Jacob completed the 110m hurdles in 12.75 seconds

न्यूयॉर्क4 मिनट पहले कॉपी लिंक जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है।- फाइल फोटो क्या कोई एथलीट अपनी सबसे अहम रेस से ठीक पहले भारी-भरकम फास्ट फूड खाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना सकता है? 20 साल के अमेरिकी एथलीट जैकॉब थार्प ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। ऑबर्न यूनिवर्सिटी के इस युवा छात्र ने 110 मीटर स्प्रिंट हर्डल को महज 12.75 सेकंड में पूरा कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है। अपनी शानदार जीत के साथ-साथ जैकॉब अपने अनोखे प्री-रेस रूटीन के लिए भी चर्चा में हैं। रेस से पहले उनका फिक्स मील है: दो चीजबर्गर, लार्ज फ्रेंच फ्राइज और चिकन नगेट्स। यूजीन (ओरेगन) में आयोजित NCAA चैम्पियनशिप में जैकॉब ने यह ऐतिहासिक कारनामा किया। उन्होंने 2012 में बेल्जियम में एरीस मेरिट द्वारा बनाए गए पुराने रिकॉर्ड को 0.05 सेकंड से पीछे छोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में आने से पहले जैकॉब का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 13.01 सेकंड था। अपने समय में 0.26 सेकंड का सुधार लाकर उन्होंने दुनिया को चौंका दिया है। जैकॉब अब दुनिया भर में मशहूर हो चुके हैं, लेकिन उनका असली लक्ष्य अभी बाकी है। उनकी नजर अब 2027 के बीजिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप और 2028 के लॉस एंजिलिस ओलिंपिक पर है। जैकॉब अपनी रिकॉर्ड-ब्रेकिंग रेस का वीडियो 15 बार देख चुके हैं ताकि यह समझ सकें कि और कहां समय बचाया जा सकता है। जैकॉब का मानना है कि रेस की आखिरी 3 बाधाओं पर सबसे ज्यादा फोकस की जरूरत होती है। वे कहते हैं, ‘जब आप इतनी तेज दौड़ रहे होते हैं, तो बाधाएं बहुत जल्दी सामने आती हैं और आपका शरीर धीमा होना चाहता है। लेकिन आपको एक ‘कामिकेज पायलट’ की तरह खतरे की ओर बिना डरे हमला करते रहना होता है।’ जैकॉब के माता-पिता बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे हैं। शुरुआत में जैकॉब भी बास्केटबॉल और ट्रैक दोनों में हाथ आजमाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने सिर्फ दौड़ने को अपना करियर चुना। बतौर अंधविश्वास शुरू किया था फास्ट फूड खाना जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है। हाई स्कूल के दौरान स्टेट चैम्पियनशिप में उन्होंने यही मील खाया था और जीत हासिल की थी। तब से हर बड़े इवेंट से पहले वे इसी डाइट को फॉलो कर रहे हैं। उनके कोच केन हार्नडेन (जिम्बाब्वे के दो बार के ओलिम्पियन) को शुरुआत में यह बिल्कुल पसंद नहीं था। लेकिन जैकॉब कहते हैं, ‘अगर कोई चीज काम कर रही है, तो उसे बदलने की क्या जरूरत है। जब आप किसी चीज से जीतते हैं, तो उसी पर टिके रहना बेहतर है।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Jacob completed the 110m hurdles in 12.75 seconds

न्यूयॉर्क21 मिनट पहले कॉपी लिंक जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है।- फाइल फोटो क्या कोई एथलीट अपनी सबसे अहम रेस से ठीक पहले भारी-भरकम फास्ट फूड खाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना सकता है? 20 साल के अमेरिकी एथलीट जैकॉब थार्प ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। ऑबर्न यूनिवर्सिटी के इस युवा छात्र ने 110 मीटर स्प्रिंट हर्डल को महज 12.75 सेकंड में पूरा कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है। अपनी शानदार जीत के साथ-साथ जैकॉब अपने अनोखे प्री-रेस रूटीन के लिए भी चर्चा में हैं। रेस से पहले उनका फिक्स मील है: दो चीजबर्गर, लार्ज फ्रेंच फ्राइज और चिकन नगेट्स। यूजीन (ओरेगन) में आयोजित NCAA चैम्पियनशिप में जैकॉब ने यह ऐतिहासिक कारनामा किया। उन्होंने 2012 में बेल्जियम में एरीस मेरिट द्वारा बनाए गए पुराने रिकॉर्ड को 0.05 सेकंड से पीछे छोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में आने से पहले जैकॉब का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 13.01 सेकंड था। अपने समय में 0.26 सेकंड का सुधार लाकर उन्होंने दुनिया को चौंका दिया है। जैकॉब अब दुनिया भर में मशहूर हो चुके हैं, लेकिन उनका असली लक्ष्य अभी बाकी है। उनकी नजर अब 2027 के बीजिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप और 2028 के लॉस एंजिलिस ओलिंपिक पर है। जैकॉब अपनी रिकॉर्ड-ब्रेकिंग रेस का वीडियो 15 बार देख चुके हैं ताकि यह समझ सकें कि और कहां समय बचाया जा सकता है। जैकॉब का मानना है कि रेस की आखिरी 3 बाधाओं पर सबसे ज्यादा फोकस की जरूरत होती है। वे कहते हैं, ‘जब आप इतनी तेज दौड़ रहे होते हैं, तो बाधाएं बहुत जल्दी सामने आती हैं और आपका शरीर धीमा होना चाहता है। लेकिन आपको एक ‘कामिकेज पायलट’ की तरह खतरे की ओर बिना डरे हमला करते रहना होता है।’ जैकॉब के माता-पिता बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे हैं। शुरुआत में जैकॉब भी बास्केटबॉल और ट्रैक दोनों में हाथ आजमाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने सिर्फ दौड़ने को अपना करियर चुना। बतौर अंधविश्वास शुरू किया था फास्ट फूड खाना जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है। हाई स्कूल के दौरान स्टेट चैम्पियनशिप में उन्होंने यही मील खाया था और जीत हासिल की थी। तब से हर बड़े इवेंट से पहले वे इसी डाइट को फॉलो कर रहे हैं। उनके कोच केन हार्नडेन (जिम्बाब्वे के दो बार के ओलिम्पियन) को शुरुआत में यह बिल्कुल पसंद नहीं था। लेकिन जैकॉब कहते हैं, ‘अगर कोई चीज काम कर रही है, तो उसे बदलने की क्या जरूरत है। जब आप किसी चीज से जीतते हैं, तो उसी पर टिके रहना बेहतर है।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
