वैसे तो अनजान लोगों को हाय नहीं बोलते, लेकिन मैं उल्टा था। मैं खुद अनजान लोगों से बात करने जाता था।

मैं चला गया अमोल जी से बात करने। इतने स्वीटहार्ट पर्सन हैं, वो मुझे कहते थे दर्शील यार मैं तुझे आज से दर्शील नहीं बुलाऊंगा। मैं बोला क्या बुलाओगे आप? उन्होंने बोला मैं तुझे उस्ताद बुलाऊंगा। तो मैंने मेरा पेट नेम मेरी स्कूल की बुक में इरेज़ करके उस्ताद लिखना शुरू कर दिया था। मुझे उस्ताद का मतलब भी नहीं पता था तभी।

सवाल- आमिर से फिर दूसरी बार जब मुलाकात हुई, वो कैसा था?

जवाब- ऐसे लगा ही नहीं आमिर सर हैं, कैप, शॉर्ट्स, टीशर्ट, हाय आई एम आमिर। तो मतलब मेरे दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था कि यार आएगी पूरी फौज बॉडीगार्डों की, कैमरा, फोटोग्राफ ये वो वगैरह वगैरह।

मैंने लगान थिएटर में देखी थी, दिल चाहता है थिएटर में देखी थी, मैं सोता था थिएटर में लेकिन मैंने सारी फिल्में देखी हैं।

सवाल- बनी टीथ, जो आपका आइकॉनिक लुक है, क्या उसकी वजह से कभी रिजेक्शन मिला

दर्शील- एडेनोइड्स कोई इन्फेक्शन टाइप सा होता है जिसमें टॉन्सिल इन्फेक्ट हो जाते हैं और उसमें आंखों के नीचे ऐसे काले गड्ढे होते हैं और दांत बाहर होते हैं। तो मुझे एडेनोइड्स था।

फिल्मी दुनिया में स्क्रीन पर भी सही दिखना जरूरी है। अभी उस टीथ के साथ अगर मैं आपको बोलूं एक बहुत इंटेंस पॉलिटिकल रोल प्ले करना है मुझे, लेकिन मैं उसमें फिट नहीं हो सकता। लेकिन अगर मैं अभी बोलूं एक कॉमेडी फिल्म है, तो उसमें फिट हो जाऊंगा। तो मैंने फिर डेंटल प्रोसीजर करा लिया। काफी पेनफुल था।फिर अच्छा लगता है।

सवाल- सेट पर मस्ती करते थे?

जवाब- अरे बहुत, मैं लोगों का वॉकी-टॉकी चुराकर छुप जाता था और हाइड एंड सीक खेलता था उनके साथ। सवाल- आप नेपो किड नहीं हो। कितना मुश्किल होता है सर्वाइव करना?

जवाब- मेरी मां ने थोड़ा बहुत थिएटर और टीवी भी किया है। तो मुझे नहीं पता कि मैं नेपोकिड हूं या नहीं। आपने विल स्मिथ को देखा है विल स्मिथ का जो बेटा है जेडन स्मिथ। वो ओपनली कहता है कि मेरे फादर के शैडो से मैं बाहर निकलूं कैसे भाई? आप मुझे याद ही विल स्मिथ के बेटे से करने वाले हो। मैं भी यही सोचता हूं।

सवाल- इंटरनेशनल प्रोजेक्ट भी आ रहे हैं? मोहित और प्रियदर्शनी के साथ कुछ बताना चाहोगे?

जवाब- मैं इस बारे में ज्यादा नहीं बोल सकता। जो कैरेक्टर मैं प्ले कर रहा हूं सचिन मुंशी, जिनको डिसेबिलिटी है, ड्यूशन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी। उनका जो माइंडसेट है, मैंने उनसे बात की है और उसके बाद में शायद दो घंटा रोया हूं सिर्फ। उनकी माइंडसेट ये है कि आप मुझे दया की नजरों से मत देखो बॉस। दया मत खाओ मुझपे। मैं ठीक हूं मेरी ये कंडीशन है मैंने एक्सेप्ट कर ली है अब देखो मैं क्या करता हूं। और उन्होंने पीएचडी लाई है। वो लाइफ और मौत के बीच में एक सेकंड के फर्क में रहते हैं।

