अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान पर एयरस्ट्राइक की:ट्रम्प बोले- अगले हफ्ते बिजलीघर और पुल उड़ाएंगे, समझौता नहीं किया तो कुछ नहीं बचेगा

अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हम मंगलवार रात भी हमला करेंगे, उसके अगले दिन भी करेंगे। अगले हफ्ते ईरान के बिजलीघर और पुल भी निशाने पर होंगे। अगर समझौता नहीं किया, तो वहां कुछ नहीं बचेगा।” ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर जमीनी सैन्य अभियान भी चलाया जा सकता है, हालांकि इसके लिए सहयोगी देशों की मदद ली जा सकती है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स IRGC का व्यापारिक जहाजों पर हमला: ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इसमें 1 भारतीय शख्स की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हुए। जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। भारत ने ईरानी राजदूत को तलब किया: भारत ने होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) को तलब कर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। समंदर में भारत से जुड़े 11 जहाज फंसे: विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। ट्रम्प ने होर्मुज में 20% टैक्स का फैसला वापस लिया: ट्रम्प ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने का अपना फैसला वापस ले लिया। उन्होंने मिडिल ईस्ट के नेताओं के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सबसे कम: होर्मुज स्ट्रेट मंगलवार को सिर्फ 4 जहाज गुजरे। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद यह सबसे कम शिपिंग ट्रैफिक है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
हरियाणा में अश्लील कंटेंट पर विवाद:इन्फ्लुएंसर्स ने कहा- डांसरों पर पैसे उड़ाने वाले बुजुर्गों को रोको, सपना चौधरी पर सॉफ्ट पोर्न देने का आरोप

जाट आरक्षण आंदोलन के दंगों से सुर्खियों में आए और फिलहाल अमेरिका में रह रहे भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा की ओर से सोशल मीडिया पर ‘अश्लील, अभद्र और डबल मीनिंग’ कंटेंट के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम अब हरियाणा में बड़ी बहस का विषय बन गई है। हुड्डा का दावा है कि उन्होंने ऐसे कंटेंट बनाने वाले 35 बड़े इन्फ्लुएंसर्स की लिस्ट तैयार कर उन्हें अलग-अलग माध्यमों से चेतावनी दी है। इसके बाद कई इन्फ्लुएंसर्स ने अपना रुख बदलने का ऐलान किया, जबकि कई ने इस अभियान का समर्थन करते हुए इसे समाज सुधार की पहल बताया। एक इन्फ्लुएंसर ने हरियाणवी डांसर सपना चौधरी पर विवादित टिप्पणियां करते हुए कहा कि उन्होंने हरियाणा को ‘सॉफ्ट पोर्न’ दिया है। वहीं, कुछ ने डांस कार्यक्रमों में मंच के सामने जाकर पैसे उड़ाने वाले बुजुर्गों की मानसिकता पर भी सवाल उठाए। हालांकि, कुछ लोगों ने धर्मेंद्र हुड्डा का समर्थन किया तो कुछ ने उनसे रेप और पेपर लीक जैसे मामलों पर भी कार्रवाई की मांग की। अब जानिए सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स ने क्या कहा….. बाबा पेले बोले- डबल मीनिंग कंटेंट नहीं बनाएंगे धर्मेंद्र हुड्डा की चेतावनी के बाद इन्फ्लुएंसर आकाश छांगिया उर्फ बाबा पेले ने वीडियो जारी कर कहा कि अब वह डबल मीनिंग कंटेंट नहीं बनाएंगे। समाज से गंदे गाने और अश्लील कंटेंट खत्म होना चाहिए। भविष्य में वह किसी महिला कलाकार के साथ ऐसा वीडियो नहीं बनाएंगे, जिससे समाज पर गलत असर पड़े। बाबा पेले ने अपने स्कूल का जिक्र करते हुए कहा कि यहां 100 से ज्यादा बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। अगर कोई समाज सेवा करना चाहता है तो स्कूल का सहयोग करे। उन्होंने हरियाणवी फिल्म टॉक्सिक के ट्रेलर को भी आपत्तिजनक बताते हुए इसे हरियाणा में बैन करने की मांग की। नीतू तहलान ने महिला इन्फ्लुएंसर्स पर उठाए सवाल इन्फ्लुएंसर नीतू तहलान ने धर्मेंद्र हुड्डा की मुहिम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विदेश में बैठकर गंदगी हटाने की शुरुआत करना सराहनीय है और इसका असर भी दिख रहा है। हालांकि उन्होंने कुछ महिला इन्फ्लुएंसर्स पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे सोशल मीडिया पर शराब पीने के वीडियो बनाकर गलत संदेश दे रही हैं। उनका कहना था कि ऐसे कंटेंट का बच्चों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कलकल खाप प्रधान की चेतावनी पर विवाद कलकल खाप के प्रधान राजपाल कलकल ने धर्मेंद्र हुड्डा के अभियान का समर्थन किया, लेकिन अपने वीडियो और थंबनेल में विवादित भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “मैं सालों से हाथ जोड़कर बहू-बेटियों को समझा रहा था, लेकिन कुछ महिलाएं मुझे ही फोन पर अंजाम भुगतने की धमकी देती थीं। अब जो औरतें ऐसे कपड़े पहनती हैं, वे सुधर जाएं। जुबान पर लगाम दें और अंग प्रदर्शन बंद करें, वरना अब जवान लड़के आ गए हैं, वे जुबान भी बंद कर देंगे और तोड़ देंगे।” इन्फ्लुएंसर आजाद ने सपना चौधरी और बुजुर्गों को घेरा इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर आजाद ने इस पूरे मामले में समाज के बुजुर्गों (काका-ताऊ) और हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी पर तीखा निशाना साधा। आजाद ने कहा, “स्टेज डांसरों से पहले उन बुजुर्गों की बात करो, जो इन कार्यक्रमों में जाते हैं। इन बुजुर्गों के दिमाग में हवस भरी है। आजाद ने आरोप लगाया, “मैं सपना चौधरी को टारगेट कर रहा हूं। उसने हरियाणा को कभी कोई अच्छी चीज नहीं दी। हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या और लिंगानुपात में 5-10% की कमी जैसे मुद्दों पर किसी ने कभी आवाज नहीं उठाई। सपना सिर्फ अपने शरीर के अंग मटकाती है। जो लोग कहते हैं कि सपना की वजह से हरियाणा जाना जाता है, वे गलत हैं। सपना ने हरियाणा को सिर्फ ‘सॉफ्ट पोर्न’ दिया है। हरियाणा की असली पहचान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, नीरज चोपड़ा और कल्पना चावला जैसे दिग्गजों से है।” ड्राइवर छोरी’ की बोली- गलत करने वालों