Tuesday, 03 Nov 2026 | 05:50 PM

Trending :

ट्रम्प ने 100% टैरिफ वाले कानून को दी मंजूरी:रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा; भारत के लिए बढ़ा संकट

ट्रम्प ने 100% टैरिफ वाले कानून को दी मंजूरी:रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा; भारत के लिए बढ़ा संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब भारत पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रम्प ने इस बिल पर साइन कर दिया है और यह कानून बन चुका है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 40% से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है, इसलिए अमेरिका ने ये टैरिफ लगाया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया था। पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े थे। सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। इसे आधिकारिक तौर पर लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम दिया गया है। रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस लिस्ट का आकलन करेंगे। अमेरिका की तरफ से 100% टैरिफ पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के हितों से समझौता नहीं करेंगे। बीते 2 साल में भारत का रूस से तेल आयात यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना तेजी से बढ़ाया। 2022-23 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। युद्ध से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था, लेकिन बाद में यह बढ़कर रोजाना करीब 16 से 20 लाख बैरल तक पहुंच गया। अब भारत अपनी जरूरत के 40% से ज्यादा कच्चे तेल का आयात रूस से कर रहा है। इससे भारत रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है। रूस के अलावा भारत के लिए 9 विकल्प रूस के अलावा, भारत मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर से तेल खरीदता है। इसके अलावा, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका से भी कच्चा तेल आयात करता है। कानून का भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे, जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स समेत कई चीजों के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो… रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा बिल के कानून बनने के बाद 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ भी 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है, जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिलेगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
PG Diploma Courses Replaced by MD, MS Degrees

June 24, 2026/
11:23 am

3 मिनट पहले कॉपी लिंक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश में सभी PG डिप्लोमा मेडिकल कोर्स को बंद करने...

बालों की देखभाल के टिप्स: बार-बार हो रहा है डैंड्रफ से परेशान, तो इन 5 पदों पर मिलना पड़ सकता है भारी

March 20, 2026/
6:02 pm

बालों की देखभाल संबंधी युक्तियाँ: डैंड्रफ की समस्या आज के समय में बहुत आम हो गई है। लेकिन अगर बार-बार...

शिवपुरी में गर्लफ्रेंड को भगाने पहुंचे प्रेमी की पीट-पीटकर हत्या:परिजनों ने घर में बंधक बनाकर रात भर मारा, आज होनी थी लड़की की सगाई

March 30, 2026/
6:20 pm

शिवपुरी के कोलारस कस्बे में अपनी गर्लफ्रेंड को घर से भगाकर ले जाने पहुंचे एक युवक की परिजनों ने पीट-पीटकर...

President Droupadi Murmu Statement | Gujarat National Film Awards 2026

September 23, 2026/
1:34 pm

14 मिनट पहले कॉपी लिंक राष्ट्रपति ने फिल्म इंडस्ट्री से कर्मचारियों, असिस्टेंट्स, छोटे कलाकारों और अपना करियर बनाने की कोशिश...

‘परफेक्ट मां’ बनने का प्रेशर:देश की 22% माताएं डिप्रेशन में, हर समय खुश रहने का दबाव खतरनाक

April 11, 2026/
2:41 pm

भारत में मां बनना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गया है। आंकड़ों के अनुसार मातृ मृत्यु दर में...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

ट्रम्प ने 100% टैरिफ वाले कानून को दी मंजूरी:रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा; भारत के लिए बढ़ा संकट

ट्रम्प ने 100% टैरिफ वाले कानून को दी मंजूरी:रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा; भारत के लिए बढ़ा संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब भारत पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रम्प ने इस बिल पर साइन कर दिया है और यह कानून बन चुका है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 40% से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है, इसलिए अमेरिका ने ये टैरिफ लगाया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया था। पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े थे। सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। इसे आधिकारिक तौर पर लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम दिया गया है। रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस लिस्ट का आकलन करेंगे। अमेरिका की तरफ से 100% टैरिफ पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के हितों से समझौता नहीं करेंगे। बीते 2 साल में भारत का रूस से तेल आयात यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना तेजी से बढ़ाया। 2022-23 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। युद्ध से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था, लेकिन बाद में यह बढ़कर रोजाना करीब 16 से 20 लाख बैरल तक पहुंच गया। अब भारत अपनी जरूरत के 40% से ज्यादा कच्चे तेल का आयात रूस से कर रहा है। इससे भारत रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है। रूस के अलावा भारत के लिए 9 विकल्प रूस के अलावा, भारत मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर से तेल खरीदता है। इसके अलावा, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका से भी कच्चा तेल आयात करता है। कानून का भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे, जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स समेत कई चीजों के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो… रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा बिल के कानून बनने के बाद 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ भी 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है, जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिलेगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.