Tata Motors CV Price Hike 2.5% From July 1, 2026

नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक टाटा मोटर्स ने अपने कॉमर्शियल व्हीकल्स की कीमतों में 2.5% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो जाएंगी। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी की तरफ से कीमतों में की गई यह दूसरी बढ़ोतरी है। कंपनी ने बताया कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और अन्य इनपुट कॉस्ट के असर को कम करने के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है। कीमतों में यह इजाफा अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। 1 जुलाई से लागू होंगी नई दरें टाटा मोटर्स ने 18 जून को जारी एक बयान में कहा कि नई कीमतें 1 जुलाई से उसके पूरे कॉमर्शियल व्हीकल्स पोर्टफोलियो पर प्रभावी होंगी। कंपनी ने फिलहाल मॉडल के हिसाब से कीमतों में बदलाव का खुलासा नहीं किया है। टाटा मोटर्स भारत में छोटे कॉमर्शियल वाहनों, पिक-अप ट्रकों, इंटरमीडिएट और हैवी कॉमर्शियल वाहनों के साथ-साथ बस भी बेचती है। इस साल दूसरी बार बढ़े दाम कॉमर्शियल व्हीकल्स बिजनेस के लिए टाटा मोटर्स ने इस वित्त वर्ष में दूसरी बार प्राइस हाइक की है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी कंपनी ने बढ़ती कमोडिटी कीमतों और इनपुट कॉस्ट का हवाला देते हुए अपने कॉमर्शियल वाहनों के दाम 1.5% तक बढ़ाए थे। ताजा बदलाव के पीछे भी कंपनी ने मुख्य रूप से बढ़ी हुई लागत को ही बड़ी वजह बताया है। इस बार की 2.5% तक की बढ़ोतरी, अप्रैल में की गई 1.5% की बढ़ोतरी से ज्यादा है। पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतें भी बढ़ेंगी इससे कुछ दिन पहले ही टाटा मोटर्स ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स पोर्टफोलियो की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। पैसेंजर व्हीकल्स के नए दाम भी 1 जुलाई से ही लागू होंगे। कंपनी ने इस बढ़ोतरी के लिए बढ़ती इनपुट कॉस्ट और इन्फ्लेशनरी प्रेशर (महंगाई के दबाव) को जिम्मेदार ठहराया था। यह बढ़ोतरी कंपनी के बेचे जाने वाले इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) मॉडल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) दोनों पर लागू होगी। क्या होती है इनपुट कॉस्ट? किसी भी वाहन को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, एल्युमीनियम, प्लास्टिक और रबर) की कीमत, मजदूरी और फैक्ट्री के अन्य खर्चों को मिलाकर जो कुल लागत आती है, उसे इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो कंपनियां इसका कुछ बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। ये खबर भी पढ़ें… फुली सेल्फ ड्राइव टेस्ला मॉडल YL की डिलीवरी शुरू: 6 सीटर इलेक्ट्रिक SUV सिंगल चार्ज पर 681kmचलेगी; शुरुआती कीमत ₹61.99 लाख इलॉन मस्क की EV कंपनी टेस्ला इंडिया ने भारत में अपनी सबसे लंबी इलेक्ट्रिक SUV मॉडल YL की डिलीवरी शुरू कर दी है। यह भारत में टेस्ला की पहली कार ‘मॉडल वाई’ का ज्यादा स्पेस वाला और थ्री-रो वर्जन है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 681km का रेंज और 6-सीटर सीटिंग लेआउट है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Tata Motors CV Price Hike 2.5% From July 1, 2026

नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक टाटा मोटर्स ने अपने कॉमर्शियल व्हीकल्स की कीमतों में 2.5% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो जाएंगी। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी की तरफ से कीमतों में की गई यह दूसरी बढ़ोतरी है। कंपनी ने बताया कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और अन्य इनपुट कॉस्ट के असर को कम करने के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है। कीमतों में यह इजाफा अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। 1 जुलाई से लागू होंगी नई दरें टाटा मोटर्स ने 18 जून को जारी एक बयान में कहा कि नई कीमतें 1 जुलाई से उसके पूरे कॉमर्शियल व्हीकल्स पोर्टफोलियो पर प्रभावी होंगी। कंपनी ने फिलहाल मॉडल के हिसाब से कीमतों में बदलाव का खुलासा नहीं किया है। टाटा मोटर्स भारत में छोटे कॉमर्शियल वाहनों, पिक-अप ट्रकों, इंटरमीडिएट और हैवी कॉमर्शियल वाहनों के साथ-साथ बस भी बेचती है। इस साल दूसरी बार बढ़े दाम कॉमर्शियल व्हीकल्स बिजनेस के लिए टाटा मोटर्स ने इस वित्त वर्ष में दूसरी बार प्राइस हाइक की है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी कंपनी ने बढ़ती कमोडिटी कीमतों और इनपुट कॉस्ट का हवाला देते हुए अपने कॉमर्शियल वाहनों के दाम 1.5% तक बढ़ाए थे। ताजा बदलाव के पीछे भी कंपनी ने मुख्य रूप से बढ़ी हुई लागत को ही बड़ी वजह बताया है। इस बार की 2.5% तक की बढ़ोतरी, अप्रैल में की गई 1.5% की बढ़ोतरी से ज्यादा है। पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतें भी बढ़ेंगी इससे कुछ दिन पहले ही टाटा मोटर्स ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स पोर्टफोलियो की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। पैसेंजर व्हीकल्स के नए दाम भी 1 जुलाई से ही लागू होंगे। कंपनी ने इस बढ़ोतरी के लिए बढ़ती इनपुट कॉस्ट और इन्फ्लेशनरी प्रेशर (महंगाई के दबाव) को जिम्मेदार ठहराया था। यह बढ़ोतरी कंपनी के बेचे जाने वाले इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) मॉडल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) दोनों पर लागू होगी। क्या होती है इनपुट कॉस्ट? किसी भी वाहन को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, एल्युमीनियम, प्लास्टिक और रबर) की कीमत, मजदूरी और फैक्ट्री के अन्य खर्चों को मिलाकर जो कुल लागत आती है, उसे इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो कंपनियां इसका कुछ बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। ये खबर भी पढ़ें… फुली सेल्फ ड्राइव टेस्ला मॉडल YL की डिलीवरी शुरू: 6 सीटर इलेक्ट्रिक SUV सिंगल चार्ज पर 681kmचलेगी; शुरुआती कीमत ₹61.99 लाख इलॉन मस्क की EV कंपनी टेस्ला इंडिया ने भारत में अपनी सबसे लंबी इलेक्ट्रिक SUV मॉडल YL की डिलीवरी शुरू कर दी है। यह भारत में टेस्ला की पहली कार ‘मॉडल वाई’ का ज्यादा स्पेस वाला और थ्री-रो वर्जन है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 681km का रेंज और 6-सीटर सीटिंग लेआउट है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Fraud in auto check clearing; names erased with chemicals

वॉशिंगटन14 मिनट पहले कॉपी लिंक विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है।- प्रतीकात्मक फोटो अमेरिका में पुराने जमाने का एक स्कैम नए और खतरनाक रूप में लौट आया है। जालसाज केमिकल से चेक पर लिखा नाम और रकम मिटाकर उसे अपने नाम कर ले रहे हैं। इससे चेक फ्रॉड के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। एफबीआई और यूएस पोस्टल सर्विस ने चेतावनी जारी कर लोगों से कागजी चेक की जगह डिजिटल पेमेंट अपनाने की अपील की है। जालसाज एसीटोन या ब्लीच जैसे आम घरेलू केमिकल से चेक पर लिखी जानकारी मिटाकर उसे दोबारा अपने नाम पर जारी कर देते हैं। यह तरीका अब सिर्फ निजी चेकबुक तक सीमित नहीं