सोना ₹1,105 गिरकर ₹1.44 लाख पर आया:इस महीने ये ₹12,573 सस्ता हो चुका, चांदी आज ₹794 सस्ती होकर ₹2.27 लाख हुई

सोने-चांदी की कीमतों में 24 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,105 रुपए गिरकर 1.44 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले यह 1.45 लाख पर था। एक किलो चांदी 794 रुपए घटकर 2.27 लाख रुपए पर आ गई है। सोना के दाम इस महीने 12,573 रुपए और चांदी के 3,66,61 रुपए गिरे हैं। 1 जून को सोना ₹1.56 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.63 लाख/किलो थी। चांदी इस साल 1.58 लाख रुपए गिरी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 31,126 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। यह चांदी के अब तक की सबसे ज्यादा दाम थे। तब से अब तक 146 दिन में चांदी 1.58 लाख रुपए सस्ती हो गई है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
Morgan Stanley ₹3,638 Target & ₹1.53 Lakh Cr Investment

Hindi News Business Adani Group AGM: Morgan Stanley ₹3,638 Target & ₹1.53 Lakh Cr Investment मुंबई19 मिनट पहले कॉपी लिंक अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने आज 24 जून को ग्रुप की 34वीं एनुअल जनरल मीटिंग भविष्य का रोडमैप पेश किया है। ग्रुप ने वित्त वर्ष 2026 में किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट द्वारा सबसे अधिक ₹1.53 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर किया है। चेयरमैन ने इस साल की एजीएम की थीम ‘एक्सेलेरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लेवरेजिंग इंटेलिजेंस’ तय की है। गौतम अडाणी बोले- ‘भारत का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता’ गौतम अडाणी ने अपने संबोधन की शुरुआत पिछले साल के सफर को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि बीता साल दुनिया के लिए अधिक बिखराव वाला रहा, जहां ऊर्जा सुरक्षा के मॉडल राष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में लौटे और टेक्नोलॉजी संप्रभुता से जुड़ गई। अडाणी ने कहा कि इन असाधारण जांच और चुनौतियों के बावजूद अडाणी ग्रुप इस दृढ़ विश्वास के साथ टिका रहा कि भारत का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता। ग्रुप ने FY26 में ₹1.53 लाख करोड़ से अधिक का केपेक्स निवेश किया, जो इस साल भारत के कुल नए निजी क्षेत्र के केपेक्स का 30% से अधिक है। शेयरधारकों से मिला ₹25,000 करोड़ का राइट्स इश्यू इस बात का प्रमाण है। ग्रुप की वित्तीय स्थिति: मार्केट कैप ₹20 लाख करोड़ के करीब एजीएम में ग्रुप के वित्तीय प्रदर्शन और कर्ज के आउटलुक को लेकर महत्वपूर्ण फैक्ट्स सामने आए हैं: मार्केट कैप और एबिटडा: अडाणी ग्रुप का मार्केट कैप ₹20 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया है, जिसमें अकेले साल 2026 में ₹5 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। ग्रुप ने FY26 के लिए ₹94,834 करोड़ का रिकॉर्ड एबिटडा दर्ज किया है, जो पिछले साल से 5.6% अधिक है। इसमें कोर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस का योगदान 87% रहा। एसेट बेस और कैश बैलेंस: ग्रुप का कुल एसेट बेस बढ़कर ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है क्योंकि एनर्जी, यूटिलिटीज, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स में निवेश बढ़ाया गया है। कुल खर्च का लगभग 80% कोर इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म पर खर्च हुआ। ग्रुप के पास FY26 के अंत में ₹55,852 करोड़ का कैश बैलेंस था, जो कुल कर्ज का 15% है। कर्ज की लागत में कमी: रेटिंग अपग्रेड और कैपिटल तक बेहतर पहुंच के कारण ग्रुप की औसत उधारी लागत (बोरोइंग कॉस्ट) घटकर 7.8% पर आ गई है, जो दो साल पहले 9% थी। अमेरिकी केस बंद होने से ग्रुप के बोरोइंग प्रोफाइल में और सुधार होगा और अधिक लेंडर्स आकर्षित होंगे। अडाणी के शेयर को मॉर्गन स्टेनली की ‘ओवरवेट’ रेटिंग मिली ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने एजीएम से ठीक पहले अडाणी एंटरप्राइजेज को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और ₹3,638 का टारगेट प्राइस तय किया है। मॉर्गन स्टेनली ने अडाणी एंटरप्राइजेज को भारत का प्रमुख इनक्यूबेटर बताया जो देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी ट्रांजिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा है। ब्रोकरेज के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 कंपनी के मुनाफे के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा क्योंकि कई बड़े प्रोजेक्ट्स से कमाई शुरू हो जाएगी। न्यूक्लियर, हाइड्रो और पावर में निवेश की तैयारी अडाणी पावर: कंपनी ₹2 लाख करोड़ के विस्तार कार्यक्रम पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य अगले पांच साल में बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 45 गीगावॉट करना है। न्यूक्लियर और हाइड्रो पावर: ग्रुप ने