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पार्टी विभाजन और विलय के बीच एनडीए के दो-तिहाई दबाव ने दल-बदल विरोधी कानून पर सवाल उठाए

पार्टी विभाजन और विलय के बीच एनडीए के दो-तिहाई दबाव ने दल-बदल विरोधी कानून पर सवाल उठाए

दो-तिहाई बहुमत के लिए एनडीए सरकार के दबाव ने दल-बदल विरोधी कानून को फिर से फोकस में ला दिया है क्योंकि राजनीतिक दलों को विभाजन, विलय और बदलती वफादारी का सामना करना पड़ रहा है। कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या ये कदम दसवीं अनुसूची का अनुपालन करते हैं या इंजीनियर राजनीतिक पुनर्गठन की अनुमति देकर लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करते हैं। बहस पार्टी की पहचान, विधायी बहुमत, विलय की वैधता, स्पीकर की शक्तियां, मतदाता जनादेश, राजनीतिक नैतिकता और क्या भारत के दल-बदल विरोधी ढांचे में आधुनिक गठबंधन राजनीति और गुटीय विभाजन को संबोधित करने के लिए सुधार की आवश्यकता है, पर केंद्रित है। -हार्ड-फैक्ट्स News18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 25 जून, 2026, 22:52 IST

NEET UG 2026 Answer Key Released

NEET UG 2026 Answer Key Released

Hindi News Career NEET UG 2026 Answer Key Released | NTA Official Website Download 6 मिनट पहले कॉपी लिंक NTA ने री-NEET UG 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। 21 जून को हुई री-NEET में शामिल उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर आंसर की चेक कर सकते हैं। प्रोविजनल आंसर की पर दर्ज कर सकेंगे ऑब्‍जेक्‍शन कैंडिडेट्स प्रोविजनल आंसर की पर आपत्तियां भी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद विषय विशेषज्ञ सभी ऑब्जेक्शन की जांच करेंगे। उसके बाद फाइनल आंसर की जारी की जाएगी। फाइनल आंसर की के आधार पर स्कोर, ऑल इंडिया रैंक (AIR) और मेरिट लिस्ट जारी होगी। फाइनल रिजल्ट के बाद शुरू होगी काउंसलिंग 15% AIQ सीटों के लिए मेडिकल काउंसिलिंग कमेटी MCC काउंसलिंग कराता है। 85% राज्य कोटा सीटों के लिए संबंधित राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण प्रक्रिया चलाते हैं। डॉक्‍यूमेंट्स वेरिफिकेशन के बाद मिलेगा एडमिशन उम्मीदवार कॉलेजों की पसंद भरेंगे। उसके बाद सीट अलॉटमेंट होगा और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद एडमिशन मिलेगा। 22 लाख छात्रों ने कराया रजिस्ट्रेशन NTA के अनुसार NEET UG के लिए इस बार करीब 22 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया। NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को NTA ने इसे रद्द कर दिया। री NEET का आयोजन 21 जून 2026 को दोबारा किया गया। ————— ये खबर भी पढ़ें… मेडिकल कॉलेजों में 2027 – 28 से डिप्लोमा कोर्सेस बंद: NMC ने लिया ये फैसला, इसकी जगह एमडी, एमएस कोर्स संवारेंगे करियर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश में सभी PG डिप्लोमा मेडिकल कोर्स को बंद करने और उनकी जगह MD(डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) और MS (मास्टर ऑफ सर्जरी) जैसे पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स शुरू करने का फैसला किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सना मलिक ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह का बचाव करके विवाद खड़ा कर दिया, यूसीसी बहस वापस आई

सना मलिक ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह का बचाव करके विवाद खड़ा कर दिया, यूसीसी बहस वापस आई

