लखनऊ के प्रणव को 83 लाख वजीफा, लंदन में पढ़ेंगे:AI और तकनीक नीति में हासिल करेंगे विशेषज्ञता, UCL में लेंगे परास्नातक की डिग्री

लखनऊ के प्रणव भास्कर तिवारी का करीब 83 लाख रुपए की चेवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति के लिए चयन हुआ है। इस छात्रवृत्ति से वे लंदन की यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में विकास, तकनीक और नवाचार नीति में लोक प्रशासन की परास्नातक पढ़ाई करेंगे। प्रणव ने अपने करियर की शुरुआत कानून के क्षेत्र से की थी। अब वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीक नीति के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। ला मार्टिनियर में पहली बार नहीं मिला था प्रवेश प्रणव की सफलता के पीछे उनकी मां गीता तिवारी और पिता ओम प्रकाश भास्कर का बड़ा योगदान है। बचपन में ला मार्टिनियर, लखनऊ में प्रवेश नहीं मिलने के बाद उनकी मां ने करीब छह महीने तक कोशिश जारी रखी। पिता ने भी सीमित आर्थिक संसाधनों और औसत अंकों को कभी बच्चों के भविष्य की सीमा नहीं बनने दिया। परिवार में शिक्षा को लेकर इसी सोच ने प्रणव और उनके भाइयों को आगे बढ़ने का हौसला दिया। प्रणव कहते हैं, मां ने मुझे अटल रहना सिखाया और पिता ने यह भरोसा दिया कि परिस्थितियां या अंक आपका भविष्य तय नहीं करते। अपने माता-पिता के अथक प्रयासों का पूर्णविराम हूं मैं, मेरा हाथ पर हाथ रखकर बैठना शोभा नहीं देता। वकालत से शुरू किया सफर प्रणव पहली पीढ़ी के वकील हैं। कानून की पढ़ाई और वकालत के बाद उन्होंने तकनीक नीति की ओर रुख किया। अमेजन वेब सर्विसेज के साथ काम करते हुए उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नीति और उभरती तकनीकों से जुड़े विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिला। अब यूसीएल में पढ़ाई के दौरान वे तकनीक, नवाचार और सार्वजनिक नीति के बीच संबंधों को और गहराई से समझेंगे। लंदन की पढ़ाई का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में बदलाव लाना प्रणव इस छात्रवृत्ति को सिर्फ विदेश में पढ़ाई का अवसर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से मिले अवसरों को वैश्विक अनुभव से जोड़ने का माध्यम मानते हैं। उनका लक्ष्य पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटकर उत्तर प्रदेश के तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े तंत्र को मजबूत करने में योगदान देना है। वे कहते हैं, लंदन जाना उपलब्धि हो सकती है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब वहां की सीख वापस उत्तर प्रदेश और भारत के काम आए।
बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से साझा करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है।
बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से शेयर करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक

अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। अमीर लोग अपने घर और जमीन को तुरंत भव्य दिखाने के लिए ओक, पाम और बरगद जैसे बड़े पेड़ों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। कैलिफोर्निया की नापा वैली में हाल ही में 50 फीट ऊंचे और करीब 100 टन वजनी 100 साल पुराने ओक के पेड़ को क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों से जमीन से निकाला गया। इसकी जड़ों को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए और फिर इसे ट्रकों से दूसरी जगह ले जाया गया। बरगद के 2 पेड़ों के लिए 4.5 करोड़ रुपए पाम बीच में एक अरबपति ने अपने लॉन के लिए बरगद के दो पेड़ 4.5 करोड़ रुपए में खरीदे। वहीं, एक अफ्रीकी इमली का पेड़ भी करीब 