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Runa Khan Wins Ramon Magsaysay Award 2026

Runa Khan Wins Ramon Magsaysay Award 2026

Hindi News Career Runa Khan Wins Ramon Magsaysay Award 2026 | Floating Hospital Founder 9 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश की सामाजिक उद्यमी और मानवतावादी रूना खान का नाम 2026 के रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया है। यह घोषणा 31 अगस्त 2026 को मनीला में की गई। यह अवार्ड उन्हें 15 नवंबर को मनीला, फिलीपींस में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। रूना खान को पहले भी अशोका फैलोशिप, रोलेक्स अवार्ड और श्वाब फाउंडेशन जैसे सम्मान मिल चुके हैं। दूसरी जगह ले जाए जाने वाले स्कूल बनवाए उन्होंने उन लोगों तक अस्पताल पहुंचाया जिनके गांव तक सड़क नहीं पहुंचती थी। नदी के कटाव से प्रभावित बच्चों के लिए ऐसे स्कूल बनाए जिन्हें जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। रूना ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित और गरीब लोगों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का काम किया। रूना खान बांग्लादेश की सामाजिक, मानवतावादी और लेखिका हैं। वह Friendship नाम की सामाजिक संस्था की संस्थापक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। यह संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु, रोजगार, आपदा प्रबंधन, नागरिक अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है। नाव को बनाया अस्पताल रूना खान की सबसे खास पहल तैरता हुआ अस्पताल है। उन्होंने एक पुराने जहाज को अस्पताल में बदलकर उसे नदी के रास्ते दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाना शुरू किया। इस अस्पताल में डॉक्टरों की टीम, ऑपरेशन थिएटर, लैब और जरूरी दवाओं की सुविधा उपलब्ध रहती है। इससे उन लोगों को इलाज मिल सका, जिनके लिए सामान्य अस्पताल तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। शुरुआत में बच्चों के लिए किताबें लिखीं उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों की शुरुआत एक टीचर के तौर पर की थी। 1979 में चटगांव में किंडरगार्टन बच्चों को पढ़ाते हुए उन्होंने महसूस किया कि शिक्षा में बच्चों को केवल चीजें याद कराने पर ज्यादा जोर दिया जाता है, जबकि उन्हें समझने और सवाल पूछने के अवसर कम मिलते हैं। इस अनुभव ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्होंने बच्चों के लिए कहानी की किताबें और शैक्षणिक सामग्री लिखीं। रूना ने महिलाओं और कारीगरों के लिए भी काम किया। समाज के वंचित लोगों की मददगार रूना रूना खान का जन्म 17 नवंबर 1958 को बांग्लादेश में हुआ था। उन्होंने ढाका और कोलकाता से हायर एजुकेशन हासिल की। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने टीचिंग के साथ टूरिज्म और ट्रेडिशनल हैंडीक्राफ्ट से जुड़े काम किए। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पूरा ध्यान समाज के वंचित लोगों की मदद करने पर केंद्रित कर दिया। रूना की संस्था Friendship को जानिए Friendship की शुरुआत 2002 में एक अस्पताल जहाज से हुई थी, जो जमुना नदी के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाता था। आज Friendship स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, आर्थिक विकास और जलवायु अनुकूलन सहित कई क्षेत्रों में काम करती है। यह करीब 75 लाख लोगों को सालाना सेवाएं देती है। रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड क्या है रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड “एशिया का नोबेल पुरस्कार” कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1958 में फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रैमन मैग्सेसे की याद में हुई थी। यह एशिया में असाधारण सेवा और नेतृत्व के लिए दिया जाता है। ये खबर भी पढ़ें 6 साल के आदित्य का आंदोलन खत्म:पेरेंट्स को जेल ले जाने से नाराज, कहा – जैसे मांझी ने पहाड़ का घमंड तोड़ा, वैसे ही मैं सरकार का घमंड तोड़ूंगा पटना में BPSC TRE-4 उम्मीदवारों के प्रदर्शन के दौरान 6 साल के बच्चे का वीडियो पहले ही दिन से खूब वायरल हुआ। इस बच्चे का नाम आदित्य कुमार है। वह पहली कक्षा का छात्र है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

