Hanuman Ansh Box Office Record

18 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म हनुमान अंश 7 अगस्त को रिलीज हुई है। हनुमान अंश ने रिलीज के 33वें दिन मंगलवार को ₹11.00 करोड़ का कलेक्शन किया है। फिल्म की कमाई सोमवार के ₹10.00 करोड़ के मुकाबले 10% बढ़ी। इसके साथ महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश 33वें दिन में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। इसने आमिर-शाहरुख की फिल्मों को भी पछाड़ दिया है। फिल्म ने 33वें दिन 7,778 शो से कमाई की। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन ₹169.20 करोड़ और नेट कलेक्शन ₹143.13 करोड़ हो गया है। फिल्म अब ₹200 करोड़ ग्रॉस के आंकड़े से ₹30.80 करोड़ दूर है। पिछले कुछ दिनों की रफ्तार के आधार पर इसके अगले 3-4 दिनों में यह आंकड़ा पार करने का अनुमान है। रिलीज के 33वें दिन यानी मंगलवार को फिल्म ने सोमवार की ₹10.00 करोड़ नेट कमाई के मुकाबले ₹11.00 करोड़ नेट कमाए। आमतौर पर रिलीज के 33 दिन बाद फिल्मों की कमाई और शो दोनों कम होते हैं, लेकिन हनुमान अंश ने इस दिन कमाई बढ़ाई और शो की संख्या भी बढ़ी। जबकि 22 दिनों तक फिल्म की कमाई निराशाजनक थी। भारत में फिल्म ने अब तक कुल 81,608 शो से ₹143.13 करोड़ नेट और ₹169.20 करोड़ ग्रॉस कमाए हैं। ओवरसीज रिलीज शुरू होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं। हनुमान अंश ने तोड़ा 3 इडियट्स, पठान का रिकॉर्ड 33वें दिन की कमाई के मामले में फिल्म हनुमान अंश ने धुरंधर, स्त्री 2, 3 इडियट्स और पठान जैसी फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ये 33वें दिन हाईएस्ट कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। मौजूदा कमाई देखते हुए फिल्म के आने वाले दिनों के भी रिकॉर्ड तोड़ने के अनुमान हैं। 33वें दिन के ऑल-टाइम चार्ट में हनुमान अंश सबसे ऊपर है। इसकी कमाई इस सूची में दूसरे नंबर पर मौजूद फिल्म से दोगुने से भी ज्यादा है। फिल्म ने 33वें दिन की कमाई में 3 इडियट्स और पठान जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ा है। इन दोनों फिल्मों का पैमाना और स्टार पावर अलग था। हनुमान अंश का यह प्रदर्शन इसकी देर से बढ़ी कमाई की असामान्य रफ्तार दिखाता है। ₹200 करोड़ की ओर बढ़ी फिल्म हनुमान अंश ने 30वें दिन ₹100 करोड़ ग्रॉस और 32वें दिन सिर्फ दो दिन बाद ₹150 करोड़ ग्रॉस का आंकड़ा पार किया था। अब इसका भारत में ग्रॉस कलेक्शन ₹169.20 करोड़ है और ₹200 करोड़ तक पहुंचने के लिए ₹30.80 करोड़ बाकी हैं। फिल्म के तीन बड़े चेहरों के बारे में- डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। ये उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2012 की वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। वह टीवी सीरीज और फिल्मों के डायलॉग राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। विशाल चतुर्वेदी। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। शोभिनव सत्या। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में लीड रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शोज में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे दर्जनों शोज कर चुके हैं। चंदन के. आनंद। क्यों पसंद की जा रही है हनुमान अंश? फिल्म की कामयाबी में सोशल मीडिया का अहम रोल: फिल्म से जुड़े वीडियोज लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फिल्म के कई सीन, नीम करोली बाबा के असल वीडियोज से हुबहू मेल खाते हैं, इसके वीडियोज लगातार सामने आ रहे हैं। सिनेमाघरों से फैंस के वीडियो भी चर्चा में हैं, जिसमें वह भावुक होते और स्क्रीन के सामने हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं। हाउसफुल शोज दिखाए जाने से भी दर्शकों के मन में फिल्म को लेकर उत्सुकता है। फिल्म एक ऐसे सब्जेक्ट पर बनी, जिसमें लोगों की रुचि, लेकिन जानकारी सीमित: ये फिल्म नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी है। उनके भक्त दुनियाभर में हैं। उनके कैंची धाम आश्रम में सालाना हजारों लोग पहुंचते हैं। उनकी जिंदगी पर अब तक कई बुक लिखी गई हैं और डॉक्यूमेंट्री बनी हैं, हालांकि ज्यादातर इंग्लिश में हैं, जिसे आम जनता कम ही जानती है। फिल्म की सादगी और फैक्ट्स: फिल्म हनुमान अंश को बेहद सादगी से फैक्चुअल बनाया गया है। फिल्म को पसंद किए जाने का एक कारण ये भी है कि इसे कमर्शियली नहीं बनाया गया है। डायरेक्टर ने खुद एक इंटरव्यू में दावा किया है कि इस फिल्म को जानकारी मात्र के लिए बनाया गया है, न कि मुनाफे के लिए। एक वजह यह भी है कि फिल्म को भक्तों और दर्शकों का प्यार मिल रहा है। फिल्म का धार्मिक जुड़ाव, एक्टर ने संत की तरह जिए कई महीने जिस समय ये फिल्म बननी शुरू हुई थी, तब फिल्ममेकर्स प्रेमानंद महाराज के पास गए थे। उन्होंने प्रेमानंद महाराज से फिल्म पर सुझाव मांगा था। जिस पर उन्हें सलाह दी गई कि एक्टर्स को संतों की तरह जीना चाहिए। सावधानी से जीवन यापन करना चाहिए और शाकाहारी खाना चाहिए। फिल्म के लीड एक्टर्स ने इसका पालन किया। नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से- ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है। नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला
OpenAI Solves Navier-Stokes Math Problem

