करतारपुर कॉरिडोर पर विदेश मंत्रालय का आया बयान:सुरक्षा स्थिति के चलते 7 मई 2025 से सेवाएं बंद, SGPC ने वीजा कोटा बढ़ाने की मांग उठाई

पाकिस्तान जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों के लिए वीजा कोटा बढ़ाने और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग के बीच विदेश मंत्रालय ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सुरक्षा स्थिति को देखते हुए करतारपुर कॉरिडोर की सेवाएं फिलहाल निलंबित हैं। जायसवाल से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रतिनिधिमंडल की नई दिल्ली में पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स से मुलाकात और सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा कोटा बढ़ाने की मांग को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हर साल एक द्विपक्षीय समझौते के तहत सिख जत्थे पाकिस्तान स्थित तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले- सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने की मांग पर जायसवाल ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति के कारण इसकी सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं और अभी स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में संसद में भी सवाल उठाया गया था। विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स साद अहमद वारैच से मुलाकात के बाद आई है। प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2026 में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश गुरुपर्व से पहले अधिक संख्या में वीजा जारी करने की मांग की है। SGPC के अनुसार, प्रकाश गुरुपर्व के लिए 7,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान यात्रा हेतु पासपोर्ट जमा किए हैं। वहीं, पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से करीब 1,800 श्रद्धालुओं को ही वीजा जारी किए जाते हैं।
अमृतसर में गोल्डन टेंपल पहुंचे अभिनेता सुनील शेट्टी:परिवार संग टेका माथा, बोले- यहां आकर मिलती है अलग ऊर्जा और मन को सुकून

अमृतसर में बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी आज अपने परिवार के साथ गोल्डन टेंपल पहुंचे। उन्होंने गुरु घर में माथा टेका और सरबत के भले की अरदास की। इस दौरान उन्होंने पवित्र परिक्रमा में बैठकर गुरबाणी का श्रवण भी किया और वाहेगुरु का शुक्राना अदा किया। गोल्डन टेंपल पहुंचने के बाद सुनील शेट्टी भावुक नजर आए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें बेहद सुकून और खुशी मिलती है। उनके मुताबिक, गोल्डन टेंपल में पहुंचने के बाद कई बार उनके पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं होते और वह भावुक हो जाते हैं। सुनील शेट्टी ने कहा कि जब भी वह गोल्डन टेंपल आते हैं, उन्हें यहां से एक अलग तरह की ऊर्जा और सकारात्मकता महसूस होती है। गुरु घर में नतमस्तक होने के बाद मन को शांति मिलती है और ऐसा लगता है कि सब कुछ अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि यहां का आध्यात्मिक माहौल व्यक्ति को भीतर से मजबूत करता है। अभिनेता ने बताया कि 11 तारीख को उनकी शादी की सालगिरह थी। इसके बाद वह परिवार के साथ गुरु घर का आशीर्वाद लेने के लिए अमृतसर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अलग-अलग कारणों से गुरु घर आते हैं, लेकिन यहां आकर सेवा, विनम्रता और अच्छी सोच की प्रेरणा मिलती है। सुनील शेट्टी ने कहा कि निजी जीवन में भी सेवा भाव और सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गोल्डन टेंपल में नतमस्तक होने के बाद वह नई ऊर्जा के साथ अपने काम की शुरुआत करेंगे। उनके मुताबिक, यहां आना उनके लिए सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा हासिल करने का अवसर है। सुनील शेट्टी की यात्रा के दौरान उनके प्रशंसकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने गुरु घर की मर्यादा का सम्मान करते हुए माथा टेका, गुरबाणी सुनी और अरदास की। इसके बाद वह परिवार सहित गुरु घर से मिली आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ रवाना हुए।
Kangana Ranaut vs Baba Ramdev Controversy

