Mumbai iPhone Launch | Vicky Kaushal, Riteish, Genelia Photos & Celebs

14 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई के बीकेसी स्थित एपल स्टोर के बाहर नए आईफोन-18 की बिक्री शुरू होते ही लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। एक तरफ जहां आम लोग रातभर लाइन में लगकर नए हैंडसेट का इंतजार करते दिखे, वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड के कई सितारे भी इस ट्रेंड में शामिल होते नजर आए। एक्टर विक्की कौशल स्टोर पहुंचकर फैंस के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए, जबकि रितेश देशमुख, जेनेलिया, नेहा धूपिया और करिश्मा तन्ना जैसे कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अपने नए हैंडसेट की तस्वीरें शेयर कीं। इस बीच एक्टर सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर इस होड़ पर सवाल उठाया और लोगों को समाज सुधारने पर ध्यान देने की सलाह दी। सोनू सूद की पोस्ट। सोनू सूद बोले- ईएमआई और वही पुराने बिल स्टोर के बाहर लगी लंबी लाइनों की तस्वीर शेयर करते हुए सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नया फोन और नई ईएमआई से पुराने बिल नहीं बदलते। उन्होंने लिखा कि अब समय आ गया है कि लोग सिर्फ अपने फोन को अपग्रेड करने के बजाय समाज में बदलाव लाने के लिए लाइन में लगें, क्योंकि असली अपग्रेड एक बेहतर समाज बनाना है। स्टोर पर पहुंचे विक्की कौशल, सेल्फी ली मुंबई के बीकेसी स्टोर पर बिक्री के पहले ही दिन सैकड़ों लोगों का हुजूम देखने को मिला। इस दौरान एक्टर विक्की कौशल भी वहां पहुंचे और उन्होंने फैंस के साथ सेल्फी क्लिक की। विक्की कौशल भी मुंबई के बीकेसी स्टोर पर आईफोन खरीदने पहुंचे। विक्की ने फैंस के साथ सेल्फी क्लिक की। स्टोर के बाहर कई लोग ऐसे भी थे जो सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके पहुंचे थे और अपने शहर में पहला हैंडसेट खरीदने के लिए रातभर लाइन में खड़े रहे। बॉलीवुड में नए आईफोन का ट्रेंड फिल्म इंडस्ट्री के सितारों का लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगे गैजेट्स से पुराना रिश्ता रहा है। बाजार में नया मॉडल आते ही कई स्टार्स इसके अलग-अलग कलर वेरिएंट्स के साथ नजर आने लगे हैं। एक्टर रितेश देशमुख ने सोशल मीडिया पर नीले रंग के फोन के साथ अपनी फोटो पोस्ट की और लिखा कि मेरे वाला ब्लू। वहीं उनकी पत्नी जेनेलिया देशमुख, एक्ट्रेस नेहा धूपिया और करिश्मा तन्ना ने बरगंडी कलर के मॉडल को पसंद किया और अपनी तस्वीरें शेयर कीं। इससे पहले इस महीने आयोजित हुए कंपनी के एक इवेंट में सिंगर एपी ढिल्लों और एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी भी शामिल हुए थे, जहां उन्होंने कंपनी के सीईओ से मुलाकात की थी। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु स्टोर्स के बाहर लगी कतारें भारत में आज शुक्रवार 18 सितंबर से एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बिक्री शुरू हो गई है। देश भर के एपलल स्टोर्स और अधिकृत रिटेलर्स के बाहर नए आईफोन को सबसे पहले खरीदने के लिए खरीदारों की भीड़ है। लॉन्च डे पर एपल के रिटेल स्टोर्स तय समय से पहले यानी सुबह 8 बजे खोल दिए गए। भारत में एपल के कुल 6 रिटेल स्टोर है। मुंबई में दो, दिल्ली, नोएडा, बेंगलुरु और पुणे में एक स्टोर है। ये खबर भी पढ़ें आईफोन 18 के लॉन्च इवेंट में पहुंची तृप्ति डिमरी:एपी ढिल्लों भी नजर आए; एपल के सीईओ जॉन टर्नस से मुलाकात की एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी और सिंगर एपी ढिल्लों बुधवार को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित क्यूपर्टिनो पहुंचे। दोनों ने यहां आयोजित एपल के आईफोन 18 लॉन्च इवेंट में हिस्सा लिया। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
पाकिस्तान में नमाज के दौरान मस्जिद के पास धमाका:खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट जिले में 15 की मौत, 50 से ज्यादा घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में शुक्रवार को मस्जिद के पास जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका शुक्रवार की नमाज के दौरान पुलिस लाइंस इलाके में हुआ। मेडिकल अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हैं। कोहाट के जिला मुख्यालय अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ताहिर अली शाह ने जियो न्यूज को बताया कि अस्पताल में 15 शव और 50 से ज्यादा घायलों को लाया गया। पुलिस के मुताबिक, विस्फोट से मस्जिद के बाहरी हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा। एक दीवार भी गिर गई। कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी है। धमाके के बाद पुलिस लाइंस इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया। घटना के बाद राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कोहाट-हंगू रोड को बंद कर दिया है। अस्पताल प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए इमरजेंसी घोषित कर दी है। फिलहाल विस्फोट की वजह और इसमें किसका हाथ था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