2 मिनट पहले कॉपी लिंक ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। गणित की चर्चित क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने साल 2000 में गणित के 7 बेहद मुश्किल और अनसुलझे सवाल चुने थे। इनमें से कई सवाल 100 साल से भी ज्यादा पुराने थे। इन्हें ‘मिलेनियम प्रॉब्लम्स’ कहा गया। इनमें से किसी एक को सही तरीके से हल करने वाले के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम रखा गया था। ओपनएआई के इस दावे से पहले इन सात में से सिर्फ एक समस्या हल हुई थी। इसे 2003 में एक रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने सुलझाया था। यानी कंपनी का दावा सही है तो अब तक दो सवालों के जवाब ढूंढ़ निकाले गए हैं। पहले समझिए, नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम क्या है मान लीजिए आपने एक गिलास पानी फर्श पर गिरा दिया। पानी इधर-उधर फैलने लगेगा। वैज्ञानिक गणित की मदद से यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि पानी किस दिशा में जाएगा, कितनी तेजी से जाएगा और उसका बहाव कैसा होगा। इसके लिए कुछ गणितीय समीकरण हैं, जिन्हें नेवियर–स्टोक्स इक्वेशन कहा जाता है। अब वैज्ञानिकों की समस्या यह थी: क्या ये समीकरण हर हालत में पानी के बहाव का सही हिसाब बता सकते हैं? या फिर कोई ऐसी बेहद मुश्किल स्थिति आ सकती है, जहां गणित का यह हिसाब ही काम करना बंद कर दे? बस, यही नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम है। तरल पदार्थों के बहाव से जुड़े समीकरणों पर आधारित ‘नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम’ लंबे समय से गणित की सबसे बड़ी अनसुलझी समस्याओं में से एक रही है। ओपनएआई का दावा क्या है? ओपनएआई के मुताबिक, उसके एक नए AI मॉडल ने इस समस्या का समाधान निकाला है। यह मॉडल अभी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया गया है, न ही इसके नाम का खुलासा किया गया है। ओपनएआई ने अपने नए मॉडल को GPT-6 अस्ट्रा से भी ज्यादा सक्षम इंटरनल मॉडल बताया है। GPT-6 अस्ट्रा 3 सितंबर 2026 को रिलीज हुआ है। हालांकि AI ने यह काम अकेले एक सिस्टम की तरह नहीं किया। ओपनएआई ने करीब 10,000 AI एजेंट्स को इस काम में लगाया था। ओपनएआई के रिसर्चर डैन रॉबर्ट्स ने इसकी तुलना भौंरे के अलग-अलग फूलों के बीच जाकर पराग पहुंचाने से की। यानी अलग-अलग AI समूहों से मिली जानकारी को दूसरे समूहों तक पहुंचाया गया, जिससे समाधान खोजने में मदद मिली। 7 मिलेनियम प्रॉब्लम्स इतनी अहम क्यों हैं? साल 2000 में जब अमेरिकी संस्था ने ये 7 सवाल चुने, तब इन्हें गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल अनसुलझी समस्याओं में माना जाता था। इन्हें गणित के सामने बड़ी चुनौतियों के तौर पर रखा गया था, ताकि दुनिया के गणितज्ञ इन्हें हल करने की कोशिश करें और इस दौरान गणित में नई खोजें हों। ओपनएआई के दावे से पहले इन 7 में से सिर्फ एक समस्या का समाधान हुआ था। इसलिए ओपनएआई का दावा इतना बड़ा माना जा रहा है। गणित की 7 बड़ी समस्याएं क्या हैं? 1. रिमान हाइपोथेसिस किस बारे में: प्राइन नंबर्स (अभाज्य संख्याएं) यानी 2, 3, 5, 7 जैसी संख्याएं। सवाल: ये संख्याएं देखने में बेतरतीब लगती हैं, लेकिन क्या इनके पीछे कोई छिपा हुआ नियम या पैटर्न है, जिससे पता चल सके कि अगली प्राइम नंबर्स कहां मिलेगी? स्थिति: अभी अनसुलझी। 2. P vs NP किस बारे में: कंप्यूटर के लिए मुश्किल सवाल। सवाल: क्या कंप्यूटर हर ऐसे मुश्किल सवाल का जवाब जल्दी ढूंढ सकता है, जिसका सही जवाब मिलने के बाद उसे जल्दी जांचा जा सकता है? उदाहरण: जैसे किसी बहुत बड़ी पहेली का सही जवाब मिल जाए तो उसे चेक करना आसान है। लेकिन सही जवाब खुद ढूंढना बहुत मुश्किल हो सकता है। P vs NP यही पूछता है कि क्या कंप्यूटर के लिए ऐसे जवाब ढूंढना भी उतना ही आसान हो सकता है। स्थिति: अभी अनसुलझी। 3. नेवियर स्टोक्स प्रोब्लम किस बारे में: पानी और हवा के बहने के बारे में। सवाल: पानी या हवा कैसे बहती है, इसे बताने वाली गणित स्थिति: सुलझाने का दावा किया। 4. यांग–मिल्स और मास गैप किस बारे में: बहुत छोटे कणों और उनकी ऊर्जा के बारे में। सवाल: क्या सबसे कम ऊर्जा वाले कण और उससे ज्यादा ऊर्जा वाले कण के बीच एक निश्चित न्यूनतम अंतर होता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 5. हॉज कन्जेक्चर किस बारे में: बहुत मुश्किल आकृतियों के बारे में। सवाल: क्या इन मुश्किल आकृतियों को आसान गणितीय समीकरणों की मदद से समझाया जा सकता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 6. बर्च एंड स्विनर्टन-डायर कन्जेक्चर किस बारे में: खास तरह के गणितीय समीकरणों के बारे में। सवाल: क्या समीकरण को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि उसके कितने संभावित जवाब हो सकते हैं? स्थिति: अभी अनसुलझी। 7. प्वांकारे कन्जेक्चर किस बारे में: 3D आकृतियों के बारे में। सवाल: अगर कोई 3D आकृति गोल जैसी है और उसमें कोई छेद नहीं है, तो क्या वह असल में 3D गोले जैसी ही होगी? स्थिति: रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने 2002-03 में इसका हल निकाला। यह करीब 100 साल पुरानी गणितीय पहेली थी, जिसे फ्रांसीसी गणितज्ञ हेनरी प्वांकारे ने 1904 में सामने रखा था। पेरेलमैन के इसका हल निकालने के बाद क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने 2010 में उन्हें इस समस्या के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की। हालांकि, पेरेलमैन ने यह इनामी राशि स्वीकार नहीं की। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
