Saturday, 08 Aug 2026 | 12:29 PM

Trending :

Gold Silver Price Hike | India Market Update 2026 बिलखकर रो पड़े प्रदीप रावत के बेटे:कहा- हाथ-पैर कांप रहे हैं, सलमान से मिलने की इच्छा जताई, कहा- पापा उनके किस्से सुनाते थे बिलखकर रो पड़े प्रदीप रावत के बेटे:कहा- हाथ-पैर कांप रहे हैं, सलमान से मिलने की इच्छा जताई, कहा- पापा उनके किस्से सुनाते थे लड़की को गाली दी, अब माफी से किया इनकार:रणवीर शोरे बोले- लड़की गाली दे, तो सुनने के लिए भी तैयार रहे, 16 करोड़ व्यूज वाली रील पर विवाद लड़की को गाली दी, अब माफी से किया इनकार:रणवीर शोरे बोले- लड़की गाली दे, तो सुनने के लिए भी तैयार रहे, 16 करोड़ व्यूज वाली रील पर विवाद सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर पुलिसकर्मी की मौत:लॉरेंस गैंग से सुरक्षा के लिए तैनात थे, ऑन ड्यूटी गिरे, डॉक्टर्स ने मृत घोषित किया
EXCLUSIVE

Brazilian Journalist Claims Mossad Planned Attack on Pakistan Army Chief Asim Munir During Geneva Talks

Brazilian Journalist Claims Mossad Planned Attack on Pakistan Army Chief Asim Munir During Geneva Talks

Hindi News International Brazilian Journalist Claims Mossad Planned Attack On Pakistan Army Chief Asim Munir During Geneva Talks 15 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में पेपे एस्कोबार ने मोसाद वाली बात कही। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने रविवार को स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में हिस्सा लिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Brazilian Journalist Claims Mossad Planned Attack on Pakistan Army Chief Asim Munir During Geneva Talks

Brazilian Journalist Claims Mossad Planned Attack on Pakistan Army Chief Asim Munir During Geneva Talks

Hindi News International Brazilian Journalist Claims Mossad Planned Attack On Pakistan Army Chief Asim Munir During Geneva Talks 47 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में पेपे एस्कोबार ने मोसाद वाली बात कही। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने रविवार को स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में हिस्सा लिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Crude Oil Prices Dip 3.1% to $74.73; 19M Barrels Pass Hormuz

Crude Oil Prices Dip 3.1% to $74.73; 19M Barrels Pass Hormuz

Hindi News Business US Iran Deal: Crude Oil Prices Dip 3.1% To $74.73; 19M Barrels Pass Hormuz नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील की खबरों के बाद बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें 3.1% गिर गईं। इससे ब्रेंट क्रूड की कीमत मिडिल ईस्ट जंग के बाद पहली बार 75 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गईं। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.32 डॉलर की गिरावट के साथ 74.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 2.17 डॉलर (2.96%) फिसलकर 71.04 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज रूट पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 117 दिनों में कच्चे तेल की कीमत इस तरह घटी-बढ़ी तारीख कच्चे तेल का दाम 27 फरवरी 73 डॉलर प्रति बैरल 9 मार्च 120 डॉलर प्रति बैरल 30 मार्च 107 डॉलर प्रति बैरल 30 अप्रैल 110 डॉलर प्रति बैरल 30 मई 91 डॉलर प्रति बैरल 24 जून 74 डॉलर प्रति बैरल युद्ध शुरू होने के बाद सबसे निचला स्तर ब्रेंट क्रूड ने कारोबार के दौरान 74.61 डॉलर प्रति बैरल का निचले स्तर पर पहुंच गया था, जो 27 फरवरी के बाद का सबसे कम है। बता दें कि 27 फरवरी को ही ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले शुरू हुए थे। इसी तरह WTI भी गिरकर 70.91 डॉलर पर आ गया, जो 3 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। बाजार के जानकारों का कहना है कि होर्मुज रूट से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने से कीमतों पर दबाव बना है। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि हम करीब 85% तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें गिरने पर अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ेंगे: कच्चा तेल सस्ता होने पर IOC, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों के तेल की कीमत बढ़ाने की आशंका कम हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटती है और आम आदमी के बजट पर असर पड़ता है। महंगाई पर असर: डीजल के रेट न बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी नहीं। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के खाने-पीने के सामानों के दाम नहीं बढ़ेंगे। CAD में सुधार: कच्चा तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है। विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD कम होता है। रुपए को मजबूती: कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है। इससे रुपया मजबूत होता है और आयात सस्ता होता है। सब्सिडी बोझ कम: कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार का सब्सिडी खर्च घटता है। बचा पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में लगा सकती है। कॉर्पोरेट प्रॉफिट: तेल सस्ता होने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। इससे शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ता है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चा तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए थे। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। इस सप्लाई संकट के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें 4.15 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थीं और महंगाई दर में भी उछाल आया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Crude Oil Prices Dip 3.1% to $74.73; 19M Barrels Pass Hormuz

