Thursday, 17 Sep 2026 | 03:53 PM

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अमेरिका ने 5 ईरानी टैंकरों पर हमला:ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर 20 मिसाइलें दागीं, 18 को एयर डिफेंस ने मार गिराया

अमेरिका ने 5 ईरानी टैंकरों पर हमला:ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर 20 मिसाइलें दागीं, 18 को एयर डिफेंस ने मार गिराया

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार (8 सितंबर) को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिका ने ओमान में 4 टैंकरों को निशाना बनाया CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में 4 तेल टैंकरों को निशाना बनाया। एक अन्य टैंकर पर ईरान के खार्ग द्वीप के पास हमला किया गया। खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। अमेरिका ने दावा किया कि जिन पांच टैंकरों पर हमला किया गया, वे अरबों डॉलर के एक छाया नेटवर्क का हिस्सा थे। CENTCOM के अनुसार यह नेटवर्क ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए फंड जुटाता है। अमेरिकी सेना ने बताया कि हमले से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था। ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उसने अल-अज्राक एयर बेस पर भारी मिसाइल हमले किए। इस बेस के पास मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस भी है, जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी रहती है। जॉर्डन की सेना के प्रवक्ता ने बताया कि ईरान की ओर से उसकी सीमा की तरफ 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 को हवा में ही नष्ट कर दिया। दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। जॉर्डन की सेना ने यह भी कहा कि मिसाइल हमले में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अमेरिका ने कहा- युद्धपोत पर हमला नाकाम हुआ CENTCOM के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिकी सेना ने कहा कि युद्धपोत ने मिसाइल हमले को सफलतापूर्वक चकमा दे दिया। CENTCOM के अनुसार इस घटना में किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ और अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्रीय जलक्षेत्र में अपनी गश्त जारी रखे हुए है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान के इन हमलों के जवाब में ही पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई की गई। रूबियो की चेतावनी- अमेरिकी जहाज पर हमला किया तो टैंकर खोएगा ईरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को खुले तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। कोलंबिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रूबियो ने कहा, “ईरान लगातार अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। जब भी वे ऐसा करेंगे या ऐसा करने की कोशिश करेंगे, उन्हें टैंकर गंवाने पड़ेंगे।” उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से इस तरह की कार्रवाई आगे भी देखने को मिल सकती है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी जहाजों को भी धमकाया अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद अमेरिकी संपर्क वाले तेल टैंकरों के चालक दल को चेतावनी दी। IRGC ने कहा कि इन जहाजों के चालक दल को तुरंत अपने जहाज छोड़ देने चाहिए। ईरान ने धमकी दी कि चाहे जहाज बंदरगाह में खड़े हों या समुद्र में एंकर डालकर हों, उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम अमेरिकी कार्रवाई में जिस इलाके को निशाना बनाया गया, उसमें खार्ग द्वीप खास तौर पर महत्वपूर्ण है। यह ईरान का प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है। ईरान के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के जरिए होता है। मुख्य भूमि से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल खार्ग द्वीप तक पहुंचाया जाता है और फिर यहां से इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भेजा जाता है। इस वजह से खार्ग द्वीप के आसपास किसी भी सैन्य कार्रवाई से ईरान के तेल निर्यात और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। खबर अपडेट की जा रही है…

अक्षय कुमार ने चुराया था हुमा कुरैशी का फोन:अभिनेताओं को भेजे थे शादी के प्रपोजल वाले मैसेज, ‘आई लव यू’ भी लिखा था

अक्षय कुमार ने चुराया था हुमा कुरैशी का फोन:अभिनेताओं को भेजे थे शादी के प्रपोजल वाले मैसेज, ‘आई लव यू’ भी लिखा था

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार आज 59 साल के हो गए हैं। अक्षय ने करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और सोशल ड्रामा जैसी कई तरह की फिल्मों में काम किया है। फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अक्षय अपने को-स्टार्स के साथ मजाक-मस्ती और प्रैंक करने के लिए भी मशहूर हैं। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने अक्षय के साथ काम करने के दौरान सुनाया था। अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी ने 2017 में आई फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में साथ काम किया था। फिल्म के प्रमोशन के दौरान दोनों ‘द कपिल शर्मा शो’ में पहुंचे थे। इसी दौरान हुमा ने अक्षय की एक शरारत का खुलासा किया था। हुमा ने बताया था कि अक्षय ने एक बार उनका फोन चुरा लिया था। इसके बाद उन्होंने फोन का इस्तेमाल करते हुए बॉलीवुड के 2-3 अभिनेताओं को ‘मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं, आई लव यू’ जैसे मैसेज भेज दिए थे। रितेश के फोन से विद्या को भेजा था ‘आई लव यू’ अक्षय की ऐसी ही एक और शरारत का किस्सा रितेश देशमुख ने ‘द कपिल शर्मा शो’ में सुनाया था। यह घटना फिल्म ‘हे बेबी’ की शूटिंग के दौरान की है। रितेश के मुताबिक, अक्षय ने उनका फोन अपने पास रख लिया था। इसके बाद उन्होंने रितेश के फोन से विद्या बालन को ‘आई लव यू’ मैसेज भेज दिया। रितेश को जब इस मैसेज के बारे में पता चला तो वह हैरान रह गए। मजेदार बात यह थी कि विद्या बालन ने भी उस मैसेज का जवाब दिया और किस वाला स्माइली भेजा। बाद में रितेश को पता चला कि यह पूरा मामला अक्षय कुमार की शरारत थी। उस वक्त विद्या का फोन भी अक्षय के पास था और उन्होंने ही रितेश के फोन से मैसेज भेजकर यह प्रैंक किया था। एक नजर अक्षय कुमार के करियर पर अक्षय कुमार ने 1991 में फिल्म ‘सौगंध’ से बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया था। 1992 में आई फिल्म ‘खिलाड़ी’ ने उन्हें एक्शन स्टार के तौर पर पहचान दिलाई और यहीं से उन्हें ‘खिलाड़ी कुमार’ के नाम से जाना जाने लगा। इसके बाद अक्षय ने ‘मोहरा’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘हेरा फेरी’, ‘धड़कन’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘भूल भुलैया’, ‘सिंह इज किंग’, ‘हाउसफुल’ और ‘राउडी राठौर’ जैसी फिल्मों में काम किया। एक्शन और कॉमेडी के साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों में भी काम किया। ‘बेबी’, ‘एयरलिफ्ट’, ‘रुस्तम’, ‘पैडमैन’, ‘केसरी’, ‘मिशन मंगल’ और ‘ओएमजी 2’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदार देखने को मिले। अक्षय कुमार को 2009 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें ‘रुस्तम’ के लिए 2017 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर भी मिला। 2026 में उनकी दो फिल्में ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज हो चुकी हैं। वहीं 11 सितंबर को उनकी फिल्म ‘हैवान’ सिनेमाघरों में आने वाली है। फिल्म में अक्षय कुमार और सैफ अली खान लीड रोल में हैं और इसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। ………………. यह खबर भी पढ़ें… पंकज त्रिपाठी 7 दिन जेल में रहे थे:कभी होटल में काम करते थे, मनोज बाजपेयी की चप्पल अपने पास रख ली थी पंकज त्रिपाठी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी अलग पहचान बनाई। बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से निकलकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक पहुंचे पंकज ने फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की और वर्तमान समय के हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं। पंकज की जिंदगी से जुड़ा एक इमोशनल किस्सा अभिनेता मनोज बाजपेयी से भी जुड़ा है। जब पंकज ने मनोज की चप्पल अपने पास रख ली थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अक्षय कुमार ने चुराया था हुमा कुरैशी का फोन:अभिनेताओं को भेजे थे शादी के प्रपोजल वाले मैसेज, ‘आई लव यू’ भी लिखा था

अक्षय कुमार ने चुराया था हुमा कुरैशी का फोन:अभिनेताओं को भेजे थे शादी के प्रपोजल वाले मैसेज, ‘आई लव यू’ भी लिखा था

