Tuesday, 22 Sep 2026 | 01:34 PM

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मुस्लिम नाटो- पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये ने रक्षा समझौता साइन किया:एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा; साझा ट्रेनिंग और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा

मुस्लिम नाटो- पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये ने रक्षा समझौता साइन किया:एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा; साझा ट्रेनिंग और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा

तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने शुक्रवार को आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पिछले साल रियाद और इस्लामाबाद के बीच हुए इसी तरह के समझौते की अगली कड़ी है। इस समझौते को मक्का संयुक्त रक्षा समझौता कहा जा रहा है। इसमें ऐसे देश शामिल हैं, जो ईरान और इजराइल के बीच स्थित हैं। समझौते के बाद मध्य पूर्व में बदलते शक्ति संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता ईरान और इजराइल से दूरी रखते हुए दोनों के बीच एक बड़े क्षेत्रीय गठबंधन की शुरुआत हो सकता है। हालांकि, तीनों देश क्षेत्रीय खतरों के सामने एकता और ताकत दिखाना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने इसे किसी के खिलाफ रोकथाम के समझौते के रूप में पेश करने से सावधानी बरती है। समझौते के तहत सैन्य मदद कितनी तय है विश्लेषकों के मुताबिक, तीनों देशों ने क्षेत्रीय विरोधियों को नाराज करने से बचने की कोशिश की है। यह अभी साफ नहीं है कि समझौता अपने किसी सदस्य पर हमला होने पर बाकी सदस्यों को उसकी रक्षा के लिए कितना मजबूर करेगा। किलोवेन ग्रुप सलाहकार कंपनी के चेयरमैन हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा, “हमने अभी मक्का घोषणा नहीं देखी है। हमारा मानना है कि इसमें कहा गया है कि एक पर हमला सभी पर हमला माना जाना चाहिए। यहां ‘माना जाना चाहिए’ महत्वपूर्ण शब्द हैं, क्योंकि इसका मतलब ‘जरूरी तौर पर’ नहीं है।” क्षेत्रीय खतरे इन देशों से दूर नहीं हैं। पाकिस्तान फरवरी से अफगानिस्तान के साथ सीमा संघर्ष में उलझा हुआ है। मई 2025 में उसका परमाणु शक्ति संपन्न भारत के साथ भी कई दिनों तक गोलीबारी का आदान-प्रदान हुआ था। सऊदी अरब पर फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान और उसके सहयोगी बार-बार हमले कर चुके हैं। तुर्किये कई साल से देश के अंदर और बाहर कुर्द सशस्त्र समूहों से लड़ता रहा है। इजराइल के साथ उसका तनाव भी बढ़ा है। उलमैन जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तीनों देशों को इनमें से किसी संघर्ष में कैसे खींच सकता है। उलमैन ने कहा, “मान लीजिए यमन में हूती सऊदी अरब पर हमला करते हैं, तो क्या इससे तुर्किये इसमें शामिल होगा? क्या पाकिस्तान शामिल होगा? यह अभी देखा जाना बाकी है।” मध्य पूर्व में बदलते समीकरण मध्य पूर्व में पिछले कुछ सालों में काफी उथल-पुथल हुई है। इसमें सबसे अहम घटनाएं 7 अक्टूबर 2023 को हमास का इजराइल पर हमला और उसके बाद गाजा में इजराइल का नरसंहार हैं। ईरान और इजराइल के बीच दशकों से चल रही धमकियां भी ऐसे क्षेत्रीय युद्ध में बदल गई हैं, जो अभी खत्म नहीं हुआ है। अब मध्य पूर्व और उसके बाहर के कई देश इस अव्यवस्था से निपटने और अगले दौर की तैयारी का तरीका तलाश रहे हैं। इनमें से कई देश पुराने मतभेद पीछे छोड़कर आपसी खतरों के सामने व्यावहारिक रास्ता अपनाने का फैसला करते दिख रहे हैं। तुर्किये और सऊदी अरब इसके उदाहरण हैं। 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की अपने देश के इस्तांबुल वाणिज्य दूतावास में हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गहरी दरार आ गई थी। यह तनाव कई साल तक बना रहा। लेकिन 2022 तक रियाद और अंकारा ने पुराने मतभेद पीछे रखने शुरू कर दिए। सऊदी अरब पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा था, जबकि तुर्किये अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करना चाहता था। इसके बाद से इजराइल और ईरान ने मध्य पूर्व पर दबाव बनाया है और इस क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाओं पर आगे बढ़े हैं। माना जाता है कि इसी दबाव ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये को एक-दूसरे के करीब आने में मदद की है। तीनों देशों की अलग-अलग ताकत मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का मकसद तीनों देशों के सामने आने वाले किसी भी खतरे को रोकना है। अल जजीरा के संवाददाता उसामा बिन जावेद ने कहा कि तीनों देश इस समझौते में अलग-अलग ताकत लेकर आए हैं। बिन जावेद ने कहा, “इनमें से हर देश अपनी खास क्षमता लेकर आया है। पाकिस्तान के पास युद्ध का अनुभव रखने वाली सेना, हथियार और परमाणु हथियार हैं। मुस्लिम बहुल देश में परमाणु हथियार रखने वाला यह इकलौता देश है।” उन्होंने कहा, “नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य तुर्किये के पास दुनिया की बेहतरीन ड्रोन तकनीक और उन्नत रक्षा निर्माण क्षमता है। सऊदी अरब इन सबको आर्थिक ताकत देने का काम करेगा।” अमेरिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नए सैन्य गठबंधनों और खतरों से बचाव के नए तरीकों की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है। सऊदी अरब और कुछ हद तक तुर्किये लंबे समय से अमेरिका को अपना प्रमुख सुरक्षा सहयोगी मानते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति लगातार बदलती और अनिश्चित होती जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मध्य पूर्व में इजराइल अमेरिका की विदेश नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता दिखाई देता है। इससे यह चिंता बढ़ी है कि अमेरिका अपने दूसरे सहयोगियों की रक्षा करने के लिए कितना तैयार होगा। उलमैन ने कहा, “ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि सहयोगियों को अपनी रक्षा खुद करनी होगी। मेरे लिए यह साफ है कि हमारे सहयोगी दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।” इजराइल और ईरान को लेकर सावधानी इजराइल और ईरान ने खुद को क्षेत्रीय खतरे के रूप में दिखाया है। फिर भी मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल देशों ने यह बताने से सावधानी बरती है कि यह गठबंधन किसी बाहरी ताकत के खिलाफ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इजराइल और ईरान से पैदा होने वाले खतरे साफ हैं। बिन जावेद ने कहा, “तीनों देशों के लिए इजराइल क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता का सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।” उन्होंने कहा, “ईरान इस खतरे की सूची में उसके ठीक बाद आता है। खासकर ईरान की ओर से वॉशिंगटन के हितों पर हमलों के बाद सऊदी अरब के लिए यह खतरा और ज्यादा है।” क्षेत्र के कई लोगों का मानना है कि इजराइल ने 2023 के बाद यह दिखाया है कि वह मतभेदों को बातचीत

