Tuesday, 03 Nov 2026 | 05:05 PM

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बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी डिफेंस इंडस्ट्री का दायरा बढ़ा रहा है। बांग्लादेश और तुर्किये अब मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी में हैं। दोनों देशों की साझेदारी से बोगुरा में ड्रोन फैक्ट्री बनाई जाएगी। इस ड्रोन फैक्ट्री की लागत 25 हजार करोड़ रुपए है। तुर्किये बांग्लादेश को ड्रोन बनाने की तकनीक भी देगा। बोगुरा भारत की सीमा से करीब 75 किमी दूर है। फैक्ट्री के पास एयरफोर्स का नया एयरबेस भी बनेगा बोगुरा बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में है। यहां जिस इलाके में फैक्ट्री की योजना है, उसके पास ही बांग्लादेश एयरफोर्स का नया एयरबेस विकसित किया जा रहा है। बोगुरा एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक अपग्रेड करने की योजना है। भारत के लिहाज से इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि बांग्लादेश की करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा भारत से लगती है। भास्कर एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी, आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक के मुताबिक, भारत की सबसे लंबी लगभग चार हजार किमी लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। ये भारत के किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी बॉर्डर है। साथ ही ये दुनिया में किन्हीं भी दो देशों के बीच की 5वीं सबसे लंबी भू-सीमा मानी जाती है। भारत के नजरिये से देखें तो बांग्लादेश के तुर्किये से डिफेंस गठजोड़ से पूर्वोत्तर के राज्यों में खतरा बढ़ेगा। बांग्लादेश का भारत से लगती सीमा पर ड्रोन की तैनाती का प्लान भी है। बांग्लादेश सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान वाले मक्का रक्षा करार में भी एंट्री चाहता है। पाक इसमें मध्यस्थ के रोल में है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया तुर्किये की पहचान दुनिया में उसके सैन्य ड्रोन कार्यक्रम से बनी है। इनमें बायरक्तार TB2 प्रमुख है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया है। बांग्लादेश के साथ भी ड्रोन सहयोग पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रक्षा रिश्तों का अहम हिस्सा बना है। द डिप्लोमैट ने जून 2026 में रिपोर्ट किया था कि दोनों देशों के बीच सहयोग का केंद्र ड्रोन हैं और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर भी चर्चा चल रही है। बांग्लादेश पहले से तुर्किये के बनाए सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इनमें ओटोकर के COBRA सीरीज के बख्तरबंद वाहन भी शामिल हैं। ओटोकर के मुताबिक COBRA II का इस्तेमाल दुनिया के 20 से ज्यादा देशों की सेनाएं करती हैं। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी पाकिस्तान में भी है तुर्किये और पाकिस्तान के बीच भी ड्रोन और रक्षा तकनीक पर सहयोग लगातार बढ़ा है। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी बायकर पाकिस्तान में पहले से मौजूद है। 2023 में बायकर की पाकिस्तानी सहायक कंपनी ने नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क (NASTP) में रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों के लिए समझौता किया था। पाकिस्तान और तुर्किये ने एयरोस्पेस, ड्रोन और रक्षा उत्पादन में संयुक्त उपक्रम और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर भी बातचीत की है। बांग्लादेश में तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बनें बांग्लादेश में 6 महीने के दौरान तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बन गए हैं। कट्टरपंथी छात्र शिबिर और जमात-ए-इस्लामी के साथ चल रहे इन सेंटरों में भारत विरोधी एजेंडे पर जोर दिया जा रहा है। ढाका में यूनुस एम्रे इंस्टीट्यूट और एक समर्पित तुर्की कल्चरल सेंटर स्थापित करने की तैयारी चल रही है। तुर्किये की सरकार की ‘तुर्किये स्कॉलरशिप्स’ प्रोग्राम में इस साल बांग्लादेश के 3 हजार छात्रों को तुर्किये में उच्च शिक्षा के लिए भेजा जा चुका है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सऊदी को F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका: ट्रम्प की ₹2.3 लाख करोड़ की डील को मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी डिफेंस इंडस्ट्री