Sunday, 01 Nov 2026 | 05:52 PM

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ट्रम्प ने कनाडा को लेकर यूरोप को धमकी दी:कहा- EU में शामिल किया तो भारी टैरिफ लगाऊंगा, व्यापार भी रोक दूंगा

ट्रम्प ने कनाडा को लेकर यूरोप को धमकी दी:कहा- EU में शामिल किया तो भारी टैरिफ लगाऊंगा, व्यापार भी रोक दूंगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय संघ को गंभीर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा, अगर यूरोपीय संघ कनाडा को अपना पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने की योजना पर आगे बढ़ता है तो अमेरिका यूरोप पर बहुत भारी टैरिफ लगा सकता है। जरूरत पड़ने पर यूरोप के साथ व्यापार भी रोक सकता है। ट्रम्प की धमकी के कुछ ही समय बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कर दिया कि कनाडा अपनी विदेश नीति और दूसरे देशों के साथ समझौते खुद तय करेगा। यूरोपीय संसद में गुरुवार को भाषण देते हुए कार्नी ने कहा, “कोई भी यह तय नहीं करेगा कि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसके साथ समझौते कर सकते हैं।” खबर लगातार अपडेट हो रही है…

ईरान में अमेरिकी हमला युद्ध अपराध हो सकता है:UN रिपोर्ट में गर्ल्स स्कूल पर हमले का जिक्र; पुतिन के बाद अब ट्रम्प की जवाबदेही पर सवाल

ईरान में अमेरिकी हमला युद्ध अपराध हो सकता है:UN रिपोर्ट में गर्ल्स स्कूल पर हमले का जिक्र; पुतिन के बाद अब ट्रम्प की जवाबदेही पर सवाल

ईरान पर फरवरी में हुए अमेरिका हमलों को लेकर UN की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सामने आई। UN की स्वतंत्र जांच टीम ने कहा कि उसके पास यह मानने की पर्याप्त वजह है कि मिनाब के गर्ल्स स्कूल और एक स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले अमेरिकी सेना ने किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध हो सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर युद्ध अपराध के आरोप लगे थे। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 2023 में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। अब UN की रिपोर्ट के बाद ट्रम्प की किसी तरह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ईरान में अमेरिका के 2 हमलों की UN ने जांच की पहला- मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हमले में 120 बच्चों की मौत दूसरा- स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले में 22 नागरिक मारे गए खबर लगातार अपडेट हो रही है…

NTA Exam Calendar 2027 Released

NTA Exam Calendar 2027 Released

Hindi News Career NTA Exam Calendar 2027 Released | UGC NET JEE Mains Sainik School Dates 4 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने 2026-27 का एग्जाम कैलेंडर जारी किया है। कैलेंडर के मुताबिक दिसंबर 2026 से मार्च 2027 तक का कैलेंडर जारी किया है। कैलेंडर में UGC NET, JEE मेंस 2027 सेशन-1, NIFT, सैनिक स्कूल, CUETसमेत कई परीक्षाओं की प्रपोज डेट जारी की है। UGC NET 14-19 दिसंबर तक UGC-NET का दिसंबर 2026 वाला राउंड 14 से 19 दिसंबर के बीच कराने का प्रस्ताव है। साथ ही NTA ने परीक्षा के लिए 20 और 21 दिसंबर को बफर डेट्स के तौर पर रखा है। जॉइंट CSIR-UGC NET का दिसंबर वाला राउंड 20 और 21 दिसंबर को होगा। बता दें कि ये परीक्षा जूनियर रिसर्च फेलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए एलिजिबिलिटी तय करती है। NTA दिसंबर 2018 से UGC-NET परीक्षा आयोजित कर रहा है। JEE मेन्स सेशन-1 22 जनवरी से शुरू इसी तरह JEE मेन्स और JEE एडवांस्ड की तारीखें भी जारी की गई हैं। 4 जनवरी को आर्मी कैडेट्स कॉलेज परीक्षा के साथ होगी, जबकि JEE मेन्स सेशन 1 परीक्षा 22-24, 28 और 30 जनवरी में होगी। ये एग्जाम IIT में अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग प्रोग्राम में एडमिशन के लिए दिया जाता जाता है। साथ ही ये JEE अडवांस्ड के लिए एलिजिबिलिटी एग्जाम के तौर पर भी काम करता है। सैनिक स्कूल की परीक्षा 13 दिसंबर से शुरू NTA के जारी किये कैलेंडर में सैनिक स्कूलों की परीक्षाओं का शेड्यूल भी जारी किया गया है। राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल्स की परीक्षा 13 दिसंबर 2026 को होगी और ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेस एग्जाम 31 जनवरी को होगा। ।NIFT एंट्रेंस एग्जाम 10 जनवरी 2027 को कराने का प्रस्ताव है। SHRESHTA (NETS) परीक्षा भी 10 जनवरी को होनी तय है। हालांकि NTA ने अपने नोटिफिकेशन में ये साफ किया है कि कैलेंडर में परीक्षा की सभी तारीखें टेंटेटिव हैं। परीक्षा के डिटेल्ड इन्फॉर्मेशन बुलेटिन में इसमें कुछ बदलाव भी हो सकता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Trump-Jinping Meeting | Japan-South Korea Concern Over Taiwan Trade Deal