महाराष्ट्र विधायक सना मलिक ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह का बचाव करके विवाद को जन्म दिया है, जिससे धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, लैंगिक न्याय, पर्सनल लॉ सुधार और भारत में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर व्यापक बहस शुरू हो गई है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_the-hard-facts News18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र सरकार ने राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने आज यानी 25 जून को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं। गैस संकट को देखते हुए सरकार ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई में कटौती की थी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में इंडस्ट्रीज को रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है। इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है। यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है। घरेलू उत्पादन में सुधार और इंपोर्टेड कार्गो आने की उम्मीद से लिया फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि घरेलू स्तर पर LPG के उत्पादन में सुधार और विदेशों से आने वाले LPG कार्गो के भारत पहुंचने की उम्मीद के बाद कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी रोक हटा ली गई है। इसके अलावा संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क LPG की सप्लाई को भी पहले की कुल खपत (प्री-क्राइसिस लेवल) 50% स्तर तकरूप से दोबारा शुरू कर दिया गया है, जिससे बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। रिलायंस जैसी कंपनियों को राहत, रोजाना 40 हजार टन घरेलू उत्पादन का लक्ष्य सप्लाई चेन सुधरने के बाद अब सरकार ने C3 और C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का फैसला किया है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना कोटा वापस मिल सकेगा। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि यह ढील इस शर्त पर दी गई है कि देश में घरेलू LPG की कुल उपलब्धता प्रभावित नहीं होनी चाहिए और रोजाना उत्पादन कम से कम 40,000 टन बना रहना चाहिए। इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹1373 महंगा हुआ इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कमी होने लगी थी। इस कारण पेट्रोल-डीजल और LPG सप्लाई पर संकट आ गया था। इसके अलावा कई बार इनके दाम भी बढ़ाए गए। 28 फरवरी को दिल्ली में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 1740.50 रुपए में मिल रहा था। इसके बाद 5 बार इसके दाम बढ़ाए गए। इससे दिल्ली में इसकी कीमत 3113.50 रुपए हो गई। यानी तब से इसकी कीमत 1373 रुपए बढ़ गई है। क्या होता है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’? ‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर अब 70% किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। इसके चलते शुरुआत में होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों को होने वाली LPG आपूर्ति में कटौती की गई थी, ताकि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में परेशानी न हो। ईरान-अमेरिका और इजराइल जंग से गैस की कमी ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया। दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए। इस अभियान को अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया। इस युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया और सप्लाई प्रभावित हुई। यही रास्ता भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश का करीब 80-85% LPG यहीं से आता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा गैस बाहर से मंगाता है। इसी वजह से देश में LPG की कमी जैसी स्थिति बनी। हालांकि, सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा और साफ किया कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है।

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र सरकार ने राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने आज यानी 25 जून को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं। गैस संकट को देखते हुए सरकार ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई में कटौती की थी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में इंडस्ट्रीज को रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है। इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है। यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है। घरेलू उत्पादन में सुधार और इंपोर्टेड कार्गो आने की उम्मीद से लिया फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि घरेलू स्तर पर LPG के उत्पादन में सुधार और विदेशों से आने वाले LPG कार्गो के भारत पहुंचने की उम्मीद के बाद कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी रोक हटा ली गई है। इसके अलावा संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क LPG की सप्लाई को भी पहले की कुल खपत (प्री-क्राइसिस लेवल) 50% स्तर तकरूप से दोबारा शुरू कर दिया गया है, जिससे बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। रिलायंस जैसी कंपनियों को राहत, रोजाना 40 हजार टन घरेलू उत्पादन का लक्ष्य सप्लाई चेन सुधरने के बाद अब सरकार ने C3 और C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का फैसला किया है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना कोटा वापस मिल सकेगा। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि यह ढील इस शर्त पर दी गई है कि देश में घरेलू LPG की कुल उपलब्धता प्रभावित नहीं होनी चाहिए और रोजाना उत्पादन कम से कम 40,000 टन बना रहना चाहिए। इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹1373 महंगा हुआ इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कमी होने लगी थी। इस कारण पेट्रोल-डीजल और LPG सप्लाई पर संकट आ गया था। इसके अलावा कई बार इनके दाम भी बढ़ाए गए। 28 फरवरी को दिल्ली में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 1740.50 रुपए में मिल रहा था। इसके बाद 5 बार इसके दाम बढ़ाए गए। इससे दिल्ली में इसकी कीमत 3113.50 रुपए हो गई। यानी तब से इसकी कीमत 1373 रुपए बढ़ गई है। क्या होता है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’? ‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर अब 70% किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। इसके चलते शुरुआत में होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों को होने वाली LPG आपूर्ति में कटौती की गई थी, ताकि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में परेशानी न हो। ईरान-अमेरिका और इजराइल जंग से गैस की कमी ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया। दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए। इस अभियान को अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया। इस युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया और सप्लाई प्रभावित हुई। यही रास्ता भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश का करीब 80-85% LPG यहीं से आता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा गैस बाहर से मंगाता है। इसी वजह से देश में LPG की कमी जैसी स्थिति बनी। हालांकि, सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा और साफ किया कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है।

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा।

Canada admits Khalistanis planted bomb on Air India Kanishka Flight 182

Canada admits Khalistanis planted bomb on Air India Kanishka Flight 182

ओटावा37 मिनट पहले कॉपी लिंक कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। कनिष्क विमान का मलबा इकठ्ठा करते आयरिश नेवल अथॉरिटी के जवान। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है। इस तस्वीर में आयरलैंड में एयर इंडिया बॉम्बिंग के बाद शवों को निकालते हुए रेस्क्यू वर्कर्स को देखा जा सकता है। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा। धमाके से करीब 2 हफ्ते पहले एअर इंडिया के कनिष्क विमान की तस्वीर अब हालात कैसे बदले हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है। इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं। ———————————– कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें… जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा 23 जून 1985 की सुबह एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर

अनारदाना और सलाद चटनी: गर्मियों में शरीर को बनाएगी ठंडी, झटपट तैयार करें अनारदाना, सलाद और सलाद की चटनी की ये लाजवाब रेसिपी

