सेंसेक्स 300 अंक गिरकर 78,600 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 50 अंक नीचे 24580 पर आया; बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

आज यानी शुक्रवार, 7 अगस्त को सेंसेक्स 300 अंक (0.40%) की गिरावट के साथ 78,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में 50 अंकों (0.20%) की गिरावट है, ये 24,580 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकावली है, जबकि आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी। एशियाई बाजारों में भी गिरावट अमेरिकी बाजारों में कल गिरावट रही विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 2408 करोड़ के शेयर खरीदे कल सेंसेक्स 374 अंक चढ़कर बंद हुआ था
असम बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं सलमान खान:500 लोगों के लिए सेमी पर्मानेंट घर बनवाएंगे, एक्टर रणदीप हुड्डा भी राहत कार्य में लगे

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए NGO ग्लोबल सिख्स के साथ हाथ मिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सलमान ने बाढ़ से बेघर हुए लोगों के लिए 500 सेमी-पर्मानेंट घर बनवाने का फैसला लिया है। सलमान की संस्था बीइंग ह्यूमन इससे पहले भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरतमंदों तक भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने में सहयोग कर चुकी है। अब राहत अभियान के दूसरे चरण में प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर फोकस किया जा रहा है। अब तक 220 सेमी-पर्मानेंट घर तैयार मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, असम के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल शिवसागर जिले के नेपाली खुटी गांव में अब तक करीब 220 सेमी-पर्मानेंट घर बनाए जा चुके हैं। ये घर बांस और टिन की छत से तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुनर्वास की योजना पहले से ही NGO के राहत अभियान का हिस्सा थी। हालांकि, जब सलमान खान ने अभिनेता रणदीप हुड्डा को मौके पर राहत कार्य करते देखा, तो उन्होंने इस अभियान से जुड़ने का फैसला किया। एक घर की लागत 35 से 40 हजार रुपए रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि रणदीप हुड्डा ने सलमान को ग्लोबल सिख्स के राहत अभियान की जानकारी दी, जिसमें करीब 70 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं। इसके बाद संस्था के संस्थापक अमरप्रीत सिंह ने सलमान को बताया कि प्रत्येक सेमी-पर्मानेंट घर बनाने में 35 हजार से 40 हजार रुपए का खर्च आता है। इसके बाद सलमान खान ने संस्था के साथ मिलकर 500 घरों के निर्माण का फैसला लिया। अमरप्रीत सिंह बोले- सलमान ने कहा, ‘आप लोग चिंता मत करो’ राहत अभियान को लेकर अमरप्रीत सिंह ने मिड-डे से बातचीत में कहा, “सलमान खान ने कुछ दिन पहले हमसे बात की थी और कहा- आप लोग चिंता मत करो। 220 घर तैयार हो चुके हैं और इन्हें प्रभावित परिवारों को सौंपा जा रहा है। हमारी टीम एक दिन में आठ से दस घर बना सकती है।” रणदीप हुड्डा बोले- मानवता सबसे ऊपर वहीं, अभिनेता रणदीप हुड्डा भी लगातार राहत कार्यों में सक्रिय हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिवसागर रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावित परिवार शरण लिए हुए हैं। रणदीप ने कहा, “हम पिछले सात दिनों से लगातार प्रभावित लोगों के लिए खाना तैयार कर रहे हैं और उन्हें पहुंचा रहे हैं। मानवता सबसे ऊपर है। मैं कई सालों से ग्लोबल सिख्स के साथ काम कर रहा हूं और उन्होंने जमीनी स्तर पर शानदार काम किया है। मैं सभी लोगों से अपील करूंगा कि वे अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करें। जहां भी कोई संकट हो, वहां लोगों की सहायता करना हमारा कर्तव्य है।” बॉलीवुड सेलेब्स ने की मदद की अपील बॉलीवुड सेलेब्स एक बार फिर 2026 में असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। एक्ट्रेस आलिया भट्ट, भूमि पेडनेकर, सिंगर गुरु रंधावा और एक्ट्रेस राशि खन्ना ने लोगों से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने की अपील की है। आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया से लिखा था, इस समय हमारे देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें असम सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है, जो बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। 60 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह हर साल होता है, फिर भी हर बार हम इसके लिए तैयार नहीं होते। असम को इस समय तुरंत मदद की जरूरत है और आने वाले लंबे समय तक पुनर्वास के लिए भी लगातार सहयोग की आवश्यकता होगी। अगर आप सोच रहे हैं कि आप किस तरह मदद कर सकते हैं, तो अगले कुछ दिनों में मैं उन तरीकों को साझा करूंगी जिनके जरिए हम जमीनी स्तर पर काम कर रहे संगठनों के माध्यम से राहत कार्यों में सहयोग कर सकते हैं।
असम बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं सलमान खान:500 लोगों के लिए सेमी पर्मानेंट घर बनवाएंगे, एक्टर रणदीप हुड्डा भी राहत कार्य में लगे