Trump-Jinping Meeting | Japan-South Korea Concern Over Taiwan Trade Deal

वॉशिंगटन डीसी13 मिनट पहले कॉपी लिंक साउथ कोरिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्विपक्षीय बैठक करते हुए। तस्वीर 30 अक्टूबर 2025 की है। ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली मुलाकात से पहले ताइवान में डर बढ़ गया है। ताइवान को आशंका है कि चीन के साथ कोई बड़ा आर्थिक समझौता करने के लिए ट्रम्प उसके मुद्दे पर नरम रुख अपना सकते हैं। जापान और साउथ कोरिया समेत अमेरिका के सहयोगी देशों को भी यही चिंता सता रही है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प ने मई में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को चीन से डील के लिए ‘सौदेबाजी का जरिया’ बताया था। अब जिनपिंग फिर ताइवान का मुद्दा ट्रम्प के सामने उठा सकते हैं। ऐसे में ताइवान को डर है कि ट्रम्प चीन से कोई बड़ी डील निकालने के चक्कर में कहीं उसके मुद्दे पर पीछे न हट जाएं। अमेरिका के किसी नरम बयान से भी बीजिंग को ताइवान पर दबाव बढ़ाने का हौसला मिल सकता है। पहले ताइवान का मामला समझिए ताइवान चीन के करीब स्थित एक द्वीप है। वहां अपनी सरकार है और लोग अपने नेताओं को चुनाव के जरिए चुनते हैं। ताइवान खुद को अलग तरीके से चलाता है, लेकिन चीन उसे अपना हिस्सा मानता है। चीन चाहता है कि ताइवान एक दिन उसके साथ मिल जाए। बीजिंग ने यह भी साफ कर रखा है कि जरूरत पड़ी तो वह इसके लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकता है। दूसरी तरफ, अमेरिका ताइवान को हथियार देता है ताकि वह अपनी सुरक्षा कर सके। लेकिन अमेरिका ने यह साफ नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो अमेरिकी सेना सीधे उसकी मदद के लिए युद्ध में उतरेगी या नहीं। यही वजह है कि ताइवान को लेकर अमेरिका का रुख हमेशा से थोड़ा अस्पष्ट रहा है। वॉशिंगटन चीन को खुलकर चुनौती भी नहीं देता और ताइवान को अकेला भी नहीं छोड़ता। जापान को किस बात की चिंता है? ताइवान को लेकर सिर्फ वहां की सरकार ही चिंतित नहीं है। जापान भी ट्रम्प-शी की बैठक को करीब से देख रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, जापान चाहता है कि अमेरिका ताइवान को लेकर अब तक इस्तेमाल की जाने वाली कूटनीतिक भाषा पर कायम रहे। टोक्यो यह भी चाहता है कि बैठक में ताइवान का मुद्दा इतना न छाए कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ जाए। जापान के दो सीनियर नेताओं ने रॉयटर्स को बताया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि ट्रम्प चीन से अमेरिकी सामान खरीदने का बड़ा समझौता हासिल करने के बदले ताइवान के मामले में कोई रियायत न दे दें। अमेरिका में अगले साल मिडटर्म चुनाव होने हैं। ऐसे में चीन के साथ बड़ा कारोबारी समझौता ट्रम्प के लिए घरेलू राजनीति में भी अहम हो सकता है। बैठक से पहले ताइवान ने अपनी चिंता बताई बैठक से पहले ताइवान सरकार लगातार अमेरिका के सामने अपना पक्ष रख रही है। ताइवान के सीनियर अधिकारी शेन यू-चुंग ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि ऐसा कोई फैसला नहीं होगा जिससे ताइवान को नुकसान पहुंचे। ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी बैठक में ताइवान का मुद्दा उठाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कई बार साफ कर चुका है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका की ‘वन चाइना पॉलिसी’ क्या है? ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति को समझने के लिए ‘वन चाइना पॉलिसी’ को समझना जरूरी है। अमेरिका ताइवान को एक अलग देश के तौर पर आधिकारिक मान्यता नहीं देता। लेकिन वह चीन के इस दावे को भी अपनी तरफ से मंजूर नहीं करता कि ताइवान पर उसका पूरा अधिकार है। इसी नीति के तहत अमेरिका चीन के साथ अपने राजनयिक रिश्ते भी बनाए रखता है और ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार भी देता है। यानी अमेरिका दोनों पक्षों के बीच एक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। ट्रम्प के बयान पर इतनी नजर क्यों? अमेरिका ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो क्या अमेरिकी सेना ताइवान की मदद करने जाएगी। इसलिए ट्रम्प ताइवान को लेकर क्या कहते हैं, इस पर सबकी नजर रहती है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल में कई बार कहा था कि चीन ने हमला किया तो अमेरिका ताइवान की मदद करेगा। लेकिन ट्रम्प ने इस बारे में अब तक ऐसी साफ बात नहीं कही है। जापान के दो सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रम्प का अचानक दिया गया कोई बयान भी ताइवान को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। चीन लगातार अमेरिका से कहता रहा है कि वह ताइवान को अलग देश बनाने की बात का समर्थन न करे। ताइवान का मुद्दा दुनिया की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा ताइवान का मामला सिर्फ चीन और अमेरिका के बीच सत्ता की खींचतान तक सीमित नहीं है। इसका असर दुनिया के कारोबार पर भी पड़ सकता है। ताइवान दुनिया की सबसे आधुनिक कंप्यूटर चिप्स का 90% से ज्यादा बनाता है। इन चिप्स का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर से लेकर मिसाइल और दूसरे आधुनिक उपकरणों में होता है। अगर यहां बड़ा सैन्य संघर्ष होता है तो चिप्स की सप्लाई रुक सकती है। इससे दुनिया के कई देशों में कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे सामानों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। मलेशिया के राष्ट्रीय सुरक्षा महानिदेशक राजा नुशिरवान जैनल आबिदीन ने रॉयटर्स से कहा कि ताइवान में संघर्ष हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ——————– यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रिपोर्ट- ट्रम्प-जिनपिंग की मुलाकात से पहले ताइवान में डर:जापान-साउथ कोरिया को चिंता, चीन से डील के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति नरम न पड़ जाएं

रिपोर्ट- ट्रम्प-जिनपिंग की मुलाकात से पहले ताइवान में डर:जापान-साउथ कोरिया को चिंता, चीन से डील के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति नरम न पड़ जाएं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुलाकात से पहले ताइवान को लेकर चिंता बढ़ गई है। जापान और साउथ कोरिया समेत अमेरिका के करीबी देशों को डर है कि चीन के साथ व्यापार में कोई बड़ा फायदा लेने के लिए ट्रम्प ताइवान पर अपना रुख नरम कर सकते हैं। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि ताइवान को हथियार देने का फैसला चीन से बातचीत में उनके काम आ सकता है। ऐसे में अगर ट्रम्प के बयान या ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति में जरा भी बदलाव आया, तो चीन को ताइवान पर दबाव बढ़ाने का हौसला मिल सकता है। इससे इलाके में तनाव और बढ़ सकता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

Houthi Missile Attack Video; Saudi Arabia F-15 Jet Shot Claim

Houthi Missile Attack Video; Saudi Arabia F-15 Jet Shot Claim

पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। . यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। आखिर कौन हैं ये हूती लड़ाके और चाहते क्या हैं, सऊदी जैसा अमीर और ताकतवर देश इन विद्रोहियों के आगे बेबस क्यों नजर आ रहा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: चप्पल और लुंगी पहने ये हूती लड़ाके आखिर हैं कौन? जवाबः यमन की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती… 1990 में हुसैन अल-हूती ने सुन्नियों के खिलाफ इस समूह की नींव रखी। यमन में अब्दुल्ला सालेह की सत्ता के दौरान ये संगठन मजबूत होने लगा। 2010 के आखिर में लीबिया, इजिप्ट, यमन, सीरिया और बहरीन जैसे देशों में ‘अरब क्रांति’ शुरू हुई। कई देशों में तख्तापलट हुआ। यमन में भी सरकार के विरोध में गृहयुद्ध शुरू हुआ। फाउंडर हुसैन अल-हूती के नाम पर ही ‘अंसार अल्लाह’ नाम के संगठन को हूती कहा जाता है। 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी, अब्दुल्ला का तख्तापलट कर खुद राष्ट्रपति बन गए। 33 साल से सत्ता पर काबिज अब्दुल्ला को यमन छोड़कर विदेश भागना पड़ा। इस दौरान यमन की सेना में दो-फाड़ हो गई। राजनीतिक अस्थिरता का फायदा हूतियों ने उठाया और यमन के दक्षिणी इलाकों पर काबिज होने लगे। अब इस गृहयुद्ध में एंट्री होती है सऊदी अरब और ईरान की। दरअसल, सऊदी सुन्नियों का नेता बनता है और ईरान शियाओं का। हूतियों को ईरान का समर्थन मिला, तो यमन सरकार को सऊदी अरब का। 2015 तक हूती विद्रोहियों ने यमन के एक बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। 2015 में हालात ऐसे हुए कि हूतियों ने पूरी सरकार को निर्वासन में जाने पर मजबूर कर दिया। 2015 में हूती विद्रोही गुट में करीब 30 हजार लड़ाके थे। अब इनकी संख्या करीब 3.5 लाख है। सवाल-2: सऊदी पर हमला क्यों कर रहे हूती, कितना नुकसान किया? जवाबः हालिया लड़ाई की शुरुआत बीती 5 अगस्त से हुई… हूतियों ने सऊदी के समर्थन वाली यमन सरकार के कैंपों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। आरोप लगाया कि यहां सऊदी गठबंधन सेना अपना जमावड़ा बढ़ा रही थी। 3 सितंबर को हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर तीन तरफ से हमले शुरू किए। फिर मोखा शहर की घेराबंदी की। इस वीडियो के आधार पर दावा है कि हूतियों ने सऊदी अरब और PLC की सेना की दर्जनों बख्तरबंद गाड़ियां कब्जा कर ली हैं। हूतियों की बढ़त देखकर सऊदी अरब ने जवाबी हमला शुरू कर दिया। मिसाइल और ड्रोन हमलों में 73 लोग घायल हुए। 10 सितंबर को हूतियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से सिर्फ 80 किमी दूर मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया। इसके बाद हूती लड़ाके बाब अल-मंदेब की तरफ बढ़े और समुद्र से लगे धुबाब पोर्ट और लाल सागर के आसपास के हानिश जैसे द्वीप समूहों पर भी कब्जा कर लिया। 11 सितंबर को बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास पेरिम यानी मयून द्वीप पर कब्जा कर लिया गया। यहां कब्जे से हूतियों को इस समुद्री रास्ते के बेहद करीब रणनीतिक ठिकाना मिल गया है। हूतियों का दावा है कि उन्होंने पूरे पश्चिमी तट और बाब अल-मंदेब के इलाके पर कब्जा कर लिया है। सऊदी अरब ने कहा कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने पवित्र शहर मक्का को टारगेट करके ड्रोन अटैक किया था। इसे मक्का में घुसने से पहले ही मार गिराया गया। हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया। 16 सितंबर को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने कहा, ‘अल्लाह की मदद से यमन की सशस्त्र सेना ने मारिब प्रांत में सऊदी अरब को अमेरिका से मिले F-15 फाइटर जेट को स्वदेशी तौर पर बनाई मिसाइल से मार गिराया है।’ हूतियों ने इसका एक वीडियो भी जारी किया है… जेट पर मिसाइल का हमला और जेट का जलता हुआ मलबा। हथियारबंद लड़ाके मलबे के पास जश्न मना रहे हैं। जेट के एक हिस्से पर सऊदी अरब का झंडा दिख रहा है। सऊदी अरब या अमेरिका ने जेट गिराने के दावे पर अब तक कोई बयान नहीं दिया है। सवाल-3: अमीर और ताकतवर सऊदी अरब बेबस क्यों नजर आ रहा है? जवाबः इसकी 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सऊदी समर्थित फौजों में तालमेल नहीं, हूतियों की मजबूत तैयारी सऊदी समर्थित यमनी फौजें कई अलग-अलग सशस्त्र गुटों में बंटी हैं। इनके अलग-अलग कमांडर हैं और उनके अपने-अपने इरादे और महत्वाकांक्षाएं हैं। 2026 की शुरुआत से सऊदी अरब इन सभी गुटों को एक कमांड के तहत लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बरसों पुराना ये बिखराव दूर नहीं हो पाया है। दूसरी तरफ, हूतियों की फौज कई मायनों में बेहतर है। ईरान ने अपनी कुद्ज फोर्स के जरिए हूतियों को ट्रेनिंग, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, समुद्री हथियार और टेक्नोलॉजी सहित भारी मात्रा में हथियार दिए हैं। अब हूती खुद भी ज्यादा रेंज वाले रॉकेट, बम और मिसाइल्स बनाने लगे हैं। 2. सऊदी में इंटरसेप्टर मिसाइल और एयर डिफेंस की कमी सऊदी अरब ने अब तक हूतियों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले नहीं किए हैं, क्योंकि उसके पास इंटरसेप्टर मिसाइल की कमी हो गई है। सऊदी को मिसाइल्स की सप्लाई करने वाले अमेरिका के पास भी 6 महीने से जारी ईरान जंग के चलते इंटरसेप्टर्स का स्टॉक घट गया है। 3. ईरान जंग में फंसा अमेरिका एक और जंग नहीं चाहता रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को फोन करके हूतियों पर हवाई हमले करने को कहा। इसे ट्रम्प ने ठुकरा दिया और सिर्फ इंटेलिजेंस सपोर्ट देने की बात कही। चैथम हाउस के एक्सपर्ट फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं कि भले ही सऊदी अरब मिडिल-ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी हो, लेकिन अमेरिका और हूती दोनों के पास एक-दूसरे के खिलाफ जंग न शुरू करने की मजबूत वजहें हैं। अमेरिकी सेना होर्मुज में फंसी हुई है। वहां अभी तक ईरान का कंट्रोल बना हुआ है। जंग में अब

Teacher Jivan Mithari Dedication | Kolhapur School Forest Education

Teacher Jivan Mithari Dedication | Kolhapur School Forest Education

Hindi News Career Teacher Jivan Mithari Dedication | Kolhapur School Forest Education 15 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के समय में एक 55 साल का टीचर अगर रोज घने जंगलों, बारिश, खूंखार जंगली जानवरों और कच्चे रास्तों से बीच सिर्फ एक छात्रा को पढ़ाने स्कूल जाता है तो यह बात किसी आश्चर्य से कम नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र के 55 वर्षीय जीवन मिथारी ऐसे ही टीचर है जो रोज पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करके दूर-दराज के गांव में स्थित स्कूल पहुंचते हैं। जीवन मिथारी कोल्हापुर जिले में गगनबावड़ा तालुका स्थित ‘कवलटेक धनगरवाड़ा’ के जिला परिषद स्कूल में पिछले 13 साल से टीचर हैं। सिंधुदुर्ग सीमा से सटे इस बेहद दुर्गम गांव में न तो बिजली है और न ही गाड़ियों के जाने का कोई रास्ता। 13 साल से बीहड़ स्कूल में ले रहे क्लास मिथारी के अनुसार, मैं 26 जुलाई 2013 को पहली बार इस स्कूल में आया थाा। तब से लगातार यहीं पढ़ा रहा हूं। हालांकि पहले छात्रों की संख्या ज्यादा थी। कवलटेक धनगरवाड़ा और आसपास के इलाकों में करीब 70–100 परिवार रहते थे। रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग यह गांव छोड़कर शहर चले गए। इस तरह स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार कम होती गई। अब स्कूल में आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक छात्रा पढ़ती है जिसका नाम स्वरा है। स्वरा की छोटी बहन भी उसके साथ स्कूल आती है, क्योंकि गांव में आंगनवाड़ी केंद्र नहीं है। वह अगले साल कक्षा 1 में जाएगी। तब रोज स्कूल में पढ़ने भी आया करेगी। वन अधिकारियों से मिथारी को किया सचेत मिथारी का कहना है कि इस पांच किमी स्कूल तक पैदल आने जाने के दौरान उन्हें वन्यजीवों के इलाके से होकर गुजरना पड़ता है। एक बार बस्ती के पास एक तेंदुए ने एक बछड़े को मार दिया था। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने वहां ट्रैप कैमरा लगाया, जिसमें तेंदुए की सैकड़ों तस्वीरें कैद हुईं। वन अधिकारियों ने मिथारी को भी सलाह दी थी कि स्कूल जाते और लौटते समय रास्ते में कहीं भी रुकें या बैठें नहीं। ताने को चुनौती माना और तबादला कराया जीवन मिथारी पहले कोल्हापुर जिला प्राथमिक शिक्षक सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे। उनके साथियों ने एक बार तंज किया कि रसूखदार शिक्षक हमेशा सुविधायुक्त इलाकों में नियुक्ति ले लेते हैं, जबकि अन्य टीचर्स को दुर्गम क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। इस ताने को चुनौती की तरह लेते हुए मिथारी ने खुद अपना तबादला इस गांव में करवाया और तब से यही टीचर हैं। सबसे पास स्कूल 11 KM दूर है इस छोटे से गांव में बच्चों के लिए दूसरे स्कूल में जाना आसान नहीं है। धुंडावाडे में सबसे नजदीकी स्कूल करीब 5.5 किलोमीटर दूर है। अगर बच्चे रोज उस स्कूल में जाएंगे तो उन्हें करीब 11 किलोमीटर की यात्रा करनी होगी। मानसून के दौरान यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है। यहां के लोग मुख्य रूप से छोटी खेती, जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने और जामुन व करवंद जैसे जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर हैं। किसान अपनी फसलों को गौरों से बचाने के लिए दोहरी बाड़ लगाते हैं। ऐसी दूरदराज की बस्ती में यह स्कूल बच्चों की पढ़ाई के लिए बहुत अहम है। जीवन मिथारी मई 2029 में रिटायर होने वाले हैं। रिटायरमेंट से पहले वे चाहते हैं कि स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए परिसर के चारों ओर चारदीवारी बनें। ———————————————————————— ये खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सलमान का मजाक उड़ाते दिखे सोनू निगम, अब दी सफाई:वायरल क्लिप को कहा फर्जी, बोले- मैं पाकिस्तानी बच्ची की सिंगिंग देखकर रो पड़ा था

सलमान का मजाक उड़ाते दिखे सोनू निगम, अब दी सफाई:वायरल क्लिप को कहा फर्जी, बोले- मैं पाकिस्तानी बच्ची की सिंगिंग देखकर रो पड़ा था

बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम का एक एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे टीवी पर ‘मैं हूं हीरो तेरा’ गाना गा रहे सलमान खान की गायकी का मजाक उड़ाते दिख रहे हैं। इस क्लिप में सोनू सिर पकड़ते और कहते नजर आ रहे हैं कि ऐसी सिंगिंग सुनकर वे रो पड़ेंगे। वीडियो पर विवाद बढ़ता देख सोनू निगम ने खुद इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करके इस वायरल वीडियो का सच सामने रखा है। उन्होंने साफ किया कि इंटरनेट पर कुछ भी दिखाया जा सकता है और यह वीडियो एडिट करके बनाया गया है। असल में वे किसी का मजाक नहीं उड़ा रहे थे, बल्कि एक पाकिस्तानी बच्ची की गायकी से प्रभावित होकर रो पड़े थे। पाकिस्तानी बच्ची हादिया हाशमी के लिए था ओरिजिनल वीडियो सोनू निगम ने स्पष्ट किया कि जिस वीडियो को सलमान खान से जोड़कर शेयर किया जा रहा है, वह साल 2020 का है। उस समय एक्टर जावेद जाफरी ने सोनू को नेसकैफे बेसमेंट के गाने ‘बोल हू’ का एक वीडियो भेजा था, जिसमें छोटी बच्ची हादिया हाशमी ने आलाप गाया था। हादिया की गायकी सुनकर सोनू इतने भावुक हो गए थे कि उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उसी दौरान उन्होंने बच्ची की तारीफ में एक वीडियो बनाकर शेयर किया था। अब कुछ लोगों ने उस पुराने वीडियो को सलमान खान के टीवी पर दिए परफॉर्मेंस के साथ एडिट करके वायरल कर दिया। सिंगर अनीश मैथ्यूज ने भी बताई ओरिजिनल क्लिप की सच्चाई सोनू निगम के स्पष्टीकरण वाले पोस्ट पर सिंगर अनीश मैथ्यूज ने भी कमेंट करके एडिटेड वीडियो की सच्चाई की पुष्टि की। अनीश ने लिखा कि उन्हें अच्छी तरह याद है कि सोनू जी का यह रिएक्शन ‘नेस्कैफे बेसमेंट’ के गाने ‘बोल हू’ में छोटी बच्ची हादिया हाशमी के आलाप पर था। अन्य यूजर्स ने भी लिखा कि इंटरनेट पर व्यूज और ट्रोलिंग के लिए किसी भी वीडियो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘मैं हूं हीरो तेरा’ गाने के क्रेडिट को लेकर शुरू हुआ था विवाद यह पूरा मामला सलमान खान फिल्म्स (SKF) के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। मेकर्स ने फिल्म ‘हीरो’ के 10 साल पूरे होने पर सलमान के गाए गाने ‘मैं हूं हीरो तेरा’ को लेकर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें म्यूजिक कंपोजर अमाल मलिक का नाम नहीं लिखा था। अमाल ने सोशल मीडिया पर क्रेडिट न मिलने पर अपनी नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में मेकर्स ने पोस्ट को एडिट करके अमाल का नाम शामिल कर लिया था। लेकिन इसके बाद सलमान के फैंस ने अमाल और उनके भाई अरमान मलिक को ट्रोल करना शुरू कर दिया था। ये खबर भी पढ़ें सलमान से विवाद के दावों पर अमाल मलिक की सफाई:कहा- निशाना सलमान नहीं, उनकी प्रोडक्शन टीम पर है; सॉन्ग क्रेडिट न देने का आरोप लगाया था अमाल मलिक ने क्रेडिट विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस पर निशाना साधा था, जिसके बाद लोग ये कहते हुए उनकी आलोचना करने लगे कि वह फिल्मों में ब्रेक देने वाले सलमान के खिलाफ बयान दे रहे हैं। अब अमाल ने कहा है कि उनका निशाना, सलमान नहीं बल्कि उनके प्रोडक्शन की टीम है। अमाल ने कहा कि मेहनत को कमतर दिखाने का हक किसी को नहीं है। पूरी खबर पढ़ें सलमान के खिलाफ भाई अमाल के सपोर्ट में उतरे अरमान:कहा- हक के लिए लड़ना जरूरी, फिल्म हीरो के गाने में क्रेडिट न दिए जाने पर विवाद कुछ दिनों पहले सिंगिंग से ब्रेक लेने वाले अरमान मलिक ने हाल ही में सलमान खान और उनके प्रोडक्शन के खिलाफ कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें प्रोडक्शन की हालिया पोस्ट में फिल्म हीरो के गाने में क्रेडिट नहीं दिया गया। पूरी खबर पढ़ें