4.5 करोड़ रुपए में बिका। अमीर लोग पौधों के बड़ा होने का सालों इंतजार नहीं करना चाहते। इसलिए वे पहले से बड़े पेड़ खरीदकर अपनी संपत्ति को तुरंत भव्य और पुराना लुक दे रहे हैं। पेड़ों को लेकर पड़ोसियों में भी होड़ यह क्रेज अब सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। रोड आइलैंड में ओरेकल के लैरी एलिसन और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन की संपत्तियों के बीच लैंडस्केपिंग को लेकर होड़ की चर्चा है। श्वार्जमैन ने अपनी हवेली को पड़ोसियों की नजरों से छिपाने के लिए चारों ओर 18 फीट ऊंचे 100 से ज्यादा सजावटी पेड़ लगवाए। इन पर 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए। पेड़ पहुंचाने के लिए हाईवे बंद कराने पड़ते हैं 50 फीट तक ऊंचे और 100 टन वजनी पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं है। कई बार इन्हें ले जाने के लिए हाईवे बंद कराने और बिजली के तार हटाने पड़ते हैं। बड़े पेड़ों की बढ़ती मांग से इस कारोबार को भी बढ़ावा मिला है। कुछ नर्सरी मालिक तो अरबपति ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक बनवा रहे हैं, ताकि वे हेलिकॉप्टर से आकर अपनी पसंद के पेड़ चुन सकें।
अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक

अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। अमीर लोग अपने घर और जमीन को तुरंत भव्य दिखाने के लिए ओक, पाम और बरगद जैसे बड़े पेड़ों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। कैलिफोर्निया की नापा वैली में हाल ही में 50 फीट ऊंचे और करीब 100 टन वजनी 100 साल पुराने ओक के पेड़ को क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों से जमीन से निकाला गया। इसकी जड़ों को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए और फिर इसे ट्रकों से दूसरी जगह ले जाया गया। बरगद के 2 पेड़ों के लिए 4.5 करोड़ रुपए पाम बीच में एक अरबपति ने अपने लॉन के लिए बरगद के दो पेड़ 4.5 करोड़ रुपए में खरीदे। वहीं, एक अफ्रीकी इमली का पेड़ भी करीब 4.5 करोड़ रुपए में बिका। अमीर लोग पौधों के बड़ा होने का सालों इंतजार नहीं करना चाहते। इसलिए वे पहले से बड़े पेड़ खरीदकर अपनी संपत्ति को तुरंत भव्य और पुराना लुक दे रहे हैं। पेड़ों को लेकर पड़ोसियों में भी होड़ यह क्रेज अब सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। रोड आइलैंड में ओरेकल के लैरी एलिसन और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन की संपत्तियों के बीच लैंडस्केपिंग को लेकर होड़ की चर्चा है। श्वार्जमैन ने अपनी हवेली को पड़ोसियों की नजरों से छिपाने के लिए चारों ओर 18 फीट ऊंचे 100 से ज्यादा सजावटी पेड़ लगवाए। इन पर 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए। पेड़ पहुंचाने के लिए हाईवे बंद कराने पड़ते हैं 50 फीट तक ऊंचे और 100 टन वजनी पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं है। कई बार इन्हें ले जाने के लिए हाईवे बंद कराने और बिजली के तार हटाने पड़ते हैं। बड़े पेड़ों की बढ़ती मांग से इस कारोबार को भी बढ़ावा मिला है। कुछ नर्सरी मालिक तो अरबपति ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक बनवा रहे हैं, ताकि वे हेलिकॉप्टर से आकर अपनी पसंद के पेड़ चुन सकें। —————————— ये खबर भी पढ़ें… ओपनएआई का 100 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा:दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में से 1 हल किया; 88 घंटे में जवाब ढूंढा ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा

अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। EB-5 वीजा के लिए आवेदन करने वालों में भारतीय चीन से आगे निकल गए हैं। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों ने EB-5 के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से 9,875 आवेदन आए। EB-5 अमेरिका का इन्वेस्टमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन प्रोग्राम है। इसके तहत अमेरिका में निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता मिलता है। इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता है EB-5 EB-5 वीजा अमेरिका में निवेश करने पर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता खोलता है। H-1B वीजा को लेकर सख्ती बढ़ने के बीच कुछ भारतीयों की दिलचस्पी EB-5 में बढ़ी है। हालांकि, EB-5 मिलने से सीधे अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलती। पहले ग्रीन कार्ड के लिए पात्रता हासिल करनी होती है। अमेरिका में रहने के लिए आवेदक को EB-5 के सभी नियम और इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। प्रोफेसर-स्कॉलर का EB-1 कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में EB-1 वीजा का कोटा इस साल तय समय से पहले ही पूरा हो गया। इस कैटेगरी में हर साल करीब 7 हजार वीजा उपलब्ध होते हैं। इस बार यह कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया, जबकि इसकी आखिरी तारीख 30 सितंबर थी। EB-1 में प्रोफेसर, वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर जैसे लोग आवेदन कर सकते हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, 1 को ही जारी ट्रम्प ने 2025 में गोल्ड कार्ड स्कीम लेकर आए थे। इसे उन्होंने EB-5 के विकल्प के तौर पर पेश किया था। इसका मकसद अमीर विदेशी नागरिकों को निवेश के बदले अमेरिका में स्थायी निवास का रास्ता देना था। गोल्ड कार्ड को अब तक ज्यादा सफलता नहीं मिली है। अप्रैल 2026 में वित्त मंत्री लटनिक ने बताया था कि गोल्ड कार्ड में 338 लोगों ने रुचि दिखाई, 165 ने आवेदन फीस भरी और सिर्फ एक व्यक्ति को गोल्ड कार्ड मिला। यही वजह है कि EB-5 में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ी है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अमेरिका में लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होती है। ट्रम्प के गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता पर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली शक्ति का इस्तेमाल करके शुरू किया है। ऐसे में डर है कि जब ट्रम्प सत्ता से बाहर हो जाएंगे तो नए राष्ट्रपति इस गोल्ड कार्ड को खत्म कर सकते हैं। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा: ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
‘दृश्यम 3’ का ट्रेलर हुआ रिलीज:अजय देवगन के सामने जयदीप अहलावत और प्रकाश राज, इस बार दिमागी खेल से आगे बढ़ी कहानी

अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ (दृश्यम 3) का ऑफिशियल ट्रेलर बुधवार को रिलीज हो गया है। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कहानी में 2 अक्टूबर की तारीख एक बार फिर अहम है। दृश्यम 3 को ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का आखिरी चैप्टर बताया गया है। इसमें विजय सालगांवकर एक बार फिर अपने परिवार के डार्क सीक्रेट को कानून से बचाने की कोशिश करते नजर आएंगे। ट्रेलर की अवधि 2 मिनट 52 सेकंड है। फिल्म में अजय देवगन विजय, तब्बू IG मीरा देशमुख और श्रिया सरन नंदिनी के किरदार में लौट रही हैं। इस बार जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री हुई है, जो विजय के खिलाफ जांच को और मजबूत करते हैं। विजय के सामने नई चुनौती ट्रेलर में दिखाया