अमेरिकी महिलाओं का वोटिंग पैटर्न:महिलाएं कहती हैं कि राजनीति में रुचि नहीं, पर ट्रम्प की जीत में बड़ा योगदान

अमेरिकी महिलाओं का वोटिंग पैटर्न:महिलाएं कहती हैं कि राजनीति में रुचि नहीं, पर ट्रम्प की जीत में बड़ा योगदान

अमेरिका में अगर महिलाओं से राजनीति के बारे में पूछें, तो उनमें से कई यही कहेंगी कि वे राजनीति में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं रखतीं। फिर भी, 1970 के दशक से शुरू होकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर उनके वोट की ताकत एक अलग ही कहानी बयां करती है। 2024 के चुनाव में लगभग दो-तिहाई महिलाओं ने डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में मतदान किया। ये अमेरिका के कुल वोटरों का 37% हिस्सा हैं और इनमें से 68% खुद को ईसाई मानती हैं। वहीं, श्वेत इवेंजेलिकल (एक धार्मिक समूह) महिलाओं में से 80% से अधिक ने ट्रम्प को वोट दिया। इसके उलट, खुद को किसी भी धर्म से न जोड़ने वाली लगभग 80% श्वेत महिलाओं ने 2024 में कमला हैरिस को वोट दिया। अमेरिका में महिलाओं की राजनीति को किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं किया जा सकता। बल्कि, उनके मतदान के तरीके एक तरह के सांस्कृतिक नजरिए को दर्शाते हैं। महिलाओं की राजनीतिक पसंद केवल नेताओं के भाषणों से तय नहीं होती। वे जो किताबें पढ़ती हैं, घर में जो सामान रखती हैं और रोजमर्रा के जो कंटेंट देखती हैं, उसका भी उनकी सोच और वोट पर गहरा असर पड़ता है। आम धारणा यह है कि गर्भपात का विरोध ईसाई महिलाओं को रिपब्लिकन पार्टी को वोट देने के लिए प्रेरित करता है, लेकिन कई सर्वे से पता चलता है कि गर्भपात का नंबर महंगाई, आप्रवासन, अपराध जैसे मुद्दों से काफी नीचे है। महिलाओं के वोट पाने की रणनीति अलग है… लंबे समय से, फूलों से सजी बाइबल स्टडी बुक्स, लोकप्रिय उपन्यास महिलाओं को सिखाते रहे हैं कि उन्हें क्या मानना ​​चाहिए, कैसे जीना चाहिए और कैसे मतदान करना चाहिए। मीडिया और लाइफस्टाइल ब्रांड ‘द कंजर्वेटर’ की फाउंडर जेमी लीघ फ्रैंकलिन ने दक्षिणपंथी रणनीति का वर्णन किया – महिलाओं को सांस्कृतिक रूप से रूढ़िवादी नजरिए में शामिल करो, फिर ‘अमेरिका समर्थक, पश्चिमी सभ्यता समर्थक, परिवार समर्थक’ वोट हासिल करो। राजनीति की बात करने की कोई जरूरत ही नहीं है।

