बांग्लादेश सेना का चीनी टैंक फायरिंग अभ्यास में फटा:2 सैनिकों की मौत, एक अधिकारी गंभीर; हादसे की वजह अभी साफ नहीं

बांग्लादेश के चटगांव में बुधवार को सेना के फायरिंग अभ्यास के दौरान चीन में बना टाइप 59 टैंक फट गया। हादसे में टैंक के अंदर मौजूद दो सैनिकों की मौत हो गई। एक सैन्य अधिकारी गंभीर रूप से घायल है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस डायरेक्टोरेट (ISPR) के मुताबिक, सैनिक टैंक से फायरिंग कर रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। घायल अधिकारी को बेहतर इलाज के लिए ढाका के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) ले जाया जा रहा है। हादसे की वजह अभी तक साफ नहीं है। हादसे के दौरान की तस्वीरें… खबर लगातार अपडेट हो रही है…
DDU Gorakhpur University Controversy | SI Threatens Students Video Viral

Hindi News Career DDU Gorakhpur University Controversy | SI Threatens Students Video Viral 10 मिनट पहले कॉपी लिंक दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी यानी DDU कैंपस का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सब इंस्पेक्टर (दरोगा) स्टूडेंट्स को धमकाते हुए कह रहे हैं कि ‘इतनी फोर्स लगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, जानते नहीं हो ये गोरखपुर पुलिस है।’ बता दें कि ये वीडियो DDU कैंपस का है, जहां कुछ स्टूडेंट्स अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। ये वीडियो इन स्टूडेंट्स को हटाने का है, जो अब वायरल हो रहा है। स्टूडेंट्स को हटाने पहुंचे थे एडिशनल प्रॉक्टर ये स्टूडेंट्स DDU कैंपस के प्रशासनिक भवन के सामने अपनी कुछ मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इन्हें हटाने के लिए यूनिवर्सिटी के एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय, पुलिस फोर्स और यूनिवर्सिटी गार्ड पहुंचे थे। जब स्टूडेंट्स ने इसका विरोध किया तो उन्हें प्रशासनिक भवन से हटाने की कोशिश की गई। धक्का-मुक्की हुई और दरोगा (SI) ने धमकी दी DDU कैंपस से जब भूख हड़ताल कर रहे स्टूडेंट्स को हटाने की कोशिश की गई, तो उनके सपोर्ट में बैठे स्टूडेंट भड़क गए। देखते ही देखते छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बहस और नोकझोंक की स्थिति बन गई। विवाद बढ़ने के दौरान मौके पर धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय को वहां से निकलना पड़ा। ये धरना 25 अगस्त को शुरू हुआ और जब स्टूडेंट्स की मांगे नहीं मानी गईं तो स्टूडेंट्स 5 सितंबर को भूख हड़ताल पर बैठ गए। यूनिवर्सिटी में चल रही अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन DDU में छात्रों का ये प्रदर्शन 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने चल रहा था। छात्र नेता यूनिवर्सिटी से जुड़ी अपनी समस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर धरने पर बैठे थे। 5 सितंबर से ये धरना भूख हड़ताल में बदल गया। स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सोशल मीडिया पर पुलिस से सवाल पूछ रहे हैं यूजर इसी पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। इसी दौरान एक दारोगा का वीडियो रिकॉर्ड हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दारोगा के इस बयान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सोशल मीडिया पर यूजर स्टूडेंट्स के समर्थन में उतर आए हैं। हालांकि अभी तक इस वीडियो पर DDU ने कोई भी सफाई नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट- शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार हाल ही में दिल्ली में जंतर-मंतर पर पेपर लीक को लेकर हुए बड़े प्रदर्शन में स्टूडेंट्स के खिलाफ हुई FIR पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम CJI सूर्यकांत ने कहा था कि संविधान शांतिपूर्ण ढंग से और कानून के दायरे में रहकर किये गए प्रदर्शन की पूरी तरह आजादी देता है। देशभर के कॉलेज में चल रहे प्रोटेस्ट हाल ही में गांधी मेडिकल कॉलेज (भोपाल) और गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (ग्वालियर) में स्टाइपेंड बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर इंटर्न व जूनियर डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया, जिस दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन भी चलाए। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ हैदराबाद में कॉन्वोकेशन में मुख्य अतिथि की उपस्थिति और अन्य मुद्दों पर 400 से ज्यादा छात्रों ने विरोध जताया था। IIT दिल्ली में स्टूडेंट के सुसाइड के बाद और अन्य व्यवस्थाओं के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद जांच समिति बनाई गई। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एग्जाम रिजल्ट में पारदर्शिता और अन्य प्रशासनिक मांगों को लेकर छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना किया था। IISER (पुणे) में परिसर में छात्र की मौत के बाद मेंटल हेल्थ और अन्य मांगों को लेकर लगभग 900 छात्रों ने साइन किये थे और विरोध प्रदर्शन किया था। ——————- ये खबर भी पढ़ें.. भारत के 3 राज्यों में मेडिकल इंटर्न की हड़ताल:स्टाइपेंड बढ़ाने की कर रहे मांग, वाटर कैनन, लाठीचार्ज, कहा – हम डॉक्टर हैं, क्रिमिनल नहीं मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में आज भी प्रदर्शन जारी है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
शोभिनव सत्या बोले- डायरेक्टर की जिद पर बनी हनुमान अंश:नीम करौली बाबा का रोल निभाने वाले एक्टर ने कहा- टीम छोड़ने लगी थी

मुंबई से यूपी आने के लिए पूरी टीम को ट्रेन से सफर करना था लेकिन टिकट नहीं मिल रहा था। टीम ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। टीम मेंबर भी काम छोड़कर जाने लगे थे। लेकिन डायरेक्टर की जिद थी कि फिल्म हर हाल में पूरी करेंगे। ये बातें फिल्म हनुमान अंश में नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या ने कही। बुधवार को हनुमान अंश फिल्म की टीम कानपुर में थी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में टीम ने मीडिया से बातचीत के साथ छात्रों से संवाद भी किया। लोग काम छोड़कर जाने लगे थे अभिनेता शोभिनव सत्या ने कहा- बाबा के आशीर्वाद के बिना इस किरदार को निभाना और एक भी शब्द बोल पाना मुमकिन नहीं था। शोभिनव सत्या ने कहा- बाबा के किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि आस्था और जिम्मेदारी का विषय था। फिल्म में किरदार को जीवंत करने के लिए टीम ने काफी मेहनत की है। केवल डिवोशनल फिल्म नहीं, कई सीन देखने को मिलेंगे फिल्म के निर्देशक, प्रोड्यूसर और लेखक विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। यदि फिल्म दर्शकों को पसंद आती है और अच्छा प्रदर्शन करती है तो इसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हनुमान अंश केवल डिवोशनल फिल्म नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे सीन हैं जो दर्शकों को अलग अनुभव देंगे। कानपुर के कई कलाकार भी फिल्म का हिस्सा विशाल चतुर्वेदी ने बताया- फिल्म में कानपुर और आसपास के कई कलाकारों ने काम किया है। फिल्म की कहानी नीम करौली बाबा यानी महाराज जी से जुड़ी है। इसमें महाराज जी की कहानी के साथ उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को पर्दे पर दिखाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में महाराज जी का मैजिक और पूरी टीम की मेहनत देखने को मिलेगी। फिल्म का दूसरा पार्ट भी आएगा फिल्म के राइटर ने बताया कि वह पिछले करीब 20 साल से महाराज जी के बारे में पढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में उनके साथ कुछ ऐसे वाकिये हुए, जिनसे उन्हें महाराज जी पर फिल्म बनाने में रुचि पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अभी कहानी कानपुर तक नहीं पहुंची है और फिल्म में वर्ष 1943 तक की कहानी को दिखाया गया है। उन्होंने कहा- आगे बनने वाली फिल्मों में महाराज जी से जुड़े दूसरे किस्सों और प्रसंगों को भी दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से- ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है। नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला कि बाबा का सितंबर 1973 में निधन हो चुका था। जॉब्स फिर भी भारत में करीब सात महीने रहे। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। बाद में उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन पर गहरा असर डालने वाला अनुभव माना। मार्क जुकरबर्ग भी मिलने पहुंचे थेः 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भारत आए और कैंची धाम गए। उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि जब फेसबुक मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत जाकर उस मंदिर/आश्रम को देखने की सलाह दी थी, जहां वे स्वयं कभी गए थे। हॉलीवुड एक्ट्रेस थीं नीम करोली बाबा से प्रेरितः हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स ने भी नीम करौली बाबा से प्रभावित होने की बात कही है। उनके अनुसार, उन्होंने बाबा की एक तस्वीर देखी और उन्हें उनके प्रति एक गहरा आकर्षण महसूस हुआ। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट ने लिखी बुकः अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए और नीम करौली बाबा के शिष्य बने। बाबा ने उन्हें राम दास नाम दिया। इसके बाद राम दास अमेरिका लौटे और उन्होंने पश्चिमी दुनिया में बाबा की शिक्षाओं और भारतीय आध्यात्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध किताब ‘बी हेयर नाऊ’ ने लाखों लोगों को ध्यान, योग और भारतीय आध्यात्मिक विचारों से परिचित कराया। ————————– यह खबर भी पढ़िए- योगी बोले- हम उनमें से नहीं, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाएं, बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो जहन्नुम जाओगे सीएम योगी बुधवार को वाराणसी में थे। यहां उन्होंने पहले की सपा सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा- घर से बाहर कैसे निकलें, 9 साल पहले यह सवाल था। कहां तक जाना है, आज यह सवाल है। पहले घर से बाहर निकलने में बेटियां डरती थीं, आज ऐसी कोई चिंता नहीं।हमने कह दिया है कि बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो दो ही जगह होगी- जेल या जहन्नुम। हम उन लोगों में नहीं हैं कि वोटबैंक के लिए किसी माफिया के सामने गिड़गिड़ाएं। पढ़ें पूरी खबर…
UP Assistant Professor Recruitment 2026

Hindi News Career UP Assistant Professor Recruitment 2026 | UPESSC Vacancy Apply Online 6 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1,936 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवारों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की प्रोसेस लागू की गई है। आवेदन करने से पहले OTR की प्रोसेस पूरी करनी होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन में करेक्शन के लिए 11 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया जाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए रिटन एग्जाम 19 और 20 नवंबर 2026 को होगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : संबंधित विषय में कम से कम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री और NET/SLET/SET पास किया हो। पीएचडी किया होना चाहिए। रिजर्व, दिव्यांग : न्यूनतम मार्क्स में 5% की छूट मिलेगी। एज लिमिट : अधिकतम : 62 साल आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 2000 रुपए एससी, एसटी : 1500 रुपए पीडब्ल्यूडी : 1000 रुपए सैलरी : पे मैट्रिक्स लेवल – 10 के अनुसार 57,700 – 1,82,400 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम इंटरव्यू ऐसे करें आवेदन : UPESSC के ऑफिशियल पोर्टल upessc.up.gov.in पर जाएं। OTR प्रोसेस कंप्लीट करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। मांगी गई डिटेज्स दर्ज करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक ————————————————————————————— ये खबर भी पढ़ें कहीं उफनती नदी, कहीं निर्माणाधीन पुल पार करते बच्चे:स्कूल के रास्ते जान जोखिम में डालते स्कूली बच्चों के वीडियो वायरल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित कोडार डैम से होकर स्कूल जाते बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
शिवराजकुमार ने हिंदी को कहा राष्ट्रीय भाषा:विवाद होने पर माफी मांगी, कहा- हिंदी उनकी भाषा, हमारे लिए हमारी भाषा कन्नड़ सबसे जरूरी; जानिए पूरा विवाद

