मूंग दाल पालक इडली रेसिपी: 15 मिनट में तैयार करें प्रोटीन से भरपूर मूंग दाल-पालक इडली, जानने के लिए है असर; विधि नोट करें

9 जून 2026 को 16:11 IST पर अद्यतन किया गया हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट रेसिपी: अगर आप कुछ स्वादिष्ट और जल्दी बनने वाली डिश की तलाश में हैं, तो मूंग दाल-पालक इडली एक बेहतरीन विकल्प है। यह इडली प्रोटीन, हराभरा और आयरन से भरपूर है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरने में भी मदद करती है। इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है। अनुसरण करना : सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 1 कप साधारण कटा हुआ पालक, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, 1/2 छोटा जीरा, 1/2 काला नमक, 1 छोटा चम्मच ईनो या 1/4 सोडा सोडा, तेल छवि: एआई बनाने की विधि: मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर 2-3 घंटे के लिए सस्ते दाम पर लें। इसके बाद पानी की स्वादिष्ट दाल को हरी मिर्च और अदरक के साथ पीस लें। बैटर अधिकांश सोलोमन न रहें। छवि: फ्रीपिक तैयार बैटर में सुपरमार्केट, जीरा और नमक का सामान अच्छी तरह मिला लें। इडली बनाने से पहले ठीक है बैटर में इनो और हाथ से मिला लें। इससे इडली नर और स्पाइनी गे। छवि: फ्रीपिक इडली मोल्ड में लाइट ऑयल और बैटर भर दें। अब पहले से हॉट स्टीमर में 10-12 मिनट तक का समय। इडली पाक जाने के बाद कुछ मिनट के लिए अनिवासी हो गए और फिर मोल्ड से बाहर हो गए। छवि: एआई गर्मागर्म मूंग दाल-पालक इडली को नारियल चटनी या हरी चटनी के साथ सर्व करें। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण यह तत्व को मजबूत बनाने में मदद करता है। छवि: एआई पालक के शरीर में मौजूद आयरन की कमी को दूर करने में सहायक होता है। जड़ी बूटी पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। कम तेल में बनने के कारण यह वजन नियंत्रण धारकों के लिए भी अच्छा विकल्प है। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 9 जून 2026 16:11 IST पर
Rajiv Bajaj Quits Bajaj Finserv Board

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज अब बजाज फिनसर्व के बोर्ड से इस्तीफा देने जा रहे हैं। उन्होंने अपनी बाहरी जिम्मेदारियों को कम करने और ऑटोमोबाइल बिजनेस पर फोकस करने के लिए यह फैसला लिया है। वह 31 जुलाई को होने वाली कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के बाद डायरेक्टर पद से हट जाएंगे। रोटेशन के तहत रिटायरमेंट, एजीएम में दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे बजाज फिनसर्व ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी गई एक एक्सचेंज फाइलिंग में इस फैसले की आधिकारिक जानकारी साझा की है। कंपनी के मुताबिक राजीव बजाज बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने कंपनी को सूचित किया है कि 31 जुलाई को होने वाली AGM में वे दोबारा चुनाव की मांग नहीं करेंगे। इसके चलते एजीएम में रोटेशन द्वारा रिटायरमेंट के साथ ही वे कंपनी के डायरेक्टर नहीं रहेंगे। ऑटो बिजनेस में बढ़ीं जिम्मेदारियां, इसलिए लिया फैसला राजीव बजाज ने पिछले कुछ वर्षों में बजाज ऑटो में अपनी बढ़ती हुई जिम्मेदारियों को इस फैसले की मुख्य वजह बताया है। बजाज फिनसर्व ने कहा कि हाल के समय में बजाज ऑटो लिमिटेड में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं। कंपनी ने बजाज ऑटो टेक्नोलॉजी लिमिटेड और बजाज ऑटो क्रेडिट लिमिटेड की स्थापना की है, साथ ही हाल ही में केटीएम (KTM) का अधिग्रहण भी किया है। इसी वजह से वे अपनी अन्य बाहरी जिम्मेदारियों को कम करना चाहते हैं। बोर्ड ने जताया आभार, अप्रैल में बजाज फाइनेंस भी छोड़ा था बजाज फिनसर्व के बोर्ड ने राजीव बजाज के इस फैसले को संज्ञान में लिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने कंपनी के साथ उनके लंबे जुड़ाव और दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उनके प्रति आभार और सराहना व्यक्त की है। इससे पहले इसी साल अप्रैल महीने में भी राजीव बजाज ने बजाज फाइनेंस को एक नोटिस भेजा था। तब उन्होंने बजाज फाइनेंस की एजीएम में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया था। जिसके बाद लेंडर बोर्ड के साथ उनका लंबा सफर खत्म हो गया था। उस समय बजाज फाइनेंस ने भी उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए आभार जताया था। राहुल बजाज के बेटे और राजीव के भाई हैं संजीव बजाज राजीव बजाज वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माता कंपनियों में से एक, बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) हैं। वे स्वर्गीय राहुल बजाज के बेटे हैं, जिन्होंने बजाज ऑटो को भारत के सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद ऑटोमोबाइल ब्रांड्स में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। राजीव बजाज के भाई संजीव बजाज हैं, जो बजाज फिनसर्व के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। बजाज फिनसर्व एक फाइनेंशियल सर्विसेज होल्डिंग कंपनी है, जिसके पास बजाज फाइनेंस में मेजॉरिटी हिस्सेदारी मौजूद है। 