Salman Khan New Home MCZMA Approval

3 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर सलमान खान और उनका परिवार मुंबई के बांद्रा इलाके में नया घर बनवाने जा रहा है। ऐसा दावा हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में किया गया है। जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सलमान का परिवार 52 साल तक गैलेक्सी अपार्टमेंट में रहने के बाद इसे छोड़ देगा। हालांकि, अभी तक इस बात की ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं हुई है। बता दें कि साल 2024 में अपार्टमेंट के बाहर फायरिंग हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जून को महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (MCZMA) ने बांद्रा के चिम्बई इलाके में छह मंजिला सी-फेसिंग रेजिडेंशियल बिल्डिंग बनाने को मंजूरी दी। ईद 2026 के मौके पर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के नीचे हजारों की भीड़ जुटी थी। जमीन सलमान की मां सलमा खान के नाम रिपोर्ट के अनुसार, यह नया प्लॉट गैलेक्सी अपार्टमेंट से कुछ सौ मीटर की दूरी पर है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नया प्लॉट सलमान खान की मां सलमा खान के नाम पर है। MCZMA की बैठक के रिकॉर्ड में बताया गया है कि यहां 1956 से पहले बना दो मंजिला मकान था। यह जमीन पहले मैरी क्लोटिल्डा बैपटिस्टा के नाम थी। बाद में कई बार मालिक बदले और 2011 में खान परिवार ने इसे खरीद लिया। पुरानी बिल्डिंग जर्जर होने के कारण उसे गिरा दिया गया था। अब इस प्लॉट पर ग्राउंड, स्टिल्ट और छह मंजिला रेजिडेंशियल बिल्डिंग बनाई जाएगी। यह कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन 2034 के रेगुलेशन 33(16) के तहत किया जाएगा। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, प्रोजेक्ट में 1.459 FSI का इस्तेमाल होगा। BMC ने 28 अक्टूबर, 2025 को IOD (परमिशन) जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का निर्माण सच डेवलपर्स करेंगे। कुल कंस्ट्रक्शन एरिया 1,014.11 स्क्वेयर मीटर होगा। म्युनिसिपल रोड से बिल्डिंग तक 6.01 मीटर चौड़ी एक्सेस रोड भी बनाई जाएगी। डॉक्यूमेंट्स में यह भी लिखा है कि कंस्ट्रक्शन के लिए कोई नया पेड़ नहीं काटा जाएगा और न ही किसी पेड़ को दूसरी जगह लगाया जाएगा। इसके बजाय, प्रोजेक्ट साइट और रिक्रिएशन एरिया के आसपास देसी पेड़ लगाए जाएंगे। सच डेवलपर्स मुंबई में स्थित एक रियल एस्टेट ग्रुप है, जो 1965 से लग्जरी और मॉडर्न रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज बना रहा है। खान परिवार 1974 से गैलेक्सी में रह रहा है सलमान का परिवार 1974 से गैलेक्सी अपार्टमेंट में रह रहा है। गैलेक्सी अपार्टमेंट की बात करें, तो यह बांद्रा के बैंडस्टैंड इलाके में स्थित 8 मंजिला बिल्डिंग है। सलमान यहां ग्राउंड फ्लोर के 1 BHK फ्लैट में रहते हैं। उनके माता-पिता पहली मंजिल पर रहते हैं, इसलिए सलमान हमेशा उनके करीब रहना पसंद करते हैं। ईद, दिवाली और सलमान के जन्मदिन पर हजारों फैंस गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर जुटते हैं और सलमान बालकनी से उनका अभिवादन करते हैं। वहीं, 2024 में दो बाइक सवार हमलावरों ने बिल्डिंग पर चार गोलियां चलाई थीं। इसके बाद उनके माता-पिता के फ्लैट के पास की खुली बालकनी को बुलेटप्रूफ ग्लास से कवर कर दिया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Salman Khan New Home MCZMA Approval

3 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर सलमान खान और उनका परिवार मुंबई के बांद्रा इलाके में नया घर बनवाने जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस बात की कोई ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं हुई है कि सलमान अपने पुराने घर गैलेक्सी अपार्टमेंट से बाहर जा रहे हैं। सलमान का परिवार अभी बांद्रा के गैलेक्सी अपार्टमेंट में रहता है। साल 2024 में अपार्टमेंट के बाहर फायरिंग हुई थी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जून को महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (MCZMA) ने बांद्रा के चिम्बई इलाके में छह मंजिला सी-फेसिंग रेजिडेंशियल बिल्डिंग बनाने को मंजूरी दी। जमीन सलमान की मां सलमा खान के नाम रिपोर्ट के अनुसार, यह नया प्लॉट गैलेक्सी अपार्टमेंट से कुछ सौ मीटर की दूरी पर है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नया प्लॉट सलमान खान की मां सलमा खान के नाम पर है। MCZMA की बैठक के रिकॉर्ड में बताया गया है कि यहां 1956 से पहले बना दो मंजिला मकान था। यह जमीन पहले मैरी क्लोटिल्डा बैपटिस्टा के नाम थी। बाद में कई बार मालिक बदले और 2011 में खान परिवार ने इसे खरीद लिया। पुरानी बिल्डिंग जर्जर होने के कारण उसे गिरा दिया गया था। अब इस प्लॉट पर ग्राउंड, स्टिल्ट और छह मंजिला रेजिडेंशियल बिल्डिंग बनाई जाएगी। यह कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन 2034 के रेगुलेशन 33(16) के तहत किया जाएगा। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, प्रोजेक्ट में 1.459 FSI का इस्तेमाल होगा। BMC ने 28 अक्टूबर, 2025 को IOD (परमिशन) जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का निर्माण सच डेवलपर्स करेंगे। कुल कंस्ट्रक्शन एरिया 1,014.11 स्क्वेयर मीटर होगा। म्युनिसिपल रोड से बिल्डिंग तक 6.01 मीटर चौड़ी एक्सेस रोड भी बनाई जाएगी। डॉक्यूमेंट्स में यह भी लिखा है कि कंस्ट्रक्शन के लिए कोई नया पेड़ नहीं काटा जाएगा और न ही किसी पेड़ को दूसरी जगह लगाया जाएगा। इसके बजाय, प्रोजेक्ट साइट और रिक्रिएशन एरिया के आसपास देसी पेड़ लगाए जाएंगे। ईद 2026 के मौके पर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के नीचे हजारों की भीड़ जुटी थी। खान परिवार 1974 से गैलेक्सी में रह रहा सलमान का परिवार 1974 से गैलेक्सी अपार्टमेंट में रह रहा है। गैलेक्सी अपार्टमेंट की बात करें, तो यह बांद्रा के बैंडस्टैंड इलाके में स्थित 8 मंजिला बिल्डिंग है। सलमान यहां ग्राउंड फ्लोर के 1 BHK फ्लैट में रहते हैं। उनके माता-पिता पहली मंजिल पर रहते हैं, इसलिए सलमान हमेशा उनके करीब रहना पसंद करते हैं। ईद, दिवाली और सलमान के जन्मदिन पर हजारों फैंस गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर जुटते हैं और सलमान बालकनी से उनका अभिवादन करते हैं। वहीं, 2024 में दो बाइक सवार हमलावरों ने बिल्डिंग पर चार गोलियां चलाई थीं। इसके बाद उनके माता-पिता के फ्लैट के पास की खुली बालकनी को बुलेटप्रूफ ग्लास से कवर कर दिया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘वो सुबह हम से ही आएगी’ पर बोले महेश भट्ट:रंगमंच आज भी जोड़ता है इंसान से इंसान को, अनु मलिक ने बताई चुनौती

मुंबई में जल्द मंचित होने जा रहे नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ को लेकर फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक ने दैनिक भास्कर से बात की। यह नाटक बदलाव, उम्मीद और इंसान की भीतर की ताकत की कहानी है। इसे महेश भट्ट प्रजेंट कर रहे हैं। नाटक दिनेश गौतम ने लिखा है, तारिक हमीद डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके गीत IPS अधिकारी कैसर खालिद ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक ने दिया है। मंच पर इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा अभिनय करते नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में महेश भट्ट ने कहा कि आज लोगों के पास मोबाइल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट के कई विकल्प हैं, लेकिन रंगमंच की ताकत अब भी अलग है। उन्होंने कहा, “रंगमंच में आप किसी कलाकार की सांस महसूस करते हैं। वहां जो अनुभव मिलता है, वह किसी स्क्रीन पर नहीं मिल सकता। हम दुनिया से जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन भीतर से कटते जा रहे हैं। ऐसे दौर में थिएटर इंसान को इंसान से जोड़ता है।” नाटक के मूल विचार पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि असली बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से आता है। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने अंदर की रोशनी नहीं जगाएंगे, तब तक उधार की रोशनी पर चलते रहेंगे। सबसे बुरा वक्त ही कई बार आपको अपनी असली ताकत से मिलाता है।” भट्ट ने अपनी जिंदगी के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि करियर और निजी जीवन के कठिन दौर ने उन्हें बदला और उसी से कई यादगार कहानियां निकलीं। उन्होंने कहा, “अगर इस नाटक को देखकर दर्शकों को लगे कि अगर कहानी का किरदार कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।” वहीं, नाटक के संगीत को लेकर अनु मलिक ने कहा कि वह शुरुआत से इस प्रोजेक्ट से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। अनु मलिक ने कहा, “इस नाटक का शीर्षक ही इतना असरदार था कि मैं उससे तुरंत जुड़ गया। इमरान जाहिद ने जब कहानी सुनाई और गीत भेजे तो मैंने उसी वक्त धुन बना ली।” उन्होंने थिएटर और फिल्मों के संगीत के फर्क पर कहा, “थिएटर के लिए संगीत बनाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि सब कुछ रियल टाइम में होता है। जो दर्शक उस पल महसूस करता है, वही उसके साथ घर तक जाता है।” महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते पर अनु मलिक ने कहा, “महेश भट्ट मेरे लिए सिर्फ निर्देशक नहीं हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका नाम सुनते ही मेरे दिमाग में धुन बनने लगती है। यही उनका जादू है।” नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ उम्मीद, आत्मविश्वास और भीतर की रोशनी की बात करता है। इसके जरिए टीम संदेश देना चाहती है कि बदलाव किसी और से नहीं, खुद से शुरू होता है।