का दायरा बढ़ा रहा है। बांग्लादेश और तुर्किये अब मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी में हैं। दोनों देशों की साझेदारी से बोगुरा में ड्रोन फैक्ट्री बनाई जाएगी। इस ड्रोन फैक्ट्री की लागत 25 हजार करोड़ रुपए है। तुर्किये बांग्लादेश को ड्रोन बनाने की तकनीक भी देगा। बोगुरा भारत की सीमा से करीब 75 किमी दूर है। बोगुरा इतना अहम क्यों है? बोगुरा बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में है। यहां जिस इलाके में फैक्ट्री की योजना है, उसके पास ही बांग्लादेश एयरफोर्स का नया एयरबेस विकसित किया जा रहा है। बोगुरा एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक अपग्रेड करने की योजना है। भारत के लिहाज से इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि बांग्लादेश की करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा भारत से लगती है। बोगुरा भारत-बांग्लादेश सीमा से करीब 75 किमी दूर बताया जा रहा है। भास्कर एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी, आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक के मुताबिक, भारत की सबसे लंबी लगभग चार हजार किमी लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। ये भारत के किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी बॉर्डर है। साथ ही ये दुनिया में किन्हीं भी दो देशों के बीच की 5वीं सबसे लंबी भू-सीमा मानी जाती है। बोगुरा ड्रोन यूनिट भारत के बॉर्डर से मात्र 75 किमी की दूरी पर है। भारत के नजरिये से देखें तो बांग्लादेश के तुर्किये से डिफेंस गठजोड़ से पूर्वोत्तर के राज्यों में खतरा बढ़ेगा। बांग्लादेश का भारत से लगती सीमा पर ड्रोन की तैनाती का प्लान भी है। बांग्लादेश सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान वाले मक्का रक्षा करार में भी एंट्री चाहता है। पाक इसमें मध्यस्थ के रोल में है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया तुर्किये की पहचान दुनिया में उसके सैन्य ड्रोन कार्यक्रम से बनी है। इनमें बायरक्तार TB2 प्रमुख है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया है। बांग्लादेश के साथ भी ड्रोन सहयोग पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रक्षा रिश्तों का अहम हिस्सा बना है। द डिप्लोमैट ने जून 2026 में रिपोर्ट किया था कि दोनों देशों के बीच सहयोग का केंद्र ड्रोन हैं और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर भी चर्चा चल रही है। बांग्लादेश पहले से तुर्किये के बनाए सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इनमें ओटोकर के COBRA सीरीज के बख्तरबंद वाहन भी शामिल हैं। ओटोकर के मुताबिक COBRA II का इस्तेमाल दुनिया के 20 से ज्यादा देशों की सेनाएं करती हैं। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी पाकिस्तान में भी है तुर्किये और पाकिस्तान के बीच भी ड्रोन और रक्षा तकनीक पर सहयोग लगातार बढ़ा है। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी बायकर पाकिस्तान में पहले से मौजूद है। 2023 में बायकर की पाकिस्तानी सहायक कंपनी ने नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क (NASTP) में रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों के लिए समझौता किया था। पाकिस्तान और तुर्किये ने एयरोस्पेस, ड्रोन और रक्षा उत्पादन में संयुक्त उपक्रम और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर भी बातचीत की है। बांग्लादेश में तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बनें बांग्लादेश में 6 महीने के दौरान तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बन गए हैं। कट्टरपंथी छात्र शिबिर और जमात-ए-इस्लामी के साथ चल रहे इन सेंटरों में भारत विरोधी एजेंडे पर जोर दिया जा रहा है। ढाका में यूनुस एसे इंस्टीट्यूट और एक समर्पित तुर्की कल्चरल सेंटर स्थापित करने की तैयारी चल रही है। तुर्किये की सरकार की ‘तुर्किये स्कॉलरशिप्स’ प्रोग्राम में इस साल बांग्लादेश के 3 हजार छात्रों को तुर्किये में उच्च शिक्षा के लिए भेजा जा चुका है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सऊदी को F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका: ट्रम्प की ₹2.3 लाख करोड़ की डील को मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Lalit Modi Biopic | Sajid Nadiadwala To Produce IPL Founder Film

Lalit Modi Biopic | Sajid Nadiadwala To Produce IPL Founder Film

4 घंटे पहले कॉपी लिंक इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के संस्थापक ललित मोदी की जिंदगी पर फिल्म बनने जा रही है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बायोपिक को साजिद नाडियाडवाला अपने बैनर नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के तहत प्रोड्यूस करेंगे। फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने का काम पूर्व टीवी एग्जीक्यूटिव और प्रोड्यूसर स्नेहा रजनी कर रही हैं। यह फिल्म ललित मोदी के शुरुआती जीवन, IPL की शुरुआत, उनकी सफलता और बाद में जुड़े विवादों पर आधारित होगी। कुछ समय पहले रणवीर सिंह ने ललित का रोल निभाने में दिलचस्पी दिखाई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में ललित मोदी ने भी पुष्टि की थी कि रणवीर उनका रोल निभाना चाहते हैं। ललित करीब 16 साल से लंदन में रह रहे हैं। एएनआई को दिए इंटरव्यू में ललित मोदी ने कहा था की रणवीर उनका रोल निभाना चाहते हैं। रणवीर सिंह ने लंदन जाकर की थी मुलाकात मेकर्स इस बायोपिक में ललित मोदी की सिर्फ हेडलाइंस और विवादों पर ध्यान देने के बजाय उनके निजी जीवन और करियर के अलग-अलग पहलुओं को दिखाना चाहते हैं। फिल्म की राइटिंग और डेवलपमेंट का काम अभी जारी है। एएनआई से बातचीत में ललित मोदी ने बताया था कि स्नेहा रजनी की अगुआई में एक टीम उनके दर्जनों इंटरव्यू ले चुकी है। इस बायोपिक को साजिद नाडियाडवाला अपने बैनर नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के तहत प्रोड्यूस करेंगे। उन्होंने यह भी खुलासा किया था कि कुछ साल पहले एक्टर रणवीर सिंह उनसे मिलने लंदन पहुंचे थे और उन्होंने बायोपिक में ललित मोदी का किरदार निभाने की इच्छा जताई थी। हालांकि, स्टार कास्ट और डायरेक्टर को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ललित मोदी ने दावा किया था की कुछ साल पहले एक्टर रणवीर सिंह उनसे मिलने लंदन पहुंचे थे 2008 में IPL की शुरुआत, कोच्चि फ्रेंचाइजी विवाद ललित मोदी का नाम भारतीय क्रिकेट, बिजनेस और एंटरटेनमेंट को एक साथ लाने के लिए जाना जाता है। साल 2008 में उन्होंने बीसीसीआई (BCCI) के उपाध्यक्ष रहते हुए फ्रेंचाइजी आधारित टी20 क्रिकेट लीग ‘IPL’ का कॉन्सेप्ट पेश किया था। वे इसके पहले चेयरमैन और कमिश्नर बने। देखते ही देखते IPL दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीग में शामिल हो गया। हालांकि, 2010 में कोच्चि टस्कर्स केरल फ्रेंचाइजी की शेयरहोल्डिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर सुनंदा पुष्कर के ‘स्वेट इक्विटी’ शेयर्स का खुलासा कर दिया था, जिसके बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इंडिया में IPL कैसे लाए ललित मोदी दिल्ली की बड़ी बिजनेसमैन फैमिली में जन्मे ललित मोदी ने US से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद भारत लौट आए। यहां देखा कि लोगों में क्रिकेट के प्रति बड़ी दीवानगी है। अमेरिका के खेलों से इंस्पिरेशन लेते हुए ललित ने भारत में IPL शुरू कराने के बारे में सोचा। हिमाचल, राजस्थान और पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के मेंबर बनाने के बाद BCCI के साथ मिलकर ललित ने IPL के प्लान पर काम करना शुरू किया। IPL कॉन्ट्रोवर्सी में घिरे ललित, BCCI ने 22 आरोप लगाए थे IPL की शुरुआत करते हुए ललित मोदी ने अपने परिवार के कई सदस्यों को IPL में हिस्सेदारी दिलाई थी। 2008 में IPL के आते ही यह लीग सुपरहिट हो गई और इसके लिए ललित ने खूब तारीफें लूटीं। IPL से खिलाड़ियों और BCCI को भी फायदा होने लगा। कुछ समय बाद IPL और ललित के निजी स्वार्थ की जानकारी सबके सामने आने लगी और उन्हें 2010 के IPL फाइनल के बाद BCCI के वाइस प्रेसिडेंट पद से हटा दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक BCCI ने ललित मोदी पर 22 आरोप लगाए, जिनमें अपने परिवार को कॉन्ट्रैक्ट देना, IPL की ब्रॉडकास्टिंग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना, नीलामी में धांधली करना जैसे कई आरोप शामिल रहे। ED की जांच, विदेश जाना और ‘ललितगेट’ विवाद साल 2010 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2009 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित IPL के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघनों की जांच शुरू की। ईडी के समन जारी होने के बीच ललित मोदी भारत छोड़कर लंदन चले गए। इसके बाद उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी हुआ। साल 2015 में यह मामला उस समय एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया, जब लीक हुए दस्तावेजों से पता चला कि तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पासपोर्ट रद्द होने के बावजूद ललित मोदी को यूके के ट्रैवल डॉक्युमेंट्स दिलाने में मदद की थी। इस पूरे घटनाक्रम को मीडिया में ‘ललितगेट’ नाम दिया गया था। उम्र में 9 साल बड़ी मीनल के साथ ललित मोदी ने 1991 में शादी कर ली। मां की सहेली से की शादी ललित को विदेश में पढ़ाई के दौरान उनकी मां की सहेली मीनल से प्यार हो गया था। मीनल उम्र में ललित से 9 साल बड़ी थीं, इसके बावजूद मोदी और मीनल के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। मीनल की शादी नाइजीरिया के बिजनेसमैन जैक सागरानी से हो रही थी। उससे ठीक पहले ललित ने मीनल से प्यार का इजहार कर दिया, जिससे मीनल गुस्सा हो गईं। उन्होंने चार साल तक मोदी से बातचीत बंद कर दी। ये खबर भी पढ़ें ‘मैं सुष्मिता सेन का केप्ट बॉयफ्रेंड था’:एक्ट्रेस पर लगे ‘गोल्ड डिगर’ टैग पर ललित मोदी बोले- हर जगह वही पेमेंट करती थीं बिजनेसमैन और पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी ने हाल ही में अपनी पूर्व पार्टनर सुष्मिता सेन को स्पेशल बताया। साथ ही उन्होंने एक्ट्रेस पर लगे ‘गोल्ड डिगर’ (पैसे के लिए रिश्ता रखने वाली) के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एक्ट्रेस हर चीज की पेमेंट करती थीं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Lalit Modi Biopic | Sajid Nadiadwala To Produce IPL Founder Film

Lalit Modi Biopic | Sajid Nadiadwala To Produce IPL Founder Film

30 मिनट पहले कॉपी लिंक इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के संस्थापक ललित मोदी की जिंदगी पर फिल्म बनने जा रही है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बायोपिक को साजिद नाडियाडवाला अपने बैनर नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के तहत प्रोड्यूस करेंगे। फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने का काम पूर्व टीवी एग्जीक्यूटिव और प्रोड्यूसर स्नेहा रजनी कर रही हैं। यह फिल्म ललित मोदी के शुरुआती जीवन, IPL की शुरुआत, उनकी सफलता और बाद में जुड़े विवादों पर आधारित होगी। कुछ समय पहले रणवीर सिंह ने ललित का रोल निभाने में दिलचस्पी दिखाई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में ललित मोदी ने भी पुष्टि की थी कि रणवीर उनका रोल निभाना चाहते हैं। ललित करीब 16 साल से लंदन में रह रहे हैं। एएनआई को दिए इंटरव्यू में ललित मोदी ने कहा था की रणवीर उनका रोल निभाना चाहते हैं। रणवीर सिंह ने लंदन जाकर की थी मुलाकात मेकर्स इस बायोपिक में ललित मोदी की सिर्फ हेडलाइंस और विवादों पर ध्यान देने के बजाय उनके निजी जीवन और करियर के अलग-अलग पहलुओं को दिखाना चाहते हैं। फिल्म की राइटिंग और डेवलपमेंट का काम अभी जारी है। एएनआई से बातचीत में ललित मोदी ने बताया था कि स्नेहा रजनी की अगुआई में एक टीम उनके दर्जनों इंटरव्यू ले चुकी है। इस बायोपिक को साजिद नाडियाडवाला अपने बैनर नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के तहत प्रोड्यूस करेंगे। उन्होंने यह भी खुलासा किया था कि कुछ साल पहले एक्टर रणवीर सिंह उनसे मिलने लंदन पहुंचे थे और उन्होंने बायोपिक में ललित मोदी का किरदार निभाने की इच्छा जताई थी। हालांकि, स्टार कास्ट और डायरेक्टर को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ललित मोदी ने दावा किया था की कुछ साल पहले एक्टर रणवीर सिंह उनसे मिलने लंदन पहुंचे थे 2008 में IPL की शुरुआत, कोच्चि फ्रेंचाइजी विवाद ललित मोदी का नाम भारतीय क्रिकेट, बिजनेस और एंटरटेनमेंट को एक साथ लाने के लिए जाना जाता है। साल 2008 में उन्होंने बीसीसीआई (BCCI) के उपाध्यक्ष रहते हुए फ्रेंचाइजी आधारित टी20 क्रिकेट लीग ‘IPL’ का कॉन्सेप्ट पेश किया था। वे इसके पहले चेयरमैन और कमिश्नर बने। देखते ही देखते IPL दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीग में शामिल हो गया। हालांकि, 2010 में कोच्चि टस्कर्स केरल फ्रेंचाइजी की शेयरहोल्डिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर सुनंदा पुष्कर के ‘स्वेट इक्विटी’ शेयर्स का खुलासा कर दिया था, जिसके बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इंडिया में IPL कैसे लाए ललित मोदी दिल्ली की बड़ी बिजनेसमैन फैमिली में जन्मे ललित मोदी ने US से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद भारत लौट आए। यहां देखा कि लोगों में क्रिकेट के प्रति बड़ी दीवानगी है। अमेरिका के खेलों से इंस्पिरेशन लेते हुए ललित ने भारत में IPL शुरू कराने के बारे में सोचा। हिमाचल, राजस्थान और पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के मेंबर बनाने के बाद BCCI के साथ मिलकर ललित ने IPL के प्लान पर काम करना शुरू किया। IPL कॉन्ट्रोवर्सी में घिरे ललित, BCCI ने 22 आरोप लगाए थे IPL की शुरुआत करते हुए ललित मोदी ने अपने परिवार के कई सदस्यों को IPL में हिस्सेदारी दिलाई थी। 2008 में IPL के आते ही यह लीग सुपरहिट हो गई और इसके लिए ललित ने खूब तारीफें लूटीं। IPL से खिलाड़ियों और BCCI को भी फायदा होने लगा। कुछ समय बाद IPL और ललित के निजी स्वार्थ की जानकारी सबके सामने आने लगी और उन्हें 2010 के IPL फाइनल के बाद BCCI के वाइस प्रेसिडेंट पद से हटा दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक BCCI ने ललित मोदी पर 22 आरोप लगाए, जिनमें अपने परिवार को कॉन्ट्रैक्ट देना, IPL की ब्रॉडकास्टिंग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना, नीलामी में धांधली करना जैसे कई आरोप शामिल रहे। ED की जांच, विदेश जाना और ‘ललितगेट’ विवाद साल 2010 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2009 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित IPL के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघनों की जांच शुरू की। ईडी के समन जारी होने के बीच ललित मोदी भारत छोड़कर लंदन चले गए। इसके बाद उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी हुआ। साल 2015 में यह मामला उस समय एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया, जब लीक हुए दस्तावेजों से पता चला कि तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पासपोर्ट रद्द होने के बावजूद ललित मोदी को यूके के ट्रैवल डॉक्युमेंट्स दिलाने में मदद की थी। इस पूरे घटनाक्रम को मीडिया में ‘ललितगेट’ नाम दिया गया था। उम्र में 9 साल बड़ी मीनल के साथ ललित मोदी ने 1991 में शादी कर ली। मां की सहेली से की शादी ललित को विदेश में पढ़ाई के दौरान उनकी मां की सहेली मीनल से प्यार हो गया था। मीनल उम्र में ललित से 9 साल बड़ी थीं, इसके बावजूद मोदी और मीनल के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। मीनल की शादी नाइजीरिया के बिजनेसमैन जैक सागरानी से हो रही थी। उससे ठीक पहले ललित ने मीनल से प्यार का इजहार कर दिया, जिससे मीनल गुस्सा हो गईं। उन्होंने चार साल तक मोदी से बातचीत बंद कर दी। ये खबर भी पढ़ें ‘मैं सुष्मिता सेन का केप्ट बॉयफ्रेंड था’:एक्ट्रेस पर लगे ‘गोल्ड डिगर’ टैग पर ललित मोदी बोले- हर जगह वही पेमेंट करती थीं बिजनेसमैन और पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी ने हाल ही में अपनी पूर्व पार्टनर सुष्मिता सेन को स्पेशल बताया। साथ ही उन्होंने एक्ट्रेस पर लगे ‘गोल्ड डिगर’ (पैसे के लिए रिश्ता रखने वाली) के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एक्ट्रेस हर चीज की पेमेंट करती थीं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

रिजेक्शन और रिप्लेसमेंट के बाद तारा सुतारिया ने बनाई पहचान:बोलीं- फिल्मों से निकाले जाने पर बहुत तकलीफ होती थी, खुद से सवाल करती थी

रिजेक्शन और रिप्लेसमेंट के बाद तारा सुतारिया ने बनाई पहचान:बोलीं- फिल्मों से निकाले जाने पर बहुत तकलीफ होती थी, खुद से सवाल करती थी

बॉलीवुड में पहचान बनाने का सपना लेकर आने वाले हर कलाकार का सफर एक जैसा नहीं होता। कुछ को फिल्मी परिवार का सहारा मिलता है, तो कुछ हुनर और मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश करते हैं। अभिनेत्री तारा सुतारिया का सफर भी ऐसा ही है। अभिनय के साथ संगीत और गायकी में रुचि रखने वाली तारा ने टेलीविजन से शुरुआत की और 2019 में करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा। तारा का फिल्मी सफर कई अनुभवों से गुजर चुका है। उन्होंने रोमांटिक और एक्शन फिल्मों में काम किया और अपूर्वा जैसी सर्वाइवल थ्रिलर में मुख्य भूमिका निभाई। इस दौरान उन्हें फिल्मों से रिप्लेस किए जाने और इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आज की सक्सेस स्टोरी में तारा सुतारिया के जीवन और करियर से जुड़ी खास बातें। बचपन से ही संगीत और मंच से जुड़ाव तारा सुतारिया का जन्म 19 नवंबर 1995 को मुंबई में हुआ। उन्हें बचपन से संगीत और परफॉर्मिंग आर्ट्स में रुचि थी। उन्होंने कम उम्र में गायन की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। संगीत के अलावा नृत्य और मंच पर प्रस्तुति देने का भी अनुभव रहा है। वह लगभग 15 साल की उम्र से मंच पर प्रस्तुति दे रही थीं। तारा हमेशा गायिका और परफॉर्मर बनना चाहती थीं। बॉलीवुड में अभिनय का मौका मिलने के बाद भी संगीत उनके लिए महत्वपूर्ण बना रहा। तारा ने म्यूजिकल थिएटर में भी काम किया। वह रैल पदमसी के प्रोडक्शन ‘ग्रीस’ और अश्विन गिडवानी के ‘ब्लेम इट ऑन यशराज’ जैसे म्यूजिकल प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रहीं। इस अनुभव से उन्हें मंच पर आत्मविश्वास और दर्शकों के सामने प्रस्तुति का अवसर मिला। डिज्नी चैनल से शुरू हुआ अभिनय का सफर फिल्मों में आने से पहले तारा सुतारिया टेलीविजन पर काम कर चुकी थीं। उन्होंने डिज्नी चैनल के शो ‘द सूट लाइफ ऑफ करण एंड कबीर’ और ‘ओए जस्सी’ में अभिनय किया। इसके अलावा उन्होंने ‘बिग बड़ा बूम’ से बतौर गायिका और परफॉर्मर टीवी करियर की शुरुआत की थी। वह ‘एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा’ और ‘बेस्ट ऑफ लक निक्की’ जैसे टीवी शोज में भी नजर आईं। टेलीविजन पर काम करने से उन्हें कैमरे के सामने अभिनय और दर्शकों से जुड़ने का अनुभव मिला। यह उनके करियर का शुरुआती चरण था, जिसने उन्हें फिल्मों की दुनिया में कदम रखने के लिए तैयार किया। तारा का एक और हुनर गायकी था। उन्होंने PTI को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह फिल्मों में गाना चाहती थीं और भविष्य में बॉलीवुड फिल्मों के लिए भी गाना चाहती हैं। स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ से बॉलीवुड डेब्यू साल 2019 तारा सुतारिया के करियर के लिए महत्वपूर्ण रहा। इसी साल उन्होंने पुनीत मल्होत्रा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म में उनके साथ टाइगर श्रॉफ और अनन्या पांडे मुख्य भूमिकाओं में थे। तारा ने फिल्म में मिया चावला का किरदार निभाया। यह कॉलेज लाइफ, दोस्ती, प्यार और प्रतियोगिता पर आधारित कहानी थी। फिल्म को समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन तारा के लिए यह बड़े पर्दे पर शुरुआत का अवसर था। तारा ने अपनी डेब्यू फिल्म के प्रदर्शन पर कहा था कि फिल्म को लेकर लोगों की राय अलग हो सकती है, लेकिन उनके अनुसार फिल्म ने कमाई की थी और वह इसे असफल नहीं मानती थीं। तारा ने बताया था कि ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ की शूटिंग के दौरान उन्हें दूसरी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे थे। इनमें ’कबीर सिंह’ और ‘मरजावां’ जैसी फिल्में शामिल थीं। उनका डेब्यू ऐसे समय में हुआ, जब वह अभिनय के साथ गायकी और मंचीय अनुभव को भी आगे बढ़ाना चाहती थीं। ‘मरजावां’ में निभाया अलग तरह का किरदार ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ के बाद तारा सुतारिया की दूसरी फिल्म मरजावां थी, जो 2019 में रिलीज हुई। मिलाप जावेरी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा, रितेश देशमुख और रकुल प्रीत सिंह प्रमुख भूमिकाओं में थे। तारा ने फिल्म में जोया का किरदार निभाया था। उनका किरदार बोल और सुन नहीं सकता था। उन्हें संवादों के बजाय भाव-भंगिमा और सांकेतिक भाषा के माध्यम से अभिनय करना पड़ा। तारा कहती हैं कि उन्होंने इस भूमिका के लिए सांकेतिक भाषा सीखने पर काम किया। वह चाहती थीं कि उनके अभिनय में ऐसी गलती न हो, जिससे संबंधित समुदाय को बुरा लगे। ‘मरजावां’ उनके लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इसमें उन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म के कॉलेज रोमांस से अलग भूमिका निभाई। फिल्म में एक्शन, रोमांस और भावनात्मक संघर्ष का मिश्रण था। तारा ने इस फिल्म के जरिए दिखाने की कोशिश की कि वह अलग तरह के किरदार निभाने के लिए भी तैयार हैं। फिल्मों से रिप्लेस होने का अनुभव फिल्म इंडस्ट्री में काम पाने के साथ-साथ किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा बने रहना भी कलाकारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। तारा सुतारिया ने करियर के दौरान ऐसे अनुभवों का सामना किया है। जूम टीवी एंटरटेनमेंट के इंटरव्यू में तारा ने फिल्मों से रिप्लेस किए जाने के अनुभवों पर बात की है। उन्होंने बताया कि कुछ मौकों पर उन्हें फिल्मों से बाहर किए जाने की जानकारी मिली, जबकि वह उन प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की उम्मीद कर रही थीं। किसी फिल्म से जुड़े होने की उम्मीद के बाद अचानक किसी दूसरे कलाकार को अपनी जगह देखना भावनात्मक रूप से मुश्किल हो सकता है। तारा के लिए भी यह शुरुआती करियर का ऐसा अनुभव रहा, जिसने उन्हें इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को समझने का अवसर दिया। ‘तड़प’ में रोमांटिक ड्रामा का अनुभव साल 2021 में तारा सुतारिया फिल्म ‘तड़प’ में नजर आईं। मिलन लुथरिया के निर्देशन में बनी यह तेलुगु फिल्म RX 100 का हिंदी रीमेक थी। इसमें तारा के साथ अहान शेट्टी ने अभिनय किया था। तारा ने फिल्म में रमिसा नौटियाल का किरदार निभाया। अहान शेट्टी के लिए यह बॉलीवुड डेब्यू था। कहानी प्यार, रिश्तों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव पर आधारित थी। फिल्म की शूटिंग और प्रमोशन के दौरान तारा ने अहान शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव पर भी बात की थी। यह फिल्म तारा के करियर में एक और रोमांटिक भूमिका लेकर आई। उनके लिए यह ऐसा प्रोजेक्ट