मूवी रिव्यू-'लस्ट स्टोरीज 3':चार कहानियां, चार रंग और रिश्तों की वो बातें जो लोग अक्सर कह नहीं पाते

अवधि: 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग: (3.5/5) स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स निर्देशक: विक्रमादित्य मोटवानी, किरण राव, शकुन बत्रा, विशाल भारद्वाज कलाकार: कोंकणा सेन शर्मा, राधिका आप्टे, विजय वर्मा, अभिषेक बनर्जी, गुरफतेह पीरजादा, सना थंपी, राधिका मदान, अली फजल, अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ, गजराज राव ‘लस्ट स्टोरीज 3’ को देखने बैठते वक्त उम्मीद यही रहती है कि चार अलग-अलग निर्देशक रिश्तों, आकर्षण और इच्छाओं को अपने-अपने अंदाज में दिखाएंगे। अच्छी बात ये है कि फिल्म इस उम्मीद को पूरी तरह निराश नहीं करती। कहीं कहानी हंसाती है, कहीं रिश्तों की उलझन दिखाती है और कहीं आपको चौंकाती है। हां, चारों कहानियां बराबर दमदार नहीं हैं, लेकिन दो घंटे 40 मिनट में फिल्म इतना मसाला जरूर दे देती है कि देखने वाले का ध्यान बना रहता है। और इस बार सबसे ज्यादा सरप्राइज देती हैं अदिति राव हैदरी। कहानी: चार किस्से, चार अलग अंदाज फिल्म की पहली कहानी विक्रमादित्य मोटवानी की है। इसमें कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे दो करीबी दोस्त हैं, जो अपनी-अपनी शादीशुदा जिंदगी से पूरी तरह खुश नहीं हैं। इंटरनेट पर कुछ देखने के बाद दोनों के दिमाग में एक ऐसा आइडिया आता है, जो दोस्ती और शादी दोनों की परीक्षा ले सकता है। यहां विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी अपने-अपने अंदाज में कहानी में कॉमेडी का तड़का लगाते हैं। कोंकणा और राधिका की दोस्ती वाला हिस्सा खास तौर पर अच्छा है। कहानी बहुत गहरी नहीं जाती, लेकिन हल्के-फुल्के अंदाज में काफी कुछ कह जाती है। दूसरी कहानी किरण राव की है और यहीं फिल्म थोड़ा अलग रास्ता पकड़ती है। गुरफतेह पीरजादा डबल रोल में हैं और सना थंपी के साथ उनकी कहानी शुरुआत में एक सामान्य आकर्षण की तरह लगती है। लेकिन धीरे-धीरे मामला रिश्ते से निकलकर अपराध और धोखे तक पहुंच जाता है। इस हिस्से का ट्विस्ट कहानी को संभालता है, हालांकि बीच में ऐसा भी लगता है कि कहानी जरूरत से ज्यादा चीजें एक साथ करने की कोशिश कर रही है। तीसरी कहानी शकुन बत्रा की है और शायद फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा भी यही है। राधिका मदान और अली फजल एक ऐसे कपल के किरदार में हैं जो तलाक लेने की तैयारी कर रहा है। दोनों के बीच गुस्सा है, शिकायतें हैं और बहुत सारी अनकही बातें हैं। लेकिन अजीब बात ये है कि जब भी दोनों मिलते हैं, उनके बीच वही पुरानी नजदीकी लौट आती है। यानी रिश्ता खत्म करने का फैसला तो हो चुका है, लेकिन दिल और आदतें अभी भी पुरानी जगह पर खड़ी हैं। शकुन बत्रा इसी उलझन को पकड़ते हैं। कहानी सिर्फ आकर्षण की नहीं रहती, बल्कि इस सवाल तक पहुंचती है कि क्या दो लोग एक-दूसरे से प्यार किए बिना भी एक-दूसरे के इतने करीब रह सकते हैं कि अलग होना मुश्किल हो जाए? और फिर आती है विशाल भारद्वाज की कहानी, जो फिल्म का सबसे अलग और सबसे मजेदार हिस्सा है। अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ एक पति-पत्नी के किरदार में हैं। कहानी पुराने दौर के हैदराबाद में सेट है, जहां अदिति का किरदार धीरे-धीरे रोमांटिक और कामुक साहित्य की दुनिया में दिलचस्पी लेने लगता है। यहीं से उसकी कल्पना और असली जिंदगी के बीच की सीमा थोड़ी धुंधली होने लगती है। सिद्धार्थ का किरदार भी इस पूरे खेल में काफी दिलचस्प है और गजराज राव अपने खास अंदाज में कहानी में खूब रंग भरते हैं। विशाल भारद्वाज ने इस हिस्से को इतना हल्का, शरारती और मजेदार रखा है कि कहानी कहीं भी भद्दी नहीं लगती। एक्टिंग: अदिति राव हैदरी ने बाजी मार ली चारों कहानियों में कलाकारों ने अच्छा काम किया है, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचती हैं अदिति राव हैदरी। उनका किरदार मासूम भी है, जिज्ञासु भी और अंदर से काफी शरारती भी। अदिति ने इन तीनों रंगों को बहुत खूबसूरती से पकड़ा है। खासकर उनके चेहरे के एक्सप्रेशन और घबराहट वाले सीन कहानी को और मजेदार बना देते हैं। सिद्धार्थ उनके साथ अच्छी केमिस्ट्री शेयर करते हैं और पहली बार में जितने सीधे-सादे लगते हैं, किरदार आगे बढ़ने के साथ उतने ही दिलचस्प होते जाते हैं। राधिका मदान और अली फजल भी तीसरी कहानी में शानदार हैं। दोनों के बीच गुस्सा, प्यार, खीझ और पुरानी नजदीकी—सब कुछ स्क्रीन पर साफ नजर आता है। कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे की दोस्ती फिल्म की पहली कहानी की जान है। दोनों की टाइमिंग अच्छी है और उनकी बातचीत में एक स्वाभाविकता दिखती है। विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी अपने छोटे-छोटे पलों में हंसी निकालने में कामयाब रहते हैं। डायरेक्शन और स्टोरीटेलिंग चारों निर्देशकों की अपनी अलग पहचान यहां साफ दिखाई देती है। विक्रमादित्य मोटवानी की कहानी तेज और हल्की है, लेकिन इसका आइडिया जितना मजेदार है, कहानी उतनी गहराई तक नहीं जाती। किरण राव ने मुंबई को खूबसूरती से इस्तेमाल किया है। उनकी कहानी में विजुअल स्टाइल अलग दिखती है, लेकिन ट्विस्ट के चक्कर में कहानी थोड़ी उलझ जाती है। शकुन बत्रा रिश्तों की पेचीदगियों को समझने में सबसे मजबूत नजर आते हैं। उनका हिस्सा सबसे ज्यादा भावनात्मक वजन लेकर आता है। और विशाल भारद्वाज तो यहां पूरी तरह अपने रंग में हैं। पुराने हैदराबाद का माहौल, संवाद, किरदार और हल्की शरारत—सब मिलकर इस कहानी को बाकी तीनों से अलग बना देते हैं। म्यूजिक और टेक्निकल पहलू कैसा है फिल्म का म्यूजिक कहानी के मूड को सपोर्ट करता है। खासकर ‘घट पट’ ध्यान खींचता है और कुछ हिस्सों की ऊर्जा बढ़ाता है। विजुअल ट्रीटमेंट भी फिल्म की बड़ी ताकत है। चारों कहानियों की अपनी अलग दुनिया है और कैमरा उस दुनिया को बनाने में अच्छी भूमिका निभाता है। विशाल भारद्वाज वाला हिस्सा खास तौर पर अपने रंग, लोकेशन और पीरियड फील की वजह से अलग नजर आता है। कहां रह जाती है पीछे? सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि चारों कहानियों का स्तर एक जैसा नहीं है। पहली कहानी का आइडिया मजेदार है, लेकिन उसका असर उतना देर तक नहीं रहता। दूसरी कहानी में ट्विस्ट तो है, मगर कहानी कई मोड़ों पर जरूरत से ज्यादा उलझती हुई लगती है। तीसरी कहानी मजबूत है, लेकिन कुछ जगहों पर रिश्तों को समझाने की कोशिश थोड़ी ज्यादा हो जाती है। चौथी कहानी सबसे मजेदार है, लेकिन उसका पेस थोड़ा और तेज होता तो असर और बढ़ सकता था।
RUHS Medical Officer Recruitment 2026

Hindi News Career RUHS Medical Officer Recruitment 2026 | Rajasthan 600 Posts Job Apply 16 मिनट पहले कॉपी लिंक राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने मेडिकल ऑफिसर के 600 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट ruhsraj.org पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म जमा कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : एमबीबीएस की डिग्री। राजस्थान मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। देवनागरी लिपि में हिंदी और राजस्थान की संस्कृति का नॉलेज होना चाहिए आयु सीमा : न्यूनतम : 22 वर्ष अधिकतम : 45 वर्ष सरकारी नियमों के अनुसार उम्र में छूट दी जाएगी। सैलरी : 15,600 – 39,100 रुपए प्रतिमाह फीस : उम्मीदवारों को 5000 रुपए फीस का भुगतान करना होगा। राज्य के एससी, एसटी वर्ग के लिए यह फीस 2500 रुपए तय की गई है। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम के बेसिस पर ऐसे करें आवेदन : राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की ऑफिशियल वेबसाइट ruhsraj.org पर जाएं। ‘ऑनलाइन आवेदन करें’ लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें। जरूरी डिटेल्स दर्ज करके फॉर्म भरें। मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट लेकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ———————————————————————— ये खबर भी पढ़ें यूपी में ऑफिसर के 1251 पदों पर निकली भर्ती:फीस 25 रुपए, सैलरी 90 हजार से ज्यादा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC), लखनऊ ने पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती निकाली है। यह भर्ती पशुपालन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के तहत की जाएगी। इसमें 1,248 पद सामान्य भर्ती और 3 पद विशेष चयन के लिए हैं। पूरी खबर यहां पढ़े दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran President Pezeshkian UNGA Visit

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान13 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने 24 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNGA के 80वें सत्र को संबोधित किया था। अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे। अमेरिका ने दोनों को वीजा दे दिया है। दोनों नेता अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली 81वीं UNGA की हाई-लेवल बैठक में हिस्सा लेंगे। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका होगा, जब ईरान के शीर्ष नेता अमेरिकी जमीन पर पहुंचेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। इस बार प्रतिनिधिमंडल का आकार पिछले साल की तुलना में छोटा रखा गया है और उस पर कई तरह की पाबंदियां लागू रहेंगी। पजशकियान को अमेरिका गिरफ्तार क्यों नहीं कर सकता? अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, फिर भी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क में UNGA में शामिल हो सकेंगे। इसकी दो बड़ी वजहें हैं। 1. राष्ट्रपति को मिली खास कानूनी सुरक्षा किसी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को दूसरे देश में सामान्य आरोपी की तरह गिरफ्तार करना आसान नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय कानून में राष्ट्राध्यक्षों को अपने पद पर रहते हुए खास कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसका मकसद यह है कि एक देश दूसरे देश के मौजूदा शीर्ष नेताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार न कर सके। इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति पर कभी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। मामला किस अदालत में है, आरोप किस तरह के हैं और संबंधित देश के कानून क्या कहते हैं—इन सब पर स्थिति बदल सकती है। 2. UNGA के लिए अमेरिका की अलग जिम्मेदारी है यह मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच का नहीं है। UN का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और अमेरिका इसका मेजबान देश है। इसलिए दूसरे देशों के प्रतिनिधियों को UN के आधिकारिक कार्यक्रमों में पहुंचने की सुविधा देना अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का हिस्सा है। UN के मुताबिक, अमेरिका को UN में आधिकारिक काम करने वाले प्रतिनिधियों की आवाजाही को इस तरह नहीं रोकना चाहिए कि वे अपने आधिकारिक काम में हिस्सा ही न ले सकें। हालांकि, अमेरिका उनके UN के बाहर निजी या गैर-आधिकारिक घूमने-फिरने पर पाबंदियां लगा सकता है। यही वजह है कि पजशकियान और अराघची को अमेरिका आने की अनुमति दी गई है, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल छोटा रखा जाएगा और उसके सदस्यों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध रहेंगे। यात्रा और खरीदारी पर पाबंदियां रहेंगी अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरानी अधिकारियों की न्यूयॉर्क में आवाजाही सीमित रहेगी। उन्हें केवल कुछ तय स्थानों तक ही जाने की अनुमति होगी। पहले की तरह उनके आने-जाने का दायरा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ईरान के UN मिशन और कुछ निर्धारित इलाकों तक सीमित रखा जा सकता है। इसके अलावा लग्जरी सामान और कुछ अन्य वस्तुओं की खरीदारी पर भी रोक रहेगी। अमेरिका पहले भी ईरानी अधिकारियों पर इसी तरह की पाबंदियां लगाता रहा है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी? UNGA के दौरान दुनिया की नजर इस बात पर भी रहेगी कि क्या न्यूयॉर्क में मौजूद अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच किसी तरह की बातचीत होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल के महीनों में कई बार दावा कर चुके हैं कि उनके प्रशासन और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। ऐसे में पजशकियान और अराघची की न्यूयॉर्क यात्रा को सिर्फ एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संभावित संवाद के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास को वीजा नहीं मिला ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने का फैसला उस समय आया है, जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को UNGA में शामिल होने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) से जुड़े कई अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। लगातार दूसरे साल अब्बास को न्यूयॉर्क आने की अनुमति नहीं मिली है। पिछले साल की तरह इस बार भी उन्हें वीडियो लिंक के जरिए महासभा को संबोधित करने की अनुमति दी गई है। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला फिलिस्तीनी नेतृत्व की कुछ नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इजराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से जुड़े कदमों के कारण लिया गया है। वहीं फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे राजनीतिक समाधान और शांति प्रयास कमजोर होंगे। UNGA में युद्ध, तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा होगी इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया एक साथ कई बड़े संकटों का सामना कर रही है। अमेरिका-ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर पहले ही तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ चुका है। ऐसे में पजशकियान की न्यूयॉर्क मौजूदगी और अमेरिकी अधिकारियों के साथ संभावित संपर्क पर दुनिया भर की नजर रहेगी। UNGA के मंच पर होने वाली हर मुलाकात और हर बयान को इस बार युद्ध और कूटनीति, दोनों के नजरिए से देखा जाएगा। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सऊदी को F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका: ट्रम्प की ₹2.3 लाख करोड़ की डील को मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran President Pezeshkian UNGA Visit

वॉशिंगटन डीसी2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे। अमेरिका ने दोनों को वीजा दे दिया है। दोनों नेता अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली 81वीं UNGA की हाई-लेवल बैठक में हिस्सा लेंगे। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका होगा, जब ईरान के शीर्ष नेता अमेरिकी जमीन पर पहुंचेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। इस बार प्रतिनिधिमंडल का आकार पिछले साल की तुलना में छोटा रखा गया है और उस पर कई तरह की पाबंदियां लागू रहेंगी। मेजबान देश होने के कारण अमेरिका को देनी पड़ी मंजूरी अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से सैन्य टकराव जारी है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के तौर पर अमेरिका पर कुछ अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां भी लागू होती हैं। 1947 के UN मुख्यालय समझौते के तहत अमेरिका को आम तौर पर संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को प्रवेश की अनुमति देनी होती है। इसी व्यवस्था के तहत ईरानी नेताओं को भी वीजा दिया गया है। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को सामान्य राजनयिक यात्राओं जैसी छूट नहीं मिलेगी। यात्रा और खरीदारी पर पाबंदियां रहेंगी अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरानी अधिकारियों की न्यूयॉर्क में आवाजाही सीमित रहेगी। उन्हें केवल कुछ तय स्थानों तक ही जाने की अनुमति होगी। पहले की तरह उनके आने-जाने का दायरा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ईरान के UN मिशन और कुछ निर्धारित इलाकों तक सीमित रखा जा सकता है। इसके अलावा लग्जरी सामान और कुछ अन्य वस्तुओं की खरीदारी पर भी रोक रहेगी। अमेरिका पहले भी ईरानी अधिकारियों पर इसी तरह की पाबंदियां लगाता रहा है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी? UNGA के दौरान दुनिया की नजर इस बात पर भी रहेगी कि क्या न्यूयॉर्क में मौजूद अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच किसी तरह की बातचीत होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल के महीनों में कई बार दावा कर चुके हैं कि उनके प्रशासन और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। ऐसे में पजशकियान और अराघची की न्यूयॉर्क यात्रा को सिर्फ एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संभावित संवाद के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास को वीजा नहीं मिला ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने का फैसला उस समय आया है, जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को UNGA में शामिल होने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) से जुड़े कई अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। लगातार दूसरे साल अब्बास को न्यूयॉर्क आने की अनुमति नहीं मिली है। पिछले साल की तरह इस बार भी उन्हें वीडियो लिंक के जरिए महासभा को संबोधित करने की अनुमति दी गई है। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला फिलिस्तीनी नेतृत्व की कुछ नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इजराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से जुड़े कदमों के कारण लिया गया है। वहीं फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे राजनीतिक समाधान और शांति प्रयास कमजोर होंगे। UNGA में युद्ध, तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा होगी इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया एक साथ कई बड़े संकटों का सामना कर रही है। अमेरिका-ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर पहले ही तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ चुका है। ऐसे में पजशकियान की न्यूयॉर्क मौजूदगी और अमेरिकी अधिकारियों के साथ संभावित संपर्क पर दुनिया भर की नजर रहेगी। UNGA के मंच पर होने वाली हर मुलाकात और हर बयान को इस बार युद्ध और कूटनीति, दोनों के नजरिए से देखा जाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
मूवी रिव्यू-'वाइब':कुणाल खेमू की फिल्म पहले हंसाती है, लेकिन इंटरवल के बाद समझना मुश्किल हो जाता है- क्या हो रहा है?

