शाहरुख खान स्टारर फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन फिल्म का फाइनल कट अभी लॉक नहीं हुआ है। फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एडिटिंग के साथ म्यूजिक, बैकग्राउंड स्कोर, साउंड डिजाइन और वीएफएक्स का काम अभी जारी है। बड़े स्तर की एक्शन फिल्म में शूटिंग खत्म होने के बाद एडिटिंग टेबल पर कई अहम फैसले लिए जाते हैं। इसमें तय होता है कि कौन-सा सीन कितना लंबा रहेगा, किस शॉट पर कट होगा और एक्शन सीक्वेंस की रफ्तार कैसी रखी जाएगी। ‘किंग’ के कुछ प्रमुख सीक्वेंस की फाइनल लेंथ पर अभी काम चल रहा है। म्यूजिक लॉक नहीं, नए गानों की शूटिंग बाकी फिल्म के म्यूजिक पर भी अभी काम चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग धुनों और ट्रैक पर काम किया जा रहा है और फिल्म के सभी गाने अभी फाइनल नहीं हुए हैं। अब तक फिल्म की घोषणा के दौरान इस्तेमाल की गई थीम ट्यून ही सार्वजनिक तौर पर सामने आई है। नए गानों की शूटिंग अभी शुरू नहीं हुई है। पहली नजर में यह प्रोडक्शन में देरी लग सकती है, लेकिन बड़े बजट की फिल्मों में ऐसा क्रिएटिव वजहों से भी किया जाता है। गाना शूट करने से पहले कहानी पर फोकस बॉलीवुड में बड़े गानों की शूटिंग कई बार फिल्म की मुख्य कहानी के हिस्सों के बाद की जाती है। इसके बाद एडिटिंग टेबल पर फिल्म की असली रफ्तार और मूड सामने आता है। इससे यह तय करना आसान होता है कि गाना कहानी में कहां फिट होगा और उसका ट्रीटमेंट कैसा रखा जाए। अगर किसी हिस्से में इमोशनल असर बढ़ाने की जरूरत है तो गाने का म्यूजिक और विजुअल उसी हिसाब से तैयार किया जा सकता है। विजुअल्स पर काम अभी बाकी ‘किंग’ जैसी एक्शन-हैवी और इंटरनेशनल लोकेशन वाली फिल्म में वीएफएक्स का काम सिर्फ पोस्ट-प्रोडक्शन के आखिरी चरण में नहीं होता। शूटिंग के दौरान ही यह तय किया जाता है कि स्क्रीन पर क्या वास्तविक दिखेगा और किस हिस्से को डिजिटल तरीके से तैयार या बदला जाएगा। सेट का विस्तार, बैकग्राउंड बदलना, माहौल को बेहतर दिखाना, भीड़ बढ़ाना, गाड़ियों में डिजिटल बदलाव करना और दूसरे विजुअल सुधार जैसे काम वीएफएक्स का हिस्सा हो सकते हैं। एक्शन का फाइनल असर एडिटिंग और साउंड से बनेगा ‘किंग’ का फाइनल टोन और रफ्तार काफी हद तक एडिटिंग टेबल पर तय होगी। शाहरुख खान के एक्शन सीक्वेंस, अभिषेक बच्चन से जुड़े अहम नैरेटिव मोमेंट्स और दीपिका पादुकोण से जुड़े फ्लैशबैक को किस क्रम में रखा जाएगा, इसका सीधा असर फिल्म के सस्पेंस, इमोशनल इम्पैक्ट और पेसिंग पर पड़ेगा। यही वजह है कि सिर्फ शूट किए गए फुटेज के आधार पर किसी कलाकार के स्क्रीन टाइम का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।














