भूटान में 5,000 मेगावाट की हाइड्रोपावर क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, ‘अडाणी एटॉमिक एनर्जी’ के माध्यम से साल 2035 तक 10 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता बनाने का लक्ष्य रखा है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर: गूगल के साथ बड़ा एग्रीमेंट गौतम अडाणी ने बताया कि उनका डेटा सेंटर बिजनेस साल 2030 तक 3 गीगावॉट का प्लेटफॉर्म बनाने की राह पर है। इसके लिए ग्रुप ने विशाखापत्तनम में गीगावॉट-स्केल डेटा सेंटर के लिए गूगल के साथ एक समझौता किया है। इसके अलावा ग्रुप माइनिंग, सीमेंट और डिफेंस सेक्टर में विस्तार कर रहा है, जिसमें लियोनार्डो और एम्ब्रेयर जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप शामिल है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ग्रुप के ड्रोन्स और डिफेंस सिस्टम्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लॉजिस्टिक्स, पोर्ट्स और एयरपोर्ट्स का अपडेट अडाणी पोर्ट्स: वित्त वर्ष 2026 के दौरान अडाणी पोर्ट्स ने 500 मिलियन टन से अधिक कार्गो हैंडल किया है और साल 2030 तक 1 बिलियन टन कार्गो हैंडल करने का लक्ष्य दोहराया है। कंपनी ने ₹1,500 करोड़ में जेपी फर्टिलाइजर्स का अधिग्रहण करने की घोषणा की है। इसके अलावा, अर्जेंटीना से भारत को होने वाले पहले एलएनजी एक्सपोर्ट के लिए ₹666 करोड़ का 10 साल का मरीन सर्विसेज कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। विझिंजम और एयरपोर्ट्स: विझिंजम पोर्ट ने अपने संचालन के पहले ही साल में 1 मिलियन TEU का आंकड़ा पार कर लिया है। ग्रुप के इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नए गुवाहाटी एयरपोर्ट टर्मिनल को बड़े एडिशन के रूप में शोकेस किया गया। इसके साथ ही, अडाणी मुंद्रा एयरपोर्ट पूरी तरह से इंटीग्रेटेड, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स और बिजनेस हब के रूप में काम कर रहा है। ऑर्गेनाइजेशनल रिफॉर्म्स और सोशल वर्क गौतम अडाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को सरल बनाने, ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) पार्टनरशिप को मजबूत करने और श्रमिक कल्याण (वर्कर्स वेलफेयर) में सुधार लाने के उद्देश्य से संगठनात्मक सुधारों की रूपरेखा रखी। इसके अलावा सामाजिक कार्यों का ब्योरा देते हुए बताया कि ‘अडाणी फाउंडेशन’ अब 22 राज्यों के 7,000 गांवों में 1 करोड़ (10 मिलियन) लोगों तक पहुंच रहा है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश कर रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
मस्क की नेटवर्थ एक-हफ्ते में रिकॉर्ड ₹33.13 लाख करोड़ घटी:यह दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति लैरी पेज की कुल संपत्ति का 4 गुना

दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के कुछ दिनों बाद ही इलॉन मस्क की नेटवर्थ में अब तक की रिकॉर्ड गिरावट आई है। उनकी रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों में आई 16% की गिरावट की वजह से मस्क की नेटवर्थ सिर्फ एक हफ्ते में करीब 350 बिलियन डॉलर यानी 33.13 लाख करोड़ रुपए कम हो गई है। फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर लिस्ट के मुताबिक, स्पेसएक्स के शेयरों में आई गिरावट के बाद इलॉन मस्क की संपत्ति 1.45 ट्रिलियन डॉलर से घटकर अब 1.1 ट्रिलियन डॉलर यानी 104.15 लाख करोड़ पर आ गई है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि इसका कुल साइज दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति लैरी पेज की टोटल नेटवर्थ लगभग 285 बिलियन डॉलर यानी 26.98 लाख करोड़ रुपए से लगभग 4 गुना ज्यादा है। इसी महीने बने थे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर इलॉन मस्क इसी महीने अपनी रॉकेट, सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी स्पेसएक्स की अमेरिकी बाजार में लिस्टिंग के बाद दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने थे। IPO के शुरुआती तीन कारोबारी दिनों में निवेशकों के लगातार निवेश के चलते स्पेसएक्स के शेयर 67% तक उछल गए थे, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन 1.8 ट्रिलियन डॉलर (170 लाख करोड़ रुपए) के पार पहुंच गई थी। 3 दिन में ₹87.84 लाख करोड़ मार्केट वैल्यू घटी शुरुआती तेजी के बाद स्पेसएक्स के स्टॉक में लगातार तीन सेशन में गिरावट देखी गई। इस बिकवाली से कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 928 बिलियन डॉलर यानी करीब 87.84 लाख करोड़ रुपए घट गई। कंपनी की कुल वैल्यूएशन भी अपने हाई लेवल 2.9 ट्रिलियन डॉलर से गिरकर अब सिर्फ 2 ट्रिलियन डॉलर यानी 189 लाख करोड़ रुपए के आस-पास आ गई है। मस्क के नाम पहले भी दर्ज है सबसे बड़ी गिरावट का रिकॉर्ड इलॉन मस्क के लिए व्यक्तिगत संपत्ति का यह पहला बड़ा नुकसान नहीं है। इससे पहले साल 2022 में टेस्ला के शेयरों में आई गिरावट के दौरान उन्होंने लगभग 165 बिलियन डॉलर यानी 15.62 लाख करोड़ रुपए गंवाए थे। तब भी उनके नाम किसी व्यक्ति द्वारा गंवाई गई सबसे बड़ी व्यक्तिगत संपत्ति का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। मस्क की संपत्ति का बड़ा हिस्सा स्पेसएक्स में उनकी 38% हिस्सेदारी, टेस्ला में 11% हिस्सेदारी और अन्य स्टार्टअप्स में उनके मालिकाना हक से जुड़ा हुआ है। ₹1.89 लाख करोड़ के नए बॉन्ड लाने की घोषणा से शेयर गिरे पब्लिक कंपनी बनने के बाद सोमवार को स्पेसएक्स को अपने सबसे खराब कारोबारी दिन का सामना करना पड़ा, जब इसके शेयर 16.4% टूट गए। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने अपने AI एक्सपेंशन प्लान के लिए कम से कम 20 बिलियन डॉलर (करीब 1.89 लाख करोड़ रुपए) जुटाने के उद्देश्य से पहली इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड ऑफरिंग की घोषणा की। एआई सेक्टर में भारी निवेश को लेकर बाजार में बढ़ी चिंता स्पेसएक्स के इस फंड जुटाने के प्रयास ने ग्लोबल मार्केट में इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि क्या बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां एआई सेक्टर में मुकाबला करने के लिए आवश्यक भारी-भरकम निवेश को जारी रख पाएंगी। स्पेसएक्स ने कहा कि उसके पास 100 बिलियन डॉलर (9.46 लाख करोड़) से ज्यादा की नकदी है। इस बिकवाली के बावजूद कंपनी के शेयर कल 156 डॉलर पर बंद हुए, जो इसके IPO प्राइस 135 डॉलर से अब भी ऊपर है। ग्लोबल मार्केट में ठंडा पड़ रहा है AI स्टॉक्स का क्रेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेसएक्स की लिस्टिंग को लेकर जो उत्साह था, वह अब वैश्विक बाजारों में ठंडा पड़ता दिख रहा है। न्यूयॉर्क का नैस्डैक इंडेक्स मंगलवार को 2.21% गिरकर बंद हुआ, जिसमें अल्फाबेट का शेयर 1% गिरा था। यह उतार-चढ़ाव मंगलवार को एशियाई बाजारों में भी देखने मिला, जहां साउथ कोरिया के बेंचमार्क कोस्पी इंडेक्स में एआई चिपमेकर्स की भारी बिकवाली के कारण ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा और इंडेक्स 10% तक टूट गया। इसके अलावा जापान का निक्केई 3.6% और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 1.82% गिरकर बंद हुआ था। वहीं भारत का सेंसेक्स भी 893 अंक गिरकर 76,200 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 278 अंक गिरकर 23,824 पर बंद हुआ था। क्या होती है इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड ऑफरिंग?
मस्क की नेटवर्थ एक-हफ्ते में रिकॉर्ड ₹33.13 लाख करोड़ घटी:यह दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति की कुल संपत्ति से ज्यादा; स्पेसएक्स का शेयर 16% गिरा

दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के कुछ दिनों बाद ही इलॉन मस्क की नेटवर्थ में अब तक की रिकॉर्ड गिरावट आई है। उनकी रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों में आई 16% की गिरावट की वजह से मस्क की नेटवर्थ सिर्फ एक हफ्ते में करीब 350 बिलियन डॉलर यानी 33.13 लाख करोड़ रुपए कम हो गई है। फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर लिस्ट के मुताबिक, स्पेसएक्स के शेयरों में आई गिरावट के बाद इलॉन मस्क की संपत्ति 1.45 ट्रिलियन डॉलर से घटकर अब 1.1 ट्रिलियन डॉलर यानी 104.15 लाख करोड़ पर आ गई है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि इसका कुल साइज दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति लैरी पेज की टोटल नेटवर्थ लगभग 285 बिलियन डॉलर यानी 26.98 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। इसी महीने बने थे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर इलॉन मस्क इसी महीने अपनी रॉकेट, सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी स्पेसएक्स की अमेरिकी बाजार में लिस्टिंग के बाद दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने थे। IPO के शुरुआती तीन कारोबारी दिनों में निवेशकों के लगातार निवेश के चलते स्पेसएक्स के शेयर 67% तक उछल गए थे, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन 1.8 ट्रिलियन डॉलर (170 लाख करोड़ रुपए) के पार पहुंच गई थी। 3 दिन में ₹87.84 लाख करोड़ मार्केट वैल्यू घटी शुरुआती तेजी के बाद स्पेसएक्स के स्टॉक में लगातार तीन सेशन में गिरावट देखी गई। इस बिकवाली से कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 928 बिलियन डॉलर यानी करीब 87.84 लाख करोड़ रुपए घट गई। कंपनी की कुल वैल्यूएशन भी अपने हाई लेवल 2.9 ट्रिलियन डॉलर से गिरकर अब सिर्फ 2 ट्रिलियन डॉलर यानी 189 लाख करोड़ रुपए के आस-पास आ गई है। मस्क के नाम पहले भी दर्ज है सबसे बड़ी गिरावट का रिकॉर्ड इलॉन मस्क के लिए व्यक्तिगत संपत्ति का यह पहला बड़ा नुकसान नहीं है। इससे पहले साल 2022 में टेस्ला के शेयरों में आई गिरावट के दौरान उन्होंने लगभग 165 बिलियन डॉलर यानी 15.62 लाख करोड़ रुपए गंवाए थे। तब भी उनके नाम किसी व्यक्ति द्वारा गंवाई गई सबसे बड़ी व्यक्तिगत संपत्ति का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। मस्क की संपत्ति का बड़ा हिस्सा स्पेसएक्स में उनकी 38% हिस्सेदारी, टेस्ला में 11% हिस्सेदारी और अन्य स्टार्टअप्स में उनके मालिकाना हक से जुड़ा हुआ है। ₹1.89 लाख करोड़ के नए बॉन्ड लाने की घोषणा से शेयर गिरे पब्लिक कंपनी बनने के बाद सोमवार को स्पेसएक्स को अपने सबसे खराब कारोबारी दिन का सामना करना पड़ा, जब इसके शेयर 16.4% टूट गए। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने अपने AI एक्सपेंशन प्लान के लिए कम से कम 20 बिलियन डॉलर (करीब 1.89 लाख करोड़ रुपए) जुटाने के उद्देश्य से पहली इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड ऑफरिंग की घोषणा की। एआई सेक्टर में भारी निवेश को लेकर बाजार में बढ़ी चिंता स्पेसएक्स के इस फंड जुटाने के प्रयास ने ग्लोबल मार्केट में इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि क्या बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां एआई सेक्टर में मुकाबला करने के लिए आवश्यक भारी-भरकम निवेश को जारी रख पाएंगी। स्पेसएक्स ने कहा कि उसके पास 100 बिलियन डॉलर (9.46 लाख करोड़) से ज्यादा की नकदी है। इस बिकवाली के बावजूद कंपनी के शेयर कल 156 डॉलर पर बंद हुए, जो इसके IPO प्राइस 135 डॉलर से अब भी ऊपर है। ग्लोबल मार्केट में ठंडा पड़ रहा है AI स्टॉक्स का क्रेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेसएक्स की लिस्टिंग को लेकर जो उत्साह था, वह अब वैश्विक बाजारों में ठंडा पड़ता दिख रहा है। न्यूयॉर्क का नैस्डैक इंडेक्स मंगलवार को 2.21% गिरकर बंद हुआ, जिसमें अल्फाबेट का शेयर 1% गिरा था। यह उतार-चढ़ाव मंगलवार को एशियाई बाजारों में भी देखने मिला, जहां साउथ कोरिया के बेंचमार्क कोस्पी इंडेक्स में एआई चिपमेकर्स की भारी बिकवाली के कारण ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा और इंडेक्स 10% तक टूट गया। इसके अलावा जापान का निक्केई 3.6% और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 1.82% गिरकर बंद हुआ था। वहीं भारत का सेंसेक्स भी 893 अंक गिरकर 76,200 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 278 अंक गिरकर 23,824 पर बंद हुआ था। क्या होती है इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड ऑफरिंग? ये खबर भी पढ़ें… टेलीग्राम 7 दिन बाद चालू, प्ले स्टोर पर वापस आया: NEET परीक्षा में गड़बड़ी के बाद लगा था बैन, मैसेज एडिट पर 30 जून तक रोक रहेगी इंस्टेंट मैसेजिंग एप टेलीग्राम 7 दिन बाद भारत में फिर से चालू हो गया है। नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के नकली और लीक पेपर सर्कुलेट होने के विवाद के बाद केंद्र सरकार ने एप और उससे जुड़ी वेब सर्विसेज को 22 जून तक ब्लॉक कर दिया था। पूरी खबर पढ़ें…
PG Diploma Courses Replaced by MD, MS Degrees

3 मिनट पहले कॉपी लिंक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश में सभी PG डिप्लोमा मेडिकल कोर्स को बंद करने और उनकी जगह MD(डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) और MS (मास्टर ऑफ सर्जरी) जैसे पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स शुरू करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य देश में पीजी मेडिकल एजुकेशन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है। सीधे डिग्री कोर्स में एडमिशन का मौका जो सीटें अब तक PG डिप्लोमा प्रोग्राम के लिए तय थीं, उन्हें MD और MS सीटों में बदला जाएगा। इससे छात्रों को डिप्लोमा के बजाय सीधे डिग्री कोर्स में एडमिशन का अवसर मिलेगा। NMC का मानना है कि इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण स्तर में सुधार होगा। साथ ही छात्रों को बेहतर करियर अवसर भी मिलेंगे। जल्द शुरू होगी MD, MS सीटों में बदलने की प्रोसेस इस बदलाव को लागू करने के लिए पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (PGMEB) ने सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं। कॉलेजों को अपनी डिप्लोमा सीटों को MD और MS सीटों में बदलने की प्रक्रिया जल्द शुरू करनी होगी। इस प्रक्रिया के लिए उन्हें मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) के पास आवेदन करना होगा। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) जल्द ही एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च करने वाला है, जिसके माध्यम से संस्थान आवेदन कर सकेंगे। क्यों जरूरी माना गया यह फैसला? NMC का मानना है कि देश में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के स्तर को एक समान बनाना समय की जरूरत है। वर्तमान में कुछ मेडिकल कॉलेजों में एक ही विषय में डिप्लोमा और डिग्री दोनों कोर्स चल रहे हैं। जबकि कई संस्थानों में केवल डिप्लोमा प्रोग्राम ही है। आयोग का तर्क है कि जिन संस्थानों में डिप्लोमा कोर्स चल रहे हैं, वहां पहले से ही पर्याप्त फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मरीजों की उपलब्धता मौजूद है। ऐसे में इन रिर्सोसेस का उपयोग करके सीटों को MD और MS प्रोग्राम में बदला जा सकता है। इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और देश को अधिक प्रशिक्षित स्पेशलिस्ट डॉक्टर मिल सकेंगे। यह खबर भी पढ़ें अंडरगारमेंट्स में मोबाइल लेकर NEET एग्जाम देने पहुंची छात्रा:MBBS स्टूडेंट्स एग्जाम देते अरेस्ट; 9 पसलियां टूटने के बाद भी सृष्टि ने दी परीक्षा रविवार 21 जून यानी को NEET का दोबारा एग्जाम हुआ। इस दौरान जहां बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ। वहीं एक छात्रा अंडरगारमेंट्स में मोबाइल के साथ एग्जाम हॉल में पकड़ी गई। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पद्म भूषण मिलने के बाद भावुक हुईं सिंगर अल्का याग्निक:कहा- मुश्किल दौर से गुजर रही हूं; 2 साल पहले अचानक सुनाई देना बंद हुआ, सिंगिंग छोड़ी

