Tuesday, 28 Jul 2026 | 07:23 AM

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ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत जारी:सफल रही तो ठीक, नहीं तो फिर शुरू होंगे हवाई हमले

ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत जारी:सफल रही तो ठीक, नहीं तो फिर शुरू होंगे हवाई हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका कोई हल निकल जाएगा। लेकिन अगर बातचीत बेनतीजा रही तो अमेरिका फिर से ईरान पर हवाई हमले शुरू करेगा। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने दावा किया, “पिछले 14 दिनों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद उन्होंने हमसे कहा कि हमले रोकिए और बातचीत करते हैं।” हालांकि, ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया। तेहरान का कहना है कि उसने अमेरिका से बातचीत की पहल नहीं की है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर हवाई हमले रोक रखे हैं। दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट समेत कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

FSSAI Energy Drink Ban & BOB Data Leak

FSSAI Energy Drink Ban & BOB Data Leak

19 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर रुपए से जुड़ी रही। बाजार में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट नजर आएंगे। रिजर्व बैंक 100-100 करोड़ यानी टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। वहीं, अगर आप थकान मिटाने या तुरंत रिफ्रेश होने के लिए एनर्जी ड्रिंक के नाम पर रेडबुल, स्टिंग और मोंस्टर जैसे ड्रिंक्स पीते हैं, तो ये कंपनियों का भ्रामक दावा है। भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने इन कंपनियों को अपने प्रॉडक्ट्स से यह नाम और इससे जुड़े दावों को हटाने का आदेश दिया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. देश में जल्द चलेंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक-नोट: ट्रायल के लिए 200 करोड़ नोट छपेंगे; कागज के नोट भी चलेंगे बाजार में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट नजर आएंगे। रिजर्व बैंक 100-100 करोड़ यानी टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। यह प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल होगा, अगर यह सफल होता है तो आगे और नोट भी छापे जाएंगे। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी। हालांकि, पॉलिमर नोटों का ट्रायल कब शुरू होगा, इसकी तारीख का ऐलान अभी नहीं किया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. रेडबुल, स्टिंग और मोंस्टर ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम से नहीं बिकेंगे: FSSAI ने कंपनियों से कहा- तुरंत एनर्जी मिलने का दावा भ्रामक, 90 दिन में लेबल हटाने की डेडलाइन अगर आप थकान मिटाने या तुरंत रिफ्रेश होने के लिए एनर्जी ड्रिंक के नाम पर रेडबुल, स्टिंग और मोंस्टर जैसे ड्रिंक्स पीते हैं, तो ये कंपनियों का भ्रामक दावा है। भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने इन कंपनियों को अपने प्रॉडक्ट्स से यह नाम और इससे जुड़े दावों को हटाने का आदेश दिया है। FSSAI ने कहा है कि ये ड्रिंक्स पीने से “शरीर और दिमाग तरोताजा हो जाता है” या “तुरंत ताकत मिलती है”, जैसे दावे लोगों को गुमराह करने वाले हैं। भारत में ऐसी ड्रिंक्स के लिए कोई मानक तय ही नहीं हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. बैंक ऑफ बड़ौदा के कस्टमर्स का डेटा डार्क-वेब पर लीक: 700GB से ज्यादा इंटरनल डॉक्यूमेंट्स और ऑडिट रिकॉर्ड लीक हुआ; फोरेंसिक ऑडिट करा रहा बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों का पर्सनल डेटा और बैंक के इंटरनल डॉक्यूमेंट्स डार्क वेब पर लीक हो गए हैं। मामले से जुड़े सूत्र और साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर ने इस बात की जानकारी दी। कैशलेस कंज्यूमर के फाउंडर और साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर श्रीकांत एल के अनुसार, लीक हुए डेटा में ग्राहकों की पर्सनल डिटेल्स, आइडेंटिफिकेशन डॉक्यूमेंट्स, लोन से जुड़े पेपर और बैंक के इंटरनल ऑडिट रिकॉर्ड शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. चांदी ₹1,726 बढ़कर ₹2.25 लाख पर पहुंची: सोना ₹685 महंगा होकर ₹1.45 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है सोने-चांदी की कीमतों में 27 जुलाई को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 1,726 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 685 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. गडकरी बोले-पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने में मेरा कोई रोल नहीं: यह पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ा, डीपफेक वीडियो पर मेटा-एक्स पर केस करेंगे, कोर्ट की मंजूरी केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने में उनका कोई रोल नहीं है। ये दोनों प्रोजेक्ट पूरी तरह से केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हैं। दरअसल मेटा प्लेटफॉर्म्स, एक्स और गूगल पर एथेनॉल मामले में गडकरी के कई सारे एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो वायरल हो रहे हैं। गडकरी ने याचिका में कहा है कि इन वीडियो में उन्हें एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) प्रोग्राम और ई20 पहल से गलत तरीके से जोड़ा गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… सोमवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी

सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी

हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के अलावा एक और चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह चेहरा था हरियाणा के चरखी दादरी निवासी और एक्टर सुधीर सांगवान का। सुधीर नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’, फिल्म ‘RAAKH’ और कई OTT प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुके हैं। मामला लीगल सीरिज में SHO पेप्सू से उन्हें पहचान मिली। एक्टिंग के साथ-साथ वे इन दिनों CJP की संस्थापक कोर टीम के सदस्य भी हैं। चरखी दादरी के छोटे से गांव छप्पर से निकलकर सुधीर ने संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। किसान परिवार से आने वाले सुधीर ने आर्थिक तंगी के दौर में मेडिकल स्टोर हेल्पर पर 200 रुपए के लिए नौकरी की। इसके बाद सिम कार्ड हॉकर, डीजे, ट्रांसपोर्ट कंपनी कर्मचारी और बैंकिंग सेक्टर में भी काम किया। दैनिक भास्कर ने सुधीर सांगवान से बातचीत कर उनके गांव से OTT तक के सफर और CJP से जुड़ने की पूरी कहानी जानी। बैंकों में काम करने से लेकर खुद के स्टार्टअप तक शुरू किए सुधीर सांगवान का जन्म 9 नवंबर 1988 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव के किसान परिवार में हुआ। शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। बाद में राजस्थान के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान थिएटर से जुड़े। आर्थिक तंगी के कारण भिवानी के सरकारी कॉलेज में ग्रेजुएशन बीच में छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया। सबसे पहले मेडिकल स्टोर पर हेल्पर बने, जहां रोजाना ₹200 मिलते थे। अतिरिक्त कमाई के लिए रात में डीजे बजाते और फोटोग्राफी भी करते थे। साल 2006 में ₹3,500 महीने की सैलरी पर ट्रांसपोर्ट कंपनी में असिस्टेंट बने। दो साल बाद एक विदेशी कार्गो कंपनी में सुपरवाइजर बने और 2010 तक काम किया। इसके बाद HDFC बैंक में कैशियर के रूप में बैंकिंग सेक्टर में कदम रखा। 2016 में कोटक महिंद्रा बैंक में ब्रांच मैनेजर बने। इसी साल इक्विटस बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) बने, जहां उनकी सैलरी ₹1.24 लाख महीने तक पहुंच गई। नौकरी के साथ उन्होंने MoneyMind.com और LoanWon.com नाम से लोन सर्विस स्टार्टअप शुरू किए। 2019 में MyMistri.com लॉन्च किया, जिसे बाद में करीब ₹40 लाख में बेच दिया। इसके बाद ‘तुरंत डील’ नाम से प्रॉपर्टी स्टार्टअप और कोरोना काल में ZORKA Grocery शुरू की, लेकिन घाटे के कारण दोनों कारोबार बंद करने पड़े। 2019 में एक्टिंग लाइन में आए, हरियाणवी वेब सीरिज से शुरुआत सुधीर सांगवान बताते हैं कि 2019 में फिल्म निर्माता राहुल दहिया से मुलाकात के बाद एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई। पहला मौका हरियाणवी वेब सीरीज ‘विरोध’ में मिला। इसके बाद ‘मायाजाल’, ‘ब्याह के लड्डू’, ‘अखाड़ा’ और ‘स्कैम’ जैसी वेब सीरीज में अलग-अलग किरदार निभाए। मुंबई में 100 से ज्यादा ऑडिशन दिए। ज्यादातर काम उन्हें ऑनलाइन ऑडिशन से मिला। नेटफ्लिक्स की ‘मामला लीगल है’ में SHO जयवंत पेप्सू के रोल से देशभर में पहचान मिली। अमेजन प्राइम वीडियो के विज्ञापन अभियान में मनोज बाजपेयी के साथ भी नजर आए। उनकी फिल्म ‘राख’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। अन्ना आंदोलन में शामिल हुए, CJP के मूवमेंट से जुड़े सुधीर ने बताया कि 2011 के अन्ना आंदोलन के दौरान सामाजिक गतिविधियों से जुड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात भिवानी के लोकेश से हुई। बाद में दोनों ने स्टैंड विद नेचर नाम से एक NGO शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच’ शब्द की चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुए मूवमेंट से जुड़े। शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने की वजह से उन्होंने CJP के अभियान में हिस्सा लेना शुरू किया। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले बड़े प्रदर्शन में शामिल हुए। उस दिन भीड़ को संभालने के लिए उन्होंने खुद आगे आकर व्यवस्था संभाली। प्रोटेस्ट के दौरान ये समझ नहीं आ रहा था कि वह बड़े स्पीकर को कहां रखें। भीड़ के बीच जब जगह नहीं मिली तो स्पीकर कंधे पर रखकर लोगों के बीच घूमता रहा। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। 15 जून को जयपुर और 20 जून को जंतर-मंतर के कार्यक्रम में CJP के प्रमुख आशुतोष रानका ने मंच से उनका परिचय कराया। इसके बाद उन्हें CJP की संस्थापक कोर टीम का सदस्य बनाया गया। पूरे देश में टीम तैयार कर रही CJP सांगवान ने बताया कि संगठन देशभर में अपनी टीम का विस्तार कर रहा है। शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों पर अभियान चलाने की तैयारी है। अलग-अलग राज्यों में संगठन की इकाइयों को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।

Gujarat Cyber Zero FIR Launch & India-Indonesia BrahMos Missile Deal

Gujarat Cyber Zero FIR Launch & India-Indonesia BrahMos Missile Deal

Hindi News Career Gujarat Cyber Zero FIR Launch & India Indonesia BrahMos Missile Deal 9 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. भारत इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल डील हुई 26 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के बीच बड़े रक्षा सौदे की जानकारी दी। भारत इंडोनेशिया को अपनी स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें निर्यात करेगा। ये डील लगभग 630 मिलियन अमेरिकी डॉलर की होगी। ब्रह्मोस मिसाइल को भूमि, समुद्र और वायु—तीनों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। इस समझौते में स्वदेशी एस्ट्रा मिसाइलों की आपूर्ति भी शामिल है। एस्ट्रा मिसाइल हवा से हवा में मार करने वाली भारत की अत्याधुनिक मिसाइल है। इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बना। इससे पहले फिलीपींस और वियतनाम इस कैटेगरी में शामिल हैं। यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है।यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की वार्ता के दौरान हुआ। मिसलीनियस (Miscellaneous) 2. साइबर वित्तीय धोखाधड़ी ई-जीरो FIR सेवा शुरू 27 जुलाई को गुजरात सरकार ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक नई सेवा शुरू की। इस सेवा का नाम ‘साइबर वित्तीय धोखाधड़ी ई-जीरो FIR’ (Cyber Financial Fraud e-Zero FIR) रखा गया है। इसके माध्यम से साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोग घर बैठे ही अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए पीड़ित को अब पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शिकायत मिलते ही पुलिस तुरंत कार्रवाई शुरू कर देगी ताकि धोखाधड़ी की गई राशि को फ्रीज किया जा सकेगा। यह कदम बढ़ते साइबर अपराधों और डिजिटल भुगतान में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है। राज्य पुलिस ने इसके लिए एक विशेष पोर्टल और हेल्पलाइन भी जारी किया है।गुजरात के डिप्‍टी सीएम हर्ष सिंघवी ने सर्विस लॉन्‍च की। 3. जेन टेक्नोलॉजिस ने भारत का पहला उच्च ऊंचाई वाला एंटी-ड्रोन सिस्टम पेश किया 26 जुलाईको जेन टेक्नोलॉजिस ने भारत का पहला स्वदेशी हाई एल्टिट्यूड एंटी-ड्रोन सिस्टम पेश किया। यह मैन-पोर्टेबल है, यानी इसे सैनिक आसानी से उठाकर पहाड़ों पर ले जा सकते हैं। इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन, डेटा फ्यूजन और सर्वदिशात्मक (omni-directional) जैमिंग तकनीक शामिल है। इसमें 5 किमी तक ड्रोन का पता लगाने की क्षमता है। इसे विशेष रूप से हिमालय जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती के लिए बनाया गया है। यह प्रणाली दुश्मन के छोटे ड्रोनों को जाम करने और उन्हें मार गिराने में सक्षम है। इसे जेन टेक्नोलॉजिस ने DRDO के सहयोग से बनाया है। भविष्य में इसे निर्यात करने की योजना भी बनाई जा रही है। यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। एंटी-ड्रोन सिस्टम यह एक ऐसी तकनीक है जो अनधिकृत, संदिग्ध या दुश्मन के ड्रोन (UAV) का पता लगाने, उनकी पहचान करने, उन्हें निष्क्रिय करने या नष्ट करने के लिए बनाई जाती है। इसका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन से सुरक्षा, आतंकवादी गतिविधियों और तस्करी पर रोक, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और हवाई सुरक्षा में सुधार है। यह डिटेक्शन, पहचान, ट्रैकिंग और निष्क्रिय करने जैसे चार चरणों में काम करता है। 4. तेलंगाना में भारत के पहले ‘इंटीग्रेटेड ऑयल पाम कॉम्प्लेक्स’ का उद्घाटन 27 जुलाई 2026 को गोदरेज एग्रोवेट ने तेलंगाना में भारत के पहले इंटीग्रेटेड ऑयल पाम कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। यह कॉम्प्लेक्स तेलंगाना के खम्मम जिले में स्थापित किया गया है। इसका कुल निवेश 300 करोड़ है। इसमें पाम तेल निकालने की इकाई, रिफाइनरी और एक आधुनिक नर्सरी शामिल है। मिल की शुरुआती क्षमता 30 टन प्रति घंटा है जिसे आगे 60 टन प्रति घंटा तक बढ़ाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य भारत की खाद्य तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है। इस संयंत्र से स्थानीय किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम और तकनीक मिलेगी। पाम ऑयल की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकती है। यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है। इस परिसर का निर्माण घरेलू पाम तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाने और विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से किया गया है। ऑयल पाम से किसानों को बीज, तकनीकी सलाह, प्रसंस्करण और विपणन जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। स्पोर्ट्स (SPORTS) 5. नई दिल्ली में 22वीं ‘कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप’ का शुभारंभ 27 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2026 का शुभारंभ हुआ। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। यह इस चैंपियनशिप का 22वां संस्करण है। यह प्रतियोगिता 27 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक त्यागराज स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है। इसमें लगभग 25 कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। इस प्रतियोगिता में टीम इंडिया पुरुष और महिला दोनों वर्गों में मजबूत दावेदारी पेश करेगा। पुरुष टीम में अनुभवी खिलाड़ी जी. साथियान, हरमीत देसाई, मानव ठक्कर, मनुष शाह और पयास जैन हैं। महिला वर्ग की अगुवाई श्रीजा अकुला टीम करेंगी। उनके साथ यशस्विनी घोरपड़े, स्वास्तिका घोष, सुतीर्था मुखर्जी और सिंड्रेला दास को जगह मिली है। इससे पहले भारत में यह प्रतियोगिता मुंबई, हैदराबाद, नई दिल्ली, जयपुर, सूरत और कटक में आयोजित हो चुकी है। प्रतियोगिता में शामिल प्रमुख स्पर्धाएं पुरुष टीम, महिला टीम, पुरुष एकल, महिला एकल, पुरुष युगल, महिला युगल और मिश्रित युगल हैं। कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप यह राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों के बीच आयोजित होने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता है। इसका आयोजन कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस फेडरेशन (CTTF) द्वारा किया जाता है। इसके आयोजक दिल्ली सरकार और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया हैं।भारत इस चैंपियनशिप की मेजबानी छठी बार कर रहा है। 6. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने जीता स्वर्ण पदक 26 जुलाई को भारतीय भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने ग्लासगो में को स्वर्ण पदक जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में उनका लगातार तीसरा स्वर्ण पदक है। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। चानू ने स्नैच राउंड में 85 किलोग्राम का नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। यह 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक है।