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार आज 59 साल के हो गए हैं। अक्षय ने करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और सोशल ड्रामा जैसी कई तरह की फिल्मों में काम किया है। फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अक्षय अपने को-स्टार्स के साथ मजाक-मस्ती और प्रैंक करने के लिए भी मशहूर हैं। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने अक्षय के साथ काम करने के दौरान सुनाया था। अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी ने 2017 में आई फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में साथ काम किया था। फिल्म के प्रमोशन के दौरान दोनों ‘द कपिल शर्मा शो’ में पहुंचे थे। इसी दौरान हुमा ने अक्षय की एक शरारत का खुलासा किया था। हुमा ने बताया था कि अक्षय ने एक बार उनका फोन चुरा लिया था। इसके बाद उन्होंने फोन का इस्तेमाल करते हुए बॉलीवुड के 2-3 अभिनेताओं को ‘मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं, आई लव यू’ जैसे मैसेज भेज दिए थे। रितेश के फोन से विद्या को भेजा था ‘आई लव यू’ अक्षय की ऐसी ही एक और शरारत का किस्सा रितेश देशमुख ने ‘द कपिल शर्मा शो’ में सुनाया था। यह घटना फिल्म ‘हे बेबी’ की शूटिंग के दौरान की है। रितेश के मुताबिक, अक्षय ने उनका फोन अपने पास रख लिया था। इसके बाद उन्होंने रितेश के फोन से विद्या बालन को ‘आई लव यू’ मैसेज भेज दिया। रितेश को जब इस मैसेज के बारे में पता चला तो वह हैरान रह गए। मजेदार बात यह थी कि विद्या बालन ने भी उस मैसेज का जवाब दिया और किस वाला स्माइली भेजा। बाद में रितेश को पता चला कि यह पूरा मामला अक्षय कुमार की शरारत थी। उस वक्त विद्या का फोन भी अक्षय के पास था और उन्होंने ही रितेश के फोन से मैसेज भेजकर यह प्रैंक किया था। एक नजर अक्षय कुमार के करियर पर अक्षय कुमार ने 1991 में फिल्म ‘सौगंध’ से बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया था। 1992 में आई फिल्म ‘खिलाड़ी’ ने उन्हें एक्शन स्टार के तौर पर पहचान दिलाई और यहीं से उन्हें ‘खिलाड़ी कुमार’ के नाम से जाना जाने लगा। इसके बाद अक्षय ने ‘मोहरा’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘हेरा फेरी’, ‘धड़कन’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘भूल भुलैया’, ‘सिंह इज किंग’, ‘हाउसफुल’ और ‘राउडी राठौर’ जैसी फिल्मों में काम किया। एक्शन और कॉमेडी के साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों में भी काम किया। ‘बेबी’, ‘एयरलिफ्ट’, ‘रुस्तम’, ‘पैडमैन’, ‘केसरी’, ‘मिशन मंगल’ और ‘ओएमजी 2’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदार देखने को मिले। अक्षय कुमार को 2009 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें ‘रुस्तम’ के लिए 2017 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर भी मिला। 2026 में उनकी दो फिल्में ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज हो चुकी हैं। वहीं 11 सितंबर को उनकी फिल्म ‘हैवान’ सिनेमाघरों में आने वाली है। फिल्म में अक्षय कुमार और सैफ अली खान लीड रोल में हैं और इसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। ………………. यह खबर भी पढ़ें… पंकज त्रिपाठी 7 दिन जेल में रहे थे:कभी होटल में काम करते थे, मनोज बाजपेयी की चप्पल अपने पास रख ली थी पंकज त्रिपाठी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी अलग पहचान बनाई। बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से निकलकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक पहुंचे पंकज ने फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की और वर्तमान समय के हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं। पंकज की जिंदगी से जुड़ा एक इमोशनल किस्सा अभिनेता मनोज बाजपेयी से भी जुड़ा है। जब पंकज ने मनोज की चप्पल अपने पास रख ली थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Meta Launches Muse AI Agent in US

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Hindi News Business Meta Launches Muse AI Agent In US | Shopping And Business Planning Tools न्यूयॉर्क13 मिनट पहले कॉपी लिंक म्यूज का एनिमेटेड वीडियो, मेटा ने X पर शेयर किया है। मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में मदद करेगा। मेटा के मुताबिक, यह लंबे समय के टारगेट को एक्शन प्लान में बदलने में भी मदद कर सकता है। म्यूज अभी सिर्फ US में उपलब्ध है। मेटा ने इसके सेफ्टी और प्राइवेसी फीचर्स पर जोर दिया है। कंपनी के अनुसार, यह एजेंट एक अलग और सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसमें एजेंट और यूजर का डेटा दोनों सुरक्षित रहते हैं। यूजर म्यूज के अलग ऐप पर या वॉट्सऐप के जरिए उससे बात कर सकते हैं। यह ईमेल भेजने और यात्रा बुक करने जैसे छोटे काम कर सकता है। साथ ही, सालभर का एक्सरसाइज प्लान बनाने या नया बिजनेस शुरू करने जैसे लंबे समय के लक्ष्यों पर भी काम कर सकता है। ऐसे काम करेगा म्यूज यूजर जब म्यूज के साथ अपना लक्ष्य शेयर करेगा, तो यह उसके लिए पर्सनलाइज्ड प्लान बनाने में मदद करेगा। इसके बाद यह यूजर के समय और संसाधनों को व्यवस्थित कर काम को आगे बढ़ाएगा। मेटा ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि म्यूज ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है और यूजर की ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन भी कर सकता है। टेक कंपनियां AI एजेंट्स को चैटबॉट्स के बाद की अगली तकनीक बता रही हैं। चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं और जानकारी खोज सकते हैं, लेकिन वे यूजर की ओर से काम नहीं करते। चैटबॉट से कैसे अलग है AI एजेंट अपने सबसे सामान्य रूप में AI एजेंट एक पारंपरिक कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह काम करता है। ऐसा प्रोग्राम किसी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जैसे कोई ऐप खोलना। जब इसे AI के लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ जोड़ा जाता है, तो यह बिना हर कदम का निर्देश दिए काम पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी खोज सकता है। उदाहरण के लिए, यह सिर्फ ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद नहीं करेगा। यह सहकर्मी का मैसेज पढ़कर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि यूजर क्या जवाब देना चाहता है और फिर अपने आप जवाब भेज सकता है। मार्क जुकरबर्ग का AI विजन मेटा के लिए यह एजेंट CEO मार्क जुकरबर्ग के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें AI सुपरइंटेलिजेंस हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो। उन्होंने पिछले महीने ऑनलाइन प्रकाशित 6,500 शब्दों के एक निबंध में अपना विजन बताया था। आलोचकों ने इस दस्तावेज को कल्पनाओं से भरा हुआ बताया। जुकरबर्ग ने इसमें लिखा कि मेटा ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां हर व्यक्ति के पास नए बिजनेस बनाने, Ph.D.-स्तर की पढ़ाई में मदद लेने और अपनी जरूरत के मुताबिक लाइफस्टाइल सलाह पाने के टूल होंगे। जुकरबर्ग ने लिखा, “हर व्यक्ति के पास एक बेहद सक्षम पर्सनल एजेंट होगा, जो आपको, आपके लक्ष्यों और आपकी हर अहम चीज को समझेगा। आपका एजेंट आपके रिश्तों, सेहत, करियर, वित्त, घर के काम, शौक और दूसरी चीजों को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपकी ओर से काम करेगा।” उन्होंने आगे लिखा कि यह एजेंट उन चीजों के लिए समय बचाएगा, जिन्हें लोग पसंद करते हैं और उन्हें वह हासिल करने में मदद करेगा, जो वे इसके बिना नहीं कर पाते। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या लोग वास्तव में इसका इस्तेमाल करेंगे। यह जानकारी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट पर आधारित है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Meta Launches Muse AI Agent in US

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Hindi News Business Meta Launches Muse AI Agent In US | Shopping And Business Planning Tools न्यूयॉर्क3 घंटे पहले कॉपी लिंक म्यूज का एनिमेटेड वीडियो, मेटा ने X पर शेयर किया है। मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में मदद करेगा। मेटा के मुताबिक, यह लंबे समय के टारगेट को एक्शन प्लान में बदलने में भी मदद कर सकता है। म्यूज अभी सिर्फ US में उपलब्ध है। मेट का कहना है कि इसके सेफ्टी-प्राइवेसी फीचर्स को खास हैं। एजेंट सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसमें एजेंट और यूजर का डेटा दोनों सुरक्षित रहते हैं। यूजर म्यूज के अलग ऐप पर या वॉट्सऐप के जरिए उससे बात कर सकते हैं। यह ईमेल भेजने और यात्रा बुक करने जैसे छोटे काम कर सकता है। साथ ही, सालभर का एक्सरसाइज प्लान बनाने या नया बिजनेस शुरू करने जैसे लंबे समय के टारगेट पर भी काम कर सकता है। ऐसी रहेगी म्यूज की वर्किंग यूजर जब म्यूज के साथ अपना टारगेट शेयर करेगा, तो यह उसके लिए पर्सनलाइज्ड प्लान बनाने में मदद करेगा। इसके बाद यह यूजर के समय और संसाधनों को व्यवस्थित कर काम को आगे बढ़ाएगा। म्यूज ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है। यूजर की ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन भी कर सकता है। टेक कंपनियां AI एजेंट्स को चैटबॉट्स के बाद की अगली तकनीक बता रही हैं। चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं और जानकारी खोज सकते हैं, लेकिन वे यूजर की ओर से काम नहीं करते। चैटबॉट से कैसे अलग है AI एजेंट अपने सबसे सामान्य रूप में AI एजेंट एक ट्रेडीशनल कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह काम करता है। ऐसा प्रोग्राम किसी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जैसे कोई ऐप खोलना। जब इसे AI के लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ जोड़ा जाता है, तो यह बिना हर कदम का निर्देश दिए काम पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी खोज सकता है। मसलन, यह सिर्फ ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद नहीं करेगा। यह मैसेज पढ़कर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि यूजर क्या जवाब देना चाहता है और फिर अपने आप जवाब भेज सकता है। मार्क जुकरबर्ग का AI विजन मेटा के लिए यह एजेंट CEO मार्क जुकरबर्ग के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें AI सुपरइंटेलिजेंस हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो। उन्होंने पिछले महीने ऑनलाइन प्रकाशित 6,500 शब्दों के एक निबंध में अपना विजन बताया था। आलोचकों ने इस दस्तावेज को कल्पनाओं से भरा हुआ बताया। जुकरबर्ग ने इसमें लिखा कि मेटा ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां हर व्यक्ति के पास नए बिजनेस बनाने, Ph.D लेवल की पढ़ाई में मदद लेने और अपनी जरूरत के मुताबिक लाइफस्टाइल सलाह पाने के टूल होंगे। जुकरबर्ग ने लिखा, “हर व्यक्ति के पास एक बेहद सक्षम पर्सनल एजेंट होगा, जो आपको, आपके लक्ष्यों और आपकी हर अहम चीज को समझेगा। आपका एजेंट आपके रिश्तों, सेहत, करियर, वित्त, घर के काम, शौक और दूसरी चीजों को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपकी ओर से काम करेगा।” यह एजेंट उन चीजों के लिए समय बचाएगा, जिन्हें लोग पसंद करते हैं और उन्हें वह हासिल करने में मदद करेगा, जो वे इसके बिना नहीं कर पाते। —————– ये खबर भी पढ़ें… मस्क बोले- अगले साल इंसानों से ज्यादा समझदार हो जाएगा AI, डिजिटल काम चुटकियों में करेगा, इंटरनेट और हैकिंग के लिए बनेगा बड़ा खतरा दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क का कहना है कि AI बहुत तेजी से इंसानों जैसी समझ हासिल कर रहा है। अगले साल के अंत तक यह कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े कामों में इंसानों से भी आगे निकल जाएगा। मस्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए यह बात कही। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

10 मिनट पहले कॉपी लिंक जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन AfD की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD पार्टी की चीफ एलिस वीडेल खुद लेस्बियन हैं। उनकी शादी श्रीलंका में जन्मी एक महिला से हुई है। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडेल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडेल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? AfD चीफ एलिस वीडल चुनाव के बाद रविवार को बर्लिन स्थित पार्टी मुख्यालय में जर्मनी का झंडा लहराती हुईं। बचपन: नाजी अतीत वाले फैमिली में जन्म जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई और उन्हें जज बना दिया गया। उनका परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो उनका परिवार सिलेसिया से भागकर पश्चिमी जर्मनी आ गया। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। 1985 में जब वीडल के दादा की मौत हुई, तब वह सिर्फ छह साल की थीं। वीडल के मुताबिक, उनके दादा ने नाजी शासन के दौरान जो काम किए थे, उस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, “वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए वह कभी-कभी अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं।” स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनकी सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और इसके बाद जर्मनी लौट आईं। राजनीति में आने से पहले वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री 45 साल की एलिस वीडल की शादी एक श्रीलंकाई मूल की महिला से हुई है। उनकी पत्नी फिल्ममेकर हैं। साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था और बचपन में एक स्विस परिवार ने उन्हें गोद ले लिया था। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई और 2009 से वे साथ रहने लगीं। आज वीडल और सारा स्विट्जरलैंड में अपने दो गोद लिए हुए बेटों के साथ रहती हैं। दोनों बच्चों की परवरिश साथ मिलकर करती हैं। सारा के मुताबिक वह खुद घर में पत्नी की जिम्मेदारियां निभाती हैं। दोनों ने अपने रिश्ते को काफी निजी रखा है और उनकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई। राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं एलिस वीडल 5 जुलाई 2026 को एरफुर्ट में पार्टी कांग्रेस के दौरान भाषण देती हुईं। 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गई थीं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की राजनीति, शरणार्थी बने बड़ा मुद्दा फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध तब तक और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए सीरिया के लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे

Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

6 घंटे पहलेलेखक: संजय झा कॉपी लिंक जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन इस पार्टी की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD की चीफ एलिस वीडल खुद लेस्बियन हैं। उनकी पार्टनर श्रीलंका में जन्मी हैं। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? AfD चीफ एलिस वीडल चुनाव के बाद रविवार को बर्लिन स्थित पार्टी मुख्यालय में जर्मनी का झंडा लहराती हुईं। बचपन: दादा हिटलर समर्थक थे, घर छोड़कर भागना पड़ा जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई। हिटलर ने उन्हें 1941 में नाजी कब्जे वाले वारसॉ में सैन्य न्यायधीश बनाया था। वीडल परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो वे भागकर पश्चिमी जर्मनी पहुंचे। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। वह सिर्फ 6 साल की थीं, जब उनके दादा की मौत हो गई। एलिस के मुताबिक, नाजी शासन के दौरान उनके दादा ने क्या काम किए थे, इस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए मैं अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थी स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनका कहना था कि डॉक्टर की पूरी जिंदगी बीमार लोगों के बीच गुजरती है। ऐसे पेशे में जाने का कोई मतलब नहीं है। पिता की सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और फिर जर्मनी लौट आईं। वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और दुनियादारी की अच्छी समझ हो गई थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री 45 साल की एलिस वीडल की पार्टनर एक श्रीलंकाई मूल की महिला हैं। वह फिल्ममेकर हैं। साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। सारा का जन्म श्रीलंका में हुआ था। जब वह सिर्फ तीन महीने की थीं, तब स्विट्जरलैंड के एक पादरी दंपती ने उन्हें गोद ले लिया था। वीडल और सारा की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। दोनों 2009 से साथ हैं। वे स्विट्जरलैंड में अपने दो बेटों के साथ रहती हैं और मिलकर उनकी परवरिश करती हैं। सारा बोसार्ड ने दोनों बच्चों को स्पर्म डोनेशन की मदद से जन्म दिया। दोनों बच्चों के जैविक पिता अलग-अलग पुरुष हैं। यह कोई गुमनाम स्पर्म बैंक का मामला नहीं था। वीडल और सारा दोनों बच्चों के जैविक पिताओं को जानती हैं और बच्चों को भी अपने जैविक पिता की पहचान पता है। हालांकि, इन दोनों पुरुषों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई… राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं एलिस वीडल 5 जुलाई 2026 को एरफुर्ट में पार्टी कांग्रेस के दौरान भाषण देती हुईं। 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं, बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गईं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की सियासत, शरणार्थी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की

ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में खराबी:करीब 300 फ्लाइट्स रद्द, ब्रिटिश एयरवेज और ईजीजेट समेत कई एयरलाइंस प्रभावित

ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में खराबी:करीब 300 फ्लाइट्स रद्द, ब्रिटिश एयरवेज और ईजीजेट समेत कई एयरलाइंस प्रभावित

ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी खराबी के चलते मंगलवार को करीब 300 फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं। फ्लाइट मॉनिटरिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 ने इसकी जानकारी दी। ब्रिटेन की नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विसेज ने बताया कि यह समस्या उड़ानों के टेकऑफ पर असर डाल रही थी। फ्लाइट सिस्टम धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। फ्लाइटरडार24 ने X पर बताया कि ब्रिटिश एयरवेज, ईजीजेट, KLM और लुफ्थांसा समेत कई एयरलाइंस की फ्लाइट्स प्रभावित हुई हैं। लंदन के हीथ्रो, स्टैनस्टेड और सिटी एयरपोर्ट के साथ ही मैनचेस्टर, बर्मिंघम, स्कॉटलैंड और ब्रिटेन के अन्य एयरपोर्ट्स की भी कुछ उड़ाने प्रभावित हुई हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