ट्रम्प ने 100% टैरिफ वाले कानून को दी मंजूरी:रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा; भारत के लिए बढ़ा संकट

ट्रम्प ने 100% टैरिफ वाले कानून को दी मंजूरी:रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा; भारत के लिए बढ़ा संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब भारत पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रम्प ने इस बिल पर साइन कर दिया है और यह कानून बन चुका है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 40% से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है, इसलिए अमेरिका ने ये टैरिफ लगाया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया था। पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े थे। सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। इसे आधिकारिक तौर पर लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम दिया गया है। रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस लिस्ट का आकलन करेंगे। अमेरिका की तरफ से 100% टैरिफ पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के हितों से समझौता नहीं करेंगे। बीते 2 साल में भारत का रूस से तेल आयात यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना तेजी से बढ़ाया। 2022-23 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। युद्ध से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था, लेकिन बाद में यह बढ़कर रोजाना करीब 16 से 20 लाख बैरल तक पहुंच गया। अब भारत अपनी जरूरत के 40% से ज्यादा कच्चे तेल का आयात रूस से कर रहा है। इससे भारत रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है। रूस के अलावा भारत के लिए 9 विकल्प रूस के अलावा, भारत मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर से तेल खरीदता है। इसके अलावा, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका से भी कच्चा तेल आयात करता है। कानून का भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे, जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स समेत कई चीजों के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो… रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा बिल के कानून बनने के बाद 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ भी 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है, जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिलेगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

Donald Trump Bans CNN From White House Over Fake News Controversy

Donald Trump Bans CNN From White House Over Fake News Controversy

वॉशिंगटन डीसी6 घंटे पहले कॉपी लिंक ट्रम्प ने शुक्रवार को आदेश जारी किया। वॉशिंगटन में 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने CNN, MSNOW और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से बैन करने का ऐलान किया। ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि इन संस्थानों की लगातार फेक न्यूज कवरेज के कारण यह रोक लगाई गई है। उन्होंने आगे और मीडिया संस्थानों पर ऐसी पाबंदी लगाने की धमकी दी। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया साइट पर लिखा कि यह रोक तुरंत प्रभाव से लागू होगी। उन्होंने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को “FAKE NEWS” बताया। इससे पहले ट्रम्प ने फरवरी 2025 में एसोसिएटेड प्रेस (AP) के पत्रकारों पर भी ऐसी ही रोक लगाई थी। तब ट्रम्प ने AP के पत्रकारों को ओवल ऑफिस, एयर फोर्स वन और अन्य कार्यक्रमों में जाने से रोक दिया था। यह कार्रवाई AP के गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम बदलने के उनके फैसले का समर्थन नहीं करने के बाद की थी। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर जानकारी दी। तीनों संस्थान ट्रम्प के फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं CNN- 24 घंटे चलने वाला टीवी न्यूज चैनल और डिजिटल वेबसाइट। अमेरिकी राजनीति की बड़ी खबरें और फैक्ट-चेकिंग करता है। ट्रम्प के बयानों और नीतियों पर लगातार तीखे सवाल उठाता रहा है। MS NOW- केबल टीवी न्यूज चैनल और डिजिटल मीडिया। लेफ्ट-ऑफ-सेंटर राजनीतिक डिबेट्स और ओपिनियन शोज पर फोकस करता है। ट्रम्प प्रशासन और उनकी नीतियों का सबसे मुखर आलोचक चैनल माना जाता है। पॉलिटिको- प्रमुख डिजिटल न्यूज वेबसाइट और राजनीतिक अखबार। व्हाइट हाउस और अमेरिकी संसद की अंदरूनी खबरों और नीतियों की रिपोर्टिंग करता है। ट्रम्प प्रशासन के अंदरूनी फैसलों, विवादों और रणनीतियों का बारीक विश्लेषण करता रहा है। ट्रम्प पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं साल 2016 से ही ट्रम्प CNN की खबरों को लगातार “फेक न्यूज” कहते रहे हैं और उनके कार्यकाल में पहले भी इस चैनल के पत्रकारों के व्हाइट हाउस पास रोके जा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ जैसे बड़े और प्रतिष्ठित अखबारों पर भी अपने खिलाफ पक्षपात करने का आरोप लगाया और उन पर मानहानि के मुकदमे तक दर्ज कराए। ट्रम्प ने इन सभी संस्थानों की रिपोर्टिंग पर खुले तौर पर सवाल उठाए और उन पर जानबूझकर गलत नीयत से खबरें चलाकर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया। AP ने दायर किया मुकदमा AP ने इस मामले में मुकदमा किया था। यह मामला अभी जारी है। ट्रम्प लंबे समय से उस मीडिया कवरेज पर नाराजगी जताते रहे हैं, जिसे वह अपने खिलाफ मानते हैं। उनका मीडिया संस्थानों पर मुकदमे करने और पत्रकारों पर व्यक्तिगत रूप से हमला करने का पुराना रिकॉर्ड है। वह पत्रकारों पर आमने-सामने या सोशल मीडिया के जरिए भी निशाना साधते रहे हैं। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रम्प ने न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल, BBC और अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। —————————- ये खबर भी पढे़ं… ट्रम्प ने कनाडा को लेकर यूरोप को धमकी दी:कहा- EU में शामिल किया तो भारी टैरिफ लगाऊंगा, व्यापार भी रोक दूंगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय संघ को गंभीर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Donald Trump Bans CNN From White House Over Fake News Controversy

Donald Trump Bans CNN From White House Over Fake News Controversy

1 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प ने शुक्रवार को आदेश जारी किया। वॉशिंगटन में 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने CNN, MSNOW और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से बैन करने का ऐलान किया। ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि इन संस्थानों की लगातार फेक न्यूज कवरेज के कारण यह रोक लगाई गई है। उन्होंने आगे और मीडिया संस्थानों पर ऐसी पाबंदी लगाने की धमकी दी। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया साइट पर लिखा कि यह रोक तुरंत प्रभाव से लागू होगी। उन्होंने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को “FAKE NEWS” बताया। इससे पहले ट्रम्प ने फरवरी 2025 में एसोसिएटेड प्रेस (AP) के पत्रकारों पर भी ऐसी ही रोक लगाई थी। तब ट्रम्प ने AP के पत्रकारों को ओवल ऑफिस, एयर फोर्स वन और अन्य कार्यक्रमों में जाने से रोक दिया था। यह कार्रवाई AP के गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम बदलने के उनके फैसले का समर्थन नहीं करने के बाद की थी। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर जानकारी दी। AP ने दायर किया मुकदमा AP ने इस मामले में मुकदमा किया था। यह मामला अभी जारी है। ट्रम्प लंबे समय से उस मीडिया कवरेज पर नाराजगी जताते रहे हैं, जिसे वह अपने खिलाफ मानते हैं। उनका मीडिया संस्थानों पर मुकदमे करने और पत्रकारों पर व्यक्तिगत रूप से हमला करने का पुराना रिकॉर्ड है। वह पत्रकारों पर आमने-सामने या सोशल मीडिया के जरिए भी निशाना साधते रहे हैं। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रम्प ने न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल, BBC और अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। खबर अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