‘वो सुबह हम से ही आएगी’ पर बोले महेश भट्ट:रंगमंच आज भी जोड़ता है इंसान से इंसान को, अनु मलिक ने बताई चुनौती

मुंबई में जल्द मंचित होने जा रहे नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ को लेकर फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक ने दैनिक भास्कर से बात की। यह नाटक बदलाव, उम्मीद और इंसान की भीतर की ताकत की कहानी है। इसे महेश भट्ट प्रजेंट कर रहे हैं। नाटक दिनेश गौतम ने लिखा है, तारिक हमीद डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके गीत IPS अधिकारी कैसर खालिद ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक ने दिया है। मंच पर इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा अभिनय करते नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में महेश भट्ट ने कहा कि आज लोगों के पास मोबाइल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट के कई विकल्प हैं, लेकिन रंगमंच की ताकत अब भी अलग है। उन्होंने कहा, “रंगमंच में आप किसी कलाकार की सांस महसूस करते हैं। वहां जो अनुभव मिलता है, वह किसी स्क्रीन पर नहीं मिल सकता। हम दुनिया से जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन भीतर से कटते जा रहे हैं। ऐसे दौर में थिएटर इंसान को इंसान से जोड़ता है।” नाटक के मूल विचार पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि असली बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से आता है। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने अंदर की रोशनी नहीं जगाएंगे, तब तक उधार की रोशनी पर चलते रहेंगे। सबसे बुरा वक्त ही कई बार आपको अपनी असली ताकत से मिलाता है।” भट्ट ने अपनी जिंदगी के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि करियर और निजी जीवन के कठिन दौर ने उन्हें बदला और उसी से कई यादगार कहानियां निकलीं। उन्होंने कहा, “अगर इस नाटक को देखकर दर्शकों को लगे कि अगर कहानी का किरदार कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।” वहीं, नाटक के संगीत को लेकर अनु मलिक ने कहा कि वह शुरुआत से इस प्रोजेक्ट से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। अनु मलिक ने कहा, “इस नाटक का शीर्षक ही इतना असरदार था कि मैं उससे तुरंत जुड़ गया। इमरान जाहिद ने जब कहानी सुनाई और गीत भेजे तो मैंने उसी वक्त धुन बना ली।” उन्होंने थिएटर और फिल्मों के संगीत के फर्क पर कहा, “थिएटर के लिए संगीत बनाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि सब कुछ रियल टाइम में होता है। जो दर्शक उस पल महसूस करता है, वही उसके साथ घर तक जाता है।” महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते पर अनु मलिक ने कहा, “महेश भट्ट मेरे लिए सिर्फ निर्देशक नहीं हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका नाम सुनते ही मेरे दिमाग में धुन बनने लगती है। यही उनका जादू है।” नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ उम्मीद, आत्मविश्वास और भीतर की रोशनी की बात करता है। इसके जरिए टीम संदेश देना चाहती है कि बदलाव किसी और से नहीं, खुद से शुरू होता है।
Graduates Get Chance, Age Limit 40 Years

Hindi News Career UPPSC PCS Recruitment 2024: Graduates Get Chance, Age Limit 40 Years 1 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपर सब ऑर्डिनेट सर्विसेस यानी पीसीएस परीक्षा 2024 का नोटिस जारी कर दिया है। कैंडिडेट्स यूपीपीएससी की वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र में संशोधन या सुधार 3 अगस्त 2026 तक किया जा सकेगा। फीस जमा करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई 2026 तय की गई है। प्रीलिम्स परीक्षा का आयोजन 6 दिसंबर 2026 को किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि आवेदन करते समय अपना OTR नंबर जरूर ले लें। इस बार आवेदन प्रक्रिया में सबसे जरूरी वन टाइम रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बनाया गया है। बिना OTR नंबर के कोई भी उम्मीदवार आवेदन नहीं कर सकेगा। OTR नंबर के लिए उम्मीदवारों को आवेदन से कम से कम 72 घंटे पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा ताकि सिस्टम में उनकी जानकारी अपडेट हो सके। क्या होता है OTR? वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उम्मीदवार अपनी बेसिक जानकारी एक बार आयोग के पोर्टल पर भरनी होती है। इसके बाद भविष्य में उम्मीदवार अगर कोई और फार्म भरता है तो उसमें बार-बार अपनी बेसिक डीटेल्स लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। OTR की इस प्रक्रिया से फॉर्म भरने की प्रक्रिया आसान होती है और गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से पद के अनुसार ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 40 साल दिव्यांग (PH) : अधिकतम 55 साल प्रिंसिपल (राजकीय इंटर कॉलेज) : 30 – 40 साल सिलेक्शन प्रोसेस : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम इंटरव्यू कुछ पदों के लिए फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट फीस : सामान्य, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी : 125 रुपए एससी, एसटी : 65 रुपए दिव्यांग : 25 रुपए भूतपूर्व सैनिक : 65 रुपए सैलरी : लेवल – 7 से लेवल – 10 के अनुसार ऐसे करें आवेदन : आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं। यहां ‘Apply’ लिंक पर क्लिक करके Authenticate with OTR Sever पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरें। सभी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। आगे की जरूरत के लिए इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ये खबर भी पढ़ें Re NEET UG 2026 की आंसर की जारी:ऑफिशियल वेबसाइट से करें डाउनलोड, 15 जुलाई से पहले आ सकता है रिजल्ट NTA ने री-NEET UG 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। 21 जून को हुई री-NEET में शामिल उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर आंसर की चेक कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
विपिन अनेजा बोले- रहमान से मांगा अपनी आवाज का गाना:हनी सिंह ने फोन कर कहा- आपकी गजल दिल छू गई

सिंगर विपिन अनेजा इन दिनों फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के गाने ‘तेरे पास मैं’ को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह गाना उनके लिए नया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि लंबे इंतजार और संगीत सफर का अहम पड़ाव है। उन्होंने ‘जाने तेरे शहर का’, ए.आर. रहमान के साथ अनुभव, हनी सिंह के साथ प्रयोग और बदलते संगीत पर बात की। उनका कहना है कि हर नया गाना उन्हें आगे बढ़ने का मौका देता है। सवाल: फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ का गाना ‘तेरे पास मैं’ आपके लिए कितना खास है? जवाब: यह गाना मेरे लिए बहुत खास है। ‘तेरे पास मैं’ और ‘जाने तेरे शहर का’ दोनों की भावनात्मक दुनिया एक जैसी है। दोनों न्यू एज गजल जैसे लगते हैं। लोगों ने पहले गाने की तरह इसे भी अपनाया है और यह लंबे समय तक साथ रहेगा। सवाल: लोग आज भी फिल्म ‘जज्बा’ के गाने ‘जाने तेरे शहर का’ को याद करते हैं, उस सफर को कैसे देखते हैं? जवाब: इस गाने ने मुझे पहचान दी। फिल्म में यह गाना इरफान खान और ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया है। शुरुआत में लगा था कि इसे ज्यादा प्रमोशन नहीं मिलेगा, लेकिन बाद में यह अपने दम पर लोगों तक पहुंचा। आज भी युवा इसे सुनते हैं और अपनी प्लेलिस्ट में रखते हैं। सवाल: ‘जाने तेरे शहर का’ गाने तक पहुंचने की कहानी क्या रही? जवाब: मुंबई में एक संगीत महफिल के दौरान मेरी मुलाकात आर्को से हुई। उन्होंने मुझे लाइव सुना और मेरी आवाज पसंद आई। वहीं से मुझे मौका मिला और बाद में यह गाना फिल्म का हिस्सा बना। सवाल: ‘मैं वापस आऊंगा’ और ए.आर. रहमान के साथ जुड़ने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: रहमान साहब के साथ मेरा जुड़ाव काफी पुराना है। मैंने उनसे कहा था कि मेरी आवाज की अपनी पहचान है और उसके हिसाब से कुछ बनाएं। बाद में इस प्रोजेक्ट में मैंने अलग-अलग वर्जन रिकॉर्ड किए। उनके साथ काम करना सपना पूरा होने जैसा है। सवाल: ए.