मुंबई की लाइफलाइन रहे डिब्बावालों का वजूद संकट में:हार्वर्ड ने कभी लॉजिस्टिक्स का मास्टरक्लास बताया था, प्रिंस चार्ल्स खुद देखने आए थे

जब मुंबई पूरी तरह जागी भी नहीं होती, सफेद टोपी और कुर्ते में कुछ लोग साइकिलों पर ऊंचे-ऊंचे टिफिन के ढेर लेकर रेलवे स्टेशनों पर पहुंच जाते हैं। ट्रेन में चढ़ते हैं, शहर पार करते हैं और फिर पैदल या साइकिल से घर का बना गरम खाना दफ्तरों तक पहुंचाते हैं। ये हैं मुंबई के डिब्बावाले- एक ऐसी व्यवस्था, जिसे हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने कम लागत के लॉजिस्टिक्स का मास्टरक्लास बताया और जिसे देखने 2003 में तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स खुद मुंबई आए थे। लेकिन आज यही डिब्बावाले वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। डिब्बावाला व्यवस्था की शुरुआत 19वीं सदी के आखिर में हुई, जब ब्रिटिश राज के दौरान बॉम्बे (अब मुंबई) तेजी से फैल रहा था। दफ्तर जाने वाले लोगों को घर का खाना चाहिए था। बीबीसी वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 1890 में महादेव बाचचे ने 100 कामगारों के साथ इसे व्यवस्थित रूप दिया। धीरे-धीरे यह व्यवस्था इतनी सटीक हो गई कि बिना किसी एप या जीपीएस के रोज हजारों टिफिन सही पते पर पहुंचने लगे। अपने चरम पर 4,500 डिब्बावाले रोज 50,000 से ज्यादा टिफिन पहुंचाते थे। फिर कोरोना आया और सब बदल गया। दफ्तर बंद हुए, वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ और टिफिन की जरूरत अचानक खत्म हो गई। रिपोर्ट में मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर्स एसोसिएशन के सचिव किरण गवंडे के हवाले से कहा गया है, ‘लॉकडाउन के बाद से कई लोग हफ्ते में सिर्फ 2-3 दिन दफ्तर जाते हैं। इसका डिब्बावालों पर बड़ा असर हुआ। 2018 में जो संख्या 4,500 थी, वह अब 1,500 रह गई है।’ जो बचे हैं, उनकी हालत भी अच्छी नहीं हैं। बालू शिंदे 20 साल तक डिब्बावाला रहे। रोज 15-20 टिफिन पहुंचाते थे। हर माह 20,000 रुपए कमाते थे। 2020 के अंत तक सिर्फ दो ग्राहक बचे। अब वे ऑटो चलाते हैं। जो टिके हैं, वे दो-दो काम कर रहे हैं। एसोसिएशन अब शिफ्ट आधारित काम की योजना बना रही है। लेकिन अध्यक्ष रामदास कार्वांडे कहते हैं, ‘अभी तो चल रहा है, लेकिन आगे क्या होगा, कह नहीं सकते।’ हर सुबह मुंबई की ट्रेनों में स्टील के टिफिन लिए ये लोग अब भी दिखते हैं। ये एक ऐसी परंपरा को जिंदा रखते हुए जो कभी इस शहर की रफ्तार की पहचान थी, पर अब उसी रफ्तार से पीछे छूटती जा रही है। स्विगी-जोमैटो, क्लाउड किचन और महंगाई ने बढ़ाई डिब्बावालों की चुनौती डिब्बावाला सिर्फ 2,000 रुपए प्रति माह में घर का खाना पहुंचाता था। अब स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी एप स्क्रीन के एक टच पर बिरयानी से बर्गर तक उपलब्ध करा रहे हैं। इस बीच उभरते क्लाउड किचन ने मुकाबला कड़ा कर दिया है। नतीजतन कभी एकछत्र राज करने वाला डिब्बावाला सिस्टम सिमट रहा है। 35 साल से डिब्बावाले रहे बाबन कदम कहते हैं, ‘आज की महंगाई में नई पीढ़ी इस काम में नहीं आएगी। सब बेहतर नौकरी या कारोबार चाहते हैं।’
‘सौहार्दपूर्ण तरीके से अलग होने की इच्छा’: अन्नामलाई ने बीजेपी प्रमुख से कहा कि वह बाहर निकलने की चर्चा के बीच ‘अपनी राह तय करना’ चाहते हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 13:08 IST तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई ने बीजेपी नेता नितिन नबीन और बीएल संतोष से कहा कि वह सौहार्दपूर्ण शर्तों पर पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उन्होंने कथित तौर पर राज्यसभा का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई की फाइल फोटो। (छवि: पीटीआई) एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन सचिव बीएल संतोष के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में, तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई ने सौहार्दपूर्ण शर्तों पर पार्टी छोड़ने की इच्छा व्यक्त