दूसरा इंडो-हॉलीवुड कोलैबोरेशन एक ब्रिटिश प्रोजेक्ट है। जहां मैं एक डीजे प्ले कर रहा हूं 80s 90s का। मैं इसके लिए एक्साइटेड हूं, क्योंकि मुझे म्यूजिक पसंद है।

मैंने पिछले साल एक बॉलीवुड सीरीज देखी थी, उसका कंटीन्यूएशन भी आएगा। मैंने एक साउथ की रीमेक फिल्म भी शूट की है। उसमें प्रसाद ओक सर हैं, कबीर दुहान सिंह हैं, जैन खान दुर्रानी जो मेरे ऑपोजिट को-एक्टर प्ले कर रहे हैं ।

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तारे जमीन से स्टारडम हासिल करने वाले दर्शील सफारी जल्द ही फिल्म कृष्णा और चिट्ठी में नजर आने वाले हैं। फिल्म 29 मई को रिलीज हो रही है। हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दर्शील ने अपने करियर, परफेक्शन के दबाव, आमिर खान से मिली सीख, थिएटर, सोशल मीडिया और जिंदगी के संघर्षों पर खुलकर बात की।

दर्शील ने बताया कि ‘तारे जमीन पर’ की सफलता के बाद उन्होंने खुद पर ही बहुत ज्यादा दबाव बना लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक वह फेल होने के डर में जीते रहे, लेकिन थिएटर ने उन्हें दोबारा खुद से जोड़ा।

सवाल- अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं, तारे जमीन पर से जो आपने छाप छोड़ी, क्या प्रेशर था कि हर परफॉर्मेंस वैसी ही हो?

जवाब- 100%। वो कहते हैं ना कि आपने जिस चीज के लिए अपनी पूरी लाइफ लगाई हो, 20-25 साल काम किया हो, पूरी जी-जान लगाई और लोगों ने उसे पसंद किया, लेकिन मेरे लिए ये सब पहले ही हो गया।

पहली ही बॉल पर सिक्स जैसा। बस मुझे बोला गया था कि इसको सिक्स बोलते हैं तो मैंने बल्ला घुमा दिया और हो गया।

फिर मेरे लिए एक रिवर्स अंडरस्टैंडिंग शुरू होने लगी, क्योंकि फिर सब कुछ वैसा ही करना था। वो मैच कैसे करते हैं। तब मैं कहीं भी जाता था, जिनसे भी मिलता था, मैं उनके घर का बेटा बन गया था।

तो अब मुझे ये मैच करना था, एक्सपेक्टेशन बैठ गई। आप मंजिल तक पहुंचे थे, अब आपको दोबारा वही सब हासिल करना है। मेरे लिए पिछले 15 साल डिस्कवरी के रहे। एक्सेप्ट करने के रहे। जो बातें 15 साल पहले समझ नहीं आती थीं वो फिर मुझे बाद में समझ आने लग गईं।

पेंडमिक के बाद थोड़ा कॉन्फिडेंस फिर से शुरू हुआ कि अब मैं शुरुआत कर सकता हूं चीजों को ट्राई करने में, फिर से मुझे फिल्मों में काम मिलने लगा। वेब सीरीज में ज्यादा एड्स में थोड़ा कम काम किया।

अब लगा कि हां अब मैं ट्रैक पर आ चुका हूं। ये फ्लो मिला है, ये मोमेंटम मिला है, इस पर अभी और कैसे बिल्ड कर सकता हूं और बैकग्राउंड नॉइज बंद कर दिया मैंने।

सवाल- बैकग्राउंड नॉइस जो है कहीं ना कहीं वो आपके ऊपर लोड ज्यादा डालता गया?

जवाब- बिल्कुल। और ये प्रेशर अनफॉर्चूनेटली मुझे है, हाल ही में मैं सोच रहा था, किसी ने मुझ पर वर्बली डाला ही नहीं है। ना मेरे पेरेंट्स, ना मेरे टीचर्स, ना मेरे दोस्त। किसी ने नहीं है। मुझसे सिर्फ ये सवाल पूछा जाता था कि अगला क्या है।

मैं खुद ही अपने आप पर वो प्रेशर डालता था। आप फेलियर से डर जाते हो कि मुझे अभी फेल होना नहीं है हरगिज। अब कोशिश नहीं करूंगा तो पता नहीं चलेगा फेलियर क्या है, सक्सेस क्या है। तो ये सारी चीजें हो रही थीं और बहुत टाइम निकल गया उसमें। कई साल गए।