आर. रहमान से पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: रहमान साहब से मेरी मुलाकात करीब 20 साल पहले कजाकिस्तान के वर्ल्ड पॉप म्यूजिक फेस्टिवल में हुई थी। मैं भारत को सिंगर के तौर पर रिप्रेजेंट कर रहा था और वह जज थे। उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस सुनी और बाद में इंटरनेशनल कॉन्सर्ट्स में भी मौका दिया। वहीं से जुड़ाव शुरू हुआ। ‘मैं वापस आऊंगा’ से पहले मैंने उनकी साउथ की कुछ फिल्मों में गाए हैं। सवाल: आपने रहमान से अपनी आवाज के लिए अलग तरह का संगीत बनाने की बात भी कही थी? जवाब: मैंने उनसे कहा था कि मेरी आवाज मिड और लो रेंज में ज्यादा सहज रहती है। मेरी आवाज की अपनी पहचान है। इसके बाद लंबी बातचीत हुई और मैंने उन्हें देर रात तक गजलें सुनाईं। यह मेरे लिए खास अनुभव था। सवाल: हनी सिंह के साथ जुड़ी कौन-सी बात सबसे ज्यादा यादगार रही? जवाब: हनी सिंह ने मेरा गाना सुनकर मुझे फोन किया और कहा कि उन्हें ‘जाने तेरे शहर का’ पसंद आया। वह मेरे साथ कुछ अलग करना चाहते थे। बाद में हमने गजल और रैप को मिलाकर प्रयोग किया। सवाल: हनी सिंह के साथ गजल और रैप का प्रयोग कैसे हुआ? जवाब: हमारी पहचान पुरानी है। हमने साथ काम किया और गजल-रैप का नया प्रयोग किया। संगीत में नए रास्ते तलाशते रहना जरूरी है। सवाल: ओटीटी आने के बाद संगीत में क्या बदलाव महसूस हुआ? जवाब: ओटीटी ने संगीत को ज्यादा आजादी दी है। अब सिर्फ पारंपरिक फिल्मी साउंड तक सीमित नहीं रहना पड़ता। नए विषय और अलग तरह के गानों को जगह मिल रही है। सवाल: क्या आज के दौर में मेलोडी पीछे छूट रही है? जवाब: मुझे ऐसा नहीं लगता। ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी धुन, अच्छे बोल और अच्छी आवाज लोगों के दिल तक पहुंचती है। मेलोडी कभी खत्म नहीं होती। सवाल: हजारों लाइव शोज के बाद कौन-सा मंच सबसे यादगार रहा? जवाब: रहमान साहब के साथ इंटरनेशनल स्टेज पर परफॉर्म करना यादगार रहा, लेकिन महाकाल में गाना सबसे भावुक अनुभव था। वहां भजन और स्तोत्र गाना अलग अनुभव था। सवाल: अपने पूरे सफर को आज किस तरह देखते हैं? जवाब: मैं अपने परिवार का पहला इंसान हूं जिसने प्रोफेशनल म्यूजिक को करियर बनाया। रास्ते में कई बार गिरा, सीखा और आगे बढ़ा। जब लोग कहते हैं कि मेरी सफलता उन्हें अपनी लगती है, तो लगता है कि मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इतने सालों बाद भी क्या आज सीखना जारी है? जवाब: बिल्कुल। मैं आज भी खुद को संगीत का छात्र मानता हूं। 27 साल से मंच पर हूं, लेकिन हर नया गाना और कंपोजर कुछ नया सिखाता है।
‘क्या बंगाली जानते हैं कि राजमा क्या है?’: महुआ मोइत्रा ने बंगाल मिड-डे मील विवाद पर बीजेपी पर निशाना साधा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 जून, 2026, 16:28 IST पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कोलकाता के स्कूलों में मध्याह्न भोजन से अंडे हटाने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद राजनीतिक विवाद पैदा हो गया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा. (पीटीआई/फ़ाइल) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के तहत स्कूलों में मध्याह्न भोजन से अंडे हटाने के फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और दावा किया कि अधिकांश बंगाली मांसाहारी हैं और “सोया पसंद नहीं करते”। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कोलकाता में स्कूल के मध्याह्न भोजन की तैयारी को इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) को सौंपने और अंडे की जगह राजमा जैसे शाकाहारी भोजन देने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद पैदा हो गया। टीएमसी ने सरकार पर बंगाल में शाकाहारी संस्कृति थोपने का आरोप लगाया है. नई सरकार के तहत राज्य का पहला बजट पेश करते हुए, बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने घोषणा की कि प्राथमिक विद्यालय के मध्याह्न भोजन की लागत 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये प्रति छात्र की जाएगी और इस्कॉन को केएमसी क्षेत्र में एक पायलट परियोजना के तहत पका हुआ भोजन की आपूर्ति करने का काम सौंपा जाएगा। ‘क्या बंगाली राजमा के बारे में जानते हैं?’ शाकाहारी मध्याह्न भोजन मेनू को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि ज्यादातर बच्चों को सोया पसंद नहीं है और उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर स्कूलों में शाकाहार को थोपने का आरोप लगाया। “अंडे एक श्रेणी ए प्रोटीन हैं, जिसका अर्थ है कि सभी अमीनो एसिड इसमें शामिल हैं। एकमात्र गैर-पशु प्रोटीन जो प्रथम श्रेणी का है वह सोया है। हमारे बच्चों को सोया पसंद नहीं है। जब हम इसे स्कूलों में खिलाते हैं, तो उन्हें सोया पसंद नहीं है। तो यहां आप अंडे का विकल्प चुन रहे हैं,” उसने कहा। #देखें | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: समान नागरिक संहिता पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का कहना है, “हमारा सवाल यह है कि इस कोड को लाने के पीछे आपकी मंशा क्या है? क्या यह वास्तव में सभी संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कल्याण के लिए, समानता के लिए लाया गया है? और हमें पूरा यकीन है… pic.twitter.com/VUVJuAlZds– एएनआई (@ANI) 26 जून, 2026 मोइत्रा ने कहा कि 98% बंगाली आबादी मांसाहारी है और अंडे की तुलना में सोया में पोषण की कमी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि विधायक राजमा चावल क्यों नहीं खा रहे हैं। “आप राजमा चावल क्यों नहीं खाते? और राजमा क्या है? क्या बंगाली जानते हैं कि राजमा क्या है? जब तक मैं दिल्ली नहीं गया तब तक मुझे नहीं पता था कि राजमा क्या होता है। हमारे स्कूल जाने वाले 40% बच्चे स्कूल जाते हैं क्योंकि (अंडे इसका हिस्सा हैं) दिन का एक पौष्टिक गर्म भोजन है।” बीजेपी बनाम टीएमसी मिड-डे मील विवाद ने टीएमसी और बीजेपी के बागी गुट के बीच खींचतान शुरू कर दी है। विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि बंगालियों की पीढ़ियां अपने नियमित आहार के हिस्से के रूप में पशु प्रोटीन का सेवन करते हुए बड़ी हुई हैं। हालाँकि, भाजपा और इस्कॉन ने इस कदम का बचाव किया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों को स्वच्छ और अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है। कोलकाता इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने भी तर्क दिया कि शाकाहारी भोजन अंडे की तुलना में अधिक प्रोटीन सामग्री प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया, “यह एक गलत धारणा है कि पोषण केवल अंडे पर निर्भर करता है। बच्चों को दालों, सोया उत्पादों, डेयरी उत्पादों और सब्जियों के माध्यम से आवश्यक प्रोटीन और पोषक तत्व मिल सकते हैं।” पीटीआई. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘क्या बंगाली जानते हैं कि राजमा क्या है?’: महुआ मोइत्रा ने बंगाल मिड-डे मील विवाद पर बीजेपी पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल मध्याह्न भोजन विवाद(टी)महुआ मोइत्रा(टी)इस्कॉन मध्याह्न भोजन(टी)स्कूल भोजन में अंडे(टी)शाकाहारी बनाम मांसाहारी(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)कोलकाता स्कूल पोषण(टी)मध्याह्न भोजन में राजमा
Ex-Google Employee Quits $4.25 Cr Job, Opens BBQ Restaurant in Texas

Hindi News Career Ex Google Employee Quits $4.25 Cr Job, Opens BBQ Restaurant In Texas 11 मिनट पहले कॉपी लिंक गूगल के पूर्व कर्मचारी सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी ने पिछले साल 4.2 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ कर अपना रेस्टोरेंट खोल लिया। अब अमेरिका के टेक्सास में उनका रेस्टोरेंट हलाल बार्बेक्यू (BBQ) के नाम से मशहूर हो गया। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर जमकर पसंद की जा रही है। अब्दुल काफी ने गूगल से पहले माइक्रोसॉफ्ट, यूट्यूब और क्रूज में भी 14 साल तक नौकरी की थी। उनकी उम्र 35 साल है। सलाहुद्दीन ने क्यों छोड़ी नौकरी सलाहुद्दीन ने बताया कि उनका टेक इंडस्ट्री से मन भर गया था। उन्हें महसूस हुआ कि यहां काम सिर्फ पैसा कमाने के लिए हो रहा है, न कि लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए। इसी वजह से उन्होंने गूगल की नौकरी छाड़ दी और एक नॉन-प्रॉफिट (NGO) संस्था से जुड़ गए। दोस्तों की तारीफ से आया रेस्टोरेंट का आइडिया नौकरी के साथ-साथ सलाहुद्दीन को खाना पकाने का बहुत शौक था। वह अक्सर दोस्तों के लिए डिनर पार्टियां और बार्बेक्यू होस्ट करते थे। दोस्तों को उनका बनाया खाना इतना पसंद आया कि उन्होंने कहा कि ऐसा स्वाद पहले कभी नहीं चखा। दोस्ती से मिली तारीफ के चलते उनके दिमाग में रेस्टोरेंट खोलने का आइडिया आया। उन्होंने सोचा कि क्यों न टेक्सास बार्बेक्यू में कुछ नया ट्राई किया जाए। इसके बाद दिसंबर 2024 में Kafi BBQ नाम से अपना रेस्टोरेंट खोला। शुरुआत इतनी अच्छी थी कि उन्होंने 3 दिन के लिए जो खाना बनाया था, वह पहले ही दिन खत्म हो गया और उन्हें उसी रात दोबारा खाना बनाना पड़ा। इतनी बड़ी कमाई के बाद भी सलाहुद्दीन ने रेस्टोरेंट से खुद के लिए एक भी रुपया सैलरी नहीं ली है। वह अपनी पुरानी बचत से ही अपना खर्च चला रहे हैं। रेस्टोरेंट खोलने में करीब 8.4 करोड़ रुपये का खर्च हुआ था। इसे वह अभी तक पूरी तरह वसूल नहीं पाए हैं। सलाहुद्दीन के अनुसार उसके पेरेंट्स इराकी थे। उन्होंने बचपन में नॉन हलाल रेस्टोरेंट जो कांसास सिटी बार्बेक्यू में जो खाना खाया था, वह उनकी इंस्पिरेशन बना। इतनी अच्छी कमाई के बाद भी काफी ने इस रेस्टोरेंट में से अपनी सैलरी अभी तक नहीं निकाली है। वे कहते हैं कि उनके रेस्टोरेंट को चलाने का खर्च बहुत ज्यादा है। वे अपनी बचत से गुजारा करते हुए सारा पैसा वापस बिजनेस में ही लगा रहे हैं। रेस्टोरेंट की मार्केटिंग और अन्य कामों में भी उनका बहुत पैसा खर्च हो जाता है। मेटा की नौकरी छोड़ी और बेच रहे नूडल्स मेटा के एक कर्मचारी एल्विन ने अपनी नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी क्योंकि उसे ये बोरिंग लगी। नौकरी छोड़ने के बाद अब वह नूडल्स बेचने का काम कर रहा है। अपनी इस कहानी को एल्विन ने सोशल मीडिया पर शेयर किया जो तेजी से वायरल हो रही है। लोकल फूड मार्केट में लगाया स्टॉल नौकरी छोड़ने के बाद एल्विन ने लोकल फूड मार्केट में हॉक्केन मी का स्टॉल लगाना शुरू कर दिया। एल्विन टैन से जब पूछा गया कि उन्होंने इतनी बड़ी कंपनी क्यों छोड़ी तो उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर बोरिंग है। बताया अपनी कंपनी का हाल जब लुइसा ते ने कहा कि मेटा में काम करना लोगों का सपना होता है तो एल्विन ने जवाब दिया कि बड़ी कंपनियों में लगातार छंटनी हो रही है। मेरी खुद ही टीम कई बार रीस्ट्रक्चर हुई। ऑफिस के अंदर जाने से पहले यह सबका सपना होता है लेकिन एक बार जब आप वहां पहुंच जाते हैं तो सोचने लगते हैं कि जिंदगी में करने के लिए और क्या-क्या चीजें बची हैं। नौकरी छोड़ने का कोई दुख नहीं एल्विन ने अपने इंटरव्यू में बताया कि मेटा की जॉब और नूडल्स के स्टॉल की कमाई में बहुत अंतर है। मेटा में नौकरी करते हुए उन्हें नूडल्स के स्टॉल्स से दो से तीन गुना ज्यादा सैलरी मिलती थी। लेकिन इसके बाद भी उन्हें मेटा की नौकरी छोड़ने का दुख नहीं था। अब वह जो काम कर रहे हैं, उससे उन्हें ज्यादा खुशी मिलती है। ————- ये खबर भी पढ़ें… महाराष्ट्र में TET पेपर लीक, एग्जाम कल होना था:सरकार ने परीक्षा रद्द की; पेपर ठाणे से बरामद, पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का क्वेश्चन पेपर करीब 24 घंटे पहले लीक हो गया। एग्जाम रविवार को होना था। महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल (MSEC) ने इसके बाद परीक्षा स्थगित कर दी है। नई तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
एक घड़ी, एक दावा, एक पंक्ति: कुमारस्वामी की एचएमटी घड़ी ने कर्नाटक में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 जून, 2026, 15:32 IST कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री रहते हुए करीब 62 से 64 लग्जरी घड़ियां पहनीं। ईश्वर ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दर्जनों महंगी लक्जरी घड़ियाँ पहनी थीं और अब एचएमटी घड़ी पहनकर भ्रामक छवि पेश करने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के गर्व से अपनी एचएमटी घड़ी प्रदर्शित करने के एक हालिया वीडियो ने कर्नाटक में एक राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है, जिसमें कांग्रेस विधायक प्रदीप ईश्वर ने जद (एस) नेता के सरल जीवन शैली पेश करने के प्रयास पर सवाल उठाया है। पत्रकारों से बात करते हुए, ईश्वर ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दर्जनों महंगी लक्जरी घड़ियाँ पहनी थीं और अब एचएमटी घड़ी पहनकर भ्रामक छवि पेश करने का आरोप लगाया। ईश्वर ने कहा, “इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये है। आपने ये 32 एकड़ जमीन कैसे खरीदी? यह मेरा पहला सवाल है। बेंगलुरु में 32 एकड़ बेहद कीमती जमीन खरीदने के लिए फंडिंग का स्रोत क्या है? इसकी कीमत 8 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के बीच है और कुल कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये है।” कांग्रेस विधायक ने आगे आरोप लगाया कि कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री रहते हुए लगभग 62 से 64 लक्जरी घड़ियाँ पहनीं। उन्होंने कहा, “घड़ियों की कीमतें 10 लाख रुपये से शुरू होती हैं और 75 लाख रुपये तक जाती हैं। क्या कुमारस्वामी में इसका जवाब देने की हिम्मत है? कर्नाटक के एक विधायक के रूप में, सभी भाजपा नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री से मेरा मूल सवाल है: कृपया इन सवालों का जवाब दें।” ईश्वर ने दावा किया कि उन्होंने कथित तौर पर मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कुमारस्वामी द्वारा पहनी गई विभिन्न घड़ियों की तस्वीरें संकलित की थीं, उन्होंने तर्क दिया कि केंद्रीय मंत्री की एचएमटी घड़ी की वर्तमान पसंद उनकी पिछली जीवनशैली को नहीं दर्शाती है। उन्होंने कुमारस्वामी की भूमि हिस्सेदारी पर पहले के राजनीतिक विवाद को भी पुनर्जीवित किया। अपने ट्रस्ट की फंडिंग के बारे में जद (एस) नेता द्वारा उठाए गए पिछले सवालों का जिक्र करते हुए, ईश्वर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा कि कुमारस्वामी ने 32 एकड़ जमीन कैसे हासिल की, तो पूर्व मुख्यमंत्री ने जवाब देने से इनकार कर दिया और इसके बजाय दस्तावेजों को वापस फेंक दिया। सिद्धारमैया की हब्लोट वॉच रो पर दोबारा गौर किया गया इस विवाद ने 2016 में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े ऐसे ही राजनीतिक तूफान की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय विपक्ष में रही भाजपा और जद (एस) ने सिद्धारमैया पर पाखंड का आरोप लगाया था, जब उन्हें कथित तौर पर लगभग 70 लाख रुपये की हीरे से जड़ी हब्लोट घड़ी पहने देखा गया था। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि एक स्वयंभू समाजवादी के पास इतनी महंगी लक्जरी घड़ी कैसे हो सकती है। इस मुद्दे पर कर्नाटक विधानसभा में तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद सिद्धारमैया ने घड़ी को सुरक्षित रखने के लिए राज्य के खजाने को सौंप दी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया एक घड़ी, एक दावा, एक पंक्ति: कुमारस्वामी की एचएमटी घड़ी ने कर्नाटक में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीतिक विवाद(टी)एचडी कुमारस्वामी एचएमटी घड़ी(टी)प्रदीप ईश्वर के आरोप(टी)लक्जरी घड़ियां घोटाला(टी)कर्नाटक भूमि जोत(टी)सिद्धारमैया हबलोत वॉच पंक्ति(टी)बीजेपी जेडी(एस कांग्रेस झड़प(टी)कर्नाटक विधानसभा बहस
Himachal News: Archita Beakta India U-18 volleyball team

इंडियन U-18 वॉलीबॉल टीम के लिए चुनी गई अर्चिता वेक्टा। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के ठियोग क्षेत्र की बेटी अर्चिता बेक्टा ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है। गवर्नमेंट मॉडल स्कूल सैंज की छात्रा अर्चिता बेक्टा का चयन अंडर-18 इंडियन . अब वह चीन के शांगलुओ शहर में 1 जुलाई से 10 जुलाई तक आयोजित होने वाली ISF वर्ल्ड स्कूल वॉलीबॉल चैंपियनशिप-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अर्चिता का चयन भारतीय टीम में ब्लॉकर के रूप में हुआ है। वर्तमान में वह नागपुर में भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले रही हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए कड़ी तैयारी कर रही हैं। 3 साल पहले शुरू हुआ सफर, अब पहुंचा अंतरराष्ट्रीय मंच तक अर्चिता की सफलता की कहानी संघर्ष और समर्पण से भरी है। तीन साल पहले उनकी लंबाई और खेल प्रतिभा को देखते हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स टेक्निकल ऑफिसर एवं कॉमर्स के लेक्चरर सुरेश कंवर, डीपीई सुरेश नेगी और पीईटी बृजेश वर्मा ने उन्हें वॉलीबॉल खेलने के लिए प्रेरित किया, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह बेटी एक दिन देश की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरेगी। 6 फीट, 1 इंच हाइट कोचों के मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत से अर्चिता ने खेल में लगातार सुधार किया। उनकी 6 फीट 1 इंच लंबाई और शानदार प्रदर्शन ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। खास बात यह है कि अर्चिता का चयन बिना किसी विशेष हॉस्टल ट्रेनिंग के हुआ है। नेशनल गेम्स में चमकी प्रतिभा, मिला इंडिया टीम का टिकट अर्चिता ने हाल ही में ओपन नेशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। यहां उनके खेल, तकनीक और लंबाई को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टीम के लिए चुना। अब वह चीन में होने वाली प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। अर्चिता ठियोग के सैंज क्षेत्र के साथ लगते शिरगुली गांव की रहने वाली हैं। उनके माता-पिता खेतीबाड़ी करते हैं। साधारण परिवार से निकलकर अर्चिता ने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर क्षेत्र की बेटियों के लिए नई प्रेरणा पेश की है। खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल अर्चिता सिर्फ खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन करती रही हैं। स्कूल के प्रिंसिपल देवेंद्र शर्मा ने बताया कि जिला स्तरीय, राज्य स्तरीय और दो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के बावजूद अर्चिता ने जमा दो कक्षा में 500 में से 466 अंक (93.20 प्रतिशत) हासिल किए हैं। प्रिंसिपल ने कहा कि अर्चिता की उपलब्धि पूरे विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह बेटी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है।