कन्नड़ स्टार शिवराजकुमार ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ कहने वाले अपने पुराने बयान पर माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद उन्होंने सफाई दी कि वह भारतीय भाषाओं को लेकर उलझ गए थे। शिवराजकुमार ने कहा कि उनका मतलब हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषाओं में से एक’ कहना था, लेकिन उन्होंने गलत शब्द का इस्तेमाल कर दिया। उन्होंने यह बात अपनी आने वाली फिल्म ‘ओरिजिनल मॉन्स्टर’ के प्रमोशन के दौरान कही थी। मीडिया से बातचीत में शिवराजकुमार ने कहा, “मैंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा कहा। यह भाषाओं में से एक है। हमारे लिए हमारी भाषा यानी कन्नड़ हमेशा महत्वपूर्ण है। पता नहीं, मैं भारतीय भाषाओं में से एक को लेकर उलझ गया था। मैं माफी मांगता हूं, मुझे नहीं पता था।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी भाषा हिंदी है और हमारी भाषा कन्नड़ है। उनकी भाषा उनके लिए महत्वपूर्ण है। इसी तरह हमारी भाषा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।” कैसे शुरू हुआ विवाद? विवाद शिवराजकुमार के उस पुराने बयान के बाद शुरू हुआ, जब उनसे पैन-इंडिया प्रोजेक्ट के लिए हिंदी डायलॉग बोलने को लेकर सवाल पूछा गया था। तब उन्होंने कहा था, “क्यों? हिंदी मेरी दूसरी भाषा है। मैं हिंदी बोल सकता हूं। आपको क्या लगा? यह आसान भाषा है, राष्ट्रीय भाषा है। हमें यह कैसे नहीं पता होगा? हमें पता है।” उनके इस बयान पर इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई। सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ कहने पर उनकी आलोचना की। वहीं, कुछ फैन्स ने उनका बचाव भी किया। शिवाराजकुमार का बयान इसलिए भी विवादों में आ गया, क्योंकि लंबे समय से साउथ में भाषा पर विवाद और बहस जारी है। कर्नाटक में बड़ी संख्या में लोग हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते चलन का विरोध कर रहे हैं। वह मानते हैं कि कन्नड़ कर्नाटक की प्राथमिक सार्वजनिक भाषा होनी चाहिए, जबकि हिंदी और अंग्रेजी का बढ़ता इस्तेमाल स्थानीय भाषा के लिए जगह कम कर सकता है। कर्नाटक में ये विवाद तब सबसे बड़ा हुआ, जब लोकल संगठनों ने साइन बोर्ड में कन्नड़ लिखना अनिवार्य कर दिया और हिंदी, अंग्रेजी के साइनबोर्ड तोड़े। संजय दत्त भी मराठी बोलने से इनकार कर विवादों में महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं 6 साल तक येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी भाषा नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के बयान पर अब विवाद हो गया है। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बोलने के लिए कहा, लेकिन 67 साल के एक्टर ने ऐसा करने से मना कर दिया। इस पर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑटो ड्राइवरों पर तो मराठी बोलने का दबाव बनाया जाता है। बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।”
Noida SSC Exam Cancelled | Server Technical Glitch Sparks Student Protest

Hindi News Career Noida SSC Exam Cancelled | Server Technical Glitch Sparks Student Protest 3 मिनट पहले कॉपी लिंक ग्रेटर नोएडा सेक्टर-155 स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र पर मंगलवार को एसएससी की सीएचटी परीक्षा होना थी। परीक्षा देने पहुंचे उम्मीदवारों को तकनीकी खराबी के चलते परेशानी का सामना करना पड़ा। सर्वर में दिक्कत आने से कई उम्मीदवारों के कंप्यूटर सिस्टम में तय समय पर लॉगिन नहीं हो सका। काफी देर तक परीक्षा शुरू नहीं होने के बाद छात्रों की परेशानी बढ़ी। एग्जाम का टाइम निकलता देख परीक्षा स्थगित किए जाने की जानकारी मिली। इससे नाराज उम्मीदवारों ने एग्जाम सेंटर के बाहर हंगामा किया। हंगामे की सूचना पुलिस तक पहुंची। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने उम्मीदवारों को समझाकर शांत कराया। छात्रों को 1:40 बजे री-शेड्यूलिंग की जानकारी दी गई। 2500 उम्मीदवार दोबारा देंगे एग्जाम अब उन उम्मीदवारों का एग्जाम फिर से होगा जिनका परीक्षा केंद्र ग्रेटर नोएडा सेक्टर-155 स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र था। इन उम्मीदवारों की संख्या लगभग 2500 बताई गई है। SSC ने अपने नोटिस में यह भी बताया कि जिन उम्मीदवारों ने 8 सितंबर को परीक्षा केंद्र पर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा किया था, उन्हें नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे नए एडमिट कार्ड मिलने और आगे के निर्देशों के बारे में SSC नॉर्दर्न रीजन की ओर से जारी अपडेट्स पर नजर रखें। SSC CHT एग्जाम का महत्व SSC सरकारी मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों में हिंदी ट्रांसलेटर और ट्रांसलेटर से जुड़े अन्य पदों के लिए ‘कंबाइंड हिंदी ट्रांसलेटर परीक्षा’ आयोजित करता है। टियर-I परीक्षा चयन प्रक्रिया का पहला फेज है। नोएडा सेंटर पर तकनीकी खराबी से प्रभावित उम्मीदवार अब एक बार फिर से 13 सितंबर को टियर-I परीक्षा में शामिल होने की तैयारी में जुट गए हैं। 13 सितंबर को होने वाले एग्जाम का नया नोटिफिकेशन ————————————————————— ये खबर भी पढ़ें कहीं उफनती नदी, कहीं निर्माणाधीन पुल पार करते बच्चे:स्कूल के रास्ते जान जोखिम में डालते स्कूली बच्चों के वीडियो वायरल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित कोडार डैम से होकर स्कूल जाते बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
लखनऊ के प्रणव को 83 लाख वजीफा, लंदन में पढ़ेंगे:AI और तकनीक नीति में हासिल करेंगे विशेषज्ञता, UCL में लेंगे परास्नातक की डिग्री

लखनऊ के प्रणव भास्कर तिवारी का करीब 83 लाख रुपए की चेवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति के लिए चयन हुआ है। इस छात्रवृत्ति से वे लंदन की यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में विकास, तकनीक और नवाचार नीति में लोक प्रशासन की परास्नातक पढ़ाई करेंगे। प्रणव ने अपने करियर की शुरुआत कानून के क्षेत्र से की थी। अब वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीक नीति के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। ला मार्टिनियर में पहली बार नहीं मिला था प्रवेश प्रणव की सफलता के पीछे उनकी मां गीता तिवारी और पिता ओम प्रकाश भास्कर का बड़ा योगदान है। बचपन में ला मार्टिनियर, लखनऊ में प्रवेश नहीं मिलने के बाद उनकी मां ने करीब छह महीने तक कोशिश जारी रखी। पिता ने भी सीमित आर्थिक संसाधनों और औसत अंकों को कभी बच्चों के भविष्य की सीमा नहीं बनने दिया। परिवार में शिक्षा को लेकर इसी सोच ने प्रणव और उनके भाइयों को आगे बढ़ने का हौसला दिया। प्रणव कहते हैं, मां ने मुझे अटल रहना सिखाया और पिता ने यह भरोसा दिया कि परिस्थितियां या अंक आपका भविष्य तय नहीं करते। अपने माता-पिता के अथक प्रयासों का पूर्णविराम हूं मैं, मेरा हाथ पर हाथ रखकर बैठना शोभा नहीं देता। वकालत से शुरू किया सफर प्रणव पहली पीढ़ी के वकील हैं। कानून की पढ़ाई और वकालत के बाद उन्होंने तकनीक नीति की ओर रुख किया। अमेजन वेब सर्विसेज के साथ काम करते हुए उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नीति और उभरती तकनीकों से जुड़े विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिला। अब यूसीएल में पढ़ाई के दौरान वे तकनीक, नवाचार और सार्वजनिक नीति के बीच संबंधों को और गहराई से समझेंगे। लंदन की पढ़ाई का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में बदलाव लाना प्रणव इस छात्रवृत्ति को सिर्फ विदेश में पढ़ाई का अवसर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से मिले अवसरों को वैश्विक अनुभव से जोड़ने का माध्यम मानते हैं। उनका लक्ष्य पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटकर उत्तर प्रदेश के तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े तंत्र को मजबूत करने में योगदान देना है। वे कहते हैं, लंदन जाना उपलब्धि हो सकती है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब वहां की सीख वापस उत्तर प्रदेश और भारत के काम आए।
बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से साझा करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है।