Crude Oil Prices Dip 3.1% to $74.73; 19M Barrels Pass Hormuz

Hindi News Business US Iran Deal: Crude Oil Prices Dip 3.1% To $74.73; 19M Barrels Pass Hormuz नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील की खबरों के बाद बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें 3.1% गिर गईं। इससे ब्रेंट क्रूड की कीमत मिडिल ईस्ट जंग के बाद पहली बार 75 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गईं। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.32 डॉलर की गिरावट के साथ 74.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 2.17 डॉलर (2.96%) फिसलकर 71.04 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज रूट पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 117 दिनों में कच्चे तेल की कीमत इस तरह घटी-बढ़ी तारीख कच्चे तेल का दाम 27 फरवरी 73 डॉलर प्रति बैरल 9 मार्च 120 डॉलर प्रति बैरल 30 मार्च 107 डॉलर प्रति बैरल 30 अप्रैल 110 डॉलर प्रति बैरल 30 मई 91 डॉलर प्रति बैरल 24 जून 74 डॉलर प्रति बैरल युद्ध शुरू होने के बाद सबसे निचला स्तर ब्रेंट क्रूड ने कारोबार के दौरान 74.61 डॉलर प्रति बैरल का निचले स्तर पर पहुंच गया था, जो 27 फरवरी के बाद का सबसे कम है। बता दें कि 27 फरवरी को ही ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले शुरू हुए थे। इसी तरह WTI भी गिरकर 70.91 डॉलर पर आ गया, जो 3 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। बाजार के जानकारों का कहना है कि होर्मुज रूट से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने से कीमतों पर दबाव बना है। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि हम करीब 85% तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें गिरने पर अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ेंगे: कच्चा तेल सस्ता होने पर IOC, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों के तेल की कीमत बढ़ाने की आशंका कम हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटती है और आम आदमी के बजट पर असर पड़ता है। महंगाई पर असर: डीजल के रेट न बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी नहीं। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के खाने-पीने के सामानों के दाम नहीं बढ़ेंगे। CAD में सुधार: कच्चा तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है। विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD कम होता है। रुपए को मजबूती: कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है। इससे रुपया मजबूत होता है और आयात सस्ता होता है। सब्सिडी बोझ कम: कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार का सब्सिडी खर्च घटता है। बचा पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में लगा सकती है। कॉर्पोरेट प्रॉफिट: तेल सस्ता होने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। इससे शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ता है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चा तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए थे। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। इस सप्लाई संकट के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें 4.15 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थीं और महंगाई दर में भी उछाल आया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

एएमएमए संकट: कुप्रबंधन के आरोपों के बीच प्रथम महिला अध्यक्ष श्वेता मेनन ने इस्तीफा दिया | #ब्रासस्टैक्स