का भी हो इलाज जींद की रहने वाली नीशू देशवाल उर्फ ड्राइवर छोरी ने धर्मेंद्र हुड्डा की इस मुहिम को क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा, “मैं उस मां को सलाम करती हूं, जिसने धर्मेंद्र जैसे भाई को जन्म दिया। उसने पांच दिन में सट्टा बंद करवा दिया। अब इस गंदगी को भी साफ किया जा रहा है।” उन्होंने धर्मेंद्र से अपील करते हुए कहा कि जो लोग छोटी बच्चियों और बेटियों के साथ गलत काम करते हैं, उनका भी इसी तरह इलाज किया जाए, ताकि अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो। बिट्टू पंडित का दावा- वीडियो हटाने की मिली धमकी इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में बिट्टू पंडित ने दावा किया कि उन्होंने पहले एक वीडियो शेयर कर कहा था कि धर्मेंद्र हुड्डा ने काम तो शुरू किया, लेकिन सही तरीके से नहीं किया। इसके बाद रात में उनके पास फोन आया और वीडियो हटाने की धमकी दी गई। वीडियो में बिट्टू पंडित ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि धमकियों से उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। उन्होंने धर्मेंद्र हुड्डा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वास्तव में समाज के लिए काम करना है तो हरियाणा में हो रहे रेप के मामलों को रोकें। उन्होंने भिवानी की मनीषा से जुड़े मामले का भी जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई और अब लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसे मुद्दे क्यों उठाए जा रहे हैं। यदि सही काम होगा तो वे पूरा साथ देंगे, लेकिन मनीषा को भी न्याय मिलना चाहिए। सस्पेंड हुई टीचर ने भी किया समर्थन कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद सस्पेंड हुई रोहतक निवासी सुलेखा दलाल ने भी धर्मेंद्र हुड्डा का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र हुड्डा ने बहुत अच्छी मुहिम शुरू की है। साथ ही उन लोगों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनकी बात मानते हुए इस तरह का कंटेंट बनाने से परहेज किया है। उन्होंने एक बार फिर नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बहुत से लोग टांग खींचने के लिए आएंगे, लेकिन पीछे नहीं हटना चाहिए। अब अगली बारी पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई की होनी चाहिए। रेप करने वालों को भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए। दोषियों को सख्त सजा दे दी जाए तो पूरा देश सुधर जाएगा। गीता ढांडा बोली- डांसरों पर ₹500 लुटाते हैं ये बुड्ढे सोशल मीडिया एक्टिविस्ट गीता ढांडा ने पुरुषों
पिता की मौत का दर्द कैमरे पर उतरा:युवराज पाराशर ने बताया कैसे निजी दर्द फिल्म का सबसे भावुक दृश्य बना

रिश्तों, माता-पिता के सम्मान और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर आधारित फिल्म ‘गुड़हल’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म के राइटर, डायरेक्टर प्रोड्यूसर और एक्टर युवराज पाराशर, एक्ट्रेस मोना अंबेगांवकर और पूजा सिंह ने दैनिक भास्कर से फिल्म, अपने किरदारों और इंडस्ट्री के बदलते दौर पर बात की। युवराज ने अपने दिवंगत पिता से जुड़ा भावुक किस्सा साझा करते हुए बताया कि उसी निजी दर्द ने फिल्म के सबसे इमोशनल सीन को जन्म दिया। मोना ने कलाकारों के लिए आलोचना की अहमियत बताई, जबकि पूजा ने फिल्म से जुड़ने का अनुभव साझा किया। सवाल: इस फिल्म की कहानी में क्या खास लगा कि आपको लगा, इसे कहने का यही सही समय है? जवाब/युवराज पाराशर: मेरी शुरुआत एक शॉर्ट फिल्म से हुई थी, जिसमें ऐसी महिला की कहानी थी जिसे मां न बन पाने पर ‘बांझ’ कहा जाता है। तभी मैंने तय किया था कि मैं ऐसी फिल्में बनाऊंगा जो समाज को सोचने पर मजबूर करें। ‘गुड़हल’ लिखने में करीब दो साल लगे। इस पर काफी रिसर्च की, क्योंकि यह माता-पिता और रिश्तों पर आधारित फिल्म है। मेरा मानना है कि आज हम कई बार अपने माता-पिता को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हमारी पहचान उन्हीं की वजह से है। इसी सोच से ‘गुड़हल’ की शुरुआत हुई। सवाल: इस फिल्म में आप राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर भी हैं। इन चारों जिम्मेदारियों में सबसे ज्यादा संतुष्टि किस भूमिका ने दी? जवाब/युवराज पाराशर: सभी जिम्मेदारियां मुश्किल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सुकून डायरेक्शन में मिला। जो सीन मैंने लिखे थे, उन्हें कलाकारों की मदद से स्क्रीन पर उसी तरह जीवंत होते देखना सबसे खास अनुभव था। सवाल: मोना, पहली बार ‘गुड़हल’ की कहानी सुनकर किस बात ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/मोना अंबेगांवकर: मैं शुरुआत से इस फिल्म से जुड़ी हूं। पहले यह वृद्धाश्रम की कहानी थी, फिर समझ आया कि यह सिर्फ एक बुजुर्ग महिला नहीं, बल्कि हर उम्र की महिलाओं की कहानी है। मुझे किरदार की उम्र से कभी फर्क नहीं पड़ा। अच्छा रोल हो तो मैं 70-75 साल की महिला का किरदार भी खुशी से निभाऊंगी। आज भी ऐसे लेखक-निर्देशक हैं जो मुझे मुख्य भूमिका में सोचकर स्क्रिप्ट लिखते हैं। यह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। सवाल: ‘स्नेहा’ के किरदार तक आपका सफर कैसे पहुंचा? ऑडिशन से सिलेक्शन तक का अनुभव कैसा रहा? जवाब/पूजा सिंह: मैं योग कर रही थी, तभी फिल्म के लिए कॉल आया। पहले मुझे लगा कि यह सामान्य ऑडिशन कॉल है, इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ते ही कहानी ने मुझे भीतर तक छू लिया और मैं तुरंत युवराज सर से मिलने पहुंच गई। सर ऐसी लड़की की तलाश में थे, जिसके चेहरे पर मासूमियत हो और जो निगेटिव न लगे। उन्होंने मुझमें ‘स्नेहा’ को देखा और मुझे यह किरदार मिल गया। इतने अनुभवी कलाकारों के साथ काम करना मेरे लिए सीखने का शानदार मौका और सपने के सच होने जैसा अनुभव रहा। सवाल: फिल्म का कौन-सा सीन आपके लिए सबसे ज्यादा भावुक और चुनौतीपूर्ण था? जवाब/युवराज पाराशर: एक भावुक सीन शूट करते समय मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसे कैसे फिल्माऊं। तभी मुझे अपने पिता की याद आई। 10 साल पहले मेरे पिता का निधन हुआ था। मैंने उसी दर्द को फिर से महसूस किया और मोना मैम को घर का माहौल व अपनी भावनाएं विस्तार से बताईं। उन्होंने उस दर्द को पूरी तरह अपने अंदर उतार लिया। शॉट खत्म होते ही पूरा सेट खामोश था। मेरी बहन रोते हुए मेरे गले लग गई थी। उस पल हमें लगा कि हमने उस सीन को सचमुच जी लिया। सवाल: मोना, अपने किरदार को निभाने के लिए आपने खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से कैसे तैयार किया? जवाब/मोना अंबेगांवकर: मेरा किरदार ऐसी महिला का है जिसकी पूरी दुनिया उसका पति था। पति के जाने के बाद वह बिल्कुल टूट जाती है। निजी जिंदगी में मैं ऐसी नहीं हूं, इसलिए इस किरदार को समझना आसान नहीं था। लेकिन मैं चाहती थी कि आखिर में यह महिला सिर्फ बेबस न दिखे, बल्कि अपनी ताकत भी दिखाए। यही बात मुझे इस किरदार में सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: पूजा, जब आपके परिवार ने फिल्म देखी तो उनका रिएक्शन कैसा था? जवाब/पूजा सिंह: मेरी मां ने पहली बार फिल्म देखी तो रोते हुए मुझे वीडियो कॉल किया। मैंने तुरंत युवराज सर को भी फोन पर जोड़ दिया। मां लगातार रो रही थीं। उनका कहना था कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए, क्योंकि इनमें हमारे आसपास की असली जिंदगी दिखाई देती है। उनके आंसू हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान थे। सवाल: आज सोशल मीडिया के दौर में क्या फॉलोअर्स एक्टिंग टैलेंट पर भारी पड़ रहे हैं? जवाब/मोना अंबेगांवकर: देश में बहुत अच्छे कलाकार घर बैठे हैं। एक्टर को एक्टिंग करने दीजिए और इन्फ्लुएंसर को इन्फ्लुएंसिंग। दोनों की अपनी जगह है। सिर्फ फॉलोअर्स देखकर कास्टिंग नहीं होनी चाहिए। युवराज पाराशर: एक्टर बनने में सालों की मेहनत लगती है। सिर्फ सोशल मीडिया फॉलोअर्स के आधार पर फैसले होंगे तो कई अच्छे कलाकारों के साथ अन्याय होगा।
पिता की मौत का दर्द कैमरे पर उतरा:युवराज पाराशर ने बताया कैसे निजी दर्द फिल्म का सबसे भावुक दृश्य बना

रिश्तों, माता-पिता के सम्मान और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर आधारित फिल्म ‘गुड़हल’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म के राइटर, डायरेक्टर प्रोड्यूसर और एक्टर युवराज पाराशर, एक्ट्रेस मोना अंबेगांवकर और पूजा सिंह ने दैनिक भास्कर से फिल्म, अपने किरदारों और इंडस्ट्री के बदलते दौर पर बात की। युवराज ने अपने दिवंगत पिता से जुड़ा भावुक किस्सा साझा करते हुए बताया कि उसी निजी दर्द ने फिल्म के सबसे इमोशनल सीन को जन्म दिया। मोना ने कलाकारों के लिए आलोचना की अहमियत बताई, जबकि पूजा ने फिल्म से जुड़ने का अनुभव साझा किया। सवाल: इस फिल्म की कहानी में क्या खास लगा कि आपको लगा, इसे कहने का यही सही समय है? जवाब/युवराज पाराशर: मेरी शुरुआत एक शॉर्ट फिल्म से हुई थी, जिसमें ऐसी महिला की कहानी थी जिसे मां न बन पाने पर ‘बांझ’ कहा जाता है। तभी मैंने तय किया था कि मैं ऐसी फिल्में बनाऊंगा जो समाज को सोचने पर मजबूर करें। ‘गुड़हल’ लिखने में करीब दो साल लगे। इस पर काफी रिसर्च की, क्योंकि यह माता-पिता और रिश्तों पर आधारित फिल्म है। मेरा मानना है कि आज हम कई बार अपने माता-पिता को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हमारी पहचान उन्हीं की वजह से है। इसी सोच से ‘गुड़हल’ की शुरुआत हुई। सवाल: इस फिल्म में आप राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर भी हैं। इन चारों जिम्मेदारियों में सबसे ज्यादा संतुष्टि किस भूमिका ने दी? जवाब/युवराज पाराशर: सभी जिम्मेदारियां मुश्किल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सुकून डायरेक्शन में मिला। जो सीन मैंने लिखे थे, उन्हें कलाकारों की मदद से स्क्रीन पर उसी तरह जीवंत होते देखना सबसे खास अनुभव था। सवाल: मोना, पहली बार ‘गुड़हल’ की कहानी सुनकर किस बात ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/मोना अंबेगांवकर: मैं शुरुआत से इस फिल्म से जुड़ी हूं। पहले यह वृद्धाश्रम की कहानी थी, फिर समझ आया कि यह सिर्फ एक बुजुर्ग महिला नहीं, बल्कि हर उम्र की महिलाओं की कहानी है। मुझे किरदार की उम्र से कभी फर्क नहीं पड़ा। अच्छा रोल हो तो मैं 70-75 साल की महिला का किरदार भी खुशी से निभाऊंगी। आज भी ऐसे लेखक-निर्देशक हैं जो मुझे मुख्य भूमिका में सोचकर स्क्रिप्ट लिखते हैं। यह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। सवाल: ‘स्नेहा’ के किरदार तक आपका सफर कैसे पहुंचा? ऑडिशन से सिलेक्शन तक का अनुभव कैसा रहा? जवाब/पूजा सिंह: मैं योग कर रही थी, तभी फिल्म के लिए कॉल आया। पहले मुझे लगा कि यह सामान्य ऑडिशन कॉल है, इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ते ही कहानी ने मुझे भीतर तक छू लिया और मैं तुरंत युवराज सर से मिलने पहुंच गई। सर ऐसी लड़की की तलाश में थे, जिसके चेहरे पर मासूमियत हो और जो निगेटिव न लगे। उन्होंने मुझमें ‘स्नेहा’ को देखा और मुझे यह किरदार मिल गया। इतने अनुभवी कलाकारों के साथ काम करना मेरे लिए सीखने का शानदार मौका और सपने के सच होने जैसा अनुभव रहा। सवाल: फिल्म का कौन-सा सीन आपके लिए सबसे ज्यादा भावुक और चुनौतीपूर्ण था? जवाब/युवराज पाराशर: एक भावुक सीन शूट करते समय मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसे कैसे फिल्माऊं। तभी मुझे अपने पिता की याद आई। 10 साल पहले मेरे पिता का निधन हुआ था। मैंने उसी दर्द को फिर से महसूस किया और मोना मैम को घर का माहौल व अपनी भावनाएं विस्तार से बताईं। उन्होंने उस दर्द को पूरी तरह अपने अंदर उतार लिया। शॉट खत्म होते ही पूरा सेट खामोश था। मेरी बहन रोते हुए मेरे गले लग गई थी। उस पल हमें लगा कि हमने उस सीन को सचमुच जी लिया। सवाल: मोना, अपने किरदार को निभाने के लिए आपने खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से कैसे तैयार किया? जवाब/मोना अंबेगांवकर: मेरा किरदार ऐसी महिला का है जिसकी पूरी दुनिया उसका पति था। पति के जाने के बाद वह बिल्कुल टूट जाती है। निजी जिंदगी में मैं ऐसी नहीं हूं, इसलिए इस किरदार को समझना आसान नहीं था। लेकिन मैं चाहती थी कि आखिर में यह महिला सिर्फ बेबस न दिखे, बल्कि अपनी ताकत भी दिखाए। यही बात मुझे इस किरदार में सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: पूजा, जब आपके परिवार ने फिल्म देखी तो उनका रिएक्शन कैसा था? जवाब/पूजा सिंह: मेरी मां ने पहली बार फिल्म देखी तो रोते हुए मुझे वीडियो कॉल किया। मैंने तुरंत युवराज सर को भी फोन पर जोड़ दिया। मां लगातार रो रही थीं। उनका कहना था कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए, क्योंकि इनमें हमारे आसपास की असली जिंदगी दिखाई देती है। उनके आंसू हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान थे। सवाल: आज सोशल मीडिया के दौर में क्या फॉलोअर्स एक्टिंग टैलेंट पर भारी पड़ रहे हैं? जवाब/मोना अंबेगांवकर: देश में बहुत अच्छे कलाकार घर बैठे हैं। एक्टर को एक्टिंग करने दीजिए और इन्फ्लुएंसर को इन्फ्लुएंसिंग। दोनों की अपनी जगह है। सिर्फ फॉलोअर्स देखकर कास्टिंग नहीं होनी चाहिए। युवराज पाराशर: एक्टर बनने में सालों की मेहनत लगती है। सिर्फ सोशल मीडिया फॉलोअर्स के आधार पर फैसले होंगे तो कई अच्छे कलाकारों के साथ अन्याय होगा।
Padmakumar, Siddharth Menon & Vidhatri Bandi on Therapy & Relationships

4 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक निर्देशक पद्मकुमार, सिद्धार्थ मेनन और विधात्री बंदी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कमिटमेंट, थेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य पर बात की। ‘रिश्ते निभाने से ज्यादा जरूरी उन्हें समझना है’- यही सोच फिल्म ‘मैक्स, मिन एंड म्याउजाकी’ की कहानी के केंद्र में है। यह फिल्म प्यार और बिछड़ने के साथ मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन, रिश्तों में संवाद, कमिटमेंट और खुद से जुड़ने जैसे विषयों पर बात करती है। निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति, अभिनेता सिद्धार्थ मेनन और अभिनेत्री विधात्री बंदी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में फिल्म, रिश्तों की चुनौतियों, थेरेपी और रिजेक्शन के बीच मानसिक संतुलन पर बात की। डायरेक्टर पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति कहते हैं कि हिट फिल्म नहीं, मतलब वाली कहानी बनाना उनका मकसद था। सवाल: आपकी फिल्म रिश्तों के भावनात्मक उतार-चढ़ाव और अकेलेपन को संवेदनशील तरीके से दिखाती है। इस कहानी तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? जवाब (पद्मकुमार): इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि मुझे कहानी कहने की पूरी आजादी मिली। निर्माता ने कोई दबाव नहीं बनाया। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसी कहानी मैं कहना चाहता हूं, उसे उसी रूप में पर्दे पर लाऊं। शायद इसी वजह से फिल्म अपनी मूल भावना के साथ दर्शकों तक पहुंच सकी। सवाल: आज जब ज्यादातर फिल्में ट्रेंड को ध्यान में रखकर बनती हैं, तब आपने अलग रास्ता क्यों चुना? जवाब (पद्मकुमार): विज्ञापन जगत में लंबे समय तक काम करने के बाद मुझे एहसास हुआ कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं होनी चाहिए। मैं ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं, जो देखने के बाद लोगों के भीतर कुछ छोड़ जाएं। मेरे लिए फिल्म का असर उसकी कमाई से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक्टर सिद्धार्थ मेनन कहते हैं कि फिल्म की कहानी ने उन्हें बेहतर इंसान बनने का एहसास कराया। सवाल: इस कहानी ने आपको कलाकार के तौर पर सबसे ज्यादा किस बात से प्रभावित किया? जवाब (सिद्धार्थ): जब मैंने पूरी स्क्रिप्ट सुनी तो लगा कि यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक अनुभव है। कहानी सुनते-सुनते ही मुझे महसूस हुआ कि यह इंसान को भीतर से बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है। अच्छी कहानियां हमेशा इंसान के साथ लंबे समय तक रहती हैं। सवाल: आपको इस फिल्म से जुड़ने का फैसला किस बात ने कराया? जवाब (विधात्री): किरदार का छोटा-सा परिचय पढ़ते ही मैंने तय कर लिया था कि मौका मिला तो यह फिल्म जरूर करूंगी। बाद में पूरी कहानी सुनते हुए मैं भावुक हो गई। मुझे लगा कि यह फिल्म लोगों को अपने रिश्तों और खुद के बारे में सोचने पर मजबूर करेगी। सवाल: आपके मुताबिक रिश्ते टूटने की सबसे बड़ी वजह क्या होती है? जवाब (सिद्धार्थ): मेरे हिसाब से रिश्ता खत्म होना गलत नहीं है, बल्कि मायने यह रखता है कि आप उससे बाहर कैसे निकलते हैं। रिश्ते में दोनों लोगों की ग्रोथ उतनी ही जरूरी है जितनी साथ रहना। जरूरत पड़े तो बातचीत करें, थेरेपी लें और अलग होना पड़े तो सम्मान के साथ अलग हों। सवाल: आज ‘सिचुएशनशिप’ और ‘बेंचिंग’ जैसे शब्द आम हो गए हैं। क्या नई पीढ़ी कमिटमेंट से बचती है? जवाब (विधात्री): मुझे ऐसा नहीं लगता। आज के युवा पहले खुद को समझना चाहते हैं। जब उन्हें अपने बारे में स्पष्टता मिलती है, तब वे रिश्तों में ज्यादा ईमानदारी से आते हैं। अगर रिश्ता सही लगे तो कमिटमेंट करने में कोई डर नहीं होना चाहिए। सवाल: क्या आप भी मानते हैं कि आज के युवा रिश्तों से भाग रहे हैं? जवाब (सिद्धार्थ): बिल्कुल नहीं। मैंने कम उम्र में शादी करने वाले और लंबे रिश्तों के बाद अलग होने वाले भी देखे हैं। किसी एक अनुभव के आधार पर पूरी पीढ़ी को जज नहीं किया जा सकता। जरूरी यह है कि रिश्ता खत्म होने के बाद भी सम्मान बना रहे। फिल्म ‘मैक्स, मिन और म्याउजाकी’ 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। सवाल: विदेशों में फिल्म दिखाने के दौरान कौन-सी प्रतिक्रिया आपके लिए सबसे यादगार रही? जवाब (पद्मकुमार): कई लोगों ने कहा कि यह उन चुनिंदा भारतीय फिल्मों में है, जिसमें पुरुष किरदार अपनी भावनाओं को दबाते नहीं हैं। वे संवेदनशील हैं और अपनी कमजोरी स्वीकार करने से नहीं डरते। यह प्रतिक्रिया मेरे लिए बेहद खास रही। सवाल: क्या इस सोच के पीछे आपका कोई निजी अनुभव भी रहा? जवाब (पद्मकुमार): कुछ समय पहले मैंने अपने बेहद करीबी दोस्त को खो दिया। बाहर से वह हमेशा खुश नजर आते थे, लेकिन भीतर कितना दर्द था, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। तभी महसूस हुआ कि पुरुषों को भी अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करनी चाहिए। सवाल: आज के समय में संवेदनशील कहानियां कितनी जरूरी हैं? जवाब (पद्मकुमार): दुनिया में नफरत और हिंसा बढ़ रही है। ऐसे दौर में फिल्मों की जिम्मेदारी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कहानियां लोगों को इंसानियत, करुणा और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील होने की याद दिला सकती हैं। सवाल: मुश्किल दौर से निकलने में अपनों का साथ कितना मायने रखता है? जवाब (पद्मकुमार): मजबूत सपोर्ट सिस्टम बहुत जरूरी है। ऐसे लोग होने चाहिए, जिनसे आप खुलकर बात कर सकें। साथ ही जिंदगी को सकारात्मक नजरिए से स्वीकार करना भी जरूरी है। अच्छे रिश्ते ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। अभिनेत्री विधात्री बंदी कहती हैं कि रिजेक्शन रोज मिलता है, इसलिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी है। सवाल: लगातार मिलने वाले रिजेक्शन के बीच मानसिक संतुलन कैसे बनाए रखती हैं? जवाब (विधात्री): इस इंडस्ट्री में रिजेक्शन रोज का हिस्सा है। ऐसे में परिवार और दोस्तों का साथ बहुत जरूरी हो जाता है। समय के साथ मैंने सीखा है कि हर किसी को अपनी जिंदगी में जगह देना जरूरी नहीं होता। अपनी मानसिक शांति की रक्षा करना भी उतना ही अहम है। सवाल: क्या आपने कभी प्रोफेशनल मदद यानी थेरेपी ली है? जवाब (सिद्धार्थ): हां, मैंने थेरेपी ली है और इसका फायदा भी महसूस किया है। मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही जरूरी है, जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की। सवाल: दर्शकों के लिए आपका अंतिम संदेश? जवाब (पद्मकुमार): हमारी कोशिश सिर्फ एक फिल्म बनाने की नहीं थी, बल्कि ऐसी कहानी कहने की थी जो लोगों के दिल तक पहुंचे और उन्हें थोड़ा बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दे। _______________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. धुरंधर जैसी फिल्मों पर राजनीतिक दबाव दिखता है:नफीसा बोलीं- युवा बदलते सिनेमा की
भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू:व्हिस्की, कारें और कपड़े सस्ते मिलेंगे; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। क्योंकि, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी इस दिन से भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके UK समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए थे। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा ‘ऐतिहासिक पल’ इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले दोनों देशों के बिजनेस और कंपनियों के पास तैयारी करने के लिए अब सिर्फ एक महीने से भी कम बचा है। भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हुए हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जो हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के एक नए युग की शुरुआत करेगा।” सवाल जवाब में समझिएं इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा… सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: सवाल 4: यह एग्रीमेंट कब से लागू होगा? जवाब: यह समझौता 24 जुलाई 2025 को साइन हुआ है, लेकिन इसे लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की केंद्रीय कैबिनेट और UK की संसद से मंजूरी जरूरी है। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। सवाल 5: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। सवाल 6: ट्रेड एग्रीमेंट्स कितने टाइप के होते हैं? जवाब: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को उसके नेचर के हिसाब से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें PTA (प्रेफरेंशियल), RTA (रीजनल) और BTA (बाइलेटरल) शामिल हैं। WTO इस तरह के सभी इकोनॉमिक इंगेजमेंट्स को RTA नाम देता है। सवाल 7: भारत ने किन देशों के साथ इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं? जवाब: भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA ब्लॉक्स के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ डील हासिल करने के बाद भारत ने अपना FTA फोकस ईस्ट (ASEAN, जापान, कोरिया) से वेस्टर्न पार्टनर्स की ओर शिफ्ट कर दिया है। भारत अब एक्सपोर्ट्स का विस्तार करने और वेस्ट की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए EU और US के साथ FTA को प्राथमिकता दे रहा है।
Padmakumar, Siddharth Menon & Vidhatri Bandi on Therapy & Relationships

39 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक निर्देशक पद्मकुमार, सिद्धार्थ मेनन और विधात्री बंदी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कमिटमेंट, थेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य पर बात की। ‘रिश्ते निभाने से ज्यादा जरूरी उन्हें समझना है’- यही सोच फिल्म ‘मैक्स, मिन एंड म्याउजाकी’ की कहानी के केंद्र में है। यह फिल्म प्यार और बिछड़ने के साथ मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन, रिश्तों में संवाद, कमिटमेंट और खुद से जुड़ने जैसे विषयों पर बात करती है। निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति, अभिनेता सिद्धार्थ मेनन और अभिनेत्री विधात्री बंदी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में फिल्म, रिश्तों की चुनौतियों, थेरेपी और रिजेक्शन के बीच मानसिक संतुलन पर बात की। डायरेक्टर पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति कहते हैं कि हिट फिल्म नहीं, मतलब वाली कहानी बनाना उनका मकसद था। सवाल: आपकी फिल्म रिश्तों के भावनात्मक उतार-चढ़ाव और अकेलेपन को संवेदनशील तरीके से दिखाती है। इस कहानी तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? जवाब (पद्मकुमार): इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि मुझे कहानी कहने की पूरी आजादी मिली। निर्माता ने कोई दबाव नहीं बनाया। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसी कहानी मैं कहना चाहता हूं, उसे उसी रूप में पर्दे पर लाऊं। शायद इसी वजह से फिल्म अपनी मूल भावना के साथ दर्शकों तक पहुंच सकी। सवाल: आज जब ज्यादातर फिल्में ट्रेंड को ध्यान में रखकर बनती हैं, तब आपने अलग रास्ता क्यों चुना? जवाब (पद्मकुमार): विज्ञापन जगत में लंबे समय तक काम करने के बाद मुझे एहसास हुआ कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं होनी चाहिए। मैं ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं, जो देखने के बाद लोगों के भीतर कुछ छोड़ जाएं। मेरे लिए फिल्म का असर उसकी कमाई से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक्टर सिद्धार्थ मेनन कहते हैं कि फिल्म की कहानी ने उन्हें बेहतर इंसान बनने का एहसास कराया। सवाल: इस कहानी ने आपको कलाकार के तौर पर सबसे ज्यादा किस बात से प्रभावित किया? जवाब (सिद्धार्थ): जब मैंने पूरी स्क्रिप्ट सुनी तो लगा कि यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक अनुभव है। कहानी सुनते-सुनते ही मुझे महसूस हुआ कि यह इंसान को भीतर से बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है। अच्छी कहानियां हमेशा इंसान के साथ लंबे समय तक रहती हैं। सवाल: आपको इस फिल्म से जुड़ने का फैसला किस बात ने कराया? जवाब (विधात्री): किरदार का छोटा-सा परिचय पढ़ते ही मैंने तय कर लिया था कि मौका मिला तो यह फिल्म जरूर करूंगी। बाद में पूरी कहानी सुनते हुए मैं भावुक हो गई। मुझे लगा कि यह फिल्म लोगों को अपने रिश्तों और खुद के बारे में सोचने पर मजबूर करेगी। सवाल: आपके मुताबिक रिश्ते टूटने की सबसे बड़ी वजह क्या होती है? जवाब (सिद्धार्थ): मेरे हिसाब से रिश्ता खत्म होना गलत नहीं है, बल्कि मायने यह रखता है कि आप उससे बाहर कैसे निकलते हैं। रिश्ते में दोनों लोगों की ग्रोथ उतनी ही जरूरी है जितनी साथ रहना। जरूरत पड़े तो बातचीत करें, थेरेपी लें और अलग होना पड़े तो सम्मान के साथ अलग हों। सवाल: आज ‘सिचुएशनशिप’ और ‘बेंचिंग’ जैसे शब्द आम हो गए हैं। क्या नई पीढ़ी कमिटमेंट से बचती है? जवाब (विधात्री): मुझे ऐसा नहीं लगता। आज के युवा पहले खुद को समझना चाहते हैं। जब उन्हें अपने बारे में स्पष्टता मिलती है, तब वे रिश्तों में ज्यादा ईमानदारी से आते हैं। अगर रिश्ता सही लगे तो कमिटमेंट करने में कोई डर नहीं होना चाहिए। सवाल: क्या आप भी मानते हैं कि आज के युवा रिश्तों से भाग रहे हैं? जवाब (सिद्धार्थ): बिल्कुल नहीं। मैंने कम उम्र में शादी करने वाले और लंबे रिश्तों के बाद अलग होने वाले भी देखे हैं। किसी एक अनुभव के आधार पर पूरी पीढ़ी को जज नहीं किया जा सकता। जरूरी यह है कि रिश्ता खत्म होने के बाद भी सम्मान बना रहे। फिल्म ‘मैक्स, मिन और म्याउजाकी’ 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। सवाल: विदेशों में फिल्म दिखाने के दौरान कौन-सी प्रतिक्रिया आपके लिए सबसे यादगार रही? जवाब (पद्मकुमार): कई लोगों ने कहा कि यह उन चुनिंदा भारतीय फिल्मों में है, जिसमें पुरुष किरदार अपनी भावनाओं को दबाते नहीं हैं। वे संवेदनशील हैं और अपनी कमजोरी स्वीकार करने से नहीं डरते। यह प्रतिक्रिया मेरे लिए बेहद खास रही। सवाल: क्या इस सोच के पीछे आपका कोई निजी अनुभव भी रहा? जवाब (पद्मकुमार): कुछ समय पहले मैंने अपने बेहद करीबी दोस्त को खो दिया। बाहर से वह हमेशा खुश नजर आते थे, लेकिन भीतर कितना दर्द था, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। तभी महसूस हुआ कि पुरुषों को भी अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करनी चाहिए। सवाल: आज के समय में संवेदनशील कहानियां कितनी जरूरी हैं? जवाब (पद्मकुमार): दुनिया में नफरत और हिंसा बढ़ रही है। ऐसे दौर में फिल्मों की जिम्मेदारी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कहानियां लोगों को इंसानियत, करुणा और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील होने की याद दिला सकती हैं। सवाल: मुश्किल दौर से निकलने में अपनों का साथ कितना मायने रखता है? जवाब (पद्मकुमार): मजबूत सपोर्ट सिस्टम बहुत जरूरी है। ऐसे लोग होने चाहिए, जिनसे आप खुलकर बात कर सकें। साथ ही जिंदगी को सकारात्मक नजरिए से स्वीकार करना भी जरूरी है। अच्छे रिश्ते ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। अभिनेत्री विधात्री बंदी कहती हैं कि रिजेक्शन रोज मिलता है, इसलिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी है। सवाल: लगातार मिलने वाले रिजेक्शन के बीच मानसिक संतुलन कैसे बनाए रखती हैं? जवाब (विधात्री): इस इंडस्ट्री में रिजेक्शन रोज का हिस्सा है। ऐसे में परिवार और दोस्तों का साथ बहुत जरूरी हो जाता है। समय के साथ मैंने सीखा है कि हर किसी को अपनी जिंदगी में जगह देना जरूरी नहीं होता। अपनी मानसिक शांति की रक्षा करना भी उतना ही अहम है। सवाल: क्या आपने कभी प्रोफेशनल मदद यानी थेरेपी ली है? जवाब (सिद्धार्थ): हां, मैंने थेरेपी ली है और इसका फायदा भी महसूस किया है। मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही जरूरी है, जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की। सवाल: दर्शकों के लिए आपका अंतिम संदेश? जवाब (पद्मकुमार): हमारी कोशिश सिर्फ एक फिल्म बनाने की नहीं थी, बल्कि ऐसी कहानी कहने की थी जो लोगों के दिल तक पहुंचे और उन्हें थोड़ा बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दे। _______________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. धुरंधर जैसी फिल्मों पर राजनीतिक दबाव दिखता है:नफीसा बोलीं- युवा बदलते सिनेमा की
भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू:व्हिस्की, कारें और कपड़े सस्ते मिलेंगे; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। क्योंकि, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी इस दिन से भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके UK समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए थे। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा ‘ऐतिहासिक पल’ इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले दोनों देशों के बिजनेस और कंपनियों के पास तैयारी करने के लिए अब सिर्फ एक महीने से भी कम बचा है। भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हुए हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जो हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के एक नए युग की शुरुआत करेगा।” सवाल जवाब में समझिएं इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा… सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: सवाल 4: यह एग्रीमेंट कब से लागू होगा? जवाब: यह समझौता 24 जुलाई 2025 को साइन हुआ है, लेकिन इसे लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की केंद्रीय कैबिनेट और UK की संसद से मंजूरी जरूरी है। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। सवाल 5: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। सवाल 6: ट्रेड एग्रीमेंट्स कितने टाइप के होते हैं? जवाब: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को उसके नेचर के हिसाब से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें PTA (प्रेफरेंशियल), RTA (रीजनल) और BTA (बाइलेटरल) शामिल हैं। WTO इस तरह के सभी इकोनॉमिक इंगेजमेंट्स को RTA नाम देता है। सवाल 7: भारत ने किन देशों के साथ इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं? जवाब: भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA ब्लॉक्स के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ डील हासिल करने के बाद भारत ने अपना FTA फोकस ईस्ट (ASEAN, जापान, कोरिया) से वेस्टर्न पार्टनर्स की ओर शिफ्ट कर दिया है। भारत अब एक्सपोर्ट्स का विस्तार करने और वेस्ट की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए EU और US के साथ FTA को प्राथमिकता दे रहा है।
Kiku Sharda Statement | Kapil Sharma Show Scripted Comedy Salman Khan

18 मिनट पहले कॉपी लिंक कॉमेडियन कीकू शारदा ने कपिल शर्मा शो को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। प्रखर के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि शो का 70 प्रतिशत हिस्सा स्क्रिप्टेड होता है, जबकि 30 प्रतिशत कॉमेडी ऑन-द-स्पॉट (इम्प्रोवाइजेशन) की जाती है। कीकू के मुताबिक, मेहमान कलाकारों को पहले से जोक्स या पंचलाइंस नहीं बताई जातीं ताकि उनके असली रिएक्शन कैमरे में कैद हो सकें। उन्होंने शो के दौरान जोक फ्लॉप होने पर कपिल शर्मा के सिचुएशन हैंडल करने के तरीके और अभिनेता सलमान खान के अनप्रिडिक्टेबल मिजाज पर भी खुलकर बात की। कीकू शारदा कपिल शर्मा शो में बच्चा यादव समेत कई किरदार निभाते हैं। मेहमानों को पहले नहीं पता होते जोक्स कीकू शारदा ने इंटरव्यू में बताया कि वे जानबूझकर सेलिब्रिटी मेहमानों को पहले से जोक्स, पंचलाइंस या किरदारों के बारे में नहीं बताते। टीम चाहती है कि मेहमान उन किरदारों को पहली बार स्टेज पर ही देखें, जिससे उनके सबसे सच्चे और स्वाभाविक रिएक्शन मिल सकें। अब शो में आने वाले सभी स्टार्स भी इसी फ्लो के साथ आगे बढ़ते हैं और ऑन-द-स्पॉट कॉमेडी का आनंद लेते हैं। 70% स्क्रिप्ट और 30% ऑन-द-स्पॉट कॉमेडी क्रिएटिव प्रोसेस को समझाते हुए कीकू ने कहा कि शो में एक तय स्क्रिप्ट होती है और टीम उसका पालन भी करती है। लेकिन कई बार सेलिब्रिटी बातचीत को बिल्कुल नई दिशा में ले जाते हैं, जिससे स्क्रिप्ट पर टिके रहना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय पर ऑन-द-स्पॉट बदलाव करने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि शो लगभग 70-30 के रेशियो पर चलता है, जहां 70% स्क्रिप्ट होती है और 30% पूरी तरह से स्पॉन्टेनियस होता है। सलमान खान के रिएक्शन को समझना मुश्किल सलमान खान के साथ परफॉर्म करने के अपने अनुभव को याद करते हुए कीकू ने कहा कि उनके रिएक्शन को प्रेडिक्ट करना बहुत मुश्किल है। कई बार टीम किसी लाइन को बहुत मजेदार सोचकर प्लान करती है, लेकिन वे उस पर मुश्किल से रिएक्ट करते हैं। वहीं बीच में जब कोई अचानक कुछ अनपेक्षित कह देता है, तो वे अपनी हंसी नहीं रोक पाते। सलमान जब हंसना शुरू करते हैं, तो उनकी आंखों से आंसू तक निकल आते हैं। जोक फ्लॉप होने पर कपिल संभालते हैं कमान इंटरव्यू में कीकू ने यह भी बताया कि जब स्टेज पर कोई जोक फेल हो जाता है, तो कपिल शर्मा स्थिति को बखूबी संभाल लेते हैं। कपिल को तुरंत समझ आ जाता है कि कौन सा हिस्सा काम नहीं कर रहा है। ऐसे में कपिल बिना किसी स्क्रिप्ट के बीच में आते हैं और कहते हैं कि ‘मैंने पहले ही कहा था कि यह काम नहीं करेगा’। वे इस तरह से बात को घुमाते हैं कि सिचुएशन अजीब नहीं लगती और शो आगे बढ़ जाता है। दोनों पिछले 13 साल से साथ काम कर रहे हैं, इसलिए वे एक-दूसरे के दिमाग को अच्छी तरह समझते हैं। 2016 में की थी कॉमेडी शो की शुरुआत कपिल शर्मा ने अपने शो की शुरुआत 2016 में की थी। 23 अप्रैल 2016 को शो का पहला सीजन आया था। शो की शुरुआत में होस्ट कपिल शर्मा और उनकी टीम में कीकू शारदा, सुनील ग्रोवर, सुमोना चक्रवर्ती, चंदन प्रभाकर और अली असगर शामिल थे। अब इस नए सीजन में सृष्टि रोडे, गौरव दूबे, श्रीकांत मस्की और सिद्धार्थ सागर जैसे कॉमेडियन नजर आएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Ukraine Europe Ballistic Missile Partnership & Egypt Ancient Tomb Found

Hindi News Career Ukraine Europe Ballistic Missile Partnership & Egypt Ancient Tomb Found 20 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. भारत और ब्रिटेन के बीच CETA आज से लागू 15 जुलाई को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) लागू होगा। आज से CETA लागू होने के बाद भारतीय निर्यातक 99% वस्तुएं जीरो टैरिफ के साथ ब्रिटेन के बाजार में पहुंच सकेंगी। इस जीरो टैरिफ का फायदा भारतीय एक्सपोर्ट जैसे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग पर खत्म होगा। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवाओं और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। CETA लागू होने से दोनों देशों के बीच कई वस्तुओं पर सीमा शुल्क (टैरिफ) कम हो जाएगा। इसके साथ ही सर्विस सेक्टर में IT, फाइनेंशियल सर्विस, एजुकेशन, हेल्थ में सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। साथ ही 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इस समझौते के तहत भारत में ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पादों पर लगने वाली ड्यूटी में भी बड़ी कटौती होगी। CETA से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हो जाएगी। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भारत और ब्रिटेन ने पहली बार बात 2022 में शुरू की थी और 3 साल में 14 राउंड की बातचीत की गई है। 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश ट्रेड मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके UK समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए थे। इस समझौते के तहत ट्रेड से 2030 तक व्यापार को दोगुना करके सौ अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। स्पोर्ट्स (SPORTS) 2. टेबल टेनिस जोड़ी मानव ठक्कर और मानुष शाह वर्ल्ड रैंकिंग- 2 14 जुलाई को इंडियन मेंस डबल्स टेबल टेनिस जोड़ी मानव ठक्कर और मानुष शाह ITTF मेंस डबल्स वर्ल्ड रैंकिंग में दुनिया के दूसरे नंबर के प्लेयर बने। ये किसी भी भारतीय मेंस जोड़ी की अब तक की सर्वसबसे अच्छी वर्ल्ड रैंकिंग है। मानव ठक्कर और मानुष शाह की वर्तमान रैंकिंग 3,390 रेटिंग नंबर हैं। इस रैंकिंग में पहले नंबर पर चीन के लिन शिदोंग और हुआंग यूझेंग हैं, जिनकी रैंकिंग 5,160 अंक है। एक हफ्ते पहले मानव ठक्कर और मानुष शाह ITTF रैंकिंग में तीसरे नंबर पर थे। इस जोड़ी को WTT कैलेंडर में लगातार शानदार प्रदर्शन का फायदा मिला है। 2026 सिंगापुर स्मैश के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद उन्हें 900 रैंकिंग अंक मिले थे। मानव और मानुष ने 2025 चाइना स्मैश और 2025 यूरो स्मैश दोनों के क्वार्टर फाइनल में भी पहुंचे थे। ITTF रैंकिंग इंटरनेशनल टेबल टेनिस महासंघ जारी करता है। निधन (DEATH) 3. कर्नाटक के पूर्व मंत्री रामचंद्र गौड़ा का निधन 14 जुलाई को कर्नाटक मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता रामचंद्र गौड़ा का निधन हो गया। वे 88 साल के थे। रामचंद्र को ‘भाजपा के भीष्म’ भी कहा जाता था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनसंघ से अपने करियर की शुरुआत की थी। रामचंद्र 1980 के दशक में कर्नाटक में BJP को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और कई सालों तक कर्नाटक BJP के महासचिव रहे। रामचंद्र कर्नाटक सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। साल 2008 से 2010 तक दौरान मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर भी रहे। 2010 से 2012 तक रामचंद्र कर्नाटक राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे। रामचंद्र ने 2017 में राजनीति से संन्यास लिया था। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 4. मिस्त्र में 3000 साल पुराना मकबरा मिला 13 जुलाई को मिस्त्र में पुरातत्वविदों ने प्राचीन मकबरा खोजा है। ये मकबरा 3 हजार साल पुराना है । ये मकबरा फराओ युग यानी न्यू किंगडम काल के लगभग 1550 ईसा पूर्व से 1069 ईसा पूर्व का है। मिस्र की सुप्रीम काउंसिल ऑफ एंटीक्विटीज (SCA) के महासचिव हिशाम एल के मुताबिक, मकबरे की दीवारों पर मिले शिलालेखों में मालिक का नाम ‘पासेर’ लिखा हुआ है। दीवारों पर बनी कलाकृतियों और चित्रों के आधार पर न्यू किंगडम काल में राजा के किसी अधिकारी का माना जा रहा है। इसमें एक खुला आंगन, चट्टानों को काटकर बनाया गया उल्टे ‘टी’ आकार का प्रार्थना कक्ष और कई अंडरग्राउंड कमरे मिले हैं। इसके नीचे दफनाने के लिए विशेष कक्ष भी बनाए गए हैं, जो हजारों साल बाद भी काफी हद तक सुरक्षित पाए गए हैं। खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को मिट्टी की ईंटों से बना एक मंच भी मिला, जिसके बारे में माना जा रहा है कि इसका उपयोग अंतिम संस्कार से जुड़े अनुष्ठानों में किया जाता था। इसके साथ ही प्रवेश द्वार तक जाने वाली सीढ़ियां भी अच्छी स्थिति में मिली हैं। पुरातत्वविद अभी इस मकबरे की विस्तृत जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही पुरातत्वविद ये भी रिसर्च कर रहे हैं कि यहां दफन व्यक्ति की सामाजिक भूमिका क्या थी और उस समय के मिस्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं कैसी थीं। मिस्र सरकार को उम्मीद है कि इस नई खोज से देश की पुरातात्विक विरासत के प्रति वैश्विक रुचि बढ़ेगी और पर्यटन क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह उस काल के बड़े अधिकारियों के निजी महलों की पारंपरिक शैली से मेल खाता है। 5. यूक्रेन और यूरोप के 9 देशों ने रक्षा गठबंधन किया 13 जुलाई को यूक्रेन और यूरोप के 9 देशों ने रूस के बैलिस्टिक मिसाइल खतरे से निपटने के लिए नया रक्षा गठबंधन बनाया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की समेत सभी देशों के अधिकारी शामिल हुए। इस नए गठबंधन का मकसद पूरे यूरोप के लिए साझा बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार करना है। ये फैसला पेरिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं की बैठक में लिया गया। इस बैठक में यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, नीदरलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, स्पेन और स्वीडन शामिल हुए। इस बैठक का उद्देश्य रूस की बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों से यूरोप को बचाना है। इस बैठक में पूरे यूरोप के लिए एक इंटीग्रेटेड मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस गठबंधन में मिसाइल वार्निंग सिस्टम