Womens T20 WC Favourites: Australia, India, SA, England

स्पोर्ट्स डेस्क2 घंटे पहले कॉपी लिंक विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में 12 टीमें हिस्सा लेंगी। मौजूदा फॉर्म, वर्ल्ड कप रिकॉर्ड, टीम कॉम्बिनेशन और कप्तानी के आधार पर ऑस्ट्रेलिया, भारत, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका खिताब की सबसे मजबूत दावेदार नजर आती हैं। हमने इन चारों टीमों की दावेदारी को तीन फैक्टर्स पर परखा है… 1. टी-20 वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 2. पिछले डेढ़ साल की फॉर्म 3. कप्तान और टीम कॉम्बिनेशन 1. ऑस्ट्रेलिया: सातवें खिताब की सबसे बड़ी दावेदार विमेंस क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया जितनी सफल टीम कोई नहीं रही। टीम ने 9 में से 6 टी-20 वर्ल्ड कप जीते हैं। एलिसा हीली के बाद सोफी मोलिन्यूक्स की कप्तानी में टीम उतरेगी। एलिस पेरी, बेथ मूनी, एश्ले गार्डनर, ताहलिया मैक्ग्रा और मेगन शुट जैसी स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को मजबूत बनाती है। फैक्टर-1: 80% मैच जीतने वाली इकलौती टीम ऑस्ट्रेलिया ने टी-20 वर्ल्ड कप में 49 मैच खेले हैं। इसमें 39 जीते और सिर्फ 9 हारे। टीम का जीत प्रतिशत टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 80.6% है। टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का हाईएस्ट स्कोर 191 रहा है। फैक्टर-2: 2025-26 में सिर्फ 2 मैच हारी पिछले डेढ़ साल में ऑस्ट्रेलिया ने 12 में से 10 टी-20 मुकाबले जीते हैं। लेकिन हाल के ICC टूर्नामेंट्स में टीम अपने ताकत के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। 2025 वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में उसे भारत के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। वहीं 2024 टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका ने उसे बाहर कर दिया था। फैक्टर-3: नई कप्तान, लेकिन पुराना दम सोफी मोलिन्यूक्स का यह पहला बड़ा ICC टूर्नामेंट है। उन्होंने अब तक 6 मैचों में कप्तानी की है। इसमें 4 जीत और 2 हार मिली है। उनकी कप्तानी में टीम ने अपना पांचवां सबसे बड़ा टोटल 211 रन बनाया है। 2. भारत: वनडे के बाद अब टी-20 ट्रॉफी पर नजर भारत ने 2025 में पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा था। अब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर लगातार दो ICC खिताब जीतने वाली टीम बनना चाहेगी। ऐसा अब तक सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही कर पाया है। फैक्टर-1: 2020 में फाइनल, कुल 55% मैच जीते भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में 40 मैच खेले हैं। इनमें 22 जीत और 18 हार मिली हैं। टीम का जीत पर्सेंटेज 55 है। भारत 2020 में फाइनल और 2018 व 2023 में सेमीफाइनल तक पहुंची थी। फैक्टर-2: पिछले डेढ़ साल में सबसे ज्यादा जीत भारत ने 2025-26 में 21 टी-20 खेले और 12 जीते। यह चारों दावेदारों में सबसे ज्यादा जीत है। हालांकि टीम को इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका दौरे पर सीरीज हार का सामना भी करना पड़ा। दूसरी ओर भारत ने घर में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया को हराया। फैक्टर-3: हरमनप्रीत ने 57% मैच जिताए हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने 81 टी-20 मैच जीते हैं। वहीं विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में 19 मैच खेले हैं, जिनमें 13 जीते और 6 हारे हैं। टीम की सबसे बड़ी उम्मीद स्मृति मंधाना होंगी, जिन्होंने पिछले साल वनडे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाए थे। ऋचा घोष, जेमिमा रोड्रिग्स, दीप्ति शर्मा और रेणुका सिंह जैसी खिलाड़ी भारत को संतुलन देती हैं। 3. इंग्लैंड: घरेलू मैदान पर 17 साल बाद ट्रॉफी की उम्मीद 2009 में पहला विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली इंग्लैंड टीम उसके बाद खिताब नहीं जीत सकी है। 2012, 2014 और 2018 में टीम रनरअप रही हैं। फैक्टर-1: 75% मैच जीतकर दूसरी सबसे सफल टीम इंग्लैंड ने टूर्नामेंट में 42 मैच खेले हैं। इनमें 31 जीते और 10 हारे। टीम का जीत प्रतिशत 75% है। यह ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा सबसे बेहतर रिकॉर्ड है। फैक्टर-2: न्यूजीलैंड और भारत को हराया इंग्लैंड ने हाल ही में न्यूजीलैंड और भारत दोनों को 2-1 से हराया। खास बात यह रही कि कप्तान नैट सिवर-ब्रंट की गैरमौजूदगी में भी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। एलिस कैप्सी, सोफी एक्लेस्टोन, चार्ली डीन और हीदर नाइट जैसे खिलाड़ी शानदार लय में हैं। इंग्लैंड ने 1 जनवरी 2025 के बाद 17 टी-20 मुकाबले खेले हैं। इनमें 9 जीते और 8 हारे हैं। टीम का जीत प्रतिशत 52.94% रहा है। फैक्टर-3: 69% जीत का रिकॉर्ड नैट सिवर-ब्रंट को इंग्लैंड के एक डोमेस्टिक टूर्नामेंट के दौरान चोट लगी थी। हालांकि वे फिट हो गई हैं और टूर्नामेंट में टीम की कप्तानी करेंगी। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 16 टी-20 में से 11 जीते हैं। बल्लेबाजी और ऑलराउंड क्षमता के कारण वे टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। 4. साउथ अफ्रीका: लगातार फाइनल के बाद अब ट्रॉफी की बारी? साउथ अफ्रीका ने पिछले दो टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल खेले हैं, लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत सकी। टीम 2023 में ऑस्ट्रेलिया और 2024 में न्यूजीलैंड से हार गई थी। फैक्टर-1: 39 मैच में 18 जीते साउथ अफ्रीका ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के 39 मैचों में 18 जीत हासिल की हैं। जीत प्रतिशत सिर्फ 46% है, लेकिन हाल में टीम ने ICC टूर्नामेंट्स में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। फैक्टर-2: 2025-26 में 56% मैच जीते साउथ अफ्रीका ने 1 जनवरी 2025 के बाद 18 टी-20 मुकाबले खेले हैं। इसमें 10 जीते और 8 हारे हैं। टीम का जीत प्रतिशत 55.56% रहा है। इस दौरान उसने 220 रन का बेस्ट स्कोर बनाया और भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज में 4-1 से जीत दर्ज की। फैक्टर-3: वोल्वार्ट ने 50% से ज्यादा मैच जीते वोल्वार्ट की कप्तानी में साउथ अफ्रीका ने 21 टी-20 मैच जीते हैं। वहीं टी-20 वर्ल्ड कप में 6 में से 4 मुकाबले अपने नाम किए हैं। वोल्वार्ट की कप्तानी में साउथ अफ्रीका ने वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल खेला था। उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल में शतक लगाया था। वे टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर भी रहीं थीं। टीम में मरिजान कैप, सुने लुस, क्लो ट्रायन और डेन वान नीकर्क जैसी खिलाड़ी हैं। शबनम इस्माइल की वापसी ने बॉलिंग अटैकिंग को और मजबूत किया है। ————————————– विमेंस वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… इंग्लैंड-श्रीलंका में पहला मैच आज, ओपनिंग सेरेमनी में ब्रिटिश एक्ट्रेस एमा किंग्सटन परफॉर्म करेंगी विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत आज से होने जा रही है। टूर्नामेंट का पहला मैच इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच बर्मिंघम में खेला जाएगा। यह मैच भारतीय समयानुसार रात 11
Nora Fatehi Struggle Success Story; Dilbar – FIFA World Cup Siir Siir

4 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक नोरा फतेही ने संघर्ष, ठगी और तानों के बीच अपना रास्ता बनाया, ‘दिलबर’ ने दिलाई नई पहचान। मुंबई की चमक-दमक के पीछे ठगी, ताने और संघर्ष की लंबी कहानी भी छुपी है। नोरा फतेही की जिंदगी भी ऐसी ही रही, जहां काम दिलाने का वादा कर 20 लाख रुपए ठग लिए गए और कई बार उन्हें बिना फीस के गाने करने पड़े। “मेरा मजाक उड़ाया गया, दिलबर जैसे कई गाने फ्री में करने पड़े”- यह दौर उनकी पहचान बनने से पहले के संघर्ष को दिखाता है। कनाडा से मुंबई आई नोरा ने वेटर से लेकर ऑडिशन तक हर रास्ता अपनाया, लेकिन हार नहीं मानी। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी स्टारडम की सबसे बड़ी ताकत बना। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं नोरा फतेही के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। छिपकर डांस करती थीं नोरा, नहीं ली ट्रेनिंग; मां ने डांटा और पिटाई भी की नोरा का जन्म एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ। घर में डांस को लेकर कड़ा विरोध था, लेकिन उनके अंदर बचपन से ही डांस का जुनून था। उन्होंने कभी प्रोफेशनल डांस ट्रेनिंग नहीं ली। वे अलग-अलग डांस स्टाइल्स वीडियो देखकर और लगातार प्रैक्टिस से सीखती रहीं। नोरा बचपन में घर के अंदर बंद कमरे में छिपकर डांस करती थीं। उन्हें डर रहता था कि परिवार को पता चल गया तो डांट पड़ेगी। एक बार उनकी मां ने उन्हें डांस करते देख लिया, जिसके बाद उन्हें डांट और सख्त प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा। यहां तक की मां ने पिटाई भी की। विरोध के बावजूद नोरा ने डांस करना नहीं छोड़ा और अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करती रहीं। परिवार के विरोध और मुश्किल माहौल के बीच उन्होंने पढ़ाई पूरी की और इसके बाद भारत आने का फैसला किया। उनका सपना एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में नाम बनाने और खुद को डांसर व परफॉर्मर के रूप में स्थापित करने का था। 5,000 रुपए लेकर मुंबई आई थीं नोरा फतेही 2014 में बॉलीवुड में करियर शुरू करने के लिए केवल ₹5,000 लेकर मुंबई पहुंची थीं। नोरा कहती हैं- मुझे यह भी नहीं पता था कि 1000 डॉलर क्या होते हैं। मैं एक अपार्टमेंट में नौ लड़कियों के साथ रहती थी। वहां अक्सर सोचती थी कि मैं किस मुसीबत में फंस गई हूं। हिंदी न आने पर उड़ाया जाता था मजाक नोरा ने बताया कि भारत आने के बाद सबसे बड़ी चुनौती भाषा थी। हिंदी न जानने की वजह से ऑडिशन में उन्हें बार-बार रिजेक्ट किया जाता था। कई बार लोग उनके उच्चारण और एक्सेंट का मजाक उड़ाते थे। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती रहीं। लगा था मुंबई पहुंचते ही स्टार बन जाएंगी नोरा कहती हैं- फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले मैंने कोई तैयारी नहीं की थी। मुझे लगा था कि मुंबई पहुंचते ही स्टार बन जाऊंगी। मैंने कपड़े पैक किए और मुंबई आ गई। यहां आने के बाद पता चला कि बहुत कुछ सीखना है। मुझे हिंदी नहीं आती थी। हिंदी मेरे लिए विदेशी भाषा थी। सबसे पहले हिंदी सीखी और खुद को परफॉर्मर के तौर पर तैयार किया। कैटरीना कैफ और जैकलीन फर्नांडिस से मिली प्रेरणा नोरा कहती हैं- मैंने बॉलीवुड में कभी काम करने के बारे में नहीं सोचा था। इंडस्ट्री में आने से पहले मैंने ‘देवदास’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी फिल्में देखी थीं। मुझे लगता था कि सिर्फ इंडियन लड़कियां ही बॉलीवुड में एक्ट्रेस बन सकती हैं। बॉलीवुड में काम करने की प्रेरणा मुझे कैटरीना कैफ और जैकलीन फर्नांडिस से मिली। फिर मैंने बहुत ऑडिशन देने शुरू किए। गुजारे के लिए किया वेटर का काम, बेचे लॉटरी टिकट स्ट्रगल के दिनों में आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़े। नोरा ने कॉफी शॉप में वेटर का काम किया और लॉटरी टिकट भी बेचे। मॉडलिंग और छोटे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे थे, लेकिन कई बार काम के बाद भी भुगतान नहीं मिलता था। कई दिन सिर्फ ब्रेड और अंडे खाकर बिताए नोरा के लिए सबसे मुश्किल समय वह था जब पैसों की कमी के कारण उन्हें खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि कई बार दिनभर सिर्फ ब्रेड और अंडे खाकर गुजारा करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने मुंबई छोड़ने का विचार नहीं किया और अपने सपनों के लिए डटी रहीं। हफ्ते के 3 हजार रुपए में चलाना पड़ता था खर्च अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए नोरा फतेही कहती हैं कि उस समय जिस एजेंसी के साथ काम कर रही थी, वह उन्हें हफ्ते के सिर्फ 3 हजार रुपए देती थी। इतने कम पैसों में रोज का खर्च चलाना बहुत मुश्किल होता था। काम दिलाने का वादा कर 20 लाख रुपए ठग लिए बॉलीवुड में पहचान बनाने से पहले मेरे साथ ठगी हुई। मैंने बताया था कि जब मैं कनाडा से भारत आई थी, तब मेरी पहली एजेंसी ने मुझे काम दिलाने का वादा किया। उनके कहने पर मैंने 20 लाख रुपए दे दिए। लेकिन बाद में उनका व्यवहार बदल गया। जब मैंने एजेंसी छोड़ने और पैसे वापस मांगने की बात की, तो उन्होंने साफ कह दिया कि पैसे नहीं मिलेंगे। उस समय मैंने 20 लाख रुपए गंवा दिए। ये वही पैसे थे, जो मैंने एक विज्ञापन में काम करके कमाए थे। ‘बिग बॉस 9’ से मिली पहचान साल 2015 में नोरा को टीवी के चर्चित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ में हिस्सा लेने का मौका मिला। शो में उनका सफर लंबा नहीं रहा, लेकिन इससे उन्हें दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने कई डांस परफॉर्मेंस और फिल्मों में छोटे-बड़े मौके हासिल किए। नोरा फतेही ने 2014 में फिल्म ‘रोर: टाइगर्स ऑफ द सुंदरबन्स’ से बॉलीवुड डेब्यू किया। इसके बाद उन्हें साउथ इंडस्ट्री से भी कई फिल्मों के ऑफर मिले। नोरा 2015 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘बाहुबली’ के गाने ‘मनोहरी’ में नजर आई थीं। फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ के सुपरहिट गाने ‘दिलबर-दिलबर’ ने नोरा फतेही को ‘दिलबर गर्ल’ की नई पहचान दी। ‘दिलबर’ ने बदल दी जिंदगी नोरा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2018 में आया, जब फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ का गाना ‘दिलबर’ रिलीज हुआ। यह गाना
FIFA World Cup Starts, Air Force C-295 Tested

Hindi News Career Current Affairs June 12: FIFA World Cup Starts, Air Force C 295 Tested 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. वायुसेना ने C-295 की सफल टेस्टिंग की 10 जून को भारतीय वायुसेना ने C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की पहली सफल टेस्टिंग की। C-295 एक मीडियम टैक्टिकल मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है। इसने टेस्टिंग में सभी मानकों को पूरा किया। ये ट्विन-इंजन (दो इंजनों वाला) टर्बोप्रॉप विमान है, जो पुराने एवरो-748 की जगह लेगा। C-295 सैनिकों को लाने-ले जाने, कार्गो ट्रांसपोर्ट, मेडिकल इवैक्यूएशन और स्पेशल ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। C-295 एक बार में 70 सैनिक, 48 पैराट्रूपर्स या 24 मेडिकल स्ट्रेचर तक ले जा सकता है। C-295 सैनिकों तथा भारी सामान की ढुलाई, मेडिकल सामान, स्पेशल ऑपरेशन के समय काम आएगा। सितंबर 2021 में, भारत सरकार ने स्पेन की एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ ₹21,935 करोड़ के 56 विमानों का सौदा किया था। इसकी पहली खेप में भारत को 16 एयरक्राफ्ट मिले हैं। बाकी 40 एयरक्राफ्ट को वडोदरा में एक प्रोडक्शन फैसिलिटी में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा असेंबल किए जाएंगे। C-295 एक ट्विन-इंजन (दो इंजनों वाला) टर्बोप्रॉप विमान है स्पोर्ट्स (SPORTS) 2. FIFA मेंस वर्ल्ड कप शुरू हुआ 11 जून से 23वां FIFA मेंस वर्ल्ड कप शुरू हुआ। इसका ओपनिंग मैच मेक्सिको सिटी में खेला गया। पहला मैच मेक्सिको और साउथ अफ्रीका टीम के बीच खेला गया। FIFA वर्ल्ड कप 11 जून से 20 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेला जाएगा। FIFA के अब तक के इतिहास, यानी 96 साल में पहली बार तीन देश वर्ल्ड कप की मेजबानी कर रहे हैं। 16 शहरों में 48 टीमों के बीच कुल 104 मैच खेले जाएंगे। FIFA वर्ल्ड कप जीतने वाली चैंपियन टीम को 429 करोड़ रुपए मिलेंगे। 2022 FIFA वर्ल्ड कप अर्जेंटीना ने जीता था। लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो सहित दुनिया के 1,248 फुटबॉलर्स वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे हैं। वर्ल्ड कप में इस साल 4 नए देश काबो वर्डी, क्यूरासाओ, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान पहली बार हिस्सा ले रहे हैं। FIFA की शुरुआत 1930 में उरुग्वे में हुई थी। मेजबान उरुग्वे ने पहला वर्ल्ड कप जीता था। इस साल पहली बार भारत में भी FIFA वर्ल्ड कप टेलिकास्ट किया जा रहा है। 3. विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप शुरू 12 जून को 10वां विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप से इंग्लैंड और वेल्स में शुरू होगा। पहला मुकाबला मेजबान इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा और इसका फाइनल 5 जुलाई को लॉर्ड्स में होगा। इस बार विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में 12 टीमें हिस्सा ले रही हैं और इसमें 24 दिनों में 33 मुकाबले खेले जाएंगे। भारत का पहला मैच 14 जून को बर्मिंघम में पाकिस्तान के साथ होगा। 2024 में विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप न्यूजीलैंड ने जीता था। ऑस्ट्रेलिया टीम अब तक सबसे ज्यादा 6 बार विमेंस टी-20 चैंपियन रही चुकी है। भारत ने 2025 में अंडर-19 विमेंस टी-20 के वर्ल्ड कप जीता था इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 4. टाइम मैगजीन ने टॉप 100 स्पोर्ट्स पर्सन लिस्ट जारी की 10 जून को ‘टाइम’ मैगजीन ने पहली बार स्पोर्ट्स की 100 सबसे प्रभावशाली हस्तियों की सूची जारी की है। इस लिस्ट में भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना शामिल हैं। मैगजीन के कवर पेज पर चार बार के NBA (बास्केटवॉल) चैम्पियन लेब्रन जेम्स को जगह मिली है। इसके साथ ही लिस्ट में अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और एर्लिंग हालेंड जैसे फुटबॉलर्स शामिल हैं। बास्केटबॉल प्लेयर लेब्रोन जेम्स, बेसबॉल प्लेयर शोही ओटानी और वुमन बास्केटबॉल प्लेयर केटलिन क्लार्क समेत कार्लोस अलकराज भी इसमें शामिल हैं। 5. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुल्गारिया पीएम से मुलाकात की 10 जून को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोफिया में बुल्गारिया के पीएम रुमेन रादेव से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के प्रमुखों ने द्विपक्षीय संबंधों पर बात की। इस बैठक में दोनों देशों ने व्यापार और निवेश, फार्मा, सेमीकंडक्टर, AI, स्पेस ,डिफेंस, मोबिलिटी, पर्यटन और क्रिएटिव एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक में बदलती वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत-बुल्गारिया संबंधों पर बात हुई। जयशंकर ने यात्रा के दौरान नेशनल हिस्टोरिकल म्यूजियम का दौरा भी किया। गुरुवार को एस जयशंकर फिनलैंड में ‘कुलतारंता टॉक्स’ के 14वें संस्करण में शामिल भी हुए। कुलतारंता टॉक्स फिनलैंड का एक प्रमुख पॉलिसी फोरम है। मिसलीनियस (MISCELLENEOUS) 6. भारत फिलिस्तीनी रिफ्यूजियों को 2.5 मिलियन डॉलर सहायता देगा 11 जून को भारत ने फिलिस्तीन के रिफ्यूजियों के लिए यूनाइटेड नेशनल एजेंसी को 2.5 मिलियन डॉलर की मदद देने का ऐलान किया। भारत ये मदद ‘यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी फॉर पैलेस्टाइन रिफ्यूजीज इन द नियर ईस्ट’ (UNRWA) को देगा। UNRWA, संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख एजेंसी है, जो गाजा, वेस्ट बैंक, जॉर्डन, लेबनान और सीरिया में रह रहे लाखों फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत और सामाजिक सेवाएं प्रदान करती है। इस फंडिंग से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, राहत और सामाजिक कल्याण जैसी जरूरतों को पूरा किया जाएगा। भारत ने इस मदद को टू-स्टेट-सॉल्यूशन का हिस्सा बताया है, यानि भारत इजराइल की सुरक्षा चिंताओं और फिलिस्तीन के लोगों की आजादी दोनों का ही समर्थन करता है। फरवरी 2026 में भारत ने यूनाइटेड नेशन (UN) के सदस्य देशों के साथ मिलकर फिलिस्तीन पर चर्चा की थी और वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों के बसाए जाने पर चिंता जताई थी। 2018 में UNRWA को अपना सालाना योगदान बढ़ाने के बाद से, भारत ने करोड़ों डॉलर की सहायता दी है। UNRWA ने फिलिस्तीनियों के लिए विकास परियोजनाओं, मानवीय सहायता और चिकित्सा आपूर्ति में भी सहयोग किया है। आज का इतिहास (12 JUNE) 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PM इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी ठहराते हुए उनके चुनाव को अमान्य घोषित किया गया। 1964 में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन करने वाले नेता नेल्सन मंडेला को सरकार के खिलाफ साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा हुई। 1957 में हिन्दी कथाकार और उपन्यासकार गीतांजलि श्री का जन्म हुआ। —– ये खबर भी पढ़ें… रिलायंस और मेटा बनाएंगे भारत का पहला AI डेटा सेंटर:बेंगलुरु की सृष्टि किरण अंडर-13 वर्ल्ड नंबर
विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीतने की टॉप-4 दावेदार:ऑस्ट्रेलिया 6 बार की चैंपियन, भारत पिछले साल वनडे वर्ल्डकप जीता; अफ्रीका लगातार दो बार फाइनलिस्ट

विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में 12 टीमें हिस्सा लेंगी। मौजूदा फॉर्म, वर्ल्ड कप रिकॉर्ड, टीम कॉम्बिनेशन और कप्तानी के आधार पर ऑस्ट्रेलिया, भारत, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका खिताब की सबसे मजबूत दावेदार नजर आती हैं। हमने इन चारों टीमों की दावेदारी को तीन फैक्टर्स पर परखा है… 1. टी-20 वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 2. पिछले डेढ़ साल की फॉर्म 3. कप्तान और टीम कॉम्बिनेशन 1. ऑस्ट्रेलिया: सातवें खिताब की सबसे बड़ी दावेदार विमेंस क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया जितनी सफल टीम कोई नहीं रही। टीम ने 9 में से 6 टी-20 वर्ल्ड कप जीते हैं। एलिसा हीली के बाद सोफी मोलिन्यूक्स की कप्तानी में टीम उतरेगी। एलिस पेरी, बेथ मूनी, एश्ले गार्डनर, ताहलिया मैक्ग्रा और मेगन शुट जैसी स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को मजबूत बनाती है। फैक्टर-1: 80% मैच जीतने वाली इकलौती टीम ऑस्ट्रेलिया ने टी-20 वर्ल्ड कप में 49 मैच खेले हैं। इसमें 39 जीते और सिर्फ 9 हारे। टीम का जीत प्रतिशत टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 80.6% है। टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का हाईएस्ट स्कोर 191 रहा है। फैक्टर-2: 2025-26 में सिर्फ 2 मैच हारी पिछले डेढ़ साल में ऑस्ट्रेलिया ने 12 में से 10 टी-20 मुकाबले जीते हैं। लेकिन हाल के ICC टूर्नामेंट्स में टीम अपने ताकत के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। 2025 वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में उसे भारत के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। वहीं 2024 टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका ने उसे बाहर कर दिया था। फैक्टर-3: नई कप्तान, लेकिन पुराना दम सोफी मोलिन्यूक्स का यह पहला बड़ा ICC टूर्नामेंट है। उन्होंने अब तक 6 मैचों में कप्तानी की है। इसमें 4 जीत और 2 हार मिली है। उनकी कप्तानी में टीम ने अपना पांचवां सबसे बड़ा टोटल 211 रन बनाया है। 2. भारत: वनडे के बाद अब टी-20 ट्रॉफी पर नजर भारत ने 2025 में पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा था। अब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर लगातार दो ICC खिताब जीतने वाली टीम बनना चाहेगी। ऐसा अब तक सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही कर पाया है। फैक्टर-1: 2020 में फाइनल, कुल 55% मैच जीते भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में 40 मैच खेले हैं। इनमें 22 जीत और 18 हार मिली हैं। टीम का जीत पर्सेंटेज 55 है। भारत 2020 में फाइनल और 2018 व 2023 में सेमीफाइनल तक पहुंची थी। फैक्टर-2: पिछले डेढ़ साल में सबसे ज्यादा जीत भारत ने 2025-26 में 21 टी-20 खेले और 12 जीते। यह चारों दावेदारों में सबसे ज्यादा जीत है। हालांकि टीम को इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका दौरे पर सीरीज हार का सामना भी करना पड़ा। दूसरी ओर भारत ने घर में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया को हराया। फैक्टर-3: हरमनप्रीत ने 57% मैच जिताए हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने 81 टी-20 मैच जीते हैं। वहीं विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में 19 मैच खेले हैं, जिनमें 13 जीते और 6 हारे हैं। टीम की सबसे बड़ी उम्मीद स्मृति मंधाना होंगी, जिन्होंने पिछले साल वनडे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाए थे। ऋचा घोष, जेमिमा रोड्रिग्स, दीप्ति शर्मा और रेणुका सिंह जैसी खिलाड़ी भारत को संतुलन देती हैं। 3. इंग्लैंड: घरेलू मैदान पर 17 साल बाद ट्रॉफी की उम्मीद 2009 में पहला विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली इंग्लैंड टीम उसके बाद खिताब नहीं जीत सकी है। 2012, 2014 और 2018 में टीम रनरअप रही हैं। फैक्टर-1: 75% मैच जीतकर दूसरी सबसे सफल टीम इंग्लैंड ने टूर्नामेंट में 42 मैच खेले हैं। इनमें 31 जीते और 10 हारे। टीम का जीत प्रतिशत 75% है। यह ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा सबसे बेहतर रिकॉर्ड है। फैक्टर-2: न्यूजीलैंड और भारत को हराया इंग्लैंड ने हाल ही में न्यूजीलैंड और भारत दोनों को 2-1 से हराया। खास बात यह रही कि कप्तान नैट सिवर-ब्रंट की गैरमौजूदगी में भी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। एलिस कैप्सी, सोफी एक्लेस्टोन, चार्ली डीन और हीदर नाइट जैसे खिलाड़ी शानदार लय में हैं। इंग्लैंड ने 1 जनवरी 2025 के बाद 17 टी-20 मुकाबले खेले हैं। इनमें 9 जीते और 8 हारे हैं। टीम का जीत प्रतिशत 52.94% रहा है। फैक्टर-3: 69% जीत का रिकॉर्ड नैट सिवर-ब्रंट को इंग्लैंड के एक डोमेस्टिक टूर्नामेंट के दौरान चोट लगी थी। हालांकि वे फिट हो गई हैं और टूर्नामेंट में टीम की कप्तानी करेंगी। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 16 टी-20 में से 11 जीते हैं। बल्लेबाजी और ऑलराउंड क्षमता के कारण वे टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। 4. साउथ अफ्रीका: लगातार फाइनल के बाद अब ट्रॉफी की बारी? साउथ अफ्रीका ने पिछले दो टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल खेले हैं, लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत सकी। टीम 2023 में ऑस्ट्रेलिया और 2024 में न्यूजीलैंड से हार गई थी। फैक्टर-1: 39 मैच में 18 जीते साउथ अफ्रीका ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के 39 मैचों में 18 जीत हासिल की हैं। जीत प्रतिशत सिर्फ 46% है, लेकिन हाल में टीम ने ICC टूर्नामेंट्स में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। फैक्टर-2: 2025-26 में 56% मैच जीते साउथ अफ्रीका ने 1 जनवरी 2025 के बाद 18 टी-20 मुकाबले खेले हैं। इसमें 10 जीते और 8 हारे हैं। टीम का जीत प्रतिशत 55.56% रहा है। इस दौरान उसने 220 रन का बेस्ट स्कोर बनाया और भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज में 4-1 से जीत दर्ज की। फैक्टर-3: वोल्वार्ट ने 50% से ज्यादा मैच जीते वोल्वार्ट की कप्तानी में साउथ अफ्रीका ने 21 टी-20 मैच जीते हैं। वहीं टी-20 वर्ल्ड कप में 6 में से 4 मुकाबले अपने नाम किए हैं। वोल्वार्ट की कप्तानी में साउथ अफ्रीका ने वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल खेला था। उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल में शतक लगाया था। वे टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर भी रहीं थीं। टीम में मरिजान कैप, सुने लुस, क्लो ट्रायन और डेन वान नीकर्क जैसी खिलाड़ी हैं। शबनम इस्माइल की वापसी ने बॉलिंग अटैकिंग को और मजबूत किया है।
उम्र रोकने की दवा का पहली बार इंसान पर परीक्षण:ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की आंख की पुतली में लगाया गया इंजेक्शन

मेडिकल साइंस के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक ‘रिवर्स-एजिंग’ यानी बुढ़ापा रोकने की दवा का इंसानों पर पहला ट्रायल शुरू हो गया है। पहली बार उम्र के असर को उलटने वाला इंजेक्शन किसी इंसान को लगाया गया है। अमेरिका के बोस्टन स्थित बायोटेक स्टार्टअप ‘लाइफ बायोसाइंसेज’ ने बताया कि उनके पहले मरीज को सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग का इंजेक्शन दे दिया गया है। परीक्षण के तहत यह इंजेक्शन ग्लूकोमा (काला मोतिया) से पीड़ित मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया है। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य उम्र बढ़ने के कारण कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है। अगले 6 महीने तक वैज्ञानिक इसके असर और साइड इफेक्ट्स पर नजर रखेंगे। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हो चुका है सफल टेस्ट अब डॉक्टर और वैज्ञानिक आने वाले कई महीनों तक मरीज की बारीकी से निगरानी करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह तकनीक इंसानी शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। इस थेरेपी में सबसे पहले मरीज की आंख में एक सिंगल जीन थेरेपी इंजेक्शन दिया गया है। इसके बाद कुछ हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विशेष कोर्स कराया जाएगा। यह एंटीबायोटिक दवा शरीर के भीतर जाकर उन तीन इलाज करने वाले जीनों के लिए ‘ऑन स्विच’ का काम करेगी, जो कोशिकाओं को रीप्रोग्राम (युवा) करना शुरू करते हैं। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हुए टेस्ट में इसने उनकी रोशनी सफलतापूर्वक वापस लौटा दी थी। इस थैरेपी के लिए इंसानों की आंख को इसलिए चुना गया है, क्योंकि आंख शरीर के बाकी हिस्सों से अलग और सुरक्षित होती है। इससे साइड इफेक्ट्स पर नजर रखना भी आसान होता है। परीक्षण सफल रहा तो एजिंग थेरेपी का नया दौर लाइफ बायोसाइंसेज के सीईओ जेरी मैकलॉघलिन ने कहा कि यह उनकी कंपनी या एजिंग बायोलॉजी ही नहीं, पूरे मेडिकल साइंस के लिए संभावित रूप से बड़ा और परिवर्तनकारी पल है। अगर यह क्लिनिकल ट्रायल सफल रहा, तो एजिंग थेरेपी में नया युग शुरू हो सकता है। लक्ष्य पूरे शरीर की कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है, ताकि उम्र बढ़ने के साथ डीएनए के काम करने और उसके एक्सप्रेशन के तरीके में सुधार हो सके। अरबपतियों और फार्मा कंपनियों का निवेश इस तकनीक में अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन समेत कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। एली लिली और मर्क जैसी दवा कंपनियां भी इस आइडिया में निवेश बढ़ा रही हैं। इंसानों पर ट्रायल से पहले यह रिसर्च चूहों और बंदरों तक ही सीमित थी, जो अब इंसानों तक पहुंच गई है। ————- ये खबरें भी पढ़ें… रूस बुढ़ापा रोकने की तकनीक बना रहा: सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने पर काम जारी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र और शरीर की कमजोरी को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है। ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम के इस प्रोग्राम में विशेष प्रजाति के सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने जैसे तकनीकों पर काम किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… ‘जीन क्लॉक’ बताएगी किस उम्र में थमेगी जिंदगी: शोध में दावा- जीन गतिविधि से उम्र जानना पुराने तरीकों से ज्यादा कारगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘मॉलिक्यूलर क्लॉक’ (आणविक घड़ी) तैयार की है, जो इंसानों की जीन गतिविधि के आधार पर उनकी वास्तविक जैविक (बायोलॉजिकल) उम्र और यहां तक कि उनकी मौत के संभावित समय की भविष्यवाणी कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
उम्र रोकने की दवा के पहली बार इंसान पर परीक्षण:ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया इंजेक्शन

मेडिकल साइंस के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक ‘रिवर्स-एजिंग’ यानी बुढ़ापा रोकने की दवा का इंसानों पर पहला ट्रायल शुरू हो गया है। दावा है कि पहली बार उम्र के असर को उलटने वाला इंजेक्शन किसी इंसान को लगाया गया है। इसे लॉन्गेविटी साइंस में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अमेरिका के बोस्टन स्थित बायोटेक स्टार्टअप ‘लाइफ बायोसाइंसेज’ ने बताया कि उनके पहले मरीज को सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग का इंजेक्शन दे दिया गया है। परीक्षण के तहत यह इंजेक्शन ग्लूकोमा (काला मोतिया) से पीड़ित एक मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य उम्र बढ़ने के कारण कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है। अगले 6 महीने तक वैज्ञानिक इसके असर और साइड इफेक्ट्स पर नजर रखेंगे। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हो चुका है सफल टेस्ट इस प्रयोग के पहले चरण में ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की एक आंख में सीधे यह प्रयोगात्मक जीन थेरेपी इंजेक्ट की गई है। अब डॉक्टर और वैज्ञानिक आने वाले कई महीनों तक मरीज की बारीकी से निगरानी करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह तकनीक इंसानी शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। इस थेरेपी में सबसे पहले मरीज की आंख में एक सिंगल जीन थेरेपी इंजेक्शन दिया जाता है। इसके बाद कुछ हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विशेष कोर्स कराया जाता है। यह एंटीबायोटिक दवा शरीर के भीतर जाकर उन तीन इलाज करने वाले जीनों के लिए ‘ऑन स्विच’ का काम करती है जो कोशिकाओं को रीप्रोग्राम (युवा) करना शुरू करते हैं। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हुए टेस्ट में इसने उनकी रोशनी सफलतापूर्वक वापस लौटा दी थी। इस थैरेपी के लिए इंसानों की आंख को इसलिए चुना गया है, क्योंकि आंख शरीर के बाकी हिस्सों से अलग और सुरक्षित होती है। इससे साइड इफेक्ट्स पर नजर रखना भी आसान होता है। परीक्षण सफल रहा तो एजिंग थेरेपी का नया दौर लाइफ बायोसाइंसेज के सीईओ जेरी मैकलॉघलिन ने कहा कि यह उनकी कंपनी या एजिंग बायोलॉजी ही नहीं, पूरे चिकित्सा विज्ञान के लिए संभावित रूप से बड़ा और परिवर्तनकारी पल है। अगर यह क्लिनिकल ट्रायल सफल रहा, तो एजिंग थेरेपी में नया युग शुरू हो सकता है। लक्ष्य पूरे शरीर की कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है, ताकि उम्र बढ़ने के साथ डीएनए के काम करने और उसके एक्सप्रेशन के तरीके में सुधार हो सके। अरबपतियों और फार्मा कंपनियों का निवेश इस तकनीक में अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन समेत कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। एली लिली और मर्क जैसी दवा कंपनियां भी इस आइडिया में निवेश बढ़ा रही हैं। इंसानों पर ट्रायल से पहले यह रिसर्च चूहों और बंदरों तक सीमित थी। ————- ये खबरें भी पढ़ें… रूस बुढ़ापा रोकने की तकनीक बना रहा:सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने पर काम जारी, ₹2.47 लाख करोड़ का एंटी एजिंग प्रोजेक्ट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र और शरीर की कमजोरी को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है। ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम के इस प्रोग्राम में विशेष प्रजाति के सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने जैसे तकनीकों पर काम किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… ‘जीन क्लॉक’ बताएगी किस उम्र में थमेगी जिंदगी:शोध में दावा- जीन गतिविधि से उम्र जानना पुराने तरीकों से ज्यादा कारगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘मॉलिक्यूलर क्लॉक’ (आणविक घड़ी) तैयार की है, जो इंसानों की जीन गतिविधि के आधार पर उनकी वास्तविक जैविक (बायोलॉजिकल) उम्र और यहां तक कि उनकी मौत के संभावित समय की भविष्यवाणी कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया:दूसरा वनडे 5 विकेट से जीता; मुस्तफिजुर-तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए

बांग्लादेश ने गुरुवार को ढाका स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही बांग्लादेश ने 3 मैचों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। यह क्रिकेट इतिहास में पहली बार है, जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया है। बांग्लादेश ने सीरीज का पहला मैच डकवर्थ लुइस नियम के तहत 86 रन से जीता था। ऑस्ट्रेलिया के 3 विकेट शून्य पर गिरे टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत किसी बुरे सपने की तरह रही। टीम ने बिना खाता खोले 3 विकेट गंवा दिए। पहले ओवर में तस्कीन अहमद ने मैथ्यू शॉर्ट को शून्य पर आउट किया। अगले ओवर में मुस्तफिजुर रहमान ने कूपर कॉनोली और मैट रेनशॉ को बिना खाता खोले पवेलियन भेजा। टीम ने 22वें ओवर में 81 रन तक 6 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद मार्नस लाबुशेन और जेवियर बार्टलेट के बीच 7वें विकेट के लिए 103 रन की साझेदारी हुई। हालांकि 184 रन पर ही ऑस्ट्रेलिया का 7वां और फिर 8वां विकेट गिरा। डकवर्थ लुइस से बांग्लादेश को टारगेट मिला 42 ओवर में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 187/8 था, तभी बारिश आ गई। इसके बाद डकवर्थ लुइस नियम के तहत बांग्लादेश को 41 ओवर में 192 रन का टारगेट दिया गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए लाबुशेन ने सबसे ज्यादा नाबाद 55 रन बनाए। बार्टलेट 52 रन बनाकर आउट हुए। श्रीलंका के लिए मुस्तफिजुर और तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए। तन्वीर इस्लाम ने 2 विकेट लिए। बांग्लादेश ने भी शून्य पर पहला विकेट गंवाया रनचेज में बांग्लादेश ने दूसरी गेंद पर ही तंजीद हसन तमीम का विकेट गंवा दिया। हालांकि इसके बाद नजमुल हुसैन शांतो (41) और सौम्य सरकार (42) के बीच दूसरे विकेट के लिए 86 रन की साझेदारी हुई। हालांकि इसके बाद टीम ने 144 रन तक 5 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद तौहीद ह्रदोय और मेहदी हसन मिराज ने 51 की नाबाद साझेदारी कर टीम को जीत दिला दी। ह्रदोय ने 40* और मेहदी ने 22 रन बनाए। ———————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 2027 वनडे वर्ल्ड कप 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक:54 में से 41 मैच साउथ अफ्रीका में होंगे; अगले महीने ICC ऐलान करेगी मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 की संभावित तारीखें तय हो गई हैं। टूर्नामेंट 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक खेला जाएगा। क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफों की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में हुई अहमदाबाद ICC बोर्ड की बैठक में तारीखों पर सहमति बनी है। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया:दूसरा वनडे 5 विकेट से जीता; मुस्तफिजुर-तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए

बांग्लादेश ने गुरुवार को ढाका स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही बांग्लादेश ने 3 मैचों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। यह क्रिकेट इतिहास में पहली बार है, जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया है। बांग्लादेश ने सीरीज का पहला मैच डकवर्थ लुइस नियम के तहत 86 रन से जीता था। ऑस्ट्रेलिया के 3 विकेट शून्य पर गिरे टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत किसी बुरे सपने की तरह रही। टीम ने बिना खाता खोले 3 विकेट गंवा दिए। पहले ओवर में तस्कीन अहमद ने मैथ्यू शॉर्ट को शून्य पर आउट किया। अगले ओवर में मुस्तफिजुर रहमान ने कूपर कॉनोली और मैट रेनशॉ को बिना खाता खोले पवेलियन भेजा। टीम ने 22वें ओवर में 81 रन तक 6 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद मार्नस लाबुशेन और जेवियर बार्टलेट के बीच 7वें विकेट के लिए 103 रन की साझेदारी हुई। हालांकि 184 रन पर ही ऑस्ट्रेलिया का 7वां और फिर 8वां विकेट गिरा। डकवर्थ लुइस से बांग्लादेश को टारगेट मिला 42 ओवर में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 187/8 था, तभी बारिश आ गई। इसके बाद डकवर्थ लुइस नियम के तहत बांग्लादेश को 41 ओवर में 192 रन का टारगेट दिया गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए लाबुशेन ने सबसे ज्यादा नाबाद 55 रन बनाए। बार्टलेट 52 रन बनाकर आउट हुए। श्रीलंका के लिए मुस्तफिजुर और तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए। तन्वीर इस्लाम ने 2 विकेट लिए। बांग्लादेश ने भी शून्य पर पहला विकेट गंवाया रनचेज में बांग्लादेश ने दूसरी गेंद पर ही तंजीद हसन तमीम का विकेट गंवा दिया। हालांकि इसके बाद नजमुल हुसैन शांतो (41) और सौम्य सरकार (42) के बीच दूसरे विकेट के लिए 86 रन की साझेदारी हुई। हालांकि इसके बाद टीम ने 144 रन तक 5 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद तौहीद ह्रदोय और मेहदी हसन मिराज ने 51 की नाबाद साझेदारी कर टीम को जीत दिला दी। ह्रदोय ने 40* और मेहदी ने 22 रन बनाए। ———————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 2027 वनडे वर्ल्ड कप 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक:54 में से 41 मैच साउथ अफ्रीका में होंगे; अगले महीने ICC ऐलान करेगी मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 की संभावित तारीखें तय हो गई हैं। टूर्नामेंट 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक खेला जाएगा। क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफों की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में हुई अहमदाबाद ICC बोर्ड की बैठक में तारीखों पर सहमति बनी है। पूरी खबर पढ़ें…
राहुल तब, अभिषेक अब: ममता बनर्जी को सोनिया गांधी की पुरानी दुविधा का सामना करना पड़ रहा है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 जून, 2026, 00:29 IST अपनी पार्टी के अस्तित्व और अपने भतीजे के भविष्य के बीच चयन करना ममता बनर्जी के लिए एक कठिन क्रूसिबल होगा कांग्रेस नेता सोनिया गांधी (बाएं) और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में एक बंद कमरे में बैठक की। फ़ाइल चित्र राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी: दो वंशज जो अपनी-अपनी पार्टियों के भीतर आंतरिक कलह के निर्णायक चेहरे बन गए हैं। कुछ साल पहले, “जी-23” विद्रोह ने कांग्रेस को भीतर से तोड़ दिया था। हालांकि किसी भी असंतुष्ट ने स्पष्ट रूप से राहुल गांधी को पद से हटने के लिए नहीं कहा, लेकिन गहरा असंतोष दिग्गज दिग्गजों के बीच बहिष्कार की बढ़ती भावना से उपजा था। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जिन नेताओं ने यूपीए का निर्माण किया था और पार्टी को पुनर्जीवित किया था, उन्हें व्यवस्थित रूप से मुख्य निर्णय लेने वाले मैट्रिक्स से बाहर क्यों रखा जा रहा है। हालाँकि सोनिया गांधी ने कुछ विद्रोहियों को अलग-अलग बैठकों के लिए आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने दृढ़ता से यह मानने से इनकार कर दिया कि उनका बेटा संरचनात्मक समस्या का हिस्सा हो सकता है। समय के साथ, असहमति फीकी पड़ गई; गुलाम नबी आज़ाद जैसे दिग्गज चले गए, जबकि अन्य लोग चुपचाप सिस्टम में वापस आ गए। अंत में, खून पानी से अधिक गाढ़ा साबित हुआ। आज, राहुल गांधी कांग्रेस के निर्विवाद केंद्र के रूप में खड़े हैं, जिससे जो लोग बचे हैं वे सोनिया गांधी पर पुत्र मोह (अंध मातृ मोह) से ग्रस्त होने का कटु आरोप लगा रहे हैं। आज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थिति में काफी समानताएं हैं, जिसमें अभिषेक बनर्जी एक व्यापक आंतरिक विद्रोह के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इस टकराव का नवीनतम शिकार कल्याण बनर्जी हैं, जो हाल तक ममता बनर्जी के सबसे वफादार रक्षकों में से एक के रूप में खड़े थे। अब, रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने अपने पद पर बने रहने के लिए पार्टी सुप्रीमो के सामने एक स्पष्ट, समझौता न करने वाला अल्टीमेटम रखा है: या तो पार्टी या अभिषेक। वह इस भावना में अकेले नहीं हैं। हालिया आंतरिक विद्रोह को चलाने वाले कई लोग सीधे तौर पर पार्टी की वर्तमान गिरावट के पीछे प्राथमिक चालक के रूप में अभिषेक बनर्जी की ऊपर से नीचे की कार्यशैली की ओर इशारा करते हैं। कांग्रेस के पुराने नेताओं की तरह, कई दिग्गज नेता, जिन्होंने टीएमसी की स्थापना के बाद से उसके लिए खून-पसीना बहाया है, खुद को लगातार दरकिनार किया जा रहा है। उनके विचार में, अभिषेक की तीव्र प्रगति ने संगठन के डीएनए को मौलिक रूप से बदल दिया है। ममता बनर्जी के विपरीत, जो पारंपरिक रूप से कच्ची राजनीतिक प्रवृत्ति और जमीनी हकीकतों से गहरा संबंध रखती हैं, अभिषेक को अक्सर जमीनी स्तर के कैडर के साथ एक सीमित बंधन वाला माना जाता है। आलोचक उन्हें एक ऐसे योग्य नेता के रूप में देखते हैं जो पैराशूट से सत्ता में आया है, जो कठिन सार्वजनिक लामबंदी की तुलना में कॉर्पोरेट, बोर्डरूम-शैली प्रबंधन में कहीं अधिक सहज है। एक पार्टी जो मां, माटी, मानुष की कच्ची, भावनात्मक भावना पर बनी थी, अब, उनके विचार में, यांत्रिक रूप से बाहरी सलाहकारों, मैट्रिक्स और ड्राइंग-बोर्ड राजनीति के माध्यम से चल रही है। फिर भी, अभिषेक के सबसे आलोचक भी अपनी निराशा का एक बड़ा हिस्सा स्वयं ममता बनर्जी के लिए आरक्षित रखते हैं। अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि उन्हें यह अनुमान लगाना चाहिए था कि उनका भाईपो (भतीजा) कभी भी एक युद्ध-कठिन पुराने गार्ड के लिए सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकता है। अपनी पार्टी के अस्तित्व और अपने भतीजे के भविष्य के बीच चयन करना ममता बनर्जी के लिए एक कठिन क्रूसिबल होगा। सोनिया गांधी को ठीक उसी दुविधा का सामना करना पड़ा और उन्होंने अपने बेटे को चुना। हालाँकि, महत्वपूर्ण अंतर दोनों संगठनों के संरचनात्मक स्थायित्व में बना हुआ है; जबकि सबसे पुरानी कांग्रेस अपनी असहमति को आत्मसात करने और आगे बढ़ने में कामयाब रही, टीएमसी आज कहीं अधिक गहरे, संभावित अस्तित्वगत आंतरिक संकट का सामना करती दिख रही है। ममता बनर्जी के लिए, राजनीतिक व्यावहारिकता पर खून की जीत हो सकती है – लेकिन उनकी विरासत की कीमत कभी भी इससे अधिक नहीं रही है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पल्लवी घोष पल्लवी घोष ने 15 वर्षों तक राजनीति और संसद को कवर किया है, और कांग्रेस, यूपीए- I और यूपीए- II पर बड़े पैमाने पर रिपोर्टिंग की है, और अब उन्होंने अपनी रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय और नीति आयोग को भी शामिल किया है। एस…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया राहुल तब, अभिषेक अब: ममता बनर्जी को सोनिया गांधी की पुरानी दुविधा का सामना करना पड़ रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)बीजेपी(टी)एनडीए(टी)संसद(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)कांग्रेस(टी)राहुल गांधी(टी)सोनिया गांधी