2005 से संभाल रहे हैं बजाज ऑटो के MD का पद राजीव बजाज के पास ऑटोमोबाइल सेक्टर और बिजनेस लीडरशिप का एक लंबा अनुभव है। वे साल 2002 में पहली बार बजाज ऑटो के बोर्ड मेंबर बने थे। इसके बाद साल 2005 में उन्होंने कंपनी के MD के रूप में कमान संभाली थी। इसके अलावा उन्होंने केटीएम ग्रुप के भीतर कंपनियों के सुपरवाइजरी बोर्ड्स में भी कई पदों पर काम किया है। क्या होता है ‘रिटायरमेंट बाई रोटेशन’? कंपनीज एक्ट के तहत लिस्टेड कंपनियों के डायरेक्टर्स का एक निश्चित हिस्सा हर एजीएम में रोटेशन के तहत रिटायर होता है। यदि डायरेक्टर चाहें और शेयरहोल्डर्स अनुमति दें, तो उन्हें दोबारा चुना जा सकता है। राजीव बजाज ने खुद दोबारा चुनाव लड़ने से मना किया है। क्या है बजाज फिनसर्व और बजाज ऑटो का कनेक्शन? ये दोनों एक ही मूल समूह बजाज ग्रुप का हिस्सा हैं, लेकिन बजाज ऑटो पूरी तरह से गाड़ियों (टू-व्हीलर/थ्री-व्हीलर) के निर्माण पर केंद्रित है, जबकि बजाज फिनसर्व समूह का वित्तीय (फाइनेंस और इंश्योरेंस) कारोबार संभालती है। ये खबर भी पढ़ें… फिच ने भारत की GDP-ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.4% किया: अमेरिका-ईरान जंग के असर से थमेगी रफ्तार; महंगाई बढ़कर 5.3% पहुंचने की आशंका अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
सलमान खान ने दोस्त कुमोद रैनी का निधन:अंतिम संस्कार में इमोशनल नजर आए एक्टर

सलमान खान के परिवार ने अपने करीबी पारिवारिक मित्र कुमोद रैनी के अंतिम संस्कार में पहुंचे। इस दौरान खान परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने दिवंगत को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के दौरान सलमान खान काफी इमोशनल नजर आए। पिछले महीने सलमान खान ने अपने 42 साल पुराने करीबी दोस्त सुशील कुमार के निधन पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दुख जताया था। सलमान ने बताया कि सुशील उनके लिए सिर्फ दोस्त नहीं बल्कि एक भाई की तरह थे। सुशील के लिए सलमान ने एक लंबा और ईमोशनल नोट लिखा था। सलमान ने अपने और पिता सलीम खान के साथ सुशील की पुरानी तस्वीरें शेयर की हैं। एक्टर ने लिखा कि सुशील पिछले 42 सालों से उनके साथ भाई की तरह थे। वे एक बहुत ही दयालु और मददगार इंसान थे। सलमान के मुताबिक, चाहे आर्थिक तंगी हो, भावनात्मक परेशानी हो या शारीरिक बीमारी, सुशील के चेहरे से मुस्कान कभी कम नहीं होती थी। वे मुश्किल से मुश्किल हालात में भी डांस करते थे और मुस्कुराते रहते थे। ‘की फरक नई पैंदा’ कहते थे सुशील सलमान ने सुशील की सकारात्मक सोच को याद करते हुए बताया कि वे हमेशा एक ही बात कहते थे- “की फरक नई पैंदा, सब ठीक होगा” (कोई फर्क नहीं पड़ता, सब ठीक हो जाएगा)। सलमान ने उन्हें एक ऐसा योद्धा बताया जिसने मौत का सामना किसी ‘हैवीवेट चैंपियन’ की तरह किया। एक्टर ने लिखा, “तुम्हारे लिए मेरी आंखों में आंसू नहीं हैं भाई, बल्कि सिर्फ तुम्हारी यादें और हंसी है। मेरा भाई चेहरे पर मुस्कान लिए दुनिया से गया।” अंतिम विदाई पर भावुक हुए सलमान अपनी पोस्ट में सलमान ने जिंदगी की फिलॉसफी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हम सभी को एक न एक दिन जाना है, बस कोई पहले जाता है और कोई बाद में। इसलिए जाने से पहले जीवन में कुछ ऐसा कर जाना चाहिए जिससे लोग आपको याद रखें। सलमान ने इमोशनल होते हुए लिखा कि वे सुशील को बहुत मिस करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे इस खबर के बाद गुस्सा करना चाहते थे और रोना चाहते थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। ‘मातृभूमि’ फिल्म में नजर आएंगे सलमान वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ की तैयारी कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्माण सलमा खान के बैनर सलमान खान फिल्म्स के तले हो रहा है। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं और इसमें चित्रांगदा सिंह लीड रोल में नजर आएंगी।
दोस्त के अंतिम संस्कार में रो पड़े सलमान खान:सहारा लेकर क्रिमेटोरियम से निकले, हेलन को संभालते दिखे सोहेल खान; पूरा परिवार पहुंचा

