Wednesday, 14 Oct 2026 | 03:39 AM

Trending :

EXCLUSIVE

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या?
जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है?
जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है?
जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————–
ये भी पढ़ें- ‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’: आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल और प्रवक्ता प्रिया सामंत से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
The MP Board 10th and 12th results declared at mpbse.nic.in.

May 6, 2026/
8:30 pm

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 20:30 IST चेन्नई से कोलकाता तक, 2026 के जनादेश ने भारतीय गुट को टकराव के रंगमंच...

'सतलुज' का विरोध करने वालों पर भड़के जसबीर जस्सी:बोले- यह खालड़ा से हुए धक्के से भी बड़ा धक्का, अब जिक्र भी नहीं करने दोगे

July 7, 2026/
10:12 am

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ के समर्थन में पंजाबी गायक जसबीर जस्सी सामने आए...

गर्लफ्रेंड को सैकड़ों पुरुषों से संबंध बनाने को किया मजबूर:पीड़िता बोली- 487 लोगों के बाद गिनती भूल गई, दोषी को 25 साल की सजा

May 26, 2026/
7:13 pm

फ्रांस की एक अदालत ने 51 साल के बैंक मैनेजर को गर्लफ्रेंड के साथ 7 साल तक क्रूर शारीरिक और...

कनाडा एडमोंटन हाईवे मर्डर केस में आरोपी अरेस्ट:पंजाबी मूल के युवक पर चलाई गोलियां, दोस्तों के साथ घूमने जा रहा था

March 25, 2026/
10:08 am

कनाडा के अल्बर्टा स्टेट में स्थित हाईवे-QEII पर पंजाबी मूल के युवक बीरइंदर सिंह की गोलियां मारकर हत्या करने के...

कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके

August 11, 2026/
3:42 pm

कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या?
जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है?
जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है?
जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————–
ये भी पढ़ें- ‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’: आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल और प्रवक्ता प्रिया सामंत से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.