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए NGO ग्लोबल सिख्स के साथ हाथ मिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सलमान ने बाढ़ से बेघर हुए लोगों के लिए 500 सेमी-पर्मानेंट घर बनवाने का फैसला लिया है। सलमान की संस्था बीइंग ह्यूमन इससे पहले भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरतमंदों तक भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने में सहयोग कर चुकी है। अब राहत अभियान के दूसरे चरण में प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर फोकस किया जा रहा है। अब तक 220 सेमी-पर्मानेंट घर तैयार मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, असम के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल शिवसागर जिले के नेपाली खुटी गांव में अब तक करीब 220 सेमी-पर्मानेंट घर बनाए जा चुके हैं। ये घर बांस और टिन की छत से तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुनर्वास की योजना पहले से ही NGO के राहत अभियान का हिस्सा थी। हालांकि, जब सलमान खान ने अभिनेता रणदीप हुड्डा को मौके पर राहत कार्य करते देखा, तो उन्होंने इस अभियान से जुड़ने का फैसला किया। एक घर की लागत 35 से 40 हजार रुपए रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि रणदीप हुड्डा ने सलमान को ग्लोबल सिख्स के राहत अभियान की जानकारी दी, जिसमें करीब 70 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं। इसके बाद संस्था के संस्थापक अमरप्रीत सिंह ने सलमान को बताया कि प्रत्येक सेमी-पर्मानेंट घर बनाने में 35 हजार से 40 हजार रुपए का खर्च आता है। इसके बाद सलमान खान ने संस्था के साथ मिलकर 500 घरों के निर्माण का फैसला लिया। अमरप्रीत सिंह बोले- सलमान ने कहा, ‘आप लोग चिंता मत करो’ राहत अभियान को लेकर अमरप्रीत सिंह ने मिड-डे से बातचीत में कहा, “सलमान खान ने कुछ दिन पहले हमसे बात की थी और कहा- आप लोग चिंता मत करो। 220 घर तैयार हो चुके हैं और इन्हें प्रभावित परिवारों को सौंपा जा रहा है। हमारी टीम एक दिन में आठ से दस घर बना सकती है।” रणदीप हुड्डा बोले- मानवता सबसे ऊपर वहीं, अभिनेता रणदीप हुड्डा भी लगातार राहत कार्यों में सक्रिय हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिवसागर रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावित परिवार शरण लिए हुए हैं। रणदीप ने कहा, “हम पिछले सात दिनों से लगातार प्रभावित लोगों के लिए खाना तैयार कर रहे हैं और उन्हें पहुंचा रहे हैं। मानवता सबसे ऊपर है। मैं कई सालों से ग्लोबल सिख्स के साथ काम कर रहा हूं और उन्होंने जमीनी स्तर पर शानदार काम किया है। मैं सभी लोगों से अपील करूंगा कि वे अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करें। जहां भी कोई संकट हो, वहां लोगों की सहायता करना हमारा कर्तव्य है।” बॉलीवुड सेलेब्स ने की मदद की अपील बॉलीवुड सेलेब्स एक बार फिर 2026 में असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। एक्ट्रेस आलिया भट्ट, भूमि पेडनेकर, सिंगर गुरु रंधावा और एक्ट्रेस राशि खन्ना ने लोगों से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने की अपील की है। आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया से लिखा था, इस समय हमारे देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें असम सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है, जो बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। 60 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह हर साल होता है, फिर भी हर बार हम इसके लिए तैयार नहीं होते। असम को इस समय तुरंत मदद की जरूरत है और आने वाले लंबे समय तक पुनर्वास के लिए भी लगातार सहयोग की आवश्यकता होगी। अगर आप सोच रहे हैं कि आप किस तरह मदद कर सकते हैं, तो अगले कुछ दिनों में मैं उन तरीकों को साझा करूंगी जिनके जरिए हम जमीनी स्तर पर काम कर रहे संगठनों के माध्यम से राहत कार्यों में सहयोग कर सकते हैं।
अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका का मानना है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से टकराव हुआ, तो राष्ट्रपति के पास सिर्फ बड़े परमाणु हमले का ही नहीं, छोटे एटम बम इस्तेमाल करने का भी विकल्प होना चाहिए। इससे दुश्मन पर दबाव बनाया जा सकेगा और अमेरिका के सहयोगी देशों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। इस पर चिंता क्यों जताई जा रही है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर छोटे एटम बम सैन्य योजना का हिस्सा बन गए, तो उनके इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य युद्ध परमाणु युद्ध में बदल सकता है। छोटे एटम बम क्या होते हैं? इन्हें टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कहा जाता है। ये बड़े परमाणु बमों से कम ताकतवर होते हैं और इन्हें पूरे शहर नहीं, बल्कि दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस या युद्ध के मैदान में सीमित निशानों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। दुनिया में आखिरी बार 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए थे। तब से किसी देश ने इनका इस्तेमाल नहीं किया है।
अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके।। टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार क्या हैं? टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कम क्षमता वाले परमाणु हथियार होते हैं। इन्हें पूरे शहर को तबाह करने के बजाय युद्ध के मैदान में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट, टैंक फॉर्मेशन या सैनिकों की तैनाती जैसे सीमित लक्ष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका को लगता है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से जंग हुई, तो सिर्फ बड़े परमाणु हमले का विकल्प काफी नहीं होगा। इसलिए वह छोटे एटम बमों को भी अपनी सैन्य योजना में शामिल करना चाहता है। उसका मानना है कि इससे दुश्मन पर दबाव बनेगा और जरूरत पड़ने पर सीमित जवाब देना आसान होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर छोटे एटम बम इस्तेमाल का विकल्प बन गए, तो उन्हें चलाने की संभावना भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य जंग देखते-देखते परमाणु जंग में बदल सकती है। रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रूस दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रखने वाला देश है। SIPRI और FAS के मुताबिक उसके पास 5,459 परमाणु हथियार हैं। अमेरिका 5,177 हथियारों के साथ दूसरे स्थान पर है। दोनों देशों के पास दुनिया के करीब 88% परमाणु हथियार हैं। वहीं, चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं। संख्या में वह काफी पीछे है, लेकिन परमाणु हथियारों का जखीरा सबसे तेजी से वही बढ़ा रहा है। 1945 के बाद परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? द्वितीय विश्व युद्ध में अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इसके बाद दुनिया ने परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता देखी। तभी से बड़ी परमाणु शक्तियों ने इन्हें युद्ध में चलाने के बजाय ‘न्यूक्लियर डिटरेंस’ (परमाणु प्रतिरोध) के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया। न्यूक्लियर डिटरेंस क्या है? इस रणनीति का मतलब है कि अगर कोई देश परमाणु हमला करेगा, तो जवाब में उसे भी उतना ही विनाशकारी परमाणु हमला झेलना पड़ेगा। यानी दोनों पक्षों को अस्वीकार्य नुकसान होगा। इसी डर ने अमेरिका, रूस समेत परमाणु शक्तियों को 1945 के बाद युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से रोके रखा है।
अंतरिक्ष स्टेशन को अपग्रेड करने नासा एस्ट्रोनॉट्स की स्पेस वॉक:पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट लगाई; 6.27 घंटे बाहर रहे

नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मीर ने शुक्रवार को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर स्पेस वॉक पूरी की। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट को असेंबल किया, जिससे भविष्य में सोलर एरे लगाने का रास्ता साफ हो गया है। यह स्पेस वॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुई और शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे) समाप्त हुई। यह स्पेस स्टेशन के लिए 281वीं, जेसिका मीर के लिए छठी और अनिल मेनन के लिए पहली स्पेस वॉक थी। छह घंटे से ज्यादा चली स्पेस वॉक मेनन और मीर ने क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलकर छह घंटे 27 मिनट तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी के बाहरी हिस्से में स्ट्रक्चरल अपग्रेड का काम किया। उनका मकसद स्टेशन के स्टारबोर्ड 6 ट्रस सेगमेंट पर लगे 3B पावर चैनल पर माउंटिंग हार्डवेयर इंस्टॉल करना था। नासा ने बताया कि यह काम भविष्य में रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल लेबोरेटरी को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो महत्वपूर्ण सिस्टम को सपोर्ट करने और स्पेस स्टेशन को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने में मददगार होगी। नासा में मॉनीटरिंग की 3 तस्वीरें… अब तक 6 सोलर एरे तैनात साल 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह IROSA असेंबली तैनात कर चुके हैं। अब केवल दो असेंबली बची हैं, जिन्हें इस साल के अंत तक स्टेशन पर भेजा जाएगा। स्पेस वॉक के दौरान मेनन एक आर्टिकुलेटिंग पोर्टेबल फुट रेस्टोरेंट पर तैनात थे, जिससे उन्हें ट्रस पर काम करने के लिए स्थिर एंगल मिला। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बाद में केबलिंग का काम पूरा किया, जो भविष्य में iROSA से 3B पावर चैनल तक बिजली पहुंचाएगी। इसके बाद उन्होंने स्ट्रट्स को मल्टी-लेयर इंसुलेशन से कवर किया। काम के दौरान मीर ने मेनन से चांद दिखने की बात कही, जिस पर मेनन ने कहा कि उन्हें वहां भविष्य का मून बेस दिखाई दे रहा है। अगस्त में दो और स्पेस वॉक होंगी यह इस महीने एक्सपेडिशन 75 क्रू के लिए तीन स्पेस वॉक में से पहली थी। अगली स्पेस वॉक 13 अगस्त को होगी, जिसमें दो अंतरिक्ष यात्री स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना बदलेंगे। यह एंटीना ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और स्पेस स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड कम्युनिकेशन के लिए जरूरी है। इसके बाद 25 अगस्त को होने वाली स्पेस वॉक में क्रू मेंबर्स पावर चैनल केबल और डेटा रिले सिस्टम को कनेक्ट करेंगे। नासा के अनुसार, इस दौरान वे हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर स्पेसक्राफ्ट डॉकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले नेविगेशनल एड को भी बदलेंगे।
अंतरिक्ष स्टेशन को अपग्रेड करने नासा एस्ट्रोनॉट्स की स्पेस वॉक:पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट लगाई; 6.27 घंटे बाहर रहे

नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मीर ने शुक्रवार को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर स्पेस वॉक पूरी की। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट को असेंबल किया, जिससे भविष्य में सोलर एरे लगाने का रास्ता साफ हो गया है। यह स्पेस वॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुई और शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे) समाप्त हुई। यह स्पेस स्टेशन के लिए 281वीं, जेसिका मीर के लिए छठी और अनिल मेनन के लिए पहली स्पेस वॉक थी। छह घंटे से ज्यादा चली स्पेस वॉक मेनन और मीर ने क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलकर छह घंटे 27 मिनट तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी के बाहरी हिस्से में स्ट्रक्चरल अपग्रेड का काम किया। उनका मकसद स्टेशन के स्टारबोर्ड 6 ट्रस सेगमेंट पर लगे 3B पावर चैनल पर माउंटिंग हार्डवेयर इंस्टॉल करना था। नासा ने बताया कि यह काम भविष्य में रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल लेबोरेटरी को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो महत्वपूर्ण सिस्टम को सपोर्ट करने और स्पेस स्टेशन को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने में मददगार होगी। नासा में मॉनीटरिंग की 3 तस्वीरें… अब तक 6 सोलर एरे तैनात साल 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह IROSA असेंबली तैनात कर चुके हैं। अब केवल दो असेंबली बची हैं, जिन्हें इस साल के अंत तक स्टेशन पर भेजा जाएगा। स्पेस वॉक के दौरान मेनन एक आर्टिकुलेटिंग पोर्टेबल फुट रेस्टोरेंट पर तैनात थे, जिससे उन्हें ट्रस पर काम करने के लिए स्थिर एंगल मिला। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बाद में केबलिंग का काम पूरा किया, जो भविष्य में iROSA से 3B पावर चैनल तक बिजली पहुंचाएगी। इसके बाद उन्होंने स्ट्रट्स को मल्टी-लेयर इंसुलेशन से कवर किया। काम के दौरान मीर ने मेनन से चांद दिखने की बात कही, जिस पर मेनन ने कहा कि उन्हें वहां भविष्य का मून बेस दिखाई दे रहा है। अगस्त में दो और स्पेस वॉक होंगी यह इस महीने एक्सपेडिशन 75 क्रू के लिए तीन स्पेस वॉक में से पहली थी। अगली स्पेस वॉक 13 अगस्त को होगी, जिसमें दो अंतरिक्ष यात्री स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना बदलेंगे। यह एंटीना ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और स्पेस स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड कम्युनिकेशन के लिए जरूरी है। इसके बाद 25 अगस्त को होने वाली स्पेस वॉक में क्रू मेंबर्स पावर चैनल केबल और डेटा रिले सिस्टम को कनेक्ट करेंगे। नासा के अनुसार, इस दौरान वे हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर स्पेसक्राफ्ट डॉकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले नेविगेशनल एड को भी बदलेंगे।
ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष अब ज्यादा लंबा चलेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं। उधर, यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 30 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेजी पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज डील जल्द संभव: AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा अंतिम चरण में है। 2. ट्रम्प बोले- ईरान खुद बातचीत चाहता है: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। 3. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से बुधवार को सिर्फ 2 जहाज गुजरे, जबकि तनाव से पहले यहां रोज 130-140 जहाज गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है। 4. होर्मुज में टोल लगा तो दुनिया में महंगाई बढ़ेगी: दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल या सर्विस शुल्क न लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। 5. लेबनान में 2 इजराइली सैनिकों की मौत: दक्षिणी लेबनान में एक इमारत में धमाके में दो इजराइली सैनिक मारे गए और चार घायल हुए। इसके बाद इजराइल ने कई इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
न्यू मैक्सिको कोर्ट का मेटा पर ₹5,390 करोड़ का जुर्माना:कहा- बच्चों की मेंटल हेल्थ पर असर हुआ;

न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने मेटा पर 567 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 5000 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मेटा के प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों की मेंटल हेल्थ पर हुए दुष्प्रभाव के खिलाफ जारी किया गया है। अदालत ने यह फैसला कंपनी की जवाबदेही तय करते हुए सुनाया है। यह पहली बार है जब किसी राज्य ने एक बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ इस तरह की स गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि जुर्मान की रकम का बड़ा हिस्सा 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज में इस्तेमाल होगा। बाकी रकम अगले 5 साल तक अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी। मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की सुरक्षा और मेंटल हेल्थ को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स का बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ा है। मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल सेन शुरू किया था मुकदमा यह मामला न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने दायर किया था। मुकदमा इस बात पर आधारित था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम और फेसबुक बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं और कंपनी ने जानबूझकर इन खतरों को नजरअंदाज किया। कंपनी पर आरोप लगा कि एल्गोरिदम को इस तरह डिजाइन किया है कि वे बच्चों को ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाले) बनाते हैं। इसके असर से बच्चों में डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्महत्या जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी हुई। मुकदमा केवल मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं था। इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बाल यौन शोषण और बच्चों को फंसाने के लिए किया जा रहा था, और कंपनी ने इस खतरे के बारे में जानते हुए भी ठोस कदम नहीं उठाए।
Meta Faces Huge Fine in New Mexico Court Over Children Mental Health

8 मिनट पहले कॉपी लिंक न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने मेटा पर 567 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 5000 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मेटा के प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों की मेंटल हेल्थ पर हुए दुष्प्रभाव के खिलाफ जारी किया गया है। अदालत ने यह फैसला कंपनी की जवाबदेही तय करते हुए सुनाया है। यह पहली बार है जब किसी राज्य ने एक बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की है। गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि जुर्माने की रकम का बड़ा हिस्सा 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज में इस्तेमाल होगा। बाकी रकम अगले 5 साल तक अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी। मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की सुरक्षा और मेंटल हेल्थ को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स का बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ा है। Meta आगे क्या कदम उठा सकती है… अपील: मेटा ने इस फैसले को मानने से इनकार किया है। कंपनी ने कहा है कि वह इस जुर्माने के खिलाफ अपील करेगी। कंपनी का तक है कि वे प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन सभी ‘बैड एक्टर्स’ को रोकना चुनौतीपूर्ण है। बेंच के सुझाव मानेगी: मामले का दूसरा हिस्सा यानी ट्रायल बेंच यह तय कर सकता है कि क्या मेटा को अपने एल्गोरिदम में अनिवार्य बदलाव करने होंगे। क्या उसे बच्चों के सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए और ज्यादा आर्थिक जिम्मेदारी उठानी होगी। बड़ा दबाव: इस फैसले के बाद अन्य 40 से अधिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल भी मेटा के खिलाफ सख्त रुख अपना सकते हैं, जिससे आने वाले समय में कंपनी पर और अधिक कानूनी और नियामक दबाव बढ़ेगा। मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल सेन शुरू किया था मुकदमा यह मामला न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने दायर किया था। आरोप था कि मेटा के इंस्टाग्राम-फेसबुक बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कंपनी ने जानबूझकर इन खतरों को नजरअंदाज किया। कंपनी पर आरोप लगा कि एल्गोरिदम को ऐसे डिजाइन किया है कि वे बच्चों को ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाले) बनाते हैं। इसके असर से बच्चों में डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्महत्या जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी हुई। मुकदमा केवल मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं था। इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बाल यौन शोषण और बच्चों को फंसाने के लिए किया जा रहा था, और कंपनी ने इस खतरे के बारे में जानते हुए भी ठोस कदम नहीं उठाए। एक दिन पहले भारत सरकार से माफी मांगनी पड़ी Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी है। इसी दौरान कंपनी ने यह भी माना कि उसके प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मैटेरियल, डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूक हुई हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