रहा, बिजनेस पेमेंट, टैक्स रिफंड और सोशल सिक्योरिटी जैसी सरकारी सुविधाओं से जुड़े चेक भी जालसाजों के निशाने पर हैं। कैलिफोर्निया के एक दंपती के साथ हुई घटना इस स्कैम की गंभीरता बताती है। दंपती को आईआरएस से नोटिस मिला कि उन्होंने 12,000 डॉलर (11.3 लाख रुपए) का तिमाही टैक्स पेमेंट नहीं किया, जबकि उनके चेस बैंक स्टेटमेंट में यह चेक क्लियर दिखा रहा था। बाद में स्कैन कॉपी देखने पर पता चला कि ‘पे टू द ऑर्डर’ लाइन से आईआरएस का नाम मिटाकर किसी और व्यक्ति का नाम लिख दिया गया था। दंपती ने चेस बैंक से शिकायत की, लेकिन बैंक ने शुरू में यह कहकर मदद करने से मना कर दिया कि फ्रॉड रिपोर्ट करने की तय समय-सीमा खत्म हो चुकी है, क्योंकि चेक एक साल पहले ही चोरी होकर जमा हो गया था। बैंक की डिपॉजिट पॉलिसी और कानूनी नियमों के तहत तय समय सीमा बीतने पर नुकसान की जिम्मेदारी आम तौर पर ग्राहक पर ही आती है। लेकिन दंपती के दबाव और मामला सामने आने के बाद चेस बैंक ने दोबारा जांच शुरू की और उस फर्जी खाते का पता लगाया, जिसमें चोरी की रकम भेजी गई थी। उस खाते में तब भी करीब 11,000 डॉलर (10.4 लाख रुपए) बचे हुए थे। इससे दंपती को लगभग पूरी रकम वापस मिल गई। बैंक प्रवक्ता जैरी डुब्रोव्स्की ने कहा कि वे इस मामले को सुलझाने पर संतुष्ट हैं और ग्राहकों को सलाह दी कि वे डाक से चेक भेजने से बचें। हर महीने अपना बैंक स्टेटमेंट जरूर जांचें। विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है। ऑटो क्यिरिंग सिस्टम में चेक से छेड़छाड़, रंग में बदलाव या लिखावट में मिसमैच जैसी गड़बड़ियां पकड़ में नहीं आतीं। इसका सीधा फायदा जालसाजों को मिल रहा है। आसान जालसाजी के चलते अमेरिका में चेक फ्रॉड के मामले 13 साल में 2,000% बढ़े अमेरिका में चेक फ्रॉड की शिकायतें 2021 के 3.5 लाख से बढ़कर 2022 में 6.8 लाख हो गईं। हाई-वॉल्यूम मेल चोरी के मामले 2010 में सिर्फ 2,200 थे, जो 2023 में 49,000 से ज्यादा हो गए, यानी करीब 2,000% की बढ़ोतरी। पोस्टल पुलिस अधिकारी संघ के प्रेसिडेट फ्रैंक अल्बर्गो के मुताबिक, यह अब संगठित डाक अपराध का दौर है। एफबीआई और पोस्टल सर्विस की सलाह है कि चेक की जगह ई-चेक और डिजिटल पेमेंट करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
महाराष्ट्र राजनीतिक मोड़: कैसे बागी सांसदों ने हाई-स्टेक मूव में उद्धव ठाकरे को पछाड़ दिया

अंदरूनी विवरण से पता चलता है कि कैसे छह बागी सांसद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम में उद्धव ठाकरे को मात देने में कामयाब रहे, जिसने पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को फिर से आकार दिया। यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति के एक महत्वपूर्ण चरण के दौरान बढ़ती आंतरिक दरार और रणनीतिक गलत अनुमानों को उजागर करता है। n18oc_राजनीति
वर्ल्ड कप का नया ‘कलर कोड; गुलाबी जूतों का राज:लोगों का ध्यान खींचने और अलग दिखने के लिए खिलाड़ियों की पसंद बना

फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में गोल, जीत और हार की कहानियां तो हर दिन बन रही हैं। लेकिन, इस बार मैदान पर एक और चीज लोगों का ध्यान खींच रही है। यह कोई स्टार खिलाड़ी नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के पैरों में दिखाई दे रहे चमकीले गुलाबी बूट हैं। वर्ल्ड कप के शुरुआती मुकाबले शुरू होते ही दर्शकों ने एक दिलचस्प बात नोटिस की। चाहे मैदान में अर्जेंटीना उतरे, इंग्लैंड खेले या कोई और टीम, खिलाड़ियों के पैरों में गुलाबी रंग के बूट नजर आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो पूरे टूर्नामेंट पर गुलाबी रंग का जादू छा गया हो। दरअसल, दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स कंपनियां- नाइकी, एडिडास, प्यूमा, न्यू बैलेंस और स्केचर्स, इस वर्ल्ड कप के लिए खास गुलाबी रंग के बूट लेकर आई हैं। हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग कंपनियों के बूट होने के बावजूद उनका रंग लगभग एक जैसा दिखाई देता है। फुटबॉल बूट्स के विशेषज्ञ बेन वॉरेन कहते हैं कि शुरुआत में यह संयोग लग सकता था, लेकिन जब लगभग सभी बड़े ब्रांड एक ही रंग के आसपास पहुंचे तो साफ हो गया कि यह एक सोची-समझी रणनीति है। नाइकी के फुटबॉल फुटवियर विभाग से जुड़े ओडिंगा निमाको बताते हैं कि खिलाड़ियों और ग्राहकों से लगातार यह प्रतिक्रिया मिल रही थी कि चमकीले रंग उन्हें आत्मविश्वास देते हैं। बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ी ऐसा रंग पहनना चाहते हैं जो सबसे अलग दिखे और लोगों का ध्यान खींचे। इसी सोच ने गुलाबी रंग को सबसे आगे ला खड़ा किया। एक और वजह है इसकी दृश्यता। हरे मैदान पर गुलाबी रंग सबसे ज्यादा उभरकर दिखाई देता है। चाहे दर्शक स्टेडियम में बैठे हों या टीवी पर मैच देख रहे हों, गुलाबी बूट तुरंत नजर आते हैं। यही कारण है कि कंपनियों ने इस बार बूट्स को सिर्फ खेल का उपकरण नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की पहचान बनाने का माध्यम भी बनाया है। दिलचस्प बात यह भी है कि इस वर्ल्ड कप में कोई भी टीम मुख्य रूप से गुलाबी जर्सी में नहीं खेल रही है। ऐसे में खिलाड़ियों के बूट और भी ज्यादा चमकते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन यह गुलाबी कहानी ज्यादा लंबी नहीं चलेगी। फुटबॉल बाजार के जानकारों का मानना है कि नया क्लब सीजन शुरू होते ही कंपनियां किसी नए रंग के साथ मैदान में उतरेंगी। फिलहाल वर्ल्ड कप 2026 में सिर्फ खिलाड़ियों का खेल ही नहीं, उनके गुलाबी बूट भी चर्चा के केंद्र में हैं। शायद यही आधुनिक खेलों की नई दुनिया है, जहां प्रदर्शन के साथ-साथ स्टाइल भी सुर्खियां बटोरता है।
शिवसेना (यूबीटी) रणनीति बैठक: उद्धव ठाकरे, संजय राउत ने की महत्वपूर्ण बातचीत | न्यूज18

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IPL Window Pre-Monsoon Heat | BCCI Moves March Start

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक BCCI अगले सीजन से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को एक हफ्ते पहले शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने PTI से बातचीत में कहा कि बढ़ती गर्मी और प्री-मानसून के कारण IPL का संभावित विंडो 10 मार्च से 15 मई तक किया जा सकता है। इंटरनेशनल कैलेंडर के कारण लीग में मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सैकिया ने कहा- ‘IPL मार्च के अंतिम सप्ताह में शुरू होकर मई के अंत तक चलता है। लेकिन, मई के दूसरे पखवाड़े में कई जगहों पर बहुत ज्यादा गर्मी और बारिश की आशंका रहती है। इससे खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को परेशानी होती है। IPL का पिछला सीजन 28 मार्च से 31 मई तक खेला गया। इसका टाइटल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जीता। (फोटो BCCI) 10 मार्च से 15 मई तक कराने का टारगेट है सैकिया ने बताया कि BCCI और IPL गवर्निंग काउंसिल इस पर चर्चा कर रहे हैं। बोर्ड ने गेम्स डेवलपमेंट महाप्रबंधक एबी कुरुविला को भी संभावित विंडो तलाशने का निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा- हमारा टारगेट है कि अगला IPL 10 मार्च से शुरू होकर 15 मई तक समाप्त हो जाए। सैकिया के कहा- ‘खिलाड़ियों और फैंस से गर्म मौसम को लेकर शिकायतें मिली हैं। उनका कहना है कि सभी खिलाड़ी ऐसी परिस्थितियों में खेलने के लिए समान रूप से तैयार नहीं होते, इसलिए प्रतियोगिता के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। डोमेस्टिक क्रिकेट के कैलेंडर में बदलाव संभव सैकिया ने यह भी कहा कि IPL को मार्च में शुरू करने के लिए घरेलू क्रिकेट कैलेंडर में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं। उनकी कोशिश होगी कि घरेलू क्रिकेट सत्र 10 मार्च तक समाप्त हो जाए, ताकि उसके तुरंत बाद IPL का आयोजन शुरू किया जा सके। सैकिया ने कहा कि इस साल पश्चिमी एशिया के संकट जैसे चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद BCCI ने सफलतापूर्वक IPL का आयोजन पूरा किया और अब अगले संस्करण को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ——————————————————- दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
IPL Window Pre-Monsoon Heat | BCCI Moves March Start

नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक BCCI अगले सीजन से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को एक हफ्ते पहले शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने PTI से बातचीत में कहा कि बढ़ती गर्मी और प्री-मानसून के कारण IPL का संभावित विंडो 10 मार्च से 15 मई तक किया जा सकता है। इंटरनेशनल कैलेंडर के कारण लीग में मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सैकिया ने कहा- ‘IPL मार्च के अंतिम सप्ताह में शुरू होकर मई के अंत तक चलता है। लेकिन, मई के दूसरे पखवाड़े में कई जगहों पर बहुत ज्यादा गर्मी और बारिश की आशंका रहती है। इससे खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को परेशानी होती है। IPL का पिछला सीजन 28 मार्च से 31 मई तक खेला गया। इसका टाइटल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जीता। (फोटो BCCI) 10 मार्च से 15 मई तक कराने का टारगेट है: सैकिया सैकिया ने बताया कि BCCI और IPL गवर्निंग काउंसिल इस पर चर्चा कर रहे हैं। बोर्ड ने गेम्स डेवलपमेंट महाप्रबंधक एबी कुरुविला को भी संभावित विंडो तलाशने का निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा- हमारा टारगेट है कि अगला IPL 10 मार्च से शुरू होकर 15 मई तक समाप्त हो जाए। सैकिया के कहा- ‘खिलाड़ियों और फैंस से गर्म मौसम को लेकर शिकायतें मिली हैं। उनका कहना है कि सभी खिलाड़ी ऐसी परिस्थितियों में खेलने के लिए समान रूप से तैयार नहीं होते, इसलिए प्रतियोगिता के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। डोमेस्टिक क्रिकेट के कैलेंडर में बदलाव संभव सैकिया ने यह भी कहा कि IPL को मार्च में शुरू करने के लिए घरेलू क्रिकेट कैलेंडर में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं। उनकी कोशिश होगी कि घरेलू क्रिकेट सत्र 10 मार्च तक समाप्त हो जाए, ताकि उसके तुरंत बाद IPL का आयोजन शुरू किया जा सके। सैकिया ने कहा कि इस साल पश्चिमी एशिया के संकट जैसे चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद BCCI ने सफलतापूर्वक IPL का आयोजन पूरा किया और अब अगले संस्करण को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ——————————————————- टी-20 क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 5 विकेट से हराकर सीरीज जीती वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने तीसरे और निर्णायक टी-20 मैच में श्रीलंका को 5 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। सबीना पार्क, किंग्स्टन में खेले गए मुकाबले में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में सभी विकेट खोकर 169 रन बनाए। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
बीमार फैन से मिलकर रोए पवन कल्याण:इलाज के लिए 1 लाख रुपए भी दिए; मानहानि केस में कोर्ट ने पक्ष में दिया आदेश

आंध्रप्रदेश के उपमुख्यमंत्री और साउथ एक्टर पवन कल्याण ने दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे एक नन्हे फैन से मुलाकात की। इस मुलाकात से पहले पवन कल्याण मंदिर जाकर उनके लिए खुद थाल लेकर आए। बिस्तर पर लेटे हुए बीमार फैन को देख पवन भावुक हो गए और उसे गले लगाकर रो पड़े। उन्होंने उस फैन के परिवार को आर्थिक मदद भी दी है। पवन कल्यान और फैन की मुलाकात की तस्वीरें- पवन कल्याण ने सोशल मीडिया के जरिए बताया है कि उन्होंने हाल ही में वारंगल जिले के हनमकोंडा के रहनेवाले निरंजन का एक वीडियो देखा था। निरंजन एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं, जो पवन कल्याण के बड़े फैन हैं। उन्हें पवन कल्याण से मिलने की इच्छा जताई थी। इस पर पवन कल्याणन ने लिखा, ‘मुझे लगा कि उनकी यह इच्छा जरूर पूरी होनी चाहिए। आज मैं उनके घर हनमकोंडा पहुंचा और उनसे मुलाकात की। निरंजन का साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का उनका जज्बा सचमुच प्रेरणादायक है। इतनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उनका मजबूत हौसला काबिले-तारीफ है।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘मैंने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी से निरंजन के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की प्रार्थना की। साथ ही मां भद्रकाली का आशीर्वाद हमेशा उन पर बना रहे, यही कामना करता हूं। ईश्वर की कृपा से वह जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटें।’ मानहानि मामले में कोर्ट ने पवन कल्याण के पक्ष में ऑर्डर दिया कुछ समय पहले ही सोशल मीडिया पर कई ऐसी पोस्ट की गईं, जिनमें पवन कल्याण पर झील की जमीन पर अवैध कब्जा करने के आरोप लगाए गए थे। पवन कल्याण ने इसके खिलाफ बैंग्लोर सिटी सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर इसे मानहानिकारक बताया था। अब कोर्ट ने पवन के पक्ष में आदेश देते हुए उनके खिलाफ की गईं सभी सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगा दी है। ये आदेश 24 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक जारी रहेगा। सोशल मीडिया पोस्ट्स में आरोप लगाए गए थे कि हैदराबाद में उनकी एक जमीन झील के फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में आती है और उस पर अतिक्रमण किया गया है। कोर्ट ने 10 जून को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए पवन कल्याण के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन, प्रसारण और सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने पर अस्थायी रोक लगा दी। 11 जून को कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए 12 विशेष लिंक भी शामिल किए, जिनमें यह सामग्री मौजूद थी। आज कोर्ट ने X (पहले ट्विटर), गूगल और मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) को निर्देश दिया कि वे इन लिंक को ब्लॉक करें और पवन कल्याण के खिलाफ मानहानिकारक प्रकृति की सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध न होने दें। बता दें कि ये आरोप इस महीने की शुरुआत में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मीडिया समूह ‘साक्षी मीडिया’ और तेलंगाना रक्षा सेना की अध्यक्ष के. कविता की ओर से लगाए गए थे। उनका दावा था कि पवन कल्याण की जमीन का एक हिस्सा झील के संरक्षित क्षेत्र में आता है। पवन कल्याण के बारे में-
बीमार फैन से मिलकर रोए पवन कल्याण:इलाज के लिए 1 लाख रुपए भी दिए; मानहानि केस में कोर्ट ने पक्ष में दिया आदेश

आंध्रप्रदेश के उपमुख्यमंत्री और साउथ एक्टर पवन कल्याण ने दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे एक नन्हे फैन से मुलाकात की। इस मुलाकात से पहले पवन कल्याण मंदिर जाकर उनके लिए खुद थाल लेकर आए। बिस्तर पर लेटे हुए बीमार फैन को देख पवन भावुक हो गए और उसे गले लगाकर रो पड़े। उन्होंने उस फैन के परिवार को आर्थिक मदद भी दी है। पवन कल्यान और फैन की मुलाकात की तस्वीरें- पवन कल्याण ने सोशल मीडिया के जरिए बताया है कि उन्होंने हाल ही में वारंगल जिले के हनमकोंडा के रहनेवाले निरंजन का एक वीडियो देखा था। निरंजन एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं, जो पवन कल्याण के बड़े फैन हैं। उन्हें पवन कल्याण से मिलने की इच्छा जताई थी। इस पर पवन कल्याणन ने लिखा, ‘मुझे लगा कि उनकी यह इच्छा जरूर पूरी होनी चाहिए। आज मैं उनके घर हनमकोंडा पहुंचा और उनसे मुलाकात की। निरंजन का साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का उनका जज्बा सचमुच प्रेरणादायक है। इतनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उनका मजबूत हौसला काबिले-तारीफ है।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘मैंने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी से निरंजन के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की प्रार्थना की। साथ ही मां भद्रकाली का आशीर्वाद हमेशा उन पर बना रहे, यही कामना करता हूं। ईश्वर की कृपा से वह जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटें।’ मानहानि मामले में कोर्ट ने पवन कल्याण के पक्ष में ऑर्डर दिया कुछ समय पहले ही सोशल मीडिया पर कई ऐसी पोस्ट की गईं, जिनमें पवन कल्याण पर झील की जमीन पर अवैध कब्जा करने के आरोप लगाए गए थे। पवन कल्याण ने इसके खिलाफ बैंग्लोर सिटी सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर इसे मानहानिकारक बताया था। अब कोर्ट ने पवन के पक्ष में आदेश देते हुए उनके खिलाफ की गईं सभी सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगा दी है। ये आदेश 24 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक जारी रहेगा। सोशल मीडिया पोस्ट्स में आरोप लगाए गए थे कि हैदराबाद में उनकी एक जमीन झील के फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में आती है और उस पर अतिक्रमण किया गया है। कोर्ट ने 10 जून को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए पवन कल्याण के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन, प्रसारण और सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने पर अस्थायी रोक लगा दी। 11 जून को कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए 12 विशेष लिंक भी शामिल किए, जिनमें यह सामग्री मौजूद थी। आज कोर्ट ने X (पहले ट्विटर), गूगल और मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) को निर्देश दिया कि वे इन लिंक को ब्लॉक करें और पवन कल्याण के खिलाफ मानहानिकारक प्रकृति की सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध न होने दें। बता दें कि ये आरोप इस महीने की शुरुआत में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मीडिया समूह ‘साक्षी मीडिया’ और तेलंगाना रक्षा सेना की अध्यक्ष के. कविता की ओर से लगाए गए थे। उनका दावा था कि पवन कल्याण की जमीन का एक हिस्सा झील के संरक्षित क्षेत्र में आता है। पवन कल्याण के बारे में-