OpenAI Solves Navier-Stokes Math Problem

18 मिनट पहले कॉपी लिंक ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। गणित की चर्चित क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने साल 2000 में गणित के 7 बेहद मुश्किल और अनसुलझे सवाल चुने थे। इनमें से कई सवाल 100 साल से भी ज्यादा पुराने थे। इन्हें ‘मिलेनियम प्रॉब्लम्स’ कहा गया। इनमें से किसी एक को सही तरीके से हल करने वाले के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम रखा गया था। ओपनएआई के इस दावे से पहले इन सात में से सिर्फ एक समस्या हल हुई थी। इसे 2003 में एक रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने सुलझाया था। यानी कंपनी का दावा सही है तो अब तक दो सवालों के जवाब ढूंढ़ निकाले गए हैं। पहले समझिए, नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम क्या है मान लीजिए आपने एक गिलास पानी फर्श पर गिरा दिया। पानी इधर-उधर फैलने लगेगा। वैज्ञानिक गणित की मदद से यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि पानी किस दिशा में जाएगा, कितनी तेजी से जाएगा और उसका बहाव कैसा होगा। इसके लिए कुछ गणितीय समीकरण हैं, जिन्हें नेवियर–स्टोक्स इक्वेशन कहा जाता है। अब वैज्ञानिकों की समस्या यह थी: क्या ये समीकरण हर हालत में पानी के बहाव का सही हिसाब बता सकते हैं? या फिर कोई ऐसी बेहद मुश्किल स्थिति आ सकती है, जहां गणित का यह हिसाब ही काम करना बंद कर दे? बस, यही नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम है। तरल पदार्थों के बहाव से जुड़े समीकरणों पर आधारित ‘नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम’ लंबे समय से गणित की सबसे बड़ी अनसुलझी समस्याओं में से एक रही है। ओपनएआई का दावा क्या है? ओपनएआई के मुताबिक, उसके एक नए AI मॉडल ने इस समस्या का समाधान निकाला है। यह मॉडल अभी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया गया है, न ही इसके नाम का खुलासा किया गया है। ओपनएआई ने अपने नए मॉडल को GPT-6 अस्ट्रा से भी ज्यादा सक्षम इंटरनल मॉडल बताया है। GPT-6 अस्ट्रा 3 सितंबर 2026 को रिलीज हुआ है। हालांकि AI ने यह काम अकेले एक सिस्टम की तरह नहीं किया। ओपनएआई ने करीब 10,000 AI एजेंट्स को इस काम में लगाया था। ओपनएआई के रिसर्चर डैन रॉबर्ट्स ने इसकी तुलना भौंरे के अलग-अलग फूलों के बीच जाकर पराग पहुंचाने से की। यानी अलग-अलग AI समूहों से मिली जानकारी को दूसरे समूहों तक पहुंचाया गया, जिससे समाधान खोजने में मदद मिली। 7 मिलेनियम प्रॉब्लम्स इतनी अहम क्यों हैं? साल 2000 में जब अमेरिकी संस्था ने ये 7 सवाल चुने, तब इन्हें गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल अनसुलझी समस्याओं में माना जाता था। इन्हें गणित के सामने बड़ी चुनौतियों के तौर पर रखा गया था, ताकि दुनिया के गणितज्ञ इन्हें हल करने की कोशिश करें और इस दौरान गणित में नई खोजें हों। ओपनएआई के दावे से पहले इन 7 में से सिर्फ एक समस्या का समाधान हुआ था। इसलिए ओपनएआई का दावा इतना बड़ा माना जा रहा है। गणित की 7 बड़ी समस्याएं क्या हैं? 1. रिमान हाइपोथेसिस किस बारे में: प्राइन नंबर्स (अभाज्य संख्याएं) यानी 2, 3, 5, 7 जैसी संख्याएं। सवाल: ये संख्याएं देखने में बेतरतीब लगती हैं, लेकिन क्या इनके पीछे कोई छिपा हुआ नियम या पैटर्न है, जिससे पता चल सके कि अगली प्राइम नंबर्स कहां मिलेगी? स्थिति: अभी अनसुलझी। 2. P vs NP किस बारे में: कंप्यूटर के लिए मुश्किल सवाल। सवाल: क्या कंप्यूटर हर ऐसे मुश्किल सवाल का जवाब जल्दी ढूंढ सकता है, जिसका सही जवाब मिलने के बाद उसे जल्दी जांचा जा सकता है? उदाहरण: जैसे किसी बहुत बड़ी पहेली का सही जवाब मिल जाए तो उसे चेक करना आसान है। लेकिन सही जवाब खुद ढूंढना बहुत मुश्किल हो सकता है। P vs NP यही पूछता है कि क्या कंप्यूटर के लिए ऐसे जवाब ढूंढना भी उतना ही आसान हो सकता है। स्थिति: अभी अनसुलझी। 3. नेवियर स्टोक्स प्रोब्लम किस बारे में: पानी और हवा के बहने के बारे में। सवाल: पानी या हवा कैसे बहती है, इसे बताने वाली गणित स्थिति: सुलझाने का दावा किया। 4. यांग–मिल्स और मास गैप किस बारे में: बहुत छोटे कणों और उनकी ऊर्जा के बारे में। सवाल: क्या सबसे कम ऊर्जा वाले कण और उससे ज्यादा ऊर्जा वाले कण के बीच एक निश्चित न्यूनतम अंतर होता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 5. हॉज कन्जेक्चर किस बारे में: बहुत मुश्किल आकृतियों के बारे में। सवाल: क्या इन मुश्किल आकृतियों को आसान गणितीय समीकरणों की मदद से समझाया जा सकता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 6. बर्च एंड स्विनर्टन-डायर कन्जेक्चर किस बारे में: खास तरह के गणितीय समीकरणों के बारे में। सवाल: क्या समीकरण को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि उसके कितने संभावित जवाब हो सकते हैं? स्थिति: अभी अनसुलझी। 7. प्वांकारे कन्जेक्चर किस बारे में: 3D आकृतियों के बारे में। सवाल: अगर कोई 3D आकृति गोल जैसी है और उसमें कोई छेद नहीं है, तो क्या वह असल में 3D गोले जैसी ही होगी? स्थिति: रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने 2002-03 में इसका हल निकाला। यह करीब 100 साल पुरानी गणितीय पहेली थी, जिसे फ्रांसीसी गणितज्ञ हेनरी प्वांकारे ने 1904 में सामने रखा था। पेरेलमैन के इसका हल निकालने के बाद क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने 2010 में उन्हें इस समस्या के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की। हालांकि, पेरेलमैन ने यह इनामी राशि स्वीकार नहीं की। AI इतनी मुश्किल गणित कैसे कर पा रही है? AI को हजारों गणित के सवाल हल करने के लिए दिए जाते हैं। वह अलग-अलग तरीके आजमाती है और सही-गलत से सीखती है। इस तरह रिइनफोर्समेंट लर्निंग की मदद से AI धीरे-धीरे ऐसे तरीके सीखती है, जिनसे मुश्किल सवाल हल करने की संभावना बढ़ जाती है। यह पहली बार नहीं है जब AI ने बड़ी गणितीय समस्या हल करने का दावा किया है। जनवरी में ओपनएआई ने हंगरी के मशहूर गणितज्ञ पॉल इरदोस की एक गणितीय समस्या हल करने की जानकारी दी थी। गणितज्ञों को AI से चिंता क्यों है? AI की क्षमता से कई गणितज्ञ खुश हैं, लेकिन कुछ को चिंता भी है। टेरेंस ताओ का कहना है कि किसी मुश्किल