गया है कि मामला अब सिर्फ दिमागी खेल नहीं रहा, बल्कि विजय और पुलिस के बीच अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। अधिकारियों के पास ऐसा मजबूत सबूत होने का दावा है, जो विजय की बनाई हुई कहानी और उसके अलिबी को तोड़ सकता है। जयदीप अहलावत फिल्म में क्राइम ब्रांच के SP की भूमिका में हैं। वह विजय को कमतर आंकने के बजाय उसकी समझ और चालाकी को पहचानता है। इसी बदलाव के बीच विजय का सामना पहले से ज्यादा खतरनाक चुनौती से होता है। ट्रेलर में SP विजय के लिए कहता है, “अनपढ़ है, बेवकूफ नहीं।” वहीं एक अन्य डायलॉग में विजय को “गोवा का सबसे बड़ा हार्ड-वर्किंग क्रिमिनल” कहा गया है। कहानी में दिमागी खेल से आगे बढ़कर किस्मत की भूमिका भी सामने आती है। ट्रेलर में कहा गया है, “अब ये खेल दिमाग का नहीं नसीब का बन चुका है।” विजय का परिवार उसके फैसलों की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। विजय कहता है, “फैमिली के लिए आदमी खुद को हर कदम पर तोड़ता है।” ट्रेलर का अंत इस चुनौती के साथ होता है, “तुम सोच भी नहीं सकते कि वो साधारण आदमी क्या से क्या बन सकता है।” फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है और इसे स्टार स्टूडियोज और पैनोरमा स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। अजय देवगन ने फिल्म को लेकर कहा है, “जो कहानी 2 अक्टूबर से शुरू हुई थी… वो खत्म भी 2 अक्टूबर को होगी।”
‘दृश्यम 3’ का ट्रेलर हुआ रिलीज:विजय के खिलाफ मिला ऐसा सबूत, जो सालों से बनाई कहानी को कर सकता है खत्म

अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ (दृश्यम 3) का ऑफिशियल ट्रेलर बुधवार को रिलीज हो गया। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कहानी में 2 अक्टूबर की तारीख एक बार फिर अहम है। दृश्यम 3 को ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का आखिरी चैप्टर बताया गया है। इसमें अजय देवगन का किरदार विजय सालगांवकर एक बार फिर अपने परिवार के डार्क सीक्रेट को कानून से बचाने की कोशिश करते नजर आएंगे। ट्रेलर 2 मिनट 52 सेकंड लंबा है। फिल्म में अजय देवगन विजय, तब्बू IG मीरा देशमुख और श्रिया सरन नंदिनी के किरदार में लौट रही हैं। इस बार जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री हुई है, जो विजय के खिलाफ जांच को और मजबूत करते हैं। विजय के सामने नई चुनौती ट्रेलर में दिखाया गया है कि मामला अब सिर्फ दिमागी खेल नहीं रहा, बल्कि विजय और पुलिस के बीच अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। ट्रेलर में अजय देवगन कहते हैं, “उनके बहुत ही मजबूत सबूत हैं। जयदीप अहलावत फिल्म में क्राइम ब्रांच के SP की भूमिका में हैं। वह विजय को कमतर आंकने के बजाय उसकी समझ और चालाकी को पहचानते हैं। इसी बदलाव के बीच विजय का सामना पहले से ज्यादा खतरनाक चुनौती से होता है। ट्रेलर में प्रकाश राज का किरदार विजय के लिए कहता है, “अनपढ़ है, बेवकूफ नहीं। इसे मैं हल्के में लेने की कोशिश नहीं करूंगा।” वहीं एक अन्य डायलॉग में विजय को “गोवा का सबसे बड़ा हार्ड-वर्किंग क्रिमिनल” कहा गया है। कहानी में दिमागी खेल से आगे बढ़कर किस्मत की भूमिका भी सामने आती है। ट्रेलर में कहा गया है, “अब ये खेल दिमाग का नहीं नसीब का बन चुका है।” विजय का परिवार उसके फैसलों की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। विजय कहता है, “फैमिली के लिए आदमी खुद को हर कदम पर तोड़ता है।” ट्रेलर का अंत इस चुनौती के साथ होता है, “तुम सोच भी नहीं सकते कि वो साधारण आदमी क्या से क्या बन सकता है।” फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है और इसे स्टार स्टूडियोज और पैनोरमा स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है।