सिंगर अल्का याग्निक को मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। सम्मान लेने से पहले सिंगर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद लिया और फिर अवॉर्ड लेने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ कदम बढ़ाए। सम्मान मिलने के बाद अब सिंगर ने एक भावुक पोस्ट शेयर कर बताया है कि वो पिछले 2 साल से मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ तस्वीर शेयर करते हुए अल्का याग्निक ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से लिखा है, ‘पिछले 2 सालों से मैं लोगों की नजरों से दूर रही हूं। न सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हुई और न ही अपनी जिंदगी के बारे में ज्यादा कुछ शेयर किया। आप में से कई लोग जानते हैं कि मैं स्वास्थ्य संबंधी मुश्किल दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में आपका प्यार, दुआएं, संदेश और अटूट समर्थन हर कदम पर मेरे साथ रहा।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘आज जब मैं देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्म भूषण प्राप्त करने के लिए बाहर निकली, तो मेरा दिल कृतज्ञता से भरा हुआ था। यह सम्मान मेरे लिए बेहद विनम्र और भावुक करने वाला है। भले ही इस पर मेरा नाम लिखा हो, लेकिन यह सम्मान उतना ही उन सभी लोगों का है जिन्होंने मेरी आवाज को अपनाया, मेरे गीतों को पीढ़ियों तक जिंदा रखा और मेरे अच्छे-बुरे हर दौर में मेरा साथ दिया।’ ‘यह पल मेरे लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह सिर्फ मेरे काम की पहचान नहीं, बल्कि प्यार, उम्मीद और हौसले से मिलने वाली ताकत की याद भी है। मैं धीरे-धीरे फिर से अपने जीवन की राह पर लौट रही हूं और आज यहां आना मेरे लिए बहुत मायने रखता है। यह सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि आप सभी के लिए भी है, जो इस सफर का हिस्सा रहे हैं।’ अल्का याग्निक को है रेयर न्यूरो डिसीज, सुनने में होती है दिक्कत सिंगर अल्का याग्निक पिछले 2 सालों से म्यूजिक से दूर हैं। उन्हें रेयर न्यूरो डिसीज है, जिसके चलते उन्हें सुनाई देना लगभग बंद हो गया है। इलाज के बीच उन्हें लाउड म्यूजिक से दूर रहने की सलाह दी गई है। अल्का याग्निक ने 2 साल पहले इसकी जानकारी देते हुए म्यूजिक से ब्रेक लेने की घोषणा की थी। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा था, ‘कुछ हफ्ते पहले जब मैं एक फ्लाइट से बाहर निकली, तो अचानक मुझे सुनाई देना बंद हो गया। उस घटना के बाद कई हफ्तों तक हिम्मत जुटाने के बाद अब मैं अपनी चुप्पी तोड़ना चाहती हूं, क्योंकि बहुत से लोग पूछ रहे थे कि मैं इन दिनों नजर क्यों नहीं आ रही हूं। डॉक्टरों ने बताया है कि मुझे एक रेयर बीमारी हुई है, जिसे सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस कहा जाता है। यह एक वायरल संक्रमण के कारण हुआ है। यह अचानक आई बड़ी समस्या थी, जिसके लिए मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी।’ आगे उन्होंने लिखा था, ‘मैं अभी इस स्थिति को समझने और स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूं। आप सबसे बस यही अनुरोध है कि मुझे अपनी दुआओं में याद रखें। अपने फैंस और युवा साथियों से मैं यह भी कहना चाहती हूं कि बहुत तेज आवाज वाले संगीत और हेडफोन के ज्यादा इस्तेमाल से सावधान रहें।’ ‘एक दिन मैं अपने पेशे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे होने वाले खतरों के बारे में विस्तार से बात करना चाहूंगी। फिलहाल, आप सभी के प्यार और समर्थन के सहारे मैं अपनी जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हूं और उम्मीद करती हूं कि जल्द ही आप सबके बीच वापस लौटूंगी।’ इन सेलेब्स को मिला पद्म भूषण सम्मान अल्का याग्निक के अलावा साउथ स्टार ममूटी को भी पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। ममूटी 50 साल से फिल्मों में एक्टिव हैं। कई भाषाओं में 400 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। वे चैरिटी का काम भी करते हैं। वेटरन एक्टर सतीष कौशिक को भी मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया। चार दशकों के करियर में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर सतीश शाह ने कई फिल्मों और यादगार टीवी शो में काम किया। एक्टर, फिल्ममेकर और स्क्रीनराइटर माधवन रंगनाथन को भारतीय सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। हाल ही में एक्टर फिल्म धुरंधर से चर्चा में हैं।
पद्म भूषण मिलने के बाद भावुक हुईं सिंगर अल्का याग्निक:कहा- मुश्किल दौर से गुजर रही हूं; 2 साल पहले अचानक सुनाई देना बंद हुआ, सिंगिंग छोड़ी

सिंगर अल्का याग्निक को मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। सम्मान लेने से पहले सिंगर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद लिया और फिर अवॉर्ड लेने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ कदम बढ़ाए। सम्मान मिलने के बाद अब सिंगर ने एक भावुक पोस्ट शेयर कर बताया है कि वो पिछले 2 साल से मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ तस्वीर शेयर करते हुए अल्का याग्निक ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से लिखा है, ‘पिछले 2 सालों से मैं लोगों की नजरों से दूर रही हूं। न सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हुई और न ही अपनी जिंदगी के बारे में ज्यादा कुछ शेयर किया। आप में से कई लोग जानते हैं कि मैं स्वास्थ्य संबंधी मुश्किल दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में आपका प्यार, दुआएं, संदेश और अटूट समर्थन हर कदम पर मेरे साथ रहा।