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने हाल ही में बताया कि सैफ कई बार उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में दे देते थे। यह बात उन्होंने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के यूट्यूब शो में बताई। सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा पटौदी ने अपने बचपन का बड़ा हिस्सा पटौदी परिवार के महल में बिताया। हालांकि, सोहा ने बताया कि घर में उन्हें कभी शाही जिंदगी जैसा एहसास नहीं कराया गया। उनके पिता पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी बच्चों को खर्चों की अहमियत समझाते थे। सोहा ने कहा कि उनके पिता घर में बिजली बचाने पर जोर देते थे और पीले रंग के पोस्ट-इट नोट्स पर लाइट बंद करने की याद दिलाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन में दोस्तों के घर जाने की अनुमति कई बार इसलिए नहीं मिलती थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि पेट्रोल पर फालतू का खर्च नहीं होना चाहिए। 100 रुपए पॉकेट मनी मिलती थी बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने पॉकेट मनी का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें और सोहा को 100 रुपए मिलते थे। वहीं, उस समय सैफ अली खान इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान सोहा ने हंसते हुए कहा कि सैफ पैसे चुरा लेते थे। इस पर सबा ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब वे इंग्लैंड जाती थीं, तो उन्हें 5 पाउंड मिलते थे, जिन्हें सैफ अक्सर उधार ले लेते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सैफ उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में वापस दे देते थे। सैफ की पहली शादी में नहीं पहुंचीं बहनें इसी इंटरव्यू में सोहा और सबा ने बताया कि वे भाई सैफ अली खान की पहली शादी में नहीं पहुंची थीं। सबा पटौदी ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, तब वह और सोहा दोनों ही स्कूल में थीं। सोहा ने भी बताया कि शादी बहुत जल्दबाजी में हुई थी, इसलिए दोनों बहनें इसका हिस्सा नहीं बन सकीं। प्रिंसिपल ऑफिस से आया था फोन सबा ने आगे बताया कि शादी की अचानक आई मीडिया खबरों के कारण स्कूल प्रशासन को दखल देना पड़ा था। सबा के मुताबिक, प्रिंसिपल के ऑफिस से उन्हें फोन आया था। उनसे कहा गया था कि जब तक पुष्टि न हो जाए, वे इस बारे में किसी से कोई बात न करें। सबा ने याद करते हुए कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे किसी को कुछ न बताएं, क्योंकि यह खबर मीडिया में आ चुकी थी और उन्हें इसकी सच्चाई नहीं पता थी।