तस्वीर का विवरण

इस मिश्रण को बनाने के लिए आपको 2 से 4 समुद्री नमक अनारदाना, 3 से 4 समुद्री नमक के पत्ते, 1 बड़े पैमाने का खेडा, 2 हरी मिर्च, थोड़ा सा हरा धनियां, स्वादानुसार नमक और आधा मिला हुआ जीरा पाउडर मिलता है। छवि: एआई सबसे पहले अनारदाने को 15 मिनट के लिए भूख गुनगुने पानी में अंतिम मांग करें ताकि वह नग्न हो जाए। इसके साथ ही एक खिलौने को पानी से साफ करने के लिए इकट्ठा कर लें। छवि: एआई लेटस के छात्रों को अच्छे तरीके से धोकर साफ कर लें और उन्हें हाथों से लेकर कसरत में तोड़ लें। उसके छोटे-छोटे टुकड़े-टुकड़े कर लें। ध्यान रहे कि गैजेट के ज्यादा से ज्यादा बीज हों तो उन्हें हटा दें। छवि: एआई मिक्सी या सिलबट्टे में भी हुआ अनारदाना, लेटस के पत्ते, मसाले के टुकड़े, हरी मिर्च, हरा धनिया, जीरा पाउडर और नमक। इसमें पानी का इस्तेमाल बहुत कम होता है, क्योंकि पानी का इस्तेमाल अपने आप में काफी होता है। छवि: एआई इस मच्छर को अपने हाथों से दरदरा पीस लें। इस चिप्स का बहुत बड़ा इलेक्ट्रोनिक पेस्ट नहीं बनाया जाता है, क्योंकि छोटे दरदरा टेक्सचर में यह ज्यादा अच्छा लगता है और इसमें मजेदार फ्लेवर आता है। छवि: एआई रिफ्रेशिंग मच तैयार है। इसे आप रेस्तरां या रेस्तरां में दाल-चावल, परांठे या रेस्तरां के साथ बना सकते हैं। इसे ताज़ा खाना सबसे बेहतर होता है, हालाँकि आप इसे फ़र्ज़ी में 1 से 2 दिन के लिए स्टोर भी कर सकते हैं। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)अनारदाना चटनी रेसिपी(टी)सलाद के पत्ते की चटनी(टी)खीरे की चटनी रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक चटनी(टी)आसान हिंदी रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए ताज़ा चटनी(टी)अनारदाना चटनी कैसे बनाएं(टी)अनोखी चटनी रेसिपी

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लौकी ओट्स का चीला रेसिपी: लौकी ओट्स और लोकी का चीला; पहेली के लिए है परफेक्ट, ये है आसान रेसिपी

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लोकी ओट्स चीला सामग्री बनाने के लिए: 1 कप ओट्स, 1 कप कद्दू की हुई लौकी, 1/2 कप दही, 1 प्याज, 1 हरी मिर्च, 1 टुकड़ा अदरक, हरा धनिया, 1/2 छोटा जीरा, नमक स्वाद, आवश्यकता पानी, तेल छवि: फ्रीपिक चीला बनाने की विधि: सबसे पहले ओटीएस को प्लास्टर में स्टैलिन पीस लें और उनका आटा तैयार कर लें। अब एक बड़ी कटोरी में ओट्स का आटा, कद्दू की हुई लौकी और दही की डंडी अच्छी तरह मिला लें। छवि: इंस्टाग्राम इसके बाद इसमें प्याज, हरी मिर्च, अदरक, जीरा, हरा धनिया और नमक डाला गया। सभी बच्चों को अच्छी तरह से थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर बैटर तैयार करें। बैटर न सबसे ज्यादा पतला हो और न ही सबसे ज्यादा पतला हो। छवि: एआई अब तवा गर्म करें और उस पर प्रभाव सा तेल का कपड़ा। एक कलछी बैटर मैन्युफैक्चरिंग उसे गोल आकार में फैलाया। मध्यम किनारे पर दोनों तरफ से सोना और कुरकुरा होने तक सेंक लें। छवि: एआई जब चीला अच्छी तरह पक जाए, तो उसे प्लेट में निकाल लें। इसी तरह बाकी बैटर से भी तैयार कर लें। लौकी ओट्स चीला को हरी चटनी, दही या टमाटर की चटनी के साथ गर्मागर्म रेस्तरां। छवि: एआई यह सबसे प्रचुर मात्रा में होता है, जिससे पाचन बेहतर रहता है। लंबे समय तक पेट भरने का एहसास होता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। वज़न की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है। छवि: एआई ओट्स और लॉकी दोनों ही शरीर को पोषण प्रदान करते हैं। यह प्रभाव और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। अगर आप अपने दिन की शुरुआत और टेस्टी एडवेंचर से करना चाहते हैं, तो लोकी ओट्स चीला जरूर करें। छवि: मेटा एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)ओट्स-लौकी चीला रेसिपी(टी)ओट्स चिल्ला(टी)लौकी चिल्ला(टी)लौकी ओट्स चिल्ला(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी