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भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर का दौरा किया। वे 26 सेकेंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने इस्कॉन की शुरुआत की थी। इस दौरान भागवत ने भोजन वितरण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ लोगों को एकजुट करने और शांति लाने में मदद कर सकती है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस (ISKCON) की स्थापना की थी। आज इस्कॉन के 120 देशों में करीब 1,300 मंदिर हैं। जहां स्वामी प्रभुपाद ने शुरू किया था पहला इस्कॉन मंदिर मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के 26 सेकंड एवेन्यू का दौरा किया। इसी जगह स्वामी प्रभुपाद ने पहला इस्कॉन मंदिर स्थापित किया था। भागवत की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब इस्कॉन अपनी स्थापना के 60 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। दौरे के दौरान भागवत ने बेघर लोगों की मदद के लिए चलाए जा रहे भोजन वितरण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस पहल के तहत न्यूयॉर्क में जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ‘कृष्ण चेतना ही लोगों को एकजुट कर सकती है’ मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष और विरोधाभास हैं। अलग-अलग होने के बावजूद लोगों को जोड़ने वाली चीज चेतना है। उन्होंने इसे ‘कृष्ण चेतना’ बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में विविधताएं और मतभेद जरूर हैं, लेकिन इनके पीछे एक ही चेतना है। उनके मुताबिक, अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो इससे दुनिया में बेहतर माहौल बनाया जा सकता है। ‘हर दिल तक पहुंचे यह सोच तो दुनिया बेहतर होगी’ भागवत ने कहा कि अगर ‘सब कुछ कृष्ण है’ की समझ हर व्यक्ति के दिल तक पहुंच जाए, तो दुनिया निश्चित तौर पर बेहतर बन सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया आज दिखाई देने वाली भौतिक दुनिया से अलग होगी और हर इंसान के लिए स्वर्ग जैसी हो सकती है। भागवत का न्यूयॉर्क दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करने वाले हैं। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। तीन देशों के दौरे पर हैं RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। उनका यह दौरा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन तक चलेगा। इस दौरान वह भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। 29 अगस्त के ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में विरोध भी हुआ है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं। कार्यक्रम के समर्थकों ने कहा- दुनिया को एक परिवार मानने का संदेश कार्यक्रम में शामिल होने वाले आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि कार्यक्रम का विरोध करने वालों को अपनी राय रखने और इसकी आलोचना करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पूरी दुनिया को भाईचारे और शांति का संदेश देगा। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ को अंतरधार्मिक कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि इसमें अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों को मानने वाले लोग शामिल होंगे। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह कार्यक्रम से पहले हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने भी सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में आने वाले लोगों से सतर्क रहने और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है। फाउंडेशन ने लोगों से किसी भी तरह के विवाद से बचने और दूसरों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने की अपील की है।

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भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर का दौरा किया। वे 26 सेकेंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने इस्कॉन की शुरुआत की थी। इस दौरान भागवत ने भोजन वितरण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ लोगों को एकजुट करने और शांति लाने में मदद कर सकती है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस (ISKCON) की स्थापना की थी। आज इस्कॉन के 120 देशों में करीब 1,300 मंदिर हैं। जहां स्वामी प्रभुपाद ने शुरू किया था पहला इस्कॉन मंदिर मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के 26 सेकंड एवेन्यू का दौरा किया। इसी जगह स्वामी प्रभुपाद ने पहला इस्कॉन मंदिर स्थापित किया था। भागवत की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब इस्कॉन अपनी स्थापना के 60 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। दौरे के दौरान भागवत ने बेघर लोगों की मदद के लिए चलाए जा रहे भोजन वितरण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस पहल के तहत न्यूयॉर्क में जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ‘कृष्ण चेतना ही लोगों को एकजुट कर सकती है’ मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष और विरोधाभास हैं। अलग-अलग होने के बावजूद लोगों को जोड़ने वाली चीज चेतना है। उन्होंने इसे ‘कृष्ण चेतना’ बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में विविधताएं और मतभेद जरूर हैं, लेकिन इनके पीछे एक ही चेतना है। उनके मुताबिक, अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो इससे दुनिया में बेहतर माहौल बनाया जा सकता है। ‘हर दिल तक पहुंचे यह सोच तो दुनिया बेहतर होगी’ भागवत ने कहा कि अगर ‘सब कुछ कृष्ण है’ की समझ हर व्यक्ति के दिल तक पहुंच जाए, तो दुनिया निश्चित तौर पर बेहतर बन सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया आज दिखाई देने वाली भौतिक दुनिया से अलग होगी और हर इंसान के लिए स्वर्ग जैसी हो सकती है। भागवत का न्यूयॉर्क दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करने वाले हैं। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। तीन देशों के दौरे पर हैं RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। उनका यह दौरा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन तक चलेगा। इस दौरान वह भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। 29 अगस्त के ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में विरोध भी हुआ है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं। कार्यक्रम के समर्थकों ने कहा- दुनिया को एक परिवार मानने का संदेश कार्यक्रम में शामिल होने वाले आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि कार्यक्रम का विरोध करने वालों को अपनी राय रखने और इसकी आलोचना करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पूरी दुनिया को भाईचारे और शांति का संदेश देगा। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ को अंतरधार्मिक कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि इसमें अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों को मानने वाले लोग शामिल होंगे। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह कार्यक्रम से पहले हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने भी सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में आने वाले लोगों से सतर्क रहने और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है। फाउंडेशन ने लोगों से किसी भी तरह के विवाद से बचने और दूसरों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने की अपील की है।

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