Amitabh Bachchan Reveals Family Connection with Saif Ali Khan & Shweta

Amitabh Bachchan Reveals Family Connection with Saif Ali Khan & Shweta

10 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में सैफ अली खान से अपने पारिवारिक रिश्ते को लेकर बात की। दरअसल, सैफ शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अपनी अपकमिंग फिल्म ‘हैवान’ के को-स्टार अक्षय कुमार के साथ पहुंचे थे। शो के प्रोमो में अमिताभ ने सैफ से कहा, “बहुत से लोगों को नहीं पता कि ये हमारे रिश्ते में हैं।” यह सुनकर सैफ हैरान हुए और उन्होंने पूछा, “मैं?” अमिताभ ने इसके बाद कपूर और नंदा परिवार के जरिए दोनों परिवारों के जुड़ाव की जानकारी दी। शो पर अमिताभ ने यह कनेक्शन समझाते हुए कहा, “राज कपूर की बेटी रितु का बेटा निखिल मेरी बेटी श्वेता से शादीशुदा है।” इसके बाद अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में सैफ से पूछा कि करीना उन्हें क्या कहेंगी? इस पर सैफ ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि यह सवाल शो में नहीं है। सैफ का जवाब सुनकर अमिताभ बच्चन हंसने लगे। कपूर-नंदा परिवार से जुड़ा रिश्ता अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन की शादी निखिल नंदा से हुई है। निखिल की मां रितु नंदा, फिल्ममेकर राज कपूर की बेटी हैं। श्वेता बच्चन, अमिताभ बच्चन, नव्या नवेली, निखिल नंदा और जया बच्चन की एक इवेंट की तस्वीर। राज कपूर, करीना कपूर के दादा थे। करीना राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर की बेटी हैं। इस वजह से निखिल नंदा और करीना कपूर कजिन हैं। सैफ अली खान की शादी करीना से हुई है, इसलिए बच्चन परिवार से उनका सीधा रिश्ता (जैसे चाचा-भतीजी, मामा-भांजी आदि) नहीं है, बल्कि शादी के जरिए जुड़ा है। अमिताभ बच्चन और करीना साथ कर चुके हैं काम अमिताभ बच्चन और करीना कपूर ने ‘कभी खुशी कभी गम’ (2001), ‘देव’ (2004) और ‘सत्याग्रह’ (2013) जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। वहीं, अमिताभ ने सैफ अली खान के साथ ‘एकलव्य: द रॉयल गार्ड’ (2007) और ‘आरक्षण’ (2011) में भी स्क्रीन शेयर की है। सैफ अली खान के वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी ‘हैवान’ में नजर आएंगे। जिसमें सैफ के अलावा अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, राजपाल यादव, शारिब हाशमी, राजेश शर्मा, और मनोज जोशी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म प्रियदर्शन की 2016 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का रीमेक है, जिसमें मोहनलाल मुख्य भूमिका में थे। करीना के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो आखिरी बार फिल्म सिंघम अगेन (2024) में नजर आई थीं। वहीं वो जल्द मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म दायरा में दिखाई देंगी। दायरा में करीना एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आएंगी। दायरा 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। …………….. यह खबर भी पढ़ें… करीना कपूर ने 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी थी:बोलीं- शिक्षा पूरी न करने का आज भी अफसोस; जानिए कपूर फैमिली में कौन कितना पढ़ा-लिखा एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने 11वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। हनुमान दास के यूट्यूब चैनल में बातचीत में करीना ने कहा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की, जिसका अफसोस उन्हें सफलता मिलने के बाद भी रहा। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और यह बात मेरे साथ बनी रही। मुझे मौका मिला था, लेकिन फिल्मों में आ गई और क्लास 11 के बाद आगे पढ़ाई नहीं की।” पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Amitabh Bachchan Reveals Family Connection with Saif Ali Khan & Shweta

