Vivek Oberoi Birthday | Farah Khan Assistant Struggle Career Story

14 मिनट पहले कॉपी लिंक विवेक ओबेरॉय का जन्म 3 सितंबर 1976 को हुआ था। अपने करियर में हीरो से लेकर विलेन तक कई तरह के किरदार निभाने वाले एक्टर विवेक ओबेरॉय आज 50 साल के हो गए हैं। हालांकि, उनका फिल्मी सफर शुरुआत से आसान नहीं था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने संघर्ष किया था। यहां तक कि उन्होंने फिल्ममेकर फराह खान को असिस्ट भी किया। इस दौरान वह रिहर्सल रूम साफ करते थे और डांसर्स के लिए चाय भी लाते थे। मैशबल इंडिया से बातचीत में विवेक ने बताया था कि वह ट्रेनिंग के लिए लंबे समय तक फराह खान को असिस्ट करते रहे। उन्होंने कहा था, “मैंने रिहर्सल रूम साफ करने और सभी डांसर्स के लिए चाय लाने से शुरुआत की और फिर आगे बढ़ता गया।” विवेक ने यह भी बताया था कि उन्होंने कभी किसी को नहीं बताया कि उनके पिता कौन हैं। दरअसल, विवेक दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय के बेटे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने पिता की पहचान का सहारा लेकर काम पाने की कोशिश नहीं की। सुरेश ओबेरॉय ने लावारिस (1981), नमक हलाल (1982), मिर्च मसाला (1987), और मिस्टर इंडिया (1987) जैसी कई फिल्मों में काम किया है। 2002 में ‘कंपनी’ से मिला बड़ा ब्रेक विवेक ओबेरॉय को साल 2002 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘कंपनी’ से बॉलीवुड डेब्यू का मौका मिला था। फिल्म मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर आधारित थी। इसमें विवेक ने चंदू का किरदार निभाया था। ‘कंपनी’ में विवेक के अभिनय को काफी पसंद किया गया। फिल्म की सफलता के साथ ही वह इंडस्ट्री में तेजी से पहचाने जाने लगे। अपने डेब्यू के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड मिला था। फिल्म ‘कंपनी’ के लिए विवेक ओबेरॉय को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था। इसके बाद साल 2002 में ही वह ‘रोड’ और ‘साथिया’ में नजर आए। खासतौर पर ‘साथिया’ में रानी मुखर्जी के साथ उनकी जोड़ी पसंद की गई। फिल्म सफल रही और विवेक को बेस्ट एक्टर के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला। विवेक ने अपने करियर में सिर्फ हीरो वाले रोल नहीं किए। उन्होंने नेगेटिव किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ी। साल 2006 में विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओमकारा’ में उन्होंने केशु का रोल किया था। इसके बाद 2007 में आई ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ में उन्होंने गैंगस्टर माया डोलस का किरदार निभाया। इस रोल में विवेक के लुक और एक्टिंग की काफी चर्चा हुई। उन्हें इस किरदार के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन भी मिला। ‘रक्त चरित्र’ में निभाया दमदार रोल 2010 में विवेक ने राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘रक्त चरित्र’ में परिताला रवि का किरदार निभाया। यह एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण रोल था। फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। इसके बाद 2013 में विवेक ‘कृष 3’ में नजर आए। उन्होंने फिल्म में सुपरविलेन काल का किरदार निभाया। ऋतिक रोशन और कंगना रनोट स्टारर इस फिल्म में विवेक की परफॉर्मेंस भी चर्चा में रही। उन्हें फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला। विवेक ओबेरॉय ने 29 अक्टूबर 2010 को प्रियंका अल्वा से शादी की थी। प्रियंका, कर्नाटक के पूर्व मंत्री जीवराज अल्वा की बेटी हैं। कपल के दो बच्चे बेटा विवान और बेटी अमेया हैं। साउथ की फिल्मों में भी बनाई पहचान विवेक ने हिंदी फिल्मों के अलावा साउथ की फिल्मों में भी काम किया। 2017 में उन्होंने तमिल फिल्म ‘विवेगम’ से डेब्यू किया। इसके बाद 2019 में वह मलयालम फिल्म ‘लूसिफर’ में नजर आए। इस फिल्म में उन्होंने विलेन बॉबी का रोल निभाया। मोहनलाल स्टारर फिल्म में उनके किरदार को दर्शकों ने पसंद किया। विवेक ने तेलुगु फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने ‘विनय विधेया रामा’ में अहम भूमिका निभाई। 2022 में वह मलयालम फिल्म ‘कडुवा’ में भी नजर आए। विवेक ओबेरॉय कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़ी कंपनी ‘कर्म इंफ्रास्ट्रक्चर’ के मालिक हैं। उन्होंने एडटेक, ज्वैलरी और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों की करीब 29 से अधिक स्टार्टअप कंपनियों में निवेश किया है। एक्टिंग के साथ प्रोडक्शन में भी कदम रखा विवेक ने एक्टिंग के अलावा फिल्म प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया। साल 2011 में उन्होंने फिल्म ‘देख इंडियन सर्कस’ प्रोड्यूस की। इस फिल्म को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी सराहना मिली। फिल्म ने 2011 में बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड जीता था। विवेक ने टीवी पर भी काम किया। वह रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज’ में जज की भूमिका में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किरदार निभाया। फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ 24 मई 2019 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। अब विवेक ओबेरॉय जल्द नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ में नजर आएंगे। फिल्म भारत में 8 नवंबर 2026 (दिवाली) को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में वह रावण की बहन शूर्पणखा के पति विद्युत्जिह्व का किरदार निभा रहे हैं। शुरुआत में उनके विभीषण बनने की चर्चा थी। हालांकि, ट्रेलर के बाद उनका किरदार साफ हो गया। फिल्म में विवेक और रावण के बीच युद्ध का सीन भी देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि विवेक ने फिल्म से मिलने वाली अपनी पूरी फीस कैंसर से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए दान करने का फैसला किया है। ………….. यह खबर भी पढ़ें… शक्ति कपूर ने भागकर की थी शादी: लता मंगेशकर के परिवार से थीं पत्नी, शादी के बाद अखबार में छपा- 3 महीने में तलाक हो जाएगा कई सुपरहिट फिल्मों में विलेन और कॉमेडियन का रोल प्ले करने वाले शक्ति कपूर आज 74 साल के हो गए। तकरीबन 700 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके शक्ति का एक्टिंग करियर बेहद सफल रहा। उनकी पर्सनल लाइफ की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। शक्ति ने शिवांगी कोल्हापुरे से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म ‘किस्मत’ के दौरान हुई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Surat Samras Girls Hostel Protest

Hindi News Career Surat Samras Girls Hostel Protest | Poor Food Water Facility Issues 15 मिनट पहले कॉपी लिंक सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने “रामधुन” गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। विरोध करने वाली एक छात्रा ने कहा – इस हॉस्टल के खाने में कीड़े और खराब पानी के अलावा भी कई समस्याएं हैं। ये विरोध हमारी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। इससे पहले 11 अगस्त को किया था प्रदर्शन इससे पहले, 11 अगस्त को छात्रों ने खाने की क्वालिटी, साफ – सफाई, पानी की पर्याप्त सप्लाई और हॉस्टल वार्डन के खराब व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों का आरोप था कि हॉस्टल में परोसे जाने वाले खाने में कीड़े और दूसरी चीजें मिली थीं। हॉस्टल परिसर के आस-पास कैमरे लगाने की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की भावनगर जिला इकाई की अध्यक्ष दीपिका कचोट ने आरोप लगाया कि गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को अपने खाने में प्लास्टिक और सिगरेट के टुकड़े मिले हैं। उन्होंने कहा – पानी की क्वालिटी खराब है। नौ मंजिल के इस हॉस्टल में सिर्फ दो या तीन मंजिलों पर ही पानी मिलता है। ABVP अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हॉस्टल परिसर के आस-पास CCTV कैमरे लगाने चाहिए। कॉलेज जाने के लिए हॉस्टल से बाहर निकलने पर छात्राओं को लड़कों की छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है। वार्डन के बुरे बर्ताव से परेशान छात्राएं एक छात्रा ने आरोप लगाया कि जब छात्राओं ने वार्डन से घर जाने की इजाजत मांगी, तो वार्डन ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। उन्होंने यह भी कहा कि खाने में कीड़े मिलने की उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। डिप्टी कलेक्टर ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके बाद अगले दिन विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया गया। खराब पानी पीने से कई बार बीमारी हुई छात्राएं इतना ही नहीं छात्राओं ने हॉस्टल के पानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पहले भी छात्राओं ने कहा था कि पानी का रंग कई बार हरा दिखाई देता है। इस पानी को पीने से कई छात्राओं की तबियत खराब हो गई है। उन्होंने आगे बताया कि जब हॉस्टल में निरीक्षण के लिए अधिकारी आते हैं, तो अचानक सारी व्यवस्था सुधर जाती हैं। 1200 महिलाओं के लिए सिर्फ 1 घंटे आता है पानी हॉस्टल और मेस की साफ-सफाई को लेकर भी छात्राओं में नाराजगी है। पानी की सप्लाई यहां सिर्फ एक घंटे के लिए होती है। छह मंजिला इस हॉस्टल की तीन मंजिल तक भी पानी नहीं चढ़ता। फिलहाल यहां 1200 महिलाएं रहती है। हॉस्टल अथॉरिटी का कहना है कि एक घंटे जो पानी आता है, उसी दौरान महिलाएं नहा लें, अपने कपड़े वगैरह भी धो लें और उसी टाइम लिमिट के अंदर पानी स्टोर करके भी रखें। सब्जियों में तेल और पानी ज्यादा होना आम समस्या कई बार अगर हमारे फ्लोर पर पानी नहीं आता है तो दूसरे फ्लोर से पानी लेकर आना पड़ता है। इस वजह से बहुत ज्यादा तकलीफें हो रही हैं। यहां खीर में अजीब तरह की स्मेल आना आम बात है। यहां बनने वाली छाछ में पानी ज्यादा हो जाना और रोज सिर्फ आलू की सब्जी बनना, सब्जियों में तेल ज्यादा, पानी ज्यादा, रोटी इतनी कड़क होती है जो टूटती नहीं हैं। छात्रा ने आगे कहा कि इस हॉस्टल में समस्याएं इतनी सारी हैं कि मैं बोलते-बोलते थक जाऊंगी लेकिन यहां की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। —————————————————————– ये खबर भी पढ़ें बिहार में 32,388 पदों पर निकली टीचर भर्ती स्थगित:आज से शुरू थी आवेदन प्रक्रिया, आयोग के फैसले से उम्मीदवारों के बीच फिर छाई मायूसी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 32,388 पदों पर निकली टीचर भर्ती को स्थगित कर दिया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होना थी। आयोग ने इसके पीछे प्रक्रिया में किए बदलाव को वजह बताया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
आतिफ असलम बोले- भारत से बेहतर है पाकिस्तान कोक स्टूडियो:पाकिस्तान के गानों में दिखता है जादू; भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा

पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने भारत और पाकिस्तान के लोकप्रिय संगीत प्लेटफॉर्म ‘कोक स्टूडियो’ के बीच तुलना करते हुए पाकिस्तान कोक स्टुडियो को बेहतर बताया है। एक इंटरव्यू में आतिफ ने कहा कि कोक स्टूडियो पाकिस्तान की सफलता के पीछे उसका ‘रॉ और ओरिजनल’ संगीत है, जबकि कोक स्टूडियो इंडिया में ‘कमर्शियलाइजेशन’ (व्यावसायीकरण) ज्यादा हावी दिखता है। ‘भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन हावी’ दुबई के रेडियो स्टेशन मिर्ची यूएई को दिए इंटरव्यू में आतिफ असलम ने दोनों देशों के कोक स्टूडियो के काम करने के तरीके पर बात की। आतिफ ने कहा, दोनों ही तरफ संगीत की कंपोजिशन बेहतरीन बनाई जाती है, लेकिन भारतीय संगीत में वह रॉ-नेस गायब है जो हमारे गानों में होती है। इंडियन कोक स्टूडियो कमर्शियलाइजेशन पर बहुत ज्यादा भरोसा करता है और गानों को बाजार के हिसाब से ढालता है। इसके उलट, पाकिस्तानी कोक स्टूडियो पूरी तरह से ओरिजनल कंपोजिशन पर जोर देता है। वहां संगीतकारों के पास अपनी कला दिखाने की आजादी होती है और एक तरह से यह उनके लिए करो या मरो की स्थिति होती है, जहां वे अपनी अलग पहचान जोड़ सकते हैं। 2008 में शुरू हुआ कोक स्टूडियो पाकिस्तान कोक स्टूडियो पाकिस्तान की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसके फाउंडर और प्रोड्यूसर रोहेल हयात थे। इस शो ने पारंपरिक सूफी, कव्वाली, गजल और लोक संगीत को आधुनिक वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स के साथ मिलाकर फ्यूजन म्यूजिक को एक नया मुकाम दिया। कोक स्टूडियो भारत: 2011 में हुई थी शुरुआत भारत में कोक स्टूडियो की शुरुआत साल 2011 में ‘एमटीवी कोक स्टूडियो इंडिया’ के नाम से हुई थी। शुरुआती सीजन्स में ए.आर. रहमान, अमित त्रिवेदी और क्लिंटन सेरेजो जैसे संगीतकारों ने कई बेहतरीन ओरिजनल ट्रैक्स बनाए, लेकिन बाद के सालों में यह प्लेटफॉर्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड कंपोजर्स के प्रभाव में ज्यादा आ गया। भारत में बैन हुए, बोले- लोग VPN से गाने सुनते हैं इससे पहले आतिफ असलम ने भारत में लगे बैन पर बात करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और वो अपने फैंस को मिस करते हैं। यह बात उन्होंने रेडियो प्रेजेंटर क्रिस फेड के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में कही। बातचीत में आतिफ असलम ने कहा, “मुझे भारत में बैन हुए लगभग 10 साल हो गए हैं। यह भारतीय सरकार का फैसला था। उन्होंने पाकिस्तान के कलाकारों को बैन करने का फैसला किया। भारतीय कलाकार भी पाकिस्तान में बैन हैं। पिछले 10 साल से। मैंने वहां कोई गाना रिलीज नहीं किया है।” उन्होंने भारतीय फैंस के लगातार अपने संगीत को सुनने का जिक्र करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और सीडी बनाकर दूसरों को देते हैं। उन्होंने कहा कि वह पाइरेसी को बढ़ावा नहीं देते, लेकिन संगीत जहां पहुंचना होता है, वहां पहुंच जाता है। मेरे पहले सिंगल के साथ भी ऐसा ही हुआ था। आतिफ ने भारतीय फैंस को उदास नहीं होने कहा भारतीय फैंस के लिए आतिफ ने कहा, “हां, इसे लेकर बुरा मत महसूस करो। उदास मत हो। मैं हमेशा से आप लोगों से कहना चाहता था कि मुझे आप लोगों की याद आती है। मुझे वहां काम करने की याद नहीं आती, लेकिन आप लोगों की याद आती है।” आतिफ ने आगे कहा कि मैंने प्लेबैक सिंगिंग से बहुत कुछ सीखा है। अगर यह बैन नहीं हुआ होता, तो शायद मैं अपना खुद का म्यूजिक नहीं बना पाता। इसलिए इसके लिए भी मैं आप लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं। पाकिस्तानी कलाकारों पर क्यों लगा था बैन सितंबर 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने अपने निर्माता सदस्यों को भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य होने तक पाकिस्तानी कलाकारों और तकनीशियनों को काम न देने का निर्देश दिया था। हालांकि, 2016 के बाद भी कई बॉलीवुड फिल्मों में आतिफ असलम के गाने आए। 2017 में फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का ‘दिल दियां गल्लां’, ‘राब्ता’ का ‘दरअसल’, ‘ट्यूबलाइट’ का ‘मैं अगर’ और ‘करीब करीब सिंगल’ का ‘जाने दे’ रिलीज हुआ। वहीं, 2018 में ‘बागी 2’ का ‘ओ साथी’, ‘सत्यमेव जयते’ का ‘पानियों सा’, ‘लवयात्री’ का ‘तेरा हुआ’ और ‘जीनियस’ का ‘दिल मेरी ना सुने’ गाना रिलीज हुआ। वहीं, मार्च 2019 के बाद से उनका कोई गाना बॉलीवुड फिल्मों में रिलीज नहीं हुआ। गौरतलब है कि फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तानी एक्टर्स और कलाकारों पर पूरी तरह बैन की घोषणा की थी। इस हमले में 40 CRPF जवानों की जान गई थी। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी फिल्मों, वेब सीरीज, गानों और पॉडकास्ट पर रोक लगा दी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने IT रूल्स 2021 के तहत OTT और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स से पाकिस्तानी कंटेंट हटाने का आदेश दिया। इसके अलावा कई पाकिस्तानी कलाकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स भी भारत में अस्थायी रूप से ब्लॉक किए गए। इनमें माहिरा खान और हानिया आमिर जैसे कलाकार शामिल थे।
नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेचा जा सकेगा

नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) ने बताया कि यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। DNB के मुताबिक, संकट की स्थिति में लंदन में रखा सोना ज्यादा आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। DNB के प्रेसिडेंट ओलाफ स्लेपेन ने कहा कि यह कदम देश की संकट से निपटने की तैयारी और मजबूती बढ़ाने के लिए जरूरी था। 27 टन सोना न्यूयॉर्क-ओटावा से नीदरलैंड्स लाया गया DNB के मुताबिक, 27 टन सोने की छड़ें न्यूयॉर्क और ओटावा से नीदरलैंड्स के जाइस्ट पहुंचाई गईं। इसके बाद इसी मात्रा और गुणवत्ता का सोना लंदन भेज दिया गया। सोने की छड़ों को पिघलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, अटलांटिक महासागर के पार इतनी बड़ी मात्रा में सोना किस तरह पहुंचाया गया, इसकी जानकारी बैंक ने नहीं दी। इस ट्रांसफर से पहले DNB के कुल सोने का 31.3% न्यूयॉर्क और 19.7% ओटावा में रखा था। अब दोनों जगहों पर यह हिस्सेदारी घटकर 18.5% रह गई है। वहीं, लंदन में रखे सोने की हिस्सेदारी 18.1% से बढ़कर 32.1% हो गई है। नीदरलैंड्स में 30.8% सोना अभी भी रखा हुआ है। न्यूयॉर्क में बेचकर लंदन में खरीदा बाकी सोना DNB ने बताया कि ट्रांसफर का बाकी हिस्सा अलग तरीके से किया गया। न्यूयॉर्क में सोना बेचा गया और उतनी ही मात्रा का सोना लंदन में दोबारा खरीदा गया। बैंक के मुताबिक, सोने की खरीद-बिक्री और फिजिकल ट्रांसफर को साथ करने से इतनी बड़ी और जटिल प्रक्रिया से जुड़े जोखिम को बांटने में मदद मिली। संकट में लंदन का सोना जल्दी इस्तेमाल हो सकेगा DNB के मुताबिक, बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा सोना दुनिया में सबसे आसानी से ट्रेड होने वाले सोने में माना जाता है। इसलिए किसी संकट के समय इसे अमेरिका या कनाडा में रखे सोने की तुलना में ज्यादा आसानी से बेचा या खरीदा जा सकता है। DNB ने इस फैसले के पीछे “बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव” का हवाला दिया है। हालांकि, बैंक ने यह साफ नहीं किया कि वह किन घटनाओं को लेकर ऐसा कह रहा है। अमेरिका-कनाडा के बीच जारी है ट्रेड विवाद यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड विवाद चल रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद एक-दूसरे के सामान पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। कनाडा के स्टील, एल्युमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख सेक्टर अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। अगस्त में अमेरिका ने करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर अतिरिक्त 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना DNB के मुताबिक, 2025 के अंत में नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना था। इसकी कीमत करीब 72.2 अरब यूरो थी। बैंक ने बताया कि सोने को अलग-अलग जगहों पर रखने की व्यवस्था का मकसद जोखिम को बांटना और संकट के समय सोने तक आसानी से पहुंच बनाए रखना है।
नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे

नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) ने बताया कि यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। DNB के मुताबिक, संकट की स्थिति में लंदन में रखा सोना ज्यादा आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। इस ट्रांसफर से पहले DNB के कुल सोने का 31.3% न्यूयॉर्क और 19.7% ओटावा में रखा था। अब दोनों जगहों पर यह हिस्सेदारी घटकर 18.5% रह गई है। वहीं, लंदन में रखे सोने की हिस्सेदारी 18.1% से बढ़कर 32.1% हो गई है। नीदरलैंड्स में 30.8% सोना अभी भी रखा हुआ है। 27 टन सोना न्यूयॉर्क-ओटावा से नीदरलैंड्स लाया गया DNB के मुताबिक, 27 टन सोने की छड़ें न्यूयॉर्क और ओटावा से नीदरलैंड्स के जाइस्ट पहुंचाई गईं। इसके बाद इसी मात्रा और गुणवत्ता का सोना लंदन भेज दिया गया। सोने की छड़ों को पिघलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, अटलांटिक महासागर के पार इतनी बड़ी मात्रा में सोना किस तरह पहुंचाया गया, इसकी जानकारी बैंक ने नहीं दी। DNB ने बताया कि ट्रांसफर का बाकी हिस्सा अलग तरीके से किया गया। न्यूयॉर्क में सोना बेचा गया और उतनी ही मात्रा का सोना लंदन में दोबारा खरीदा गया। बैंक के मुताबिक, सोने की खरीद-बिक्री और फिजिकल ट्रांसफर को साथ करने से इतनी बड़ी और जटिल प्रक्रिया से जुड़े जोखिम को बांटने में मदद मिली। संकट में लंदन का सोना जल्दी इस्तेमाल हो सकेगा DNB के मुताबिक, बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा सोना दुनिया में सबसे आसानी से ट्रेड होने वाले सोने में माना जाता है। इसलिए किसी संकट के समय इसे अमेरिका या कनाडा में रखे सोने की तुलना में ज्यादा आसानी से बेचा या खरीदा जा सकता है। DNB ने इस फैसले के पीछे “बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव” का हवाला दिया है। हालांकि, बैंक ने यह साफ नहीं किया कि वह किन घटनाओं को लेकर ऐसा कह रहा है। अमेरिका-कनाडा के बीच जारी है ट्रेड विवाद यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड विवाद चल रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद एक-दूसरे के सामान पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। कनाडा के स्टील, एल्युमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख सेक्टर अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। अगस्त में अमेरिका ने करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर अतिरिक्त 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना DNB के मुताबिक, 2025 के अंत में नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना था। इसकी कीमत करीब 72.2 अरब यूरो थी। बैंक ने बताया कि सोने को अलग-अलग जगहों पर रखने की व्यवस्था का मकसद जोखिम को बांटना और संकट के समय सोने तक आसानी से पहुंच बनाए रखना है। लंदन का गोल्ड मार्केट सबसे बड़ा फ्रांस की नेशनल गोल्ड काउंटर के प्रेसिडेंट लॉरेंट श्वार्ट्ज ने कहा कि सेंट्रल बैंक करीब एक दशक से अपने गोल्ड रिजर्व को अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मौजूदा राजनीतिक माहौल की वजह से भी कुछ सेंट्रल बैंक सोना रखने के लिए दूसरी जगहों को चुन सकते हैं। श्वार्ट्ज के मुताबिक, लंदन का गोल्ड मार्केट दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा लिक्विड मार्केट है। यानी यहां सोने को आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। इसलिए संकट के समय लंदन में रखा सोना जल्दी इस्तेमाल किया जा सकता है। सेंट्रल बैंक यहां अपने सोने को दूसरे बैंकिंग संस्थानों को आसानी से उधार भी दे सकते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं। लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
BGSSL Job Openings for Graduates, Engineers, CA

Hindi News Career Bank Of Baroda Recruitment: BGSSL Job Openings For Graduates, Engineers, CA 7 मिनट पहले कॉपी लिंक बैंक ऑफ बड़ौदा की सब्सिडियरी कंपनी बड़ौदा ग्लोबल शेयर्ड सर्विसेज लिमिटेड (BGSSL) ने 2049 पदों पर भर्ती निकाली है। ये नियुक्तियां भारत में कंपनी के अलग-अलग विभागों और केंद्रों के लिए की जाएंगी, जिनमें GIFT सिटी, गांधीनगर सहित अन्य स्थान शामिल हैं। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती में उन महिलाओं और रिटायर्ड अग्निवीरों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास पद के अनुसार योग्यता होगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमबीए, सीए, सीएस या इंजीनियरिंग की डिग्री होनी चाहिए। पद के अनुसार DRA, NSEIT सर्टिफिकेट प्राप्त उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। सिलेक्शन प्रोसेस : शॉर्टलिस्टिंग इंटरव्यू सैलरी : कंपनी के नियमानुसार एज लिमिट : कंपनी के नियमानुसार ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.bgss.in पर जाएं। अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करें। नया पेज खुलने पर ‘Current openings’ टैब पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकालकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ————————————————————– ये खबर भी पढ़ें पोस्ट ऑफिस में 25,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती:रेलवे में 1599 वैकेंसी; इस हफ्ते निकलीं 27 हजार से ज्यादा नौकरियां इस हफ्ते निकली हैं इंडिया पोस्ट ऑफिस और रेलवे सहित कई विभागों में 27,260 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में फेडरल जज ने बुधवार को ट्रम्प प्रशासन के नए आदेश पर रोक लगा दी। यह आदेश अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के नियम सीमित करने के लिए जारी किया गया था। ग्रीनबेल्ट की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला दिया। प्रवासी अधिकार संगठनों ने ट्रम्प के आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी। विवाद 30 जून को आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया था, जिसमें ऐसे बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं। ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म को बनाया निशाना इसके बाद ट्रम्प ने 6 अगस्त को नया आदेश जारी किया। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है, जब विदेशी नागरिक अपने बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका जाकर जन्म देते हैं। नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों की नागरिकता पर भी सवाल उठाया गया था। नए आदेश के खिलाफ उन बच्चों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई, जिनकी नागरिकता प्रभावित हो सकती थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि मुकदमे के नतीजे आने तक उनकी नागरिकता को पूरी तरह मान्यता दी जाए। सरकार नागरिकता को नकार नहीं सकती जज बोर्डमैन ने याचिकाकर्ताओं से सहमति जताते हुए कहा कि ट्रम्प का नया आदेश भी संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले से जुड़े बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। ऐसे में सरकार उनकी नागरिकता को नकार नहीं सकती। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी संघीय एजेंसियां फिलहाल उन बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं दे सकेंगी, जो इस मुकदमे के दायरे में आते हैं। संविधान से मिला हक राष्ट्रपति नहीं बदल सकते इस मामले में प्रवासी अधिकार संगठन CASA और असायलम सीकर अडवोकेट प्रोजेक्ट याचिकाकर्ता हैं। संगठनों का कहना है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता संविधान से मिला अधिकार है और इसे राष्ट्रपति के आदेश से नहीं बदला जा सकता। सरकार का तर्क – कोर्ट ने जल्दबाजी में दखल दिया अमेरिकी सरकार का तर्क है कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया, क्योंकि आदेश को कैसे लागू किया जाएगा, इससे जुड़े नियम और दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं। हालांकि जज बोर्डमैन ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की यह नई कोशिश भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है। ———————-
ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जन्म से मिलने वाली नागरिकता सीमित करने वाले नए आदेश पर फेडरल जज ने रोक लगा दी है। मैरीलैंड की जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। जज ने कहा कि संविधान के तहत जन्म से अमेरिकी नागरिकता पाने वाले बच्चों की नागरिकता सरकार नहीं रोक सकती। ट्रम्प ने 6 अगस्त को यह आदेश जारी किया था। इसमें ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। इसमें विदेशी लोग बच्चे के जन्म के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके। आदेश में कुछ अन्य मामलों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी। जज बोलीं- नागरिकता रोकने का अधिकार नहीं जज बोर्डमैन ने कहा कि ट्रम्प का आदेश संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि इस मामले में आने वाले बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन फिलहाल इस मामले से जुड़े बच्चों की नागरिकता रोकने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। सरकार ने फैसले का विरोध किया ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया है। सरकार के मुताबिक, आदेश को लागू करने के नियम और दिशा-निर्देश अभी तैयार नहीं हुए थे। जज ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता का अधिकार सीमित करने की कोशिश की अदालत में समीक्षा हो सकती है। प्रवासी संगठनों ने कोर्ट में चुनौती दी थी प्रवासी अधिकार संगठनों CASA और असायलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट ने आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया। उनका कहना था कि इससे कई बच्चों की नागरिकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक इन बच्चों को मिलने वाली नागरिकता पर कोई रोक न लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट पहले भी ट्रम्प को रोक चुका है जन्म से मिलने वाली नागरिकता को लेकर ट्रम्प प्रशासन की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट भी 30 जून को फैसला दे चुका है। कोर्ट ने प्रशासन की उस कोशिश को रोक दिया था, जिसमें कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी। अब फेडरल जज के इस फैसले से ट्रम्प प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने की कोशिश को एक और झटका लगा है। बच्चों की नागरिकता के लिए हजारों लोग अमेरिका आते हैं माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के अनुसार, अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़े मामलों की संख्या बहुत कम होती है। संस्था का अनुमान है कि हर साल 22 हजार से 26 हजार लोग अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं। हालांकि 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली माताओं से जन्मे केवल 9,600 बच्चों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। ———————- यह भी पढ़ें…. अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…
Uttarakhand Winter Tourism | CM Dhami Invites Virat Kohli & Anushka Sharma

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की फाइल फोटो। उत्तराखंड में अब पर्यटन को सिर्फ गर्मियों और चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं रखने की तैयारी है। राज्य सरकार सर्दियों में भी ज्यादा पर्यटकों को पहाड़ों तक लाने के लिए विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर . विराट-अनुष्का जैसे लोकप्रिय चेहरे अगर सर्दियों में उत्तराखंड आते हैं तो पहाड़ों की बर्फ, शीतकालीन चारधाम और यहां की दूसरी घूमने की जगहों को देशभर में पहचान मिल सकती है। खासकर युवाओं में इसका असर देखने को मिल सकता है। सरकार की कोशिश है कि लोग सर्दियों में भी उत्तराखंड को घूमने के लिए चुनें और पर्यटन का फायदा ज्यादा महीनों तक स्थानीय लोगों को मिले। सर्दियों में सिर्फ दर्शन नहीं, बर्फ और एडवेंचर का भी मजा सरकार सर्दियों के पर्यटन को सिर्फ चारधाम यात्रा से नहीं जोड़ रही है। उत्तराखंड में बर्फबारी के दौरान स्कीइंग, स्नो ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग, कैंपिंग, जंगल