रेटिंग: 2/5 अवधि: 2 घंटे 25 मिनट शैली: कॉमेडी निर्देशक: कुणाल खेमू मुख्य कलाकार: कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव, प्रीति जिंटा, वंशिका धीर, यशपाल शर्मा, दिनेश लाल यादव रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026 कुणाल खेमू की फिल्म ‘वाइब’ शुरू होते ही पुरानी याद ताजा करती है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’ में तीन दोस्तों की जिंदगी में बवाल था, यहां दो दोस्त हैं और बवाल सीधा देश की सुरक्षा तक पहुंच गया है। हार्दिक और बग्स की जोड़ी शुरू में कमाल लगती है। दोनों की केमिस्ट्री, कुणाल का टाइमिंग वाला ह्यूमर और कुछ मजेदार संवाद फिल्म को अच्छी रफ्तार देते हैं। पहला हाफ देखकर लगता हैचलो भाई, कुणाल फिर फॉर्म में हैं। फिर इंटरवल होता है और फिल्म अपना ट्रैक बदल देती है। फिल्म की कहानी कैसी है हार्दिक यानी कुणाल खेमू नशे की लत से बाहर निकलकर जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उसका दोस्त बग्स यानी स्पर्श श्रीवास्तव उसे अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी दिला देता है। लेकिन हार्दिक का ध्यान नौकरी से ज्यादा नई इंटर्न करीना यानी वंशिका धीर पर है। दोनों के बीच बात आगे बढ़ती है और फिर एक ऐसा मामला सामने आता है, जिसकी वजह से हार्दिक और बग्स की एंट्री हो जाती है मैडम एच यानी प्रीति जिंटा की दुनिया में। अब ये दोनों पहुंच जाते हैं एक ऐसे मिशन में, जिसके लिए शायद इनसे ज्यादा गलत लोगों को चुनना मुश्किल था। यहीं तक फिल्म काफी मजेदार है। इसके बाद कहानी में गैंगस्टर, आतंकवाद, एआई, सॉफ्टवेयर अटैक, बड़ी साजिश और सुपर-स्ट्रेंथ वाला सीरम तक आ जाता है। मतलब दो दोस्तों की कॉमेडी से शुरू हुई फिल्म अचानक बोलती है,भाई, अब देश बचाना है। फिल्म में एक्टिंग कैसी है कुणाल खेमू हार्दिक के रोल में शानदार काम किया है। वह बेवकूफ दिखते हुए भी प्यारे लगते हैं और उनकी बॉडी लैंग्वेज कई बार खुद ही हंसा देती है। हालांकि परेशानी यह है कि उनका यह अंदाज अब थोड़ा जाना-पहचाना लगता है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’, ‘लूटकेस’ और ‘गो गोवा गॉन’ के बाद इस बार वही मजाकिया कुणाल कुछ नया कम देते हैं। स्पर्श श्रीवास्तव सबसे बड़ा सरप्राइज हैं। बग्स के रोल में उनकी घबराहट और चेहरे के एक्सप्रेशन कई बार कुणाल से भी ज्यादा हंसा देते हैं। प्रीति जिंटा की मैडम एच स्टाइलिश है और उनका एक्शन सीन फिल्म के मजेदार हिस्सों में आता है। वंशिका धीर खूबसूरत दिखती हैं, लेकिन उनके रोल में करने को ज्यादा कुछ नहीं है। यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव ठीक हैं, जबकि शर्मिला टैगोर का छोटा-सा कैमियो अच्छा लगता है। फिल्म का निर्देशन कैसा है कुणाल खेमू को कॉमेडी की समझ है। दिक्कत यह है कि उन्हें अपनी फिल्म पर थोड़ा और भरोसा करना चाहिए था। पहले हाफ में हार्दिक और बग्स ही काफी हैं। उनकी छोटी-छोटी बेवकूफियां ही फिल्म चला रही हैं। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म परत-दर-परत चीजें जोड़ती जाती है। एक गैंगस्टर चाहिए। डाल दो। एआई चाहिए। डाल दो। सॉफ्टवेयर अटैक चाहिए। डाल दो। सीरम चाहिए। वो भी डाल दो। नतीजा कहानी आगे कम बढ़ती है, सामान ज्यादा बढ़ता जाता है। फिल्म का सबसे बड़ा मजा वहीं था जहां वह खुद को ज्यादा गंभीर नहीं ले रही थी। काश, कुणाल ने उसी रास्ते पर फिल्म को आखिर तक चलाया होता। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैसा है फिल्म दिखने में अच्छी है। लोकेशन अच्छी हैं, कैमरा वर्क बढ़िया है और एक्शन सीक्वेंस में पैसा साफ दिखाई देता है। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म की रफ्तार गिर जाती है। कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कहानी कई जगह खिंचती हुई महसूस होती है। फिल्म में कमियां क्या हैं सबसे बड़ी कमी है ओवरडोज। फिल्म में कॉमेडी चाहिए थी, लेकिन बाद में एक्शन भी चाहिए, थ्रिल भी चाहिए, बड़ा विलेन भी चाहिए और देश बचाने वाला ड्रामा भी चाहिए। सब कुछ चाहिए और जब फिल्म सब कुछ देने लगती है, तो जो सबसे अच्छा था हार्दिक और बग्स की कॉमेडी वही पीछे छूट जाती है। रोमांस भी थोड़ा लंबा है और क्लाइमेक्स तक आते-आते फिल्म जरूरत से ज्यादा ओवर-द-टॉप हो जाती है और कुणाल का शर्ट उतारकर मसल्स दिखाने वाला सीन। भाई, ये कॉमेडी फिल्म है या अचानक फिटनेस विज्ञापन? फिल्म का म्यूजिक कैसा है म्यूजिक ठीक है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं जो फिल्म खत्म होने के बाद साथ बाहर आए। कुछ गाने अच्छे लगते हैं, लेकिन कुछ जगह ये कहानी की रफ्तार को और धीमा करते हैं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘वाइब’ का पहला हाफ बताता है कि कुणाल खेमू एक और शानदार कॉमेडी दे सकते थे। दूसरा हाफ बताता है कि उन्होंने खुद ही फिल्म को ज्यादा बड़ा बनाने के चक्कर में मामला बिगाड़ दिया। कुणाल और स्पर्श की जोड़ी फिल्म की जान है। कुछ संवाद और सीन्स सच में मजेदार हैं। बस दिक्कत यही है कि फिल्म को जितना कम दिखाना चाहिए था, उससे ज्यादा दिखा दिया गया। शुरुआत में वाइब सेट होती है, इंटरवल के बाद फिल्म खुद ही उसे बिगाड़ देती है।
लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट:एक-दूसरे को घूंसे मारे, एक की टी-शर्ट फटी; यात्रियों ने छुड़ाया

लंदन से ढाका जा रही बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच बहस के बाद मारपीट हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को घूंसे मारे। इस दौरान एक यात्री की टी-शर्ट फट गई। आसपास के यात्रियों और केबिन क्रू ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में दोनों यात्री पहले बहस करते नजर आते हैं। कुछ ही देर बाद दोनों हाथापाई पर उतर आते हैं। झगड़े के दौरान आसपास बैठे यात्रियों में घबराहट फैल गई। फ्लाइट में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। मारपीट बढ़ने पर कुछ यात्री और केबिन क्रू के सदस्य दोनों के बीच पहुंच गए। उन्होंने दोनों को अलग कर स्थिति संभाली। वीडियो में भी यात्रियों को झगड़ा रोकने की कोशिश करते देखा जा सकता है। घटना का पूरा वीडियो… एयरलाइन को घटना की जानकारी नहीं थी बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस के जनरल मैनेजर (पब्लिक रिलेशंस) महबूबुद्दीन अहमद ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “मुझे अभी इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इसकी जानकारी ले रहा हूं।” एयरलाइन ने अभी विवाद की वजह और दोनों यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी नहीं दी है। खबर अपडेट हो रही है…
लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट:एक-दूसरे को घूंसे मारे, एक की टी-शर्ट फटी; यात्रियों ने छुड़ाया

लंदन से ढाका जा रही बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच बहस के बाद मारपीट हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को घूंसे मारे। इस दौरान एक यात्री की टी-शर्ट फट गई। आसपास के यात्रियों और केबिन क्रू ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में दोनों यात्री पहले बहस करते नजर आते हैं। कुछ ही देर बाद दोनों हाथापाई पर उतर आते हैं। झगड़े के दौरान आसपास बैठे यात्रियों में घबराहट फैल गई। फ्लाइट में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। मारपीट बढ़ने पर कुछ यात्री और केबिन क्रू के सदस्य दोनों के बीच पहुंच गए। उन्होंने दोनों को अलग कर स्थिति संभाली। वीडियो में भी यात्रियों को झगड़ा रोकने की कोशिश करते देखा जा सकता है। एयरलाइन को घटना की जानकारी नहीं थी बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस के जनरल मैनेजर (पब्लिक रिलेशंस) महबूबुद्दीन अहमद ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “मुझे अभी इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इसकी जानकारी ले रहा हूं।” एयरलाइन ने अभी विवाद की वजह और दोनों यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी नहीं दी है।
मूवी रिव्यू – 'दायरा':पृथ्वीराज का गुस्सा, करीना का सवाल और चार लाशों का राज… कहानी में मसाला खूब, लेकिन यहां कमजोर है मूवी

रेटिंग: 2.5/5 अवधि: 2 घंटे 23 मिनट शैली: क्राइम थ्रिलर / इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा निर्देशक: मेघना गुलजार मुख्य कलाकार: करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, क्षिती जोग, कनवलजीत सिंह, जितेंद्र जोशी रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026 कुछ फिल्में आपको कुर्सी पर इसलिए बैठाए रखती हैं क्योंकि आपको जानना होता है कि आगे क्या होगा। ‘दायरा’ शुरुआत में बिल्कुल यही काम करती है। एक लड़की की निर्मम हत्या, पुलिस का तेजी से आरोपियों तक पहुंचना, फिर उनका एनकाउंटर और उसके बाद उठता बड़ा सवाल क्या यह सच में न्याय था या कानून को किनारे रखकर किया गया फैसला? मेघना गुलजार की यह फिल्म 2019 के हैदराबाद रेप-मर्डर केस और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर से प्रेरित है। फिल्म ने वास्तविक घटना को हूबहू दोहराने के बजाय काल्पनिक नामों और परिस्थितियों के साथ अपनी कहानी गढ़ी है और यहीं से फिल्म दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि यह आपको किसी एक पक्ष की तरफ आराम से बैठने नहीं देती। लेकिन दिक्कत यह है कि जिस फिल्म की शुरुआत इतनी मजबूत हो, उससे अंत भी उतना ही दमदार चाहिए। ‘दायरा’ में शुरुआत और पहला हिस्सा जितना पकड़ता है, दूसरा हिस्सा उतना ही धीरे-धीरे हाथ से निकलता जाता है। फिल्म की कहानी कहानी शुरू होती है रागिनी (प्रगति मिश्रा) से, जो एक रात हाईवे के पास मुसीबत में फंस जाती है। इसके बाद वह गायब हो जाती है और अगले दिन उसका जला हुआ शव मिलता है। रागिनी की मां पार्वती (क्षिती जोग) और भाई कबीर (भावेश बब्बानी) पुलिस से मदद मांगते हैं, लेकिन शुरुआती स्तर पर सिस्टम जिस तरह से मामले को लेता है, वही आगे की पूरी कहानी की नींव रख देता है। मामला मीडिया में उछलता है और जांच की जिम्मेदारी डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) को मिलती है। रमन अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को पकड़ लेता है, लेकिन अदालत तक मामला पहुंचने से पहले ही चारों एक पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने भागने और हमला करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए। बस, यहीं से असली फिल्म शुरू होती है। एक तरफ जनता रमन को हीरो मान रही है। दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है क्या यह एनकाउंटर सच में हुआ था या सब कुछ पहले से तय था? मामले की जांच के लिए डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनाई जाती है। अजूनी का काम सिर्फ एनकाउंटर की जांच करना नहीं है, बल्कि उस पूरी कड़ी को जोड़ना है जो रागिनी के गायब होने से शुरू हुई थी। और फिर फिल्म रमन बनाम अजूनी नहीं, बल्कि तेज न्याय बनाम सही न्याय की बहस बन जाती है। फिल्म में एक्टिंग पृथ्वीराज सुकुमारन रमन कुमार के किरदार में पृथ्वीराज फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक हैं। उनके किरदार में पुलिस अधिकारी का रौब है, लेकिन उसके पीछे एक ऐसा आदमी भी है जो अपने फैसलों को सही मानता है। पृथ्वीराज का अभिनय ज्यादा शोर नहीं करता। खासकर उनकी आंखों और संवाद बोलने के अंदाज में काफी वजन है। वह रमन को पूरी तरह विलेन बनने से रोकते हैं और यही फिल्म के लिए जरूरी भी था। करीना कपूर खान करीना की अजूनी चमक-दमक वाली पुलिस अफसर नहीं है। वह ज्यादा शांत, व्यवस्थित और दिमाग से काम करने वाली अधिकारी है। करीना यहां ओवर-द-टॉप अभिनय नहीं करतीं और यही उनके पक्ष में जाता है। वह सवाल पूछती हैं, लोगों को पढ़ती हैं और छोटी-छोटी विसंगतियों को पकड़ती हैं। हालांकि, किरदार में जितनी संभावनाएं थीं, फिल्म उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती। क्षिती जोग रागिनी की मां पार्वती के रूप में क्षिती जोग कई जगह पूरी फिल्म पर भारी पड़ती हैं। उनका दुख चीखने-चिल्लाने से ज्यादा उनकी खामोशी में दिखाई देता है। फिल्म के सबसे मानवीय और भावुक हिस्से उन्हीं से जुड़े हैं। बाकी कलाकार भी अपने-अपने हिस्से को संभालते हैं और फिल्म को विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं। फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार को पता है कि क्राइम स्टोरी को सिर्फ अपराध की कहानी बनाकर नहीं छोड़ना है। ‘तलवार’ की तरह यहां भी वह दर्शक को जांच की प्रक्रिया के भीतर ले जाने की कोशिश करती हैं। फिल्म का पहला हिस्सा काफी प्रभावी है। घटनाओं को धीरे-धीरे खोलने का तरीका अच्छा है और दर्शक लगातार सोचता रहता है कि आखिर सच क्या है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म का टेम्पो थोड़ा गिरता है। कुछ जगहों पर कहानी जरूरत से ज्यादा समझाने लगती है और वही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। फिल्म की स्टोरीलाइन विचार बेहद मजबूत है। फिल्म का असली सवाल यह नहीं है कि रमन सही है या अजूनी। सवाल यह है कि अगर सिस्टम धीमा है तो क्या पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है? और अगर किसी अपराधी को अदालत तक पहुंचने से पहले मार दिया जाए, तो क्या वह न्याय कहलाएगा? फिल्म इन सवालों को उठाती जरूर है, लेकिन कई जगह उन पर और गहराई से उतरने की जरूरत महसूस होती है। फिल्म का स्क्रीनप्ले स्क्रीनप्ले की शुरुआत काफी चुस्त है। घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं और रहस्य धीरे-धीरे खुलता है, लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ चीजें खिंचती हुई लगती हैं। कई जगह कहानी की गति कम हो जाती है और दर्शक को लगता है कि फिल्म उसी बात को थोड़ा अलग तरीके से फिर समझा रही है। सबसे बड़ी समस्या क्लाइमैक्स है। इतने सवाल खड़े करने के बाद फिल्म जिस तरह खत्म होती है, वह दर्शक को संतुष्ट करने के बजाय थोड़ा अधूरा छोड़ देती है। ऐसा लगता है जैसे फिल्म ने पटाखे दिखाए बहुत, लेकिन फुलझड़ी जलाकर घर चली गई। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैमरा वर्क फिल्म के मूड को अच्छी तरह सपोर्ट करता है। बंद फ्रेम और क्लोज-अप्स किरदारों के तनाव को बढ़ाते हैं। एडिटिंग पहले हिस्से में काफी प्रभावी है, हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी और चुस्त हो सकती थी। फिल्म की कमियां सबसे बड़ी कमी है इसका कमजोर दूसरा हिस्सा। दूसरी बड़ी परेशानी है कि फिल्म जिस शानदार सवाल से शुरुआत करती है, उसका जवाब देने की कोशिश में कुछ जगह बहुत ज्यादा समझाने लगती है। और फिर आता है क्लाइमैक्स। इतनी गंभीर