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने हाल ही में बताया कि सैफ कई बार उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में दे देते थे। यह बात उन्होंने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के यूट्यूब शो में बताई। सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा पटौदी ने अपने बचपन का बड़ा हिस्सा पटौदी परिवार के महल में बिताया। हालांकि, सोहा ने बताया कि घर में उन्हें कभी शाही जिंदगी जैसा एहसास नहीं कराया गया। उनके पिता पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी बच्चों को खर्चों की अहमियत समझाते थे। सोहा ने कहा कि उनके पिता घर में बिजली बचाने पर जोर देते थे और पीले रंग के पोस्ट-इट नोट्स पर लाइट बंद करने की याद दिलाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन में दोस्तों के घर जाने की अनुमति कई बार इसलिए नहीं मिलती थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि पेट्रोल पर फालतू का खर्च नहीं होना चाहिए। 100 रुपए पॉकेट मनी मिलती थी बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने पॉकेट मनी का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें और सोहा को 100 रुपए मिलते थे। वहीं, उस समय सैफ अली खान इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान सोहा ने हंसते हुए कहा कि सैफ पैसे चुरा लेते थे। इस पर सबा ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब वे इंग्लैंड जाती थीं, तो उन्हें 5 पाउंड मिलते थे, जिन्हें सैफ अक्सर उधार ले लेते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सैफ उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में वापस दे देते थे। सैफ की पहली शादी में नहीं पहुंचीं बहनें इसी इंटरव्यू में सोहा और सबा ने बताया कि वे भाई सैफ अली खान की पहली शादी में नहीं पहुंची थीं। सबा पटौदी ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, तब वह और सोहा दोनों ही स्कूल में थीं। सोहा ने भी बताया कि शादी बहुत जल्दबाजी में हुई थी, इसलिए दोनों बहनें इसका हिस्सा नहीं बन सकीं। प्रिंसिपल ऑफिस से आया था फोन सबा ने आगे बताया कि शादी की अचानक आई मीडिया खबरों के कारण स्कूल प्रशासन को दखल देना पड़ा था। सबा के मुताबिक, प्रिंसिपल के ऑफिस से उन्हें फोन आया था। उनसे कहा गया था कि जब तक पुष्टि न हो जाए, वे इस बारे में किसी से कोई बात न करें। सबा ने याद करते हुए कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे किसी को कुछ न बताएं, क्योंकि यह खबर मीडिया में आ चुकी थी और उन्हें इसकी सच्चाई नहीं पता थी।

Dabur Products Ban Lifted | USA Becomes Top LPG Supplier to India

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नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर मेटा से जुड़ी रही। सरकार ने मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज शनिवार की छुट्‌टी के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. सरकार बोली- Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड रोडमैप भी मांगा है। इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटे: हाईकोर्ट बोला- लैब जांच में लेड लिमिट में मिला, अब केस का कोई आधार नहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। यह सभी क्रिमिनल केस मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की ज्यादा मात्रा पाए जाने के आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे। जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना: सबसे ज्यादा LNG भी US से आ रही; कतर से सप्लाई 91% घटी अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। होर्मुज संकट के बाद भारत की जरूरत की लगभग 67% कुकिंग गैस यानी LPG अमेरिका से ही आ रही। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रैट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर भी हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा: विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में संसद में पेश हुए नए बिल के बाद एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई पेमेंट करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि आम ग्राहकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है, यूपीआई उनके लिए फ्री ही रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर मेटा से जुड़ी रही। सरकार ने मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज शनिवार की छुट्‌टी के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. सरकार बोली- Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड रोडमैप भी मांगा है। इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटे: हाईकोर्ट बोला- लैब जांच में लेड लिमिट में मिला, अब केस का कोई आधार नहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। यह सभी क्रिमिनल केस मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की ज्यादा मात्रा पाए जाने के आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे। जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना: सबसे ज्यादा LNG भी US से आ रही; कतर से सप्लाई 91% घटी अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। होर्मुज संकट के बाद भारत की जरूरत की लगभग 67% कुकिंग गैस यानी LPG अमेरिका से ही आ रही। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रैट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर भी हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा: विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में संसद में पेश हुए नए बिल के बाद एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई पेमेंट करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि आम ग्राहकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है, यूपीआई उनके लिए फ्री ही रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Agni-4 Ballistic Missile Test & Anil Menon Spacewalk Record

Agni-4 Ballistic Missile Test & Anil Menon Spacewalk Record

Hindi News Career Agni 4 Ballistic Missile Test & Anil Menon Spacewalk Record | 8 August 37 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 1. अनिल मेनन और जेसिका मीर ने स्पेस वॉक की 7 अगस्त को भारतीय मूल के एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन ने अपनी पहली स्पेस वॉक पूरी की। वहीं जेसिका मीर ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर स्पेस वॉक की। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट को असेंबल किया, जिससे भविष्य में सोलर एरे लगाने का रास्ता साफ हो गया है। ये स्पेस वॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुई और शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे) खत्म हुई। ये स्पेस स्टेशन के लिए 281वीं, जेसिका मीर के लिए छठी और अनिल मेनन के लिए पहली स्पेस वॉक थी। मेनन और मीर ने क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलकर छह घंटे 27 मिनट तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी के बाहरी हिस्से में स्ट्रक्चरल अपग्रेड का काम किया। उनका मकसद स्टेशन के स्टारबोर्ड 6 ट्रस सेगमेंट पर लगे 3B पावर चैनल पर माउंटिंग हार्डवेयर इंस्टॉल करना था। नासा ने बताया कि यह काम भविष्य में रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल लेबोरेटरी को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो महत्वपूर्ण सिस्टम को सपोर्ट करने और स्पेस स्टेशन को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने में मददगार होगी। स्पेस स्टेशन पर कुल 8 नए सोलर पैनल लगाए जाने हैं, जिनमें से 6 लग चुके हैं। 2. बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 की सफल टेस्टिंग हुई 6 अगस्त को ओडिशा के चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 की सफल टेस्टिंग हुई। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस मिसाइल के सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर्स को चेक किया गया, जो पूरी तरह सफल रहे। इसमें एडवांस्ड एवियोनिक्स और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम हैं, जिनकी मदद से यह हाई एक्युरेसी के साथ 4000 KM की रेंज तक निशाना लगा सकती है। यह भारत में बनी एक मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है। इसे स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड की निगरानी में टेस्ट किया गया। DRDO के मुताबिक, अग्नि-4 में कई स्वदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इनमें कंपोजिट रॉकेट मोटर, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और हाई-परफॉर्मेंस ऑनबोर्ड कंप्यूटर शामिल हैं। इन टेक्नोलॉजी की मदद से मिसाइल की सटीकता और ऑपरेशन रेंज पहले से बेहतर हुई है। अग्नि-4 भारत के मिसाइल में अग्नि-2 और अग्नि-3 के बीच की क्षमता के अंतर को पूरा करती है। DRDO ने 2007 में अग्नि-4 मिसाइल प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। 2011 में DRDO की हैदराबाद में एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी की बनाई गई अग्नि-II प्राइम को आधिकारिक तौर पर अग्नि-4 नाम दिया गया। इस दौरान मिसाइल करीब 850km की ऊंचाई तक पहुंची और लगभग 4,000km की दूरी तय कर हिंद महासागर में अपने तय लक्ष्य पर सफलतापूर्वक पहुंची। अग्नि-4 का पहला टेस्ट 2010 में हुआ था, लेकिन वह सफल नहीं रहा था। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. आर प्रज्ञानंद ने ‘सेंट लुइस रैपिड और ब्लिट्ज’ खिताब जीता 6 अगस्त को इंडियन चेस ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका में सेंट लुइस रैपिड और ब्लिट्ज खिताब जीता। रैपिड राउंड के बाद प्रज्ञानानंदा पॉइंट्स टेबल में टॉप पर रहे। उन्होंने उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव को हराया। प्रज्ञानानंदा 50 हजार डॉलर यानी करीब 48 लाख रुपए की प्राइज मनी दी जाएगी। इससे पहले जून 2026 में प्रज्ञानानंदा नॉर्वे चेस का खिताब भी जीता था। ये टूर्नामेंट अमेरिका के सेंट लुइस शहर में 31 जुलाई से 7 अगस्त तक बीच आयोजित हुआ। प्रज्ञानानंदा इस खिताब को जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीयों में से एक बन गए हैं। प्रज्ञानंद अब विश्व शतरंज चैम्पियनशिप के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। प्रज्ञानानंदा का अब अगला ग्रैंड चेस टूर टूर्नामेंट सिंकफील्ड कप 10 अगस्त से शुरू होगा। प्रज्ञानंद 2016 में 10 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के इंटरनेशनल मास्टर (IAM) बने। प्रज्ञानंद 2018 में, 12 साल की उम्र में में दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने। 2019 में प्रज्ञानंद ने वर्ल्ड यूथ अंडर-18 चैंपियनशिप जीती। प्रज्ञानंद ने 2022 में 44वें चेस ओलंपियाड में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कांस्य जीता। 2022 टूर्नामेंट के दौरान प्रज्ञानंद ने रैपिड फॉर्मेट में वर्ल्ड चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भी हराया था। प्रज्ञानंद को 2022 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा खेल सम्मान अर्जुन अवार्ड दिया गया। प्रज्ञानंद ने FIDE सर्किट 2025 जीता और कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 के लिए क्वालीफाई किया, इस रूट से क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय बने। प्रज्ञानंद 2025 में भारत के टॉप रेटेड चेस प्लेयर बने थे। मिसलीनियस Miscellaneous 4.अमेरिका ने बर्थराइट सिटीजनशिप और बर्थ टूरिज्म नियम को सख्त किया 6 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बर्थराइट सिटीजनशिप और बर्थ टूरिज्म से जुड़े दो आदेशों पर साइन किये। इस आदेश के बाद उन विदेशी पर्यटकों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाए जाएंगे, जो अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। अमेरिकी कॉन्स्युलर अधिकारी अब उन सभी वीजा को खारिज या रद्द कर सकते हैं, जिन्हें लेकर यह शक होगा कि वे अमेरिका केवल बच्चा पैदा करने आ रहे हैं। दरअसल टूरिस्ट वीजा (B-1/B-2) पर अमेरिका जाने वाले टूरिस्ट यदि घूमने जा रहे हैं और उसका असली मकसद बच्चे को जन्म देना है, तो इसे ‘वीजा फ्रॉड’ माना जाएगा। ऐसे लोगों की US में आजीवन एंट्री बैन की जा सकती है। अमेरिका के संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, सामान्यतः अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला व्यक्ति अमेरिकी नागरिक माना जाता है, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या आव्रजन स्थिति कुछ भी हो। जून 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के पहले वाले आदेश को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था और जन्मजात नागरिकता के संवैधानिक संरक्षण को बरकरार रखा था। 5. बायो-एनर्जी योजना ‘गोबरधन’ को केंद्र की मंजूरी 6 अगस्त को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना ‘गोबरधन’ (GOBARdhan) को मंजूरी दी। इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपए मंजूर किये हैं। ये देश में बड़ी मात्रा में मौजूद कृषि अवशेषों, पशुओं के गोबर, प्रेस मड, नगरपालिका के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद को बायो एनर्जी में

Arunachal Pradesh Map Update | India Counters China Border Naming Move

Arunachal Pradesh Map Update | India Counters China Border Naming Move

2 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Arunachal Pradesh Map Update | India Counters China Border Naming Move

Arunachal Pradesh Map Update | India Counters China Border Naming Move

5 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…