जयपुर में बॉबी देओल का आलीशान 'आश्रम':वेबसीरीज के सीजन-4 की शूटिंग शुरू, लग्जरी होटल में सेट, दीवारों पर 'बाबा निराला' की PHOTOS

बॉबी देओल स्टारर चर्चित वेब सीरीज ‘आश्रम’ के चौथे सीजन की शूटिंग जयपुर में हो रही है। सीरीज का सेट जयपुर के कूकस में लग्जरी होटल शिव विलास में बनाया गया है। डायरेक्टर प्रकाश झा की इस सीरज में इन दिनों त्रिधा चौधरी और चंदन रॉय सान्याल सहित दूसरे कलाकारों के अहम सीन शूट किए जा रहे हैं। जल्द ही बॉबी देओल भी यूनिट को जॉइन करेंगे। सबसे पहले देखिए- लोकेशन की PHOTOS जयपुर के कलाकारों को भी मिला मौका ‘आश्रम 4’ की शूटिंग के लिए जयपुर और आसपास के बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकारों के ऑडिशन भी लिए गए। इनमें से कई कलाकारों को बाबा निराला के शिष्यों और अनुयायियों की भूमिका में शामिल किया गया है। स्थानीय कलाकारों के लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि सीरीज की कहानी में आश्रम के अनुयायियों और उसके आसपास के माहौल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एक साथ नजर आएंगे बाबा निराला और भोपा स्वामी ‘आश्रम’ की कहानी में बाबा निराला के सबसे खास सहयोगी भोपा स्वामी का किरदार निभाने वाले चंदन रॉय सान्याल भी चौथे सीजन में नजर आएंगे। त्रिधा चौधरी भी बबीता की भूमिका में नजर आएंगी। दोनों आर्टिस्ट फिलहाल जयपुर में शूट कर रहे हैं। सीरीज में अदिति पोहनकर पम्मी, त्रिधा चौधरी बबीता, दर्शन कुमार उजागर सिंह, अनुप्रिया गोयनका डॉ. नताशा, सचिन श्रॉफ हुकुम सिंह, प्रीति सूद साध्वी माता की भूमिका में है। चौथे सीजन में कुछ नए कलाकारों की एंट्री भी हुई है। इनमें नीतू चंद्रा श्रीवास्तव, पंखुड़ी गिडवानी, अरमान पारिख, ध्रुव चौधरी और अक्षय ओबेरॉय के नाम शामिल हैं।
नेपाल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट:हिमालयी इलाकों में बर्फबारी की संभावना; बाढ़ से अब तक 1,377 की मौत, 5,326 लापता

नेपाल में बुधवार को भारी बारिश और आंधी का अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी के पहाड़ी और तराई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। वहीं, हिमालयी इलाकों में बर्फबारी और बिजली गिरने की संभावना है। कोशी, बागमती और गंडकी के हिमालयी इलाकों में बारिश या बर्फबारी के साथ गरज-चमक हो सकती है। लुंबिनी, कर्णाली के कुछ हिमालयी इलाकों में भी बर्फबारी का अनुमान है। वहीं, 26 अगस्त की बाढ़ में अब तक 1,377 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,326 लोग लापता हैं। बाढ़ में 6,827 लोग घायल हुए हैं और 7,570 घर टूटे या क्षतिग्रस्त हुए हैं। नेपाल बाढ़ से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
SSC Recruitment 2026 | Apply Online for 2536 Posts

Hindi News Career SSC Recruitment 2026 | Apply Online For 2536 Posts | Official Website 4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने 2,536 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट ssc.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एप्लीकेशन फॉर्म के लिए करेक्शन विंडो और करेक्शन फीस के ऑनलाइन भुगतान की तारीख 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर की रात 11 बजे तय की गई है। फीस : जनरल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (पुरुष) : 100 रुपए प्रतिमाह एससी, एसटी, पूर्व सैनिक, विकलांग, महिला : नि:शुल्क एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 27 साल सरकारी नियमों के मुताबिक आरक्षित वर्गों जैसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग (PwD) उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : टियर – 1 टियर – 2 स्किल टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सैलरी : 19,900 से 92,300 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी दिया जाएगा। ऐसे करें आवेदन : एसएससी की ऑफिशियल वेबसाइट ssc.nic.in पर जाएं। होम पेज पर दिए गए अप्लाई टैब पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके एप्लीकेशन फॉर्म भरें। मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ———————————————————————- ये खबर भी पढ़ें RRB NTPC ने 5165 पदों पर निकाली भर्ती:12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट्स को मौका, एज लिमिट 33 साल रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने NTPC में 5165 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पिथौरागढ़ में भारत के बनाए पुल पर नेपाल की आपत्ति:कहा- बोर्ड पर नाम बदलें, यह हमारा इलाका; पुल चालू होने से बचेगा 200km का सफर

