पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
US Tariffs Loom; ATF Price Capped at ₹75.60, Silver Dips

नई दिल्ली13 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर टैरिफ से जुड़ी रही। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं सरकार ने ₹10,000 करोड़ के ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. भारतीय सामानों पर 12.5% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है: अमेरिका ने 54 देशों पर जबरन मजदूरी का आरोप लगाया; दिल्ली में ट्रेड डील पर बातचीत अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। पढ़ें यह Q&A रिपोर्ट… पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. ATF की कीमतों पर ₹75.60 प्रति लीटर कैप लगाया: सरकार ने ₹10,000 करोड़ के फंड को भी मंजूरी दी, इससे जेट-फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल किया जाएगा मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और हवाई यात्रियों को राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. चांदी ₹3,725 गिरकर ₹2.61 लाख किलो पर आई: ऑल टाइम हाई से ₹1.25 लाख नीचे आ चुकी, सोना आज ₹1,258 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में आज यानी 3 जून को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 1,258 रुपए गिरकर 1.55 लाख रुपए हो गया है। 1 किलो चांदी की कीमत 3,725 रुपए कम होकर 2.61 लाख रुपए पर आ गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग 3 जून से: ब्याज दर में कटौती की उम्मीद नहीं, अभी रेपो रेट 5.25% पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 3 जून से शुरू हो रही है। यह 5 जून तक चलेगी। इसी दिन सभी फैसलों का ऐलान किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की कम ही उम्मीद है। अप्रैल में हुई मीटिंग में भी रेपो रेट में कटौती नहीं की गई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
US Tariffs Loom; ATF Price Capped at ₹75.60, Silver Dips

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर टैरिफ से जुड़ी रही। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं सरकार ने ₹10,000 करोड़ के ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. भारतीय सामानों पर 12.5% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है: अमेरिका ने 54 देशों पर जबरन मजदूरी का आरोप लगाया; दिल्ली में ट्रेड डील पर बातचीत अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। पढ़ें यह Q&A रिपोर्ट… पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. ATF की कीमतों पर ₹75.60 प्रति लीटर कैप लगाया: सरकार ने ₹10,000 करोड़ के फंड को भी मंजूरी दी, इससे जेट-फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल किया जाएगा मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और हवाई यात्रियों को राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. चांदी ₹3,725 गिरकर ₹2.61 लाख किलो पर आई: ऑल टाइम हाई से ₹1.25 लाख नीचे आ चुकी, सोना आज ₹1,258 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में आज यानी 3 जून को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 1,258 रुपए गिरकर 1.55 लाख रुपए हो गया है। 1 किलो चांदी की कीमत 3,725 रुपए कम होकर 2.61 लाख रुपए पर आ गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग 3 जून से: ब्याज दर में कटौती की उम्मीद नहीं, अभी रेपो रेट 5.25% पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 3 जून से शुरू हो रही है। यह 5 जून तक चलेगी। इसी दिन सभी फैसलों का ऐलान किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की कम ही उम्मीद है। अप्रैल में हुई मीटिंग में भी रेपो रेट में कटौती नहीं की गई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India Ambassador Vipul Appointed UAE