एएमएमए संकट: कुप्रबंधन के आरोपों के बीच प्रथम महिला अध्यक्ष श्वेता मेनन ने इस्तीफा दिया | #ब्रासस्टैक्स

मलयालम कलाकारों की संस्था एएमएमए को तब नई उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है जब इसकी पहली महिला अध्यक्ष श्वेता मेनन ने कुप्रबंधन और आंतरिक कलह के आरोपों के बीच अपनी समिति के साथ इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने नेतृत्व, जवाबदेही और मलयालम फिल्म उद्योग के प्रमुख संघ के कामकाज पर व्यापक बहस छेड़ दी है। आलोचकों का तर्क है कि श्वेता मेनन के नेतृत्व के बावजूद शरीर के भीतर पितृसत्तात्मक नियंत्रण जारी है, जिससे उद्योग में महिलाओं की सुरक्षा, प्रतिनिधित्व और कार्यस्थल की गरिमा पर नए सिरे से चिंताएं बढ़ गई हैं। संकट ने एएमएमए के शासन, आंतरिक सुधारों और विश्वसनीयता को गहन जांच के दायरे में ला दिया है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_brass-tacksNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 24 जून, 2026, 20:29 IST (टैग अनुवाद करने के लिए)अम्मा(टी)अम्मा समिति ने इस्तीफा दिया(टी)अम्मा संकट(टी)अम्मा उथल-पुथल(टी)मलयालम फिल्म कलाकारों का संघ(टी)पहली महिला अध्यक्ष अम्मा(टी)आंतरिक संघर्ष अम्मा(टी)आंतरिक कलह(टी)मलयालम कलाकार संघ(टी)मलयालम सिनेमा(टी)मलयालम फिल्म उद्योग(टी)कुप्रबंधन के आरोप(टी)मॉलीवुड(टी)पितृसत्तात्मक नियंत्रण(टी)फिल्म उद्योग में पितृसत्ता(टी)श्वेता मेनन(टी)श्वेता मेनन अम्मा अध्यक्ष(टी)श्वेता मेनन ने इस्तीफा दिया(टी)फिल्म उद्योग में महिला सुरक्षा(टी)महिला सुरक्षा मलयालम सिनेमा(टी)कार्यस्थल की गरिमा

कर्नाटक कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में भगवाकरण और शाकाहारवाद के दावों पर विवाद |#ब्रासस्टैक्स

कर्नाटक कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में भगवाकरण और शाकाहारवाद के दावों पर विवाद |#ब्रासस्टैक्स

कर्नाटक की कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को भगवाकरण के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है और दावा किया गया है कि यह राज्य की विविध खाद्य संस्कृति की अनदेखी करते हुए शाकाहार को बढ़ावा देती है। कार्यकर्ताओं ने पाठ्यपुस्तक में संशोधन की मांग की है, जिसमें कर्नाटक की खाद्य विविधता के हिस्से के रूप में अंडे और मांस का संदर्भ और पाठ्यपुस्तक के शीर्षक “कृष्णा” में बदलाव शामिल है। इस विवाद ने स्कूल पाठ्यक्रम, सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व, खाद्य विविधता, शिक्षा में विचारधारा, पाठ्यपुस्तक राजनीति और कक्षाओं में राज्य की पहचान को कैसे प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए, इस पर व्यापक बहस छेड़ दी है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_brass-tacksNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 24 जून, 2026, 20:24 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कार्यकर्ता संशोधन की मांग करते हैं(टी)कक्षा 6 कन्नड़ पाठ्यपुस्तक(टी)विविध खाद्य संस्कृति कर्नाटक(टी)अंडे और मांस समावेशन(टी)कन्नड़ पाठ्यपुस्तक विवाद(टी)कर्नाटक कक्षा 6 पाठ्यपुस्तक(टी)कर्नाटक शिक्षा(टी)कर्नाटक खाद्य संस्कृति(टी)कर्नाटक पाठ्यपुस्तक पंक्ति(टी)कृष्ण पाठ्यपुस्तक शीर्षक पंक्ति(टी)शाकाहार को बढ़ावा देता है(टी)भगवाकरण आरोप(टी)भगवाकरण का दावा(टी)स्कूल पाठ्यक्रम कर्नाटक(टी)पाठ्यपुस्तक राजनीति(टी)पाठ्यपुस्तक भगवाकरण(टी)पाठ्यपुस्तक शीर्षक कृष्ण(टी)पाठ्यपुस्तक में शाकाहारवाद

‘सुवेंदु कोई देवदूत नहीं हैं, लेकिन…’: महुआ मोइत्रा ने ‘चेरी-पिक्ड’ वायरल एक्स क्लिप का विरोध किया, टीएमसी के ‘गद्दारों’ पर निशाना साधा | भारत समाचार

People cross a road under umbrellas during heavy rainfall, in Mumbai, Tuesday, June 23, 2026. The city received rain showers as monsoon activity continued across parts of Maharashtra. (PTI)

आखरी अपडेट:24 जून, 2026, 20:00 IST पश्चिम बंगाल के सांसद ने राजनीतिक यू-टर्न के संकेत को दृढ़ता से खारिज कर दिया, पर्यवेक्षकों से अलग-अलग अंशों के बजाय पूरा साक्षात्कार सुनने का आग्रह किया। साक्षात्कार में, मोइत्रा ने 2014 में लोकसभा टिकट से वंचित होने के बाद अपने गहरे संकट को याद करते हुए खुलासा किया कि वह पूरी रात रोई थीं और अधिकारी ही थे जिन्होंने आश्वासन दिया था। फ़ाइल छवि/एक्स तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने इस दावे पर पलटवार किया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर उनका रुख नरम हो गया है, उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक साक्षात्कार क्लिप जानबूझकर चुनी गई थी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की कि अधिकारी को अब “एक देवदूत” के रूप में फंसाया जा रहा है और अनुमान लगाया कि या तो एक राजनीतिक बदलाव चल रहा है या क्लिप में व्यापक संदर्भ का अभाव है। एक्स पर सीधे प्रतिक्रिया देते हुए, कृष्णानगर के सांसद ने राजनीतिक यू-टर्न के संकेत को दृढ़ता से खारिज कर दिया, पर्यवेक्षकों से अलग-अलग अंशों के बजाय पूरा साक्षात्कार सुनने का आग्रह किया। यह स्वीकार करते हुए कि उन्होंने अधिकारी के टीएमसी से बाहर निकलने से पहले उनके साथ एक सकारात्मक कामकाजी संबंध साझा किया था, मोइत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ने के बाद से उनसे बात नहीं की है। उन्होंने रेखांकित किया कि जहां उन्होंने भीतर से तोड़फोड़ करने के बजाय विपक्ष के टिकट पर लड़ने का फैसला किया, वहीं उनकी टिप्पणियां उनकी वर्तमान राजनीति के समर्थन के बजाय पिछली घटनाओं का वर्णन करने वाली थीं। ममता ने एक और खोया. कल तक वह सुवेंदु पर आग उगल रही थी. अब सुर बदल गए हैं. सुवेंदु देवदूत हैं. वह एक कुशल राजनीतिज्ञ बन गई हैं। या फिर यह एक बड़े संदर्भ से चुनी गई चेरी क्लिप है। मैं अभी भी संकेतों का पता लगाने के लिए RaGa और INC टीम की सराहना करता हूं… pic.twitter.com/xrF1yYy88p– सुबी #रिलीज़संजीव भट्ट #फ़िलिस्तीन #वोटचोरी (@Subytweets) 24 जून, 2026 हाँ, यह चेरी पिक्ड है कृपया पूरा साक्षात्कार सुनें। सुवेंदु कोई देवदूत नहीं हैं, लेकिन उनमें इन गद्दारों के विपरीत उन्हें छोड़ने और उनके टिकट पर लड़ने की हिम्मत थी। और जब वह हमारी पार्टी में थे तब मेरे उनके साथ अच्छे संबंध थे लेकिन उनके जाने के बाद मैंने उनसे कभी बात नहीं की। इन्हें क्यों बनाएं…- महुआ मोइत्रा (@MahuaMoitra) 24 जून, 2026 आंतरिक अशांति और व्यक्तिगत खुलासे सोशल मीडिया पर तूफान मोइत्रा द्वारा दिए गए एक विस्तृत साक्षात्कार के बाद आया है, जिसमें उन्होंने अपनी शुरुआती राजनीतिक यात्रा और पार्टी सहयोगी होने के दौरान अधिकारी से मिले भावनात्मक समर्थन के बारे में खुलकर बात की थी। मोइत्रा ने 2014 में लोकसभा टिकट से वंचित होने के बाद अपने गहरे संकट को याद करते हुए खुलासा किया कि वह पूरी रात रोई थीं और अधिकारी ही थे जिन्होंने आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने 2016 में करीमपुर से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था, तो अधिकारी उनकी पहली रैली में सक्रिय रूप से प्रचार करने वाले एकमात्र वरिष्ठ नेता थे। इन यादों के समय ने पूरे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, एक ऐसा राज्य जो वर्तमान में टीएमसी के भीतर तीव्र राजनीतिक पुनर्गठन और आंतरिक असंतोष को जन्म दे रहा है क्योंकि यह इस साल के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी से हार गया था। बागी विधायकों के एक महत्वपूर्ण गुट और लोकसभा सांसदों के एक समूह ने हाल के महीनों में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए काफी मतभेद पैदा कर दिया है। इस पृष्ठभूमि के बीच, सत्तारूढ़ भाजपा की कैडर-आधारित प्रणाली और टीएमसी के नेतृत्व-निर्भर ढांचे के बीच संरचनात्मक अंतर पर मोइत्रा के स्पष्ट विचारों ने गहन जांच की है। पार्टी की वफादारी पर एक उद्दंड रुख अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में अटकलों की सुगबुगाहट के बावजूद, एक्स पर मोइत्रा की प्रतिक्रिया आंतरिक विद्रोह के खिलाफ एक तीखी रेखा खींचते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी खेमे के मुख्य नेतृत्व के प्रति उनकी चल रही निष्ठा को मजबूत करने का काम करती है। उन्होंने खुले तौर पर पार्टी छोड़ने और वैकल्पिक टिकट पर चुनाव लड़ने के अधिकारी के पिछले फैसले की तुलना समकालीन विरोधियों के कार्यों से की, जिन्हें उन्होंने पार्टी को भीतर से अस्थिर करने के लिए स्पष्ट रूप से “देशद्रोही” करार दिया था। राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बारे में व्यापक अफवाहों को संबोधित करते हुए, मोइत्रा ने ममता की टीएमसी और कांग्रेस के बीच संभावित विलय की किसी भी बात को दृढ़ता से खारिज कर दिया। दोनों संस्थाओं के बीच साझा वैचारिक आधार को स्वीकार करते हुए, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘सुवेंदु कोई देवदूत नहीं हैं, लेकिन…’: महुआ मोइत्रा ने ‘चेरी-पिक्ड’ वायरल एक्स क्लिप का विरोध किया, टीएमसी के ‘गद्दारों’ पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)महुआ मोइत्रा(टी)बंगाल(टी)बीजेपी(टी)सुवेंदु अधिकारी

छह सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) को संसद कार्यालय खोने का खतरा है | भारत समाचार

People cross a road under umbrellas during heavy rainfall, in Mumbai, Tuesday, June 23, 2026. The city received rain showers as monsoon activity continued across parts of Maharashtra. (PTI)

आखरी अपडेट:24 जून, 2026, 19:48 IST लोकसभा में किसी पार्टी की ताकत यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक है कि उसे संसद परिसर में कार्यालय स्थान आवंटित किया गया है या नहीं। 2024 के आम चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने नौ लोकसभा सीटें जीती थीं। (फ़ाइल) शिवसेना (यूबीटी) अपने छह लोकसभा सांसदों के विद्रोह के बाद संसद परिसर में अपना कार्यालय खो सकती है, जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक विलय पर कोई फैसला नहीं लिया है। घटनाक्रम के बीच, शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने बुधवार को संसद में अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उनसे यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनका पक्ष सुने बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाए। बैठक के बाद बोलते हुए, अनिल देसाई ने कहा कि अध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया कि विलय पर कोई भी निर्णय संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार सख्ती से लिया जाएगा। “उन्होंने कहा कि संविधान में जो भी लिखा है और जो भी प्रावधान मौजूद हैं, निर्णय प्रक्रिया उसी तरीके से होगी। संविधान की अनुसूची 10 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी समूह, भले ही उसकी ताकत विधायक दल की दो-तिहाई हो, अपने दम पर किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनावों में, सभी नौ सांसद शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के प्रतीक पर जीते थे। संसद के संरक्षक के रूप में, अध्यक्ष यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय हो, “देसाई ने कहा। अरविंद सावंत ने कहा कि छह सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने और देसाई ने पहले स्पीकर को एक ज्ञापन सौंपा था। सावंत ने कहा, “हमने उनसे अनुरोध किया कि यदि कोई सांसद या समूह उनसे संपर्क करता है, तो उन्हें संविधान की रक्षा करनी चाहिए। हमने उन्हें फिर से पत्र लिखकर पूछा कि यदि इस मामले के संबंध में कुछ भी होता है, तो कोई भी निर्णय लेने से पहले हमारा पक्ष सुना जाना चाहिए। उन्होंने हमें आज समय दिया और कहा कि उन्हें बागी सांसदों से कोई पत्र नहीं मिला है।” नियम क्या हैं? लोकसभा में किसी पार्टी की ताकत यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक है कि उसे संसद परिसर में कार्यालय स्थान आवंटित किया गया है या नहीं। 2024 के आम चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने नौ लोकसभा सीटें जीती थीं। छह सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने से, अगर विलय को मान्यता मिल जाती है तो पार्टी की प्रभावी ताकत घटकर तीन रह जाएगी। आमतौर पर, पांच या अधिक सांसदों वाली पार्टियों को संसद के अंदर कार्यालय स्थान आवंटित किया जाता है। इससे यह संभावना बढ़ गई है कि अगर स्पीकर ने विलय को मंजूरी दे दी और उसकी ताकत सीमा से कम हो गई तो शिवसेना (यूबीटी) अपना कार्यालय खो सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया छह सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) को संसद कार्यालय खोने का खतरा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शिवसेना यूबीटी संसद कार्यालय(टी)शिवसेना विद्रोह(टी)एकनाथ शिंदे खेमा(टी)लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला(टी)पार्टी विलय नियम(टी)दलबदल विरोधी कानून(टी)अनुसूची 10 संविधान(टी)2024 लोकसभा चुनाव

Noel Tata Steps Down as Trent Chairman; Company Has 1286 Stores

Noel Tata Steps Down as Trent Chairman; Company Has 1286 Stores

मुंबई13 मिनट पहले कॉपी लिंक नोएल टाटा ने मंगलवार यानी 23 जून को कंपनी की 74वीं सालाना आम बैठक (AGM) में शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए कहा, “जैसा कि आप जानते होंगे, चेयरमैन के रूप में यह मेरी आखिरी वार्षिक आम बैठक होगी। वेस्टसाइड और जूडियो जैसे बड़े फैशन ब्रांड्स को ऑपरेट करने वाली टाटा समूह की कंपनी ‘ट्रेंट’ के चेयरमैन पद से नोएल टाटा का हटना एक बड़ा फैसना है। उनके नेतृत्व में कंपनी बेंगलुरु के एक सिंगल स्टोर से बढ़कर आज भारत की लीडिंग फैशन और लाइफस्टाइल दिग्गज बन चुकी है। नवंबर में 70 साल के हो जाएंगे नोएल टाटा नोएल टाटा (69) इस साल नवंबर में 70 साल के होने जा रहे हैं। वे टाटा संस के सबसे बड़े शेयरहोल्डर ‘टाटा ट्रस्ट्स’ के भी चेयरमैन हैं। कंपनी एक्ट 2013 के नियमों के मुताबिक, किसी भी मैनेजिंग डायरेक्टर या होल-टाइम डायरेक्टर को 70 साल या उससे अधिक उम्र होने पर पद पर बने रहने या दोबारा नियुक्त होने की अनुमति नहीं है। हालांकि, शेयरहोल्डर्स की मंजूरी से स्पेशल रिजॉल्यूशन पास करके या केंद्र सरकार की अनुमति से ही इस नियम में अपवाद के तौर पर कोई छूट मिल सकती है। शेयरहोल्डर्स और कर्मचारियों का जताया आभार टाटा ने सालों से मिल रहे सहयोग के लिए शेयरहोल्डर्स, कर्मचारियों और पार्टनर्स का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि मैं इतने सालों में मिले भरोसे, विश्वास और सहयोग के लिए अपने सभी शेयरहोल्डर्स, साथियों और पार्टनर्स को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं। वित्त वर्ष 2026 में ₹20,074 करोड़ का रेवेन्यू रहा नोएल टाटा की चेयरमैनशिप में ट्रेंट ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 79 नए शहरों में कदम रखा और 289 नए स्टोर्स जोड़े। इसके साथ ही कंपनी के कुल स्टोर्स की संख्या बढ़कर 321 शहरों में 1,286 हो गई, जो 12 करोड़ से ज्यादा कस्टमर्स को सेवाएं दे रहे हैं। कंसोलिडेटेड बेसिस पर, कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹20,074 करोड़ रहा और टैक्स से पहले का मुनाफा ₹2,259 करोड़ दर्ज किया गया। ट्रेंट का सफर: 1998 से 2026 1998: बेंगलुरु में पहला वेस्टसाइड स्टोर। 2010: नोएल टाटा डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए। 2014: नोएल टाटा ने चेयरमैन का पद संभाला। 2026: 321 शहरों में 1286 स्टोर्स, ₹20,074 करोड़ का रेवेन्यू मां सिमोन टाटा ने की थी ट्रेंट की शुरुआत नोएल टाटा 19 अगस्त 2010 को ट्रेंट के बोर्ड में बतौर डायरेक्टर शामिल हुए थे। इस कंपनी की शुरुआत उनकी दिवंगत मां सिमोन टाटा ने कॉस्मेटिक ब्रांड ‘लक्मे’ के बिजनेस को एफएमसीजी दिग्गज हिंदुस्तान यूनिलीवर को बेचने के बाद की थी। इसके बाद, 31 मार्च 2014 को एफके कावरना के रिटायरमेंट के बाद नोएल टाटा ने ट्रेंट के चेयरमैन का पद संभाला था। ट्रेंट के अलावा वे वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड जैसी कई अन्य टाटा कंपनियों के बोर्ड के भी चेयरमैन हैं। बेंगलुरु के एक स्टोर से शुरू हुआ था सफर कंपनी के सफर को याद करते हुए टाटा ने कहा कि ट्रेंट ने 1998 में बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट पर एक सिंगल ‘वेस्टसाइड’ स्टोर से शुरुआत की थी। आज ट्रेंट के पास वेस्टसाइड, जूडियो, सामोह, उत्सवऔर बर्न्ट टोस्ट जैसे मजबूत ब्रांड्स का नेटवर्क है। इसके अलावा कंपनी स्पेन के इंडिटेक्स ग्रुप के साथ मिलकर ग्लोबल फैशन ब्रांड जारा और मासिमो दुत्ती के स्टोर्स भी चलाती है। कंपनी को 10 गुना बड़ा बनाने का टारगेट जल्द होगा पूरा नोएल टाटा ने भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत में ऑर्गेनाइज्ड रिटेल के लिए अभी भी बड़े अवसर हैं, जिसका कारण लोगों की बढ़ती आमदनी और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स के प्रति पसंद है। उन्होंने 2023 में शेयरहोल्डर्स के सामने ट्रेंट के रेवेन्यू को 10 गुना बढ़ाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने बताया कि तब से लेकर अब तक कंपनी का रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी रन रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। इससे उन्हें भरोसा है कि यह लक्ष्य जल्द ही हासिल कर लिया जाएगा। वे भारतीय ब्रांड्स को ग्लोबल लेवल पर भी ले जाने की बड़ी क्षमता देखते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मिर्जापुर: द मूवी का टीजर कल आएगा:फिल्म के किरदारों मुन्ना भैया, गुड्डू भैया और कलीन भैया के पोस्टर्स जारी

मिर्जापुर: द मूवी का टीजर कल आएगा:फिल्म के किरदारों मुन्ना भैया, गुड्डू भैया और कलीन भैया के पोस्टर्स जारी

मिर्जापुर: द मूवी 4 सितंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का टीजर 25 जून को दोपहर 12 बजे जारी किया जाएगा। टीजर से पहले मेकर्स ने मुन्ना भैया, गुड्डू भैया और कलीन भैया के फर्स्ट लुक कैरेक्टर पोस्टर्स जारी किए हैं। इसके साथ ही ‘गद्दी’ का एक खास पोस्टर भी शेयर किया गया है, जिस पर लिखा है, “गद्दी है तो हम हैं।” जारी किए गए पोस्टर्स में मिर्जापुर की सत्ता, विरासत और दुश्मनी की झलक दिखाई गई है। पोस्टर्स के सामने आने के बाद फैंस के बीच फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट बढ़ गई है और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हो रही है। पंकज त्रिपाठी के किरदार कलीन भैया के पोस्टर के साथ लिखा गया, “जो आया है, वो जाएगा भी, बस मर्जी कलीन भैया की होगी। आपका स्वागत करते हैं बड़े पर्दे पर।” वहीं अली फजल के किरदार गुड्डू भैया के पोस्टर पर लिखा है, “शुरू मजबूरी में किए थे, अब मजा आ रहा है। गुड्डू भैया आ रहे हैं बड़े पर्दे पर, तैयार हैं ना?” दिव्येंदु शर्मा यानी मुन्ना भैया के पोस्टर के साथ कैप्शन दिया गया, “हिंदी फिलम के हीरो हैं हम, कहा था ना, हम अमर हैं। मुन्ना भैया का भौकाल, अब बड़े पर्दे पर।” 4 सितंबर को होगी रिलीज मिर्जापुर: द मूवी 4 सितंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में हिंदी और तेलुगु में रिलीज होगी। फिल्म को अमेजन MGM स्टूडियोज और रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म को गुरमीत सिंह ने डायरेक्ट किया है और कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। कासिम जगमगिया और विशाल रामचंदानी को-प्रोड्यूसर हैं। फिल्म में रवि किशन भी नजर आएंगे फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आएंगे। गौरतलब है कि ‘मिर्जापुर’ भारत की सबसे लोकप्रिय क्राइम-एक्शन वेब सीरीज में से एक है। यह सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। इसकी कहानी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मिर्जापुर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे।