Wednesday, 22 Jul 2026 | 03:59 AM

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शिल्पा शिंदे ने फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस करना कबूला:हिना खान समेत कई सेलेब्स भड़के, NGO ने की गिरफ्तारी की मांग, शिल्पा बोलीं- सुसाइड करने वाली थी

शिल्पा शिंदे ने फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस करना कबूला:हिना खान समेत कई सेलेब्स भड़के, NGO ने की गिरफ्तारी की मांग, शिल्पा बोलीं- सुसाइड करने वाली थी

बिग बॉस 11 की विनर और भाभी जी घर पर हैं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे अपने हालिया पॉडकास्ट से विवादों में घिर गई हैं। पॉडकास्ट में एक्ट्रेस ने कबूला कि उन्होंने अपने प्रोड्यूसर्स के खिलाफ फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकायत दर्ज करवाई थी। पॉडकास्ट आते ही शिल्पा शिंदे के खिलाफ एक NGO ने एक्शन लिए जाने की मांग की है। इसके अलावा हिना खान, पूजा बेदी समेत कई सेलेब्स एक्ट्रेस की आलोचना कर रहे हैं। विवादों के बीच शिल्पा शिंदे ने सफाई में कहा है कि वो उस वक्त सुसाइड करने वाली थीं, लेकिन अब उन्हें किसी भी तरह के विवाद से कोई फर्क नहीं पड़ता। शिल्पा ने वीडियो में आपत्तिजनक इशारे भी किए। शिल्पा शिंदे ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाछिया के पॉडकास्ट में कहा है कि उन्होंने टीवी शो भाभी जी घर पर हैं के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट की फर्जी शिकायत दर्ज करवाई थी। इससे उनकी बकाया पेमेंट चुका दी गई। NGO ने की गिरफ्तारी की मांग पुरुषों के हित में काम करने वाले एक NGO ने शिल्पा शिंदे की गिरफ्तारी की मांग की है। NCM इंडिया काउंसिल फॉर मैन अफेयर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा गया है, मुंबई पुलिस, प्लीज शिल्पा शिंदे को अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ झूठी शिकायत करने पर गिरफ्तार करें। ये बेहद शर्मनाक है- हिना खान बिग बॉस 11 की को-कंटेस्टेंट हिना खान ने शिल्पा की कड़ी आलोचना कर आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘किसी की छवि खराब करने या किसी विवाद में जीतने के लिए अपने महिला होने का फायदा उठाना बिल्कुल शर्मनाक है। और हर किसी को इसका विरोध करने और न्याय की मांग करने का पूरा अधिकार है। मैं यह देखकर बेहद हैरान हूं। लेकिन मैं यहां उस “असली पीड़ित” की बात करना चाहता हूं। एक सम्मानित व्यक्ति, जिसकी पत्नी, बेटी और परिवार में कई महिलाएं हैं। एक मेहनती निर्माता, जिसने कई लोकप्रिय शो बनाए हैं। उसे एक कठिन दौर से गुजरना पड़ा।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जैसा कि खुद एक्ट्रेस ने स्वीकार किया, उसके आरोप बेबुनियाद थे। उन आरोपों का इस्तेमाल फायदा उठाने, जीत हासिल करने, अंक बटोरने और बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए अपना दावा मनवाने के लिए किया गया। फिर भी, उसी निर्माता ने उसी व्यक्ति को दोबारा अपने शो में मौका दिया। एक और लॉन्चपैड, एक और मौका, एक और सहारा, जिससे उसके झूठे यौन उत्पीड़न के आरोप को सही ठहराने की कोशिश की जा सके। लेकिन अगर वह एक्ट्रेस फिर से ऐसा करती है तो?’ ‘आखिर उसे उसी व्यक्ति ने दोबारा काम दिया है, जिस पर उसने पहले झूठा आरोप लगाया था। मैं यह सब देखकर बेहद शॉक्ड हूं। अब तो लगता है कि मजाक हम सबके साथ हो रहा है।’ इसके लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए- पूजा बेदी एक्ट्रेस पूजा बेदी ने वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में शिल्पा शिंदे की निंदा करते हुए कहा, ‘कोई भी महिला जो पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का इस्तेमाल बदला लेने, निजी फायदे, दबाव बनाने, प्रचार पाने या किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए करती है, वह उन कानूनों के असली उद्देश्य के साथ विश्वासघात करती है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘झूठे आरोप न सिर्फ निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं, बल्कि इससे वास्तविक पीड़ितों की बात पर भी लोगों का भरोसा कम हो जाता है। कानून का इस तरह दुरुपयोग बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए कड़ी सजा होनी चाहिए।’ विवाद बढ़ने पर शिल्पा शिंदे ने दी सफाई पॉडकास्ट के बाद आलोचना होने और विवाद बढ़ने के बाद शिल्पा शिंदे ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो जारी कर सफाई दी है। उन्होंने कहा है, ‘ये जो पीआर चल रहा है, जो कमेंट्स आ रहे हैं, मुझे उन लोगों को बस इतना कहना है कि जो बोगे वही पाओगे। जो लोग बिना पूरी बात जाने समझे, मेरी चिंता कर रहे हैं कि अरे आपकी तो अब तक शादी ही नहीं हुई, वो लोग अपनी खुद की चिंता करें। एक सच बोलने वाले इंसान को आप झूठ बोल रहे हो। मुझे पता था कि ये होना ही है, क्योंकि दुनिया कभी किसी अच्छी चीज की तारीफ नहीं करती।’ आगे उन्होंने कहा, ‘मुझे ये बोलने की जरुरत नहीं थी। 10 साल के बाद भी मैं ये शो कर रही हूं। मैं पहले भी बोल सकती थी। तो जो लोग कह रहे हैं कि मैं ये शो के लिए बोल रही हूं, घंटा। मुझे आप लोगों की नजरों में उठना भी नहीं है। मैं अपनी नजरों में उठी हुई हूं। किसी ने मुझे ये कहने के लिए नहीं कहा था, मैं उस झूठ के साथ नहीं जी सकती थी। वो आज या कल मुझे बोलना ही था। जो मेरे साथ हुआ, वो आप लोगों को नहीं पता है। भगवान न करे, आपके या आपके परिवार के साथ ऐसा हो। वो जो टाइम था, वो मुझे पता है कि मैंने सिर्फ पैसों के लिए नहीं किया। मैं शो छोड़ चुकी थी, उससे निकल चुकी थी।’ ‘बिग बॉस के बाद मुझे एक शख्स मिला, जिसने मुझसे कहा कि मेरे फादर ने सुसाइड कमिट किया, क्योंकि मेरे काम की जगह मेरे बारे में ऐसी बातें कही गईं, जो सच नहीं थीं। मैं सुसाइड करने वाला था, मैंने सुसाइड नोट भी लिखा था, लेकिन मैंने बिग बॉस से आपका वीडियो देखा, आप इंस्पायरिंग हो मेरे लिए। अगर मैं जिंदा हूं तो आपकी वजह से।’ मैं सुसाइड करने वाली थी- शिल्पा शिंदे आखिर में शिल्पा ने कहा, ‘मैंने क्या सहा ये सिर्फ मुझे और उस इंसान को पता है, जिसके खिलाफ मैंने शिकायत की। सॉरी शब्द बहुत छोटा है, लेकिन उस वक्त की सिचुएशन के लिए उन्हें भी पता था कि यही सही था। मैं उस वक्त सुसाइड करने वाली थी। लेकिन लोग तब भी हंसते, गालियां देते। मैं लोगों की नजरों में उठना ही नहीं चाहती। मेरा पहले भी किसी ने सपोर्ट नहीं किया और मुझे अभी भी उम्मीद नहीं है। मैं ये सब लेने के लिए तैयार हूं।’ ‘जो लोग भौंक रहे हैं, उन्हें भौंकने दो, लेकिन मेरी सलाह है कि जो ये आप टाइम दे रहे हैं, वो किसी जरुरतमंद को दोगे, तो भला होगा। मेरा तो कुछ

शिल्पा शिंदे ने फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस करना कबूला:हिना खान समेत कई सेलेब्स भड़के, NGO ने की गिरफ्तारी की मांग, शिल्पा बोलीं- सुसाइड करने वाली थी

शिल्पा शिंदे ने फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस करना कबूला:हिना खान समेत कई सेलेब्स भड़के, NGO ने की गिरफ्तारी की मांग, शिल्पा बोलीं- सुसाइड करने वाली थी

बिग बॉस 11 की विनर और भाभी जी घर पर हैं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे अपने हालिया पॉडकास्ट से विवादों में घिर गई हैं। पॉडकास्ट में एक्ट्रेस ने कबूला कि उन्होंने अपने प्रोड्यूसर्स के खिलाफ फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकायत दर्ज करवाई थी। पॉडकास्ट आते ही शिल्पा शिंदे के खिलाफ एक NGO ने एक्शन लिए जाने की मांग की है। इसके अलावा हिना खान, पूजा बेदी समेत कई सेलेब्स एक्ट्रेस की आलोचना कर रहे हैं। विवादों के बीच शिल्पा शिंदे ने सफाई में कहा है कि वो उस वक्त सुसाइड करने वाली थीं, लेकिन अब उन्हें किसी भी तरह के विवाद से कोई फर्क नहीं पड़ता। शिल्पा ने वीडियो में आपत्तिजनक इशारे भी किए। शिल्पा शिंदे ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाछिया के पॉडकास्ट में कहा है कि उन्होंने टीवी शो भाभी जी घर पर हैं के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट की फर्जी शिकायत दर्ज करवाई थी। इससे उनकी बकाया पेमेंट चुका दी गई। NGO ने की गिरफ्तारी की मांग पुरुषों के हित में काम करने वाले एक NGO ने शिल्पा शिंदे की गिरफ्तारी की मांग की है। NCM इंडिया काउंसिल फॉर मैन अफेयर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा गया है, मुंबई पुलिस, प्लीज शिल्पा शिंदे को अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ झूठी शिकायत करने पर गिरफ्तार करें। ये बेहद शर्मनाक है- हिना खान बिग बॉस 11 की को-कंटेस्टेंट हिना खान ने शिल्पा की कड़ी आलोचना कर आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘किसी की छवि खराब करने या किसी विवाद में जीतने के लिए अपने महिला होने का फायदा उठाना बिल्कुल शर्मनाक है। और हर किसी को इसका विरोध करने और न्याय की मांग करने का पूरा अधिकार है। मैं यह देखकर बेहद हैरान हूं। लेकिन मैं यहां उस “असली पीड़ित” की बात करना चाहता हूं। एक सम्मानित व्यक्ति, जिसकी पत्नी, बेटी और परिवार में कई महिलाएं हैं। एक मेहनती निर्माता, जिसने कई लोकप्रिय शो बनाए हैं। उसे एक कठिन दौर से गुजरना पड़ा।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जैसा कि खुद एक्ट्रेस ने स्वीकार किया, उसके आरोप बेबुनियाद थे। उन आरोपों का इस्तेमाल फायदा उठाने, जीत हासिल करने, अंक बटोरने और बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए अपना दावा मनवाने के लिए किया गया। फिर भी, उसी निर्माता ने उसी व्यक्ति को दोबारा अपने शो में मौका दिया। एक और लॉन्चपैड, एक और मौका, एक और सहारा, जिससे उसके झूठे यौन उत्पीड़न के आरोप को सही ठहराने की कोशिश की जा सके। लेकिन अगर वह एक्ट्रेस फिर से ऐसा करती है तो?’ ‘आखिर उसे उसी व्यक्ति ने दोबारा काम दिया है, जिस पर उसने पहले झूठा आरोप लगाया था। मैं यह सब देखकर बेहद शॉक्ड हूं। अब तो लगता है कि मजाक हम सबके साथ हो रहा है।’ इसके लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए- पूजा बेदी एक्ट्रेस पूजा बेदी ने वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में शिल्पा शिंदे की निंदा करते हुए कहा, ‘कोई भी महिला जो पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का इस्तेमाल बदला लेने, निजी फायदे, दबाव बनाने, प्रचार पाने या किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए करती है, वह उन कानूनों के असली उद्देश्य के साथ विश्वासघात करती है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘झूठे आरोप न सिर्फ निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं, बल्कि इससे वास्तविक पीड़ितों की बात पर भी लोगों का भरोसा कम हो जाता है। कानून का इस तरह दुरुपयोग बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए कड़ी सजा होनी चाहिए।’ विवाद बढ़ने पर शिल्पा शिंदे ने दी सफाई पॉडकास्ट के बाद आलोचना होने और विवाद बढ़ने के बाद शिल्पा शिंदे ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो जारी कर सफाई दी है। उन्होंने कहा है, ‘ये जो पीआर चल रहा है, जो कमेंट्स आ रहे हैं, मुझे उन लोगों को बस इतना कहना है कि जो बोगे वही पाओगे। जो लोग बिना पूरी बात जाने समझे, मेरी चिंता कर रहे हैं कि अरे आपकी तो अब तक शादी ही नहीं हुई, वो लोग अपनी खुद की चिंता करें। एक सच बोलने वाले इंसान को आप झूठ बोल रहे हो। मुझे पता था कि ये होना ही है, क्योंकि दुनिया कभी किसी अच्छी चीज की तारीफ नहीं करती।’ आगे उन्होंने कहा, ‘मुझे ये बोलने की जरुरत नहीं थी। 10 साल के बाद भी मैं ये शो कर रही हूं। मैं पहले भी बोल सकती थी। तो जो लोग कह रहे हैं कि मैं ये शो के लिए बोल रही हूं, घंटा। मुझे आप लोगों की नजरों में उठना भी नहीं है। मैं अपनी नजरों में उठी हुई हूं। किसी ने मुझे ये कहने के लिए नहीं कहा था, मैं उस झूठ के साथ नहीं जी सकती थी। वो आज या कल मुझे बोलना ही था। जो मेरे साथ हुआ, वो आप लोगों को नहीं पता है। भगवान न करे, आपके या आपके परिवार के साथ ऐसा हो। वो जो टाइम था, वो मुझे पता है कि मैंने सिर्फ पैसों के लिए नहीं किया। मैं शो छोड़ चुकी थी, उससे निकल चुकी थी।’ ‘बिग बॉस के बाद मुझे एक शख्स मिला, जिसने मुझसे कहा कि मेरे फादर ने सुसाइड कमिट किया, क्योंकि मेरे काम की जगह मेरे बारे में ऐसी बातें कही गईं, जो सच नहीं थीं। मैं सुसाइड करने वाला था, मैंने सुसाइड नोट भी लिखा था, लेकिन मैंने बिग बॉस से आपका वीडियो देखा, आप इंस्पायरिंग हो मेरे लिए। अगर मैं जिंदा हूं तो आपकी वजह से।’ मैं सुसाइड करने वाली थी- शिल्पा शिंदे आखिर में शिल्पा ने कहा, ‘मैंने क्या सहा ये सिर्फ मुझे और उस इंसान को पता है, जिसके खिलाफ मैंने शिकायत की। सॉरी शब्द बहुत छोटा है, लेकिन उस वक्त की सिचुएशन के लिए उन्हें भी पता था कि यही सही था। मैं उस वक्त सुसाइड करने वाली थी। लेकिन लोग तब भी हंसते, गालियां देते। मैं लोगों की नजरों में उठना ही नहीं चाहती। मेरा पहले भी किसी ने सपोर्ट नहीं किया और मुझे अभी भी उम्मीद नहीं है। मैं ये सब लेने के लिए तैयार हूं।’ ‘जो लोग भौंक रहे हैं, उन्हें भौंकने दो, लेकिन मेरी सलाह है कि जो ये आप टाइम दे रहे हैं, वो किसी जरुरतमंद को दोगे, तो भला होगा। मेरा तो कुछ

कोहली अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से हटे:हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण नाम वापस लिया, रोहित की फिटनेस पर भी सस्पेंस

कोहली अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से हटे:हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण नाम वापस लिया, रोहित की फिटनेस पर भी सस्पेंस

भारत के सीनियर बैटर विराट कोहली हैमस्ट्रिंग चोट के कारण अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। न्यूज एजेंसी PTI ने BCCI के एक सूत्र के हवाले से कोहली के सीरीज से बाहर होने की पुष्टि की है। हालांकि, BCCI ने इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया है। एजेंसी ने लिखा- ‘कोहली हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वनडे सीरीज से बाहर हैं।’ विराट को दुनिया के सबसे फिट क्रिकेटर्स में गिना जाता है। 37 साल के कोहली ने RCB को लगातार दूसरा खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने फाइनल मैच में नाबाद 75 रन की पारी खेली थी। 14 जून को खेला जाएगा पहला वनडे मैच अफगानिस्तान का भारत दौरा 6 जून से शुरू हो रहा है। टीम मुल्लांपुर स्टेडियम पर 6 जून से सिंगल टेस्ट मैच खेलेगी। उसके बाद 14 जून से 3 वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी। रोहित शर्मा की फिटनेस पर भी नजरें कोहली के अलावा, पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा की फिटनेस पर भी सस्पेंस है। उन्हें हैमस्ट्रिंग चोट से उबरने की शर्त पर टीम में शामिल किया गया था। रोहित को चोट के कारण IPL के कुछ मैचों से बाहर रहना पड़ा था। रोहित की फिटनेस पर अंतिम फैसला टीम प्रबंधन और मेडिकल स्टाफ की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। (हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं।)

कोहली अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से हटे:रोहित की फिटनेस पर भी सस्पेंस, 13 जून को पहला वनडे खेलेगी टीम इंडिया

कोहली अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से हटे:रोहित की फिटनेस पर भी सस्पेंस, 13 जून को पहला वनडे खेलेगी टीम इंडिया

भारत के सीनियर बैटर विराट कोहली हैमस्ट्रिंग, यानी पैर की नस में खिंचाव की वजह से अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। न्यूज एजेंसी PTI ने BCCI के एक सूत्र के हवाले से कोहली के सीरीज से बाहर होने की पुष्टि की है। हालांकि, BCCI ने इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया है। एजेंसी ने लिखा- ‘कोहली हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वनडे सीरीज से बाहर हैं।’ विराट को दुनिया के सबसे फिट क्रिकेटर्स में गिना जाता है। 37 साल के कोहली ने RCB को लगातार दूसरा IPL खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने फाइनल मैच में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 75 रन की नाबाद पारी खेली थी। 13 जून को खेला जाएगा पहला वनडे मैच अफगानिस्तान का भारत दौरा 6 जून से शुरू हो रहा है। टीम मुल्लांपुर स्टेडियम पर 6 जून से सिंगल टेस्ट मैच खेलेगी। उसके बाद 13 जून से 3 वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी। रोहित शर्मा की फिटनेस पर भी नजरें कोहली के अलावा, पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा की फिटनेस पर भी सस्पेंस है। उन्हें हैमस्ट्रिंग चोट से उबरने की शर्त पर टीम में शामिल किया गया था। रोहित को चोट के कारण IPL के कुछ मैचों से बाहर रहना पड़ा था। रोहित की फिटनेस पर अंतिम फैसला टीम प्रबंधन और मेडिकल स्टाफ की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। सीरीज की व्यूअरशिप पर असर पड़ेगा कोहली और रोहित की गैरमौजूदगी से अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज की व्यूअरशिप पर असर पड़ेगा। क्योंकि, ये दोनों स्टार केवल वनडे क्रिकेट ही खेलते हैं। दोनों ने टी-20 और टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया है। ————————————- भारतीय क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… दावा- सूर्यकुमार यादव से टी-20 कप्तानी छिनेगी; 3 महीने पहले वर्ल्डकप जिताया था सूर्यकुमार यादव को भारतीय टी-20 टीम की कप्तानी से हटाया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उनकी टीम में जगह भी खतरे में है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे से पहले BCCI, टीम मैनेजमेंट और चयन समिति नया कप्तान बनाने पर विचार कर रही है। पढ़ें पूरी खबर

ममता का असली संकट 60 बागी विधायक नहीं हैं. ये हैं वो 17 लोग जो बंगाल की राजनीति को नया आकार दे सकते हैं | राजनीति समाचार

Sanju Samson (left) and Suryakumar Yadav (PTI Photo)

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 10:57 IST ऋतब्रत बनर्जी विद्रोह का चेहरा हो सकते हैं, लेकिन उनका समर्थन करने वाले मुस्लिम विधायक ममता बनर्जी के लिए संकट को और अधिक नुकसानदेह बना सकते हैं। एक दशक से अधिक समय तक, बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं पर ममता बनर्जी का प्रभुत्व लगभग अटल और अजेय दिखाई दिया। तृणमूल कांग्रेस के दलबदलू नेता और पहली बार विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि पार्टी के 80 में से 60 विधायक अलग होकर राज्य विधानसभा में एक अलग विधायी समूह बनाने के लिए तैयार हैं, शीर्षक संख्या 60 है। हालांकि, ममता बनर्जी के लिए, अधिक परिणामी संख्या 17 हो सकती है। ऋतब्रत बनर्जी के ‘असली तृणमूल’ अभियान का समर्थन करने वाले 60 तृणमूल विधायकों में से लगभग 17 से 18 मुस्लिम विधायक हैं जो मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण 24 परगना और बंगाल के अन्य अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसी भी अन्य पार्टी में, यह एक आँकड़ा होगा। तृणमूल कांग्रेस में यह पर्याप्त और चेतावनी का संकेत है. भले ही ममता बनर्जी मौजूदा तृणमूल ढांचे को भंग कर देती हैं और पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला करती हैं, लेकिन विद्रोही नेताओं की जगह लेना मुस्लिम गढ़ों में विश्वास बहाल करने की तुलना में कहीं अधिक आसान साबित हो सकता है, जो कभी उनका सबसे विश्वसनीय राजनीतिक किला हुआ करते थे। राजनीतिक संगठनों का पुनर्गठन किया जा सकता है। एक बार दरारें दिखाई देने लगें तो वोट बैंकों का पुनर्निर्माण करना बहुत कठिन हो जाता है। यह स्थिति कांग्रेस के लिए राज्य में राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने का अवसर भी पैदा कर सकती है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के सूत्रों ने कहा कि कुछ मुस्लिम विधायकों ने कई स्तरों पर कांग्रेस के साथ बातचीत शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “कुछ कांग्रेस विधायक वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं के पास पहुंचे और कुछ ने सीधे पीसीसी सदस्यों से भी संपर्क किया।” के साथ बात कर रहे हैं न्यूज18कांग्रेस संसदीय दल के पूर्व नेता और बंगाल के पूर्व पीसीसी प्रमुख अधीर चौधरी ने तृणमूल विधायक दल के नए स्वरूप को ‘भाजपा प्रायोजित तृणमूल’ बताया. तृणमूल के मुस्लिम विधायकों के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा, “मुस्लिम विधायक कांग्रेस के साथ रास्ते खोलना शुरू कर सकते हैं क्योंकि अगर वे लंबे समय तक ऐसी स्थिति में रहेंगे तो राज्य भर में अपने क्षेत्रों में वापस नहीं लौट पाएंगे।” एक वरिष्ठ तृणमूल नेता, जो अभी भी ममता बनर्जी के साथ हैं, ने कहा, “मुस्लिम नेताओं और कई अन्य लोगों ने दोहराया है कि वे तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा हैं और अभी भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हैं। यह एक अभूतपूर्व स्थिति है और किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि चीजें इस तरह सामने आएंगी। हम अब दीदी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।” विधानसभा में बागी विधायकों की बैठक के बाद, तृणमूल विधायक और विद्रोही समूह के सदस्य अख्रुज्जमां खान ने कहा, “हम तृणमूल के साथ हैं और ममता बनर्जी हमारी नेता हैं। जब उन्होंने बुलाया, तो हम गए। लेकिन विधायक दल के स्थापित नियमों की अनदेखी की गई, जिससे हम उपहास का पात्र बन गए। हमने विधायक दल की गरिमा की रक्षा के लिए काम किया। हमारी ममता बनर्जी से अपील है कि वह हमें औपचारिक मान्यता दें और हमारी प्रमुख सलाहकार बनें।” हार्टलैंड में एक विद्रोह एक दशक से अधिक समय तक, बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं पर ममता बनर्जी का प्रभुत्व लगभग अटल और अजेय दिखाई दिया। यह रिश्ता केवल चुनावी अंकगणित पर नहीं बना था। यह मुस्लिम विधायकों, जिला नेताओं, स्थानीय प्रभावशाली लोगों, मौलवियों और संगठनात्मक वफादारों के एक विशाल नेटवर्क पर निर्भर था जो तृणमूल को अपने प्राकृतिक राजनीतिक घर के रूप में देखते थे। यही कारण है कि वर्तमान विद्रोह इतना महत्वपूर्ण है। चुनौती यह नहीं है कि मुस्लिम मतदाताओं ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है. इसका अभी तक बहुत कम सबूत है। चुनौती यह है कि मुस्लिम विधायकों का एक बड़ा वर्ग रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समानांतर राजनीतिक गठन का खुले तौर पर समर्थन करने को तैयार दिखता है। समूह में जावेद अहमद खान भी शामिल हैं, जो समुदाय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में से एक और पूर्व मंत्री हैं। प्रतीकवाद उतना ही मायने रखता है जितना संख्याएँ। ऐतिहासिक रूप से, जब भी पार्टी को आंतरिक संकट का सामना करना पड़ा, तृणमूल के मुस्लिम नेतृत्व ने एक स्थिर शक्ति के रूप में काम किया। इस बार, उनमें से कई युद्ध रेखा के दूसरी ओर दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के सूत्रों से संकेत मिलता है कि कुछ नेताओं ने चुपचाप कांग्रेस और आईएसएफ के साथ भी रास्ते खोल लिए हैं और मौजूदा सत्ता संघर्ष जारी रहने के बावजूद भविष्य के राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। क्या ये चर्चाएँ औपचारिक गठबंधन या दल-बदल की ओर ले जाती हैं, यह गौण है। तथ्य यह है कि इस तरह की बातचीत बिल्कुल भी हो रही है, यह तृणमूल के पारंपरिक समर्थन ढांचे के कुछ वर्गों के भीतर बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाता है। ममता बनर्जी के लिए खतरा व्यक्तिगत विधायकों को खोने में नहीं है। यह उस संदेश में निहित है जो उन प्रस्थानों ने बंगाल के अल्पसंख्यक क्षेत्र में भेजा है। राजनीति अक्सर धारणा पर चलती है. और यह धारणा कि मुस्लिम नेता अपना दांव लगाना शुरू कर रहे हैं, विद्रोह से भी अधिक हानिकारक साबित हो सकता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में मधुपर्णा दास सीएनएन न्यूज 18 में एसोसिएट एडिटर (पॉलिसी) मधुपर्णा दास लगभग 14 वर्षों से पत्रकारिता में हैं। वह बड़े पैमाने पर राजनीति, नीति, अपराध और आंतरिक सुरक्षा मुद्दों को कवर करती रही हैं। उसके पास सह…और पढ़ें समाचार राजनीति ममता का असली संकट 60 बागी विधायक नहीं हैं. ये हैं वो 17 लोग जो बंगाल की राजनीति को नया आकार दे सकते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ 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French Open: Cobolli-Arnaldi Clash | Zverev, McEnroe Reach Top 4

French Open: Cobolli-Arnaldi Clash | Zverev, McEnroe Reach Top 4

Hindi News Sports French Open: Cobolli Arnaldi Clash | Zverev, McEnroe Reach Top 4 पेरिस15 मिनट पहले कॉपी लिंक वर्ल्ड नंबर-1 जैनिक सिनर और लोरेंजो मुसेटी के बाहर होने के बावजूद फ्रेंच ओपन में इटली का दबदबा कायम है। बुधवार रात फ्लावियो कोबोली और माटेओ अर्नाल्डी ने अपने-अपने मैच जीतकर मेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में जगह बना ली। अब शुक्रवार को दोनों के बीच सेमीफाइनल खेला जाएगा। यह ग्रैंड स्लैम इतिहास का पहला ऑल-इटैलियन मेंस सेमीफाइनल होगा। ऑल-इटैलियन सेमीफाइनल पर कोबोली ने कहा- ‘इटालियन टेनिस के लिए यह बेहद खुशी की बात है।’ पिछले साल सिनर और मुसेटी दोनों अंतिम चार में पहुंचे थे, लेकिन ड्रॉ के अलग-अलग हिस्सों में थे। कोबोली जीते, अर्नाल्डी के अपोनेंट ने मैच छोड़ा 24 वर्षीय कोबोली ने कनाडा के फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे को 4-6, 6-4, 6-4, 6-4 से हराकर अंतिम-4 में जगह बनाई। वहीं, अर्नाल्डी को हमवतन माटेओ बेरेटिनी के चोटिल होकर मैच छोड़ने से सेमीफाइनल का टिकट मिला। बेरेटिनी बाएं कूल्हे की चोट से जूझ रहे थे और दूसरे सेट में पीछे रहने के बाद मुकाबले से हट गए। माटेओ बेरेटिनी को चोट के कारण मैच से हटना पड़ा। ज्वेरेव-मेंसिक में दूसरा सेमीफाइनल पुरुष एकल कैटेगरी का दूसरा सेमीफाइनल जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव और चेक खिलाड़ी जैकब मेंसिक के बीच खेला जाएगा। ज्वेरेव ने स्पेन के राफेल जोदार को 7-6, 6-1, 6-3 से हराया। वहीं, मेंसिक ने ब्राजील के जोआओ फोन्सेका को 6-4, 6-3, 7-6 से हराया। फोन्सेका ने नोवाक जोकोविच को बाहर किया था। जीत के बाद प्रतिद्वंद्वी से हाथ मिलाते एलेक्जेंडर ज्वेरेव। युगल में भी इटली का दबदबा सारा एरानी और आंद्रेआ वावासोरी गुरुवार को मिश्रित युगल फाइनल खेलेंगे। वहीं, वावासोरी और सिमोने बोलेली पुरुष युगल के सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। ——————————————– दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

‘मुख्य सलाहकार और मार्गदर्शक’: क्या ममता ने वह तृणमूल कांग्रेस पार्टी खो दी है जिसे उन्होंने खड़ा किया था? | भारत समाचार

A photograph shows the aftermath of Israeli airstrikes in the Burj al-Chamali area near the southern city of Tyre, on June 2, 2026. (Photo: AFP)

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 10:23 IST पश्चिम बंगाल टीएमसी को बड़े विभाजन का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अधिकांश विधायकों द्वारा समर्थित विद्रोही विधायक रीतब्रत बनर्जी विपक्ष के नेता बन गए हैं, जिससे संस्थापक ममता बनर्जी अलग-थलग पड़ गई हैं। सत्ता बागी खेमे में स्थानांतरित होने से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पार्टी के भीतर अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। (स्रोत: पीटीआई) पश्चिम बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल न केवल एक प्रतिष्ठित पार्टी के विभाजन की ओर बढ़ने की कहानी बता रही है, बल्कि एक संस्थापक के उसी संगठन के भीतर तेजी से अलग-थलग होने का दुर्लभ दृश्य भी प्रस्तुत कर रही है, जिसे उसने बनाया था। तृणमूल कांग्रेस के भीतर दरारें तब स्पष्ट हो गईं जब इसके 80 में से 60 विधायक रविवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा उनके आवास पर बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए। सबसे बड़ा मोड़ बुधवार को आया जब निष्कासित बागी विधायक रीतब्रत बनर्जी अपने दावे के समर्थन में पार्टी के 58 विधायकों के हस्ताक्षर सौंपने के बाद विपक्ष के नेता बन गए, जबकि उन्होंने कहा कि जल्द ही दो और विधायकों का समर्थन मिलेगा। यह भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी को सीधी चुनौती, टीएमसी की बगावत का अगला पड़ाव हो सकता है लोकसभा! इस घटनाक्रम ने प्रभावी रूप से पार्टी के विधायी विंग का नियंत्रण विद्रोही खेमे को सौंप दिया, जिसने बाद में ममता बनर्जी से अपील की कि वे उनके “मुख्य सलाहकार” बने रहें और “विधानसभा के अंदर और बाहर रचनात्मक कार्य करने के लिए इस विधायक दल का मार्गदर्शन करें।” पार्टी के भीतर ममता का अलगाव और भी अधिक स्पष्ट हो गया है, क्योंकि अपनी विधानसभा सीट खोने के बाद, जो नेता कभी सदन की अध्यक्षता करते थे, वे अब सदस्य के रूप में इसमें प्रवेश नहीं कर सकते हैं। घटनाओं का नाटकीय मोड़ अब एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है: क्या ममता बनर्जी ने अपनी बनाई पार्टी पर नियंत्रण खो दिया है? टीएमसी के भीतर ममता के पतन का कारण क्या है? भारी चुनावी झटका ममता बनर्जी की मुश्किलें विधानसभा चुनावों से शुरू हुईं, जहां एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता खो दी। यह भी पढ़ें: जैसे-जैसे टीएमसी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर रही है, सवाल बढ़ता जा रहा है: अब भी ममता के साथ कौन खड़ा है? भबनीपुर निर्वाचन क्षेत्र में सुवेंदु अधिकारी के हाथों उनकी व्यक्तिगत हार से यह झटका और बढ़ गया, यह सीट लंबे समय से उनका राजनीतिक गढ़ मानी जाती थी। इस हार ने न केवल उन्हें विधानसभा में अपनी जगह से वंचित कर दिया, बल्कि पार्टी के भीतर उनके अधिकार को भी कमजोर कर दिया, जिससे आने वाले महीनों में उनके नेतृत्व को चुनौती देने के लिए असहमति की आवाजों को जगह मिल गई। संवैधानिक गतिरोध चुनाव के बाद, बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से तुरंत इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि जनादेश को “लूट लिया गया”। इस कदम से एक संक्षिप्त संवैधानिक गतिरोध पैदा हो गया, इससे पहले कि उनकी सरकार अंततः विधानसभा में अपना बहुमत खो देती। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव पर “जबरन कब्जा” कर लिया है और कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, इस रुख ने राज्य में संवैधानिक संकट के लिए मंच तैयार किया। उन्होंने कहा, “मुझे इस्तीफा क्यों देना चाहिए? हम हारे नहीं हैं।” उन्होंने कहा, “जनादेश लूट लिया गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?” बनर्जी ने कहा कि टीएमसी को “जनता के जनादेश से नहीं बल्कि साजिश से हराया गया है।” पार्टी के अंदर बगावत पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बमुश्किल एक महीने बाद, टीएमसी ने खुद को विभाजन के कगार पर पाया, जो कि विधानसभा चुनावों में 41% वोट हासिल करने वाली पार्टी के लिए एक नाटकीय गिरावट थी। यह भी पढ़ें: क्या एक निष्कासित विधायक टीएमसी पर कब्ज़ा कर सकता है? कानून क्या कहता है, 58 विद्रोहियों ने रीताब्रत बनर्जी का समर्थन किया है अशांति के संकेत 4 मई से ही सामने आने लगे, जब पार्टी की चुनावी हार का पैमाना स्पष्ट हो गया। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, हालाँकि असंतोष अभी तक एक संगठित विद्रोह में तब्दील नहीं हुआ था। पहली दिखाई देने वाली दरार दो दिन बाद ममता बनर्जी द्वारा अपने आवास पर बुलाई गई बैठक में उभरी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ने सभा में मौजूद विधायकों से कहा कि वे खड़े होकर अपने भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की सराहना करें, यह कदम कथित तौर पर विधायकों के एक वर्ग को पसंद नहीं आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते रीताब्रत बनर्जी की दिल्ली यात्रा के बाद विद्रोह में तेजी आई, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। उनकी वापसी के बाद, विधायकों के छात्रावास और कोलकाता के एक निजी होटल में कई बैठकें हुईं, क्योंकि पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट विधायकों को एकजुट करने के प्रयास तेज हो गए। स्पीकर के कार्यालय को सौंपे गए एक पत्र पर कथित फर्जी हस्ताक्षर को लेकर विवाद के बीच संकट गहरा गया है। टीएमसी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता, नयना बंद्योपाध्याय और आशिमा पात्रा को विपक्ष के उप नेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक के रूप में प्रस्तावित किया था। हालांकि, 1 जून को सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि ऋतब्रत बनर्जी और एंटली विधायक संदीपन साहा ने शिकायत की थी कि दस्तावेज़ पर उनके हस्ताक्षर जाली थे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विधायक अरूप रॉय और बहारुल इस्लाम ने जांचकर्ताओं को बताया था कि उन्होंने भी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। सोमवार को, टीएमसी ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया और औपचारिक रूप से अध्यक्ष को अपने फैसले की जानकारी दी। बढ़ते संकट के बीच, ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि दिल्ली में उनकी पार्टी में विभाजन की साजिश रची गई थी। यह संकट बुधवार को उस समय निर्णायक क्षण में पहुंच गया जब निष्कासित बागी विधायक रीतब्रत बनर्जी ने पार्टी के 58 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपकर विपक्ष के नेता पद के लिए दावा पेश किया। उन्होंने यह भी

Ram Gopal Verma Accused of non payment of 1.25 cr after he spoke against FWICE While supporting Ranveer singh

Ram Gopal Verma Accused of non payment of 1.25 cr after he spoke against FWICE While supporting Ranveer singh

5 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा, रणवीर सिंह का सपोर्ट कर फंसते नजर आ रहे हैं। हाल ही में राम गोपाल वर्मा ने FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉई) द्वारा रणवीर पर लगाए गए नॉन कोऑर्परेटिव डायरेक्टिव के आरोप पर कहा था कि फेडरेशन को बैन करना चाहिए, रणवीर को नहीं। अब हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेडरेशन ने राम गोपाल वर्मा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उन पर फेडरेशन के कर्मचारियों के 1.25 करोड़ पेमेंट बकाया है। साथ ही फेडरेशन के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने माफी की मांग भी की है। अशोक पंडित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम गोपाल वर्मा की निंदा करते हुए कहा ‘हमारी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कई लोगों ने फेडरेशन पर टिप्पणी की थी, जिनमें से एक राम गोपाल वर्मा भी थे, जिनका हम बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने एक लंबा ट्वीट कर फेडरेशन की आलोचना की, हमारी अधिकारिता पर सवाल उठाए और हमारे खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।’ आगे उन्होंने कहा, ‘बेशक, हम लोकतंत्र में रहते हैं और हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि हमारे टेक्नीशियन्स और कर्मचारियों का 1.25 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अब भी उन पर बकाया है। हम बिना आधार के आरोप नहीं लगा रहे हैं और न ही कोई हिसाब चुकता करने की कोशिश कर रहे हैं। हम केवल उन्हें उस मामले की याद दिला रहे हैं, जो 2017 से लंबित है। यह मामला उनकी फिल्म ऑफिसर से जुड़ा है, जिसमें नागार्जुन ने अभिनय किया था। हमने कई बार उनसे संपर्क किया और इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की।’ प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक पंडित ने राम गोपाल वर्मा पर नॉन पेमेंट का आरोप लगाते हुए कहा, ‘2019 में राम गोपाल वर्मा ने फेडरेशन को पत्र लिखकर स्वीकार किया था कि फेडरेशन के सदस्यों और अन्य विक्रेताओं का भुगतान बकाया है। उन्होंने 4 मार्च 2019 तक का समय मांगा था ताकि सभी देनदारियां चुकाई जा सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसा नहीं हो पाया, तो FWICE अपनी ओर से उचित समझी जाने वाली कोई भी कार्रवाई कर सकता है। अब 2026 आ गया है और वे भुगतान अब तक नहीं किए गए हैं।’ आखिर में राम गोपाल वर्मा को चेतावनी देते हुए अशोक पंडित ने कहा, ‘फेडरेशन के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर हमें कड़ी आपत्ति है। संगठन को गाली देने के बजाय उन्हें फेडरेशन से माफी मांगनी चाहिए और इन लंबे समय से लंबित बकायों का निपटारा करना चाहिए।’ क्या था राम गोपाल वर्मा का बयान रणवीर सिंह पर नॉन कॉर्परेटिव डायरेक्टिव की घोषणा होने के बाद कई लोगों ने इसकी निंदा की। इस पर राम गोपाल वर्मा ने रणवीर का सपोर्ट कर आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा था, ‘FWICE पर प्रतिबंध लगाओ, रणवीर सिंह पर नहीं। गांधीजी की शैली में किया जा रहा तथाकथित “बैन” या “असहयोग” आखिरकार FWICE के लिए एक बड़ा मजाक बनकर रह जाएगा।’ ‘यह इंडस्ट्री या उसमें काम करने वालों की सुरक्षा नहीं है, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं। यह सिर्फ ताकत दिखाने की कोशिश है, जिसे एक बेहद पुरानी और बेकार यूनियन व्यवस्था अंजाम दे रही है, जो किसी तरह अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘चाहे FWICE यह दावा करे कि वह 5 लाख या 50 लाख कर्मचारियों को रिप्रेजेंट करता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उन लाखों लोगों में से ज्यादातर को इस विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के अंदरूनी फैक्ट्स की जानकारी तक नहीं है। FWICE न तो कोई अदालत है, न ही सरकार द्वारा अधिकृत कोई नियामक संस्था। अधिक से अधिक इसे एक “कंगारू कोर्ट” कहा जा सकता है, जो परिभाषा के अनुसार न्याय देने का दिखावा करती है, लेकिन वास्तव में स्थापित कानूनी नियमों, उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता की अनदेखी करती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके फैसले अक्सर पहले से ही एक खास एजेंडा रखने वाले लोगों के समूह द्वारा निजी बैठकों में तय कर लिए जाते हैं। इनमें ऐसे अभिनेता भी शामिल होते हैं, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता से बुरी तरह घबराए हुए हैं।’ अब जानिए क्या है पूरा मामला- FWICE ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन जारी किया था, जिसके तहत संस्था ने अपने सभी सदस्यों से रणवीर के किसी भी प्रोजेक्ट में काम न करने को कहा था। यह पूरा विवाद रणवीर सिंह के फिल्म डॉन 3 से बाहर होने से जुड़ा था। इस फिल्म को फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोड्यूस कर रही थी। मामले में कहा गया कि फिल्म की तैयारियां पूरी होने और शूटिंग शुरू होने से मात्र तीन हफ्ते पहले रणवीर सिंह प्रोजेक्ट से बाहर हो गए। प्रोजेक्ट छोड़ने से हुए नुकसान के एवज में मेकर्स ने रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Ram Gopal Verma Accused of non payment of 1.25 cr after he spoke against FWICE While supporting Ranveer singh

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6 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा, रणवीर सिंह का सपोर्ट कर फंसते नजर आ रहे हैं। हाल ही में राम गोपाल वर्मा ने FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉई) द्वारा रणवीर पर लगाए गए नॉन कोऑर्परेटिव डायरेक्टिव के आरोप पर कहा था कि फेडरेशन को बैन करना चाहिए, रणवीर को नहीं। अब हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेडरेशन ने राम गोपाल वर्मा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उन पर फेडरेशन के कर्मचारियों के 1.25 करोड़ पेमेंट बकाया है। साथ ही फेडरेशन के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने माफी की मांग भी की है। अशोक पंडित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम गोपाल वर्मा की निंदा करते हुए कहा ‘हमारी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कई लोगों ने फेडरेशन पर टिप्पणी की थी, जिनमें से एक राम गोपाल वर्मा भी थे, जिनका हम बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने एक लंबा ट्वीट कर फेडरेशन की आलोचना की, हमारी अधिकारिता पर सवाल उठाए और हमारे खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।’ आगे उन्होंने कहा, ‘बेशक, हम लोकतंत्र में रहते हैं और हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि हमारे टेक्नीशियन्स और कर्मचारियों का 1.25 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अब भी उन पर बकाया है। हम बिना आधार के आरोप नहीं लगा रहे हैं और न ही कोई हिसाब चुकता करने की कोशिश कर रहे हैं। हम केवल उन्हें उस मामले की याद दिला रहे हैं, जो 2017 से लंबित है। यह मामला उनकी फिल्म ऑफिसर से जुड़ा है, जिसमें नागार्जुन ने अभिनय किया था। हमने कई बार उनसे संपर्क किया और इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की।’ प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक पंडित ने राम गोपाल वर्मा पर नॉन पेमेंट का आरोप लगाते हुए कहा, ‘2019 में राम गोपाल वर्मा ने फेडरेशन को पत्र लिखकर स्वीकार किया था कि फेडरेशन के सदस्यों और अन्य विक्रेताओं का भुगतान बकाया है। उन्होंने 4 मार्च 2019 तक का समय मांगा था ताकि सभी देनदारियां चुकाई जा सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसा नहीं हो पाया, तो FWICE अपनी ओर से उचित समझी जाने वाली कोई भी कार्रवाई कर सकता है। अब 2026 आ गया है और वे भुगतान अब तक नहीं किए गए हैं।’ आखिर में राम गोपाल वर्मा को चेतावनी देते हुए अशोक पंडित ने कहा, ‘फेडरेशन के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर हमें कड़ी आपत्ति है। संगठन को गाली देने के बजाय उन्हें फेडरेशन से माफी मांगनी चाहिए और इन लंबे समय से लंबित बकायों का निपटारा करना चाहिए।’ क्या था राम गोपाल वर्मा का बयान रणवीर सिंह पर नॉन कॉर्परेटिव डायरेक्टिव की घोषणा होने के बाद कई लोगों ने इसकी निंदा की। इस पर राम गोपाल वर्मा ने रणवीर का सपोर्ट कर आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा था, ‘FWICE पर प्रतिबंध लगाओ, रणवीर सिंह पर नहीं। गांधीजी की शैली में किया जा रहा तथाकथित “बैन” या “असहयोग” आखिरकार FWICE के लिए एक बड़ा मजाक बनकर रह जाएगा।’ ‘यह इंडस्ट्री या उसमें काम करने वालों की सुरक्षा नहीं है, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं। यह सिर्फ ताकत दिखाने की कोशिश है, जिसे एक बेहद पुरानी और बेकार यूनियन व्यवस्था अंजाम दे रही है, जो किसी तरह अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘चाहे FWICE यह दावा करे कि वह 5 लाख या 50 लाख कर्मचारियों को रिप्रेजेंट करता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उन लाखों लोगों में से ज्यादातर को इस विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के अंदरूनी फैक्ट्स की जानकारी तक नहीं है। FWICE न तो कोई अदालत है, न ही सरकार द्वारा अधिकृत कोई नियामक संस्था। अधिक से अधिक इसे एक “कंगारू कोर्ट” कहा जा सकता है, जो परिभाषा के अनुसार न्याय देने का दिखावा करती है, लेकिन वास्तव में स्थापित कानूनी नियमों, उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता की अनदेखी करती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके फैसले अक्सर पहले से ही एक खास एजेंडा रखने वाले लोगों के समूह द्वारा निजी बैठकों में तय कर लिए जाते हैं। इनमें ऐसे अभिनेता भी शामिल होते हैं, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता से बुरी तरह घबराए हुए हैं।’ अब जानिए क्या है पूरा मामला- FWICE ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन जारी किया था, जिसके तहत संस्था ने अपने सभी सदस्यों से रणवीर के किसी भी प्रोजेक्ट में काम न करने को कहा था। यह पूरा विवाद रणवीर सिंह के फिल्म डॉन 3 से बाहर होने से जुड़ा था। इस फिल्म को फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोड्यूस कर रही थी। मामले में कहा गया कि फिल्म की तैयारियां पूरी होने और शूटिंग शुरू होने से मात्र तीन हफ्ते पहले रणवीर सिंह प्रोजेक्ट से बाहर हो गए। प्रोजेक्ट छोड़ने से हुए नुकसान के एवज में मेकर्स ने रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

मुकेश अंबानी से आगे निकले टिकटॉक के सह-संस्थापक:यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, अंबानी तीसरे नंबर पर खिसके

मुकेश अंबानी से आगे निकले टिकटॉक के सह-संस्थापक:यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, अंबानी तीसरे नंबर पर खिसके

टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइडांस के को-फाउंडर झांग यिमिंग मुकेश अंबानी को पीछे छोड़कर एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, झांग की संपत्ति अब 8.9 लाख करोड़ रुपए (93 बिलियन डॉलर) हो गई है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी की संपत्ति 8.31 लाख करोड़ रुपए (86 बिलियन डॉलर) रह गई है। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति अडाणी ग्रुप के मालिक गौतम अडाणी हैं। एशिया के टॉप 5 सबसे अमीर व्यक्ति एआई चैटबॉट डौबाओ के सफलता से बढ़ी झांग की दौलत झांग की दौलत बाइडांस की वैल्युएशन बढ़ने और एआई चैटबॉट डौबाओ की सफलता से बढ़ी है। यह भारत और दुनियाभर में मशहूर ओपनएआई के चैटजीपीटी और गूगल के जेमिनाई जैसा ही एडवांस्ड एआई असिस्टेंट है। चीन में इस चैटबॉट के 30 करोड़ यूजर्स हैं। 7 सालों में 7 गुना बढ़ी संपत्ति झांग 2019 में 1.24 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक थे। बीते 7 साल में उनकी संपत्ति सात गुना ये ज्यादा बढ़ चुकी है। अमेरिका में टिकटॉक का बिजनेस बिकने से कंपनी का संकट दूर हो गया। ब्लूमबर्ग ने इसकी वैल्यू में 25% कटौती घटाकर 10% कर दी है। इससे ब्लैकरॉक और फिडेलिटी जैसे निवेशकों के विश्लेषण के बाद झांग की संपत्ति 2.30 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है। कंपनी एआई सेक्टर में इस साल 6.7 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। बहरहाल, गौतम अदाणी 11.19 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। इलॉन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क की कुल संपत्ति 69 लाख करोड़ रुपए (726 बिलियन डॉलर) है। वहीं इस मामले में दूसरे नंबर पर गूगल के फाउंडर लैरी पेज और तीसरे पर लैरी एलिशन हैं।