Saturday, 29 Aug 2026 | 07:12 AM

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नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2400 पहुंचा:320 भारतीय, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO का सुराग नहीं; अब तक 586 मौतें, 4451 का रेस्क्यू हुआ

नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2400 पहुंचा:320 भारतीय, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO का सुराग नहीं; अब तक 586 मौतें, 4451 का रेस्क्यू हुआ

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। शुक्रवार रात तक आंकड़ा 2400 के करीब पहुंच गया। जबकि अब तक 586 लोगों के शव मिले हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अब तक 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है। सेना और निजी प्राइवेट कंपनियों के 16 हेलिकॉप्टरों से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। करीब 400 भारतीय चीन में फंसे हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है। इसके अलावा 149 भारतीय चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लैक्स गोपिसेट्टी भी लापता बताए जा रहे हैं। कंपनी ने शुक्रवार रात बताया कि गोपिसेट्टी निजी काम से नेपाल गए थे। लेकिन बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इधर, नेपाल दूसरे देशों के रेस्क्यू टीमों से मदद लेने के लिए तैयार हो गया है। नेपाल ने प्रभावित इलाकों में यातायात बहाल करने के लिए भारत और चीन से 70 मीटर लंबे 10 बेली ब्रिज की मदद भी मांगी है। PM बालेन ने बताया कि अब तक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 190 करोड़ नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी एक महीने की सैलरी भी राहत कोष में देने का फैसला किया है।

नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2400 पहुंचा:320 भारतीय, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO का सुराग नहीं; अब तक 586 मौतें, 4451 का रेस्क्यू हुआ

नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2400 पहुंचा:320 भारतीय, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO का सुराग नहीं; अब तक 586 मौतें, 4451 का रेस्क्यू हुआ

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। शुक्रवार रात तक आंकड़ा 2400 के करीब पहुंच गया। जबकि अब तक 586 लोगों के शव मिले हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अब तक 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है। सेना और निजी प्राइवेट कंपनियों के 16 हेलिकॉप्टरों से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। करीब 400 भारतीय चीन में फंसे हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है। इसके अलावा 149 भारतीय चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लैक्स गोपिसेट्टी भी लापता बताए जा रहे हैं। कंपनी ने शुक्रवार रात बताया कि गोपिसेट्टी निजी काम से नेपाल गए थे। लेकिन बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इधर, नेपाल दूसरे देशों के रेस्क्यू टीमों से मदद लेने के लिए तैयार हो गया है। नेपाल ने प्रभावित इलाकों में यातायात बहाल करने के लिए भारत और चीन से 70 मीटर लंबे 10 बेली ब्रिज की मदद भी मांगी है। PM बालेन ने बताया कि अब तक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 190 करोड़ नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी एक महीने की सैलरी भी राहत कोष में देने का फैसला किया है। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद का मंजर … तबाही के बाद की 5 तस्वीरें… खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या? जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है? जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है? जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन? जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————– ये भी पढ़ें- ‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’: आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड

Actor Abhay Verma Interview | Career Goals, Rasha Thadani & AR Rahman

Actor Abhay Verma Interview | Career Goals, Rasha Thadani & AR Rahman

16 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक अभिनेता अभय वर्मा करियर के नए पड़ाव को लेकर उत्साहित हैं। ‘लईकी लईका’ में राशा थडानी के साथ नजर आने वाले अभय इसे अलग तरह की लव स्टोरी बताते हैं, जिसमें एक्शन भी है। वहीं ‘दिलकशी’ में हंसल मेहता और लिजो जोस पेल्लीसेरी जैसे दिग्गजों के साथ काम करने और एआर रहमान का संगीत मिलना उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। बढ़ती फीमेल फॉलोइंग को वह प्यार और सम्मान की अमानत मानते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभय ने रिश्तों, शादी, जेनजी और टेक्नोलॉजी पर भी बेबाकी से बात की। पेश हैं कुछ प्रमुख अंश। अभय वर्मा ने ‘लईकी लईका’ में राशा थडानी के साथ काम करने और फिल्म को लेकर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। सवाल: राशा थडानी के साथ ‘लईकी लईका’ में काम कर रहे हैं। यह फिल्म कैसी है? जवाब: यह बहुत अलग तरह की लव स्टोरी है। मैं उन प्रोड्यूसर्स का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में मुझ पर भरोसा किया, जबकि मेरा कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है। ‘‘लईकी लईका’’ में लव स्टोरी के साथ एक्शन भी है। यह दो ऐसे लोगों की कहानी है, जो अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं। इसके डायरेक्टर सौरभ गुप्ता हैं और उन्होंने ही कहानी लिखी है। मैं इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हूं। सवाल: हंसल मेहता के साथ ‘दिलकशी’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: हंसल सर हमारे समय के लेजेंडरी फिल्ममेकर हैं। उनकी फिल्में देखकर हम बड़े हुए हैं। उनके साथ काम करने का मौका मिलना, उनके साथ बैठकर बातें करना और खाना खाना, मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। मजेदार बात यह है कि जितने सीरियस वह दिखाई देते हैं, असल में उतने हैं नहीं। वह बहुत फनी इंसान हैं। उनके साथ बैठकर फिल्म और कहानी पर बात करना बहुत अच्छा अनुभव रहा। इस फिल्म का निर्देशन लिजो जोस पेल्लीसेरी सर कर रहे हैं। वह भी लेजेंडरी डायरेक्टर हैं और उनकी फिल्में इंटरनेशनल लेवल तक पहचान बना चुकी हैं। ‘दिलकशी’ बहुत अलग तरह की म्यूजिकल लव स्टोरी है। एआर रहमान के संगीत को अभय वर्मा ने बताया बेहद खास, बोले- मुश्किल दौर में ‘तू कोई और है’ ने दिया सहारा। सवाल: एआर रहमान का संगीत आपके लिए कितना खास है और उनके साथ काम करने का सपना कैसे पूरा हुआ? जवाब: सबसे खास बात यह है कि ‘दिलकशी’ का म्यूजिक एआर रहमान सर दे रहे हैं। रहमान सर का संगीत मेरे लिए बहुत व्यक्तिगत मायने रखता है। जब मैं अपने मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब ‘तमाशा’ का उनका गाना ‘तू कोई और है’ मेरा बहुत पसंदीदा था और उस गाने ने मेरा बहुत साथ दिया। मेरे मन में सपना था कि कभी ऐसा हो कि मेरी शक्ल किसी फिल्म में हो और उसका संगीत रहमान सर का हो। अब ‘दिलकशी’ के जरिए वह सपना पूरा होता दिख रहा है। सवाल: आपकी फीमेल फॉलोइंग लगातार बढ़ रही है। इसे कैसे देखते हैं? जवाब: मैं इसे प्यार और सम्मान के साथ देखता हूं। लोगों का प्यार मेरी सबसे बड़ी खुशी है। मैं इसे एक अमानत मानता हूं। दर्शक जब चाहें यह अमानत दे सकते हैं और जब चाहें अपने खजाने से और प्यार दे सकते हैं। मेरा काम है कि मैं इतनी मेहनत करूं कि यह प्यार बार-बार मिलता रहे। अभी तक जितना प्यार मिला है, उसने मेरी भूख कम नहीं की, बल्कि और बढ़ा दी है। बढ़ती फीमेल फॉलोइंग पर अभय वर्मा ने कहा- दर्शकों का प्यार मेरे लिए अमानत है, इसे बनाए रखने के लिए मेहनत करता रहूंगा। सवाल: आपकी आइडियल पार्टनर कैसी होनी चाहिए? जवाब: सबसे पहले तो मैं 100 प्रतिशत सिंगल हूं। अगर मेरी पार्टनर होती है तो मैं चाहूंगा कि वह दिल खोलकर अपना काम करे, जो पहनना चाहे पहने और अपनी जिंदगी अपनी तरह जिए। वह मेरे काम को समझे और उसका सम्मान करे। मैं भी उसके काम और उसके परिवार का सम्मान करूंगा। हम जो भी बनते हैं, उसमें हमारे माता-पिता की परवरिश की बड़ी भूमिका होती है। इसलिए मैं चाहता हूं कि हम दोनों एक-दूसरे के माता-पिता को उतना ही सम्मान दें, जितना वे डिजर्व करते हैं। सवाल: क्या फिलहाल शादी या रिलेशनशिप का कोई प्लान है? जवाब: अभी मैं अपने काम को लेकर बहुत डेडिकेटेड हूं। बाकी चीजें फिलहाल मेरे लिए छोटी हैं। अगर भविष्य में कोई पार्टनर होती है तो मैं चाहता हूं कि वह अपनी जिंदगी खुलकर जिए, अपने काम को पूरी आजादी से करे और मैं उसका पूरा सपोर्ट करूं। मैं भी चाहता हूं कि वह मेरे काम और मेरे माता-पिता को उतना ही सम्मान दे, जितना मैं उसके काम और उसके परिवार को दूंगा। सवाल: आप जेनजी यानी अपनी जेनरेशन को किस नजर से देखते हैं? जवाब: हर पीढ़ी में अच्छे और बुरे लोग रहे हैं। आज हमारे पास बहुत सारी टेक्नोलॉजी है और अपनी बात रखने के कई तरीके हैं। इसमें मुझे कुछ गलत नहीं लगता। बस जरूरी है कि हम अपने संस्कार और बड़ों का सम्मान न भूलें। यह सिर्फ उम्र का नहीं, वैल्यू का भी सम्मान है। टेक्नोलॉजी हमारी ताकत भी बन सकती है और कमजोरी भी। फर्क सिर्फ इतना है कि हम उसे कितना अपने ऊपर हावी होने देते हैं। Gen Z पर अभय वर्मा बोले- सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी ताकत हैं, बस इन्हें खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। सवाल: जेनजी के लिए आपका खास संदेश क्या है? जवाब: सिर्फ इसलिए कि हम इस पीढ़ी में पैदा हुए हैं और हमारे पास सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी है, इसका मतलब यह नहीं कि हम गलत हैं। हमें ये टूल्स मिले हैं और इनका इस्तेमाल हमारे हाथ में है। अगर हम इनका सही इस्तेमाल करें तो बहुत सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। टेक्नोलॉजी ताकत भी है और कमजोरी भी। फर्क इस बात से पड़ता है कि हम उसे अपने ऊपर कितना हावी होने देते हैं। सवाल: पानीपत वाले युवा अभय से आज का अभय क्या कहेगा? जवाब: मैं उससे कहूंगा कि जो चीजें नहीं हुईं, उनका मलाल मत करना। जो हुआ वह आशीर्वाद है और जो नहीं हुआ, वह भी किसी न किसी तरह का आशीर्वाद है, क्योंकि वह आपको कुछ सिखाता

Actor Abhay Verma Interview | Career Goals, Rasha Thadani & AR Rahman

Actor Abhay Verma Interview | Career Goals, Rasha Thadani & AR Rahman

2 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक अभिनेता अभय वर्मा करियर के नए पड़ाव को लेकर उत्साहित हैं। ‘लईकी लईका’ में राशा थडानी के साथ नजर आने वाले अभय इसे अलग तरह की लव स्टोरी बताते हैं, जिसमें एक्शन भी है। वहीं ‘दिलकशी’ में हंसल मेहता और लिजो जोस पेल्लीसेरी जैसे दिग्गजों के साथ काम करने और एआर रहमान का संगीत मिलना उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। बढ़ती फीमेल फॉलोइंग को वह प्यार और सम्मान की अमानत मानते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभय ने रिश्तों, शादी, जेनजी और टेक्नोलॉजी पर भी बेबाकी से बात की। पेश हैं कुछ प्रमुख अंश। अभय वर्मा ने ‘लईकी लईका’ में राशा थडानी के साथ काम करने और फिल्म को लेकर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। सवाल: राशा थडानी के साथ ‘लईकी लईका’ में काम कर रहे हैं। यह फिल्म कैसी है? जवाब: यह बहुत अलग तरह की लव स्टोरी है। मैं उन प्रोड्यूसर्स का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में मुझ पर भरोसा किया, जबकि मेरा कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है। ‘‘लईकी लईका’’ में लव स्टोरी के साथ एक्शन भी है। यह दो ऐसे लोगों की कहानी है, जो अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं। इसके डायरेक्टर सौरभ गुप्ता हैं और उन्होंने ही कहानी लिखी है। मैं इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हूं। सवाल: हंसल मेहता के साथ ‘दिलकशी’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: हंसल सर हमारे समय के लेजेंडरी फिल्ममेकर हैं। उनकी फिल्में देखकर हम बड़े हुए हैं। उनके साथ काम करने का मौका मिलना, उनके साथ बैठकर बातें करना और खाना खाना, मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। मजेदार बात यह है कि जितने सीरियस वह दिखाई देते हैं, असल में उतने हैं नहीं। वह बहुत फनी इंसान हैं। उनके साथ बैठकर फिल्म और कहानी पर बात करना बहुत अच्छा अनुभव रहा। इस फिल्म का निर्देशन लिजो जोस पेल्लीसेरी सर कर रहे हैं। वह भी लेजेंडरी डायरेक्टर हैं और उनकी फिल्में इंटरनेशनल लेवल तक पहचान बना चुकी हैं। ‘दिलकशी’ बहुत अलग तरह की म्यूजिकल लव स्टोरी है। एआर रहमान के संगीत को अभय वर्मा ने बताया बेहद खास, बोले- मुश्किल दौर में ‘तू कोई और है’ ने दिया सहारा। सवाल: एआर रहमान का संगीत आपके लिए कितना खास है और उनके साथ काम करने का सपना कैसे पूरा हुआ? जवाब: सबसे खास बात यह है कि ‘दिलकशी’ का म्यूजिक एआर रहमान सर दे रहे हैं। रहमान सर का संगीत मेरे लिए बहुत व्यक्तिगत मायने रखता है। जब मैं अपने मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब ‘तमाशा’ का उनका गाना ‘तू कोई और है’ मेरा बहुत पसंदीदा था और उस गाने ने मेरा बहुत साथ दिया। मेरे मन में सपना था कि कभी ऐसा हो कि मेरी शक्ल किसी फिल्म में हो और उसका संगीत रहमान सर का हो। अब ‘दिलकशी’ के जरिए वह सपना पूरा होता दिख रहा है। सवाल: आपकी फीमेल फॉलोइंग लगातार बढ़ रही है। इसे कैसे देखते हैं? जवाब: मैं इसे प्यार और सम्मान के साथ देखता हूं। लोगों का प्यार मेरी सबसे बड़ी खुशी है। मैं इसे एक अमानत मानता हूं। दर्शक जब चाहें यह अमानत दे सकते हैं और जब चाहें अपने खजाने से और प्यार दे सकते हैं। मेरा काम है कि मैं इतनी मेहनत करूं कि यह प्यार बार-बार मिलता रहे। अभी तक जितना प्यार मिला है, उसने मेरी भूख कम नहीं की, बल्कि और बढ़ा दी है। बढ़ती फीमेल फॉलोइंग पर अभय वर्मा ने कहा- दर्शकों का प्यार मेरे लिए अमानत है, इसे बनाए रखने के लिए मेहनत करता रहूंगा। सवाल: आपकी आइडियल पार्टनर कैसी होनी चाहिए? जवाब: सबसे पहले तो मैं 100 प्रतिशत सिंगल हूं। अगर मेरी पार्टनर होती है तो मैं चाहूंगा कि वह दिल खोलकर अपना काम करे, जो पहनना चाहे पहने और अपनी जिंदगी अपनी तरह जिए। वह मेरे काम को समझे और उसका सम्मान करे। मैं भी उसके काम और उसके परिवार का सम्मान करूंगा। हम जो भी बनते हैं, उसमें हमारे माता-पिता की परवरिश की बड़ी भूमिका होती है। इसलिए मैं चाहता हूं कि हम दोनों एक-दूसरे के माता-पिता को उतना ही सम्मान दें, जितना वे डिजर्व करते हैं। सवाल: क्या फिलहाल शादी या रिलेशनशिप का कोई प्लान है? जवाब: अभी मैं अपने काम को लेकर बहुत डेडिकेटेड हूं। बाकी चीजें फिलहाल मेरे लिए छोटी हैं। अगर भविष्य में कोई पार्टनर होती है तो मैं चाहता हूं कि वह अपनी जिंदगी खुलकर जिए, अपने काम को पूरी आजादी से करे और मैं उसका पूरा सपोर्ट करूं। मैं भी चाहता हूं कि वह मेरे काम और मेरे माता-पिता को उतना ही सम्मान दे, जितना मैं उसके काम और उसके परिवार को दूंगा। सवाल: आप जेनजी यानी अपनी जेनरेशन को किस नजर से देखते हैं? जवाब: हर पीढ़ी में अच्छे और बुरे लोग रहे हैं। आज हमारे पास बहुत सारी टेक्नोलॉजी है और अपनी बात रखने के कई तरीके हैं। इसमें मुझे कुछ गलत नहीं लगता। बस जरूरी है कि हम अपने संस्कार और बड़ों का सम्मान न भूलें। यह सिर्फ उम्र का नहीं, वैल्यू का भी सम्मान है। टेक्नोलॉजी हमारी ताकत भी बन सकती है और कमजोरी भी। फर्क सिर्फ इतना है कि हम उसे कितना अपने ऊपर हावी होने देते हैं। Gen Z पर अभय वर्मा बोले- सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी ताकत हैं, बस इन्हें खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। सवाल: जेनजी के लिए आपका खास संदेश क्या है? जवाब: सिर्फ इसलिए कि हम इस पीढ़ी में पैदा हुए हैं और हमारे पास सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी है, इसका मतलब यह नहीं कि हम गलत हैं। हमें ये टूल्स मिले हैं और इनका इस्तेमाल हमारे हाथ में है। अगर हम इनका सही इस्तेमाल करें तो बहुत सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। टेक्नोलॉजी ताकत भी है और कमजोरी भी। फर्क इस बात से पड़ता है कि हम उसे अपने ऊपर कितना हावी होने देते हैं। सवाल: पानीपत वाले युवा अभय से आज का अभय क्या कहेगा? जवाब: मैं उससे कहूंगा कि जो चीजें नहीं हुईं, उनका मलाल मत करना। जो हुआ वह आशीर्वाद है और जो नहीं हुआ, वह भी किसी न किसी तरह का आशीर्वाद है, क्योंकि वह आपको कुछ सिखाता