उसी दौरान मैं थिएटर कर रहा था। तो थिएटर में तो और क्रिटिकल हो गया था। मैंने अपना वो बैकग्राउंड नॉइस जो आपको बता रहा हूं उस पर थोड़ा कंट्रोल लाना शुरू किया। और जब अच्छा कंट्रोल आ गया तो लाइफ बहुत बेहतरीन हो गई मेरे लिए।

सवाल- आपने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ काम किया है, परफेक्शन वाला जो प्रेशर है उसने आपको कहीं ना कहीं एक गिल्ट भी दिया।

जवाब- 100%। ये बड़ी डरावनी सी चीज होती है। एक बात मानी जाती है कि परफेक्शन का मतलब है कि आप एक भी एरर नहीं होने देंगे और आपका ऑब्जरवेशन इतना स्ट्रांग है। अब ये मैं नहीं कहूंगा कि मैंने आमिर सर से सीखा क्योंकि मैं बहुत छोटा था ये समझने के लिए कि परफेक्शन का मतलब भी क्या होगा, स्पेलिंग भी नहीं पता होगा। लेकिन बिल्कुल कहीं ना कहीं एक स्टैण्डर्ड सेट हो गया है दिमाग में कि मुझे यहां पहुंचना है और मुझे ये करना है। अब ये करना कैसे है, क्या करना है उसका कोई गाइडेंस नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। वो आपको खुद को ही डिस्कवर करना है।

थिएटर करते हुए रियलाइज हुआ कि मैंने इतना टाइम निकाल दिया है। मां ने मुझे गाइड किया कि हर चीज का एक सही टाइम आता है।

सवाल- वो लम्हा याद है जब पहली बार सैकड़ों लोगों के बीच में आप सेलेक्ट हुए थे?

जवाब- नहीं। मैंने जब ऑडिशन दिया था तब मुझे ऑडिशन का मतलब नहीं पता था। मुझे लगा शूटिंग चालू हो गई है। मैं स्कूल यूनिफॉर्म में था। मैंने सबको बोलना शुरू कर दिया था कि मैं फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं।

सवाल- क्या क्या बताया गया था ऑडिशन मैं जाने से पहले?

जवाब- यही कि सीन है, ये लाइंस हैं तुम्हारी, तुम ऐसा सोचो कि तुम अब विंडो के बाहर देख रहे हो और तुम्हें कुछ एक बहुत प्यारी सी मछली दिख रही है कोई तालाब या कोई पॉटहोल में और उसमें पानी भरा हुआ है।

सवाल- खिड़की से देखने वाले सीन की इमेज आज भी याद है

जवाब- मैं लड़का ही ऐसा था जो बहुत डिस्ट्रैक्टेड था और मैं घूम जाता था इन चीजों में। तो मेरे लिए बहुत आसान था। फिर कहा टीचर डांटने वाली है तो तुम देख लेना क्या है। मुझे इसका कोई नॉलेज नहीं था। मुझे किसी ने चिल्लाया, मैंने बोला अरे भाई चिल्ला क्यों रहा है? क्या हो गया? मेरे लिए वो टीचर सीन फिल्म नहीं था। जेन्युइन इमोशन था।

फिल्म मेरी परफॉरमेंस मेरे अकेले की नहीं थी। वो आमिर सर की भी थी, अमोल गुप्ते सर का भी थी। मैं ये भी मानता हूं कि कहीं ना कहीं सभी आर्टिस्ट की थी जिन्होंने सपोर्ट दिया है।

सवाल- पहली बार अमोल गुप्ते से कब मुलाकात हुई?

जवाब- ये बहुत फनी था। मैं शामक दावर की डांस क्लास में था। उनकी टीम के दो लोग थे। उन्होंने हाय कहा। वैसे तो अनजान लोगों को हाय नहीं बोलते, लेकिन मैं उल्टा था। मैं खुद अनजान लोगों से बात करने जाता था।

मैं चला गया अमोल जी से बात करने। इतने स्वीटहार्ट पर्सन हैं, वो मुझे कहते थे दर्शील यार मैं तुझे आज से दर्शील नहीं बुलाऊंगा। मैं बोला क्या बुलाओगे आप? उन्होंने बोला मैं तुझे उस्ताद बुलाऊंगा। तो मैंने मेरा पेट नेम मेरी स्कूल की बुक में इरेज़ करके उस्ताद लिखना शुरू कर दिया था। मुझे उस्ताद का मतलब भी नहीं पता था तभी।

सवाल- आमिर से फिर दूसरी बार जब मुलाकात हुई, वो कैसा था?

जवाब- ऐसे लगा ही नहीं आमिर सर हैं, कैप, शॉर्ट्स, टीशर्ट, हाय आई एम आमिर। तो मतलब मेरे दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था कि यार आएगी पूरी फौज बॉडीगार्डों की, कैमरा, फोटोग्राफ ये वो वगैरह वगैरह।

मैंने लगान थिएटर में देखी थी, दिल चाहता है थिएटर में देखी थी, मैं सोता था थिएटर में लेकिन मैंने सारी फिल्में देखी हैं।

सवाल- बनी टीथ, जो आपका आइकॉनिक लुक है, क्या उसकी वजह से कभी रिजेक्शन मिला

दर्शील- एडेनोइड्स कोई इन्फेक्शन टाइप सा होता है जिसमें टॉन्सिल इन्फेक्ट हो जाते हैं और उसमें आंखों के नीचे ऐसे काले गड्ढे होते हैं और दांत बाहर होते हैं। तो मुझे एडेनोइड्स था।

फिल्मी दुनिया में स्क्रीन पर भी सही दिखना जरूरी है। अभी उस टीथ के साथ अगर मैं आपको बोलूं एक बहुत इंटेंस पॉलिटिकल रोल प्ले करना है मुझे, लेकिन मैं उसमें फिट नहीं हो सकता। लेकिन अगर मैं अभी बोलूं एक कॉमेडी फिल्म है, तो उसमें फिट हो जाऊंगा। तो मैंने फिर डेंटल प्रोसीजर करा लिया। काफी पेनफुल था।फिर अच्छा लगता है।

सवाल- सेट पर मस्ती करते थे?

जवाब- अरे बहुत, मैं लोगों का वॉकी-टॉकी चुराकर छुप जाता था और हाइड एंड सीक खेलता था उनके साथ। सवाल- आप नेपो किड नहीं हो। कितना मुश्किल होता है सर्वाइव करना?

जवाब- मेरी मां ने थोड़ा बहुत थिएटर और टीवी भी किया है। तो मुझे नहीं पता कि मैं नेपोकिड हूं या नहीं। आपने विल स्मिथ को देखा है विल स्मिथ का जो बेटा है जेडन स्मिथ। वो ओपनली कहता है कि मेरे फादर के शैडो से मैं बाहर निकलूं कैसे भाई? आप मुझे याद ही विल स्मिथ के बेटे से करने वाले हो। मैं भी यही सोचता हूं।

सवाल- इंटरनेशनल प्रोजेक्ट भी आ रहे हैं? मोहित और प्रियदर्शनी के साथ कुछ बताना चाहोगे?

जवाब- मैं इस बारे में ज्यादा नहीं बोल सकता। जो कैरेक्टर मैं प्ले कर रहा हूं सचिन मुंशी, जिनको डिसेबिलिटी है, ड्यूशन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी। उनका जो माइंडसेट है, मैंने उनसे बात की है और उसके बाद में शायद दो घंटा रोया हूं सिर्फ। उनकी माइंडसेट ये है कि आप मुझे दया की नजरों से मत देखो बॉस। दया मत खाओ मुझपे। मैं ठीक हूं मेरी ये कंडीशन है मैंने एक्सेप्ट कर ली है अब देखो मैं क्या करता हूं। और उन्होंने पीएचडी लाई है। वो लाइफ और मौत के बीच में एक सेकंड के फर्क में रहते हैं।

दूसरा इंडो-हॉलीवुड कोलैबोरेशन एक ब्रिटिश प्रोजेक्ट है। जहां मैं एक डीजे प्ले कर रहा हूं 80s 90s का। मैं इसके लिए एक्साइटेड हूं, क्योंकि मुझे म्यूजिक पसंद है।

मैंने पिछले साल एक बॉलीवुड सीरीज देखी थी, उसका कंटीन्यूएशन भी आएगा। मैंने एक साउथ की रीमेक फिल्म भी शूट की है। उसमें प्रसाद ओक सर हैं, कबीर दुहान सिंह हैं, जैन खान दुर्रानी जो मेरे ऑपोजिट को-एक्टर प्ले कर रहे हैं ।

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