Monday, 02 Nov 2026 | 11:21 AM

Trending :

ईरान- सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे:जंग के बाद सबसे बड़ी रैली; 6 लाख ने हथियार ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया

ईरान- सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे:जंग के बाद सबसे बड़ी रैली; 6 लाख ने हथियार ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया

ईरान में शुक्रवार को सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। राजधानी तेहरान में हुई यह रैली युद्ध शुरू होने के बाद सरकार की सबसे बड़ी रैलियों में से एक थी। लोगों ने देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने और सैन्य ट्रेनिंग लेने की तैयारी जताई। सरकार ने इस अभियान का नाम ‘जांफदाए ईरान’ रखा है। इसका मतलब है- ईरान के लिए जान तक देने को तैयार लोग। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, 6 लाख से ज्यादा लोग अब तक सैन्य ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख ने दावा किया कि ट्रेनिंग लेने वालों की संख्या 10 लाख से ज्यादा हो सकती है। ईरान में प्रदर्शन से जुड़ीं 4 फोटोज तेहरान में 3 लाख से ज्यादा लोग जुटे सरकारी प्रसारक के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तेहरान की सड़कों पर 3 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे। कई लोग सैन्य वर्दी में थे और हाथों में ईरान के झंडे लिए हुए थे। सरकार की योजना इन लोगों को असॉल्ट राइफल चलाने समेत सीमित सैन्य ट्रेनिंग देने की है। इसके बाद इन्हें देश की सुरक्षा में मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इन लोगों को देश की सुरक्षा में मदद करने के लिए तैयार किया जा रहा है। ये रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसीज मिलिशिया ईरान की एक सरकार समर्थक अर्धसैनिक संगठन है। इसका इस्तेमाल सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने में इस्तेमाल होता रहा है। रैली में अमेरिका-इजराइल की मौत के नारे लगे रैली में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, सैन्य कमांडर और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कुछ लोगों ने अमेरिका और इजराइल के झंडों को पैरों से रौंदा। यहां ‘अमेरिका की मौत’ और ‘इजराइल की मौत’ जैसे नारे भी लगाए गए। रैली में शामिल 24 साल की मरजिएह अफागी अपने छोटे बच्चे और पति के साथ पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बताना चाहती हैं कि ईरान के लोगों को अपने देश को लेकर उनकी धमकियों से डर नहीं लगता। उन्होंने कहा कि इतिहास में कोई भी देश ईरान पर हमला करके यहां लंबे समय तक कब्जा नहीं कर सका। रैली में हथियार और ड्रोन भी दिखाए ईरान ने रैली के दौरान सिर्फ भीड़ ही नहीं दिखाई, बल्कि अपनी सैन्य ताकत का भी प्रदर्शन किया। वहां एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, मशीनगन और ड्रोन दिखाए गए। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ऐसे ड्रोन भी प्रदर्शित किए, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के खिलाफ किए जाने का दावा किया गया है। होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी का बेहद अहम समुद्री रास्ता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही काफी घट गई है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन तबाह हुई, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे सऊदी की तेल रिफाइनरी अरामको ने अगले महीने सभी यूरोपीय देशों को कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को इसकी जानकारी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन बंद, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे

सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन बंद, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे

सऊदी अरब ने अपनी एक अहम तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद अगले महीने यूरोपीय ग्राहकों को कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सऊदी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को इसकी जानकारी दी है। यह फैसला सभी यूरोपीय खरीदारों पर लागू होगा। पिछले हफ्ते हुए हमले में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं। सऊदी अरब ने इसके लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। पहले समझें- कौन सी पाइपलाइन है? सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है। यह सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में मौजूद तेल को लाल सागर तक पहुंचाती है, जहां से इसे दूसरे देशों तक भेजा जा सकता है। हमले के बाद पाइपलाइन को बंद कर दिया गया। 17 सितंबर को सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, इसके रास्ते में मौजूद तीन पंपिंग स्टेशन को नुकसान पहुंचा है। यूरोप को अगले महीने नहीं मिलेगा सऊदी तेल अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को बताया है कि अगले महीने उन्हें सऊदी अरब से कच्चे तेल की सप्लाई नहीं मिलेगी। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह फैसला सिर्फ इन कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी यूरोपीय खरीदारों पर लागू होगा। पाइपलाइन बंद होने के बाद यूरोप की कुछ कंपनियों ने सऊदी तेल की जगह दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। पोलैंड की तेल कंपनी ऑर्लेन ने 10 से ज्यादा टेंडर जारी किए हैं, ताकि वैकल्पिक सप्लाई हासिल की जा सके। यूरोप सऊदी से कितना तेल लेता है? अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, OECD में शामिल यूरोपीय देशों ने जून में सऊदी अरब से रोजाना करीब 5.77 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। इसलिए अगले महीने सऊदी सप्लाई रुकने से यूरोपीय रिफाइनरियों को दूसरे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ेगा। होर्मुज की रुकावट के बीच पाइपलाइन और अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ऐसे समय बंद हुई है जब पिछले छह महीने से होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल को लाल सागर तक भेजकर होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता कम कर सकता था। इसके जरिए रोजाना करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा रहा था। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 4 से 5% है। इसी वजह से यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद अहम रास्ता बनी हुई थी। अब पाइपलाइन बंद होने से अरामको के ग्राहकों में वैकल्पिक तेल की तलाश तेज हो गई है। यूरोपीय खरीदारों को भी सऊदी सप्लाई की जगह दूसरे देशों से कच्चा तेल जुटाना पड़ेगा।

Russia Parliamentary Election | Putin Dominance & Ukraine Occupied Areas

पुतिन की जीत तय, फिर भी रूस में चुनाव:यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में भी वोटिंग; युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी बाहर