Hanuman Ansh Box Office Record

18 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म हनुमान अंश 7 अगस्त को रिलीज हुई है। हनुमान अंश ने रिलीज के 33वें दिन मंगलवार को ₹11.00 करोड़ का कलेक्शन किया है। फिल्म की कमाई सोमवार के ₹10.00 करोड़ के मुकाबले 10% बढ़ी। इसके साथ महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश 33वें दिन में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। इसने आमिर-शाहरुख की फिल्मों को भी पछाड़ दिया है। फिल्म ने 33वें दिन 7,778 शो से कमाई की। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन ₹169.20 करोड़ और नेट कलेक्शन ₹143.13 करोड़ हो गया है। फिल्म अब ₹200 करोड़ ग्रॉस के आंकड़े से ₹30.80 करोड़ दूर है। पिछले कुछ दिनों की रफ्तार के आधार पर इसके अगले 3-4 दिनों में यह आंकड़ा पार करने का अनुमान है। रिलीज के 33वें दिन यानी मंगलवार को फिल्म ने सोमवार की ₹10.00 करोड़ नेट कमाई के मुकाबले ₹11.00 करोड़ नेट कमाए। आमतौर पर रिलीज के 33 दिन बाद फिल्मों की कमाई और शो दोनों कम होते हैं, लेकिन हनुमान अंश ने इस दिन कमाई बढ़ाई और शो की संख्या भी बढ़ी। जबकि 22 दिनों तक फिल्म की कमाई निराशाजनक थी। भारत में फिल्म ने अब तक कुल 81,608 शो से ₹143.13 करोड़ नेट और ₹169.20 करोड़ ग्रॉस कमाए हैं। ओवरसीज रिलीज शुरू होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं। हनुमान अंश ने तोड़ा 3 इडियट्स, पठान का रिकॉर्ड 33वें दिन की कमाई के मामले में फिल्म हनुमान अंश ने धुरंधर, स्त्री 2, 3 इडियट्स और पठान जैसी फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ये 33वें दिन हाईएस्ट कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। मौजूदा कमाई देखते हुए फिल्म के आने वाले दिनों के भी रिकॉर्ड तोड़ने के अनुमान हैं। 33वें दिन के ऑल-टाइम चार्ट में हनुमान अंश सबसे ऊपर है। इसकी कमाई इस सूची में दूसरे नंबर पर मौजूद फिल्म से दोगुने से भी ज्यादा है। फिल्म ने 33वें दिन की कमाई में 3 इडियट्स और पठान जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ा है। इन दोनों फिल्मों का पैमाना और स्टार पावर अलग था। हनुमान अंश का यह प्रदर्शन इसकी देर से बढ़ी कमाई की असामान्य रफ्तार दिखाता है। ₹200 करोड़ की ओर बढ़ी फिल्म हनुमान अंश ने 30वें दिन ₹100 करोड़ ग्रॉस और 32वें दिन सिर्फ दो दिन बाद ₹150 करोड़ ग्रॉस का आंकड़ा पार किया था। अब इसका भारत में ग्रॉस कलेक्शन ₹169.20 करोड़ है और ₹200 करोड़ तक पहुंचने के लिए ₹30.80 करोड़ बाकी हैं। फिल्म के तीन बड़े चेहरों के बारे में- डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। ये उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2012 की वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। वह टीवी सीरीज और फिल्मों के डायलॉग राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। विशाल चतुर्वेदी। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। शोभिनव सत्या। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में लीड रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शोज में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे दर्जनों शोज कर चुके हैं। चंदन के. आनंद। क्यों पसंद की जा रही है हनुमान अंश? फिल्म की कामयाबी में सोशल मीडिया का अहम रोल: फिल्म से जुड़े वीडियोज लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फिल्म के कई सीन, नीम करोली बाबा के असल वीडियोज से हुबहू मेल खाते हैं, इसके वीडियोज लगातार सामने आ रहे हैं। सिनेमाघरों से फैंस के वीडियो भी चर्चा में हैं, जिसमें वह भावुक होते और स्क्रीन के सामने हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं। हाउसफुल शोज दिखाए जाने से भी दर्शकों के मन में फिल्म को लेकर उत्सुकता है। फिल्म एक ऐसे सब्जेक्ट पर बनी, जिसमें लोगों की रुचि, लेकिन जानकारी सीमित: ये फिल्म नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी है। उनके भक्त दुनियाभर में हैं। उनके कैंची धाम आश्रम में सालाना हजारों लोग पहुंचते हैं। उनकी जिंदगी पर अब तक कई बुक लिखी गई हैं और डॉक्यूमेंट्री बनी हैं, हालांकि ज्यादातर इंग्लिश में हैं, जिसे आम जनता कम ही जानती है। फिल्म की सादगी और फैक्ट्स: फिल्म हनुमान अंश को बेहद सादगी से फैक्चुअल बनाया गया है। फिल्म को पसंद किए जाने का एक कारण ये भी है कि इसे कमर्शियली नहीं बनाया गया है। डायरेक्टर ने खुद एक इंटरव्यू में दावा किया है कि इस फिल्म को जानकारी मात्र के लिए बनाया गया है, न कि मुनाफे के लिए। एक वजह यह भी है कि फिल्म को भक्तों और दर्शकों का प्यार मिल रहा है। फिल्म का धार्मिक जुड़ाव, एक्टर ने संत की तरह जिए कई महीने जिस समय ये फिल्म बननी शुरू हुई थी, तब फिल्ममेकर्स प्रेमानंद महाराज के पास गए थे। उन्होंने प्रेमानंद महाराज से फिल्म पर सुझाव मांगा था। जिस पर उन्हें सलाह दी गई कि एक्टर्स को संतों की तरह जीना चाहिए। सावधानी से जीवन यापन करना चाहिए और शाकाहारी खाना चाहिए। फिल्म के लीड एक्टर्स ने इसका पालन किया। नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से- ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है। नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला
OpenAI Solves Navier-Stokes Math Problem

2 मिनट पहले कॉपी लिंक ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। गणित की चर्चित क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने साल 2000 में गणित के 7 बेहद मुश्किल और अनसुलझे सवाल चुने थे। इनमें से कई सवाल 100 साल से भी ज्यादा पुराने थे। इन्हें ‘मिलेनियम प्रॉब्लम्स’ कहा गया। इनमें से किसी एक को सही तरीके से हल करने वाले के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम रखा गया था। ओपनएआई के इस दावे से पहले इन सात में से सिर्फ एक समस्या हल हुई थी। इसे 2003 में एक रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने सुलझाया था। यानी कंपनी का दावा सही है तो अब तक दो सवालों के जवाब ढूंढ़ निकाले गए हैं। पहले समझिए, नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम क्या है मान लीजिए आपने एक गिलास पानी फर्श पर गिरा दिया। पानी इधर-उधर फैलने लगेगा। वैज्ञानिक गणित की मदद से यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि पानी किस दिशा में जाएगा, कितनी तेजी से जाएगा और उसका बहाव कैसा होगा। इसके लिए कुछ गणितीय समीकरण हैं, जिन्हें नेवियर–स्टोक्स इक्वेशन कहा जाता है। अब वैज्ञानिकों की समस्या यह थी: क्या ये समीकरण हर हालत में पानी के बहाव का सही हिसाब बता सकते हैं? या फिर कोई ऐसी बेहद मुश्किल स्थिति आ सकती है, जहां गणित का यह हिसाब ही काम करना बंद कर दे? बस, यही नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम है। तरल पदार्थों के बहाव से जुड़े समीकरणों पर आधारित ‘नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम’ लंबे समय से गणित की सबसे बड़ी अनसुलझी समस्याओं में से एक रही है। ओपनएआई का दावा क्या है? ओपनएआई के मुताबिक, उसके एक नए AI मॉडल ने इस समस्या का समाधान निकाला है। यह मॉडल अभी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया गया है, न ही इसके नाम का खुलासा किया गया है। ओपनएआई ने अपने नए मॉडल को GPT-6 अस्ट्रा से भी ज्यादा सक्षम इंटरनल मॉडल बताया है। GPT-6 अस्ट्रा 3 सितंबर 2026 को रिलीज हुआ है। हालांकि AI ने यह काम अकेले एक सिस्टम की तरह नहीं किया। ओपनएआई ने करीब 10,000 AI एजेंट्स को इस काम में लगाया था। ओपनएआई के रिसर्चर डैन रॉबर्ट्स ने इसकी तुलना भौंरे के अलग-अलग फूलों के बीच जाकर पराग पहुंचाने से की। यानी अलग-अलग AI समूहों से मिली जानकारी को दूसरे समूहों तक पहुंचाया गया, जिससे समाधान खोजने में मदद मिली। 7 मिलेनियम प्रॉब्लम्स इतनी अहम क्यों हैं? साल 2000 में जब अमेरिकी संस्था ने ये 7 सवाल चुने, तब इन्हें गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल अनसुलझी समस्याओं में माना जाता था। इन्हें गणित के सामने बड़ी चुनौतियों के तौर पर रखा गया था, ताकि दुनिया के गणितज्ञ इन्हें हल करने की कोशिश करें और इस दौरान गणित में नई खोजें हों। ओपनएआई के दावे से पहले इन 7 में से सिर्फ एक समस्या का समाधान हुआ था। इसलिए ओपनएआई का दावा इतना बड़ा माना जा रहा है। गणित की 7 बड़ी समस्याएं क्या हैं? 1. रिमान हाइपोथेसिस किस बारे में: प्राइन नंबर्स (अभाज्य संख्याएं) यानी 2, 3, 5, 7 जैसी संख्याएं। सवाल: ये संख्याएं देखने में बेतरतीब लगती हैं, लेकिन क्या इनके पीछे कोई छिपा हुआ नियम या पैटर्न है, जिससे पता चल सके कि अगली प्राइम नंबर्स कहां मिलेगी? स्थिति: अभी अनसुलझी। 2. P vs NP किस बारे में: कंप्यूटर के लिए मुश्किल सवाल। सवाल: क्या कंप्यूटर हर ऐसे मुश्किल सवाल का जवाब जल्दी ढूंढ सकता है, जिसका सही जवाब मिलने के बाद उसे जल्दी जांचा जा सकता है? उदाहरण: जैसे किसी बहुत बड़ी पहेली का सही जवाब मिल जाए तो उसे चेक करना आसान है। लेकिन सही जवाब खुद ढूंढना बहुत मुश्किल हो सकता है। P vs NP यही पूछता है कि क्या कंप्यूटर के लिए ऐसे जवाब ढूंढना भी उतना ही आसान हो सकता है। स्थिति: अभी अनसुलझी। 3. नेवियर स्टोक्स प्रोब्लम किस बारे में: पानी और हवा के बहने के बारे में। सवाल: पानी या हवा कैसे बहती है, इसे बताने वाली गणित स्थिति: सुलझाने का दावा किया। 4. यांग–मिल्स और मास गैप किस बारे में: बहुत छोटे कणों और उनकी ऊर्जा के बारे में। सवाल: क्या सबसे कम ऊर्जा वाले कण और उससे ज्यादा ऊर्जा वाले कण के बीच एक निश्चित न्यूनतम अंतर होता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 5. हॉज कन्जेक्चर किस बारे में: बहुत मुश्किल आकृतियों के बारे में। सवाल: क्या इन मुश्किल आकृतियों को आसान गणितीय समीकरणों की मदद से समझाया जा सकता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 6. बर्च एंड स्विनर्टन-डायर कन्जेक्चर किस बारे में: खास तरह के गणितीय समीकरणों के बारे में। सवाल: क्या समीकरण को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि उसके कितने संभावित जवाब हो सकते हैं? स्थिति: अभी अनसुलझी। 7. प्वांकारे कन्जेक्चर किस बारे में: 3D आकृतियों के बारे में। सवाल: अगर कोई 3D आकृति गोल जैसी है और उसमें कोई छेद नहीं है, तो क्या वह असल में 3D गोले जैसी ही होगी? स्थिति: रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने 2002-03 में इसका हल निकाला। यह करीब 100 साल पुरानी गणितीय पहेली थी, जिसे फ्रांसीसी गणितज्ञ हेनरी प्वांकारे ने 1904 में सामने रखा था। पेरेलमैन के इसका हल निकालने के बाद क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने 2010 में उन्हें इस समस्या के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की। हालांकि, पेरेलमैन ने यह इनामी राशि स्वीकार नहीं की। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔






