कंगना की लगातार पिछली 5 फिल्में फ्लॉप:'भारत भाग्य विधाता' का रिलीज के दिन 3 फिल्मों से क्लैश; क्या बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएगी?

एक्ट्रेस कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। हालांकि, इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। एक तरफ कंगना की पिछली कई फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हुई हैं, वहीं, जिस दिन यानी 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ रिलीज होगी, उसी दिन 3 अन्य बॉलीवुड फिल्में भी रिलीज होंगी।, जिससे बॉक्स ऑफिस पर क्लैश की स्थिति बन रही है। कंगना की पिछली कई फिल्में फ्लॉप रहीं कंगना की पिछली पांच फिल्मों का प्रदर्शन बॉक्स ऑफिस पर खराब रहा है। पिछली फिल्म ‘इमरजेंसी’ (2025) में कंगना ने इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई और खुद डायरेक्शन भी किया। लगभग 60 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने भारत में करीब 23.81 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। इससे पहले रिलीज हुई फिल्म ‘तेजस’ (2023) का बजट लगभग 70 करोड़ रुपए था। फिल्म ने मात्र 8.05 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। वह तमिल फिल्म ‘चंद्रमुखी 2’ में नजर आई थीं। 65 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 54:10 करोड़ रुपए कमाए और फ्लॉप रही। वहीं, ‘धाकड़’ (2022) में कंगना एक्शन हीरोइन बनीं। 85 करोड़ रुपए के बजट वाली यह फिल्म सिर्फ 4.01 करोड़ रुपए कमा सकी थी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। ‘थलाइवी’ (2021) तमिल-हिंदी बाइलिंगुअल बायोपिक थी, जिसमें कंगना ने जे. जयललिता का रोल किया। 100 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने करीब 8.50 करोड़ रुपए की कमाई की और फ्लॉप रही। रिलीज के दिन तीन फिल्मों से क्लैश फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को रिलीज हो रही है। जून 2026 में कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं। 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ के साथ इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, मनोज बाजपेयी स्टारर ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ और विक्रम भट्ट की ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ भी रिलीज हो रही हैं। इसके अलावा जून के बाकी दिनों में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की ‘कॉकटेल 2’ (19 जून) तथा अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ (26 जून) जैसी बड़ी फिल्में भी रिलीज होने वाली हैं। इसके अलावा 4 जून को रिलीज हुई ‘पेड्डी’ और 5 जून को रिलीज हुई ‘है जवानी है तो इश्क होना है’ भी बॉक्स ऑफिस पर चल रही हैं। ‘भारत भाग्य विधाता’ की बात करें तो यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। PEN स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में कंगना नर्स की भूमिका में हैं।
कंगना की लगातार पिछली 5 फिल्में फ्लॉप:'भारत भाग्य विधाता' का रिलीज के दिन 3 फिल्मों से क्लैश; क्या बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएगी?

एक्ट्रेस कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। हालांकि, इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। एक तरफ कंगना की पिछली कई फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हुई हैं, वहीं, जिस दिन यानी 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ रिलीज होगी, उसी दिन 3 अन्य बॉलीवुड फिल्में भी रिलीज होंगी।, जिससे बॉक्स ऑफिस पर क्लैश की स्थिति बन रही है। कंगना की पिछली कई फिल्में फ्लॉप रहीं कंगना की पिछली पांच फिल्मों का प्रदर्शन बॉक्स ऑफिस पर खराब रहा है। पिछली फिल्म ‘इमरजेंसी’ (2025) में कंगना ने इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई और खुद डायरेक्शन भी किया। लगभग 60 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने भारत में करीब 23.81 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। इससे पहले रिलीज हुई फिल्म ‘तेजस’ (2023) का बजट लगभग 70 करोड़ रुपए था। फिल्म ने मात्र 8.05 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। वह तमिल फिल्म ‘चंद्रमुखी 2’ में नजर आई थीं। 65 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 54:10 करोड़ रुपए कमाए और फ्लॉप रही। वहीं, ‘धाकड़’ (2022) में कंगना एक्शन हीरोइन बनीं। 85 करोड़ रुपए के बजट वाली यह फिल्म सिर्फ 4.01 करोड़ रुपए कमा सकी थी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। ‘थलाइवी’ (2021) तमिल-हिंदी बाइलिंगुअल बायोपिक थी, जिसमें कंगना ने जे. जयललिता का रोल किया। 100 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने करीब 8.50 करोड़ रुपए की कमाई की और फ्लॉप रही। रिलीज के दिन तीन फिल्मों से क्लैश फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को रिलीज हो रही है। जून 2026 में कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं। 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ के साथ इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, मनोज बाजपेयी स्टारर ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ और विक्रम भट्ट की ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ भी रिलीज हो रही हैं। इसके अलावा जून के बाकी दिनों में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की ‘कॉकटेल 2’ (19 जून) तथा अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ (26 जून) जैसी बड़ी फिल्में भी रिलीज होने वाली हैं। इसके अलावा 4 जून को रिलीज हुई ‘पेड्डी’ और 5 जून को रिलीज हुई ‘है जवानी है तो इश्क होना है’ भी बॉक्स ऑफिस पर चल रही हैं। ‘भारत भाग्य विधाता’ की बात करें तो यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। PEN स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में कंगना नर्स की भूमिका में हैं। फिल्म में कंगना के अलावा गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे और आशा शेलार भी अहम भूमिकाओं में हैं।
लॉस एंजिलिस में मेयर के लिए चुनाव:रेस में केरल में जन्मीं नित्या रमन भी, बोलीं-शहर की पहचान बड़ी इमारतें नहीं, गरीबों से व्यवहार

केरल में जन्मीं नित्या रमन (44) लॉस एंजिलिस के मेयर पद के प्राथमिक चुनाव में दूसरे स्थान पर पहुंच गईं। वे अब नवंबर में होने वाले चुनाव में मेयर करेन बैस को चुनौती देती दिख रही हैं। 72 वर्षीय करेन 34.7% वोटों के साथ पहले स्थान पर हैं। नित्या को 27.1% वोट मिले। मेयर पद का उम्मीदवार प्राथमिक चुनाव में 50% से अधिक वोट हासिल कर सीधे जीत सकता है। नहीं तो टॉप-2 उम्मीदवार रनऑफ चुनाव में आमने-सामने होते हैं। लॉस एंजिलिस न्यूयॉर्क के बाद अमेरिका का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है। हॉलीवुड भी यहीं है। नित्या कहती हैं कि लोगों की मदद के लिए राजनीतिक सोच बनाने में भारत का अहम योगदान है। कैसे, जानिए उन्हीं की जुबानी… मैं 6 साल की उम्र में अमेरिका आ गई थी। स्कूल में प्रवासी और रंग दोनों के आधार पर भेदभाव झेला। इस अनुभव ने सामाजिक न्याय के प्रति मुझमें गहरी संवेदना पैदा की। हार्वर्ड में पॉलिटिकल थ्योरी पढ़ी। एमआईटी से अर्बन प्लानिंग की डिग्री ली। 2020 में पहली बार लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल में जीती तो ये ‘राजनीतिक भूकंप’ कहा गया। लोग मानते हैं कि मेरी राजनीति यहीं से शुरू हुई। पर, इसकी जड़ें दिल्ली और चेन्नई की झुग्गियों में हैं। दिल्ली ने सवाल दिए, चेन्नई ने जवाब पढ़ाई के बाद मैं भारत लौटी। दिल्ली में एक दिन देखा कि एक विशाल झुग्गी बस्ती तोड़ दी गई। एक लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए। इस पर कहीं कोई चर्चा नहीं हुई। समझ आया कि गरीबों की समस्या सिर्फ गरीबी नहीं, बल्कि उन्हें अदृश्य बना दिया जाना है। दिल्ली ने सवाल दिए, तो चेन्नई ने जवाब। वहां ‘ट्रांसपेरेंट चेन्नई’ पहल के तहत झुग्गी बस्तियों का नक्शा बनाया। पानी, शौचालय, ड्रेनेज और बुनियादी सुविधाओं का डेटा जुटाया। बदलाव के लिए संवेदना के साथ आंकड़े भी जरूरी हैं। शहरी समस्याएं व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी होती हैं। भारत में झुग्गी, अमेरिका में फुटपाथ 2013 में लॉस एंजिलिस पहुंची। यहां झुग्गियों की जगह बेघर लोग फुटपाथ पर थे। प्रशासनिक कार्यालय में नौकरी के दौरान बेघरों पर होने वाले खर्च पर शोध की जिम्मेदारी मिली। इन पर हर साल 10 करोड़ डॉलर खर्च हो रहे हैं। लेकिन, 90% खर्च इन्हें जेल भेजने जैसे कामों पर था। आवास, पुनर्वास और स्थायी समाधान पर खर्च बहुत कम था। बदलाव के लिए राजनीति में उतरी। राजनीति करियर नहीं, सिर्फ काम का जरिया जब मैंने मेयर का चुनाव लड़ने की सोची तो लोगों ने कहा कि यह सही समय नहीं है। मैंने कहा कि संकट कभी समय देखकर नहीं आते। मैं यहां करियर बनाने या 20 साल तक कुर्सी पर चिपके रहने के लिए नहीं आई हूं। मैं अर्बन प्लानर हूं। राजनीति मेरा पेशा नहीं, अपना काम पूरा करने का जरिया है। बदलाव का कोई बेहतर तरीका राजनीति के बाहर भी दिखा तो मैं उसे अपनाने में संकोच नहीं करूंगी। किसी शहर की महानता उसकी चमकदार इमारतों से नहीं, बल्कि इससे तय होती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। अगर एक शहर हर व्यक्ति को सम्मानजनक आवास, सुरक्षित जीवन और अवसर नहीं दे सकता, तो उसकी समृद्धि अधूरी है।
Gold & Silver Rates Today June 9

Hindi News Business Gold & Silver Rates Today June 9 | Gold ₹1.53 Lakh, Silver ₹2.46 Lakh नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने के दाम में आज यानी 9 जून को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 1,095 रुपए बढ़कर 1.53 लाख रुपए हो गया है। हालांकि, चांदी के दाम में आज गिरावट रही। 1 किलो चांदी की कीमत 1,307 रुपए कम होकर 2.46 लाख रुपए पर आ गई है। सोना इस साल 19 हजार और चांदी 15 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 19 हजार रुपए और चांदी 15 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.53 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.45 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल तारीख सोना चांदी 31 दिसंबर 2025 ₹1,33,195 ₹2,30,420 31 जनवरी 2026 ₹1,65,795 ₹3,39,350 28 फरवरी 2026 ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च 2026 ₹1,46,733 ₹2,30,135 30 अप्रैल 2026 ₹1,50,263 ₹2,40,331 9 जून 2026 ₹1,52,584 ₹2,45,607 नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘दीदी बदल गई थी’: सांसद शताब्दी रॉय ने ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी से किनारा क्यों किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 12:19 IST 2009 से बनर्जी के साथ जुड़ी रहीं शताब्दी रॉय ने कहा कि तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी हाल के वर्षों में काफी बदल गई हैं। सताब्दी रॉय द्वारा भ्रष्टाचार, अलगाव का आरोप लगाए जाने से टीएमसी विद्रोह गहरा गया है तृणमूल कांग्रेस के भीतर संकट मंगलवार को और गहरा हो गया जब अभिनेता से नेता बनी और चार बार की सांसद शताब्दी रॉय ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व की आलोचना की और बताया कि उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला क्यों किया। वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय और काकोली घोष दस्तीदार द्वारा अपना असंतोष व्यक्त करने के बाद, सताब्दी रॉय ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के कामकाज के बारे में चिंता व्यक्त करने वाली नवीनतम प्रमुख तृणमूल नेता बन गईं। 2009 से बनर्जी के साथ जुड़ी रहीं शताब्दी रॉय ने कहा कि तृणमूल प्रमुख हाल के वर्षों में काफी बदल गई हैं। उन्होंने एनडीटीवी से कहा, “दीदी बदल गई थी।” उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में वह काफी बदल गई हैं। मेरा उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव है, लेकिन मेरे लिए काम मायने रखता है और इसलिए मैंने यह फैसला लिया है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘दीदी बदल गई थी’: सांसद शताब्दी रॉय ने ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी से किनारा क्यों किया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)सताब्दी रॉय आलोचना(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)तृणमूल आंतरिक असंतोष(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)अभिनेता से राजनेता बने(टी)पार्टी नेतृत्व में दरार(टी)एनडीटीवी साक्षात्कार