मॉस्को19 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस में शुक्रवार यानी 18 सितंबर से तीन दिन का संसदीय चुनाव शुरू हो गया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का संसद में दबदबा बरकरार रहने की उम्मीद है। वहीं, यूक्रेन युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है। यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के इलाकों में भी वोटिंग हो रही है। यूक्रेन और यूरोपीय संघ ने वहां हो रहे मतदान को अवैध बताया है। राष्ट्रपति पुतिन ने भी शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डालकर चुनाव में हिस्सा लिया। पुतिन की पार्टी का दबदबा फिर चुनाव जरूरी क्यों क्रेमलिन के लिए यह चुनाव सिर्फ संसद के सदस्य चुनने तक सीमित नहीं है। पुतिन चाहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग वोट डालें, ताकि यह संदेश जाए कि यूक्रेन युद्ध के बीच भी जनता सरकार और रूसी सैनिकों के साथ खड़ी है। पुतिन ने शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डाला। चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि लोगों का फैसला दिखाएगा कि लाखों लोग रूस के सैनिकों के साथ खड़े हैं और देश एकजुट है। 450 सीटों के लिए हो रही वोटिंग रूस के स्टेट ड्यूमा में 225 सीटों पर लोग राजनीतिक पार्टियों को वोट देंगे। बाकी 225 सीटों पर अलग-अलग इलाकों से खड़े उम्मीदवारों में से किसी एक को चुनेंगे। यूनाइटेड रशिया के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी, एलडीपीआर, ए जस्ट रशिया और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि, इन्हें रूस में सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष नहीं माना जाता। बड़े मुद्दों पर ये पार्टियां अक्सर सरकार का साथ देती हैं। संसदीय चुनाव से पहले मॉस्को में सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी का डिजिटल चुनावी विज्ञापन। युद्ध विरोधी याब्लोको पार्टी चुनाव से बाहर याब्लोको रूस की एकमात्र रजिस्टर्ड पार्टी थी, जो खुले तौर पर यूक्रेन युद्ध का विरोध करती रही है। पार्टी जंग खत्म करने और बातचीत के जरिए शांति की बात करती है। रूस की सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में याब्लोको की उम्मीदवारों की सूची का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। कोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने चुनाव प्रचार में ऐसे लोगों से मिले पैसे का इस्तेमाल किया, जिन्हें विदेश से पैसा मिला था। इसके अलावा पार्टी ने कुछ तस्वीरों और दूसरी प्रचार सामग्री का बिना अनुमति इस्तेमाल किया। इंटरनेट पर प्रचार को लेकर भी पार्टी ने नियम तोड़े। हालांकि, याब्लोको का कहना है कि उसे असल में यूक्रेन युद्ध के खिलाफ उसके रुख की वजह से चुनाव से हटाया गया। पार्टी के कुछ उम्मीदवार अब भी अलग-अलग सीटों पर व्यक्तिगत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, कुछ दूसरे युद्ध विरोधी नेताओं को जेल भेजा गया है या उन्हें रूस छोड़ना पड़ा है। विपक्षी पार्टी याब्लोको के नेता निकोलाय रिबाकोव इस महीने मॉस्को में एक कार्यक्रम के दौरान। कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी वोटिंग इस चुनाव में रूस पहली बार यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया के उन इलाकों में भी मतदान करा रहा है, जिन पर उसका कब्जा है। रूस ने 2022 में इन चारों इलाकों को अपने देश में शामिल करने का दावा किया था। हालांकि, यूक्रेन और ज्यादातर दूसरे देश रूस के इस दावे को मान्यता नहीं देते। रूस का इन चारों इलाकों पर भी पूरा नियंत्रण नहीं है। क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है। रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर इसे अपने देश में शामिल कर लिया था। डोनेट्स्क के रूस के कब्जे वाले इलाके में मतदान के दौरान लोगों के पास एक हथियारबंद रूसी सैनिक भी तैनात दिखाई दिया। चुनाव पर्यवेक्षकों को नहीं बुलाया रूस ने इस बार यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (OSCE) के चुनाव पर्यवेक्षकों को भी नहीं बुलाया है। इससे चुनाव की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 20 सितंबर की शाम से शुरुआती नतीजे आने शुरू हो सकते हैं। 21 सितंबर तक लगभग पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। पुतिन की पार्टी के संसद में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है। लेकिन इस चुनाव की अहमियत सिर्फ यह देखने तक सीमित नहीं है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं। पुतिन इसे यूक्रेन युद्ध के बीच जनता के समर्थन के तौर पर दिखाना चाहते हैं। वहीं, युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली पार्टी चुनाव से बाहर है और रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी वोटिंग हो रही है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से जंग के बावजूद न्यूयॉर्क जाएंगे ईरानी राष्ट्रपति:US वीजा मिला, संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करेंगे; उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकती अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पुतिन की जीत तय, फिर भी रूस में चुनाव:यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में भी वोटिंग; युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी बाहर

पुतिन की जीत तय, फिर भी रूस में चुनाव:यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में भी वोटिंग; युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी बाहर

रूस में शुक्रवार यानी 18 सितंबर से तीन दिन का संसदीय चुनाव शुरू हो गया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का संसद में दबदबा बरकरार रहने की उम्मीद है। वहीं, यूक्रेन युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है। यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के इलाकों में भी वोटिंग हो रही है। यूक्रेन और यूरोपीय संघ ने वहां हो रहे मतदान को अवैध बताया है। जब पुतिन की पार्टी का दबदबा है तो चुनाव क्यों अहम? क्रेमलिन के लिए यह चुनाव सिर्फ संसद के सदस्य चुनने तक सीमित नहीं है। पुतिन चाहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग वोट डालें, ताकि यह संदेश जाए कि यूक्रेन युद्ध के बीच भी जनता सरकार और रूसी सैनिकों के साथ खड़ी है। पुतिन ने शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डाला। चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि लोगों का फैसला दिखाएगा कि लाखों लोग रूस के सैनिकों के साथ खड़े हैं और देश एकजुट है। 450 सीटों के लिए हो रही वोटिंग रूस के स्टेट ड्यूमा में 225 सीटों पर लोग राजनीतिक पार्टियों को वोट देंगे। बाकी 225 सीटों पर अलग-अलग इलाकों से खड़े उम्मीदवारों में से किसी एक को चुनेंगे। यूनाइटेड रशिया के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी, एलडीपीआर, ए जस्ट रशिया और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि, इन्हें रूस में सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष नहीं माना जाता। बड़े मुद्दों पर ये पार्टियां अक्सर सरकार का साथ देती हैं। युद्ध विरोधी याब्लोको पार्टी चुनाव से बाहर याब्लोको रूस की एकमात्र पंजीकृत पार्टी थी, जो खुले तौर पर यूक्रेन युद्ध का विरोध करती रही है। रूस की सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने उसे पार्टी के नाम पर होने वाले चुनाव से बाहर कर दिया। हालांकि, उसके कुछ उम्मीदवार अलग-अलग सीटों पर व्यक्तिगत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ दूसरे युद्ध विरोधी नेताओं को जेल भेजा गया है या उन्हें रूस छोड़ना पड़ा है। इससे चुनाव में यूक्रेन युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली राजनीतिक आवाजें काफी कम हो गई हैं। रूस के मतदाताओं की पसंद अलग-अलग मॉस्को में वोट डालने पहुंचे लोगों की राय एक जैसी नहीं है। दिमित्री किरिलिन ने कहा कि वह बदलाव चाहते हैं और किसी दूसरी पार्टी को सत्ता में देखना चाहते हैं। वहीं अलेक्जेंडर वर्तुखिन का कहना था कि पुतिन की पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी जो काम कर रही हैं, वह पर्याप्त है। एक मतदान केंद्र पर गैलिना वाविलोवा ने कहा कि इस समय सबसे जरूरी चीज यूक्रेन युद्ध खत्म होना है। उनका कहना था कि हर कोई शांति चाहता है। पेंशनर ल्यूडमिला कलिनिना चाहती हैं कि लोगों की जिंदगी बेहतर हो और अमीर-गरीब के बीच का अंतर कम हो। 72 साल के प्रोफेसर व्लादिमीर चुबारेव ने कहा कि उन्हें सरकार की योजनाओं के सफल होने की उम्मीद है। उन्होंने रूस की जीत की भी बात कही। युद्ध का असर रूस के अंदर भी दिख रहा चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन के ड्रोन हमलों का असर रूस के अंदर भी दिखाई दे रहा है। गर्मियों में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमले किए। इसके बाद रूस के कई हिस्सों में ईंधन की कमी की समस्या सामने आई। ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों वाइल्डबेरीज और ओजोन के गोदामों पर भी हमले हुए। इस तरह युद्ध का असर अब सिर्फ लड़ाई वाले इलाकों तक सीमित नहीं है। रूस के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोग भी इसका असर महसूस कर रहे हैं। कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी वोटिंग इस चुनाव में रूस पहली बार यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया इलाकों के लोगों को भी शामिल कर रहा है। रूस ने 2022 में इन चारों इलाकों को अपना हिस्सा बताकर अपने देश में शामिल करने का दावा किया था। लेकिन यूक्रेन और ज्यादातर दूसरे देश इसे नहीं मानते। रूस का इन चारों इलाकों पर पूरा नियंत्रण भी नहीं है। क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिस पर रूस ने 2014 में कब्जा किया था। डोनेट्स्क के रूस के कब्जे वाले हिस्से में वोट डालते लोगों के पास एक हथियारबंद रूसी सैनिक भी खड़ा दिखाई दिया। यूक्रेन और EU बोले- चुनाव नहीं मानेंगे यूक्रेन ने कब्जे वाले इलाकों में हो रहे मतदान को अवैध बताया है। उसने दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इन चुनावों और इनके नतीजों को मान्यता नहीं देने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि वह इन इलाकों में हुए चुनाव और उनके नतीजों को मान्यता नहीं देगा। यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगांड ने कहा कि रूस के लोगों को देश के भविष्य को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विकल्प नहीं मिल रहे हैं। चुनाव पर्यवेक्षकों को नहीं बुलाया रूस ने इस बार यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी ओएससीई के चुनाव पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया है। यूरोपीय संघ के मुताबिक, इससे चुनाव की निगरानी को लेकर सवाल उठते हैं। EU ने कहा है कि वह रूस के मानवाधिकार समूहों, स्वतंत्र मीडिया और नागरिक संगठनों का समर्थन जारी रखेगा।

Bluevine Layoffs | India Customer Support Team Fired via Teams Call

Bluevine Layoffs | India Customer Support Team Fired via Teams Call

Hindi News Career Bluevine Layoffs | India Customer Support Team Fired Via Teams Call कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक अमेरिकी कंपनी ब्लूवाइन फिलहाल लेऑफ को लेकर चर्चा में है। इससे जुड़ा एक मामला सोशल मीडिया पोस्ट के बाद चर्चा में आया। एक प्रभावित कर्मचारी ने रेडिट के इंडियन वर्कप्लेस ग्रुप में लिखा कि वह कंपनी की भारतीय कस्टमर सपोर्ट टीम का हिस्सा था। करीब 80 कर्मचारियों वाली पूरी टीम को एक छोटी सी ऑनलाइन मीटिंग में नौकरी से निकालने की जानकारी दी गई। गूगल मीट में सुनाया छटनी पर फैसला ब्लूवाइन ने उस दिन टीम को ऑपरेशनल कारणों से घर से काम करने के लिए कहा। शाम करीब 6:30 बजे अपनी सामान्य शिफ्ट करने के 3 घंटे बाद रात करीब 9:30 बजे पूरी टीम को गूगल मीट में शामिल होने के लिए कहा गया। मीटिंग में बताया गया कि पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उसके मुताबिक करीब 80 लोग एक साथ नौकरी से बाहर हो गए और पूरी प्रक्रिया लगभग पांच मिनट में खत्म हो गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि AI टूल्स लागू होने के बाद कस्टमर सपोर्ट वर्कलोड कम हुआ और कुछ काम थर्ड पार्टी वेंडर को दिए जाने की योजना थी। ब्लूवाइन कंपनी के बारे में : ब्लूवाइन एक अमेरिकी फिन टेक कंपनी है, जो मुख्य रूप से छोटे कारोबार, स्टार्ट अप्स और इंटरप्रेन्योर के लिए डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं देती है। कंपनी की शुरुआत 2013 में हुई थी। ओरेकल में फिर ले ऑफ टेक कंपनी ऑरेकल ने 14 सितंबर 2026 से एक और छंटनी का दौर शुरू किया। इस साल कंपनी मे इससे पहले भी कर्मचारियों की छटनी की जा चुकी है। प्रभावित कर्मचारियों के मुताबिक कुछ लोगों के कंपनी सिस्टम लॉगिन करीब सुबह 4 बजे ही काम करना बंद कर चुके थे। इसके बाद करीब 5 से 5:30 बजे के बीच स्लैक एक्सेस भी बंद होने की खबर सामने आई। ईमेल के जरिये दी नौकरी न रहने की जानकारी फिर करीब 6 बजे कर्मचारियों को ऑफिशियल ईमेल मिला। ईमेल में बताया गया कि कंपनी की मौजूदा कारोबारी जरूरतों और बदलाव के तहत संबंधित कर्मचारियों की भूमिका खत्म की जा रही है। कुछ कर्मचारियों के लिए पहले सिस्टम का एक्सेस बंद हुआ और उसके बाद औपचारिक ईमेल के जरिये नौकरी न रहने की जानकारी दी गई। काम की गंभीरता भी नहीं बचा सकी नौकरी लिंक्डइन पोस्ट के जरिये ओरेकल के ले ऑफ में एक ऐसे कर्मचारी को निकाला गया जो अपने काम में काफी गंभीर था। उसकी पत्नी ने अपनी पोस्ट में बताया कि जब मैं हॉस्पिटल में सर्जरी के लिए हॉस्पिटल में एडमिट थी, तब भी वे काम कर रहे थे। न्यू मैक्सिको में वेकेशन के दौरान जब मैं ड्राइविंग करती तो वे ऑफिस के कॉल अटैंड करने में लगे रहते थे। मेरे पति ने होली, दिवाली, राखी और अन्य त्योहरों के दिन में तो काम किया ही, साथ ही बर्थडे, एनिवर्सरी और वीकेंड पर भी काम किया। कुछ हफ्ते पहले हमने एक डॉग अडॉप्ट किया। मेरे पति रात को 3 बजे तक ऑफिस का काम करते हुए उस डॉग की केयर करते थे। उन्होंने बीमार होने की हद तक काम किया। आपने कभी ऐसा इंसान देखा नहीं होगा जिसने अपनी नौकरी के लिए इतना खून-पसीना बहाया हो। वे पिछले 2 दशक से IT इंडस्ट्री में हैं। उन्हें बेस्ट एम्प्लॉय का अवार्ड भी मिल चुका है। अगर आपको कोई उनके लायक काम का पता हो तो प्लीज उन्हें रिफर करें। Oracle के बारे में : Oracle एक अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो मुख्य रूप से कंपनियों और सरकारों को डेटाबेस, क्लाउड कंप्यूटिंग, AI और बिजनेस सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराती है। एडिडास ने टाउनहाल में कहीं लेऑफ की बात Adidas में 15 सितंबर को एक टाउनहॉल हुआ था, इसमें शामिल कुछ लोगों ने बताया है कि सभी कर्मचारियों को दो ग्रुप्स में बांटा गया है। इनमें से एक ग्रुप को 15 तारीख को ही एग्जिट लेटर मिल चुके हैं, वहीं दूसरे ग्रुप को 15 दिसंबर तक कंपनी के साथ रहने के लिए कहा गया है। उनसे कहा गया है कि इस दौरान उनका रोल वही रहेगा और हैंडओवर पूरा होने के बाद आगे फैसला लिया जाएगा। इन कर्मचारियों को कंपनी में दूसरे रोल में फिट होने के लिए भी टाइम दिया जाएगा, लेकिन जो फिट नहीं हुए, उन्हें 15 दिसंबर को अपनी नौकरी का आखिरी दिन मानना होगा। मिलेगी नोटिस पीरियड की सैलरी कंपनी की तरफ से कर्मचारियों को ये भी बताया गया है कि उन्हें पॉलिसी के हिसाब से नोटिस पीरियड की पूरी सैलरी और मुआवजा दिया जाएगा। कंपनी ने भी खुद ये माना है कि अपनी ग्लोबल टेक जरूरतों को पूरा करने के लिए वो ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव कर रही है। Adidas के बारे में यह एक जर्मन स्पोर्ट्सवियर और लाइफस्टाइल कंपनी है। इसका मुख्य काम खेलों से जुड़े कपड़े, जूते और अन्य सामान बनाना व बेचना है। ये खबर भी पढ़ें हरियाणा के 12 हजार शिक्षकों पर संकट:HTET जरूरी, नहीं तो नौकरी छोड़ो या रिटायरमेंट लो, पश्चिम बंगाल में 90 हजार टीचर्स के लिए एग्जाम की तैयारी हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत उन 12 हजार शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्होंने अब तक हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) पास नहीं की है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय (हरियाणा) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए एक नोटिस जारी किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