की। यह बैठक अन्नामलाई की पार्टी छोड़ने की कथित योजना पर बढ़ती अटकलों के बीच हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, अन्नामलाई ने पार्टी नेतृत्व से कहा कि वह “अब अपना रास्ता खुद तय करना चाहते हैं” और वह “सौहार्दपूर्ण शर्तों पर अलग होना चाहते हैं”। हालाँकि, भाजपा नेतृत्व अभी भी उन्हें पद पर बने रहने के लिए मनाने के प्रयासों पर विचार कर रहा है, हालांकि कुछ सूत्रों का कहना है कि आईपीएस अधिकारी से नेता बने आईपीएस ने पहले ही अपना मन बना लिया होगा, एनडीटीवी ने बताया। एनडीटीवी के मुताबिक, पार्टी ने अन्नामलाई को राज्यसभा सीट की भी पेशकश की, जिसे उन्होंने कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, नेता को बीजेपी में अपना भविष्य नजर नहीं आ रहा है. अन्नामलाई बनाएंगे नई राजनीतिक पार्टी? अन्नामलाई के करीबी सूत्रों के अनुसार, पूर्व आईपीएस अधिकारी का मानना है कि अभिनेता विजय के एक राजनीतिक ताकत के रूप में उदय के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। चर्चाओं से अवगत एक सूत्र ने कहा, “आज विजय से लड़ने के लिए कोई नेता नहीं है। द्रविड़ युग खत्म हो गया है। केवल भाषा के मुद्दों पर केंद्रित राजनीति अब काम नहीं करेगी। राज्य की राजनीति बदल गई है।” सूत्रों ने यह भी कहा कि अन्नामलाई एक जन आंदोलन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, इस बात पर अटकलें जारी हैं कि क्या यह बाद में एक राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। एनडीटीवी के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य समान विचारधारा वाले व्यक्तियों को एक साथ लाना और एक व्यापक स्वयंसेवक नेटवर्क का निर्माण करना है। प्रस्तावित आंदोलन के व्यापक पैमाने पर संचालित होने और विविध पेशेवर और सामाजिक पृष्ठभूमि से प्रतिभागियों को आकर्षित करने की उम्मीद है। अन्नामलाई पहले से ही “वी द लीडर्स” नामक एक गैर-लाभकारी नेतृत्व पहल चलाते हैं, जो उनके विस्तारित राजनीतिक प्रोजेक्ट के लिए आधार बनने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित राजनीतिक दल तमिलनाडु में आगामी विधानसभा उपचुनाव लड़ सकता है, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और संगठनात्मक ताकत की प्रारंभिक परीक्षा होगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पृषा विभावरी प्रिशा News18.com में मुख्य उप-संपादक हैं, जिनके पास राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह संपादकीय नेतृत्व, तीव्र समाचार निर्णय और उच्च प्रभाव वाली टिप्पणी में माहिर हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘सौहार्दपूर्ण तरीके से अलग होने की इच्छा’: बाहर निकलने की चर्चा के बीच अन्नामलाई ने बीजेपी प्रमुख से कहा कि वह ‘अपनी राह खुद तय करना’ चाहते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
चंडीगढ़ में रैपर बादशाह का क्लब सील:मंजूर नक्शे से ज्यादा निर्माण किया, कई नोटिसों के बावजूद नहीं हटाया

चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित मशहूर रैपर बादशाह के क्लब सागो को मंगलवार सुबह प्रशासन की बिल्डिंग ब्रांच ने सील कर दिया है। क्लब संचालकों को भवन नियमों के उल्लंघन को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें निर्धारित समय के भीतर कमियां दूर करने और नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बाद बिल्डिंग ब्रांच की टीम मौके पर पहुंची और सीलिंग की कार्रवाई की। प्रशासन के मुताबिक, क्लब में भवन संबंधी नियमों और स्वीकृत नक्शे से जुड़े कुछ उल्लंघनों को लेकर लंबे समय से मामला चल रहा था। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब और अनुपालन नहीं मिलने पर आखिरकार क्लब को सील करने का फैसला लिया गया। यह वही क्लब है, जो इससे पहले भी एक बड़े विवाद के कारण चर्चा में आ चुका है। क्लब के बाहर हुए धमाकों की जिम्मेदारी सोशल मीडिया के जरिए गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा की ओर से लिए जाने की बात सामने आई थी। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में दावा किया गया था कि क्लब संचालकों से कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी मांगी गई थी और मांग पूरी नहीं होने पर धमाके किए गए। हालांकि, उस मामले की जांच सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस द्वारा की गई थी। अब एक बार फिर यह क्लब प्रशासनिक कार्रवाई के चलते चर्चा में आ गया है। मंजूर नक्शे से अलग निर्माण पड़ा भारी प्रशासन के अनुसार, क्लब के लिए जो नक्शा मंजूर कराया गया था, उसके बाद अंदर अतिरिक्त निर्माण कर लिया गया था। इसी को लेकर बिल्डिंग ब्रांच की ओर से क्लब संचालकों को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे बिल्डिंग ब्रांच की टीम पुलिस की मौजूदगी में मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए क्लब को सील कर दिया। 2 साल पहले हुआ था क्लब के बाहर धमाका करीब दो साल पहले सेक्टर-26 स्थित दो क्लबों के बाहर धमाके हुए थे। इस घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग की ओर से ली गई थी। गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी सामने आई थी, जिसमें धमाकों की वजह कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी न देना बताई गई थी। धमाके सेविले बार एंड लाउंज और डि’ओरा क्लब के बाहर हुए थे। इस घटना में क्लबों के बाहर लगे शीशे टूट गए थे। सेविले बार एंड लाउंज के मालिकों में मशहूर रैपर बादशाह भी पार्टनर हैं। गोल्डी बराड़ के हवाले से सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में दावा किया गया था कि दोनों क्लबों के मालिकों से प्रोटेक्शन मनी के लिए संपर्क किया गया था। पोस्ट में कहा गया था कि उनकी ओर से कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद धमाके किए गए। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि जो लोग उनकी कॉल्स को नजरअंदाज कर रहे हैं, वे इसे चेतावनी के तौर पर लें। हालांकि, इस मामले की जांच पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई थी। इस खबर को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं……
Bhuvi’s speed reached 140 kmph in IPL

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक भुवनेश्वर के पर्सनल ट्रेनर सूर्या यादव के मुताबिक, चोट से बचने और ताकत बढ़ाने के लिए भुवी को भारी वजन उठाने की आदत डालनी पड़ी।- फाइल फोटो आईपीएल 2026 में स्विंग के सुल्तान 36 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार ने 28 विकेट झटके, जो किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा सबसे ज्यादा हैं। उनकी इस उम्र को मात देने वाली परफॉर्मेंस के पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि जिम में बहाया गया पसीना, भारी वजन उठाना (वेटलिफ्टिंग) और गजब का अनुशासन है। एक समय था जब लगातार चोटों (कमर, घुटने और टखने) की वजह से भुवी का इंटरनेशनल करियर थम सा गया था। तीन साल पहले उनके शरीर में फैट 20% के करीब था। लेकिन आज, 36 साल की उम्र में उनका फैट प्रतिशत घटकर सिर्फ 13-14% रह गया है। हालांकि, उन्होंने अपने शरीर का फैट तो कम किया, लेकिन वजन नहीं। उनका वजन आज भी 73-74 किलो है, जिसका मतलब है कि उन्होंने फैट को मसल (मांसपेशियों) में बदला है। इसी ताकत और लीन बॉडी की वजह से पिछले तीन सालों से वे लगातार बिना चोटिल हुए पूरा सीजन खेल रहे हैं। भुवनेश्वर के पर्सनल ट्रेनर सूर्या यादव के मुताबिक, चोट से बचने और ताकत बढ़ाने के लिए भुवी को भारी वजन उठाने की आदत डालनी पड़ी। पहले भुवी सिर्फ 40 किलो वजन के साथ स्क्वैट्स करते थे। लेकिन अब उनकी ताकत दोगुनी हो गई है और वे आसानी से 110-120 किलो वजन उठा लेते हैं। भारी वजन उठाने और फिटनेस सुधारने का सीधा असर उनकी गेंदबाजी पर दिखा है। इस सीजन के फाइनल में भुवी की स्पीड लगभग 139-140 kmph तक पहुंच गई थी। भुवी हमेशा से अपनी इनस्विंग और आउटस्विंग के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने एक नया हथियार ‘वॉबल सीम’ जोड़ा। गेंद सीधी लाइन में आकर दोनों तरफ स्विंग होती है। भुवी ने अपनी सबसे बड़ी ताकत ‘बैकस्पिन’ को भी वापस पा लिया है। एक फिट शरीर के लिए सिर्फ जिम नहीं, डाइट भी जरूरी है। अब भुवी मिठाइयों से पूरी तरह दूर रहते हैं और अपने शरीर के वजन से दोगुना प्रोटीन लेते हैं। उनकी डाइट में प्रोटीन बार, प्रोटीन शेक, घर के बने चीले और जरूरत पड़ने पर अंडे शामिल हैं। सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रहने वाले भुवनेश्वर कुमार रोजाना 5 से 7 घंटे क्रिकेट और फिटनेस को देते हैं। इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि आज एक बार फिर से टीम इंडिया में उनकी वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिन में डेढ़ घंटा बैटिंग प्रैक्टिस भी, बुखार में भी नहीं छोड़ा मैदान भुवी बल्लेबाजी पर भी खूब मेहनत कर रहे हैं। मुंबई इंडियंस के खिलाफ पहली गेंद पर ही छक्के ने उनकी टीम को रोमांचक जीत दिलाई। वे हर दिन 1 से 1.5 घंटे सिर्फ बैटिंग की प्रैक्टिस करते हैं। यूपी टी20 लीग का एक किस्सा उनकी लगन को दर्शाता है। उनकी पूरी टीम वायरल की चपेट में थी और भुवी को मैदान पर ही ग्लूकोज चढ़ानी पड़ी। ट्रेनर ने आराम करने को कहा, लेकिन अगले दिन वे मैच खेलने के लिए तैयार थे। उनका जवाब था ‘मुझे क्रिकेट से प्यार है, बॉलिंग से प्यार है। इसलिए मैं खेलता हूं।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Bhuvi’s speed reached 140 kmph in IPL

नई दिल्ली37 मिनट पहले कॉपी लिंक भुवनेश्वर के पर्सनल ट्रेनर सूर्या यादव के मुताबिक, चोट से बचने और ताकत बढ़ाने के लिए भुवी को भारी वजन उठाने की आदत डालनी पड़ी।- फाइल फोटो आईपीएल 2026 में स्विंग के सुल्तान 36 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार ने 28 विकेट झटके, जो किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा सबसे ज्यादा हैं। उनकी इस उम्र को मात देने वाली परफॉर्मेंस के पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि जिम में बहाया गया पसीना, भारी वजन उठाना (वेटलिफ्टिंग) और गजब का अनुशासन है। एक समय था जब लगातार चोटों (कमर, घुटने और टखने) की वजह से भुवी का इंटरनेशनल करियर थम सा गया था। तीन साल पहले उनके शरीर में फैट 20% के करीब था। लेकिन आज, 36 साल की उम्र में उनका फैट प्रतिशत घटकर सिर्फ 13-14% रह गया है। हालांकि, उन्होंने अपने शरीर का फैट तो कम किया, लेकिन वजन नहीं। उनका वजन आज भी 73-74 किलो है, जिसका मतलब है कि उन्होंने फैट को मसल (मांसपेशियों) में बदला है। इसी ताकत और लीन बॉडी की वजह से पिछले तीन सालों से वे लगातार बिना चोटिल हुए पूरा सीजन खेल रहे हैं। भुवनेश्वर के पर्सनल ट्रेनर सूर्या यादव के मुताबिक, चोट से बचने और ताकत बढ़ाने के लिए भुवी को भारी वजन उठाने की आदत डालनी पड़ी। पहले भुवी सिर्फ 40 किलो वजन के साथ स्क्वैट्स करते थे। लेकिन अब उनकी ताकत दोगुनी हो गई है और वे आसानी से 110-120 किलो वजन उठा लेते हैं। भारी वजन उठाने और फिटनेस सुधारने का सीधा असर उनकी गेंदबाजी पर दिखा है। इस सीजन के फाइनल में भुवी की स्पीड लगभग 139-140 kmph तक पहुंच गई थी। भुवी हमेशा से अपनी इनस्विंग और आउटस्विंग के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने एक नया हथियार ‘वॉबल सीम’ जोड़ा। गेंद सीधी लाइन में आकर दोनों तरफ स्विंग होती है। भुवी ने अपनी सबसे बड़ी ताकत ‘बैकस्पिन’ को भी वापस पा लिया है। एक फिट शरीर के लिए सिर्फ जिम नहीं, डाइट भी जरूरी है। अब भुवी मिठाइयों से पूरी तरह दूर रहते हैं और अपने शरीर के वजन से दोगुना प्रोटीन लेते हैं। उनकी डाइट में प्रोटीन बार, प्रोटीन शेक, घर के बने चीले और जरूरत पड़ने पर अंडे शामिल हैं। सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रहने वाले भुवनेश्वर कुमार रोजाना 5 से 7 घंटे क्रिकेट और फिटनेस को देते हैं। इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि आज एक बार फिर से टीम इंडिया में उनकी वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिन में डेढ़ घंटा बैटिंग प्रैक्टिस भी, बुखार में भी नहीं छोड़ा मैदान भुवी बल्लेबाजी पर भी खूब मेहनत कर रहे हैं। मुंबई इंडियंस के खिलाफ पहली गेंद पर ही छक्के ने उनकी टीम को रोमांचक जीत दिलाई। वे हर दिन 1 से 1.5 घंटे सिर्फ बैटिंग की प्रैक्टिस करते हैं। यूपी टी20 लीग का एक किस्सा उनकी लगन को दर्शाता है। उनकी पूरी टीम वायरल की चपेट में थी और भुवी को मैदान पर ही ग्लूकोज चढ़ानी पड़ी। ट्रेनर ने आराम करने को कहा, लेकिन अगले दिन वे मैच खेलने के लिए तैयार थे। उनका जवाब था ‘मुझे क्रिकेट से प्यार है, बॉलिंग से प्यार है। इसलिए मैं खेलता हूं।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
रेखा आर्या ने खेल विवि की जमीन का किया निरीक्षण:मिट्टी माथे से लगा हुईं भावुक; बोलीं- यह जमीन का टुकड़ा नहीं, हमारे खिलाड़ियों का तीर्थ

उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय की जमीन का वन विभाग से हस्तांतरण पूरा होने के बाद मंगलवार को खेल मंत्री रेखा आर्या पहली बार गौलापार स्थित प्रस्तावित स्थल पर पहुंचीं। बरसों की मेहनत और लंबी कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने की खुशी खेल मंत्री के चेहरे पर साफ दिखी। मैदान पर पहुंचते ही वह भावुक हो गईं और उन्होंने वहां की मिट्टी को माथे से लगाकर नमन किया। खेल मंत्री ने यहां चल रहे जमीन के समतलीकरण और झाड़ियां साफ करने के काम का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस मिट्टी से निकलेंगे भविष्य के इंटरनेशनल खिलाड़ी निरीक्षण के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा, किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा हो सकता है, लेकिन एक खेल मंत्री के रूप में मेरे लिए और उत्तराखंड के लाखों युवाओं के लिए यह किसी पवित्र तीर्थस्थल से कम नहीं है। इसी भूमि पर हमारे खिलाड़ियों के सपने आकार लेंगे, उनकी प्रतिभा को तराशा जाएगा और यहीं से भविष्य के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय चैंपियन तैयार होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस मिट्टी को माथे से लगाते ही उनके मन में प्रदेश के उन हजारों प्रतिभावान खिलाड़ियों का संघर्ष और समर्पण उमड़ आया, जो बेहतर सुविधाओं की आस में हैं। यह यूनिवर्सिटी उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों की कतार में खड़ा करेगी। सीएम धामी के दृढ़ संकल्प से पूरा हुआ सपना खेल मंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री को देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और मजबूत इच्छाशक्ति के कारण ही यह बेहद जटिल और महत्वाकांक्षी परियोजना आज धरातल पर उतर रही है। यह देवभूमि के युवाओं के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगी। निरीक्षण के दौरान खेल मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि काम की रफ्तार में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। मॉनसून से पहले शुरुआती चरणों को तेजी से पूरा किया जाए। इस दौरान खेल उपनिदेशक राशिका सिद्दकी, जिला खेल अधिकारी निर्मला पंत, वरुण बेनीवाल, सतीश कुमार सहित खेल विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष? बंगाल में चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी खुले विद्रोह की ओर देख रही हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 12:25 IST जो बात हस्ताक्षरों को लेकर शिकायत के रूप में शुरू हुई वह लंबे समय से ममता बनर्जी के प्रभुत्व वाली पार्टी के अंदर नेतृत्व, असहमति और नियंत्रण पर एक बड़ी बहस में बदल गई है। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी (दाएं)। कथित “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा निष्कासित पूर्व विधायक रीतब्रत बनर्जी पार्टी के विधायी रैंकों के भीतर पनप रहे विद्रोह के केंद्र में उभर रहे हैं। टीएमसी के नेता विपक्ष (एलओपी) के उम्मीदवार के समर्थन वाले एक प्रस्ताव पर कथित रूप से जाली हस्ताक्षर को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, वह अब पार्टी नेतृत्व के लिए एक संभावित चुनौती बन गया है। सीएनएन-न्यूज18 को पता चला है कि पार्टी के 80 में से 50 से अधिक विधायक “असली तृणमूल” के रूप में दावा करने की तैयारी कर रहे हैं और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद के लिए बनर्जी का समर्थन कर रहे हैं, जबकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस भूमिका के लिए अनुभवी नेता सोभोंदेब चट्टोपाध्याय को नामित किया है। इस घटनाक्रम से विपक्षी खेमे में बड़े विभाजन की अटकलें तेज हो गई हैं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने स्थिति की तुलना हाल के वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में देखी गई आंतरिक टूट से की है। हस्ताक्षर पंक्ति जिसने संकट को जन्म दिया विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए एक प्रस्ताव पर केंद्रित है जिसमें चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया गया है। बनर्जी और साथी विधायक संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि दस्तावेज़ पर कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके बाद वे जांच की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रतिंद्र बोस के पास पहुंचे। यह भी पढ़ें | राय | टीएमसी पर शिवसेना जैसी विभाजन की आशंका के चलते ममता बनर्जी पार्टी और चुनाव चिह्न दोनों खो सकती हैं उनकी शिकायत पर सीआईडी जांच शुरू हुई। तब से कई टीएमसी विधायकों से पूछताछ की गई है, कुछ ने कथित तौर पर दावा किया है कि प्रस्ताव पर दिखाई देने वाले हस्ताक्षर उनके नहीं थे। हालाँकि, टीएमसी ने इस कदम को अनुशासनहीनता के रूप में देखा। पार्टी नेताओं ने तर्क दिया कि विधायकों को संवैधानिक अधिकारियों से संपर्क करने के बजाय आंतरिक रूप से अपनी चिंताओं को उठाना चाहिए था। मामला बढ़ने के कुछ ही घंटों के भीतर बनर्जी और साहा को पहले निलंबित कर दिया गया और फिर पार्टी से निकाल दिया गया। रीताब्रता सुर्खियों में बनर्जी के नाम का महत्व इस बात से है कि यह विवाद अब केवल कथित जालसाजी का नहीं रह गया है। हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद यह टीएमसी के भीतर अधिकार की परीक्षा के रूप में विकसित हुआ है। निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने दावा किया है कि विधायकों का एक बड़ा हिस्सा वैकल्पिक एलओपी उम्मीदवार के रूप में बनर्जी के पीछे एकजुट होना शुरू हो गया है। टीएमसी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, “तृणमूल के 80 विधायक हैं। इनमें से 50 से अधिक विधायकों की बैठक सोमवार दोपहर गेटवे होटल में हुई। वे कह रहे हैं कि वे ‘असली तृणमूल’ हैं और वे स्पीकर को एक नई सूची सौंपेंगे, जिसमें कहा जाएगा कि विपक्ष का एक अलग नेता होगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई टीएमसी सांसद भाजपा में जाने की संभावना तलाश रहे हैं। “12 लोकसभा सांसद हैं, मैं आपको सटीक संख्या दे रहा हूं, और कुछ राज्यसभा सांसद भी। वास्तव में, 12 लोकसभा सांसद और 6 राज्यसभा सांसद पहले ही भाजपा के साथ ‘पेंसिल बुकिंग’ कर चुके हैं। जहां तक तृणमूल विधायकों की बात है, भाजपा अभी उन्हें नहीं ले रही है, लेकिन वे हर दिन फोन करते रहते हैं, कहते हैं, ‘कृपया हमारी बुकिंग लें, कृपया हमारी बुकिंग लें।’ मैं यह बात खुलकर कह रहा हूं।” यह भी पढ़ें | लुप्त हो रहे कैडर: ममता बनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी नहीं हो सकती बढ़ता असंतोष उन रिपोर्टों के साथ मेल खाता है कि बड़ी संख्या में टीएमसी विधायक हाल की पार्टी बैठकों में शामिल नहीं हुए, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि असंतोष दो निष्कासित विधायकों से भी आगे तक फैला हुआ है। जबकि पार्टी ने विभाजन के सुझावों को खारिज कर दिया है, प्रमुख संगठनात्मक बैठकों से दर्जनों विधायकों की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं। नंबर गेम बनर्जी को