सफारी, गांवों में होमस्टे और पहाड़ों की सैर जैसे विकल्प भी पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। औली में बर्फ के बीच स्कीइंग सबसे बड़ा आकर्षण है। चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशिला में बर्फीली पहाड़ियों के बीच ट्रेकिंग का अलग अनुभव मिलता है। पिथौरागढ़ का मुनस्यारी और खलिया टॉप, उत्तरकाशी का दयारा बुग्याल, चकराता और चौकोरी जैसे इलाके भी सर्दियों में बर्फ और शांत पहाड़ी माहौल के लिए पर्यटकों को खींच सकते हैं। इसके अलावा साफ आसमान वाली सर्द रातों में पहाड़ों पर तारों को देखने, स्थानीय खाना खाने, गांवों में रहने और पहाड़ी जीवन को करीब से जानने का अनुभव भी पर्यटकों को दिया जा सकता है। यानी सरकार की कोशिश है कि सर्दियों में उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के पास धार्मिक यात्रा के अलावा भी घूमने और समय बिताने के कई विकल्प हों। 365 दिन पर्यटन बढ़ाने पर जोर उत्तराखंड में पर्यटन का बड़ा हिस्सा चारधाम यात्रा और गर्मियों के मौसम पर निर्भर रहता है। सरकार अब इस तस्वीर को बदलना चाहती है। लक्ष्य है कि सालभर पर्यटक उत्तराखंड आएं, ताकि होटल, होमस्टे, टैक्सी, गाइड, दुकान और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को पूरे साल काम मिलता रहे। इसी सोच के तहत एडवेंचर और साइकिलिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन विभाग अल्टीमेट उत्तराखंड एमटीबी चैलेंज को नए रूप में आयोजित करने जा रहा है। 14 से 20 अक्टूबर तक 700 किमी की साइकिल यात्रा 14 से 20 अक्टूबर तक उत्तराखंड में करीब 700 किलोमीटर का साइकिल अभियान होगा। पर्यटन विभाग के अनुसार यह यात्रा नैनीताल-मुक्तेश्वर से शुरू होकर बागेश्वर, कर्णप्रयाग, गुप्तकाशी और टिहरी होते हुए मसूरी में खत्म होगी। इस बार साइकिल सवारों को सिर्फ सामान्य सड़क पर नहीं चलाया जाएगा। रास्ते में कुछ ऑफ-रोड यानी कच्चे और पहाड़ी रास्ते भी शामिल किए जाएंगे। अभियान में 60 से ज्यादा विदेशी और पेशेवर साइकिल सवारों के शामिल होने की उम्मीद है। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से उत्तराखंड को दुनिया में एडवेंचर और पहाड़ों पर घूमने के लिए बेहतर जगह के तौर पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। साइकिल यात्रा कुमाऊं और गढ़वाल के कई जिलों से होकर गुजरेगी। देहरादून में बीता बचपन, परिवार की जड़ें भी उत्तराखंड में अनुष्का शर्मा का जन्म अयोध्या में हुआ था, लेकिन उनका उत्तराखंड से पुराना पारिवारिक रिश्ता है। उनके परिवार की जड़ें उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र से जुड़ी हैं। अनुष्का का बचपन और शुरुआती साल देहरादून से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में देहरादून को अपना होमटाउन बताया था। देहरादून में उनका पुश्तैनी घर भी रहा है, जहां उनकी दादी और परिवार के दूसरे सदस्य रहते थे। अनुष्का के उत्तराखंड कनेक्शन की वजह से विराट के साथ उनकी यात्राओं में भी इस राज्य से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव नजर आता है। आखिरी बार 2023 में आए थे दोनों… 2023 में ऋषिकेश के आश्रम पहुंचे थे विराट-अनुष्का: जनवरी 2023 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा उत्तराखंड पहुंचे थे। दोनों ऋषिकेश स्थित स्वामी दयानंद सरस्वती आश्रम गए और यहां पूजा-अर्चना के साथ ध्यान किया। यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज से ठीक पहले हुआ था। 2022 में बेटी वामिका के साथ कैंची धाम आए: नवंबर 2022 में विराट-अनुष्का अपनी बेटी वामिका के साथ नैनीताल जिले के कैंची धाम पहुंचे थे। दोनों ने नीम करौली बाबा के मंदिर में दर्शन किए और आरती में शामिल हुए। इसके बाद दोनों काकड़ीघाट भी गए थे। उनकी इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहे थे। 2016 में शादी से पहले नरेंद्रनगर-हरिद्वार की सैर: दिसंबर 2016 में शादी से पहले विराट और अनुष्का उत्तराखंड आए थे। दोनों नरेंद्रनगर स्थित आनंदा इन द हिमालयाज में ठहरे और छुट्टियां बिताईं। इस दौरान हरिद्वार के अनंत धाम आश्रम भी पहुंचे और पूजा-अर्चना की। ———————— ये खबर भी पढ़ें…. देहरादून में कार सवार महिला ने गाड़ियों को रौंदा:सब्जी की दुकान में घुसी, दुकानदार घायल; मौके पर भारी हंगामा देहरादून के कैंट थाना क्षेत्र में बुधवार देर शाम एक बेकाबू कार ने सड़क किनारे खड़े कई दोपहिया वाहनों और सब्जी के ठेलों को टक्कर मार दी। हादसे में एक दुकानदार घायल हो गया, जबकि कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। (पढ़ें पूरी खबर)
Air Vice Marshal Shakti Sharma & S Jaishankar Ukraine Poland Visit

Hindi News Career Air Vice Marshal Shakti Sharma & S Jaishankar Ukraine Poland Visit 18 मिनट पहले कॉपी लिंक 1. विदेश मंत्री एस जयशंकर यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा पर जाएंगे 3 सितंबर को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर यूक्रेन और पोलैंड की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा के दौरान जयशंकर यूक्रेन की विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा से मुलाकात करेंगे। साथ ही जयशंकर पोलैंड में उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से भी मुलाकात करेंगे। एस जयशंकर की ये यात्रा भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और रीजनल मुद्दों पर बात करना है। इससे पहले 26 अगस्त को जयशंकर और सिबीहा के बीच बातचीत हुई थी। जहां ब्लैक सी और यूक्रेनी बंदरगाहों और खाद्य निर्यात पर हमलों का मुद्दा भी उठाया गया था। पोलैंड EU और NATO का सदस्य है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेश मंत्री का ये दौरा ऐसे समय पर है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है। 2. पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO 2 सितंबर को पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को जीतेंद्र मिश्रा के नाम का ऐलान किया। मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया और एयरफोर्स में 39 साल काम किया। जीतेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर में वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। उन्हें इस भूमिका के लिए सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल (SYSM) भी मिला। जीतेंद्र मिश्रा के अलावा राम मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को नए सचिव बनाए गए हैं। साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट में 3 नए सदस्य भी बनाए गए हैं। दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और RSS समर्थक शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी। ये बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामला सामने आने के 3 महीने के बाद हुआ। इस मामले में 8 आरोपी जेल में हैं। 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था। वह 58 दिनों तक पद रहे। 3. शक्ति शर्मा पहली नॉन-मेडिकल ऑफिसर बनीं 1 सितंबर को एयर वाइस मार्शल (AVM) शक्ति शर्मा ने असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (एजुकेशन) का पद संभाला। शक्ति नॉन-मेडिकल ब्रांच से एयर वाइस मार्शल यानी टू-स्टार रैंक हासिल करने वाली भारत की पहली महिला ऑफिसर बनीं। वे इंडियन डिफेंस फोर्सज की नॉन मेडिकल ब्रांच से टू स्टार रैंक पाने वाली पहली महिला ऑफिसर बन गई हैं। एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने एयर हेडक्वाटर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ का पद संभाला। शक्ति ने 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था और उनके पास 30 से ज्यादा सालों तक का अनुभव है। शक्ति के पास ट्रेनिंग इस्टैब्लिशमेंट, फील्ड स्टेशन, कमांड हेडक्वाटर्र और एयर हेडक्वाटर्स में काम किया है। AVM शक्ति भारतीय वायुसेना की एजुकेशन ब्रांच की ऑफिसर हैं। निधन (DEATH) 4. पहले स्पेस जर्नलिस्ट का निधन 1 सितंबर को पहले अंतरिक्ष जर्नलिस्ट तोयोहिरो अकियामा का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। अकियामा पेशे से पत्रकार थे और जापानी टेलीविजन चैनल TBS से जुड़े थे। 1990 में वे सोवियत संघ के ऑर्बिटल स्पेस स्टेशन ‘मीर’ (Mir) पर गए थे। अकियामा ने अंतरिक्ष यात्रा सोवियत संघ के सोयुज TM-11 मिशन के तहत की थी। अकियामा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले जापानी नागरिक और पहले प्रोफेशनल जर्नलिस्ट थे और अंतरिक्ष से रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते थे। अकियामा ने मीर स्टेशन से पृथ्वी पर लाइव रिपोर्टिंग की थी, जिससे अंतरिक्ष यात्रा को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली। अकियामा की स्पेस यात्रा सोवियत संघ के अंतरिक्ष कार्यक्रम और जापान के मीडिया इतिहास, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मीर स्पेस स्टेशन सोवियत संघ के द्वारा पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया दुनिया का पहला मॉड्यूलर अनुसंधान अंतरिक्ष स्टेशन था। अकियामा पेशे से पत्रकार थे और जापानी टेलीविजन चैनल TBS से जुड़े थे। मिसलीनियस 5. भारत-अफगानिस्तान जॉइंट वर्किंग बैठक हुई 2 सितंबर को भारत-अफगानिस्तान के बीच जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन ट्रेड से जुड़ी बैठक हुई। ये बैठक दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए हुई है। इस बैठक में व्यापार को आसान बनाने और कस्टम्स सपोर्ट, अफगानी व्यापारियों के लिए वीजा की सुविधा पर बात हुई। इस बैठक में बैंकिंग और फाइनेंशियल सपोर्ट, दवा और एग्रीकल्चर ट्रेड, एनर्जी सपोर्ट, टैरिफ में छूट, कार्गो कनेक्टिविटी और बंदरगाह से जुड़े मुद्दे शामिल किये। साथ ही कस्टम्स और डेटा-शेयरिंग में बेहतर सपोर्ट दवा और कृषि के क्षेत्र में रेगुलेटरी सहयोग, बेहतर व्यापार कनेक्टिविटी पर चर्चा की। दोनों देशों ने व्यापार, वाणिज्य और निवेश के रिश्तों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और चर्चा किए गए मुद्दों पर लगातार बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वाणिज्य, उद्योग, कस्टम्स, रेगुलेटरी अथॉरिटी और डिप्लोमैटिक मिशन के प्रतिनिधि शामिल थे। आज का इतिहास 1833 में अमेरिका में पहला न्यूज पेपर ‘न्यूयार्क सन’ बेंजामिन एच डे के शुरू किया। 1971 में कतर देश को 55 वर्षों के ब्रिटिश शासन के बाद स्वतंत्रता प्राप्त हुई। ————————- दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