Hindi News Career India Ambassador Vipul Appointed UAE | Rudram 2 Missile Test Update 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. डीके शिवकुमार कर्नाटक के 24वें सीएम बने 3 जून को डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री की शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शिवकुमार को पद की शपथ दिलाई। इसके साथ ही जी परमेश्वर कर्नाटक के नए डिप्टी CM बने। इनके अलावा 12 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया भी इन विधायकों के साथ शपथ ली। शिवकुमार को 30 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया था। शिवकुमार ने सिद्धारमैया की जगह ली है। उन्होंने 28 मई को सीएम पद से इस्तीफा दिया था। 2. एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-2 की सफल टेस्टिंग हुई 2 जून को DRDO ने एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-2 की सफल टेस्टिंग की। रुद्रम-2 की ये टेस्टिंग वायुसेना के ( Su-30MKI) सुखोई फाइटर जेट से की गई। रुद्रम-2 मिसाइल हवा से जमीन पर 300km की रेंज में वार कर सकती है। एंटी-रेडिएशन मिसाइल ऐसा हथियार है जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस नेटवर्क को टार्गेट करता है। रुद्रम-2 मिसाइल इनर्शियल नेविगेशन और सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम दोनों से लैस है। रूद्रम-1 2020 में डेवलप की गई थी और ये भारत की पहली एंटी रेडिएशन मिसाइल है। 3. लोखंडे प्रशांत CBSE के नए चेयरमैन बने 2 जून को केंद्र सरकार ने सीनियर IAS ऑफिसर लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन अपॉइंट किया। लोखंडे प्रशांत सीताराम AGMUT कैडर (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) 2001 बैच के IAS ऑफिसर हैं। लोखंडे 2022 में होम मिनिस्ट्री में जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर अपॉइंट हुए थे और मार्च में एडिशनल सेक्रेटरी बनाए गए थे। इसके साथ ही CBSE ने वरुण भारद्वाज को नया सचिव अपॉइंट किया है। दोनों ही अपॉइंटमेंट CBSE 12वीं बोर्ड में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद के बाद हुए हैं। एक दिन पहले ही केंद्र सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर किया है। CBSE के पूर्व चेयरमैन राहुल 1996 बैच के IAS हैं और 2024 में CBSE के चेयरमैन बने थे। इसके अलावा OSM सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी की अध्यक्षता 1988 बैच की IAS एस राधा चौहान करेंगी। कमेटी को एक माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। एस राधा 2025 से कैपिसिटी बिल्डिंग कमीशन (CBC) की चेयरपर्सन हैं। लोखंडे प्रशांत ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पुणे विश्वविद्यालय से की है। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 4. विपुल सऊदी अरब में भारत के नए राजदूत बने 3 जून को भारत सरकार ने सीनियर डिप्लोमेट विपुल को सऊदी अरब (UAE) में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया। विपुल 1998 बैच के इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) ऑफिसर हैं। विपुल 2014 से 2017 तक मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स में जॉइंट सेक्रेटरी रहे। 2017 से 2020 तक विपुल ने UAE में भारत के काउंसल जनरल के तौर पर काम किया। काउंसल जनरल दूसरे देश में अपने देश के एड्वाइजर के तौर पर काम करते हैं। विपुल 2023 से जून 2026 तक कतर में भारत के लीडिंग डिप्लोमेट भी रहे। विपुल, सोहेल एजाज खान की जगह लेंगे। 1984 में विपुल ने दिल्ली IIT से ग्रेजुएशन किया। 5. जर्मनी ने भारतीयों के लिए ट्रांजिट वीजा खत्म किया 3 जून को जर्मनी ने भारतीय नागरिकों के लिए ट्रांजिट वीजा खत्म कर दिया है। अब किसी भी भारतीय नागरिक को किसी तीसरे देश की यात्रा के दौरान जर्मनी एयरपोर्ट पर ट्रांजिट करने के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा (Type A) की जरूरत नहीं होगी। यह नियम जर्मन संघीय कानून राजपत्र (Bundesgesetzblatt) में प्रकाशित होने के बाद लागू किया गया है। ये छूट सिर्फ एयरपोर्ट के इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया (Type A) में रहने वाले यात्रियों के लिए ही है। ये जर्मनी में एंट्री के लिए नहीं है। यदि कोई भारतीय यात्री एयरपोर्ट से बाहर निकलना चाहते हैं या जर्मनी क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हैं, तो उन्हें वीजा लेना जरूरी होगा। ट्रांजिट वीजा ट्रांजिट वीजा किसी देश से किसी अन्य देश की यात्रा के दौरान हॉल्ट करने के लिए जारी किया जाता है। जैसे यदि आप भारत से किसी अन्य देश (जैसे अमेरिका, कनाडा, यूके) जा रहे हैं और आपकी उड़ान का ले ओवर (layover) जर्मनी के किसी एयरपोर्ट पर है, तो अब अलग से ट्रांजिट वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी। मिसलीनियस (MISCELLENEOUS) 6. ओडिशा के कॉस्टल हाईवे को मंजूरी मिली 3 जून को केंद्र सरकार ने ओडिशा में कॉस्टल हाईवे (राजमार्ग परियोजना) को मंजूरी दी। ये कॉस्टल हाईवे 8,300 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। ये परियोजना 346 किमी लंबे ओडिशा तटीय राजमार्ग का हिस्सा है, जो भविष्य में राज्य के तटीय क्षेत्रों को बेहतर ढंग से जोड़ेगी। राजमार्ग परियोजना के पहले चरण में 160 किमी लंबे रामेश्वर-कोणार्क-पारादीप मार्ग को विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के मुताबिक राजमार्ग का रामेश्वर से कोणार्क 4 लेन और कोणार्क से पारादीप हिस्सा 2 लेन किया जाएगा। राजमार्ग से भुवनेश्वर और खुर्दा के विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs), भुवनेश्वर का मेगा फूड पार्क, परादीप, कोणार्क, जगतसिंहपुर, पुरी और केंद्रपाड़ा के फिशरी क्लस्टर और कटक के फार्मा क्लस्टर को बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिल सकेगी। परियोजना के तहत पुरी रेलवे स्टेशन, प्रस्तावित पुरी हवाई अड्डा, अस्तारंगा पोर्ट, पारादीप पोर्ट और जगतसिंहपुर स्थित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क को भी जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के पूरे होने से चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में भी आसानी होगी। आज का इतिहास 1946 में सिंगर एस पी. बालासुब्रह्मण्यम का जन्म हुआ था। 1989 में चीन की सरकार ने बीजिंग में प्रदर्शन कर रहे अपने ही नागरिकों पर तोप चढ़ा दी थी, जिसे थ्येनआनमन स्क्वायर नरसंहार के नाम से जानते हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें.. पहली वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप अहमदाबाद में शुरू होगी: काजीरंगा नेशनल पार्क के हैंडलूम अब Amazon पर मिलेंगे; 3 जून के करेंट अफेयर्स आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक
4,399 दिन का मील का पत्थर: कैसे पीएम मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधान मंत्री के रूप में नेहरू से आगे निकलने के लिए तैयार हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 01:07 IST यह परिवर्तन समकालीन शासन कला में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जिसने भारत के सबसे चुनावी रूप से सफल प्रधान मंत्री के रूप में पीएम मोदी की स्थिति को मजबूत किया है। नेहरू के निर्वाचित रिकॉर्ड से परे पीएम मोदी का ऐतिहासिक उत्थान भारत की घरेलू नीति और इसके वैश्विक भू-राजनीतिक अभिविन्यास पर गहरा प्रभाव डालता है। फ़ाइल छवि/एएफपी एक ऐतिहासिक मील के पत्थर में, जो मूल रूप से भारत के आधुनिक राजनीतिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित करता है, नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधान मंत्री बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू के लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को पार करने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी, जिन्होंने पहली बार 26 मई 2014 को पद की शपथ ली थी, और तब से लगातार उच्च-जनादेश वाली चुनावी जीत हासिल की है, 10 जून को कार्यालय में लगातार 4,399 दिन पूरे कर लेंगे। ऐसा करने पर, वह आधिकारिक तौर पर एक निर्वाचित नेता के रूप में नेहरू की संचयी अवधि को ग्रहण कर लेंगे, जो 4,398 दिनों की थी। यह परिवर्तन समकालीन शासन कला में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के इतिहास में सबसे अधिक चुनावी रूप से सफल प्रधान मंत्री के रूप में पीएम मोदी की स्थिति को मजबूत किया है। आसन्न मील का पत्थर भारत में निरंतर राजनीतिक स्थिरता और केंद्रीकृत शासन के एक दुर्लभ युग को रेखांकित करता है। दशकों तक, भारतीय नेतृत्व की दीर्घायु का संरचनात्मक मानदंड स्वतंत्रता के बाद के नेहरू-गांधी युग के मुकाबले मापा जाता था। जमीनी स्तर पर कल्याणकारी अर्थशास्त्र, मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल और एक विशिष्ट मुखर सांस्कृतिक आख्यान के अत्यधिक शक्तिशाली संयोजन के माध्यम से पारंपरिक राजनीतिक आधिपत्य को व्यवस्थित रूप से खत्म करके, नरेंद्र मोदी ने देश के लोकतांत्रिक लोकाचार को नया आकार दिया है। उनका प्रशासनिक मॉडल एक दशक से भी अधिक समय से बड़े पैमाने पर राजनीतिक पूंजी को बनाए रखने में कामयाब रहा है, और पारंपरिक सत्ता-विरोधी कारकों को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया है, जो आमतौर पर दुनिया भर में दीर्घकालिक लोकतांत्रिक प्रशासन को थका देते हैं। दीर्घायु की चुनावी गणना इस ऐतिहासिक परिवर्तन को समझने के लिए कुल कार्यकाल और निर्वाचित कार्यकाल के बीच विश्लेषणात्मक अंतर महत्वपूर्ण है। जवाहरलाल नेहरू आजादी के बाद लगभग 17 वर्षों तक देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर रहे, और 15 अगस्त, 1947 से अंतरिम सरकार के अनिर्वाचित प्रमुख के रूप में कार्य किया। हालाँकि, औपचारिक संवैधानिक ढांचे के तहत सीधे निर्वाचित नेता के रूप में उनकी स्थिति केवल 13 मई, 1952 को शुरू हुई, जब उन्होंने भारत के पहले लोकतांत्रिक आम चुनावों के बाद शपथ ली। वह निर्वाचित अध्याय 27 मई, 1964 को उनकी मृत्यु तक फैला रहा। इसके विपरीत, केंद्र सरकार के शीर्ष पर नरेंद्र मोदी के पूरे कार्यकाल को प्रत्यक्ष, बड़े पैमाने पर लोकप्रिय जनादेश का समर्थन प्राप्त रहा है। यह चुनावी लचीलापन भारतीय मतदाताओं तक शासन पहुंचाने के तरीके में मूलभूत परिवर्तन पर आधारित है। पिछले बारह वर्षों में, प्रशासन ने व्यवस्थित रूप से राजनीतिक प्रतिमान को स्वतंत्रता के बाद के दशकों की धीमी, वृद्धिशील प्रगति से तीव्र, प्रौद्योगिकी-संचालित विकास मैट्रिक्स में स्थानांतरित कर दिया है। मैक्रो-इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व पूंजी व्यय के साथ-साथ सैकड़ों-हजारों किलोमीटर उन्नत राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और रेलवे नेटवर्क का पूर्ण आधुनिकीकरण – बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष-लाभ वाली कल्याणकारी पहलों को लागू करके, नरेंद्र मोदी ने एक अविश्वसनीय रूप से टिकाऊ, क्रॉस-सेक्शनल चुनावी गठबंधन बनाया है जो पारंपरिक जाति और क्षेत्रीय विभाजनों तक फैला हुआ है। एक संरचनात्मक और वैश्विक प्रतिमान बदलाव नेहरू के निर्वाचित रिकॉर्ड से परे पीएम मोदी का ऐतिहासिक उत्थान भारत की घरेलू नीति और इसके वैश्विक भू-राजनीतिक अभिविन्यास पर गहरा प्रभाव डालता है। नेहरू के प्रारंभिक नेतृत्व के तहत, भारत ने एक समाजवादी आर्थिक ढांचे और एक सख्ती से गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को अपनाया, जो खंडित शीत युद्ध के माहौल की जटिलताओं से निपटने के लिए डिज़ाइन की गई थी। हालाँकि, नरेंद्र मोदी के विस्तारित कार्यकाल ने एक बाजार-संचालित, तकनीकी रूप से एकीकृत अर्थव्यवस्था की ओर एक निश्चित परिवर्तन की देखरेख की है, जो एक अप्राप्य व्यावहारिक विदेश नीति के साथ मिलकर नई दिल्ली को आधुनिक वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण ध्रुवीय शक्ति के रूप में स्थापित करती है। इस निरंतर कार्यकारी स्थिरता ने सत्तारूढ़ प्रशासन को गहन परिवर्तनकारी और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील नीतिगत एजेंडा को क्रियान्वित करने की अनुमति दी है, जिसे पिछले गठबंधन युग में लगभग असंभव माना जाता था। प्रमुख संरचनात्मक बदलाव – व्यापक कर सुधार और एक विस्तृत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर निर्णायक राष्ट्रीय सुरक्षा युद्धाभ्यास और ऐतिहासिक विधायी अपडेट तक – सभी इस निरंतर विधायी आदेश के कारण साकार हुए हैं। जैसा कि नरेंद्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर को पार कर लिया है, परिवर्तन केवल कार्यालय में बिताए गए दिनों की गणना से कहीं अधिक दर्शाता है; यह एक “न्यू इंडिया” के संस्थागतकरण का प्रतीक है, जिसने एक अत्यधिक विशिष्ट, आधुनिक वैश्विक पहचान बनाने के लिए अपने मध्य-शताब्दी के टेम्पलेट्स से दृढ़ता से दूर चला गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया 4,399 दिन का मील का पत्थर: कैसे पीएम मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधान मंत्री के रूप में नेहरू से आगे निकलने के लिए तैयार हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नरेंद्र मोदी(टी)जवाहरलाल नेहरू(टी)प्रधानमंत्री









