US Mini India Growth | Indian Diaspora American Dream Trump Visa Policy

वॉशिंगटन6 मिनट पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली कॉपी लिंक भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ अब भी कायम है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प – की वीजा, ट्रेड और ग्रीनकार्ड जैसी पाबंदियों के बावजूद इस पर रोक नहीं लगी है। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में टेक, हेल्थकेयर और – फार्मा सेक्टर के कारण भारतीय परिवार अब पुराने घने इलाकों से निकलकर नए उपनगरों में बस रहे हैं। अमेरिका में पिछले 20 साल के दौरान 50 से ज्यादा ‘मिनी इंडिया’ यानी भारतीयों की टाउनशिप वजूद में आई हैं। अगले 5 साल में ये बढ़कर 75 हो जाएंगी। इन इलाकों में रहने वाले भारतीय परिवार स्थानीय श्वेत अमेरिकियों से दोगुने अमीर हैं। भारतीय परिवारों की औसत आय लगभग 1.54 करोड़ रुपए है जबकि अमेरिकी परिवार की औसत आय लगभग 80 लाख रुपए है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में ये अंतर और बढ़ेगा। कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा भारतवंशी कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा 9.30 लाख भारतवंशी रहते हैं। इसका कारण यहां का आईटी सेक्टर है। दूसरे नंबर पर टेक्सास में 5.40 लाख भारतवंशी हैं। बैचलर्स डिग्री पाने वालों में 54% भारतवंशी अमेरिकियों के मुकाबले में भारतवंशियों के पास अधिक बैचलर डिग्री है। बैचलर्स डिग्री पाने वालों में 25% अमेरिकी जबकि 54% भारतवंशी हैं। मास्टर्स या फिर डॉक्टरेट डिग्री पाने वालों में 60% भारतवंशी हैं। अमेरिका में किसी भी प्रवासी समूह में से भारतीय मूल के लोगों का प्रतिशत सबसे अधिक है। दो अहम मिनी इंडिया फ्रिस्को, टेक्सस 25 साल पहले सिर्फ खेत था, आज आबादी 2.5 लाख। यहां 19% भारतीय मूल के लोग हैं। 2008 में बना कार्य सिद्धि हनुमान मंदिर अब पूरे इलाके का सामुदायिक केंद्र है। पड़ोसी शहर प्लेनो और एलन में भी मंदिर, रेस्तरां और दुकानों का जाल फैल चुका है। डबलिन-सैन रेमन भारतीय आबादी अब 18% है। डबलिन के स्कूलों में 41% दाखिले भारतीय मूल के बच्चों के हैं। दूसरी पीढ़ी अब दिवाली भी मनाती है और वीकेंड पर क्रिकेट खेलने का लुत्फ भी उठाती है। भारतीय फूड बेहद लोकप्रिय, ड्राइव-थू तक खुल गए हैं। भास्कर एक्सपर्ट विलियम फ्रे के अनुसार सिलिकॉन वैली के भारतीय ग्रोथ इंजन की स्पीड बढ़ेगी। विलियम फ्रे ने बताया कि भारतीयों ने सिलिकॉन वैली से 25 साल पहले सफर शुरू किया था। अब इस ग्रोथ इंजन की रफ्तार और बढ़ेगी। करीब 35% सिलिकॉन वैली स्टार्टअप्स में कम से कम एक भारतीय मूल का सह-संस्थापक है। आईटी सेक्टर में भारतीयों की दमदार मौजूदगी से अमेरिका के अन्य राज्यों में भी भारतीयों की टाउनशिप में इजाफा करेगी। भारतीयों की मौजूदगी सीधे-सीधे अमेरिका के इकॉनॉमिक मॉडल पर आधारित है। अमेरिका में आने वाले किसी भी विदेशी समुदाय से ज्यादा भारतीय इसके योगदान देते हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था: CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत को भी निशाना बनाना चाहता था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Isha Koppikar Ganesh Chaturthi 2026 Interview

14 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक गणेश चतुर्थी 2026 के मौके पर अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर के घर भी गणपति बप्पा विराजे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। ईशा ने गणपति की तैयारियों, बचपन की यादों से लेकर बप्पा से अपनी आस्था और अध्यात्म को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने घर पर साउथ इंडियन टेंपल की थीम पर डेकोरेशन कराया है। डेढ़ महीने पहले शुरू कर दी थीं तैयारियां ईशा ने बताया कि वह पिछले दो साल से गणपति के डेकोरेशन में फूलों पर ज्यादा फोकस कर रही थीं, लेकिन इस बार कुछ अलग करने का मन था। उन्होंने साउथ के मंदिरों की तर्ज पर गोल्डन थीम वाला डेकोरेशन कराया है। ईशा ने बताया कि इस बार उनके घर टिटवाला के गणपति विराजे हैं। पिछले साल उन्होंने दगड़ूशेठ के गणपति की स्थापना की थी। वह हर साल बप्पा के डेकोरेशन में कुछ बदलाव करने की कोशिश करती हैं। ईशा के मुताबिक, इस बार उन्होंने जुलाई के आखिर में ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने कहा कि जब किसी से बहुत प्यार होता है तो उसके लिए किए जाने वाले काम में मेहनत महसूस नहीं होती, सब कुछ अपने आप और बिना किसी दबाव के हो जाता है। बचपन में बप्पा के लिए पढ़ाई तक भूल जाती थीं ईशा ने अपने बचपन की गणपति की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनकी कॉलोनी में सार्वजनिक गणपति बैठते थे और पूरे 10 दिन तक उत्सव का माहौल रहता था। ईशा ने कहा कि बप्पा के लिए करीब दो महीने पहले से तैयारियां शुरू हो जाती थीं। नाटक, डांस शो और दूसरे कार्यक्रमों की रिहर्सल चलती रहती थीं। उस दौरान पढ़ाई पीछे छूट जाती थी। उन्होंने बताया कि स्कूल से आने के बाद बैग फेंककर सीधे गणपति की तैयारियों में निकल जाती थीं। घरवाले भी इस दौरान ज्यादा रोक-टोक नहीं करते थे। ईशा ने कहा कि बप्पा के विसर्जन के बाद घर और आसपास का माहौल एकदम खाली-खाली लगता था। उनके मुताबिक, बप्पा के चले जाने के बाद वह बेहद खालीपन महसूस करती थीं। पहले डेढ़ दिन रखते थे बप्पा, अब तीन दिन का किया उत्सव ईशा ने बताया कि पहले वह घर में डेढ़ दिन के लिए गणपति बप्पा की स्थापना करती थीं, लेकिन अब उन्होंने यह अवधि तीन दिन कर दी है। उन्होंने कहा कि डेढ़ दिन में लोगों के लिए अलग-अलग घरों में जाकर बप्पा के दर्शन करना मुश्किल हो जाता था। इसलिए उन्होंने तीन दिन तक बप्पा को घर में रखने का फैसला किया। ईशा ने बताया कि उनके स्टाफ के लोग भी गणेशोत्सव की तैयारियों में उनकी काफी मदद करते हैं। बप्पा से अपनी आस्था के बारे में बात करते हुए ईशा ने बताया कि पहले वह अपनी इच्छाओं की एक पूरी लिस्ट बनाकर मंदिर जाती थीं। वह लालबागचा राजा या सिद्धिविनायक के दर्शन करने पहुंचती थीं। ईशा ने कहा कि अब स्थिति बदल गई है। जैसे ही वह बप्पा के सामने जाती हैं, वह सब कुछ भूल जाती हैं। उन्होंने कहा कि बप्पा के प्रति इतना प्यार है कि उन्हें देखते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं और फिर वह सिर्फ प्रणाम करके लौट आती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि बप्पा हमेशा उनके आसपास हैं और उनका साथ दे रहे हैं। ईशा बोलीं- बप्पा ने कई चीजें नहीं दीं, अब समझ आता है क्यों ईशा ने कहा कि जिंदगी के अलग-अलग दौर में हमारी जरूरतें और इच्छाएं बदलती रहती हैं। जो चीज 10 साल पहले जरूरी थी, जरूरी नहीं कि आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो। उन्होंने बताया कि उन्होंने जिंदगी में बप्पा से बहुत कुछ मांगा, लेकिन कई चीजें उन्हें नहीं मिलीं। हालांकि, अब वह समझती हैं कि इसके पीछे भी कोई वजह थी। ईशा के मुताबिक, अगर बप्पा उनकी हर इच्छा पूरी कर देते तो शायद वह अपने जीवन के असली लक्ष्य से भटक जातीं। उन्होंने कहा कि भगवान को पता होता है कि हमें जिंदगी में क्या बनना है और किस रास्ते पर जाना है। ईशा बोलीं- बचपन से ही अध्यात्म से जुड़ना चाहिए ईशा अध्यात्म को लेकर भी काफी सीरियस नजर आईं। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को बचपन से ही अध्यात्म के प्रति जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान के बारे में सिर्फ बुढ़ापे में सोचना सही नहीं है। जितनी कम उम्र में इंसान अपने अध्यात्म और भीतर की आवाज को समझना शुरू करेगा, उतना बेहतर होगा। बेटी रियाना ने बप्पा से मांगा पढ़ाई में अच्छा करने का आशीर्वाद बातचीत के दौरान ईशा की बेटी रियाना भी उनके साथ मौजूद थीं। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने बप्पा से क्या मांगा, तो उन्होंने पढ़ाई में अच्छा करने की इच्छा जताई। ईशा ने बताया कि रियाना पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी काफी एक्टिव हैं। वह 100 और 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती हैं और स्कूल की ओर से इंटर-स्कूल प्रतियोगिताओं में भी भाग लेती हैं। ईशा ने बताया कि रियाना ने बप्पा से अपनी पढ़ाई और खेल दोनों के लिए अच्छा करने की प्रार्थना की है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Isha Koppikar Ganesh Chaturthi 2026 Interview

1 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक गणेश चतुर्थी 2026 के मौके पर अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर के घर भी गणपति बप्पा विराजे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। ईशा ने गणपति की तैयारियों, बचपन की यादों से लेकर बप्पा से अपनी आस्था और अध्यात्म को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने घर पर साउथ इंडियन टेंपल की थीम पर डेकोरेशन कराया है। डेढ़ महीने पहले शुरू कर दी थीं तैयारियां ईशा ने बताया कि वह पिछले दो साल से गणपति के डेकोरेशन में फूलों पर ज्यादा फोकस कर रही थीं, लेकिन इस बार कुछ अलग करने का मन था। उन्होंने साउथ के मंदिरों की तर्ज पर गोल्डन थीम वाला डेकोरेशन कराया है। ईशा ने बताया कि इस बार उनके घर टिटवाला के गणपति विराजे हैं। पिछले साल उन्होंने दगड़ूशेठ के गणपति की स्थापना की थी। वह हर साल बप्पा के डेकोरेशन में कुछ बदलाव करने की कोशिश करती हैं। ईशा के मुताबिक, इस बार उन्होंने जुलाई के आखिर में ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने कहा कि जब किसी से बहुत प्यार होता है तो उसके लिए किए जाने वाले काम में मेहनत महसूस नहीं होती, सब कुछ अपने आप और बिना किसी दबाव के हो जाता है। बचपन में बप्पा के लिए पढ़ाई तक भूल जाती थीं ईशा ने अपने बचपन की गणपति की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनकी कॉलोनी में सार्वजनिक गणपति बैठते थे और पूरे 10 दिन तक उत्सव का माहौल रहता था। ईशा ने कहा कि बप्पा के लिए करीब दो महीने पहले से तैयारियां शुरू हो जाती थीं। नाटक, डांस शो और दूसरे कार्यक्रमों की रिहर्सल चलती रहती थीं। उस दौरान पढ़ाई पीछे छूट जाती थी। उन्होंने बताया कि स्कूल से आने के बाद बैग फेंककर सीधे गणपति की तैयारियों में निकल जाती थीं। घरवाले भी इस दौरान ज्यादा रोक-टोक नहीं करते थे। ईशा ने कहा कि बप्पा के विसर्जन के बाद घर और आसपास का माहौल एकदम खाली-खाली लगता था। उनके मुताबिक, बप्पा के चले जाने के बाद वह बेहद खालीपन महसूस करती थीं। पहले डेढ़ दिन रखते थे बप्पा, अब तीन दिन का किया उत्सव ईशा ने बताया कि पहले वह घर में डेढ़ दिन के लिए गणपति बप्पा की स्थापना करती थीं, लेकिन अब उन्होंने यह अवधि तीन दिन कर दी है। उन्होंने कहा कि डेढ़ दिन में लोगों के लिए अलग-अलग घरों में जाकर बप्पा के दर्शन करना मुश्किल हो जाता था। इसलिए उन्होंने तीन दिन तक बप्पा को घर में रखने का फैसला किया। ईशा ने बताया कि उनके स्टाफ के लोग भी गणेशोत्सव की तैयारियों में उनकी काफी मदद करते हैं। बप्पा से अपनी आस्था के बारे में बात करते हुए ईशा ने बताया कि पहले वह अपनी इच्छाओं की एक पूरी लिस्ट बनाकर मंदिर जाती थीं। वह लालबागचा राजा या सिद्धिविनायक के दर्शन करने पहुंचती थीं। ईशा ने कहा कि अब स्थिति बदल गई है। जैसे ही वह बप्पा के सामने जाती हैं, वह सब कुछ भूल जाती हैं। उन्होंने कहा कि बप्पा के प्रति इतना प्यार है कि उन्हें देखते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं और फिर वह सिर्फ प्रणाम करके लौट आती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि बप्पा हमेशा उनके आसपास हैं और उनका साथ दे रहे हैं। ईशा बोलीं- बप्पा ने कई चीजें नहीं दीं, अब समझ आता है क्यों ईशा ने कहा कि जिंदगी के अलग-अलग दौर में हमारी जरूरतें और इच्छाएं बदलती रहती हैं। जो चीज 10 साल पहले जरूरी थी, जरूरी नहीं कि आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो। उन्होंने बताया कि उन्होंने जिंदगी में बप्पा से बहुत कुछ मांगा, लेकिन कई चीजें उन्हें नहीं मिलीं। हालांकि, अब वह समझती हैं कि इसके पीछे भी कोई वजह थी। ईशा के मुताबिक, अगर बप्पा उनकी हर इच्छा पूरी कर देते तो शायद वह अपने जीवन के असली लक्ष्य से भटक जातीं। उन्होंने कहा कि भगवान को पता होता है कि हमें जिंदगी में क्या बनना है और किस रास्ते पर जाना है। ईशा बोलीं- बचपन से ही अध्यात्म से जुड़ना चाहिए ईशा अध्यात्म को लेकर भी काफी सीरियस नजर आईं। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को बचपन से ही अध्यात्म के प्रति जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान के बारे में सिर्फ बुढ़ापे में सोचना सही नहीं है। जितनी कम उम्र में इंसान अपने अध्यात्म और भीतर की आवाज को समझना शुरू करेगा, उतना बेहतर होगा। बेटी रियाना ने बप्पा से मांगा पढ़ाई में अच्छा करने का आशीर्वाद बातचीत के दौरान ईशा की बेटी रियाना भी उनके साथ मौजूद थीं। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने बप्पा से क्या मांगा, तो उन्होंने पढ़ाई में अच्छा करने की इच्छा जताई। ईशा ने बताया कि रियाना पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी काफी एक्टिव हैं। वह 100 और 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती हैं और स्कूल की ओर से इंटर-स्कूल प्रतियोगिताओं में भी भाग लेती हैं। ईशा ने बताया कि रियाना ने बप्पा से अपनी पढ़ाई और खेल दोनों के लिए अच्छा करने की प्रार्थना की है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India-China Border Peace Pact | PM Modi & Xi Jinping Meeting Statement

बीजिंग14 मिनट पहले कॉपी लिंक PM मोदी 18वें BRICS समिट से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत मंडपम में स्वागत करते हुए। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की बात कही। चीन के मुताबिक, PM मोदी ने कहा कि भारत अपनी जमीन का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को कहा कि जिनपिंग और मोदी के बीच दिल्ली में हुई बैठक में सबसे अहम सहमति यह बनी कि चीन और भारत को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बने रहना चाहिए। वांग के मुताबिक, दोनों नेताओं ने सीमा से लगे इलाकों में शांति बनाए रखने पर भी सहमति जताई। दोनों नेताओं की यह बैठक 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स सम्मेलन से इतर हुई थी। वांग बोले- दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है वांग ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और लोगों के बीच संपर्क भी पहले से ज्यादा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत की 2.8 अरब से ज्यादा आबादी के लिए दोनों देशों के रिश्तों में सुधार अच्छी खबर है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। दोनों देशों के नेताओं की रणनीतिक दिशा में चीन-भारत संबंध धीरे-धीरे खराब दौर से बाहर निकले हैं। अब दोनों देशों के रिश्ते फिर से शुरू होने के बाद एक नए स्तर पर पहुंच रहे हैं। ‘सीमा विवाद को पूरे रिश्ते के संदर्भ में देखना चाहिए’ वांग ने कहा कि सीमा विवाद को चीन-भारत के पूरे रिश्ते के बड़े संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत और सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की मुख्य दिशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने दोनों देशों से अपने विकास और राष्ट्रीय प्रगति को तेज करने की अपील की। साथ ही कहा कि चीन और भारत को मिलकर क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और साझा समृद्धि में योगदान देना चाहिए। खबर लगातार अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
दिल्ली हाईकोर्ट ने विमल इलायची की याचिका खारिज की:अजय देवगन, शाहरुख को जारी नोटिस रद्द करने की मांग थी; जज बोले- ये महाराष्ट्र का मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को विमल इलायची कंपनी की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को मिले नोटिस रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का क्षेत्रीय अधिकार नहीं बनता। नोटिस से जुड़ी शिकायत के लिए महाराष्ट्र की अदालतें ज्यादा सही और सुविधाजनक मंच हैं। दरअसल महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 14 अगस्त को तीनों कलाकारों को विमल इलायची के विज्ञापनों में उत्पाद की गलत प्रस्तुति के आरोप में कारण बताओ नोटिस भेजे थे। FDA का आरोप है कि ये विज्ञापन महाराष्ट्र में प्रतिबंधित विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार करते हैं। खबर लगातार अपडेट कर रहे हैं।
Delhi University Mansarovar Hostel Ceiling Collapse

Hindi News Career Delhi University Mansarovar Hostel Ceiling Collapse | Viral Video News 8 मिनट पहले कॉपी लिंक हाल ही में डीयू साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक पीजी गिरने की घटना के बाद छात्र आवास और इमारतों की सुरक्षा नेशनल लेवल का मुद्दा बना हुआ है। इसके बाद छात्रों ने सुरक्षित हॉस्टल और बेहतर आवास सुविधाओं की मांग भी तेज की है। इसी बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के मानसरोवर हॉस्टल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें हॉस्टल की छत से मिट्टी/मलबा गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में छात्रों के रहने की जगह और इमारतों की सुरक्षा को लेकर पहले से गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मानसरोवर हॉस्टल, दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में स्थित बॉयज हॉस्टल है। वीडियो में मानसरोवर छात्रावास, डीयू के कार्यकारी अध्यक्ष अंकित सोनकर हॉस्टल की जर्जर बिल्डिंग बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि इस बिल्डिंग को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे फिर किसी दुर्घटना के होने का इंतजार किया जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय आंखों पर पट्टी बांधकर सोया हुआ है। स्कूल की जर्जर छत गिरी देश में सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत आए दिन सामने आ रही है। हाल ही में कर्नाटक के बागलकोट में एक सरकारी स्कूल की छत का कंक्रीट गिरने से 6 बच्चे घायल हुए थे। एक बच्चे के सिर में ज्यादा चोट आई। ये हादसा तब हुआ जब स्कूल चल रहा था। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सभी छात्रों को मामूली चोटें आईं और उनका अस्पताल में उचित इलाज चल रहा है। ये घटना उस समय हुई, जब छात्र रोज की तरह अपनी क्लास में पढ़ाई कर रहे थे। तभी अचानक क्लास की छत का एक हिस्सा टूट गया और कंक्रीट का मलबा क्लास के बेंच और टेबल पर गिरने लगा। इससे क्लास में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया। पेरेंट्स पहले भी कर चुके हैं शिकायत इस घटना के बाद स्कूल में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं बच्चों के पेरेंट्स का कहना है कि हम पहले भी स्कूल की जर्जर हालत को लेकर शिकायत कर चुके हैं। स्कूल की स्थायी मरम्मत की जानी चाहिए। CEO ने तुरंत मरम्मत के आदेश दिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के उप निदेशक (DDPI) इस घटना के बाद स्कूल पहुंचे और उन्होंने घटना के बारे में जानकारी ली। साथ ही CEO ने बताया कि पंचायत राज इंजीनियरिंग विभाग (PRED) को इमारत के टूटे हिस्से की तुरंत मरम्मत के निर्देश दिए हैं। पिछले महीने राजस्थान के स्कूल की छत गिरी थी अगस्त 2026 में राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तु देवकी स्थित अपर प्राइमरी स्कूल में एक कक्षा की छत गिर गई थी। उस समय स्कूल में 120 बच्चे मौजूद थे। ये बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। छत गिरने की तेज आवाज सुनकर स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे और टीचर तुरंत कक्षाओं से बाहर निकल गए। स्कूल की 2 कक्षाएं लंबे समय से जर्जर स्कूल की जिस कक्षा की छत गिरी, उस वक्त उसमें कोई बच्चा या टीचर मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस स्कूल में कुल 10 कक्षाएं हैं। इनमें से करीब 2 कक्षाएं लंबे समय से जर्जर हो चुकी हैं। इसलिए इन कमरों को बंद कर दिया गया था। यहां कोई क्लास भी नहीं ली जाती थी। इसी वजह से छत गिरने के बावजूद कोई छात्र या टीचर घायल नहीं हुए। अधिकारियों ने किया जर्जर कमरों का निरीक्षण छत गिरने के बाद स्कूल के टीचर्स ने पीईईओ पंकज वर्मा को सूचना दी। पंकज वर्मा और सीबीईओ दीपक शाह मौके पर पहुंचे और स्कूल की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने जर्जर कमरों का निरीक्षण किया और स्कूल के मैनेजमेंट से जानकारी ली। राजस्थान के स्कूल में छत गिरने से हुई थी 7 छात्रों की मौत इससे पहले 25 जुलाई 2026 को राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। यह घटना मनोहर थाना ब्लॉक के पिपलोदी गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की थी। छत गिरने के बाद दीवार भी ढह गई। इस हादसे में कई बच्चे मलबे में दबे होने से घायल हुए थे। ——————————————————————————- ये खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा ने की दूसरी शादी:पूर्व PAK प्रधानमंत्री से तलाक के 22 साल बाद आयरिश-ऑस्ट्रेलियाई करोड़पति को जीवनसाथी बनाया

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेटर इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने 52 साल की उम्र में दूसरी शादी कर ली है। जेमिमा ने 62 साल के आयरिश-ऑस्ट्रेलियाई करोड़पति कैमरन ओ’राइली से शादी की है। दोनों की शादी इमरान खान से तलाक के 22 साल बाद हुई है। इमरान और जेमिमा का तलाक 2004 में हुआ था। हालांकि, जेमिमा और कैमरन ने खुद अपनी शादी की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। जेमिमा की भाभी जेमिमा जोन्स ने इसकी जानकारी दी। जोन्स, जेमिमा के भाई बेन गोल्डस्मिथ की पत्नी हैं। उन्होंने 13 सितंबर को इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर की। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
सऊदी अरब में 11 करोड़ टन यूरेनियम वाला खनिज मिला:मदीना में रेयर अर्थ मिनरल्स भी मिले; परमाणु ऊर्जा पर बढ़ा सऊदी का फोकस

सऊदी अरब के मदीना इलाके में करीब 11 करोड़ टन यूरेनियम वाला खनिज मिलने की जानकारी सामने आई है। यहां यूरेनियम के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स भी पाए गए हैं। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सम्मेलन में इसकी घोषणा की। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, यह खोज मदीना के जबल सैयद प्रोजेक्ट में हुई है। यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा बनाने में किया जाता है। सऊदी अरब लंबे समय से परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल के अलावा दूसरे स्रोतों को भी बढ़ावा देना चाहता है। मदीना में यूरेनियम के साथ रेयर अर्थ भी जबल सैयद प्रोजेक्ट में यूरेनियम के अलावा भारी रेयर अर्थ एलिमेंट्स भी पाए गए हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और दूसरी आधुनिक तकनीकों में किया जाता है। सऊदी अरब तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए खनन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है। सरकार देश में मौजूद खनिज संसाधनों को विकसित करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने पर भी जोर दे रही है। खबर अपडेट हो रही है…
सऊदी अरब में 11 करोड़ टन यूरेनियम वाला खनिज मिला:मदीना में रेयर अर्थ मिनरल्स भी मिले; परमाणु ऊर्जा पर बढ़ा सऊदी का फोकस

सऊदी अरब के मदीना इलाके में करीब 11 करोड़ टन यूरेनियम वाला खनिज मिला है। यहां यूरेनियम के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स भी पाए गए हैं। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सम्मेलन में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह खोज मदीना के जबल सैयद प्रोजेक्ट में हुई है। यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा बनाने में होता है। सऊदी अरब पहले से ही परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वह तेल पर अपनी निर्भरता कम करके ऊर्जा के दूसरे स्रोतों को भी बढ़ावा देना चाहता है। खबर अपडेट हो रही है…
Sonu Sood Ganesh Chaturthi 2026

18 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक गणेश चतुर्थी 2026 के मौके पर एक्टर सोनू सूद के घर भी गणपति बप्पा विराजे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। सोनू ने गणेशोत्सव की तैयारियों से लेकर बप्पा से अपनी दुआ और फिल्मों में धार्मिक कहानियों पर खुलकर बात की। पत्नी सोनाली संभालती हैं गणेशोत्सव की जिम्मेदारी सोनू ने बताया कि घर में गणेशोत्सव की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी सोनाली संभालती हैं। उन्होंने कहा कि थीम चुनने से लेकर सजावट को कोऑर्डिनेट करने तक का काम सोनाली ही करती हैं। सोनू के मुताबिक, वह कई सालों से यह जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभा रही हैं। सोनू ने कहा कि बप्पा के आने के साथ ही घर में खुशियों की लहर शुरू हो जाती है। उनके मुताबिक, बप्पा से कुछ मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। वह हमेशा यही दुआ करते हैं कि बप्पा जिंदगी में सब ठीक रखें, लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाएं और आगे का रास्ता दिखाते रहें। 1996 में सोनू सूद ने सोनाली से शादी की थी। बोले- बप्पा ने हाथ थामा है, हमेशा ऐसे ही थामे रखें सोनू ने कहा कि वह हमेशा यही चाहते हैं कि बप्पा उनका हाथ थामे रखें। उन्होंने कहा, “आपने हाथ थामा है, यहां तक लेकर आए हैं, हमेशा हाथ ऐसे ही थामे रखें।” सोनू ने आगे कहा कि जिंदगी का आगे का सफर भी बप्पा के दिखाए रास्ते पर ही बीते। दुनिया में शांति की मांगी दुआ अगर बप्पा से एक वरदान मांगने का मौका मिले तो सोनू ने दुनिया में शांति की दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि दुनिया में बाढ़, भूकंप और युद्ध जैसी कई परेशानियां आती रहती हैं। वह चाहते हैं कि इन मुश्किलों का अंत हो और लोगों की जिंदगी फिर से खुशहाल हो। सोनू सूद और सोनाली के दो बेटे हैं, जिनका नाम ईशांत और अयान है। बोले- बप्पा से सीखा, लोगों के विघ्न दूर करने की कोशिश करें सोनू ने कहा कि हमारी संस्कृति और धार्मिक कहानियां हमें जिंदगी जीने की सीख देती हैं। उन्होंने रामायण और महाभारत का उदाहरण दिया। सोनू के मुताबिक, बप्पा को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इसलिए उन्होंने बप्पा से यह भी सीखा है कि हमें दूसरों की तकलीफें दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। सिद्धिविनायक मंदिर जाते हैं सोनू सोनू ने बताया कि वह सिद्धिविनायक मंदिर नियमित रूप से जाते हैं। शूटिंग के लिए कहीं बाहर भी जाते हैं तो आसपास मंदिर होने की जानकारी मिलने पर दर्शन करने पहुंचते हैं। सोनू सूद ने ढोल बजाकर गणपति बप्पा का स्वागत किया। बोले- मुंबई में कोई नहीं जानता था, आज बड़ा परिवार साथ है अपने जीवन के सबसे बड़े चमत्कार के बारे में सोनू ने कहा कि जब वह मुंबई आए थे, तब उन्हें कोई जानता नहीं था। आज उनका परिवार लगातार बड़ा हो रहा है और लोग उनसे जुड़ते जा रहे हैं। सोनू ने इसे बप्पा की सबसे बड़ी ब्लेसिंग बताया। फिल्मों में धार्मिक और संस्कृति से जुड़ी कहानियों को लेकर सोनू ने कहा कि ऐसी कहानियां सिनेमा से कुछ समय के लिए दूर हो गई थीं। अब इनका दोबारा आना अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी, हर जनरेशन ऐसी कहानियों से जुड़ना चाहती है। सोनू ने कहा कि अगर फिल्ममेकर्स को उनके लायक ऐसी कोई कहानी मिलती है तो वह जरूर उसका हिस्सा बनना चाहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद भी ऐसी कहानियों पर काम करते रहते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







