Friday, 11 Sep 2026 | 04:24 PM

Trending :

EXCLUSIVE

दावा- बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब हूती विद्रोही:दुनिया के अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ा; यमनी फोर्स पेरिम द्वीप छोड़कर भागी

दावा- बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब हूती विद्रोही:दुनिया के अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ा; यमनी फोर्स पेरिम द्वीप छोड़कर भागी

यमन के हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब पहुंच गए हैं। यह यह द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में स्थित है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि यमनी गवर्नमेंट फोर्स ने पेरिम द्वीप पर कंट्रोल छोड़ दिया है और वे पीछे हट गए हैं। पेरिम द्वीप पर कंट्रोल बाब अल-मंदेब पर पकड़ बनाने के लिए बेहद अहम है। इसके ठीक सामने धुबाब शहर है, जहां हूती लड़ाके भी दाखिल हो गए हैं। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां कब्जे के बाद आस-पास गुजरने वाले जहाजों पर हमला करना आसान हो जाएगा। हूती विद्रोही 10 दिनों से यमन के लाल सागर तट पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वे मोखा समेत कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर चुके हैं। अब वे शहर ताइज की ओर बढ़ रहे हैं। मोखा पर कब्जे से लाल सागर में बढ़ा खतरा हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर है। रॉयटर्स के मुताबिक, मोखा पर कब्जे के अभियान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हूतियों को सैन्य सलाह और मदद दी थी। हालांकि, ईरान सार्वजनिक तौर पर हूतियों को सैन्य निर्देश देने से इनकार करता है। बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच अहम समुद्री रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे ईंधन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। यह खतरा ऐसे समय बढ़ा है, जब ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से समुद्री यातायात प्रभावित है। अगर बाब अल-मंदेब में भी संकट बढ़ा, तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। ईरानी कमांडरों की मौजूदगी का दावा तेहरान की गतिविधियों से परिचित एक क्षेत्रीय राजनयिक के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई वरिष्ठ कमांडर पहले ही यमन पहुंच चुके थे। उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के हमलों की निगरानी की और उनकी कमान संभाली। राजनयिक के मुताबिक, हमलों की रणनीति को लेकर कई हफ्तों तक चर्चा हुई थी। एक अन्य ईरानी अधिकारी ने बताया कि ईरान ने हूतियों समेत अपने सहयोगी समूहों के साथ कई बैठकें की थीं। हालांकि, उनके मुताबिक मोखा पर हमला करने का फैसला हूतियों ने खुद लिया था। यमन की सऊदी समर्थित सरकार से जुड़े पांच सैन्य अधिकारियों ने भी कहा कि लाल सागर के किनारे हूतियों के नए अभियान में ईरान ने उनकी मदद की थी। यमनी सैन्य सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए हूती लड़ाकों से मिली जानकारी और संचार इंटरसेप्ट के आधार पर दावा किया गया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के वरिष्ठ कमांडर अब्दोलरेजा शहलाई इस अभियान को दिशा दे रहे थे। ईरान ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, शहलाई कुद्स फोर्स में हैं और पहले भी यमन में रह चुके हैं। नाकेबंदी के बावजूद हथियार पहुंचाने का दावा ईरानी सूत्रों के मुताबिक, यमन में हूतियों के इलाकों पर हवाई और समुद्री नाकाबंदी के बावजूद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अभी भी हथियार और सैन्यकर्मी यमन के अंदर और बाहर पहुंचाने में सक्षम हैं। हालांकि, सूत्रों ने यह नहीं बताया कि ऐसा किस तरीके से किया जा रहा है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के जानकार अहमद नागी के मुताबिक, लाल सागर के किनारे हूतियों का अभियान अचानक शुरू नहीं हुआ। इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी। नागी के मुताबिक, हूतियों की सैन्य क्षमता बढ़ने की एक बड़ी वजह उन्हें मिले नए हथियार हैं। इनमें ईरान से मिले हथियारों के साथ-साथ अलग-अलग तस्करी नेटवर्क से हासिल किए गए हथियार भी शामिल हैं। उन्होंने मौजूदा अभियान में हूतियों के ड्रोन के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। सऊदी ने मोखा पर बड़ा हवाई हमला नहीं किया जब हूती मोखा की तरफ बढ़ने लगे, तो यमनी सरकार ने सऊदी अरब से ज्यादा हवाई मदद और दूसरी सैन्य सहायता मांगी थी। यमन के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, यमनी सरकार चाहती थी कि सऊदी अरब हूतियों के मुख्य इलाकों में उनके ठिकानों पर हवाई हमले करे। इनमें राजधानी सना और तेल डिपो जैसे रणनीतिक ठिकाने शामिल थे। हालांकि, सऊदी अरब ने मोखा के मोर्चे पर बड़ा हवाई अभियान नहीं चलाया। उसने यमन को हथियार, लॉजिस्टिक मदद और खुफिया जानकारी दी। सऊदी ने कुछ हवाई हमले जरूर किए, लेकिन उनका मुख्य फोकस उत्तरी मोर्चे के जौफ और मारिब प्रांतों पर रहा। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के साथ बड़ा सैन्य टकराव नहीं चाहता। उसे डर है कि इससे सऊदी क्षेत्र में हूतियों के ड्रोन हमले और बढ़ सकते हैं। ट्रम्प ने सऊदी की एयरस्ट्राइक की मांग ठुकराई हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को अमेरिकी मदद की उम्मीद थी। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प से सीधे अमेरिकी हवाई हमले करने की अपील की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इनकार कर दिया। इसके बावजूद अमेरिका सऊदी की मदद कर रहा है। CNN के मुताबिक, 100 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सलाहकार सऊदी अरब में मौजूद हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इनकी संख्या करीब 200 बताई है। ये अमेरिकी सैन्यकर्मी सऊदी सेना को हूतियों से जुड़ी खुफिया जानकारी और संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सैनिक हूतियों के खिलाफ होने वाले हवाई हमलों में सीधे हिस्सा नहीं ले रहे हैं। फिलहाल अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। ऐसे में मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों को रोकने के लिए सऊदी अरब और यमन सरकार की अगली रणनीति अहम होगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
उच्च खराब कोलेस्ट्रॉल के लक्षण दिल के दौरे का कारण बन सकते हैं, जानें स्वस्थ आहार युक्तियाँ

March 6, 2026/
4:43 pm

बढ़ते पुराने के लक्षण | छवि: एआई खराब कोलेस्ट्रॉल के लक्षण: भागदौड़ भारी और जीवन में अनियमित प्लेसमेंट के कारण...

Swiggy & Zomato Platform Fee Hike

March 24, 2026/
8:10 pm

नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के बाद अब स्विगी से भी खाना मंगाना महंगा...

पंजाबी सिंगर सुनंदा के बरेली शो में बोल्ड ठुमके:लॉलीपॉप लागेलु गीत पर जमकर नाचीं, फैंस हुए बेकाबू, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज

April 8, 2026/
11:51 am

पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा के गाजियाबाद शो के बाद अब बरेली शो भी विवादों से घिर गया है। शो यहां...

मुकेश खन्ना बोले- जन गण मन हटाओ वंदे मारतम लाओ:राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में फर्क भूले, पंजाब सिंध को कहा पंजाब सिंग, 2 और गड़बड़ की

August 17, 2026/
9:24 am

शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में राष्ट्रगान जन गण मन को हटाने की मांग की है। उनका कहना...

चार ड्रॉप-आउट्स ने बनाई कर्सर की पैरेंट कंपनी एनीस्फीयर:11 साल में ट्रूल ने बिना सैलरी कंपनी शुरू की; 25 में स्पेसएक्स से बड़ी डील

June 17, 2026/
12:47 pm

माइकल ट्रूल को सुर्खियों से दूर रहकर कोडिंग पसंद है। सैलरी में दिलचस्पी नहीं रही। लेकिन महज 25 साल की...

ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे

June 17, 2026/
3:18 pm

ब्रिटेन में मौजूद सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी बंद होने का खतरा बढ़ गया है। जिस इमारत में यह रेस्तरां...

Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026

April 22, 2026/
2:43 am

नई दिल्ली4 घंटे पहले कॉपी लिंक प्रतीकात्मक फोटो। देश में हाल के वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज तेजी से बढ़ा...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

दावा- बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब हूती विद्रोही:दुनिया के अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ा; यमनी फोर्स पेरिम द्वीप छोड़कर भागी

दावा- बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब हूती विद्रोही:दुनिया के अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ा; यमनी फोर्स पेरिम द्वीप छोड़कर भागी

यमन के हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब पहुंच गए हैं। यह यह द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में स्थित है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि यमनी गवर्नमेंट फोर्स ने पेरिम द्वीप पर कंट्रोल छोड़ दिया है और वे पीछे हट गए हैं। पेरिम द्वीप पर कंट्रोल बाब अल-मंदेब पर पकड़ बनाने के लिए बेहद अहम है। इसके ठीक सामने धुबाब शहर है, जहां हूती लड़ाके भी दाखिल हो गए हैं। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां कब्जे के बाद आस-पास गुजरने वाले जहाजों पर हमला करना आसान हो जाएगा। हूती विद्रोही 10 दिनों से यमन के लाल सागर तट पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वे मोखा समेत कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर चुके हैं। अब वे शहर ताइज की ओर बढ़ रहे हैं। मोखा पर कब्जे से लाल सागर में बढ़ा खतरा हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर है। रॉयटर्स के मुताबिक, मोखा पर कब्जे के अभियान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हूतियों को सैन्य सलाह और मदद दी थी। हालांकि, ईरान सार्वजनिक तौर पर हूतियों को सैन्य निर्देश देने से इनकार करता है। बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच अहम समुद्री रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे ईंधन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। यह खतरा ऐसे समय बढ़ा है, जब ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से समुद्री यातायात प्रभावित है। अगर बाब अल-मंदेब में भी संकट बढ़ा, तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। ईरानी कमांडरों की मौजूदगी का दावा तेहरान की गतिविधियों से परिचित एक क्षेत्रीय राजनयिक के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई वरिष्ठ कमांडर पहले ही यमन पहुंच चुके थे। उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के हमलों की निगरानी की और उनकी कमान संभाली। राजनयिक के मुताबिक, हमलों की रणनीति को लेकर कई हफ्तों तक चर्चा हुई थी। एक अन्य ईरानी अधिकारी ने बताया कि ईरान ने हूतियों समेत अपने सहयोगी समूहों के साथ कई बैठकें की थीं। हालांकि, उनके मुताबिक मोखा पर हमला करने का फैसला हूतियों ने खुद लिया था। यमन की सऊदी समर्थित सरकार से जुड़े पांच सैन्य अधिकारियों ने भी कहा कि लाल सागर के किनारे हूतियों के नए अभियान में ईरान ने उनकी मदद की थी। यमनी सैन्य सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए हूती लड़ाकों से मिली जानकारी और संचार इंटरसेप्ट के आधार पर दावा किया गया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के वरिष्ठ कमांडर अब्दोलरेजा शहलाई इस अभियान को दिशा दे रहे थे। ईरान ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, शहलाई कुद्स फोर्स में हैं और पहले भी यमन में रह चुके हैं। नाकेबंदी के बावजूद हथियार पहुंचाने का दावा ईरानी सूत्रों के मुताबिक, यमन में हूतियों के इलाकों पर हवाई और समुद्री नाकाबंदी के बावजूद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अभी भी हथियार और सैन्यकर्मी यमन के अंदर और बाहर पहुंचाने में सक्षम हैं। हालांकि, सूत्रों ने यह नहीं बताया कि ऐसा किस तरीके से किया जा रहा है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के जानकार अहमद नागी के मुताबिक, लाल सागर के किनारे हूतियों का अभियान अचानक शुरू नहीं हुआ। इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी। नागी के मुताबिक, हूतियों की सैन्य क्षमता बढ़ने की एक बड़ी वजह उन्हें मिले नए हथियार हैं। इनमें ईरान से मिले हथियारों के साथ-साथ अलग-अलग तस्करी नेटवर्क से हासिल किए गए हथियार भी शामिल हैं। उन्होंने मौजूदा अभियान में हूतियों के ड्रोन के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। सऊदी ने मोखा पर बड़ा हवाई हमला नहीं किया जब हूती मोखा की तरफ बढ़ने लगे, तो यमनी सरकार ने सऊदी अरब से ज्यादा हवाई मदद और दूसरी सैन्य सहायता मांगी थी। यमन के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, यमनी सरकार चाहती थी कि सऊदी अरब हूतियों के मुख्य इलाकों में उनके ठिकानों पर हवाई हमले करे। इनमें राजधानी सना और तेल डिपो जैसे रणनीतिक ठिकाने शामिल थे। हालांकि, सऊदी अरब ने मोखा के मोर्चे पर बड़ा हवाई अभियान नहीं चलाया। उसने यमन को हथियार, लॉजिस्टिक मदद और खुफिया जानकारी दी। सऊदी ने कुछ हवाई हमले जरूर किए, लेकिन उनका मुख्य फोकस उत्तरी मोर्चे के जौफ और मारिब प्रांतों पर रहा। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के साथ बड़ा सैन्य टकराव नहीं चाहता। उसे डर है कि इससे सऊदी क्षेत्र में हूतियों के ड्रोन हमले और बढ़ सकते हैं। ट्रम्प ने सऊदी की एयरस्ट्राइक की मांग ठुकराई हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को अमेरिकी मदद की उम्मीद थी। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प से सीधे अमेरिकी हवाई हमले करने की अपील की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इनकार कर दिया। इसके बावजूद अमेरिका सऊदी की मदद कर रहा है। CNN के मुताबिक, 100 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सलाहकार सऊदी अरब में मौजूद हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इनकी संख्या करीब 200 बताई है। ये अमेरिकी सैन्यकर्मी सऊदी सेना को हूतियों से जुड़ी खुफिया जानकारी और संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सैनिक हूतियों के खिलाफ होने वाले हवाई हमलों में सीधे हिस्सा नहीं ले रहे हैं। फिलहाल अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। ऐसे में मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों को रोकने के लिए सऊदी अरब और यमन सरकार की अगली रणनीति अहम होगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.