France Smart Glasses Privacy Controversy

France Smart Glasses Privacy Controversy

पेरिस25 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रांस में स्मार्ट चश्मों से महिलाओं के बिना अनुमति वीडियो बनाने के मामलों की जांच शुरू हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सड़क पर महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इंटरनेट पर डाल रहे थे। इसी को लेकर यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं। इन चश्मों में छोटा कैमरा लगा होता है। इन्हें पहनने वाला बिना मोबाइल निकाले वीडियो बना सकता है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ रही है। इन स्मार्ट चश्मों में मेटा के चश्मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मेटा ने ये चश्मे, चश्मा बनाने वाली कंपनी एस्सिलोरलक्सोटिका के साथ मिलकर बनाए हैं। पिछले साल इनके करीब 70 लाख चश्मे बिके थे। यह फोटो मेटा के रे-बैन स्मार्ट ग्लासेस की है। इसे 4 मई 2022 को कैलिफोर्निया के बर्लिंगेम में मेटा के नए स्टोर में मीडिया प्रीव्यू के दौरान लिया गया था। फ्रांस में निजी वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल का नियम रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक आपराधिक जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि महिलाओं के वीडियो बनाने के लिए किस कंपनी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने दो हफ्ते पहले इन चश्मों को खुद इस्तेमाल करके देखा। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि इनसे किस तरह के गलत काम किए जा सकते हैं। फ्रांस में किसी व्यक्ति की निजी जगह पर बिना अनुमति उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल और 45 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाए जाने की चिंता मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, स्मार्ट चश्मों के गलत इस्तेमाल में महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली इनेस गिरार्द ने कहा कि इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग हो रही है, उसी से कहा जाए कि वह ज्यादा सावधान रहे। उनका कहना है कि स्मार्ट चश्मे बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या उनकी निजता भंग करने के लिए न हो। दूसरे देशों में भी स्मार्ट चश्मों पर सवाल जर्मनी: मेटा और स्मार्ट चश्मे से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। अमेरिका: एक व्यक्ति ने हिरासत केंद्र के अंदर लोगों के वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई। ब्रिटेन: इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में मेटा के कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक है। कुछ सिनेमाघरों ने भी पाइरेसी के डर से इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। नॉर्वे: छात्रों की प्राइवेसी को लेकर स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ऑस्ट्रेलिया: सरकार सरकारी दफ्तरों में कैमरे वाले स्मार्ट चश्मों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। अमेजन डिलीवरी में भी इस्तेमाल कर रही स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल सिर्फ वीडियो बनाने के लिए नहीं हो रहा है। अमेजन डिलीवरी के काम में भी ऐसे चश्मों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ऐसे चश्मे बना रही है, जिनसे डिलीवरी कर्मचारी बिना मोबाइल निकाले पैकेज स्कैन कर सकेंगे, रास्ता देख सकेंगे और सामान पहुंचाने के बाद उसकी तस्वीर ले सकेंगे। रास्ते में कुत्ता या कोई दूसरी रुकावट होने पर चश्मा अलर्ट भी दे सकता है। अमेजन ने इन चश्मों को डिलीवरी कर्मचारियों के साथ टेस्ट किया है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में अमेजन का डिलीवरी ड्राइवर स्मार्ट चश्मा पहने हुए। यह तस्वीर 22 अक्टूबर 2025 को अमेजन के एक कार्यक्रम के दौरान ली गई। चश्मे में डिलीवरी ड्राइवर की आंखों के सामने रास्ते और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी दिखाई दे रही है। मेटा बिना कैमरे वाला स्मार्ट चश्मा ला सकता है स्मार्ट चश्मों को लेकर उठ रहे निजता के सवालों के बीच मेटा एक ऐसा नया चश्मा लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कैमरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका नाम लूना हो सकता है। इस चश्मे में छह माइक्रोफोन और कान के पास स्पीकर होंगे। इनके जरिए यूजर मेटा के एआई से बात कर सकेगा। यानी एआई इस्तेमाल करने के लिए कैमरे की जरूरत नहीं होगी। चश्मे में AI को चालू करने के लिए एक अलग बटन भी दिया जा सकता है। यह सामान्य चश्मे जैसा ही दिखेगा। मेटा इसे क्लबमास्टर और बरबैंक नाम के नए डिजाइन में ला सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 23 सितंबर से होने वाले अपने डेवलपर कार्यक्रम में इसकी घोषणा कर सकता है। इसकी बिक्री इस साल के आखिर में शुरू होने की बात कही गई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी: रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा सिंगापुर सरकार अब लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे देगी। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट किताब या लंबे लेख पढ़ने होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

France Smart Glasses Privacy Controversy

France Smart Glasses Privacy Controversy

पेरिस9 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रांस में स्मार्ट चश्मों से महिलाओं के बिना अनुमति वीडियो बनाने के मामलों की जांच शुरू हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सड़क पर महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इंटरनेट पर डाल रहे थे। इसी को लेकर यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं। इन चश्मों में छोटा कैमरा लगा होता है। इन्हें पहनने वाला बिना मोबाइल निकाले वीडियो बना सकता है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ रही है। इन स्मार्ट चश्मों में मेटा के चश्मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मेटा ने ये चश्मे, चश्मा बनाने वाली कंपनी एस्सिलोरलक्सोटिका के साथ मिलकर बनाए हैं। पिछले साल इनके करीब 70 लाख चश्मे बिके थे। फ्रांस में निजी वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल का नियम रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक आपराधिक जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि महिलाओं के वीडियो बनाने के लिए किस कंपनी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने दो हफ्ते पहले इन चश्मों को खुद इस्तेमाल करके देखा। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि इनसे किस तरह के गलत काम किए जा सकते हैं। फ्रांस में किसी व्यक्ति की निजी जगह पर बिना अनुमति उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल और 45 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाए जाने की चिंता मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, स्मार्ट चश्मों के गलत इस्तेमाल में महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली इनेस गिरार्द ने कहा कि इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग हो रही है, उसी से कहा जाए कि वह ज्यादा सावधान रहे। उनका कहना है कि स्मार्ट चश्मे बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या उनकी निजता भंग करने के लिए न हो दूसरे देशों में भी स्मार्ट चश्मों पर सवाल जर्मनी: मेटा और स्मार्ट चश्मे से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। अमेरिका: एक व्यक्ति ने हिरासत केंद्र के अंदर लोगों के वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई। ब्रिटेन: इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में मेटा के कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक है। कुछ सिनेमाघरों ने भी पाइरेसी के डर से इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। नॉर्वे: छात्रों की प्राइवेसी को लेकर स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ऑस्ट्रेलिया: सरकार सरकारी दफ्तरों में कैमरे वाले स्मार्ट चश्मों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। मेटा ला सकता है कैमरे के बिना स्मार्ट चश्मा स्मार्ट चश्मों को लेकर उठ रहे निजता के सवालों के बीच मेटा एक ऐसा नया चश्मा लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कैमरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका नाम लूना हो सकता है। इस चश्मे में छह माइक्रोफोन और कान के पास स्पीकर होंगे। इनके जरिए यूजर मेटा के एआई से बात कर सकेगा। यानी एआई इस्तेमाल करने के लिए कैमरे की जरूरत नहीं होगी। चश्मे में AI को चालू करने के लिए एक अलग बटन भी दिया जा सकता है। यह सामान्य चश्मे जैसा ही दिखेगा। मेटा इसे क्लबमास्टर और बरबैंक नाम के नए डिजाइन में ला सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 23 सितंबर से होने वाले अपने डेवलपर कार्यक्रम में इसकी घोषणा कर सकता है। इसकी बिक्री इस साल के आखिर में शुरू होने की बात कही गई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी: रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा सिंगापुर सरकार अब लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे देगी। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट किताब या लंबे लेख पढ़ने होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Gondhal Selected as Indias Official Entry for Oscars 2027

Gondhal Selected as Indias Official Entry for Oscars 2027

10 मिनट पहले कॉपी लिंक मराठी फिल्म ‘गोंधल’ (Gondhal) को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2027) के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री चुना गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक घोषणा की। यह एक थ्रिलर फिल्म है, जो ऑस्कर समारोह में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ कैटेगरी में देश का प्रतिनिधित्व करेगी। इस बार ऑस्कर की रेस में भारत की तरफ से कुल 33 फिल्में शामिल हुई थीं, जिनमें से चयन समिति ने ‘गोंधल’ के नाम पर मुहर लगाई। रेस में शामिल थीं 33 फिल्में, 14 हिंदी फिल्में भी थीं रेस में इस साल ऑस्कर की दावेदारी के लिए देश भर की अलग-अलग भाषाओं से कुल 33 फिल्में FFI के पास भेजी गई थीं। इसमें सबसे ज्यादा 14 फिल्में हिंदी भाषा की थीं। इसके अलावा मराठी, तेलुगु और गुजराती भाषा से 4-4 फिल्में, तमिल से 3 फिल्में और मलयालम व नागामी भाषा से 1-1 फिल्म शामिल थी। हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की मजबूत दावेदारी के बावजूद मराठी फिल्म ‘गोंधल’ बाजी मारने में सफल रही। फिल्म की मजबूत कहानी, बेहतरीन मेकिंग और थ्रिलर एलीमेंट को देखते हुए जूरी ने माना कि यह फिल्म ऑस्कर के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है गोंधल मराठी फिल्म ‘गोंधल’ ग्रामीण महाराष्ट्र की लोक परंपरा और धार्मिक अनुष्ठान ‘गोंधल’ पर आधारित एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। इस फिल्म का लेखन और निर्देशन संतोष डावखर ने किया है। फिल्म की कहानी नवविवाहित जोड़े आनंद और सुमन के घर पर आयोजित रात भर चलने वाले गोंधल अनुष्ठान के इर्द-गिर्द घूमती है। पूजा-पाठ और उत्सव के दौरान गांव के लोगों के बीच दबे हुए पुराने विवाद, व्यक्तिगत रंजिशें और राजनीतिक तनाव बाहर आने लगते हैं। ‘गोंधल’ में सुमन का किरदार निभाने वाली इशिता देशमुख। गांव के पाटिल का बेटा सरजेराव, जो सुमन से शादी न हो पाने के कारण नाराज था, इस शादी को स्वीकार नहीं कर पाता और धीरे-धीरे यह पवित्र अनुष्ठान एक क्राइम और सस्पेंस ड्रामा में बदल जाता है। फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहणी, निषाद भोईर और सुरेश विश्वकर्मा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इस फिल्म का संगीत महान संगीतकार इलैयाराजा ने तैयार किया है। इसी मेकिंग के लिए निर्देशक संतोष डावखर को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में सिल्वर पीकॉक (सर्वश्रेष्ठ निर्देशक) का पुरस्कार भी मिल चुका है। 13 सदस्यीय जूरी पैनल ने किया फैसला फिल्म के चयन के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने एक विशेष जूरी का गठन किया था। इस जूरी पैनल में पी शेषाद्री, विजय पाटकर, हितू कनोडिया, शांति कुमार, संदीप पराशर, संजय पाटिल, साबू जोसेफ, अनिल थॉमस, विवेक वासवानी, बिजॉन दासगुप्ता, हासन, वासन और तनिष्ठा चटर्जी जैसे दिग्गज शामिल थे। जूरी मेंबर्स ने सभी प्रविष्टियों की गहन समीक्षा करने के बाद इस मराठी थ्रिलर को ऑस्कर 2027 के मंच पर भेजने का फैसला लिया। होमबाउंड में ईशान खट्टर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में थे। पिछले साल ‘होमबाउंड’ भारत की ऑस्कर एंट्री थी पिछले साल फिल्म होमबाउंड को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए भेजा गया था। फिल्म में ईशान खट्टर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में थे। 2025 में अलग-अलग भाषाओं की कुल 24 फिल्मों पर भारत की ऑस्कर एंट्री के लिए विचार किया गया था। इनमें होमबाउंड का सेलेक्शन हुआ था। उस समय सेलेक्शन कमेटी के चेयरपर्सन एन चंद्रा ने कहा था कि यह फैसला काफी मुश्किल था। एन चंद्रा ने कहा था, “ये ऐसी फिल्में थीं, जिन्होंने लोगों की जिंदगी को छुआ।” नीरज घायवान के डायरेक्शन में बनी होमबाउंड बशारत पीर के 2020 के न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख ‘टेकिंग अमृत होम’ पर आधारित थी। ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने बेस्ट फिल्म समेत 6 अवॉर्ड जीते थे 98वें ऑस्कर अवॉर्ड्स (2026) में ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने बेस्ट फिल्म समेत सबसे ज्यादा 6 अवॉर्ड जीते थे। ‘सिनर्स’ के लिए माइकल बी. जॉर्डन को बेस्ट एक्टर और ‘हेमनेट’ के लिए जेसी बकले को बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया था। ‘सिनर्स’ को सबसे ज्यादा 16 नॉमिनेशन मिले थे, लेकिन फिल्म ने 4 अवॉर्ड जीते थे। वहीं, भारतीय मूल की फिल्ममेकर गीता गंदभीर की दो डॉक्यूमेंट्री नॉमिनेट हुईं। प्रियंका चोपड़ा ने दूसरी बार ऑस्कर में प्रेजेंटर की भूमिका निभाई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Gondhal Selected as Indias Official Entry for Oscars 2027

Gondhal Selected as Indias Official Entry for Oscars 2027

4 मिनट पहले कॉपी लिंक मराठी फिल्म ‘गोंधल’ (Gondhal) को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2027) के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री चुना गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक घोषणा की। यह एक थ्रिलर फिल्म है, जो ऑस्कर समारोह में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ कैटेगरी में देश का प्रतिनिधित्व करेगी। इस बार ऑस्कर की रेस में भारत की तरफ से कुल 33 फिल्में शामिल हुई थीं, जिनमें से चयन समिति ने ‘गोंधल’ के नाम पर मुहर लगाई। रेस में शामिल थीं 33 फिल्में, 14 हिंदी फिल्में भी थीं रेस में इस साल ऑस्कर की दावेदारी के लिए देश भर की अलग-अलग भाषाओं से कुल 33 फिल्में FFI के पास भेजी गई थीं। इसमें सबसे ज्यादा 14 फिल्में हिंदी भाषा की थीं। इसके अलावा मराठी, तेलुगु और गुजराती भाषा से 4-4 फिल्में, तमिल से 3 फिल्में और मलयालम व नागामी भाषा से 1-1 फिल्म शामिल थी। हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की मजबूत दावेदारी के बावजूद मराठी फिल्म ‘गोंधल’ बाजी मारने में सफल रही। फिल्म की मजबूत कहानी, बेहतरीन मेकिंग और थ्रिलर एलीमेंट को देखते हुए जूरी ने माना कि यह फिल्म ऑस्कर के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। 13 सदस्यीय जूरी पैनल ने किया फैसला फिल्म के चयन के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने एक विशेष जूरी का गठन किया था। इस जूरी पैनल में पी शेषाद्री, विजय पाटकर, हितू कनोडिया, शांति कुमार, संदीप पराशर, संजय पाटिल, साबू जोसेफ, अनिल थॉमस, विवेक वासवानी, बिजॉन दासगुप्ता, हासन, वासन और तनिष्ठा चटर्जी जैसे दिग्गज शामिल थे। जूरी मेंबर्स ने सभी प्रविष्टियों की गहन समीक्षा करने के बाद इस मराठी थ्रिलर को ऑस्कर 2027 के मंच पर भेजने का फैसला लिया। पिछले साल ‘होमबाउंड’ भारत की ऑस्कर एंट्री थी पिछले साल फिल्म होमबाउंड को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए भेजा गया था। फिल्म में ईशान खट्टर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में थे। 2025 में अलग-अलग भाषाओं की कुल 24 फिल्मों पर भारत की ऑस्कर एंट्री के लिए विचार किया गया था। इनमें होमबाउंड का सेलेक्शन हुआ था। उस समय सेलेक्शन कमेटी के चेयरपर्सन एन चंद्रा ने कहा था कि यह फैसला काफी मुश्किल था। एन चंद्रा ने कहा था, “ये ऐसी फिल्में थीं, जिन्होंने लोगों की जिंदगी को छुआ।” नीरज घायवान के डायरेक्शन में बनी होमबाउंड बशारत पीर के 2020 के न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख ‘टेकिंग अमृत होम’ पर आधारित थी। ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने बेस्ट फिल्म समेत 6 अवॉर्ड जीते थे 98वें ऑस्कर अवॉर्ड्स (2026) में ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने बेस्ट फिल्म समेत सबसे ज्यादा 6 अवॉर्ड जीते थे। ‘सिनर्स’ के लिए माइकल बी. जॉर्डन को बेस्ट एक्टर और ‘हेमनेट’ के लिए जेसी बकले को बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया था। ‘सिनर्स’ को सबसे ज्यादा 16 नॉमिनेशन मिले थे, लेकिन फिल्म ने 4 अवॉर्ड जीते थे। वहीं, भारतीय मूल की फिल्ममेकर गीता गंदभीर की दो डॉक्यूमेंट्री नॉमिनेट हुईं। प्रियंका चोपड़ा ने दूसरी बार ऑस्कर में प्रेजेंटर की भूमिका निभाई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से आमिर खान मिले:दोनों ने बातचीत भी की, मुलाकात के बाद महाभारत प्रोजेक्ट चर्चा में आया

जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से आमिर खान मिले:दोनों ने बातचीत भी की, मुलाकात के बाद महाभारत प्रोजेक्ट चर्चा में आया

बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान हाल ही में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज से मिले। मुलाकात के दौरान दोनों के बीच काफी देर बातचीत हुई। आमिर ने आध्यात्मिक गुरु के प्रति अपना आभार भी व्यक्त किया। जगद्गुरु महाराज की सोशल मीडिया टीम ने आमिर के साथ मुलाकात का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘जब आध्यात्म और सिनेमा जगत की दो प्रमुख हस्तियां एक साथ आईं।’ टीम के अनुसार, आमिर ने जगद्गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया और उनसे बातचीत की। वीडियो में आमिर हल्के नीले और सफेद रंग का कुर्ता और काला पजामा पहने नजर आए। वह जगद्गुरु महाराज के पास जाते, उनसे हाथ मिलाते और गर्मजोशी से गले मिलते दिखे। आध्यात्मिक गुरु की बातें सुनते हुए आमिर काफी प्रभावित नजर आए। देखें मुलाकात की तस्वीरें- मुलाकात के बाद पैपराजी में भी यह उत्सुकता दिखी कि क्या दोनों मिलकर कुछ करने की योजना बना रहे हैं। एक पैपराजी ने जगद्गुरु महाराज से पूछा, ‘क्या होने वाला है? कोई कार्यक्रम है?’ इस पर जगद्गुरु महाराज ने कहा कि उन्हें वहां जाना होगा जहां ‘धर्म’ उन्हें बुलाएगा, क्योंकि अभी गणेश महोत्सव का जश्न चल रहा है। यह पहली बार नहीं है जब आमिर खान जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से मिले हैं। इससे पहले भी आमिर ने उनका आशीर्वाद लिया था और धर्म, उपनिषद और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर उनसे विस्तार से बातचीत की थी। मुलाकात के बाद आमिर का ‘महाभारत’ प्रोजेक्ट फिर चर्चा में आमिर खान कई बार फिल्म ‘महाभारत’ को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बता चुके हैं। ऐसे में जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से उनकी मुलाकात के बाद ‘महाभारत’ को लेकर चर्चा फिर शुरू हो गई है। गौरतलब है कि महाभारत पर आमिर पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से काम करने की इच्छा जता रहे हैं। आमिर खान इस महाकाव्य को किसी एक फिल्म में नहीं, बल्कि हॉलीवुड की मशहूर फिल्म सीरीज ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ की तरह एक भव्य फिल्म सीरीज के रूप में बैक-टू-बैक चैप्टर्स में बनाना चाहते हैं। साल 2024 में बीबीसी से बातचीत के दौरान आमिर खान ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा था, ‘यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है और मेरे लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है। मुझे डर है कि इसे बनाते समय मुझसे कोई गलती न हो जाए। यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि महाभारत हमारे लिए बहुत करीब है। यह हमारे खून में है, इसलिए मैं इसे बिल्कुल सही तरीके से बनाना चाहता हूं।’ आमिर ने कहा था, ‘मैं हर भारतीय को गर्व महसूस कराना चाहता हूं और साथ ही दुनिया को यह दिखाना चाहता हूं कि भारत के पास क्या है। मुझे नहीं पता, यह कब बन पाएगा।’ आमिर आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं: सतीशाचार्य महाराज जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज ने एक इंटरव्यू में आमिर खान को लेकर कई बातें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि व्यक्तिगत रूप से वह बहुत अच्छे इंसान हैं। महाराज के मुताबिक, कुछ समय से आमिर उनके संपर्क में हैं और आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि आमिर गीता पढ़ते हैं, कलावा बांधते हैं और रुद्राक्ष धारण करते हैं। इसके अलावा, वे भगवान का नाम लेते हैं और भजन भी सीख रहे हैं। महाराज ने बताया था कि आमिर उनसे मिलने पर उनके लिए भजन गाकर सुनाते हैं। उन्होंने यह भी किस्सा साझा किया कि जब वे आमिर के घर भोजन करने गए थे, तो आमिर ने विशेष तैयारी करवाई। उनके मुताबिक, पूरे घर को गंगाजल से साफ करवाया गया, नए बर्तन और अनाज मंगवाए गए। इसके बाद भोजन बनाकर भगवान को भोग लगाया गया और पारंपरिक पद्धति से उन्हें भोजन कराया गया।