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास काली नदी पर बने भारत-नेपाल मोटर पुल के स्वागत बोर्ड को लेकर दोनों देशों की सीमा पर विवाद खड़ा हो गया है। पुल के नेपाल वाले हिस्से में लगाए गए बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाली पक्ष का कहना है कि नेपाल की जमीन पर लगे बोर्ड में भारतीय पता नहीं, बल्कि नेपाल के संबंधित क्षेत्र का नाम होना चाहिए। 32.98 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल का पूरा खर्च भारत ने उठाया है, जबकि इसका दूसरा छोर नेपाल में है। आपत्ति के बाद भारत की तरफ से नाम ढक दिया गया है। पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए अब तक कोई मोटर पुल नहीं होने के कारण लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा और आवाजाही के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विवाद से जुड़ी दो तस्वीरें- 5 पॉइंट में पूरी खबर… 1. उद्घाटन से पहले बोर्ड पर विवाद- पिथौरागढ़ के धारचूला में छारछुम के पास काली नदी पर भारत और नेपाल को जोड़ने वाला मोटर पुल बनकर तैयार है। संचालन शुरू होने से पहले नेपाल की ओर लगाए गए स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेपाली हिस्से में लगे बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई गई है। 2. नेपाली हिस्से में भारतीय गांव का नाम लिखने पर आपत्ति- नेपाल की ओर लगे ‘वेलकम टू नेपाल’ बोर्ड पर ‘काली नदी, छारछुम’ लिखा गया है। नेपाल के स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बोर्ड पर नेपाली क्षेत्र का नाम लिखने की मांग की है। नेपाल की ओर इस स्थान का पता महाकाली नगरपालिका-8, असिगड़ा, दार्चुला बताया गया है। मामले की जानकारी नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय और जिला प्रशासन को भी दी गई है। 3. आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष ने सुधार का दिया आश्वासन- स्थानीय स्तर पर आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष की ओर से बोर्ड में सुधार का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार, नेपाल की ओर लगे बोर्ड में भारतीय गांव के नाम को ढक दिया गया है। वहां नेपाल के स्थानीय क्षेत्र का नाम दर्ज करते हुए नया बोर्ड लगाए जाने की तैयारी है। 4. 2022 में शिलान्यास, ₹32.98 करोड़ की लागत- मल्ला छारछुम में काली नदी पर बने इस करीब 110 मीटर लंबे मोटर पुल का शिलान्यास सितंबर 2022 में किया गया था। इसकी निर्माण लागत 32 करोड़ 98 लाख रुपए है। भारत सरकार के अनुसार, फरवरी 2022 में भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी पर मोटरेबल पुल बनाने के लिए समझौता हुआ था। परियोजना का वित्तीय सहयोग भारत सरकार की अनुदान सहायता के तहत किया गया है। 5. 200 KM का चक्कर बचेगा, व्यापार को भी बढ़ावा- पिथौरागढ़ जिले में भारत-नेपाल के बीच मोटर पुल नहीं होने के कारण वाहनों से नेपाल जाने के लिए लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा। इससे यात्रा का समय और खर्च कम होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पिथौरागढ़ की नेपाल से करीब 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए जिले में 10 अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी हैं। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… टनल के अंदर चार मंजिला बिल्डिंग, बिना ऑक्सीजन फंसे मजदूर:माउंट एवरेस्ट विजेता रेस्क्यू में जुटे; कहीं बिना सिर की बॉडी, कहीं सिर्फ पैर मिला ‘मैं टनल में रेस्क्यू के लिए घुसा, तो दलदल में धंसने लगा। जितना हिलता, उतना ही धंसता गया। फिर समझ आया कि यहां जमीन ही निगल रही है। मैं कमर तक धंसा था। निकलने में करीब 1 घंटे लग गए। रसुवा की इस टनल में जो देखा, ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ।’ ये बता रहे माउंटेन गाइड विक्रम कर्के रसुवा की टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा हैं। वे चिलिमे, त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3 A टनल के रेस्क्यू में शामिल हैं, जहां 100 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। इन्हें निकालने के लिए नेपाल और भारतीय सेना समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमें जुटी हैं। टनल के अंदर का हाल बताते हुए विक्रम कहते हैं, ‘मशीनों के बिना यहां फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल है। विक्रम ने हमें रेस्क्यू की पूरी कहानी बताई…(पढ़ें पूरी खबर)
मिर्जापुर मेकर्स को लीगल नोटिस:बिना इजाजत शूरवीर गाना इस्तेमाल करने के आरोप; ऑरिजिनल सिंगर ने सार्वजनिक माफी, गाना हटाने की मांग की, जानिए पूरा विवाद