Rajpal Supreme Court Cheque Bounce Case

Rajpal Supreme Court Cheque Bounce Case

7 मिनट पहले कॉपी लिंक राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला साल 2010 में उनकी बतौर डायरेक्टर डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए एक कर्ज से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक्टर राजपाल यादव को निर्देश दिया कि चेक बाउंस मामले में सरेंडर से छूट पाने की शर्त के तौर पर वे बुधवार तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करें। यह मामला फिल्म प्रोड्यूसर-फाइनेंसर मुर्ली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली यादव की याचिका पर सशर्त नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा बरकरार रखी थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। 12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी को रिहा हुए राजपाल। चीफ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यादव की याचिका पर मौखिक रूप से सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सजा काटने के लिए सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसकी अंतिम तारीख 10 सितंबर थी। यह मामला मुर्ली प्रोजेक्ट्स की ओर से यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ दायर सात शिकायतों से जुड़ा है। ये शिकायतें फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए जारी सात चेक बाउंस होने के बाद दर्ज की गई थीं। मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक, मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने 2010 में फिल्म पूरी करने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए थे। फिल्म की रिलीज में देरी के बाद पक्षों के बीच कई समझौते हुए और अलग-अलग चरणों में रकम की वापसी की राशि में बदलाव किया गया। यादव की याचिका में कहा गया है कि मूल लेन-देन फिल्म में निवेश था, कर्ज नहीं, और चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिए गए थे। अगस्त 2012 के तीसरे सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट के तहत आठ पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे और भुगतान की जिम्मेदारी फिल्म की रिलीज से जोड़ी गई थी। 2012 में मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था विवाद बढ़ने के बाद मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं। यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे। यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया। सुप्रीम कोर्ट में यादव ने कहा कि बाद के समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है और नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है। 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया था ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया। सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने प्रोबेशन की मांग खारिज की थी हाईकोर्ट ने यादव की प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक चली कार्यवाही के दौरान उनके आचरण और विवाद सुलझाने के लिए दिए गए कई मौकों को देखते हुए उन्हें प्रोबेशन का लाभ नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा था कि यादव ने शिकायतकर्ता को भुगतान करने के लिए कई बार आश्वासन दिए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। कार्यवाही के दौरान करीब 2.25 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था, लेकिन बाद में यादव ने और भुगतान करने से इनकार कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले जमा कर मुर्ली प्रोजेक्ट्स को दी गई 2.25 करोड़ रुपए की राशि को जुर्माने के तौर पर देय रकम में समायोजित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश से राजपाल यादव को फिलहाल सरेंडर से अंतरिम राहत मिली है। यह राहत 9 सितंबर तक रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर है। …………… यह खबर भी पढ़ें… राजपाल यादव बोले- जिनका पैसा बकाया है, घर पहुंचा दूंगा:कहा- 13 साल में 250 करोड़ का नुकसान हुआ; घर नीलाम कर रहा बैंक बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव ने चेक बाउंस और कर्ज विवाद के बीच दावा किया था कि पिछले 13 साल में उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का निजी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में 55 साल के एक्टर ने कहा था कि वे एक जिम्मेदार इंसान हैं और जिन लोगों का पैसा बकाया है, वे उसे चुका देंगे या उनके घर तक पहुंचा देंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Rajpal Yadav Supreme Court Relief

Rajpal Yadav Supreme Court Relief

चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर कर जेल जाने से अंतरिम छूट दी है। हालांकि उन्हें यह राहत एक शर्त के साथ मिली। . मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर राजपाल यादव कल तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करा देते हैं, तो उन्हें फिलहाल जेल नहीं जाना पड़ेगा। राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई, 2026 के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें तीन महीने की सजा और साढे़ सात करोड़ रुपए लौटाने का आदेश हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की याचिका पर दूसरे पक्ष को नोटिस जारी कर उनका रुख मांगा है। अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की गई है। यह पूरा मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी एक फिल्म के लिए 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। बकाया रकम वापस न करने और चेक बाउंस होने के बाद यह विवाद लंबे समय से अदालत में चल रहा था। ANI से बातचीत में राजपाल ने कहा था कि वे सबका कर्ज लौटाएंगे। हाईकोर्ट ने कहा था- एक्टर का रवैया संदिग्ध, दोबारा जेल भेजें दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को करीब 7.5 करोड़ रुपए शिकायतकर्ता को लौटाने का फरमान सुनाया था। भुगतान न करने की स्थिति में अदालत ने एक्टर को तीन महीने की जेल की सजा भी सुनाई थी। हालांकि, फैसले के तुरंत बाद हाईकोर्ट ने उन्हें ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए दो महीने की मोहलत दे दी थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राजपाल यादव के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि बार-बार आश्वासन देने के बाद भी अभिनेता ने बकाया रकम नहीं चुकाई। 13 दिन पहले राजपाल यादव ने कहा था- जिनका पैसा बकाया है, घर पहुंचा दूंगा एक्टर राजपाल यादव ने चेक बाउंस और कर्ज विवाद के बीच दावा किया था कि पिछले 13 साल में उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का निजी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में 55 साल के एक्टर ने कहा कि वे एक जिम्मेदार इंसान हैं और जिन लोगों का पैसा बकाया है, वे उसे चुका देंगे या उनके घर तक पहुंचा देंगे। फीस कम मिली, 50 से ज्यादा विदेशी टूर छूटे राजपाल यादव ने बताया कि 2013 से 2016 के बीच उनका सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस दौरान विदेश में उनके कम से कम 50 टूर छूट गए और मिलने वाली फीस भी काफी कम हो गई। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जहां उन्हें 100 रुपए मिलने चाहिए थे, वहां सिर्फ 10 रुपए मिले। हालांकि, राजपाल ने कहा कि वे आर्ट के स्टूडेंट हैं और वे पैसों से ज्यादा अपनी कला में परफेक्शन को अहमियत देते हैं। ये तस्वीर फरवरी की है। चेक बाउंस मामले में कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते राजपाल। अपनी आर्थिक स्थिति और कर्ज पर बात करते हुए राजपाल यादव ने कहा कि उन्होंने जिनसे भी पैसा उधार लिया था, उसे चुका दिया है या जल्द चुका देंगे। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने 200 लोगों से भी उधार लिया है, तो वे पैसा वापस करेंगे। राजपाल ने कहा कि कोई उन्हें 5 करोड़ या 250 करोड़ रुपए में खरीद नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आर्थिक मुश्किलें उनके पूरे करियर को तय नहीं करतीं और आज भी एयरपोर्ट पर 500 लोग उनके साथ सेल्फी लेते हैं। बैंक नीलाम कर रहा 3.10 करोड़ की प्रॉपर्टी राजपाल यादव पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का कर्ज न चुकाने के कारण कार्रवाई चल रही है। राजपाल यादव ने सेंट्रल बैंक की मुंबई ब्रांच से पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी के नाम पर 16.61 करोड़ रुपए का लोन लिया था। शाहजहांपुर में राजपाल यादव के इसी मकान में नोटिस चस्पा किया गया है। शाहजहांपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने उनके पैतृक घर पर 16.61 करोड़ रुपए के बकाया लोन को लेकर कुर्की का नोटिस चस्पा किया है। चेक बाउंस केस में जेल जा चुके राजपाल राजपाल यादव का चेक बाउंस केस साल 2010 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ का कर्ज लिया था। 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद 2013 से चेक बाउंस का मामला अदालत में चल रहा है। 12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी को रिहा हुए राजपाल। फरवरी 2026 में भी उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था, जिसके बाद वे 12 दिन तक जेल में रहे थे। फिलहाल वे अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘हैवान’ और सलमान खान के साथ ‘SVC 63’ की तैयारी कर रहे हैं। राजपाल यादव का करियर… हंगामा, हलचल जैसी फिल्‍मों से कॉमेडी किंग बने 2003 में फिल्म हंगामा, 2005 में गरम मसाला, 2006 में चुप चुप के और फिर हेरा फेरी और 2007 में भूल भुलैया जैसी फिल्मों से उन्हें कॉमेडी मे पहचान मिली। कॉमिक डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ उन्होंने लगभग 8 से 10 फिल्मों मे काम किया है। बेस्ट वर्सटाइल एक्टर अवॉर्ड जीत चुके हैं राजपाल राजपाल यादव को यश भारती अवॉर्ड मिला, जो उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान है। उन्हें यह अवॉर्ड 2003 की फिल्म ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ के लिए मिला। यह सम्मान उनके कॉमेडी और गंभीर अभिनय के रोल के लिए दिया गया था। इससे पहले यह अवॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसे बड़े नामों को मिल चुका है। उन्हें फिल्मफेयर और आईफा जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ट कॉमिक एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन वे यह अवॉर्ड नहीं जीत पाए। मुंबई मे पहला सपना सिर्फ जिंदा रहना था’ एनएसडी से पढ़ाई पूरी होने के बाद राजपाल मुंबई आए। शुरुआत में उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिला। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका पहला सपना मुंबई में जिंदा रहना था। कुछ समय के संघर्ष के बाद उन्हें काम मिलना शुरू हो गया। स्ट्रगल के दिनों में राजपाल ने 20-22 स्ट्रगलिंग एक्टर्स