एक्टर सलमान खान अपने परिवार के साथ मंगलवार को अपने फैमिली फ्रेंड कुमुद राणे के अंतिम संस्कार में पहुंचे। इस दौरान सलमान के भाई सोहेल, अरबाज और उनकी मां सलमा खान भी मौजूद थीं। परिवार ने कुमुद को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के दौरान सलमान काफी इमोशनल नजर आए। पिछले महीने भी सलमान के दोस्त का निधन हुआ था पिछले महीने सलमान खान ने अपने 42 साल पुराने करीबी दोस्त सुशील कुमार के निधन पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दुख जताया था। सलमान ने बताया था कि सुशील उनके लिए सिर्फ दोस्त नहीं बल्कि एक भाई की तरह थे। सुशील के लिए सलमान ने एक लंबा और इमोशनल नोट लिखा था। सलमान ने अपने और पिता सलीम खान के साथ सुशील की पुरानी तस्वीरें शेयर की हैं। एक्टर ने लिखा कि सुशील पिछले 42 सालों से उनके साथ भाई की तरह थे। वे एक बहुत ही दयालु और मददगार इंसान थे। सलमान के मुताबिक, चाहे आर्थिक तंगी हो, भावनात्मक परेशानी हो या शारीरिक बीमारी, सुशील के चेहरे से मुस्कान कभी कम नहीं होती थी। वे मुश्किल से मुश्किल हालात में भी डांस करते थे और मुस्कुराते रहते थे। ‘की फरक नई पैंदा’ कहते थे सुशील सलमान ने सुशील की पॉजिटिव सोच को याद करते हुए बताया था कि वे हमेशा एक ही बात कहते थे- “की फरक नई पैंदा, सब ठीक होगा” (कोई फर्क नहीं पड़ता, सब ठीक हो जाएगा)। सलमान ने उन्हें एक ऐसा योद्धा बताया जिसने मौत का सामना किसी ‘हैवीवेट चैंपियन’ की तरह किया। एक्टर ने लिखा था, “तुम्हारे लिए मेरी आंखों में आंसू नहीं हैं भाई, बल्कि सिर्फ तुम्हारी यादें और हंसी है। मेरा भाई चेहरे पर मुस्कान लिए दुनिया से गया।” अंतिम विदाई पर भावुक हुए सलमान अपनी पोस्ट में सलमान ने जिंदगी की फिलॉसफी पर भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि हम सभी को एक न एक दिन जाना है, बस कोई पहले जाता है और कोई बाद में। इसलिए जाने से पहले जीवन में कुछ ऐसा कर जाना चाहिए जिससे लोग आपको याद रखें। सलमान ने इमोशनल होते हुए लिखा कि वे सुशील को बहुत मिस करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे इस खबर के बाद गुस्सा करना चाहते थे और रोना चाहते थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। ‘मातृभूमि’ फिल्म में नजर आएंगे सलमान वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ की तैयारी कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्माण सलमा खान के बैनर सलमान खान फिल्म्स के तले हो रहा है। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं और इसमें चित्रांगदा सिंह लीड रोल में नजर आएंगी।
नॉर्वे में बन रहा यूरोप का सबसे बड़ा एआई डेटासेंटर:माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई करेंगे इस्तेमाल; ठंडे मौसम और सस्ती बिजली के कारण चुनी गई जगह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती मांग से दुनिया भर में डेटा सेंटर्स की होड़ है। इसी कड़ी में ब्रिटिश स्टार्टअप ‘Nscale’ नॉर्वे के नारविक में एक विशाल डेटा सेंटर बना रहा है। आर्कटिक सर्कल के पास बन रहा यह प्रोजेक्ट यूरोप के सबसे बड़े एआई डेटा सेंटर्स में से एक होगा। लोकेशन का फायदा नारविक में कड़ाके की ठंड होती है, जो डेटा सेंटर की गर्म चिप्स को नेचुरली ठंडा रखने में मदद करेगी। जून-जुलाई यहां का सबसे गर्म महीना होता है, तब भी अधिकतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। सर्दियों में औसत तापमान -4 से -6 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। सस्ती बिजली नॉर्वे में हाइड्रोपावर से भरपूर और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध है। यहां बिजली 3-4 रु. प्रति यूनिट है, जो यूरोप से काफी कम है। खपत पूरी तरह से चालू होने पर यह सेंटर 520 मेगावाट बिजली की खपत करेगा, जो कि नॉर्वे के सभी मौजूदा डेटा सेंटर्स की कुल खपत से भी ज्यादा है। लागत- तकनीक इसमें एनवीडिया के नए ‘वेरा रुबिन’ प्रोसेसर लगेंगे। प्रोजेक्ट की कुल लागत 9.57 लाख करोड़ रु. ज्यादा आंकी जा रही है, जिसमें 60-80% खर्च चिप्स का होगा। उपयोग इस सेंटर का इस्तेमाल ‘माइक्रोसॉफ्ट’ और ‘ओपनएआई’ करेंगे। साल के अंत तक इसे 1 लाख से ज्यादा एडवांस ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट के साथ शुरू किया जाएगा।
US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी। 3 बड़े कारणों से सुस्त होगी इकोनॉमी 1. अमेरिका-ईरान जंग और तेल संकट का असर फिच रेटिंग्स ने अपनी जून ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी (सितंबर) और तीसरी (दिसंबर) तिमाही में आर्थिक सुस्ती सबसे ज्यादा नजर आएगी। 2. इनकम में कमी और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग जंग के कारण बढ़ती कीमतें लोगों की रियल इनकम को प्रभावित कर रही हैं। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी। हालांकि, देश के भीतर कैपिटल एक्सपेंडिचर में मजबूती बनी हुई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और क्रूड की बढ़ी कीमतें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पिछले 14 हफ्तों से बंद है। फिच ने अनुमान जताया है कि यह जुलाई से पहले नहीं खुलेगा। इसी तेल संकट के चलते फिच ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर $87 प्रति बैरल कर दिया है। हाल के हफ्तों में ही ईंधन की कीमतें 4-5% तक बढ़ चुकी हैं। घरेलू मांग रहेगी ग्रोथ का मुख्य जरिया फिच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.4% रह जाएगी, जो हमारे मार्च के अनुमान से 0.3% कम है। हालांकि, घरेलू मांग ही इस ग्रोथ की मुख्य ड्राइवर बनी रहेगी। इसके साथ ही वास्तविक रूप से कम आयात होने के कारण नेट एक्सटर्नल डिमांड का ग्रोथ में पॉजिटिव योगदान रहेगा। साल के अंत तक 5.3% पर पहुंच सकती है महंगाई भारत में अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई 3.5% और थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 8.3% रही है। हालांकि रिटेल महंगाई अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है। फिच का अनुमान है कि बेस इफेक्ट और महंगी एनर्जी की वजह से इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक महंगाई दर बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में जारी हीटवेव और औसत से कम मानसून के अनुमान ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। ब्याज दरें बढ़ाकर 5.5% कर सकता है आरबीआई महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए फिच का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि अप्रैल की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। लेकिन फिच के मुताबिक, सप्लाई शॉक से पैदा हुए मूल्य दबाव से निपटने के लिए आरबीआई इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करके इसे 5.5% कर सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया था और महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था। डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट नहीं करेंसी मार्केट को लेकर फिच ने भारतीय बाजार के लिए राहत भरी बात कही है। फिच के अनुसार, इस साल के बचे हुए महीनों में भारतीय रुपए में किसी बड़े अवमूल्यन (गिरावट) की आशंका नहीं है। चालू वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपए का एक्सचेंज रेट औसतन 97.50 के स्तर पर रहने की उम्मीद है। ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा तेल संकट की मार सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रही है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) का अनुमान भी 0.2% घटाकर 2.4% कर दिया है। फिच के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रायन कुल्टन ने कहा कि ऑयल प्राइस शॉक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, लेकिन दुनिया भर में आईटी (IT) सेक्टर पर हो रहे भारी खर्च से इस झटके का असर थोड़ा कम जरूर हुआ है, खासकर एशिया में इसका फायदा मिल रहा है। 1970 के दशक जैसा बुरा संकट नहीं फिच का मानना है कि मौजूदा तेल संकट 1970 के दशक के खतरनाक तेल संकटों जितना गंभीर नहीं है। साल 1979 में कच्चे तेल की वास्तविक कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और तब ओपेक (OPEC) देशों की भूमिका भी काफी अलग थी। 1980 के मुकाबले आज वैश्विक जीडीपी में तेल की कुल खपत की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई है। वित्त वर्ष 2027-28 में आएगी तेजी फिच को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी। एनर्जी संकट का असर कम होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट में सुधार होगा, जिससे इस पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.7% पर पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यह दोबारा अपने ट्रेंड ग्रोथ रेट 6.4% के स्तर पर आ जाएगी। क्या होती है रेटिंग एजेंसी? रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच, मूडीज और एसएंडपी (S&P) वैश्विक स्तर पर देशों और कंपनियों की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नीतियों का आकलन करती हैं। इनके द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान और क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर ही दुनिया भर के बड़े निवेशक किसी देश में निवेश करने का फैसला लेते हैं। किसी देश की रेटिंग या अनुमान घटने से वहां विदेशी निवेश की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। ये खबर भी पढ़ें… इस साल 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी: पिछले साल 7.1% की दर से बढ़ी थी, अगले साल 6.6% रह सकती है GDP ग्रोथ देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। पूरे साल जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही, जो सरकार के फरवरी में लगाए गए 7.6% के अनुमान से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में GDP दर 7.1% रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6% रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी। 3 बड़े कारणों से सुस्त होगी इकोनॉमी 1. अमेरिका-ईरान जंग और तेल संकट का असर फिच रेटिंग्स ने अपनी जून ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी (सितंबर) और तीसरी (दिसंबर) तिमाही में आर्थिक सुस्ती सबसे ज्यादा नजर आएगी। 2. इनकम में कमी और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग जंग के कारण बढ़ती कीमतें लोगों की रियल इनकम को प्रभावित कर रही हैं। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी। हालांकि, देश के भीतर कैपिटल एक्सपेंडिचर में मजबूती बनी हुई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और क्रूड की बढ़ी कीमतें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पिछले 14 हफ्तों से बंद है। फिच ने अनुमान जताया है कि यह जुलाई से पहले नहीं खुलेगा। इसी तेल संकट के चलते फिच ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर $87 प्रति बैरल कर दिया है। हाल के हफ्तों में ही ईंधन की कीमतें 4-5% तक बढ़ चुकी हैं। घरेलू मांग रहेगी ग्रोथ का मुख्य जरिया फिच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.4% रह जाएगी, जो हमारे मार्च के अनुमान से 0.3% कम है। हालांकि, घरेलू मांग ही इस ग्रोथ की मुख्य ड्राइवर बनी रहेगी। इसके साथ ही वास्तविक रूप से कम आयात होने के कारण नेट एक्सटर्नल डिमांड का ग्रोथ में पॉजिटिव योगदान रहेगा। साल के अंत तक 5.3% पर पहुंच सकती है महंगाई भारत में अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई 3.5% और थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 8.3% रही है। हालांकि रिटेल महंगाई अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है। फिच का अनुमान है कि बेस इफेक्ट और महंगी एनर्जी की वजह से इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक महंगाई दर बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में जारी हीटवेव और औसत से कम मानसून के अनुमान ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। ब्याज दरें बढ़ाकर 5.5% कर सकता है आरबीआई महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए फिच का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि अप्रैल की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। लेकिन फिच के मुताबिक, सप्लाई शॉक से पैदा हुए मूल्य दबाव से निपटने के लिए आरबीआई इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करके इसे 5.5% कर सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया था और महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था। डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट नहीं करेंसी मार्केट को लेकर फिच ने भारतीय बाजार के लिए राहत भरी बात कही है। फिच के अनुसार, इस साल के बचे हुए महीनों में भारतीय रुपए में किसी बड़े अवमूल्यन (गिरावट) की आशंका नहीं है। चालू वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपए का एक्सचेंज रेट औसतन 97.50 के स्तर पर रहने की उम्मीद है। ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा तेल संकट की मार सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रही है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) का अनुमान भी 0.2% घटाकर 2.4% कर दिया है। फिच के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रायन कुल्टन ने कहा कि ऑयल प्राइस शॉक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, लेकिन दुनिया भर में आईटी (IT) सेक्टर पर हो रहे भारी खर्च से इस झटके का असर थोड़ा कम जरूर हुआ है, खासकर एशिया में इसका फायदा मिल रहा है। 1970 के दशक जैसा बुरा संकट नहीं फिच का मानना है कि मौजूदा तेल संकट 1970 के दशक के खतरनाक तेल संकटों जितना गंभीर नहीं है। साल 1979 में कच्चे तेल की वास्तविक कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और तब ओपेक (OPEC) देशों की भूमिका भी काफी अलग थी। 1980 के मुकाबले आज वैश्विक जीडीपी में तेल की कुल खपत की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई है। वित्त वर्ष 2027-28 में आएगी तेजी फिच को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी। एनर्जी संकट का असर कम होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट में सुधार होगा, जिससे इस पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.7% पर पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यह दोबारा अपने ट्रेंड ग्रोथ रेट 6.4% के स्तर पर आ जाएगी। क्या होती है रेटिंग एजेंसी? रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच, मूडीज और एसएंडपी (S&P) वैश्विक स्तर पर देशों और कंपनियों की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नीतियों का आकलन करती हैं। इनके द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान और क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर ही दुनिया भर के बड़े निवेशक किसी देश में निवेश करने का फैसला लेते हैं। किसी देश की रेटिंग या अनुमान घटने से वहां विदेशी निवेश की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। ये खबर भी पढ़ें… इस साल 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी: पिछले साल 7.1% की दर से बढ़ी थी, अगले साल 6.6% रह सकती है GDP ग्रोथ देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। पूरे साल जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही, जो सरकार के फरवरी में लगाए गए 7.6% के अनुमान से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में GDP दर 7.1% रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6% रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
5863 Candidates Quit; Viral Videos Show Student Chaos

Hindi News Career UP Police Constable Exam: 5863 Candidates Quit; Viral Videos Show Student Chaos 5 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ की ओर से आयोजित यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 8 जून 2026 से शुरू हो गई। आज इस परीक्षा का दूसरा दिन है। उत्तरप्रदेश के 28 केंद्रों पर परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कर्मचारियों की भी जांच की गई। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद ही एग्जाम सेंटर पर एंट्री दी गई। परीक्षा ड्यूटी में एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। खिड़की से ट्रेन में घुसते छात्रों का वीडियो वायरल : इस तरह यूपी सरकार व्यवस्थित तरीके से एग्जाम का आयोजन करने का दावा कर रही है। जबकि हकीकत बयां करते ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं जिसमें भारी भीड़ के बीच छात्रों को परेशान होते देखा गया है। एग्जाम खत्म होते ही रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सरकार द्वारा किए गए सारे प्रबंध चरमराते हुए नजर आ रहे हैं। #WATCH | Gorakhpur, Uttar Pradesh: A written examination is underway for direct recruitment to the posts of Civil Police Constable and equivalent positions in the Uttar Pradesh Police. The exam is being conducted in two shifts on June 8, 9, and 10 pic.twitter.com/va7059wiCX— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 9, 2026 इस परीक्षा को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती परीक्षा के लिए यात्रा करने वाले उम्मीदवारों को बसों में 50% की छूट दी है। इन सबके बावजूद पहले ही दिन 5863 छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। 8 जून को परीक्षा खत्म होने के बाद लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ के कारण परीक्षार्थी जान जोखिम में डालकर आपातकालीन खिड़कियों के रास्ते ट्रेनों में घुसते हुए नजर आए। Lucknow witnessed massive crowds on the second day of the Uttar Pradesh Police Constable Recruitment Examination as thousands of candidates traveled to examination centers across the state. Due to heavy passenger rush at railway stations and overcrowded trains, several candidates… pic.twitter.com/Q8Yaz475mM— Dalimss News (@Dalimss_News) June 9, 2026 तूफान से ट्रेन रुकी, पैदल सेंटर पहुंचे छात्र उन्नाव में आए आंधी-तूफान के कारण कानपुर से बालामऊ जा रही ट्रेन के रास्ते में पेड़ गिर गया, जिससे घंटों ट्रेन खड़ी रही। इस रुकावट की वजह से परीक्षा देने जा रहे छात्रों को पैदल ही आगे बढ़ना पड़ा। इससे समय पर केंद्र पहुंचने को लेकर भारी परेशानी हुई। 10 हजार से ज्यादा छात्र नहीं पहुंचे एग्जाम सेंटर एग्जाम की पहली शिफ्ट में 2953 और दूसरी में 2910 छात्र अनुपस्थित रहे। इस तरह 25,536 के स्थान पर 19,673 छात्र ही एग्जाम में शामिल हुए। सुबह 10 से 12 बजे की पहली शिफ्ट में 12,768 छात्रों को शामिल होना था लेकिन 9815 छात्र ही आए। दोपहर 3 से 5 बजे की दूसरी शिफ्ट में 9858 आए। #WATCH | Lucknow, Uttar Pradesh: A written examination is underway for direct recruitment to the posts of Civil Police Constable and equivalent positions in the Uttar Pradesh Police. The exam is being conducted in two shifts on June 8, 9, and 10 pic.twitter.com/rcAFOjfICp— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 9, 2026 कपड़ों के साथ बालों की भी चेकिंग : परीक्षा में छात्रों की चेकिंग के दौरान जूते-बेल्ट तक उतरवा दिए गए। कपड़ों के अलावा उनके बाल और कानों की भी जांच की गई। एग्जाम सेंटर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की गई। छात्रों बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और रेटिना जांच के बाद ही एग्जाम हॉल में जाने दिया गया। यहां पर भी उम्मीदवारों को चेक करने के बाद प्रश्नपत्र दिया गया। गड़बड़ी के शक में एक छात्र को हिरासत में लिया : उम्मीदवारों के साथ जो पेरेंटस आए थे, उन्हें दिनभर गर्मी से परेशान होते देखा गया। आजमगढ़ में एक इंस्टाग्राम यूजर को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हापुड़ में परीक्षा के दौरान गड़बड़ी करने के आरोप में परीक्षार्थी सचिन सिंह को गिरफ्तार किया गया। जबकि गोरखपुर में एक छात्र को परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया। खुद सुन लो छात्र खुद बता रहे है 50% किराए छूट के साथ अन्य सुविधाय भी दी योगी सरकार ने और पारदर्शी तरीके से परीक्षा पूरी हुई।छात्र नहीं अफवाह फैलाने वाले परेशान है pic.twitter.com/poGrlagKTG— Pooja Singh (@puji1110) June 9, 2026 यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल रिक्रूटमेंट परीक्षा 2026 का आयोजन 8, 9 और 10 जून को किया जाएगा। ये एग्जाम पूरे राज्य में 1100 से ज्यादा एग्जाम सेंटर्स पर हो रहे हैं। आज और कल पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। ये खबरें भी पढ़ें : UP पुलिस कॉन्स्टेबल पेपर लीक की अफवाह:बोर्ड ने टेलीग्राम चैनल पर FIR की; 10 जून तक 28 लाख कैंडिडेट्स देंगे एग्जाम उत्तर प्रदेश पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 आज से शुरू हुई है। एग्जाम शुरू होने से 2 दिन पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरपीबी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही फर्जी पेपर लीक की खबरों के खिलाफ उम्मीदवारों को चेतावनी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Jill Biden expressed the pain of the White House.

वॉशिंगटन17 मिनट पहले कॉपी लिंक जिल ने हालिया इंटरव्यू में अपनी चुप्पी को पीढ़ीगत बताया। उन्होंने कहा, ‘हम इसी तरह बड़े हुए हैं।’- फाइल फोटो दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति के घर के भीतर क्या चलता है? क्या वहां भी आम घरों जैसी ही उलझनें होती हैं? अमेरिका की पूर्व फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन की नई किताब ‘व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग’ ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की पत्नी जिल का यह संस्मरण एक राजनेता की पत्नी के उस दर्द, अकेलेपन और असमंजस को बयां करता है, जो उसने दुनिया की सबसे शक्तिशाली चौखट पर रहकर महसूस किया। जिल ने स्वीकार किया है कि जून 2024 की उस ऐतिहासिक डिबेट से ठीक पहले, जब उन्होंने जो बाइडेन को देखा, तो वे ‘मिट्टी के पुतले जैसे बेजान’ लग रहे थे। रंग फीका था। जिल को लगा कि कुछ गलत है, लेकिन चुप रही। डिबेट के दौरान मंच पर बाइडेन लड़खड़ा गए। इसे टीवी पर देख रही जिल के मुंह से निकला, ‘ओ माई गॉड! क्या दुनिया सोचेगी कि जो हमेशा ऐसे ही रहते हैं?’ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी छिपी रही किताब में सबसे भावुक और चौंकाने वाला खुलासा वह है, जब जिल बताती हैं कि बाइडेन को ‘स्टेज-4 प्रोस्टेट कैंसर’ था, जो उनकी हड्डियों तक फैल चुका था। इसके बावजूद उन्होंने पति से इस बारे में सीधी बात नहीं की। जिल लिखती हैं, ‘हमारे रिश्ते में व्यक्तिगत स्वास्थ्य को लेकर हमेशा ‘गोपनीयता का पर्दा’ रहा।’ यह गोपनीयता 2015 में जवान बेटे बो बाइडेन को ब्रेन कैंसर से खोने पर भी बनी रही। पीढ़ीगत अंतर और वफादारी का दबाव जिल ने हालिया इंटरव्यू में अपनी चुप्पी को पीढ़ीगत बताया। उन्होंने कहा, ‘हम इसी तरह बड़े हुए हैं।’ वाइट हाउस मामलों की विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार केटी रॉजर्स के अनुसार, यह किताब दिखाती है कि कैसे सत्ता के शीर्ष पर वफादारी को हर चीज से ऊपर रखा जाता है। जिल आधुनिक कामकाजी महिला थीं, जो प्रथम महिला होकर भी कॉलेज में पढ़ाती थीं, वहीं दूसरी ओर वे एक पुराने ढर्रे की शादी के नियमों से बंधी थीं, जहां पति की भावनाओं को उनकी सेहत से ज्यादा तवज्जो दी गई। अगर बाइडेन राष्ट्रपति चुनाव से न हटे होते तो जीत जाते जिल ने किताब में उस पल का भी जिक्र किया है, जब बाइडेन ने कमला हैरिस को फोन कर बताया कि वे राष्ट्रपति चुनाव की रेस से हट रहे हैं। जिल के मुताबिक हैरिस ने कहा, ‘क्या आप यह जल्दी कर सकते हैं, 20 मिनट में?’ तब जिल कमरे से बाहर चली गईं, क्योंकि वे राजनीति के उस क्रूर चेहरे को नहीं देखना चाहती थीं, जिसने उनके पूरे परिवार को मानसिक तनाव दिया। जिल ने एक हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कहा कि 2020 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला लेते वक्त दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन पार्टी नेताओं और सलाहकारों ने दबाव बनाया और वे दोबारा लड़े। जिल दावा करती हैं कि यदि वे मैदान से हटे नहीं होते तो जीतते। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Jill Biden expressed the pain of the White House.

वॉशिंगटन50 मिनट पहले कॉपी लिंक जिल ने हालिया इंटरव्यू में अपनी चुप्पी को पीढ़ीगत बताया। उन्होंने कहा, ‘हम इसी तरह बड़े हुए हैं।’- फाइल फोटो दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति के घर के भीतर क्या चलता है? क्या वहां भी आम घरों जैसी ही उलझनें होती हैं? अमेरिका की पूर्व फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन की नई किताब ‘व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग’ ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की पत्नी जिल का यह संस्मरण एक राजनेता की पत्नी के उस दर्द, अकेलेपन और असमंजस को बयां करता है, जो उसने दुनिया की सबसे शक्तिशाली चौखट पर रहकर महसूस किया। जिल ने स्वीकार किया है कि जून 2024 की उस ऐतिहासिक डिबेट से ठीक पहले, जब उन्होंने जो बाइडेन को देखा, तो वे ‘मिट्टी के पुतले जैसे बेजान’ लग रहे थे। रंग फीका था। जिल को लगा कि कुछ गलत है, लेकिन चुप रही। डिबेट के दौरान मंच पर बाइडेन लड़खड़ा गए। इसे टीवी पर देख रही जिल के मुंह से निकला, ‘ओ माई गॉड! क्या दुनिया सोचेगी कि जो हमेशा ऐसे ही रहते हैं?’ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी छिपी रही किताब में सबसे भावुक और चौंकाने वाला खुलासा वह है, जब जिल बताती हैं कि बाइडेन को ‘स्टेज-4 प्रोस्टेट कैंसर’ था, जो उनकी हड्डियों तक फैल चुका था। इसके बावजूद उन्होंने पति से इस बारे में सीधी बात नहीं की। जिल लिखती हैं, ‘हमारे रिश्ते में व्यक्तिगत स्वास्थ्य को लेकर हमेशा ‘गोपनीयता का पर्दा’ रहा।’ यह गोपनीयता 2015 में जवान बेटे बो बाइडेन को ब्रेन कैंसर से खोने पर भी बनी रही। पीढ़ीगत अंतर और वफादारी का दबाव जिल ने हालिया इंटरव्यू में अपनी चुप्पी को पीढ़ीगत बताया। उन्होंने कहा, ‘हम इसी तरह बड़े हुए हैं।’ वाइट हाउस मामलों की विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार केटी रॉजर्स के अनुसार, यह किताब दिखाती है कि कैसे सत्ता के शीर्ष पर वफादारी को हर चीज से ऊपर रखा जाता है। जिल आधुनिक कामकाजी महिला थीं, जो प्रथम महिला होकर भी कॉलेज में पढ़ाती थीं, वहीं दूसरी ओर वे एक पुराने ढर्रे की शादी के नियमों से बंधी थीं, जहां पति की भावनाओं को उनकी सेहत से ज्यादा तवज्जो दी गई। अगर बाइडेन राष्ट्रपति चुनाव से न हटे होते तो जीत जाते जिल ने किताब में उस पल का भी जिक्र किया है, जब बाइडेन ने कमला हैरिस को फोन कर बताया कि वे राष्ट्रपति चुनाव की रेस से हट रहे हैं। जिल के मुताबिक हैरिस ने कहा, ‘क्या आप यह जल्दी कर सकते हैं, 20 मिनट में?’ तब जिल कमरे से बाहर चली गईं, क्योंकि वे राजनीति के उस क्रूर चेहरे को नहीं देखना चाहती थीं, जिसने उनके पूरे परिवार को मानसिक तनाव दिया। जिल ने एक हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कहा कि 2020 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला लेते वक्त दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन पार्टी नेताओं और सलाहकारों ने दबाव बनाया और वे दोबारा लड़े। जिल दावा करती हैं कि यदि वे मैदान से हटे नहीं होते तो जीतते। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔