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल को लेकर विवाद हो गया है। इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट रैपरिया बालम ने आरोप लगाया है कि फिल्म में यह गाना उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया गया। उन्होंने एक्सेल एंटरटेनमेंट को लीगल नोटिस भेजा है। रैपरिया बालम का कहना है कि वह ‘शूरवीर’ गाने के कॉपीराइट मालिक हैं। यह गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है। उनका दावा है कि फिल्म में इसे मुन्ना भैया के हिंसा, गाली-गलौज और ड्रग्स वाले किरदार के साथ इस्तेमाल किया गया है। रैपरिया बालम ने गाना हटाने, माफी मांगने और महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनाने की मांग की है। लीगल नोटिस में ये तीनों मांगें शामिल हैं। लीगल नोटिस में तीन मांगें गाना कंपोज करने और इसे आवाज देने वाले रैपरिया बालम ने लीगल नोटिस भेजकर तीन मांग की हैं। पहली मांग- मेकर्स को फिल्म से ये गाना हटाना होगा। दूसरी मांग- मेकर्स को हिंसक सीन में महाराणा प्रताप पर बना गाना रखने पर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी। तीसरी मांग- गांव में महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनवाना होगा। जानिए क्या है पूरा विवाद? फिल्म मिर्जापुर 4 सितंबर को रिलीज हुई, जिसके एक हिंसक सीन में शूरवीर गाना दिखाया गया। फिल्म रिलीज के बाद राजस्थान के मशहूर सिंगर रैपरिया बालम ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि ये गाना बिना उनकी इजाजत के फिल्म में इस्तेमाल हुआ है। ये गाना महाराणा प्रताप की वीरता पर बनाया गया है, लेकिन मिर्जापुर के मेकर्स ने इसका इस्तेमाल विलेन का महिमामंडन करने के लिए किया। गाना रिलीज करने वाली म्यूजिक कंपनी ने मिर्जापुर टीम को दिया कॉपीराइट सिंगर रैपरिया बालम का दावा है कि गाने के कॉपी राइट्स उनके पास हैं, हालांकि ये गाना रिलीज करने वाले ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने इस दावे का खंडन किया। इतना ही नहीं कंपनी ने विवाद के बीच मिर्जापुर के मेकर्स को इस गाने के राइट्स भी दे दिए हैं। कॉपीराइट को लेकर रैपरिया बालम का दावा रैपरिया बालम के भाई ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताया है, ‘गाना ट्रूपर रिकॉर्ड्स के चैनल पर है, लेकिन कॉपीराइट हमारे पास है। अगर इसे फिल्म में इस्तेमाल करना है, तो हमसे अनुमति लेनी होगी। वे इसे लाइसेंस नहीं कर सकते। यह गैरकानूनी है। रैपरिया बालम और ट्रूपर रिकॉर्ड्स पहले साथ काम करते थे। दस्तावेजों में रैपरिया बालम पार्टनर नहीं थे, लेकिन वह उनके साथ काम कर रहे थे। समझौते के मुताबिक, कुछ साल बाद वह रिकॉर्ड्स में कानूनी तौर पर 50% पार्टनर बनने वाले थे।’ उन्होंने बताया कि पार्टनरशिप होने से पहले यह गाना रिलीज हो गया था। उनके मुताबिक, रैपरिया बालम को उस चैनल के लिए बनाए गए किसी भी गाने का भुगतान नहीं मिला। बाद में जब पार्टनरशिप को लेकर बात शुरू हुई, तो ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने मामला टालना शुरू कर दिया। इन गानों को लेकर कभी NOC भी साइन नहीं हुआ। रैपरिया बालम के भाई ने कहा कि बाद में उन्होंने अपना चैनल शुरू किया और गानों के कॉपीराइट अपने असली नाम अशोक मंडा से हासिल किए। उन्होंने कहा, “‘शूरवीर’ से जुड़े सभी कॉपीराइट दस्तावेज रैपरिया बालम के असली नाम अशोक मंडा पर हैं। उन्होंने इस गाने का कॉपीराइट अपने नाम कराया था। बाद में हमने ‘शूरवीर’ सीरीज में 9-10 और गाने बनाए। इन सभी के कॉपीराइट सर्टिफिकेट हमारे पास हैं। लेखक की ओर से NOC भी हमारे पास है।” जिन सीन पर गाना रखा, उससे आपत्ति रैपरिया बालम का कहना है कि मामला केवल कॉपीराइट का नहीं है। उनके मुताबिक, ‘शूरवीर’ सीरीज का मकसद बच्चों को भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक शख्सियतों की कहानियां संगीत के जरिए समझाना था। ऐसे में शूरवीर की कहानी को किसी फिल्म के हिंसक और गोली चलाने वाले सीन में इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। उनके भाई ने कहा, “ये गाने कमर्शियल नहीं हैं। हमारा मकसद था कि अगली पीढ़ी हमारे इतिहास से जुड़े। हम चाहते थे कि बच्चे रैप म्यूजिक के जरिए इतिहास सीखें और अपने नेताओं की कहानियां जानें।” उन्होंने कहा कि हर कलाकार का सपना होता है कि उसका गाना किसी अच्छी फिल्म में आए और यह उनका भी सपना था। लेकिन इस सीरीज के साथ उनकी कुछ विचारधाराएं जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, “मिर्जापुर में मुन्ना भैया गाली दे रहे हैं और ड्रग्स ले रहे हैं। उसके किरदार को दिखाने के लिए बैकग्राउंड म्यूजिक में यह गाना लगाया गया है। यह हमारी राजस्थानी संस्कृति और महाराणा प्रताप का अपमान है। अगर कोई बच्चा यह देखेगा, तो वह मुन्ना भैया जैसे किरदार को महाराणा प्रताप से जोड़ सकता है। इससे गलत धारणा बनेगी।” उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘मिर्जापुर’ के मेकर्स भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि लाइसेंस लेने से पहले उन्हें सही दस्तावेज जांचने चाहिए थे। उनके मुताबिक, एक्सेल एंटरटेनमेंट की गलती यह है कि उसने महाराणा प्रताप को समर्पित गाने को एक गुंडे के किरदार को दिखाने के लिए चुना। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क रैपरिया बालम और उनके परिवार ने ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर्स फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क करने की कोशिश की। परिवार के मुताबिक, फरहान अख्तर ने जवाब नहीं दिया। रितेश सिधवानी की टीम ने कहा कि वह उनसे संपर्क करेगी। परिवार का कहना है कि वह टीम से नहीं, बल्कि फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से सीधे बात करना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम समझना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। हम चाहते हैं कि गाना ‘मिर्जापुर’ से हटा दिया जाए। यह इस फिल्म के लिए नहीं बना है। इसे गलत तरीके से दिखाने से हमारी भावनाओं और विचारधारा को ठेस पहुंच रही है।” परिवार ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस गाने को फिल्म में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। उसने ट्रूपर रिकॉर्ड्स से भी बात करने से इनकार किया है।
मिर्जापुर मेकर्स को लीगल नोटिस:बिना इजाजत शूरवीर गाना इस्तेमाल करने के आरोप; ऑरिजिनल सिंगर ने सार्वजनिक माफी, गाना हटाने की मांग की, जानिए पूरा विवाद

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल को लेकर विवाद हो गया है। इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट रैपरिया बालम ने आरोप लगाया है कि फिल्म में यह गाना उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया गया। उन्होंने एक्सेल एंटरटेनमेंट को लीगल नोटिस भेजा है। रैपरिया बालम का कहना है कि वह ‘शूरवीर’ गाने के कॉपीराइट मालिक हैं। यह गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है। उनका दावा है कि फिल्म में इसे मुन्ना भैया के हिंसा, गाली-गलौज और ड्रग्स वाले किरदार के साथ इस्तेमाल किया गया है। रैपरिया बालम ने गाना हटाने, माफी मांगने और महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनाने की मांग की है। लीगल नोटिस में ये तीनों मांगें शामिल हैं। लीगल नोटिस में तीन मांगें गाना कंपोज करने और इसे आवाज देने वाले रैपरिया बालम ने लीगल नोटिस भेजकर तीन मांग की हैं। पहली मांग- मेकर्स को फिल्म से ये गाना हटाना होगा। दूसरी मांग- मेकर्स को हिंसक सीन में महाराणा प्रताप पर बना गाना रखने पर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी। तीसरी मांग- गांव में महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनवाना होगा। जानिए क्या है पूरा विवाद? फिल्म मिर्जापुर 4 सितंबर को रिलीज हुई, जिसके एक हिंसक सीन में शूरवीर गाना दिखाया गया। फिल्म रिलीज के बाद राजस्थान के मशहूर सिंगर रैपरिया बालम ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि ये गाना बिना उनकी इजाजत के फिल्म में इस्तेमाल हुआ है। ये गाना महाराणा प्रताप की वीरता पर बनाया गया है, लेकिन मिर्जापुर के मेकर्स ने इसका इस्तेमाल विलेन का महिमामंडन करने के लिए किया। गाना रिलीज करने वाली म्यूजिक कंपनी ने मिर्जापुर टीम को दिया कॉपीराइट सिंगर रैपरिया बालम का दावा है कि गाने के कॉपी राइट्स उनके पास हैं, हालांकि ये गाना रिलीज करने वाले ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने इस दावे का खंडन किया। इतना ही नहीं कंपनी ने विवाद के बीच मिर्जापुर के मेकर्स को इस गाने के राइट्स भी दे दिए हैं। कॉपीराइट को लेकर रैपरिया बालम का दावा रैपरिया बालम के भाई ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताया है, ‘गाना ट्रूपर रिकॉर्ड्स के चैनल पर है, लेकिन कॉपीराइट हमारे पास है। अगर इसे फिल्म में इस्तेमाल करना है, तो हमसे अनुमति लेनी होगी। वे इसे लाइसेंस नहीं कर सकते। यह गैरकानूनी है। रैपरिया बालम और ट्रूपर रिकॉर्ड्स पहले साथ काम करते थे। दस्तावेजों में रैपरिया बालम पार्टनर नहीं थे, लेकिन वह उनके साथ काम कर रहे थे। समझौते के मुताबिक, कुछ साल बाद वह रिकॉर्ड्स में कानूनी तौर पर 50% पार्टनर बनने वाले थे।’ उन्होंने बताया कि पार्टनरशिप होने से पहले यह गाना रिलीज हो गया था। उनके मुताबिक, रैपरिया बालम को उस चैनल के लिए बनाए गए किसी भी गाने का भुगतान नहीं मिला। बाद में जब पार्टनरशिप को लेकर बात शुरू हुई, तो ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने मामला टालना शुरू कर दिया। इन गानों को लेकर कभी NOC भी साइन नहीं हुआ। रैपरिया बालम के भाई ने कहा कि बाद में उन्होंने अपना चैनल शुरू किया और गानों के कॉपीराइट अपने असली नाम अशोक मंडा से हासिल किए। उन्होंने कहा, “‘शूरवीर’ से जुड़े सभी कॉपीराइट दस्तावेज रैपरिया बालम के असली नाम अशोक मंडा पर हैं। उन्होंने इस गाने का कॉपीराइट अपने नाम कराया था। बाद में हमने ‘शूरवीर’ सीरीज में 9-10 और गाने बनाए। इन सभी के कॉपीराइट सर्टिफिकेट हमारे पास हैं। लेखक की ओर से NOC भी हमारे पास है।” जिन सीन पर गाना रखा, उससे आपत्ति रैपरिया बालम का कहना है कि मामला केवल कॉपीराइट का नहीं है। उनके मुताबिक, ‘शूरवीर’ सीरीज का मकसद बच्चों को भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक शख्सियतों की कहानियां संगीत के जरिए समझाना था। ऐसे में शूरवीर की कहानी को किसी फिल्म के हिंसक और गोली चलाने वाले सीन में इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। उनके भाई ने कहा, “ये गाने कमर्शियल नहीं हैं। हमारा मकसद था कि अगली पीढ़ी हमारे इतिहास से जुड़े। हम चाहते थे कि बच्चे रैप म्यूजिक के जरिए इतिहास सीखें और अपने नेताओं की कहानियां जानें।” उन्होंने कहा कि हर कलाकार का सपना होता है कि उसका गाना किसी अच्छी फिल्म में आए और यह उनका भी सपना था। लेकिन इस सीरीज के साथ उनकी कुछ विचारधाराएं जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, “मिर्जापुर में मुन्ना भैया गाली दे रहे हैं और ड्रग्स ले रहे हैं। उसके किरदार को दिखाने के लिए बैकग्राउंड म्यूजिक में यह गाना लगाया गया है। यह हमारी राजस्थानी संस्कृति और महाराणा प्रताप का अपमान है। अगर कोई बच्चा यह देखेगा, तो वह मुन्ना भैया जैसे किरदार को महाराणा प्रताप से जोड़ सकता है। इससे गलत धारणा बनेगी।” उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘मिर्जापुर’ के मेकर्स भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि लाइसेंस लेने से पहले उन्हें सही दस्तावेज जांचने चाहिए थे। उनके मुताबिक, एक्सेल एंटरटेनमेंट की गलती यह है कि उसने महाराणा प्रताप को समर्पित गाने को एक गुंडे के किरदार को दिखाने के लिए चुना। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क रैपरिया बालम और उनके परिवार ने ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर्स फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क करने की कोशिश की। परिवार के मुताबिक, फरहान अख्तर ने जवाब नहीं दिया। रितेश सिधवानी की टीम ने कहा कि वह उनसे संपर्क करेगी। परिवार का कहना है कि वह टीम से नहीं, बल्कि फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से सीधे बात करना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम समझना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। हम चाहते हैं कि गाना ‘मिर्जापुर’ से हटा दिया जाए। यह इस फिल्म के लिए नहीं बना है। इसे गलत तरीके से दिखाने से हमारी भावनाओं और विचारधारा को ठेस पहुंच रही है।” परिवार ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस गाने को फिल्म में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। उसने ट्रूपर रिकॉर्ड्स से भी बात करने से इनकार किया है।
रूस से 75 सुखोई-57 फाइटर जेट का सौदा संभव:कीमत ₹1 लाख करोड़ तक; भारत ऐसी टेक्नोलॉजी चाहता है, जो आगे भी काम आए

भारत और रूस के बीच 75 सुखोई-57 फाइटर जेट खरीदने पर समझौता हो सकता है। दोनों देशों के बीच इस सौदे की शर्तों पर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। सौदा हुआ तो इसकी कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक हो सकती है। इसमें विमान के साथ हथियार, पुर्जे, ट्रेनिंग, सिम्युलेटर और रखरखाव भी शामिल होगा। भारत चाहता है कि विमान खरीदने के साथ उसे ऐसी टेक्नोलॉजी भी मिले, जो आगे लड़ाकू विमान बनाने के काम आए। रूस भारत में सुखोई-57 बनाने की पेशकश पहले ही कर चुका है। भारत इस प्रोजेक्ट में अपनी कंपनियों की भागीदारी और जरूरी तकनीक तक पहुंच चाहता है। BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली में मिलेंगे। इस बैठक में सुखोई-57 के अलावा रक्षा, परमाणु ऊर्जा और दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी बात होगी। वायुसेना को अभी सुखोई-57 पर पूरा भरोसा नहीं भारतीय वायुसेना को सुखोई-57 की क्षमता पर अभी पूरा भरोसा नहीं है। भारत पहले रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने के प्रोजेक्ट में शामिल था, लेकिन बाद में इससे बाहर हो गया। उस समय विमान के रडार से बचने और जरूरी टेक्नोलॉजी मिलने को लेकर सवाल उठे थे। अब वायुसेना यह देख रही है कि सुखोई-57 रडार से कितना बच सकता है, दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से कैसे निपटता है और अलग-अलग हथियारों के साथ कितना अच्छा काम करता है। सुखोई-57 से दूसरे लड़ाकू विमानों को भी फायदा सुखोई-57 की सबसे बड़ी खासियत उसका स्टील्थ डिजाइन है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के करीब पहुंचने में किया जा सकता है। यह विमान अकेले हमला करने के बजाय दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस और लड़ाकू विमानों की जानकारी पीछे मौजूद भारतीय विमानों तक पहुंचा सकता है। इसे राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, अवाक्स, ग्राउंड रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से जोड़ा जाए तो यह पूरी वायुसेना की ताकत बढ़ा सकता है। सुखोई-30 को लंबी दूरी की मिसाइल देने की तैयारी भारत सुखोई-30 एमकेआई की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए आर-37एम जैसी लंबी दूरी की मिसाइल चाहता है। यह मिसाइल करीब 300 किमी दूर तक लक्ष्य पर हमला कर सकती है और दुश्मन के अवाक्स जैसे बड़े विमानों को भी निशाना बना सकती है। परमाणु ऊर्जा पर भी होगी बात बैठक में सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर भी चर्चा होगी। रूस तमिलनाडु के कुडनकुलम में छह परमाणु रिएक्टरों के निर्माण में भारत का साझेदार है। दोनों देश एक और परमाणु परियोजना पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। भारत परमाणु पनडुब्बियों के लिए ज्यादा ताकतवर रिएक्टर से जुड़ी रूसी तकनीकी मदद भी चाहता है। इस पर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। एस-400 की बाकी सप्लाई पर भी बात बैठक में एस-400 मिसाइल सिस्टम की बाकी सप्लाई पर भी चर्चा हो सकती है। भारत ने रूस से 5 एस-400 सिस्टम खरीदने के लिए 5.43 अरब डॉलर का सौदा किया था। इनमें से 4 सिस्टम भारत को मिल चुके हैं। रूस बाकी सिस्टम की सप्लाई पूरी करने का भरोसा दे सकता है। यूक्रेन युद्ध पर भारत के प्रयासों का स्वागत करेगा रूस रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए भारत की कोशिशों का स्वागत करेगा। उन्होंने कहा कि मॉस्को युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के तरीकों पर भारत के साथ संपर्क में है। ब्रिक्स देशों का साझा सैटेलाइट नेटवर्क भी एजेंडे में ब्रिक्स सम्मेलन में 11 सदस्य देशों के सैटेलाइट डेटा को जोड़ने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके तहत अलग-अलग देशों के भू-अवलोकन उपग्रहों से मिलने वाला डेटा साझा कर एक बड़ा नेटवर्क बनाने की योजना है। इससे किसी एक देश का सैटेलाइट डेटा जरूरत पड़ने पर दूसरे सदस्य देश के काम आ सकेगा। ब्रिक्स में इस तरह के सहयोग का ढांचा पहले से मौजूद है और अब नए सदस्य देशों को भी इसमें जोड़ने की तैयारी है।






