ICICI Prudential Flexicap Fund 5-Year Growth

25 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड ने जुलाई 2021 में लॉन्च होने के बाद से 5 साल पूरे कर लिए हैं। और इस दौरान इस फंड की NAV 10 से बढ़कर 20 हो गई है। एक फ्लेक्सीकैप फंड होने के नाते, इसे लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करने की आजादी है, जिससे यह उन जगहों पर अपने पोर्टफोलियो मिक्स को बदल सकता है जहां सबसे अच्छे मौके दिखते हैं। यह फंड ‘बॉटम-अप’, ‘हाई-कनविक्शन’ निवेश शैली अपनाता है, जो इसके बेंचमार्क के मुकाबले 60% से ज्यादा के ‘एक्टिव शेयर’ से पता चलता है। यह वीडियो फंड की मुख्य सोच, 5 सालों में इसके विकास और इक्विटी निवेशकों के लिए लंबे समय के निवेश के नजरिए के महत्व के बारे में बताता है। यह उन लोगों के लिए एक छोटा और आसान वीडियो है जो यह समझना चाहते हैं कि कैसे सोच-समझकर और अनुशासन के साथ स्टॉक चुनने से समय के साथ लगातार वेल्थ (संपत्ति) बनी है। CYNP कैपिटल एंड फाइनेंशियल के योगेश लढा ने ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड के 5 साल पूरे होने के बारे में क्या कहा जानने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ दिखा रही असर:1,400 रु. की आइसक्रीम की कतार में छिपा है अमेरिकी अर्थव्यवस्था का सच

अमेरिका के एक छोटे से कस्बे हॉपकिंस, मिनेसोटा में हर मौसम में एक जैसा नजारा दिखता है। चाहे 27 डिग्री की गर्मी हो या बर्फीली ठंड, लोग एक ही चीज के लिए कतार में खड़े मिलते हैं: 15 डॉलर (करीब 1,400 रुपए) की एक छोटी सी आइसक्रीम। यह सिर्फ एक शहर या एक दुकान की कहानी नहीं। महामारी के दौरान शौकिया तौर पर शुरू हुआ यह आइसक्रीम कारोबार अब पूरे अमेरिका में एक ट्रेंड बन चुका है। दरअसल, कोरोना काल में जब लोगों की नौकरियां और रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई थी, तब कई लोगों ने घर पर ही छोटे-मोटे शौक को कारोबार में बदल डाला। ए टू जेड क्रीमरी के संस्थापक जैक व्रा भी उन्हीं में से एक हैं, जिनकी सेल्स की नौकरी महामारी के दौरान छूट गई थी। इसके बाद उन्होंने मां से मिली एक छोटी आइसक्रीम मशीन से शुरुआत की। इसके पीछे छिपी है आज की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उलझी हुई तस्वीर। जानकारों के मुताबिक, यह असल में एक ‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ का नतीजा है। जहां अमीर तबका बेझिझक खर्च कर रहा है, वहीं मध्यम व निम्न आय वर्ग महंगाई से जूझते हुए भी खुद को खुश रखने के लिए छोटे-छोटे ‘इमोशनल सपोर्ट’ के ज़रिए ढूंढ़ रहा है और आइसक्रीम उसी सुकून का प्रतीक बन गई है। फेच एप के फाउंडर वेस श्रोल कहते हैं कि लोग शेयर बाजार में रिकॉर्ड मुनाफे की खबरें तो देखते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि इस तरक्की का फायदा उन तक नहीं पहुंच रहा। इसी निराशा के बीच लोग छोटी-छोटी खुशियों यानी ‘लिटिल ट्रीट्स’ की तलाश में रहते हैं। डेनवर की सैडबॉय क्रीमरी के फाउंडर माइकल किंबॉल कहते हैं कि यह कीमत बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन इतनी जरूर है कि लोग क्वालिटी और मेहनत की कद्र करें। शायद यही वजह है कि लोग इसे ‘इमोशनल सपोर्ट आइसक्रीम’ बुलाने लगे हैं। दिलचस्प है कि इस ट्रेंड में एआई के दौर में ‘कुछ असली’ करने की चाहत भी शामिल है। न्यूयॉर्क की बेटी जोज क्रीमरी शुरू करने वाली मैडी नेहलेन कहती हैं कि एआई भविष्य में कारोबार बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन आइसक्रीम नहीं बना सकता – इसमें इंसानी हाथों की मेहनत जरूरी है। यादगार और अनोखे अनुभव पर खर्च करने में बजट आड़े नहीं आता ए टू जेड क्रीमरी हर साल अपने स्थापना दिवस पर खास 100 डॉलर (करीब ₹9,560 रु.) की आइसक्रीम बनाती है, शैंपेन आइसक्रीम, कैवियार और गोल्ड लीफ वाले सॉर्डो क्राउटन के साथ। कंपनी के फाउंडर जैक व्रा के मुताबिक, यह दिखाता है कि लोग आज भी यादगार और अनोखे अनुभव पर पैसा खर्च करने को तैयार हैं, भले ही जेब पर बोझ हो।
Border Actor Sudesh Berry Statement On PM Modi

4 मिनट पहले कॉपी लिंक सुदेश बेरी ने ‘बॉर्डर’, ‘घायल’, ‘रिफ्यूजी’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘टैंगो चार्ली’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है। एक्टर सुदेश बेरी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने उन्हें भगवान विष्णु का अवतार बताया और कहा कि अगर मौका मिला, तो वह उनके पैर धोकर उनका पानी पीना चाहेंगे। वहीं, उन्होंने CJP पार्टी पर भी निशाना साधा। सुदेश बेरी ने कहा कि जंतर-मंतर पर बैठी CJP देश को आगे नहीं, बल्कि पीछे खींच रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पार्टी का नाम तक ठीक से नहीं पता। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता एजीपी, सीजीपी… मैं तो इन लोगों को पहचानता भी नहीं हूं। मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि ये देश को पीछे खींच रहे हैं।’ CJP पर निशाना साधते हुए सुदेश बेरी ने कहा, ‘ये सब बेकार लोग हैं। इनके पास देश के लिए कोई काम नहीं है। अगर सच में समाज की सेवा करनी है, तो बच्चों के लिए गार्डन बनाएं, बुजुर्गों के लिए ओल्ड एज होम बनाएं और लोगों का इलाज कराएं। सिर्फ जंतर-मंतर पर बैठकर विरोध करने से कुछ नहीं होगा।’ उन्होंने पार्टी के नाम पर भी तंज कसा। सुदेश बेरी ने कहा, ‘कुछ अजीब से जानवर का नाम लेकर पार्टी बना दी। लकड़बग्घा पार्टी क्यों नहीं बनाते?’ सुदेश बेरी का सबसे चर्चित रोल फिल्म ‘बॉर्डर’ में सूबेदार मथुरा दास का था। सुदेश बेरी ने मोदी की जमकर तारीफ की इंटरव्यू में सुदेश बेरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘नरेन्द्र मोदी ने बेचारे ने क्या बिगाड़ा है? उनको चाय बेचने दो। वो पूरी दुनिया में चाय बेचकर आए हैं।’ बातचीत के दौरान इंटरव्यूअर ने सुदेश बेरी को याद दिलाया कि उन्होंने पहले अपनी मां के चरण धोकर उनका जल पिया था। इस पर उन्होंने कहा, ‘अब मुझे मोदी जी के पैर धोकर पीना है। अगर आप मुझे मोदी जी से मिला दें। मैं तो उनसे मिला नहीं, मैं उनको जानता नहीं हूं। जैसे हमने ईश्वर को देखा नहीं है, फिर भी उनकी पूजा करते हैं, तो मैं भी उतनी ही इज्जत मोदी जी की करता हूं। तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है। कोई बुरी बात तो नहीं है? करता हूं तो करता हूं। पार्टियों से परे, राजनीति से परे, एक इंसान के तौर पर।’ रामराज्य आने का भी दावा किया सुदेश बेरी ने यह भी कहा कि उनके मुताबिक देश में ‘रामराज्य आ चुका है।’ जब उनसे पूछा गया कि ऐसा कैसे, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘रामराज्य आ चुका है। जो मैं देख सकता हूं, वो आप नहीं देख पा रहे हैं। शब्दों में नहीं बता सकते, ये महसूस करने वाली बात है।’ इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये लोग देश के लिए काम कर रहे हैं और इनके खिलाफ बिना वजह बोलना ठीक नहीं है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Border Actor Sudesh Berry Statement On PM Modi

21 मिनट पहले कॉपी लिंक सुदेश बेरी ने ‘बॉर्डर’, ‘घायल’, ‘रिफ्यूजी’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘टैंगो चार्ली’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है। एक्टर सुदेश बेरी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने उन्हें भगवान विष्णु का अवतार बताया और कहा कि अगर मौका मिला, तो वह उनके पैर धोकर उनका पानी पीना चाहेंगे। वहीं, उन्होंने CJP पार्टी पर भी निशाना साधा। सुदेश बेरी ने कहा कि जंतर-मंतर पर बैठी CJP देश को आगे नहीं, बल्कि पीछे खींच रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पार्टी का नाम तक ठीक से नहीं पता। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता एजीपी, सीजीपी… मैं तो इन लोगों को पहचानता भी नहीं हूं। मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि ये देश को पीछे खींच रहे हैं।’ CJP पर निशाना साधते हुए सुदेश बेरी ने कहा, ‘ये सब बेकार लोग हैं। इनके पास देश के लिए कोई काम नहीं है। अगर सच में समाज की सेवा करनी है, तो बच्चों के लिए गार्डन बनाएं, बुजुर्गों के लिए ओल्ड एज होम बनाएं और लोगों का इलाज कराएं। सिर्फ जंतर-मंतर पर बैठकर विरोध करने से कुछ नहीं होगा।’ उन्होंने पार्टी के नाम पर भी तंज कसा। सुदेश बेरी ने कहा, ‘कुछ अजीब से जानवर का नाम लेकर पार्टी बना दी। लकड़बग्घा पार्टी क्यों नहीं बनाते?’ सुदेश बेरी का सबसे चर्चित रोल फिल्म ‘बॉर्डर’ में सूबेदार मथुरा दास का था। सुदेश बेरी ने मोदी की जमकर तारीफ की इंटरव्यू में सुदेश बेरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘नरेन्द्र मोदी ने बेचारे ने क्या बिगाड़ा है? उनको चाय बेचने दो। वो पूरी दुनिया में चाय बेचकर आए हैं।’ बातचीत के दौरान इंटरव्यूअर ने सुदेश बेरी को याद दिलाया कि उन्होंने पहले अपनी मां के चरण धोकर उनका जल पिया था। इस पर उन्होंने कहा, ‘अब मुझे मोदी जी के पैर धोकर पीना है। अगर आप मुझे मोदी जी से मिला दें। मैं तो उनसे मिला नहीं, मैं उनको जानता नहीं हूं। जैसे हमने ईश्वर को देखा नहीं है, फिर भी उनकी पूजा करते हैं, तो मैं भी उतनी ही इज्जत मोदी जी की करता हूं। तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है। कोई बुरी बात तो नहीं है? करता हूं तो करता हूं। पार्टियों से परे, राजनीति से परे, एक इंसान के तौर पर।’ रामराज्य आने का भी दावा किया सुदेश बेरी ने यह भी कहा कि उनके मुताबिक देश में ‘रामराज्य आ चुका है।’ जब उनसे पूछा गया कि ऐसा कैसे, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘रामराज्य आ चुका है। जो मैं देख सकता हूं, वो आप नहीं देख पा रहे हैं। शब्दों में नहीं बता सकते, ये महसूस करने वाली बात है।’ इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये लोग देश के लिए काम कर रहे हैं और इनके खिलाफ बिना वजह बोलना ठीक नहीं है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
भारत में सोने की मांग में 6% की गिरावट:अप्रैल-जून तिमाही में 131.4 टन खपत रही, कस्टम ड्यूटी बढ़ने और PM मोदी की अपील का असर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131.4 टन रह गई है। पिछले साल की इसी अवधि में यह मांग 139.7 टन थी। मांग में इस गिरावट के पीछे कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोने की खरीदारी कम करने की अपील को मुख्य कारण माना गया है। केंद्र सरकार ने इसी साल मई में सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। इससे इनकी कीमत बढ़ गई थी। वैल्यू के हिसाब से 50% ज्यादा कीमत का सोना खरीदा WGC इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने बताया कि भले ही मात्रा में मांग घटी हो, लेकिन वैल्यू के लिहाज से यह एक रिकॉर्ड है। इस तिमाही में सोने की खपत 1,98,100 करोड़ रुपए रही, जो 2025 की दूसरी तिमाही के 1,32,500 करोड़ रुपए के मुकाबले 50% अधिक है। इससे पता चलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद उपभोक्ता सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ज्वैलरी मांग में 15% की कमी अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में कुल ज्वैलरी मांग 15% घटकर 75.1 टन रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 88.8 टन थी। प्रधानमंत्री मोदी ने मई में लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील की थी, जिसका असर बाजार पर दिखा है। निवेश में तेजी आई कीमतों और भविष्य का अनुमान दूसरी तिमाही में सोने की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 4,506.3 डॉलर प्रति औंस रही, जो 2025 में 3,280.4 डॉलर थी। भारत में औसत तिमाही कीमत (बिना आयात शुल्क और जीएसटी के) 1,50,744.8 रुपए रही, जबकि पिछले साल यह 94,875.9 रुपए थी। WGC ने इस साल कुल मांग 650 से 750 टन के बीच रहने का अनुमान जताया है। जैन के अनुसार, त्योहारी और शादी के सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है।
सोना ₹177 बढ़कर ₹1.42 लाख पर पहुंचा:इस साल ₹9 हजार महंगा हो चुका, चांदी की कीमत ₹789 कम होकर ₹2.17 लाख किलो हुई

सोने की कीमत में आज यानी 30 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 177 रुपए बढ़कर 1.42 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं एक किलो चांदी की कीमत 789 रुपए कम होकर 2.17 लाख रुपए आ गई। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 30 जुलाई 2026 इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 9 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.42 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 13 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.17 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है।
सोना ₹177 बढ़कर ₹1.42 लाख पर पहुंचा:इस साल ₹9 हजार महंगा हो चुका, चांदी की कीमत ₹789 कम होकर ₹2.17 लाख किलो हुई

सोने की कीमत में आज यानी 30 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 177 रुपए बढ़कर 1.42 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं एक किलो चांदी की कीमत 789 रुपए कम होकर 2.17 लाख रुपए आ गई। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 9 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.42 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 13 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.17 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है।
मूवी रिव्यू- 'भाई तेरा स्टार है':कहानी में दम नहीं, कॉमेडी में हंसी नहीं, राघव जुयाल की पहली सोलो लीड ने किया सिरदर्द

कॉमेडी फिल्म की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है दर्शकों को हंसाना। फिल्म ‘भाई तेरा स्टार है’ इसी सबसे जरूरी काम में बुरी तरह नाकाम रहती है। फिल्म शुरुआत से आखिर तक यह भरोसा दिलाती रहती है कि अब कुछ मजेदार होने वाला है, लेकिन हर अगले सीन के साथ निराशा ही हाथ लगती है। शोर है, भागदौड़ है, गलतफहमियां हैं, लेकिन हंसी कहीं दिखाई नहीं देती। राघव जुयाल की पहली सोलो लीड फिल्म से जिस धमाके की उम्मीद थी, वह शुरुआत में ही हवा हो जाती है। फिल्म की कहानी कहानी लंदन में रहने वाले स्ट्रगलिंग एक्टर अजय सिंह (राघव जुयाल) की है। क्रिकेट की एक शर्त हारने के बाद उस पर क्लब मालिक फैटी (संजय कपूर) का दस हजार पाउंड का कर्ज चढ़ जाता है। पैसे लौटाने के लिए उसके पास सिर्फ एक रात है। लेकिन सच बोलने की बजाय अजय एक के बाद एक झूठ बोलता चला जाता है। उसकी गर्लफ्रेंड रोशनी (निहारिका एन एम), बहन नताशा (पार्वती ओमनाकुट्टन) और रोशनी का भाई सिड (विवान भटेना) भी इस झूठ के जाल में फंसते चले जाते हैं। कहानी का आइडिया सुनने में दिलचस्प लगता है। एक रात, ढेर सारी गलतफहमियां और भागदौड़ वाली कॉमेडी। लेकिन स्क्रीन पर सब कुछ इतना बिखरा हुआ है कि कुछ देर बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कहानी आखिर जाना कहां चाहती है। कई दृश्य सिर्फ समय भरने के लिए जोड़े गए लगते हैं और क्लाइमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह थका देती है। फिल्म में एक्टिंग राघव जुयाल ने किल जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से प्रभावित किया था, लेकिन यहां वह पूरी तरह लड़खड़ा जाते हैं। यह उनकी पहली सोलो लीड फिल्म है, लेकिन पूरी फिल्म में वह लीड हीरो से ज्यादा किसी साइड किरदार जैसे महसूस होते हैं। उनके चेहरे के हावभाव जरूरत से ज्यादा बनावटी लगते हैं और कई जगह ओवरएक्टिंग कॉमेडी को पूरी तरह खत्म कर देती है। कॉमिक टाइमिंग भी बार बार चूकती है, जिससे उनका किरदार दर्शकों से जुड़ ही नहीं पाता। संजय कपूर अपने अनुभव से कुछ दृश्यों को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उनके हाथ भी बांध देती है। विवान भटेना अपने सीमित स्क्रीन टाइम में असर छोड़ते हैं और कई जगह राघव से ज्यादा सहज नजर आते हैं। पार्वती ओमनाकुट्टन फिल्म की सबसे संतुलित परफॉर्मेंस देती हैं। निहारिका एन एम ईमानदार कोशिश करती हैं, लेकिन कमजोर लेखन उन्हें भी ज्यादा मौका नहीं देता। चंदन राय सान्याल और निकी वालिया जैसे उम्दा कलाकारों की प्रतिभा का फिल्म में बेहद खराब इस्तेमाल किया गया है। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक विवेक बी अग्रवाल की सबसे बड़ी गलती यह है कि उन्होंने शोर को कॉमेडी समझ लिया। पूरी फिल्म में किरदार लगातार भागते हैं, चिल्लाते हैं और एक दूसरे के पीछे दौड़ते रहते हैं, लेकिन कोई भी सिचुएशन ऐसी नहीं बनती जिस पर खुलकर हंसी आए। स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा उलझा हुआ है। नए किरदार आते रहते हैं, लेकिन कहानी को मजबूत करने के बजाय उसे और बिखेर देते हैं। कई पंचलाइन बिना असर छोड़े निकल जाती हैं। गलतफहमियों पर टिकी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी राइटिंग होती है, लेकिन यहां वही सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है। क्लाइमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह अपनी पकड़ खो देती है। फिल्म का तकनीकी पक्ष लंदन की लोकेशन अच्छी लगती है और सिनेमैटोग्राफी भी ठीक ठाक है। एडिटिंग अगर थोड़ी और कसी हुई होती तो फिल्म का असर कुछ बेहतर हो सकता था। लेकिन कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले के सामने तकनीकी पक्ष भी बेबस नजर आता है। फिल्म में म्यूजिक अमित त्रिवेदी का संगीत फिल्म की कुछ गिनी चुनी अच्छी बातों में शामिल है। हालांकि गाने कहानी की रफ्तार को रोकते हैं। सबसे अजीब फैसला आखिर में लगातार गाने रखने का है, जिससे फिल्म खत्म होने के बाद भी खत्म होती हुई महसूस नहीं होती। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भाई तेरा स्टार है’ एक ऐसी कॉमेडी है, जिसमें सबसे ज्यादा कमी हंसी की है। कमजोर कहानी, बिखरा हुआ स्क्रीनप्ले, फीका निर्देशन और राघव जुयाल की निराशाजनक लीड परफॉर्मेंस मिलकर इस फिल्म को बेहद थका देने वाला अनुभव बना देते हैं। जिस फिल्म से राघव को बतौर सोलो हीरो नई पहचान मिलनी थी, वही फिल्म उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। अगर अच्छी कॉमेडी देखने की उम्मीद लेकर थिएटर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीद और आपका धैर्य दोनों तोड़ देगी।
पतंजलि ग्रुप खरीदेगा मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि आयुर्वेद को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। नियामक ने 28 जुलाई 2026 के पत्र के जरिए इस अधिग्रहण को हरी झंडी दी है।यह मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख से अगले 3 महीने तक मान्य रहेगी। पतंजलि के साथ कौन-कौन से फाउंडेशन शामिल हैं? इस अधिग्रहण प्रक्रिया में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के साथ कई धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्ट/फाउंडेशन भी शामिल हैं। इनमें एस.आर. फाउंडेशन, रीति फाउंडेशन, आरआर फाउंडेशन, सुरुचि फाउंडेशन और स्वाति फाउंडेशन के नाम शामिल हैं। ये सभी मिलकर मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के मौजूदा शेयरधारकों से हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेंगे। मार्च 2025 में हुआ था शेयर परचेज एग्रीमेंट इस डील की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब पतंजलि-एलेड बायर ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत किए गए थे। 12 मार्च 2025 को कंपनी ने एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद regulatory समीक्षा प्रक्रिया में देरी के कारण 12 मार्च 2026 को एग्रीमेंट की लॉन्ग-स्टॉप डेट (समय सीमा) को आगे बढ़ाया गया था। 1 साल से ज्यादा समय से अटका था रेगुलेटरी अप्रूवल एग्रीमेंट साइन होने के बाद से यह सौदा लगभग 16 महीने से नियामक समीक्षा के तहत अटका हुआ था। IRDAI की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब मालिकाना हक बदलने का रास्ता साफ हो गया है। खरीदार समूह को अब अगले तीन महीनों की तय सीमा में शेयर ट्रांसफर और IRDAI द्वारा रखी गई शर्तों को पूरा करना होगा। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में बदलेगा मालिकाना हक सभी जरूरी औपचारिकताएं, लीगल प्रोसेस और कांट्रैक्ट से जुड़ी शर्तें पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का ओनरशिप ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत होगी।
मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पतंजलि ग्रुप खरीदेगा:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार लगभग 4,500 करोड़ रुपए में ये डील हुई है। नियामक ने 28 जुलाई 2026 के पत्र के जरिए इस अधिग्रहण को हरी झंडी दी है।यह मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख से अगले 3 महीने तक मान्य रहेगी। 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी पतंजलि इस डील के तहत पतंजलि आयुर्वेद 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप 24.5% हिस्सेदारी का मालिक बनेगा। इससे पहले इस कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदार सनोटी प्रॉपर्टीज (आदार पूनावाला समूह) थी। IRDAI की मंजूरी मिलने के बाद अब पतंजलि मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की प्रमोटर कंपनी बन जाएगी। मार्च 2025 में हुआ था शेयर परचेज एग्रीमेंट इस डील की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब पतंजलि-एलेड बायर ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत किए गए थे। 12 मार्च 2025 को कंपनी ने एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद regulatory समीक्षा प्रक्रिया में देरी के कारण 12 मार्च 2026 को एग्रीमेंट की लॉन्ग-स्टॉप डेट (समय सीमा) को आगे बढ़ाया गया था। 1 साल से ज्यादा समय से अटका था रेगुलेटरी अप्रूवल एग्रीमेंट साइन होने के बाद से यह सौदा लगभग 16 महीने से नियामक समीक्षा के तहत अटका हुआ था। IRDAI की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब मालिकाना हक बदलने का रास्ता साफ हो गया है। खरीदार समूह को अब अगले तीन महीनों की तय सीमा में शेयर ट्रांसफर और IRDAI द्वारा रखी गई शर्तों को पूरा करना होगा। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में बदलेगा मालिकाना हक सभी जरूरी औपचारिकताएं, लीगल प्रोसेस और कांट्रैक्ट से जुड़ी शर्तें पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का ओनरशिप ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत होगी।