‘सही समय पर सही नेता’: एनडीए शासन के 12 साल पर चंद्रबाबू नायडू का पीएम मोदी पर बड़ा हमला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 12:07 IST सीएम चंद्रबाबू नाडु ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अपने सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्म-विश्वास को फिर से खोजा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (फोटो: पीटीआई) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनडीए सहयोगी एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में नए राष्ट्रीय आत्मविश्वास, मजबूत शासन और आर्थिक परिवर्तन का दौर आया है। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक राय लेख में, नायडू ने 10 जून, 2026 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया, जो मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल के लगातार 4,399 दिन थे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत पर केंद्रित शासन मॉडल में लाखों भारतीयों के भरोसे को दर्शाती है। सार्वजनिक जीवन में लगभग पांच दशक बिताने और कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने के बाद, नायडू ने लिखा कि मोदी अलग हैं क्योंकि उन्होंने सभ्यतागत आत्मविश्वास को आधुनिक शासन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा है। उन्होंने लिखा, “सार्वजनिक जीवन में मेरे लगभग पांच दशकों में, मुझे कई प्रधानमंत्रियों को देखने और उनके साथ बातचीत करने का अवसर मिला है, जिनमें से प्रत्येक ने अलग-अलग चुनौतियों और परिस्थितियों के माध्यम से भारत का नेतृत्व किया। लेकिन पीएम मोदी अलग हैं क्योंकि उन्होंने आधुनिक शासन के साथ सभ्यतागत आत्मविश्वास को जोड़ा है।” ‘भारत ने फिर से पाया अपना आत्मविश्वास’ नायडू ने तर्क दिया कि भारत एक समय दुनिया की सबसे समृद्ध और उन्नत सभ्यताओं में से एक था, लेकिन आजादी के बाद कई दशकों तक अपनी पहचान और वैश्विक भूमिका को लेकर अनिश्चित रहा। उनके मुताबिक, पीएम मोदी के नेतृत्व ने भारत को अपने सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्मविश्वास को फिर से खोजने में मदद की है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के साथ अधिक आत्मविश्वास और रणनीतिक प्रासंगिकता के साथ जुड़ता है, भारत प्रथम के सिद्धांत द्वारा निर्देशित रहते हुए प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ समान रूप से बातचीत करता है। नायडू ने कहा, “पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अपने सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्म-विश्वास को फिर से खोजा है। भारत आज वैश्विक व्यवस्था में कहीं अधिक आत्मविश्वास और रणनीतिक प्रासंगिकता के साथ खड़ा है। पीएम मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत दुनिया के साथ प्रमुख शक्तियों के बीच बराबरी से जुड़े, हमेशा भारत प्रथम के सिद्धांत द्वारा निर्देशित हो।” सीएम नायडू ने भारत की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक विकास के साथ मिश्रित करने की मोदी की क्षमता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने योग, प्राणायाम, ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं को प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्रशासन और नवाचार-आधारित विकास के साथ एकीकृत करने की ओर इशारा किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक मान्यता को भारत के पारंपरिक ज्ञान को विश्वव्यापी स्वीकृति मिलने का उदाहरण बताया गया। पीएम मोदी के तहत डिजिटल परिवर्तन और आर्थिक विकास नायडू ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत एक दशक के भीतर दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों की परिभाषित विशेषता दृढ़ विश्वास और प्रभावी कार्यान्वयन से प्रेरित शासन रही है। उनके अनुसार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जन धन खाते, आधार एकीकरण, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय समावेशन अभ्यासों में से एक बनाया है। उन्होंने कहा कि 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे रिसाव कम हुआ है और बिचौलियों को खत्म किया गया है। सीएम नायडू ने कहा कि भारत ने सबसे पहले डिजिटल विभाजन को पाटकर आर्थिक विभाजन को पाट दिया है। सामाजिक परिवर्तन और बुनियादी ढाँचे को आगे बढ़ाना आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उस चीज़ की ओर भी इशारा किया जिसे उन्होंने बड़े पैमाने पर सामाजिक परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है, जबकि आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य देखभाल, पेयजल और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश से जीवन स्तर में सुधार हुआ है। नायडू के अनुसार, इस अवधि के दौरान मार्गदर्शक सिद्धांत “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारत लचीला और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। सीएम नायडू ने राजमार्गों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, माल ढुलाई गलियारों, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, विनिर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश की भी प्रशंसा की। उन्होंने इन्हें तत्काल राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लिए गए निर्णयों के बजाय दीर्घकालिक राष्ट्र-निर्माण उपाय बताया। पीएम मोदी के तहत संघवाद और आंध्र का विकास नायडू ने कहा कि एक और बड़ा बदलाव प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद को मजबूत करना है। उनके अनुसार, अब राज्यों को केवल प्रशासनिक इकाइयों के बजाय राष्ट्रीय विकास के इंजन के रूप में देखा जाने लगा है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश को बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण, अमरावती और उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से इस साझेदारी से लाभ हुआ है। नायडू ने कहा, “संघ और राज्यों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद ने राज्यों को नवाचार करने, प्रतिस्पर्धा करने और बढ़ने के लिए अधिक स्थान दिया है। राज्यों को केवल प्रशासनिक इकाइयों के बजाय राष्ट्रीय विकास के इंजन के रूप में माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश को इस विकासोन्मुख साझेदारी से बहुत फायदा हुआ है।” ‘एक स्वर्णिम युग की शुरुआत’ नायडू ने अपने पुराने विश्वास को दोहराया कि मोदी भारत के लिए सही समय पर सही नेता हैं। उन्होंने लिखा कि इतिहास इस काल को न केवल आर्थिक विकास और राजनीतिक स्थिरता के लिए बल्कि भारत के आत्मविश्वास को बहाल करने के लिए भी याद रखेगा। इसे भारत का निर्णायक क्षण बताते हुए नायडू ने कहा कि देश स्वर्ण युग में प्रवेश कर रहा है और विश्वास जताया कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा। “मैंने अक्सर कहा है कि नरेंद्र मोदी भारत के लिए सही समय पर सही नेता थे। 12 वर्षों के बाद, यह विश्वास और मजबूत हुआ है। इतिहास इस अवधि को केवल आर्थिक विकास या राजनीतिक स्थिरता के लिए नहीं, बल्कि किसी गहरी चीज़ के लिए याद रखेगा – भारत के आत्मविश्वास की बहाली। मेरा मानना है कि
अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने अलीबाबा ग्रुप, बायडू और BYD जैसी दिग्गज चीनी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘चीनी मिलिट्री कंपनियों’ की लिस्ट में शामिल किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार ये कंपनियां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मदद करती हैं। अमेरिका ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के सेक्शन 1260H के तहत अब तक 100 से अधिक चीनी कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। क्या है अमेरिका का सेक्शन 1260H और इसका असर? क्या है यह कानून: अमेरिकी नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) का सेक्शन 1260H अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को उन चीनी कंपनियों की पहचान कर उन्हें लिस्टेड करने की शक्ति देता है, जो अमेरिका में कमर्शियल काम करती हैं, लेकिन बैकएंड पर चीनी सेना को मजबूत बना रही हैं। क्यों किया जाता है लिस्टेड: अमेरिका को आशंका है कि चीन ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न’ नीति के तहत नागरिक और व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल अपनी सेना को आधुनिक और घातक बनाने में कर रहा है। क्या होता है असर: इस लिस्ट में आने के बाद इन कंपनियों पर कई तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी कंपनियां और निवेशक इनमें निवेश करने से कतराते हैं। इससे इनके ग्लोबल सप्लाई चेन और बिजनेस ऑपरेशंस पर बुरा असर पड़ता है। अलीबाबा, टेनसेंट और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों पर शिकंजा पेंटागन द्वारा जारी की गई इस नई लिस्ट में चीन के लगभग हर बड़े सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीबाबा, सर्च इंजन और एआई सेक्टर की बड़ी कंपनी बायडू, और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों में से एक BYD शामिल है। इनके अलावा इस लिस्ट में बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL, गेमिंग और सोशल मीडिया की बड़ी कंपनी टेनसेंट, टेलिकॉम कंपनी हुवावे और ड्रोन बनाने वाली कंपनी DJI को भी शामिल किया गश है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग डिवाइस बनाने वाली टीपी-लिंक, रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री , सर्विलांस कैमरा बनाने वाली हिकविज़), और कोस्को शिपिंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। चीन की बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर जैसे चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम को भी सेना से जुड़े होने के कारण इसमें डाला गया है। पेंटागन ने दिया चीनी सरकारी मंत्रालयों और सेना से संबंधों का हवाला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन कंपनियों को लिस्टेड करने के लिए ठोस कानूनी और रणनीतिक कारण बताए हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के सरकारी तंत्र और सैन्य संस्थानों से जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेज में खास तौर पर ‘स्टेट-ओन्ड एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (SASAC) और ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (MIIT) का ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फॉर नेशनल डिफेंस (SASTIND) और चीन की मुख्य सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ-साथ पीपुल्स आर्म्ड पुलिस व चीनी खुफिया और कानून प्रवर्तन (लॉ-इन्फोर्समेंट) एजेंसियों के साथ भी इन कंपनियों के संबंध का दावा अमेरिका ने किया है। चीन के ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर पेंटागन के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि ये कंपनियां चीन के रणनीतिक तकनीकी विकास के कई बड़े प्रोग्राम्स में हिस्सा ले रही हैं। इनमें चीन के महत्वाकांक्षी ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ जैसी स्कीम्स शामिल हैं। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग इन सरकारी स्कीम्स के जरिए उन्नत तकनीकों को विकसित कर रहा है ताकि तकनीक के मामले में अमेरिका को पछाड़ा जा सके और इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य तैयारियों में किया जा सके। लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कंपनियां कर सकती हैं अपील अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस आधिकारिक दस्तावेज में यह भी साफ किया है कि यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे गलत तरीके से इस लिस्ट में डाला गया है, तो वह इस फैसले को चुनौती दे सकती है। पेंटागन ने इसके लिए एक प्रॉपर प्रोसेस और गाइडलाइंस जारी की हैं। लिस्टेड कंपनियां अपनी सफाई में सबूत पेश कर सकती हैं और नाम हटाने के लिए पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं।
‘बीजेपी उन्हें स्वीकार नहीं करेगी’: ममता गुट ने बागी टीएमसी सांसदों पर ‘गद्दार’ तंज के साथ हमला बोला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 11:50 IST टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों को “देशद्रोही” बताया, जिनके भाजपा में शामिल होने के फैसले से पता चलता है कि वे सिर्फ सत्ता के भूखे थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आज़ाद। (एआईटीसी/फेसबुक) संकटग्रस्त तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मंगलवार को भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का प्रयास करने वाले असंतुष्ट सांसदों पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्होंने “बंगाल के मतदाताओं को धोखा दिया है।” टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, जिन्हें संसदीय विंग के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्त किया गया था, ने विद्रोही सांसदों को “देशद्रोही” बताया, जिनका भाजपा में शामिल होने का निर्णय स्पष्ट सबूत था कि वे सिर्फ सत्ता के भूखे थे। ये टिप्पणियां तब आईं जब टीएमसी, पहले से ही अपनी करारी चुनावी हार के बाद इस्तीफों, दलबदल और असंतोष के सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ गहरे संकट का सामना कर रही थी, उसे एक और झटका लगा जब टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने घोषणा की कि 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए में शामिल होने की मांग की है। ममता गुट ने क्या कहा? कल्याण बनर्जी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “कथित तौर पर पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं। हम जानना चाहते हैं कि पत्र को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उस पत्र पर हस्ताक्षर किसने किए? हालांकि, यह स्पष्ट है कि ये सांसद भूपेन्द्र यादव के घर गए थे, जिसका मतलब है कि वे भाजपा में शामिल हो गए हैं।” बनर्जी ने बागी सांसदों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने एक समय ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की थी और अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी किसी भी बागी सांसद को स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने कहा, “उनमें कोई राजनीतिक नैतिकता नहीं है। वे भूपेन्द्र यादव के आवास पर गए और जब सुवेंदु अधिकारी इस मामले पर चर्चा करने आए, तो यह स्पष्ट था कि उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। लोग मूर्ख नहीं हैं; वे सब कुछ देख रहे हैं।” आरजी कर हादसा कल्याण बनर्जी ने आगे भाजपा पर आरजी कर अस्पताल बलात्कार-हत्या की घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया, जहां 2024 में 31 वर्षीय स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी थीं, जबकि भाजपा ने मामले का राजनीतिकरण किया। इस घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और टीएमसी के भीतर घर्षण का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरा, कई नेताओं ने स्थिति से निपटने के लिए पार्टी के तरीके पर असंतोष व्यक्त किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘बीजेपी उन्हें स्वीकार नहीं करेगी’: ममता गुट ने बागी टीएमसी सांसदों पर ‘देशद्रोही’ तंज कसा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी ममता गुट(टी)टीएमसी बागी सांसद(टी)टीएमसी विद्रोह(टी)टीएमसी लोकसभा विद्रोह(टी)बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए(टी)लोकसभा राजनीति(टी)बंगाल राजनीति(टी)कल्याण बनर्जी
US Court Blocks H-1B Visa Tax; Registration Drops 38% Post Fee Hike

वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में फेडरल कोर्ट ने ट्रम्प के H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपए) फीस वसूलने वाली नीति को रद्द कर दिया है। बोस्टन कोर्ट ने कहा कि यह फीस नहीं बल्कि एक टैक्स है और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति नहीं बल्कि संसद की मंजूरी जरूरी थी। ट्रम्प ने सितंबर 2025 में घोषणा की थी कि जो कंपनियां H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देंगी, उन्हें हर वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की एक्स्ट्रा फीस देनी होगी। इसके बाद 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इसे चुनौती दी थी। अब कोर्ट के फैसले के खिलाफ ट्रम्प सरकार अपील कर सकती है। H-1B एक गैर-प्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। पहले H-1B वीजा आवेदन करने पर कंपनियों को करीब 2000 से 5000 डॉलर तक फीस देनी पड़ती थी। इस वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले को भारतीयों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। ट्रम्प सरकार बोली- H-1B का दुरुपयोग हो रहा ट्रम्प सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि H-1B सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है। सरकार के मुताबिक कई कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रख रही थीं। ऐसे में यह फीस टैक्स नहीं बल्कि एक तरह का आर्थिक दंड है। सरकार ने कहा कि इमिग्रेशन कानून के तहत राष्ट्रपति को विदेशी नागरिकों की एंट्री सीमित करने का अधिकार है। लेकिन कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 19 सितंबर 2025 को H-1B वीजा को लेकर नियमों में बदलाव से जुड़े ऑर्डर पर साइन किया था। सरकार ने माना- फीस बढ़ने के बाद आवेदन घटे ट्रम्प सरकार के फीस बढ़ने का असर वीजा आवेदनों पर भी पड़ा। US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आकड़ो के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के लिए H-1B रजिस्ट्रेशन में 38.5% की गिरावट आई। यह संख्या 3.44 लाख से घटकर 2.11 लाख रह गई। अमेरिकी सरकार ने खुद कोर्ट में माना था कि फीस बढ़ने के बाद H-1B वीजा के आवेदन तेजी से घटे हैं। मार्च में प्रशासन ने बताया था कि 15 फरवरी तक सिर्फ 85 लोगों ने ही नई फीस जमा की थी। H-1B प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अलावा एडवांस डिग्री वाले विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए और 20,000 वीजा दिए जाते हैं। यह वीजा आमतौर पर 3 से 6 साल के लिए मंजूर होता है। भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ा था ट्रम्प सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ा था। बड़ी संख्या में भारतीय IT प्रोफेशनल्स H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं। AI की वजह से टेक सेक्टर में छंटनी और नए इमिग्रेशन नियमों के कारण विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पहले ही धीमी हो चुकी थी। इस बीच कई भारतीय कर्मचारियों की नौकरी चली गई। अमेरिकी नियमों के मुताबिक नौकरी जाने के बाद नए रोजगार के लिए सिर्फ 60 दिन का समय मिलता है। नौकरी नहीं मिलने पर कई भारतीयों को वापस लौटना पड़ा। जयशंकर ने भी उठाया था मुद्दा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रुबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया है। उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवास की समस्या से जूझ रहा है। 20 मिलियन से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं। ————————- H-1B वीजा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की छंटनी, नई जॉब नहीं:H-1B पर गए थे, ट्रम्प के सख्त नियम से अब डिपोर्ट का खतरा अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। अब उनपर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, ये सभी एच-1बी वीजा पर अमेरिका गए थे, लेकिन छंटनी के बाद इनके पास नई नौकरी ढूंढने व वीजा स्टेटस बचाने के लिए सीमित समय बचा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
दीपिका-रणवीर नए घर में दिखे:एक्ट्रेस का बेबी बंप नजर आया; अपार्टमेंट में दूसरे बच्चे के जन्म के बाद शिफ्ट हो सकते हैं

सोमवार को दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह मुंबई के बांद्रा वेस्ट स्थित अपने समुद्र किनारे बने नए क्वाड्रुप्लेक्स घर की बालकनी में नजर आए। दोनों घर के इंटीरियर के काम की प्रोग्रेस देखने पहुंचे थे। जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए, उनमें दीपिका सफेद को-ऑर्ड आउटफिट में दिखीं, जबकि रणवीर ने लाल टी-शर्ट, काली पैंट और काली कैप पहनी हुई थी। वहीं हाल ही में दूसरी बार प्रेग्नेंट दीपिका का बेबी बंप भी नजर आया। खबरों के अनुसार, दूसरे बच्चे के जन्म के बाद कपल नए आलीशान घर में शिफ्ट हो सकता है। समुद्र के सामने बना यह लग्जरी क्वाड्रुप्लेक्स अपार्टमेंट काफी बड़ा और शानदार बताया जा रहा है। अप्रैल में की थी प्रेग्नेंसी अनाउंसमेंट दीपिका पादुकोण ने 19 अप्रैल को अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी अनाउंस की थी। दीपिका और रणवीर के इंस्टाग्राम हैंडल पर उनकी बेटी दुआ की एक तस्वीर शेयर की गई थी, जिसमें बेटी ने एक प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पकड़ी हुई है, जो पॉजिटिव रिजल्ट दिखा रहा है। तस्वीर में रणवीर बेटी को गोद में लिए हुए हैं, हालांकि उनका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। वहीं, तस्वीर में दुआ का आधा चेहरा नजर आ रहा था। 2024 में बेटी दुआ का जन्म हुआ था बता दें कि दीपिका और रणवीर ने 8 सितंबर 2024 को अपनी बेटी दुआ के जन्म की जानकारी दी थी। उस समय उन्होंने लिखा था, ‘वेलकम बेबी गर्ल। 8-9-2024। दीपिका और रणवीर।’ इससे पहले फरवरी 2024 में दीपिका ने प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी। दोनों की लव स्टोरी 2013 में फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ के सेट से शुरू हुई थी। कई सालों तक रिश्ते में रहने के बाद दोनों ने 2018 में इटली में शादी की थी। कपल के वर्कफ्रंट की बात करें तो रणवीर हाल ही में फिल्म धुरंधर और धुरंधर 2 में नजर आए थे। दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट ने दुनियाभर में 1307 करोड़ रुपए का कारोबार किया था, जबकि इसके सीक्वल को भी दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला था। धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में करीब ₹1149 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1813 करोड़ ग्रॉस कमाई की है। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। वहीं, दीपिका शाहरुख खान के साथ फिल्म किंग में नजर आएंगी।