Amitabh Bachchan Reveals Family Connection with Saif Ali Khan & Shweta

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में सैफ अली खान से अपने पारिवारिक रिश्ते को लेकर बात की। दरअसल, सैफ शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अपनी फिल्म ‘हैवान’ के को-स्टार अक्षय कुमार के साथ पहुंचे थे। शो के प्रोमो में अमिताभ ने सैफ से कहा, “बहुत से लोगों को नहीं पता कि ये हमारे रिश्ते में हैं।” यह सुनकर सैफ हैरान हुए और उन्होंने पूछा, “मैं?” अमिताभ ने इसके बाद कपूर और नंदा परिवार के जरिए दोनों परिवारों के जुड़ाव की जानकारी दी। शो पर अमिताभ ने यह कनेक्शन समझाते हुए कहा, “राज कपूर की बेटी रितु का बेटा निखिल मेरी बेटी श्वेता से शादीशुदा है।” इसके बाद अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में सैफ से पूछा कि करीना उन्हें क्या कहेंगी। इस पर सैफ ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि यह सवाल शो में नहीं है। कपूर-नंदा परिवार से जुड़ा रिश्ता अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन की शादी निखिल नंदा से हुई है। निखिल की मां रितु नंदा, फिल्ममेकर राज कपूर की बेटी हैं। श्वेता बच्चन, अमिताभ बच्चन, नव्या नवेली, निखिल नंदा और जया बच्चन की एक इवेंट की तस्वीर। राज कपूर, करीना कपूर के दादा थे। करीना राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर की बेटी हैं। इस वजह से निखिल नंदा और करीना कपूर कजिन हैं। सैफ अली खान की शादी करीना से हुई है, इसलिए बच्चन परिवार से उनका सीधा रिश्ता (जैसे चाचा-भतीजी, मामा-भांजी आदि) नहीं है, बल्कि शादी के जरिए जुड़ा है। अमिताभ बच्चन और करीना साथ कर चुके हैं काम अमिताभ बच्चन और करीना कपूर ने ‘कभी खुशी कभी गम’ (2001), ‘देव’ (2004) और ‘सत्याग्रह’ (2013) जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। अमिताभ ने सैफ अली खान के साथ ‘एकलव्य: द रॉयल गार्ड’ (2007) और ‘आरक्षण’ (2011) में भी स्क्रीन शेयर की है। सैफ अली खान के वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी ‘हैवान’ में नजर आएंगे। जिसमें सैफ के अलावा अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, राजपाल यादव, शारिब हाशमी, राजेश शर्मा, पहल चौधरी और मनोज जोशी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म प्रियदर्शन की 2016 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का रीमेक है, जिसमें मोहनलाल मुख्य भूमिका में थे। करीना के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो आखिरी बार फिल्म सिंघम अगेन (2024) में नजर आई थीं। वहीं वो जल्द मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म दायरा में दिखाई देंगी। दायरा में करीना एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आएंगी। दायरा 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। …………….. यह खबर भी पढ़ें… करीना कपूर ने 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी थी:बोलीं- शिक्षा पूरी न करने का आज भी अफसोस; जानिए कपूर फैमिली में कौन कितना पढ़ा-लिखा एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने 11वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। हनुमान दास के यूट्यूब चैनल में बातचीत में करीना ने कहा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की, जिसका अफसोस उन्हें सफलता मिलने के बाद भी रहा। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और यह बात मेरे साथ बनी रही। मुझे मौका मिला था, लेकिन फिल्मों में आ गई और क्लास 11 के बाद आगे पढ़ाई नहीं की।” पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ ही घंटे बाद सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर दोपहर करीब 3 बजे 25 सिक्कों का रोल स्टॉक में नहीं था, जबकि 100 सिक्कों का बैग भी उपलब्ध नहीं था। सिक्के के आगे वाले हिस्से पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पोर्ट्रेट है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के प्रतीक के तौर पर ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के एक रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के एक बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद वेबसाइट पर ग्राहकों को वेटिंग एरिया में भेजा गया। उन्हें करीब 1 घंटे का इंतजार बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ प्रिवी मार्क के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में शामिल किया गया है। इन सिक्कों पर यह निशान 4 जुलाई को बनाया गया था। अमेरिका में 4 जुलाई को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है।

US H-1B Visa Crisis | Indian Professionals Return Home Amid Layoffs

US H-1B Visa Crisis | Indian Professionals Return Home Amid Layoffs

4 मिनट पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली कॉपी लिंक अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की लाइफलाइन माने जाने वाले H-1B वीजा पर नया संकट मंडरा रहा है। अमेरिका में चल रही छंटनी के बीच इस साल की पहली छमाही में करीब 10 हजार भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी जाने के बाद अमेरिका छोड़कर भारत लौटना पड़ा। इन्हें 60 दिन के ग्रेस पीरियड में नई नौकरी नहीं मिल पाई। अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (USCIS) के इस साल की पहली छमाही के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। इसकी तुलना में पूरे 2025 में करीब 5,100 भारतीय प्रोफेशनल्स को अमेरिका छोड़ना पड़ा था। यानी इस साल सिर्फ छह महीने में यह संख्या पिछले पूरे साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई। नौकरी जाने पर अभी 60 दिन का समय H-1B वीजा पर काम कर रहे किसी प्रोफेशनल की नौकरी चली जाती है तो मौजूदा नियमों के तहत उसे अधिकतम 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है। इस दौरान वह नया एम्प्लॉयर तलाश सकता है और अपना H-1B स्टेटस बनाए रखने की कोशिश कर सकता है। अगर इस अवधि में नई नौकरी नहीं मिलती तो उसे अमेरिका में रहने का वैध आधार खत्म होने से पहले देश छोड़ना पड़ सकता है। तय अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुके रहना ओवरस्टे माना जा सकता है। ऐसे मामले में इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई हो सकती है। इसमें रिमूवल प्रोसीडिंग्स यानी देश से निकाले जाने की कार्रवाई और कुछ परिस्थितियों में अमेरिका में दोबारा प्रवेश पर रोक भी शामिल हो सकती है। ट्रम्प 60 दिन की मोहलत खत्म करने पर अड़े राष्ट्रपति ट्रम्प H-1B वीजा को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। अब 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करने की कोशिश भी इसी नीति का हिस्सा बताई जा रही है। ट्रम्प प्रशासन की ओर से इस प्रावधान को खत्म करने वाले बिल को मंजूरी दी गई है। अगर यह कानून बनता है तो H-1B धारकों के लिए नौकरी जाने के बाद नई नौकरी तलाशने की मौजूदा 60 दिन की सुविधा खत्म हो सकती है। बिल पर आगे क्या होगा? बिल को अमेरिकी कांग्रेस में रखा जाएगा। वहां इसे पास कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस में बहुमत है, लेकिन बिल को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय हो सकती है। ट्रम्प के कट्टर समर्थक H-1B व्यवस्था को और सख्त करने और प्रवासियों की संख्या कम करने की मांग करते रहे हैं। बिल पास होने के बाद ही यह साफ होगा कि मौजूदा 60 दिन की व्यवस्था पूरी तरह खत्म होगी या इसमें कोई बदलाव किया जाएगा। कोर्ट में चुनौती संभव अगर ग्रेस पीरियड खत्म करने वाला कानून या उससे जुड़ा सरकारी आदेश लागू होता है तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। ट्रम्प प्रशासन के इमिग्रेशन से जुड़े कई फैसले पहले भी अदालतों तक पहुंचे हैं। जन्मजात नागरिकता समेत कुछ आदेशों को लेकर सरकार को कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है। हालांकि H-1B के 60 दिन वाले प्रावधान को खत्म करने वाले किसी नए कानून को अदालत किस आधार पर और किस हद तक रोक सकती है, यह उसके अंतिम स्वरूप और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा। कनाडा-जर्मनी जैसे देशों का रुख कर रहे भारतीय H-1B को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच भारतीय प्रोफेशनल्स दूसरे देशों के विकल्प भी तलाश रहे हैं। कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में प्रोफेशनल्स के लिए अलग-अलग वीजा और इमिग्रेशन प्रोग्राम मौजूद हैं। अगर अमेरिका में नौकरी जाने के बाद H-1B धारकों के रुकने की मौजूदा सुविधा खत्म होती है, तो इन देशों का आकर्षण भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और दूसरे हाई-स्किल्ड वर्कर्स के लिए बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ उन लोगों पर नहीं पड़ेगा, जो अभी अमेरिका में काम कर रहे हैं। अमेरिका में नौकरी करने की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स को भी अपना करियर प्लान बदलना पड़ सकता है। ————————– अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

US H-1B Visa Crisis | Indian Professionals Return Home Amid Layoffs

US H-1B Visa Crisis | Indian Professionals Return Home Amid Layoffs

कुछ ही क्षण पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली कॉपी लिंक अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की लाइफलाइन यानी H-1B वीजा पर नया संकट मंडरा रहा है। अमेरिका में छंटनी के दौर में लगभग 10 हजार भारतीय प्रोफेशनल्स को जॉब छूटने के बाद भारत लौटना पड़ा है। क्योंकि 60 दिन के ग्रेस पीरियड में भी उन्हें नई नौकरी नहीं मिल पाई। अमेरिकी सिजिटनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (यूएससीआईएस) के इस साल की पहली छमाही के आंकड़ों में ये खुलासा हुआ है। इसकी तुलना में पिछले साल भर में लगभग 5100 भारतीय प्रोफेशनल्स को अमेरिका छोड़ना पड़ा था। ओवरस्टे करने पर कार्रवाई होगी अमेरिका में H-1B वीजा पर प्रोफेशनल्स को नई जॉब के लिए 60 दिन के दौरान नया एम्प्लॉयर खोजने का समय मिलता है। इस दौरान काम नहीं कर सकता है। इसके बावजूद यदि कोई ओवरस्टे करता है तो कड़ी कार्रवाई होती है। रिमूवल प्रोसीडिंग्स जैसे डिपोर्ट किया जा सकता है। इसके बाद अमेरिका में री-एंट्री बैन भी लग सकता है। 60 दिन की मोहलत खत्म करने पर अड़े ट्रम्प राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प H-1B वीजा पर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। 60 दिन में नई नौकरी खोजने की मोहलत के प्रावधान को भी खत्म करने वाले बिल पर अड़े हुए हैं। उन्होंने इस प्रावधान को खत्म करने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। बिल पर आगे क्या होगा? बिल को अमेरिकी कांग्रेस में रखा जाएगा। इसमें ट्रम्प को बहुमत है, लेकिन ट्रम्प के कट्‌टरपंथी समर्थक इसे पास कराने पर अड़े हुए हैं। ये सभी प्रवासी विरोधी हैं। बिल पास होने पर क्या होगा? बिल पास हुआ तो H-1B धारकों को जॉब छूटते ही अमेरिका को छोड़कर जाना होगा। 60 दिन तक नौकरी ढूंढने की मोहलत खत्म कर दी जाएगी। H-1B संसद की मंजूरी से लाया गया है, इसलिए ट्रम्प इसे संसद से ही नए बिल के जरिए पलट सकते हैं। कोर्ट में चुनौती संभव है? H-1B वीजा में 60 दिन की मोहलत वाले प्रावधान को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रम्प के पहले के आदेश जैसे टैरिफ और जन्मजात नागरिकता जैसे मनमाने आदेशों को कोर्ट पलट चुका है। भारतीय नए देश तलाशेंगे? भारतीय प्रोफेशनल्स कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करने भी लगे हैं। ये सभी देश आसान शर्तों पर प्रोफेशनल वीजा जारी भी कर रहे हैं। ————————– अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Himalaya Glacier Collapse | China-Nepal Border Disaster Update

Himalaya Glacier Collapse | China-Nepal Border Disaster Update

37 मिनट पहले कॉपी लिंक 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर हिमालय की एक घाटी में ऐसी तबाही आई, जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हैरानी की बात ये थी कि चीन इस इलाके में ऐसी आपदा से निपटने की तैयारी पहले ही कर चुका था। 14 महीने पहले इसी इलाके में ग्लेशियर की एक झील फटने से भूस्खलन हुआ था। ट्रक, घर और एक पुल बह गए थे। इसके बाद चीन ने करीब छह महीने तक बॉर्डर पोर्ट बंद रखा और बाढ़ से बचाव का सिस्टम मजबूत किया। पानी के स्तर पर 24 घंटे नजर रखने लगी, तटबंध और बाढ़ रोधी दीवारें बनाई गईं और पानी का रास्ता बदलने के लिए नहरें तैयार की गईं। अधिकारियों और ग्रामीणों की ट्रेनिंग हुई, मॉक ड्रिल कराई गई और जुलाई में तैयारियों की समीक्षा भी हुई। यानी पिछली आपदा से सबक लेने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई थी। फिर भी 26 अगस्त को कुछ ऐसा हुआ, जिसके लिए ये पूरा सिस्टम तैयार ही नहीं था। इस बार झील नहीं, ग्लेशियर टूटा इस बार बाढ़ किसी ग्लेशियल झील के फटने से नहीं आई। एक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गया। इसके साथ बर्फ, बड़े पत्थर और पानी इतनी तेजी से नीचे आए कि कुछ ही देर में ये सब सुनामी जैसी लहर में बदल गया। ग्यिरोंग पोर्ट कॉम्पलेक्स में पहुंचते ही इस लहर ने 27 इमारतों को तबाह कर दिया। इसके बाद ये तबाही नेपाल की ओर बढ़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचने के बीच सिर्फ छह-सात मिनट का समय था। इतनी कम अवधि में लोगों को चेतावनी देना और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाना बेहद मुश्किल था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लेशियर का यह हिस्सा अचानक क्यों टूटा, इसकी पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है। इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग के कारण पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने और चट्टानों के कमजोर होने जैसी वजहें हो सकती हैं। एक ही जगह बार-बार क्यों हो रही तबाही? इस आपदा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। ग्यिरोंग पोर्ट जैसी बड़ी सीमा चौकी इतनी जोखिम वाली जगह पर क्यों बनाई गई? यह पोर्ट एक संकरी घाटी में उस जगह बना है, जहां ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदी मिलती हैं। दोनों नदियों में ग्लेशियरों का पानी आता है। इसी छोटी सी समतल जमीन पर पुल, कस्टम यार्ड, ड्राई पोर्ट और ट्रकों की पार्किंग है। यानी ऊपर पहाड़ों से पानी, बर्फ या मलबा नीचे आता है तो सबसे पहले यही इलाका उसकी चपेट में आता है। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट सस्वता सन्याल के मुताबिक, 2025 में भी लोग इसी कस्टम यार्ड से बह गए थे और इस साल भी यह इलाका फिर तबाही की चपेट में आ गया। चीन के तिब्बत में ग्यिरोंग पोर्ट पर बाढ़ के मलबे में कई लोग दब गए। खतरनाक होने के बावजूद व्यापार के लिए जरूरी है ग्यिरोंग बार-बार प्राकृतिक आपदा झेलने के बाद भी चीन के लिए इस जगह को छोड़ना आसान नहीं है। पिछले एक दशक में ग्यिरोंग पोर्ट चीन और नेपाल के बीच मुख्य व्यापारिक रास्ता बन गया है। दोनों देशों के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी रास्ते से होता है। हर साल 1.80 लाख से ज्यादा लोग भी यहां से दोनों देशों के बीच आते-जाते हैं। इससे पहले चीन-नेपाल के बीच झांगमू-कोदारी बॉर्डर रूट मुख्य रास्ता था। लेकिन 2015 के नेपाल भूकंप में यह रास्ता बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद ग्यिरोंग का महत्व बढ़ता गया। समस्या यह है कि झांगमू वाला रास्ता भी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित नहीं है। 2016 में इसी इलाके में ग्लेशियल झील फटने से बाढ़ आई थी। यानी हिमालय में एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर जाने से आपदा का खतरा खत्म नहीं होता। एक एक्सपर्ट ने इस स्थिति की तुलना ‘व्हैक-ए-मोल’ गेम से की है। यानी एक जगह खतरा पैदा होता है तो उससे बचने के लिए दूसरी जगह जाते हैं, लेकिन वहां कोई नया खतरा सामने आ जाता है। जुलाई 2025 में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन के बाद का दृश्य। यह आपदा ग्लेशियर की झील का पानी बाहर निकलने से आई बाढ़ के कारण हुई थी। अब सिर्फ बाढ़ पर नजर रखना काफी नहीं इस घटना ने दिखा दिया कि हिमालय में अब किसी एक प्राकृतिक खतरे को देखकर तैयारी करना काफी नहीं है। पहले निगरानी व्यवस्था बाढ़, अचानक आने वाली बाढ़ या हिमस्खलन जैसे खतरों पर अलग-अलग नजर रखती थी। लेकिन इस बार खतरे एक के बाद एक जुड़े। पहले ग्लेशियर का हिस्सा टूटा, फिर बर्फ और चट्टानें नीचे आईं। देखते ही देखते ये मलबे और पानी की तेज धार में बदल गईं और कुछ ही मिनटों में नीचे के इलाकों में तबाही मचा दी। विशेषज्ञ इसे ‘कैस्केड ऑफ हैजर्ड्स’ यानी एक के बाद एक आने वाली आपदाओं की कड़ी कहते हैं। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे में आपदाओं का यह सिलसिला और जटिल हो सकता है, जिसका पहले से अनुमान लगाना भी मुश्किल होगा। ICIMOD की विशेषज्ञ सस्वता सन्याल के मुताबिक, पहाड़ों में अब सिर्फ एक खतरे को ध्यान में रखकर तैयारी नहीं की जा सकती। यही इस आपदा की सबसे बड़ी विडंबना है। चीन ने पिछली बाढ़ से निपटने के लिए सेंसर और निगरानी व्यवस्था तो तैयार कर ली थी, लेकिन इस बार तबाही बाढ़ से पहले ही शुरू हो गई। ग्लेशियर का हिस्सा टूटा और उसे पकड़ने के लिए वहां कोई सिस्टम नहीं था। यानी चीन ने पिछली आपदा से सबक लिया था, लेकिन अगली आपदा ने खतरे का तरीका ही बदल दिया। —————————– नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:अलर्ट डेढ़ घंटे बाद आया; आरोप- चीन ने नहीं चेताया नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी। बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है। बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…