वास्तव में विपक्ष के नेता पद के लिए दावा पेश करने के लिए विपक्षी विधायकों के बीच पर्याप्त समर्थन प्रदर्शित करना होगा। यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एलओपी मुद्दा पहले से ही प्रक्रियात्मक विवादों में उलझा हुआ है। चट्टोपाध्याय ने पहले शिकायत की थी कि टीएमसी के पास पद के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त सीटें होने के बावजूद, विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए दस्तावेजों और हस्ताक्षरों पर सवालों के बीच नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी मान्यता में देरी हुई है। यदि विधायकों का एक बड़ा समूह खुले तौर पर बनर्जी का समर्थन करता है, तो स्पीकर को अंततः प्रतिस्पर्धी दावों का सामना करना पड़ सकता है कि कौन वैध रूप से विपक्षी बेंच का प्रतिनिधित्व करता है। ममता के नियंत्रण के लिए परीक्षण? क्या बनर्जी अंततः विपक्ष के नेता बनेंगे या नहीं यह अनिश्चित बना हुआ है। लेकिन यह तथ्य कि अब पार्टी के आधिकारिक तौर पर चुने गए उम्मीदवार के विकल्प के रूप में उनके नाम पर चर्चा हो रही है, टीएमसी के सामने संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। यह भी पढ़ें | अभिषेक बनर्जी का हमला 1990 में ममता के हमले जैसा नहीं, लेकिन पस्त टीएमसी अब भी इसे 3 तरीकों से इस्तेमाल कर सकती है जो बात हस्ताक्षरों को लेकर शिकायत के रूप में शुरू हुई वह लंबे समय से ममता बनर्जी के प्रभुत्व वाली पार्टी के अंदर नेतृत्व, असंतोष और नियंत्रण पर एक बड़ी बहस में बदल गई है। यदि आने वाले दिनों में अधिक विधायक सार्वजनिक रूप से बनर्जी के साथ आते हैं, तो एलओपी की लड़ाई बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी के भीतर व्यापक सत्ता संघर्ष का पहला स्पष्ट संकेत बन सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के
फोर्ब्स बिलियनेयर्स की लिस्ट में माइक्रॉन के भारतवंशी सीईओ शामिल:संजय ने कोडेक का ऑफर ठुकराकर सैंडिस्क को घर-घर पहुंचाया

अमेरिकी चिप कंपनी माइक्रॉन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा फोर्ब्स की चिप कंपनियों के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। फोर्ब्स के मुताबिक उनकी संपत्ति 11,406 करोड़ रुपए है। वे इस लिस्ट में शामिल इकलौते भारतीय हैं। इसमें शीर्ष पर एनवीडिया के सीईओ जेन्संग हुआंग हैं जिनकी नेटवर्थ 17.46 लाख करोड़ रु. है। कानपुर में जन्मे मेहरोत्रा (67) ने सैंडिस्क की सह-स्थापना से लेकर माइक्रॉन को 104 लाख करोड़ मार्केट कैप तक पहुंचाने में काफी योगदान दिया है। 1976 में संजय ने अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीसा मांगा, लेकिन तीन बार दूतावास ने मना कर दिया। अंत में पिता उनके साथ नई दिल्ली दूतावास पहुंचे और काउंसलर अधिकारी के लंच पर जाने के बावजूद लॉबी में डटे रहे। अंत में उन्हें वीसा मिला। इंटेल में पहली नौकरी के दौरान वे रात दो बजे तक नौकरी करते थे। 1988 में संजय ने दो दोस्तों के साथ मिलकर सैंडिस्क की नींव रखी। उस समय फ्लैश मेमोरी नई तकनीक थी, लेकिन संजय ने इसी पर दांव लगाया। आगे चलकर पेनड्राइव, एसडी कार्ड और मोबाइल मेमोरी को दुनिया भर तक पहुंचाने में सैनडिस्क की बड़ी भूमिका रही। 90 के दशक में जब सैनडिस्क एक स्टार्टअप था, तब कोडेक ने उनकी डिजिटल मेमोरी तकनीक को सिर्फ अपने लिए बनाने का ऑफर दिया और इसके बदले बड़ी रकम देने की बात कही, लेकिन संजय और उनके साथी एली हरारी ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने तकनीक को खुले मानक के रूप में रखने का फैसला किया। इसी सोच से कॉम्पैक्ट फ्लैश और आगे एसडी कार्ड बने, जो आज हर डिवाइस में इस्तेमाल होते हैं। उसी दौरान जब वैश्विक मंदी आई तो कंपनी पर दबाव बढ़ गया, लेकिन संजय ने कर्मचारियों की छंटनी के बजाय अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपनी बेसिक सैलरी शून्य कर दी और बड़े अधिकारियों की सैलरी भी घटाई। उनका मानना था कि मुश्किल समय में सबसे पहले त्याग नेतृत्व को करना चाहिए। इस फैसले ने उन्हें कर्मचारियों के बीच खास भरोसा दिलाया। पद से ज्यादा तकनीक पसंद थी इसलिए नौकरी तक छोड़ दी 80 के दशक में संजय आईडीटी में थे। कंपनी उन्हें बेहतर पद देने को तैयार थी, लेकिन जिस नॉन-वोलेटाइल मेमोरी प्रोजेक्ट पर वे काम कर रहे थे, उसे बंद कर दिया गया। तब पसंदीदा तकनीक के चलते उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। बाद में कहा, ‘मुझे मेमोरी का जुनून था।’ यही जिद सैनडिस्क की नींव बनी। 2017 में वे माइक्रॉन से जुड़े, जो अब गुजरात के साणंद में 26 हजार करोड़ रुपए की चिप फैसिलिटी बना रही है, जिसमें कंपनी की हिस्सेदारी 7838 करोड़ रुपए है।
Gold Silver Price Hike 2026

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में आज यानी 25 मई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 760 रुपए बढ़कर 1.56 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी की कीमत 2,950 रुपए बढ़कर 2.66 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल 23 हजार और चांदी 36 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 26 हजार रुपए और चांदी 41 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.56 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.66 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Ghaziabad Surya Chauhan Murder | Devoleena Bhattacharjee Furious Statement

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुए सूर्या चौहान हत्याकांड को लेकर टीवी एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोशल प्लेटफॉर्म X पर देवोलीना ने लिखा, ‘इस आतंकवाद को जड़ से खत्म करना बहुत जरूरी है। घटिया सोच, घटिया परवरिश और घटिया संस्कार रखने वालों को, मां-बाप समेत सबको फांसी दे देनी चाहिए।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘योगी आदित्यनाथ, अगर रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों के लिए कोई सबसे बड़ी सजा है, तो इन सबको परिवार समेत मिलनी चाहिए।’ एक पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए सूर्या हत्याकांड को लेकर देवोलीना ने पोस्ट लिखी। वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बिजनौर में सूर्या हत्याकांड पर कहा कि अभी गाजियाबाद में दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी हुई। यह कतई बर्दाश्त नहीं है। अगर कोई अपनी नालायक औलाद को समझा नहीं पा रहा, तो समझ लो वह गलती कर रहा है। सूर्या चौहान की चाकू मारकर हत्या हुई गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में 28 मई को बकरीद के दिन 11वीं के छात्र सूर्या चौहान (17 वर्ष) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। रविवार (31 मई) तड़के मामले का मुख्य आरोपी असद पुलिस के एनकाउंटर में मार गिराया गया। पुलिस ने साजिश रचने के आरोप में असद के पिता नवाब समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांचवां आरोपी अभी फरार है। अब आरोपी असद के घर पर बुलडोजर चलेगा। सोमवार को प्रशासन की टीम असद के घर पहुंची। घर के गेट पर ताला लगा था। इसके बाद एसडीएम ने अवैध कब्जा करके घर बनाने का नोटिस दरवाजे पर चिपकाया। इसमें कहा गया कि जिस जमीन पर मकान बना है, उस पर अवैध कब्जा किया गया है। असद के पिता नवाब को 15 दिनों के भीतर एसडीएम कार्यालय में अपना जवाब देना होगा। साथ ही अवैध कब्जा खुद हटाने के लिए भी कहा गया है। पढ़ें पूरी खबर… ————————– यह खबर भी पढ़ें- ‘सूर्या नहीं आएगा क्या?’ बीमार भाई बार-बार पूछ रहा:गाजियाबाद में 5 दिन से बाजार बंद, लोग बोले- सभी बराबर दोषी, सबके घर तोड़े जाएं गाजियाबाद में सूर्या चौहान हत्याकांड के 5 दिन बाद भी खोड़ा का बाजार बंद है। सूर्या का बीमार बड़ा भाई यश चौहान लोगों से बार-बार सिर्फ एक सवाल पूछ रहा- “सूर्या नहीं आएगा क्या?” और फिर खुद ही दबी जुबां में कहता- “सूर्या चला गया…।” यहां पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