UP Teacher Recruitment 2026 | Apply for Assistant Teacher & PGT Vacancy

UP Teacher Recruitment 2026 | Apply for Assistant Teacher & PGT Vacancy

Hindi News Career UP Teacher Recruitment 2026 | Apply For Assistant Teacher & PGT Vacancy 13 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग में असिस्टेंट टीचर और PGT के 15,012 पदों पर भर्ती निकाली है। असिस्टेंट टीचर के लिए आवेदन में करेक्शन की आखिरी तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है। इन पदों के लिए परीक्षा 3 और 4 दिसंबर 2026 को होगी। वहीं PGT के लिए परीक्षा का आयोजन 15 और 16 दिसंबर को किया जाएगा। PGT के 2,607 पदों पर भर्ती PGT के 2,607 पदों के लिए विज्ञापन संख्या 06/2026 जारी किया गया है। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर 2026 से शुरू होगी। PGT भर्ती के लिए फीस जमा करने की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर 2026 है। जबकि आवेदन में करेक्शन 21 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। PGT पदों के लिए परीक्षा 15 और 16 दिसंबर 2026 को होगी। उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए आवेदन करने से पहले OTR प्रोसेस पूरी करना होगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम 50% अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री। D.El.Ed यानी BTC, B.Ed या इसके बराबर का टीचर ट्रेनिंग कोर्स पूरा किया हो। उम्मीदवारों के लिए TET पास होना भी जरूरी है। यानी उम्मीदवारों ने CTET या UPTET में से किसी एक परीक्षा को पास किया हो। बिना TET पास किए उम्मीदवार इस भर्ती के लिए एलिजिबल नहीं माने जाएंगे। सैलरी : 35,400 – 1,51,100 रुपए प्रतिमाह एज लिमिट : 21 – 40 साल फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 1000 रुपए एससी, एसटी : 1000 रुपए दिव्यांग : 300 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : लिखित परीक्षा और एकेडमिक योग्यता के आधार पर तैयार होने वाली मेरिट के जरिए किया जाएगा। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं। UP Super TET 2026 Online Application के लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें। लॉगिन करके अपनी एकेडमिक डिटेल दर्ज करें। फोटो व सिग्नेचर की स्कैन कॉपी अपलोड करें। फीस जमा करने के बाद फॉर्म को चेक करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। असिस्टेंट टीचर संबंद्ध प्राइमरी भर्ती नोटिफिकेशन लिंक पीजीटी भर्ती नोटिफिकेशन लिंक स्पेशल टीईटी भर्ती नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक ————————————————————————- ये खबर भी पढ़ें यूपी में ऑफिसर के 1251 पदों पर निकली भर्ती:फीस 25 रुपए, सैलरी 90 हजार से ज्यादा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC), लखनऊ ने पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती निकाली है। यह भर्ती पशुपालन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के तहत की जाएगी। इसमें 1,248 पद सामान्य भर्ती और 3 पद विशेष चयन के लिए हैं। पूरी खबर यहां पढ़े दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Swara Bhaskar Statement | Aamir Shah Rukh Salman Khan Ayodhya Verdict

Swara Bhaskar Statement | Aamir Shah Rukh Salman Khan Ayodhya Verdict

1 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेत्री स्वरा भास्कर ‘निल बटे सन्नाटा’, ‘रांझणा’ और ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है। एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने हाल ही में कहा कि साल 2019 के अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वो बहुत दुखी थीं। स्वरा ने बताया कि फैसले के बाद उन्होंने अपने मोबाइल पर मौजूद मुस्लिम कॉन्टेक्ट्स को मैसेज कर माफी मांगी थी। दरअसल, द मिडनाइट आवर को दिए इंटरव्यू में स्वरा भास्कर और फहाद अहमद ने अपनी लव स्टोरी पर बात की। दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत एक प्रोटेस्ट से हुई थी, जहां दोनों पहली बार मिले थे। इसके बाद दोनों लगातार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर साथ काम करने लगे। स्वरा ने बताया कि फहाद का काम करने का तरीका उन्हें काफी पसंद आया। स्वरा और फहाद की पहली मुलाकात साल 2019-2020 में सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुई थी। इंटरव्यू में स्वरा भास्कर ने कहा, “और फिर राम जन्मभूमि का मुद्दा आया। यह 2019 की बात है, जब इस मामले में फैसला आया था। मुझे लगता है कि वह भी एक बहुत बड़ा मुद्दा था। उस फैसले से मैं बहुत दुखी थी। मैं सोच रही थी कि यह कैसा देश है और ऐसा फैसला कैसे आ सकता है?” उन्होंने आगे कहा, “मैं उस फैसले से बहुत परेशान थी, क्योंकि मुझे लगा कि यह बहुत गलत और अन्यायपूर्ण था। इसलिए मैंने फेसबुक पर अपने सभी मुस्लिम दोस्तों को मैसेज किया। आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान से लेकर फहाद अहमद तक, मैंने सभी को मैसेज किया।” उन्होंने यह भी कहा, “मैं बहुत दुखी थी और बस सभी मुस्लिम लोगों तक अपनी बात पहुंचाना चाहती थी। मैं एक हिंदू हूं, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहती थी कि मुझे इस बात का सच में अफसोस है। मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है और मैं इस फैसले से सहमत नहीं हूं। यह मेरी अपनी सोच है। हालांकि, कुछ लोगों ने जवाब में कहा कि सब ठीक है और मुझे इस तरह का मैसेज करने की जरूरत नहीं है।” इसके बाद स्वरा और फहाद के बीच बातचीत और बढ़ गई। जब भी देश में कोई बड़ा मुद्दा होता, दोनों मिलकर उस पर चर्चा करते थे। स्वरा भास्कर और फहाद अहमद ने 16 फरवरी 2023 को कोर्ट मैरिज की थी। 2019 में आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला अयोध्या भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में फैसला सुनाते हुए विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए देने का आदेश दिया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया गया था। स्वरा भास्कर के खिलाफ अवमानना केस की मांग हुई थी वहीं साल 2020 में भी एक्ट्रेस स्वरा भास्कर अयोध्या जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी टिप्पणी को लेकर विवादों में आई थीं। दरअसल, 1 फरवरी 2020 को मुंबई कलेक्टिव के एक कार्यक्रम में स्वरा ने अयोध्या फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद का विध्वंस गैरकानूनी माना, लेकिन उसी फैसले में मस्जिद गिराने वालों को जमीन दे दी। उन्होंने यह भी कहा था कि देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां अदालतों के संविधान में विश्वास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्वरा के इस बयान के खिलाफ अधिवक्ता अनुज सक्सेना ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से मंजूरी मांगी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्वरा की टिप्पणी से सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। के.के. वेणुगोपाल का पूरा नाम कोट्टायन कटंकॉट वेणुगोपाल है। वे 1 जुलाई 2017 से 30 सितंबर 2022 तक भारत के अटॉर्नी जनरल रहे हैं। हालांकि, अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने इस मामले में मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वरा का पहला बयान उनकी अपनी धारणा थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट की संस्था को बदनाम करने या उसकी गरिमा कम करने वाली बात नहीं थी। उन्होंने स्वरा के दूसरे बयान को भी सामान्य और अस्पष्ट बताया। उनके मुताबिक, यह बयान किसी खास अदालत के खिलाफ नहीं था। इसलिए इसे आपराधिक अवमानना का मामला नहीं माना जा सकता। अटॉर्नी जनरल से अनुमति नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी संपर्क किया था। उन्होंने भी इस मामले में सहमति देने से इनकार कर दिया था। तुषार मेहता को 10 अक्टूबर 2018 को पहली बार भारत का सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। इसके बाद से वे लगातार इस पद पर बने हुए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