10 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने योग गुरु बाबा रामदेव की टिप्पणी पर भड़कते हुए कहा कि बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में सपने मत देखिए। दरअसल, कंगना ने बाबा रामदेव की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कंगना के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान को लेकर कहा था कि ये बिगड़े दिमाग की निशानी है। कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” कंगना रनोट की पोस्ट। दरअसल, हाल ही में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना रनोट के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान की आलोचना की थी। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” साल 2006 में बाबा रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर ‘पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड’ की स्थापना की थी। जब सवाल पूछा गया था कि वो आपके योग की प्रशंसक रही हैं तो बाबा रामदेव ने कहा कि “मेरी प्रशंसा करें, योग की प्रशंसा करें तो मैं उनके गुनाहों पर यहां लीपापोती कर दूं?” बाबा रामदेव ने यह भी कहा था कि युवा की कोई जाति नहीं है। युवा में सब हैं। उसमें ब्राह्मणों के भी बालक हैं, क्षत्रियों के भी, वैश्यों के भी, दलित के भी, आदिवासी-वनवासी के, SC-ST के, सबके बालक हैं। आज युवा अपने आप में एक बहुत बड़ी ताकत है, उसको कोई नकार नहीं सकता। कंगना ने क्या कहा था दरअसल, हाल ही में कंगना ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था, “सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है। वे स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी को कमाना नहीं चाहतीं। जो महिलाएं वास्तव में स्वतंत्र होती हैं, वे विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की जिम्मेदारी भी खुद उठाती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर जीवन जीती हैं। वे यह सब अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं। यह तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की नई पीढ़ी है, जिन्हें मैं ‘जनरेशन गटर’ कहती हूं।” …………… कंगना रनोट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कंगना रनोट सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं:गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया; मुंबा देवी के भी दर्शन किए, देखें तस्वीरें बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनोट मंगलवार को मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं। उन्होंने मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और वहां कुछ समय बिताया। मंदिर दर्शन के दौरान कंगना पीली साड़ी में नजर आईं, जिस पर गोल्डन बॉर्डर था। उन्होंने इसके साथ मैचिंग ब्लाउज और ऑरेंज-गोल्डन दुपट्टा पहना था। लाल बिंदी, सिंपल ज्वेलरी और मिनिमल मेकअप से उन्होंने अपना लुक पूरा किया। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
'एक्स बॉयफ्रेंड के चलते पीरियड्स में शर्म आती थी':एक्ट्रेस अनुपमा बोलीं- पहले 11 बच्चे चाहती थीं, अभी एक भी नहीं चाहिए

साउथ एक्ट्रेस अनुपमा परमेश्वरन ने हाल ही में अपने अतीत के एक नार्सिसिस्टिक दुर्व्यवहार (आत्ममुग्धता से भरे शोषण) वाले रिश्ते के बारे में बताया। ध्यान वर्मा के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में अनुपमा ने कहा कि उनके एक्स-पार्टनर ने कथित तौर पर उन्हें एक्ट्रेस होने, कॉन्फिडेंट होने और यहां तक कि पीरियड्स होने जैसी बातों पर भी शर्मिंदा महसूस कराया। रिश्ते के असर के बारे में बताते हुए अनुपमा ने कहा कि पहले वह 11 बच्चे चाहती थीं, लेकिन अब बच्चे नहीं चाहतीं। उन्होंने बताया कि पूर्व पार्टनर हर बहस को उनके पीरियड्स से जोड़ देता था, फिर चाहे वह पीरियड्स के किसी भी दिन हुई हो। उन्होंने कहा, “पीरियड्स का पहला दिन हो, पांचवां दिन, दसवां दिन, पंद्रहवां दिन, बीसवां दिन या पच्चीसवां दिन, साइकिल का कोई भी दिन हो। आप इस व्यक्ति की किसी गलती पर उससे सवाल करेंगे, तो वह कहेगा- ओह, तुम पीएमएस कर रही हो, तुम्हारे पीरियड्स आने वाले हैं। इसलिए मुझे बहुत शर्म आती थी।” अनुपमा ने आगे कहा, “मैं 11 बच्चे पैदा करने का सपना देखने वाली इंसान थी। इस समय मुझे बच्चे भी नहीं चाहिए। मुझे महिला होने पर बहुत बुरा लगता था। अपनी उपलब्धियों को लेकर भी मुझे बहुत बुरा लगता था।” पहले रिश्ते को नार्सिसिस्टिक एब्यूज बताया था अनुपमा पहले भी अपने पूर्व पार्टनर के साथ रिश्ते के अनुभव के बारे में बात कर चुकी हैं। एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने इस रिश्ते को ‘नार्सिसिस्टिक एब्यूज’ बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पार्टनर ने धीरे-धीरे उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के अलग-अलग पहलुओं को कंट्रोल करना शुरू कर दिया था। रिश्ते में लगातार इमोशनल उतार-चढ़ाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “बहुत से लोग नार्सिसिस्टिक एब्यूज के बारे में नहीं जानते हैं। एक दिन, वह रेमो होगा। मुझ पर प्यार और देखभाल की बारिश होगी और मैं शायद दुनिया का सबसे लकी इंसान महसूस करूंगी।” उन्होंने कहा, “लेकिन अगले दिन वह अन्नियन होगा। यह उसका सबसे क्रूर रूप होगा और उसे आसपास क्या हो रहा है, इसकी बिल्कुल परवाह नहीं होगी।” अनुपमा ने आगे कहा था, “अगले दिन यही व्यक्ति अंबी बन जाएगा। वह अपनी गलतियों के लिए मुझसे माफी मांगेगा और बच्चे की तरह रोएगा। वह वादा करेगा कि गलतियां दोबारा नहीं करेगा, लेकिन फिर प्यार का वही चक्र जारी रहेगा।” अनुपमा ने 2015 में फिल्मी करियर शुरू किया था अनुपमा परमेश्वरन ने साल 2015 में मलयालम फिल्म ‘प्रेमम’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। फिल्म में मैरी के किरदार और उनके घुंघराले बालों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद उन्होंने मलयालम के साथ तेलुगु, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। साल 2016 में ‘अ आ’ से उन्होंने तेलुगु सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद ‘शतमानम भवति’ और ‘हेलो गुरु प्रेमा कोसमे’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। 2019 में ‘नटसार्वभौमा’ से कन्नड़ सिनेमा में डेब्यू किया। 2022 में ‘कार्तिकेय 2’ से उन्हें पैन-इंडिया पहचान मिली। वहीं, ‘टिल्लू स्क्वायर’ ने उनकी लोकप्रियता और बढ़ाई।
Al-Qaeda Leader Harun Izhar Threatens Hindus in Bangladesh

ढाका2 मिनट पहलेलेखक: मोहम्मद अरिफुल इस्लाम कॉपी लिंक बांग्लादेश के चटगांव में अल-कायदा से जुड़ा नेता हारुन इझार ने हिंदुओं पर बयान दिया। बांग्लादेश में अल-कायदा से जुड़े नेता हारुन इजहार का हिंदुओं को लेकर धमकी वाला वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रहा है कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है। चटगांव में एक कार्यक्रम के दौरान इजहार हिंदुओं को आसानी से मारे जाने की बात कहता सुनाई दे रहा है। वह यह भी कहता है कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं होगी, उसके समर्थक ही ऐसा करने के लिए काफी हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों और भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यह बयान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है। हारुन इजहार कौन है? हारुन इजहार बांग्लादेश के चटगांव का कट्टरपंथी इस्लामी नेता है और हेफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है। वह संगठन की केंद्रीय समिति में शिक्षा और सांस्कृतिक मामलों का सचिव भी रह चुका है। उसके पिता मुफ्ती इजहारुल इस्लाम भी चटगांव के एक प्रभावशाली इस्लामी नेता और मदरसा संचालक रहे हैं। हारुन का नाम पहली बार नहीं बल्कि लंबे समय से कट्टरपंथ और हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। 2013 में चटगांव के लालखान बाजार स्थित मदरसे में विस्फोट हुआ था। इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने विस्फोटक बनाने की सामग्री, तेजाब और बिना फटे ग्रेनेड बरामद किए थे। इस मामले में हारुन और उसके पिता समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था। अल-कायदा से कनेक्शन का क्या मामला है? हारुन इजहार को लेकर अल-कायदा और दूसरे जिहादी नेटवर्क से संबंधों के आरोप पुराने हैं। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स में उसके पिता के मदरसे को प्रतिबंधित संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है। उसके पिता के ओसामा बिन लादेन और तालिबान नेता मुल्ला उमर से संपर्क होने का भी दावा किया गया है। रिपोर्ट्स में हारुन इजहार को कट्टरपंथी संगठन हेफाजत-ए-इस्लाम का सीनियर नेता बताते हुए उसके अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क से कथित संबंधों का जिक्र है। सुरक्षा एजेंसियां उसे प्रभावशाली कट्टरपंथी व्यक्ति मानती हैं। 2021 में भी हिंसा के मामले में नाम आया मार्च 2021: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान चटगांव और दूसरे इलाकों में हिंसा हुई थी। हारुन इजहार को इन हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उसने पूछताछ के दौरान हिंसा में अपनी भूमिका मानी और उन लोगों के नाम भी बताए, जिन्होंने हिंसा भड़काने में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी। उसके खिलाफ ढाका, चटगांव और राजशाही में कई मामले दर्ज थे। 2023: हारुन इजहार चटगांव सेंट्रल जेल से जमानत पर बाहर आया। पुलिस के मुताबिक, इजहार के खिलाफ दर्ज 11 मामलों में उसे जमानत मिल गई थी और पुलिस ने कहा था कि वह निगरानी में रहेगा। 2025: दिसंबर में भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी हारुन इजहार का नाम सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में भारतीय हितों के खिलाफ प्रदर्शन के बाद वह एक पुलिस स्टेशन पहुंचा था। वहां वह भारतीय राजनयिक मिशन पर हमले के आरोपियों के मामले में दखल देता नजर आया। —————- यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे:जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Jharkhand Exam Scam | CID Probe Into Cancelled Recruitment Exams List

Hindi News Career Jharkhand Exam Scam | CID Probe Into Cancelled Recruitment Exams List 9 मिनट पहले कॉपी लिंक झारखंड में भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के चलते सरकार ने बड़ा फैसला किया है। इसके तहत 44 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इनकी पूरी सूचना कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग की तरफ से जारी की गई है। अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति का गठन झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में से एक JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की थी। साथ ही, आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द कर दिया था। इस फैसले के बाद झारखंड सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सीनियर IAS ऑफिसर अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति परीक्षा प्रणाली का अध्ययन कर दो महीने के अंदर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा जरूरी है। इसी को देखते हुए ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए राज्य सरकार हाईकोर्ट से अनुरोध करेगी। रद्द हुई परीक्षाओं को लेकर नया आंदोलन JSSC-CGL में चयनित लगभग 2,950 उम्मीदवार परीक्षा रद्द करने के फैसले से गुस्से में है। ये उम्मीदवार परीक्षा पास करके नियुक्ति की प्रक्रिया तक पहुंच चुके थे, इसलिए सरकार के फैसले के बाद उनकी स्थिति को लेकर विरोध शुरू हुआ। उम्मीदवारों का गुस्सा फूटा उम्मीदवारों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनके सामने दोबारा बेरोजगार होने का संकट खड़ा हो गया है। एक प्रदर्शनकारी ने भावुक होकर कहा – सरकार के फैसले के बाद वह सड़क पर आ गया है। बता दें कि JSSC-CGL में लगभग 2950 कैंडिडेट्स सिलेक्ट हुए थे। उसने अपने माता-पिता से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि वे लोग फिर से जीतेंगे। उन्होंने सरकार से अपना फैसला वापस लेने की मांग की और दावा किया कि इस निर्णय से अदालत के आदेश का निरादर हुआ है। ये खबर भी पढ़ें बॉम्बे हाईकोर्ट भर्ती एग्जाम दोबारा कराने की मांग:दस मिनट में लॉग आउट, खराब की बोर्ड, छात्रों ने कहा – ये हमारा फेलियर नहीं, सिस्टम की गलती है महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में 16 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती का टाइपिंग एग्जाम आयोजित किया गया था। इस परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों का आरोप है कि एग्जाम के दौरान कई कम्प्यूटर, माउस और की-बोर्ड ने काम करना बंद कर दिया। यह एग्जाम मुंबई के कई परीक्षा केंद्रों पर हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका16 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए जब नदी में भरपूर पानी हो (75,000 क्यूसेक से ज्यादा) – भारत अपने पास 40,000 क्यूसेक पानी रखता है और बाकी का सारा पानी बांग्लादेश को दे दिया जाता है। जब पानी थोड़ा कम हो (70,000 से 75,000 क्यूसेक) – बांग्लादेश को तय 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है और बचा हुआ भारत रखता है। जब पानी बहुत कम हो (70,000 क्यूसेक से कम) – जितना भी पानी उपलब्ध होता है, उसे आधा-आधा (50:50) बांट लिया जाता है। यह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है। बांग्लादेश को क्यों चाहिए गारंटी बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका5 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए 70 हजार क्यूसेक या उससे कम: दोनों को 50-50% पानी 70 से 75 हजार क्यूसेक: बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक, बाकी भारत को 75 हजार क्यूसेक या ज्यादा: भारत को 40 हजार क्यूसेक, बाकी बांग्लादेश कोयह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है। बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले। गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था। समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी। फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था। यह 1975 में बनकर तैयार हुआ। इससे बांग्लादेश में कई तरह की समस्याएं बताई गईं- सिंचाई के लिए पानी कम पड़ना खेती प्रभावित होना मछलियों और जलीय जीवन पर असर नदी में गाद बढ़ना खारे पानी का ऊपर की ओर आना नदी और आसपास के पर्यावरण पर असर 1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता फरक्का को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा। भारत का कहना था कि फरक्का से पानी मोड़ना उसके लिए जरूरी है, जबकि बांग्लादेश लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा। आखिरकार दोनों देशों ने पानी को लेकर अलग-अलग समझौते किए। 1977 में एक समझौता हुआ, जिसमें पानी के बंटवारे के साथ एक गारंटी क्लॉज भी था। यानी कुछ परिस्थितियों में बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की गारंटी दी गई थी। 1977 का समझौता सिर्फ 5 साल के लिए था और 1982 में खत्म हो गया। इसके बाद 1982 और 1985 के समझौता ज्ञापनों में भी गारंटी क्लॉज नहीं था। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ। इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे। असल दिक्कत यहीं से शुरू हुई कि 1996 के समझौते में ‘पानी कम पड़ने पर क्या करना है’ तो लिखा गया, लेकिन यह साफ नहीं लिखा गया कि उस स्थिति में बांग्लादेश को कम से कम कितना पानी मिलना ही चाहिए। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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46 मिनट पहले कॉपी लिंक बिजनेसमैन-एक्टर राज कुंद्रा ने हालिया इंटरव्यू में 2021 में पोर्नोग्राफी केस में गिरफ्तारी और मुंबई की आर्थर रोड जेल में बिताए 63 दिनों को अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर बताया। उन्होंने बताया है कि जेल में रहते हुए उन्हें खबर मिली कि पत्नी शिल्पा शेट्टी उन्हें तलाक देने वाली हैं। खबर मिलने के बाद उन्होंने सुसाइड करने का मन बना लिया था। राज ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया है कि जेल में उन्हें मीडिया के जरिए पता चला कि शिल्पा शेट्टी उन्हें छोड़ रही हैं और दोनों का तलाक हो रहा है। राज ने कहा, “उस रात मैं सो नहीं पाया, क्योंकि मुझे अपनी जिंदगी खत्म करने का मन हो रहा था। मुझे लगा कि जीने का कोई मतलब नहीं है। मेरे लिए मेरी पत्नी और मेरा परिवार सबसे ज्यादा जरूरी हैं। मुझे लगा कि मैं अपनी जान दे दूं। सच में लगा कि आत्महत्या कर लूं।” शिल्पा से मुलाकात के बाद बदला मन राज ने बताया है कि तलाक की खबर मिलने के अगले दिन उनकी शिल्पा से फोन पर बात हुई। पूछे जाने पर शिल्पा ने कहा, “यह बकवास खबर है। मैं तुम्हारे साथ हूं। मुझे तुम पर भरोसा है। इसकी चिंता मत करो।” राज ने कहा कि शिल्पा की इस बात से उन्हें बहुत हिम्मत मिली। उन्होंने बताया, “मैंने सोचा कि तुम जो तोड़ना चाहते हो, तोड़ दो। मेरी पत्नी मेरे साथ है। मैं पूरी दुनिया का सामना कर सकता हूं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” 63 दिन पारले-जी और पानी पीकर सर्वाइव किया आर्थर रोड जेल में बिताए समय को याद करते हुए राज ने वहां की हालत को बेहद मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि वे जेल का खाना नहीं खा पाते थे। राज के मुताबिक, उन्होंने 63 दिनों के दौरान ज्यादातर पारले-जी बिस्किट और पानी के सहारे गुजारा किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जेल में उनका वजन करीब 17-18 किलो कम हो गया था। फिल्म UT69 में बताया कैसा था जेल का अनुभव 3 नवंबर 2023 को UT69 फिल्म रिलीज हुई थी, जो राज कुंद्रा के जेल जाने और जेल के अनुभव पर आधारित थी। इस फिल्म में खुद राज कुंद्रा लीड रोल में थे। राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी ने साल 2009 में शादी की थी। इस शादी से कपल को दो बच्चे वियान और समीशा हैं। राज की दो शादियां हुई थीं। उनकी पहली शादी कविता कुंद्रा से हुई। कुछ साल बाद दोनों अलग हो गए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