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘आज जब मैं देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्म भूषण प्राप्त करने के लिए बाहर निकली, तो मेरा दिल कृतज्ञता से भरा हुआ था। यह सम्मान मेरे लिए बेहद विनम्र और भावुक करने वाला है। भले ही इस पर मेरा नाम लिखा हो, लेकिन यह सम्मान उतना ही उन सभी लोगों का है जिन्होंने मेरी आवाज को अपनाया, मेरे गीतों को पीढ़ियों तक जिंदा रखा और मेरे अच्छे-बुरे हर दौर में मेरा साथ दिया।’ ‘यह पल मेरे लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह सिर्फ मेरे काम की पहचान नहीं, बल्कि प्यार, उम्मीद और हौसले से मिलने वाली ताकत की याद भी है। मैं धीरे-धीरे फिर से अपने जीवन की राह पर लौट रही हूं और आज यहां आना मेरे लिए बहुत मायने रखता है। यह सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि आप सभी के लिए भी है, जो इस सफर का हिस्सा रहे हैं।’ अल्का याग्निक को है रेयर न्यूरो डिसीज, सुनने में होती है दिक्कत सिंगर अल्का याग्निक पिछले 2 सालों से म्यूजिक से दूर हैं। उन्हें रेयर न्यूरो डिसीज है, जिसके चलते उन्हें सुनाई देना लगभग बंद हो गया है। इलाज के बीच उन्हें लाउड म्यूजिक से दूर रहने की सलाह दी गई है। अल्का याग्निक ने 2 साल पहले इसकी जानकारी देते हुए म्यूजिक से ब्रेक लेने की घोषणा की थी। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा था, ‘कुछ हफ्ते पहले जब मैं एक फ्लाइट से बाहर निकली, तो अचानक मुझे सुनाई देना बंद हो गया। उस घटना के बाद कई हफ्तों तक हिम्मत जुटाने के बाद अब मैं अपनी चुप्पी तोड़ना चाहती हूं, क्योंकि बहुत से लोग पूछ रहे थे कि मैं इन दिनों नजर क्यों नहीं आ रही हूं। डॉक्टरों ने बताया है कि मुझे एक रेयर बीमारी हुई है, जिसे सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस कहा जाता है। यह एक वायरल संक्रमण के कारण हुआ है। यह अचानक आई बड़ी समस्या थी, जिसके लिए मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी।’ आगे उन्होंने लिखा था, ‘मैं अभी इस स्थिति को समझने और स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूं। आप सबसे बस यही अनुरोध है कि मुझे अपनी दुआओं में याद रखें। अपने फैंस और युवा साथियों से मैं यह भी कहना चाहती हूं कि बहुत तेज आवाज वाले संगीत और हेडफोन के ज्यादा इस्तेमाल से सावधान रहें।’ ‘एक दिन मैं अपने पेशे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे होने वाले खतरों के बारे में विस्तार से बात करना चाहूंगी। फिलहाल, आप सभी के प्यार और समर्थन के सहारे मैं अपनी जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हूं और उम्मीद करती हूं कि जल्द ही आप सबके बीच वापस लौटूंगी।’ इन सेलेब्स को मिला पद्म भूषण सम्मान अल्का याग्निक के अलावा साउथ स्टार ममूटी को भी पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। ममूटी 50 साल से फिल्मों में एक्टिव हैं। कई भाषाओं में 400 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। वे चैरिटी का काम भी करते हैं। वेटरन एक्टर सतीष कौशिक को भी मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया। चार दशकों के करियर में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर सतीश शाह ने कई फिल्मों और यादगार टीवी शो में काम किया। एक्टर, फिल्ममेकर और स्क्रीनराइटर माधवन रंगनाथन को भारतीय सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। हाल ही में एक्टर फिल्म धुरंधर से चर्चा में हैं।
‘ट्विन फ्लावर’ लड़ाई: ममता, रीताब्रत गुटों ने तृणमूल के नाम, पार्टी चिह्न को लेकर चुनाव आयोग का रुख किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:24 जून, 2026, 10:28 IST ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने के एक दिन बाद, नेता प्रतिपक्ष रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों ने आधिकारिक टीएमसी के रूप में मान्यता की मांग करते हुए चुनाव आयोग का रुख किया। ममता बनाम रीताब्रता: टीएमसी सिंबल की लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंची ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा प्रतिस्पर्धी राष्ट्रीय कार्य समिति की सूची के साथ भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) से संपर्क करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर नियंत्रण की लड़ाई तेज हो गई। इस कदम ने औपचारिक रूप से पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण पर विवाद शुरू कर दिया है, दोनों खेमे ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं। विद्रोही आधिकारिक टीएमसी के रूप में मान्यता चाहते हैं ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने और नई राष्ट्रीय कार्य समिति नियुक्त करने के एक दिन बाद, बागी विधायकों ने आधिकारिक अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता के लिए चुनाव अधिकारियों से संपर्क किया। सोमवार को कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में विद्रोही गुट ने विशेष सत्र आयोजित किया. पार्टी के 80 में से 65 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए समूह ने ध्वनि मत से ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला किया. विधायकों ने हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को नया पार्टी प्रमुख चुना। रॉय 2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे। विद्रोहियों ने तर्क दिया कि पार्टी संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत एक संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया है क्योंकि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्य समिति का तीन साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है। मंगलवार शाम को, बागी विधायकों ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का दौरा किया और एक पत्र सौंपकर आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता और “जोरा घास फूल” या जुड़वां-फूल चुनाव चिन्ह पर अधिकार मांगा। ममता खेमे ने सौंपी प्रतिद्वंद्वी सूची जवाब में, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक अलग सूची सौंपी, जिसमें कहा गया कि उनका गुट वैध तृणमूल कांग्रेस बना हुआ है। सूची में अध्यक्ष के रूप में ममता बनर्जी, राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी, संयुक्त सचिव के रूप में डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन, कोषाध्यक्ष के रूप में सुभाशीष चक्रवर्ती और विधानसभा में नेता के रूप में सोवोंडेब चटर्जी शामिल हैं। ताजा चुनौती बनर्जी के लिए कठिन समय में आई है, जो पहले से ही एनडीए से जुड़े लोकसभा सांसदों के एक अलग समूह और तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से निपट रहे हैं। विद्रोहियों ने यह भी संकेत दिया है कि वे पार्टी चिन्ह और संगठन की संपत्ति पर नियंत्रण चाह सकते हैं। प्रतीक और वित्त पर लड़ाई विवाद संगठनात्मक नियंत्रण से परे बढ़ गया है। विद्रोहियों के अनुसार, उन्हें राज्य भर में पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायकों और कई निर्वाचित पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। एक वरिष्ठ बागी विधायक ने कहा, “हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं। हमारे पास हमारी पसंद के अनुसार विपक्ष का नेता है, विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक की पसंद है। जाहिर है, चुनाव चिह्न पर हमारा दावा है।” गुट ने पार्टी के वित्त के ऑडिट की भी मांग की है। विद्रोहियों की शिकायत के बाद कथित तौर पर टीएमसी के 440 करोड़ रुपये वाले बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। हालाँकि, ममता बनर्जी के समर्थक चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड तक पहुंच दोनों को बरकरार रखने को लेकर आश्वस्त हैं। कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा ने चुनाव चिन्ह पर विद्रोहियों के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, “आप घोड़े के आगे गाड़ी कैसे रख सकते हैं? उनके पास चुनाव चिन्ह नहीं है। उन्हें पहले कोशिश करने दें और प्रतीक हासिल करने दें और फिर राष्ट्रीय कार्य समिति या अपनी इच्छानुसार कोई अन्य समिति बनाएं।” उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पार्टी संविधान के तहत, ममता बनर्जी जीवन भर अध्यक्ष बनी रहेंगी। बैंक खातों को फ्रीज करने पर मोइत्रा ने प्रक्रिया पर सवाल उठाया और कहा कि उचित अदालत की अनुमति नहीं ली गई थी। निष्कासन और कानूनी चुनौतियाँ टीएमसी ने कई बागी नेताओं को निष्कासित कर दिया है, जिनमें अरूप रॉय, विधायक जावेद खान, फिरहाद हकीम, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और सबीना यसमिन के साथ-साथ पूर्व मंत्री अरूप विश्वास और स्नेहाशीष चक्रवर्ती भी शामिल हैं। कार्रवाई के बावजूद विद्रोही अपनी संख्या बल को लेकर आश्वस्त हैं. इस बीच, वफादारों ने संकेत दिया है कि वे चुनाव आयोग के समक्ष विद्रोहियों को चुनौती देंगे और यदि आवश्यक हुआ तो अदालतों का रुख करेंगे। रीताब्रत को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ चट्टोपाध्याय ने पहले ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में मामला दायर कर दिया है। महाराष्ट्र से सबक सामने आ रहा यह विवाद महाराष्ट्र में पहले हुई राजनीतिक लड़ाइयों को दर्शाता है, जिसमें शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल थी। दोनों मामलों में, प्रतिद्वंद्वी गुटों ने पार्टी नियंत्रण, वैधता और चुनाव चिह्नों को लेकर चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लड़ाई लड़ी। चुनाव आयोग और स्पीकर ने एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुटों के पक्ष में फैसला सुनाते समय विधायी ताकत पर बहुत अधिक भरोसा किया। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक अध्यक्ष अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेते समय केवल संख्या बल पर भरोसा नहीं कर सकता है और कहा कि एक राजनीतिक दल और एक विधायक दल अलग-अलग संस्थाएँ हैं। शिवसेना और राकांपा के मामलों में महीनों तक कानूनी लड़ाई जारी रहने और कुछ मामलों में तो विधायकों के कार्यकाल से भी आगे बढ़ने के कारण विभाजित तृणमूल कांग्रेस के लिए आगे की राह लंबी और जटिल होती दिख रही है। चुनाव कानून मुख्य रूप से पार्टी के प्रतीकों से संबंधित है, जबकि संपत्ति पर विवादों को आम तौर पर सिविल अदालतों के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, एक ऐसी प्रक्रिया जिसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती देने में वर्षों लग सकते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शुद्धान्त पात्र आठ साल के अनुभव







