Wednesday, 22 Jul 2026 | 02:16 AM

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PV Sindhu Out Indonesia Open

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जकार्ता35 मिनट पहले कॉपी लिंक यंग ने सिंधु को 21-17, 21-14 से हराया। (क्रेडिट- बैडमिंटन फोटो) भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु जकार्ता में खेले जा रहे इंडोनेशिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के राउंड ऑफ-16 से बाहर हो गईं। उन्हें गुरुवार को वर्ल्ड की नंबर-1 और ओलिंपिक चैंपियन एन से यंग ने 21-17, 21-14 से हराकर बाहर कर दिया। यंग ने सिंधु को लगातार 10वें मैच में हराया है। साउथ कोरिया की यंग ने सिंधु को पिछले हफ्ते सिंगापुर ओपन के क्वार्टर फाइनल में भी हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था। लगातार दूसरी हार के साथ साउथ कोरियाई खिलाड़ी के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड और खराब हो गया। सिंधु अब तक एन से यंग को एक भी बार नहीं हरा सकी हैं। शटल-कॉक को प्रतिद्वंद्वी के पाले में भेजने का प्रयास करती पीवी सिंधु। (क्रेडिट- बैडमिंटन फोटो) यंग ने 41 शॉट्स की लंबी रैली जीती पहला गेम: सिंधु ने एन से यंग कड़ी चुनौती दी। एक समय स्कोर 10-10 से बराबर था और भारतीय खिलाड़ी 15-14 से आगे भी निकल गई थीं। लेकिन इसके बाद एन से यंग ने लगातार अंक बटोरते हुए बढ़त हासिल कर ली। उन्होंने 41 शॉट्स की लंबी रैली जीतने के बाद पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया। दूसरा गेम: साउथ कोरियाई खिलाड़ी ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। उन्होंने 13-6 की बढ़त हासिल की और सिंधु की वापसी की कोशिशों को नाकाम करते हुए 21-14 से गेम और मैच को अपने नाम कर लिया। शानदार कोर्ट कवरेज से जीतीं यंग एन से यंग की शानदार कोर्ट कवरेज और लगातार दबाव बनाने की क्षमता मुकाबले का निर्णायक पहलू साबित हुई। जीत के साथ वह क्वार्टर फाइनल में पहुंच गईं, जबकि सिंधु को एक बार फिर प्री-क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर होना पड़ा। ———————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… ग्रैंड स्लैम इतिहास में पहली बार 2 इटैलियन में सेमीफाइनल, फ्रेंच ओपन में कोबोली-अर्नाल्डी के बीच मैच वर्ल्ड नंबर-1 जैनिक सिनर और लोरेंजो मुसेटी के बाहर होने के बावजूद फ्रेंच ओपन में इटली का दबदबा कायम है। बुधवार रात फ्लावियो कोबोली और माटेओ अर्नाल्डी ने अपने-अपने मैच जीतकर मेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में जगह बना ली। अब शुक्रवार को दोनों के बीच सेमीफाइनल खेला जाएगा। यह ग्रैंड स्लैम इतिहास का पहला ऑल-इटैलियन मेंस सेमीफाइनल होगा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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जकार्ता19 मिनट पहले कॉपी लिंक यंग ने सिंधु को 21-17, 21-14 से हराया। (क्रेडिट- बैडमिंटन फोटो) भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु जकार्ता में खेले जा रहे इंडोनेशिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के राउंड ऑफ-16 से बाहर हो गईं। उन्हें गुरुवार को वर्ल्ड की नंबर-1 और ओलिंपिक चैंपियन एन से यंग ने 21-17, 21-14 से हराकर बाहर कर दिया। यंग ने सिंधु को लगातार 10वें मैच में हराया है। साउथ कोरिया की यंग ने सिंधु को पिछले हफ्ते सिंगापुर ओपन के क्वार्टर फाइनल में भी हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था। लगातार दूसरी हार के साथ साउथ कोरियाई खिलाड़ी के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड और खराब हो गया। सिंधु अब तक एन से यंग को एक भी बार नहीं हरा सकी हैं। शटल-कॉक को प्रतिद्वंद्वी के पाले में भेजने का प्रयास करती पीवी सिंधु। (क्रेडिट- बैडमिंटन फोटो) यंग ने 41 शॉट्स की लंबी रैली जीती पहला गेम: सिंधु ने एन से यंग कड़ी चुनौती दी। एक समय स्कोर 10-10 से बराबर था और भारतीय खिलाड़ी 15-14 से आगे भी निकल गई थीं। लेकिन इसके बाद एन से यंग ने लगातार अंक बटोरते हुए बढ़त हासिल कर ली। उन्होंने 41 शॉट्स की लंबी रैली जीतने के बाद पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया। दूसरा गेम: साउथ कोरियाई खिलाड़ी ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। उन्होंने 13-6 की बढ़त हासिल की और सिंधु की वापसी की कोशिशों को नाकाम करते हुए 21-14 से गेम और मैच को अपने नाम कर लिया। शानदार कोर्ट कवरेज से जीतीं यंग एन से यंग की शानदार कोर्ट कवरेज और लगातार दबाव बनाने की क्षमता मुकाबले का निर्णायक पहलू साबित हुई। जीत के साथ वह क्वार्टर फाइनल में पहुंच गईं, जबकि सिंधु को एक बार फिर प्री-क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर होना पड़ा। ———————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… ग्रैंड स्लैम इतिहास में पहली बार 2 इटैलियन में सेमीफाइनल, फ्रेंच ओपन में कोबोली-अर्नाल्डी के बीच मैच वर्ल्ड नंबर-1 जैनिक सिनर और लोरेंजो मुसेटी के बाहर होने के बावजूद फ्रेंच ओपन में इटली का दबदबा कायम है। बुधवार रात फ्लावियो कोबोली और माटेओ अर्नाल्डी ने अपने-अपने मैच जीतकर मेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में जगह बना ली। अब शुक्रवार को दोनों के बीच सेमीफाइनल खेला जाएगा। यह ग्रैंड स्लैम इतिहास का पहला ऑल-इटैलियन मेंस सेमीफाइनल होगा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

‘कारामेलो’ कुत्ते पर भिड़े ब्राजील-मैक्सिको:करेंसी और सांस्कृतिक प्रतीक का विवाद; ब्राजील बोला- सांबा ही है हमारी पहचान

‘कारामेलो’ कुत्ते पर भिड़े ब्राजील-मैक्सिको:करेंसी और सांस्कृतिक प्रतीक का विवाद; ब्राजील बोला- सांबा ही है हमारी पहचान

दुनिया में देशों के बीच विवाद आमतौर पर सीमा, व्यापार या राजनीति को लेकर होते हैं, लेकिन इन दिनों ब्राजील और मैक्सिको के बीच बहस की वजह एक आवारा कुत्ता बना हुआ है। भूरे रंग के देसी कुत्ते, जो ब्राजील में करोड़ों की संख्या में पाए जाते हैं, वहां ‘कारामेलो’ कहलाते हैं। अब यही कुत्ते दोनों देशों के बीच पहचान की लड़ाई के केंद्र में आ गए हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब अप्रैल में मैक्सिको ने ‘पेरो कारामेलो’ को अपनी स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया और इसे सांस्कृतिक प्रतीक का दर्जा दिया। इसके बाद ब्राजील में सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में बवाल मच गया, लोग सवाल उठाने लगे कि जिस कुत्ते को दशकों से ब्राजील की पहचान माना जाता है, उस पर मैक्सिको दावा कैसे कर सकता है। रियो डी जेनेरियो की लुसियाना कहती हैं, कारामेलो ब्राजील का चेहरा है। कोई इसे गैर-ब्राजीलियाई कैसे कह सकता है? कारामेलो सिर्फ आवारा जानवर नहीं हैं। वे जनजीवन में इस कदर रचे-बसे हैं कि मीम्स, टी-शर्ट्स, वायरल गानों, झांकियों और फिल्मों में भी जगह बना चुके हैं। पिछले साल नेटफ्लिक्स पर इनके ऊपर ‘कारामेलो’ नाम की फिल्म भी आई थी। इतना ही नहीं, हाल ही में इन्हें ब्राजील की करेंसी पर छापने का प्रस्ताव भी संसद में आया था। मैक्सिको के पशु कल्याण कार्यकर्ता कहते हैं कि वहां भी ऐसे ही कुत्ते बड़ी संख्या में मौजूद हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों का मौसम और इतिहास काफी हद तक समान रहा है। यह केवल एक देश का नहीं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका का कुत्ता है।’ दिलचस्प बात है कि बहस पहचान की है, लेकिन समस्या कहीं बड़ी है। ब्राजील में आज भी 2 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते हैं और उनमें 90% से ज्यादा कारामेलो हैं। लोकप्रिय होने के बावजूद गोद लेने के समय लोग अक्सर विदेशी नस्लों को प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के पशु प्रेमी एक बात पर सहमत हैं-कारामेलो चाहे ब्राजील का हो, मैक्सिको का उसे सिर्फ ‘आवारा’ नहीं, बल्कि एक ऐसे साथी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसे घर और अपनापन दोनों मिल सके। 300 विदेशी प्रजातियों से विकसित है अनोखे नस्ल का यह डॉग वैज्ञानिक दृष्टि से कारामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल के कुत्ते नहीं हैं। एक अध्ययन के मुताबिक इन कुत्तों में करीब 300 नस्लों का मिश्रण है। पुर्तगाली उपनिवेशकों और बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन तथा जापान से आए प्रवासियों के साथ अलग-अलग नस्लों के कुत्ते ब्राजील पहुंचे थे। इन्हीं के मेल से यह अनोखा समूह विकसित हुआ। मिश्रित नस्ल होने के कारण इनमें आनुवंशिक बीमारियों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम होता है।

सोना ₹545 बढ़कर ₹1.56 लाख का 10 ग्राम हुआ:चांदी आज ₹2,432 गिरकर 2.59 लाख पर आई, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत

सोना ₹545 बढ़कर ₹1.56 लाख का 10 ग्राम हुआ:चांदी आज ₹2,432 गिरकर 2.59 लाख पर आई, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत

सोने के दाम में आज यानी 4 जून को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 545 रुपए बढ़कर 1.56 लाख रुपए हो गया है। हालांकि चांदी के दाम में आज गिरावट है। 1 किलो चांदी की कीमत 2,432 रुपए कम होकर 2.59 लाख रुपए पर आ गई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 4 जून 2026 सोना इस साल 23 हजार और चांदी 29 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 23 हजार रुपए और चांदी 29 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.56 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.59 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें।

पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, कभी खून की उल्टी होने की शिकायत थी

पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, कभी खून की उल्टी होने की शिकायत थी

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं।

पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, गोविंदा को मानते थे इनसिक्योर

पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, गोविंदा को मानते थे इनसिक्योर

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे, उन्हें किडनी से संबंधित दिक्कतें थीं। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं। 2015-17 तक CBFC के चीफ रहे, कई आरोप लगे पहलाज निहलानी 2015 से 2017 तक CBFC के चीफ रहे हैं। कई लोगों ने उन पर फिल्मों से हिंसक और इंटिमेट सीन बेवजह छोटे करने के आरोप लगाए थे और इसके चलते उनका कार्यकाल विवादित रहा था। जेम्स बॉन्ड सीरीज की फिल्म ‘स्पेक्टर’ से किसिंग सीन को छोटा कराने पर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी। निहलानी ने शाहिद कपूर स्टार ‘उड़ता पंजाब’ में कथित तौर पर 69 कट लगाने के लिए कहा था, जो काफी चर्चा में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC के फैसले को गलत बताया और फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई थी। 2017 में सरकार ने उन्हें हटाकर गीतकार प्रसून जोशी को CBFC का नया चेयरमैन बनाया था। खून की उल्टियां होने पर, 5 साल पहले 29 दिनों तक एडमिट रहे थे पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “एक रात अचानक से 3 बजे मुझे बेचैनी होने लगी और खून की उल्टियां भी हुईं। मुझे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। यह क्रोनिक फूड पॉइजनिंग का मामला था। लेकिन इमरजेंसी थी। शुरुआत में मुझे 5-6 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा गया।” “जब मैं आईसीयू से बाहर आया तो सोचा कि 2-3 दिन में मैं घर चला जाऊंगा। लेकिन लंबे समय तक मेरा टेम्प्रेचर कम नहीं हुआ। मुझे बुखार आ रहा था और शाम के वक्त पेट में भी बहुत दर्द हो रहा था। डायग्नोसिस बढ़ता गया और यह चिंता का विषय बन गया।” गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक पहलाज निहलानी ने ही गोविंदा को उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक दिया था। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर बात करते हुए कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था। लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी, तो मैंने उससे एक दिन मांगा। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो।’ आगे उन्होंने कहा, ‘लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। हालांकि उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ गोविंदा के पास काम नहीं था, तो दी गई शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज निहलानी ने आगे कहा, जब गोविंदा के पास काम नहीं था, ‘जब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी। क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।’ ‘उसके पिता बहुत बड़े हीरो रहे हैं महबूब खान के। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती हैं। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ ‘इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।’

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।

शरद पवार की पोती की शादी लखानी परिवार में, बीजेपी-आरएसएस संबंधों पर बनी सुर्खियां | राजनीति समाचार

Sanju Samson (left) and Suryakumar Yadav (PTI Photo)

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 11:59 IST महाराष्ट्र के प्रमुख परिवारों के बीच गठबंधन को कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस द्वारा सुगम बनाया गया था, जो दोनों नागपुर से आते हैं। शरद पवार की पोती रेवती सुले और बीजेपी नेता अरुण लखानी के बेटे सारंग शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। (एक्स) जैसा कि राजनीतिक हलकों में शरद पवार की पोती रेवती सुले और भाजपा नेता अरुण लखानी के बेटे सारंग की आगामी शादी पर चर्चा जारी है, नया ध्यान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के साथ लखानी परिवार के लंबे समय से जुड़ाव की ओर गया है। दोनों परिवारों के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बार-बार तंज कसने के बीच भी इस घटनाक्रम को महत्व मिला है, खासकर तब जब आगामी चुनावों के लिए एमएलसी की भाजपा सूची में लखानी का नाम शामिल है। लखानी वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से चुनाव लड़ेंगे। सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के दो प्रमुख परिवारों के बीच गठबंधन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस द्वारा किया गया था, जो दोनों नागपुर से हैं और लखानी और पवार परिवारों के साथ लंबे समय से संबंध साझा करने के लिए जाने जाते हैं। कौन हैं अरुण लखानी? महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मलकापुर से एमटेक स्नातक, अरुण लखानी आरएसएस परंपरा में गहराई से जुड़े परिवार से आते हैं। उनके पिता, जिन्होंने 1934 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एमटेक की डिग्री हासिल की थी, सक्रिय रूप से संघ से जुड़े थे, जबकि उनके बड़े भाई वर्तमान में मलकापुर के संघचालक के रूप में कार्यरत हैं। लखानी 1999 से भाजपा से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के संयुक्त कोषाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं, यह पद उन्होंने दिसंबर 2023 में ग्रहण किया था। राजनीति से परे, उन्होंने खेल प्रशासन में प्रमुख भूमिका निभाई है। वह 2014 से महाराष्ट्र बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष, 2016 से भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और 2022 से राष्ट्रीय निकाय के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें 2026 में महाराष्ट्र ओलंपिक एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था। लखानी सामाजिक और शैक्षिक पहलों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उन्होंने 2016 से 2026 तक आरएसएस से जुड़े लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। ट्रस्ट विदर्भ के आदिवासी क्षेत्रों में लगभग 1,000 एकल-शिक्षक स्कूल चलाता है और विभिन्न शैक्षिक आउटरीच कार्यक्रम चलाता है। इससे पहले, उन्होंने नरकेसरी प्रकाशन का नेतृत्व किया, जो नागपुर से मराठी दैनिक तरुण भारत प्रकाशित करता है। उन्होंने 1998 से 2003 तक साईं मंदिर, नागपुर के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। आगामी शादी ने काफी राजनीतिक दिलचस्पी पैदा कर दी है, पर्यवेक्षकों ने कहा कि यह महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक और संघ परिवार और भाजपा के साथ गहरे संगठनात्मक और वैचारिक संबंधों वाले परिवार को एक साथ लाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : नागपुर, भारत, भारत समाचार राजनीति शरद पवार की पोती की शादी लखानी परिवार में होने वाली है, बीजेपी-आरएसएस संबंधों पर चर्चा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शरद पवार की पोती की शादी(टी)रेवती सुले की शादी(टी)अरुण लखानी के बेटे सारंग(टी)लखानी परिवार आरएसएस लिंक(टी)बीजेपी महाराष्ट्र की राजनीति(टी)नितिन गडकरी की भूमिका(टी)देवेंद्र फड़नवीस नागपुर(टी)महाराष्ट्र के राजनीतिक परिवार

पंजाब-चंडीगढ़ में चढ़ेगा टेस्ट क्रिकेट का फीवर:6 जून को मुल्लांपुर में भारत-अफगानिस्तान का मैच, शुभमन गिल होंगे कप्तान; गंभीर पहुंचे नाडा साहिब

पंजाब-चंडीगढ़ में चढ़ेगा टेस्ट क्रिकेट का फीवर:6 जून को मुल्लांपुर में भारत-अफगानिस्तान का मैच, शुभमन गिल होंगे कप्तान; गंभीर पहुंचे नाडा साहिब

आईपीएल के मैच भले ही खत्म हो गए हैं, लेकिन क्रिकेट का रोमांच अभी बाकी है। 6 जून से न्यू चंडीगढ़ में भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच खेला जाएगा। दोनों टीमें चंडीगढ़ पहुंच चुकी हैं और प्रैक्टिस जारी है। यह ऐतिहासिक मुकाबला पंजाब और देश के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने नाडा साहिब पहुंचकर माथा टेका और आशीर्वाद लिया। बता दें कि, यह मैच 2 वजहों से खास है। पहला मुल्लांपुर में बने स्टेडियम में पहली बार कोई टेस्ट मैच खेला जाएगा। ऐसे में पीसीए इसकी मेजबानी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। दूसरा शहर के युवा खिलाड़ी शुभमन गिल टीम इंडिया की कप्तानी करेंगे। वहीं, गुरनूर सिंह के लिए भी यह मुकाबला खास रहेगा। शुभमन ने हाल ही में आईपीएल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। पिच क्यूरेटर से कोच की लंबी चर्चा भारत और अफगानिस्तान के बीच इससे पहले 2018 में एकमात्र टेस्ट मैच खेला गया था, जिसमें भारत जीती थी। उस समय टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथों में थी। हेड कोच गौतम गंभीर भी चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। उन्होंने पिच क्यूरेटर के साथ लंबी चर्चा की है। इसकी एक बड़ी वजह अफगानिस्तान का मजबूत स्पिन आक्रमण है। अफगान टीम के पास कई बेहतरीन स्पिनर मौजूद हैं। वहीं भारतीय टीम इस विभाग में थोड़ी कमजोर नजर आ रही है। रविचंद्रन अश्विन संन्यास ले चुके हैं, जबकि रविंद्र जडेजा टीम का हिस्सा नहीं हैं। अक्षर पटेल को भी टीम में जगह नहीं मिली है। हालांकि कुलदीप यादव और वाशिंगटन सुंदर टीम में शामिल हैं। हर्ष दुबे को पहली बार भारतीय टीम में मौका मिला है। मैच से जुड़ी यह 3 बातें भी ध्यान में रखिए:- 6 से 10 जून तक खेला जाएगा मैच: पीसीए सचिव गुरमीत सिंह मीत हेयर ने बताया कि 6 से 10 जून तक भारत और अफगानिस्तान के बीच टेस्ट मैच खेला जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार मुल्लांपुर स्टेडियम को टेस्ट मैच की मेजबानी का मौका मिला है। यह भारत का 31वां और पंजाब का तीसरा टेस्ट वेन्यू होगा। 250 रुपए से शुरू टिकट: गुरमीत सिंह मीत हेयर ने खास तौर पर अभिभावकों से अपील की है कि वे गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव दिलाने के लिए स्टेडियम लेकर आएं। इससे बच्चों को अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को मैदान पर खेलते देखने का मौका मिलेगा। मैच के लिए टिकट की कीमत 250 रुपए से शुरू रखी गई है। एक टिकट पर दर्शक पांचों दिन मैच देख सकेंगे। वे चाहें तो पूरा दिन या किसी विशेष सत्र के दौरान भी स्टेडियम पहुंच सकते हैं। कप्तान होंगे शुभमन गिल, टीम में गुरनूर बराड़ भी: भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी पंजाब के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल करेंगे, जबकि पंजाब के ही गुरनूर बराड़ भी टीम का हिस्सा हैं। क्रिकेट प्रशंसकों से भारतीय टीम और पंजाब के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचने की अपील की गई है। देखिए मैच से जुड़ी PHOTOS:- स्पिन बॉलिंग कोच ने संभाली जिम्मेदारी भारत के स्पिन बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले भी टीम से जुड़ चुके हैं और उन्होंने प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लिया। इससे पहले वह आईपीएल में पंजाब किंग्स के स्पिन बॉलिंग कोचिंग सेटअप का हिस्सा रहे हैं। वहीं गुरजपनीत सिंह, आकिब नबी, प्रिंस यादव, सारांश जैन, जीशान अंसारी और शिवांग कुमार नेट बॉलर के रूप में टीम इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं।