4-Year UG Degree Holders Can Pursue 1-Year PG Online

Hindi News Career UGC New Rule: 4 Year UG Degree Holders Can Pursue 1 Year PG Online 2 मिनट पहले कॉपी लिंक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत एक अहम फैसला लिया है। अब विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान (HEIs) ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) के माध्यम से भी एक साल का पोस्टग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम कर सकेंगे। यूजीसी ने जारी किए नए दिशा-निर्देश यूजीसी ने नए सर्कुलर में बताया है कि यह फैसला 24 जुलाई को जारी पुराने नोटिफिकेशन की जगह लागू होगा। नए नियमों के तहत अब वे विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान, जिन्हें पहले से ऑनलाइन या ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड में दो साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स चलाने की मान्यता मिली हुई है, उसी विषय में एक साल का पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम भी शुरू कर सकेंगे। चार वर्षीय बैचलर डिग्री वाले होंगे एलिजिबल यूजीसी नियमों के अनुसार, एक साल के पोस्टग्रेजुएट कोर्स में केवल वही छात्र एडमिशन ले सकेंगे जिन्होंने चार वर्षीय बैचलर डिग्री विद ऑनर्स की डिग्री पूरी की हो। इसका मतलब यह है कि तीन साल की ग्रेजुएट डिग्री करने वाले छात्र इस एक वर्षीय PG प्रोग्राम में एडमिशन नहीं ले सकेंगे। कोर्स शुरू करने से पहले लेनी होगी मंजूरी यूजीसी के मुताबिक, कोई भी विश्वविद्यालय या संस्थान सीधे एक साल का PG प्रोग्राम शुरू नहीं कर सकेगा। इसके लिए उसे अपने संस्थान की सक्षम अकादमिक समितियों से मंजूरी लेनी होगी। यह कोर्स शुरू करने से पहले बोर्ड ऑफ स्टडीज (Board of Studies), अकादमिक परिषद (Academic Council) या अन्य सक्षम शैक्षणिक निकाय की स्वीकृति लेना जरूरी होगा। इसके बाद ही नया कार्यक्रम शुरू किया जा सकेगा। ये खबर भी पढ़ें सरकारी नौकरी:राजस्थान में सफाई कर्मचारी की 24,752 भर्ती, बिना पढ़े – लिखे भी कर सकते हैं आवेदन राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने राज्य के 183 नगरीय निकायों में संविदा सफाई कर्मचारियों के 24,752 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
China Deploys J-20 Stealth Fighters at LAC Airbases

नई दिल्ली16 मिनट पहले कॉपी लिंक व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि चीन ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित दो एयरबेस पर अपने सबसे आधुनिक J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। तस्वीरों के अनुसार, शिनजियांग के होतान और तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर कुल 12 J-20 विमान मौजूद हैं। हाल के वर्षों में LAC के पास इस श्रेणी के विमानों की यह सबसे बड़ी तैनातियों में से एक मानी जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी Vantor की तस्वीरों में 9 जुलाई को शिनजियांग के होतान एयरबेस पर आठ J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर विमान दिखाई दिए। वहीं, 25 जून की तस्वीरों में तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर चार J-20 विमान सुरक्षात्मक शेल्टर के नीचे खड़े नजर आए। भारत-चीन सीमा के निकट चीन के दो एयरबेस पर करीब दो सप्ताह के भीतर कुल 12 J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दिए। भारत की सीमा के कितने करीब हैं एयरबेस होतान एयरबेस भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से करीब 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी दूर है। यह चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) का प्रमुख फॉरवर्ड एयरबेस है। यह नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है और भारत-चीन सीमा के निकट चीन का महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस माना जाता है। इस बेस पर करीब 3,700 मीटर लंबा विस्तारित रनवे है, जिससे बड़े और भारी सैन्य विमान भी आसानी से उड़ान भर सकते हैं। यहां मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर, नए एप्रन और आधुनिक ऑपरेशन सपोर्ट सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस बेस पर J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान, KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान, इंटरसेप्टर फाइटर जेट और CH-4 जैसे निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन (UAV) तैनात रहते हैं। क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास और सीमा पर तनाव के दौरान यहां H-6 रणनीतिक बमवर्षक विमानों की भी तैनाती की जाती है। डामशुंग एयरबेस चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ल्हासा प्रीफेक्चर में स्थित एक उच्च ऊंचाई वाला सैन्य एयरबेस है। यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 344 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है और LAC के पूर्वी सेक्टर पर चीन की सैन्य रणनीति का अहम केंद्र माना जाता है। तिब्बती पठार की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) के लिए महत्वपूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग बेस है। यहां से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों की तैनाती, प्रशिक्षण और ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। एयरक्रू को कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में उड़ान संचालन का अभ्यास कराया जाता है। एयरबेस में एक प्रमुख रनवे है, जहां से लड़ाकू और सैन्य विमान नियमित रूप से ऑपरेट कर सकते हैं। डामशुंग एयरबेस चीन की पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए पूर्वी LAC पर वायु शक्ति बढ़ाने का प्रमुख केंद्र है। यहां से अरुणाचल प्रदेश की दिशा में निगरानी, त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया और उच्च ऊंचाई वाले अभियानों का संचालन आसान हो जाता है। तैनाती क्यों मानी जा रही है अहम रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऊंचाई वाले एयरबेस पर J-20 की लगातार मौजूदगी इस बात का संकेत है कि चीन अब ऐसी तैनाती को नियमित सैन्य रणनीति का हिस्सा बना रहा है, न कि किसी अस्थायी सैन्य अभ्यास का। J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बचने और आधुनिक हवाई अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसे चीनी वायुसेना के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। भारत-चीन सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियां रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता की है तथा कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है। इसके बावजूद दोनों पक्ष LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक वायु संसाधनों की तैनाती बनाए हुए हैं। भारतीय वायुसेना के सामने चुनौतियां रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय वायुसेना फिलहाल लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। स्वदेशी LCA तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी हुई है, जबकि 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया अभी जारी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
China Deploys J-20 Stealth Fighters at LAC Airbases

नई दिल्ली33 मिनट पहले कॉपी लिंक व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि चीन ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित दो एयरबेस पर अपने सबसे आधुनिक J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। तस्वीरों के अनुसार, शिनजियांग के होतान और तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर कुल 12 J-20 विमान मौजूद हैं। हाल के वर्षों में LAC के पास इस श्रेणी के विमानों की यह सबसे बड़ी तैनातियों में से एक मानी जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी Vantor की तस्वीरों में 9 जुलाई को शिनजियांग के होतान एयरबेस पर आठ J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर विमान दिखाई दिए। वहीं, 25 जून की तस्वीरों में तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर चार J-20 विमान सुरक्षात्मक शेल्टर के नीचे खड़े नजर आए। भारत-चीन सीमा के निकट चीन के दो एयरबेस पर करीब दो सप्ताह के भीतर कुल 12 J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दिए। भारत की सीमा के कितने करीब हैं एयरबेस होतान एयरबेस भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से करीब 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी दूर है। यह चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) का प्रमुख फॉरवर्ड एयरबेस है। यह नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है और भारत-चीन सीमा के निकट चीन का महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस माना जाता है। इस बेस पर करीब 3,700 मीटर लंबा विस्तारित रनवे है, जिससे बड़े और भारी सैन्य विमान भी आसानी से उड़ान भर सकते हैं। यहां मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर, नए एप्रन और आधुनिक ऑपरेशन सपोर्ट सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस बेस पर J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान, KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान, इंटरसेप्टर फाइटर जेट और CH-4 जैसे निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन (UAV) तैनात रहते हैं। क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास और सीमा पर तनाव के दौरान यहां H-6 रणनीतिक बमवर्षक विमानों की भी तैनाती की जाती है। डामशुंग एयरबेस चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ल्हासा प्रीफेक्चर में स्थित एक उच्च ऊंचाई वाला सैन्य एयरबेस है। यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 344 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है और LAC के पूर्वी सेक्टर पर चीन की सैन्य रणनीति का अहम केंद्र माना जाता है। तिब्बती पठार की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) के लिए महत्वपूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग बेस है। यहां से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों की तैनाती, प्रशिक्षण और ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। एयरक्रू को कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में उड़ान संचालन का अभ्यास कराया जाता है। एयरबेस में एक प्रमुख रनवे है, जहां से लड़ाकू और सैन्य विमान नियमित रूप से ऑपरेट कर सकते हैं। डामशुंग एयरबेस चीन की पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए पूर्वी LAC पर वायु शक्ति बढ़ाने का प्रमुख केंद्र है। यहां से अरुणाचल प्रदेश की दिशा में निगरानी, त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया और उच्च ऊंचाई वाले अभियानों का संचालन आसान हो जाता है। तैनाती क्यों मानी जा रही है अहम रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऊंचाई वाले एयरबेस पर J-20 की लगातार मौजूदगी इस बात का संकेत है कि चीन अब ऐसी तैनाती को नियमित सैन्य रणनीति का हिस्सा बना रहा है, न कि किसी अस्थायी सैन्य अभ्यास का। J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बचने और आधुनिक हवाई अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसे चीनी वायुसेना के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। भारत-चीन सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियां रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता की है तथा कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है। इसके बावजूद दोनों पक्ष LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक वायु संसाधनों की तैनाती बनाए हुए हैं। भारतीय वायुसेना के सामने चुनौतियां रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय वायुसेना फिलहाल लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। स्वदेशी LCA तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी हुई है, जबकि 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया अभी जारी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहे प्रवासी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून से भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों लोगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिपब्लिकन विरोध के कारण इसके पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्या है प्रस्तावित विधेयक रिन्यूइंग इमिग्रेशन प्रोविजंस ऑफ द इमिग्रेशन एक्ट 1929 नाम के इस विधेयक के तहत ऐसे प्रवासी जो कम से कम सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे हैं, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसे ग्रीन कार्ड की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए क्यों अहम है प्रस्ताव यह प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार वार्षिक सीमा (Per-Country Cap) के कारण उन्हें स्थायी निवास के लिए कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड पाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों से अस्थायी वर्क वीजा का नवीनीकरण कराते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों, ड्रीमर्स (Dreamers), टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य उच्च कौशल वाले पेशेवरों को भी इस प्रस्ताव से राहत मिल सकती है। सीनेटर एलेक्स पडिला के कार्यालय के अनुसार, इस विधेयक से 80 लाख से अधिक लोगों को फायदा हो सकता है। कानून में क्या बदलाव होगा विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 249 (रजिस्ट्री) में संशोधन का प्रस्ताव देता है। वर्तमान में इस प्रावधान का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। नया प्रस्ताव इस निश्चित तारीख को हटाकर सात साल के निरंतर निवास की शर्त लागू करेगा। कानून बनने के 60 दिन बाद यह व्यवस्था प्रभावी होगी। राजनीतिक समर्थन, लेकिन राह आसान नहीं इस विधेयक का नेतृत्व सीनेटर एलेक्स पडिला के साथ सीनेट के डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन कर रहे हैं। इसे 14 डेमोक्रेटिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जबकि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसी तरह का विधेयक सांसद जोई लोफग्रेन ने पेश किया है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के विरोध के कारण इसके कानून बनने की राह फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहे प्रवासी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून से भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों लोगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिपब्लिकन विरोध के कारण इसके पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्या है प्रस्तावित विधेयक रिन्यूइंग इमिग्रेशन प्रोविजंस ऑफ द इमिग्रेशन एक्ट 1929 नाम के इस विधेयक के तहत ऐसे प्रवासी जो कम से कम सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे हैं, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसे ग्रीन कार्ड की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए क्यों अहम है प्रस्ताव यह प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार वार्षिक सीमा (Per-Country Cap) के कारण उन्हें स्थायी निवास के लिए कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड पाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों से अस्थायी वर्क वीजा का नवीनीकरण कराते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों, ड्रीमर्स (Dreamers), टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य उच्च कौशल वाले पेशेवरों को भी इस प्रस्ताव से राहत मिल सकती है। सीनेटर एलेक्स पडिला के कार्यालय के अनुसार, इस विधेयक से 80 लाख से अधिक लोगों को फायदा हो सकता है। कानून में क्या बदलाव होगा विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 249 (रजिस्ट्री) में संशोधन का प्रस्ताव देता है। वर्तमान में इस प्रावधान का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। नया प्रस्ताव इस निश्चित तारीख को हटाकर सात साल के निरंतर निवास की शर्त लागू करेगा। कानून बनने के 60 दिन बाद यह व्यवस्था प्रभावी होगी। राजनीतिक समर्थन, लेकिन राह आसान नहीं इस विधेयक का नेतृत्व सीनेटर एलेक्स पडिला के साथ सीनेट के डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन कर रहे हैं। इसे 14 डेमोक्रेटिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जबकि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसी तरह का विधेयक सांसद जोई लोफग्रेन ने पेश किया है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के विरोध के कारण इसके कानून बनने की राह फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़की, 2 लोगों की मौत:कई जिलों में कर्फ्यू लगा; कांवर यात्रा के दौरान डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ था

नेपाल के सुनसरी जिले में रविवार रात कांवर यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर शुरू हुए एक मामूली विवाद अब बड़े सांप्रदायिक तनाव में बदल गई है। शुरुआत में यह मामला दो समुदायों के बीच कहासुनी तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते हिंसा फैल गई और पुलिस को हालात काबू करने के लिए गोली चलानी पड़ी। इस हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे तराई-मधेश क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शन के दौरान सिराहा में एक और युवक की मौत के बाद तनाव और बढ़ गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सिराहा, धनुषा समेत कई जिलों में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया है। बहस झड़प में बदली, पुलिस के आने पर भी नहीं रुकी श्रद्धालु कोसी बैराज से जल लेकर लौट रहे थे और उनके साथ डीजे व लाउडस्पीकर भी बज रहे थे। इसी दौरान दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने तेज आवाज में बज रहे संगीत पर आपत्ति जताई। पहले दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया। शुरुआत में स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की। लेकिन थोड़ी ही देर में दोनों समुदायों के और लोग मौके पर पहुंच गए। कई लोगों के हाथों में लाठी, बांस, पत्थर और भाले जैसे हथियार थे। इसके बाद दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। हवाई फायरिंग के बाद भी हिंसा नहीं रुकी, पुलिस ने गोली चलाई पथराव में 8 पुलिसकर्मी, जिनमें एक इंस्पेक्टर भी शामिल थे, घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर आसपास के पुलिस थानों और आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की अतिरिक्त टीमों को बुलाया गया। पुलिस के मुताबिक, भीड़ पर पहले काबू पाने की कोशिश की गई। एक पुलिस अधिकारी ने तीन हवाई फायर भी किए, लेकिन हिंसा नहीं रुकी। इसके बाद रात करीब 10:45 बजे पुलिस ने गोली चलाई। गोली लगने से ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई। कई अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हुए। बाद में इलाज के दौरान जयप्रकाश मेहता की भी मौत हो गई, जिससे इस घटना में मरने वालों की संख्या दो हो गई। 3 साल पहले सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को चेताया था नेपाल के मधेश और तराई क्षेत्र में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को तीन साल पहले ही चेतावनी दे दी थी, लेकिन उस पर कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। अब सुनसरी और मधेश में हुई हालिया हिंसा के बाद यह रिपोर्ट फिर चर्चा में है। कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की सीमा सुरक्षा और दंगा नियंत्रण बल आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने तीन साल पहले सरकार को एक सीक्रेट रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि तराई क्षेत्र में धर्म और जातीय आधार पर लोगों को बांटने की संगठित कोशिशें हो रही हैं। रिपोर्ट में ओली सरकार से तुरंत राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उस समय सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। रिपोर्ट में कहा गया था कि नेपाल को भारत के मणिपुर और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में हुई सांप्रदायिक हिंसा से सबक लेना चाहिए।
रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से शिपिंग को बचाने की तैयारी

सऊदी अरब ने लाल सागर में शिपिंग को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों से बचाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की घोषणा की है। रॉयटर्स की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए दर्जनों देशों को आमंत्रित किया गया है, हालांकि अभी सदस्यता को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। यह गठबंधन रियाद में स्थित होगा और इसे गुरुवार तक सार्वजनिक किया जा सकता है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर आमंत्रित देशों की सूची जारी नहीं की है। हालांकि, खबरों के अनुसार अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, जिबूती, सोमालिया, सूडान और जर्मनी, फ्रांस व इटली जैसे यूरोपीय देशों को निमंत्रण भेजा गया है। अल-मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र, जिबूती और सूडान ने गठबंधन में शामिल होने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब ने करीब 50 देशों को भागीदारी की पुष्टि के लिए समय सीमा दी है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात अमेरिकी मीडिया के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ आपात बैठक की। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस सलमान ने वाशिंगटन को बताया कि सऊदी अरब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के और बढ़ने के खिलाफ है, लेकिन वह अपनी रक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के साथ स्थिति को खुद संभाल सकता है और फिलहाल अमेरिकी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। लाल सागर का महत्व और हूतियों का खतरा लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार का 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, वैश्विक तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। 2024 में, 4.1 अरब बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरे, जो वैश्विक कुल का लगभग पांच प्रतिशत है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब पर समुद्री नाकेबंदी लागू की थी, जिससे तेल शिपमेंट बाधित हुए। हूतियों ने सऊदी नेताओं पर 12 वर्षों से अन्यायपूर्ण घेराबंदी करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने एक्स पर पोस्ट किया कि समूह ने सऊदी तेल टैंकर ‘एनसीसी गजाली’ को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया, जिससे उसे अपना रास्ता बदलना पड़ा। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।
रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों को बचाना मकसद

सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी ने 50 से ज्यादा देशों को गठबंधन में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि अभी तक उन देशों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। इससे रेड सी के रास्ते भेजे जा रहे तेल की खेप पर असर पड़ा है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? मिडिल ईस्ट की न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के मुताबिक अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया और सूडान को न्योता भेजा गया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी निमंत्रण मिला है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, सऊदी अरब का करीबी सहयोगी अमेरिका अभी तक आधिकारिक तौर पर गठबंधन में शामिल होने की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ इमरजेंसी बैठक की। बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि प्रिंस खालिद ने अमेरिका से कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध को और फैलाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 28 फरवरी से अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद, ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस खालिद ने जेडी वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब, यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने में सक्षम है और फिलहाल उसे इस मामले में अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है। दुनिया के लिए रेड सी इतना अहम क्यों है? रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इसके एक तरफ सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी तरफ मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। दुनिया के करीब 30% समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। रेड सी में आने-जाने के केवल दो रास्ते हैं। पूर्व में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और पश्चिम में स्वेज नहर। इसलिए इनमें से किसी एक रास्ते में रुकावट आने पर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता है। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसी वजह से यहां जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो समुद्री लेन हैं। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है। लेकिन अब इस रास्ते में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का असर बढ़ गया है। ईरान जंग से एक चौथाई सप्लाई पर असर पड़ा सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। अब होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की करीब 25% ऊर्जा आपूर्ति किसी न किसी रूप में इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।
Gen Z Office Slang Guide

Hindi News Career Gen Z Office Slang Guide | Rizz, Slay, Quiet Quitting & Hinglish Trends 8 मिनट पहले कॉपी लिंक Gen Z वैसे तो हर हाल में लोगों पर अपना इम्प्रेशन जमाना जानते हैं। फिर बात चाहे उनके छात्र आंदोलन की हो या ऑफिस में रंग जमाने की। ऑफिस में छा जाने के लिए वे कुछ ऐसे शब्दों का यूज करते हैं जो उनके साथ -साथ जेन अल्फा की जुबान पर भी चढ़ गए हैं। ऐसे ही कुछ शब्दों के बारे में जानते हैं : भारत के कॉलेजों में Gen Z अक्सर हिंग्लिश (हिंदी और इंग्लिश को मिक्स करके) बोलते हैं। जैसे – Bro, आज का lecture low-key boring था, no cap जिसका मतलब है कि यार, आज का लेक्चर सच में थोड़ा बोरिंग था। इसी तरह किसी की छिपी हुई बात या झूठ को तुरंत पकड़ लेना Clock it कहलाता है। Gen Z की बातचीत में ये शब्द इसलिए लोकप्रिय हुए हैं क्योंकि सोशल मीडिया, मीम्स, रील्स और शॉर्ट वीडियो ने इन्हें आम भाषा का हिस्सा बना दिया है। आज इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर ये शब्द रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल किए जाते हैं। इनका उद्देश्य कम शब्दों में अपनी बात को ज्यादा प्रभावी और ट्रेंडी तरीके से कहना है। अगर आप अपनी ‘रीच’ और ‘एंगेजमेंट’ कई गुना बढ़ाना चाहते हैं तो GEN Z द्वारा बोले जाने वाले इन शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इनका यूज करते समय यह भीा ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि कहीं आप अनजाने में किसी का मजाक न उड़ा रहे हों। ये खबर भी पढ़ें सरकारी नौकरी:राजस्थान में सफाई कर्मचारी की 24,752 भर्ती, बिना पढ़े – लिखे भी कर सकते हैं आवेदन राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने राज्य के 183 नगरीय निकायों में संविदा सफाई कर्मचारियों के 24,752 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ICICI Prudential Flexicap Fund 5-Year Growth

9 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड ने जुलाई 2021 में लॉन्च होने के बाद से 5 साल पूरे कर लिए हैं। और इस दौरान इस फंड की NAV 10 से बढ़कर 20 हो गई है। एक फ्लेक्सीकैप फंड होने के नाते, इसे लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करने की आजादी है, जिससे यह उन जगहों पर अपने पोर्टफोलियो मिक्स को बदल सकता है जहां सबसे अच्छे मौके दिखते हैं। यह फंड ‘बॉटम-अप’, ‘हाई-कनविक्शन’ निवेश शैली अपनाता है, जो इसके बेंचमार्क के मुकाबले 60% से ज्यादा के ‘एक्टिव शेयर’ से पता चलता है। यह वीडियो फंड की मुख्य सोच, 5 सालों में इसके विकास और इक्विटी निवेशकों के लिए लंबे समय के निवेश के नजरिए के महत्व के बारे में बताता है। यह उन लोगों के लिए एक छोटा और आसान वीडियो है जो यह समझना चाहते हैं कि कैसे सोच-समझकर और अनुशासन के साथ स्टॉक चुनने से समय के साथ लगातार वेल्थ (संपत्ति) बनी है। CYNP कैपिटल एंड फाइनेंशियल के योगेश लढा ने ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड के 5 साल पूरे होने के बारे में क्या कहा जानने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








