ISRO GSLV Launch & S Jaishankar G20 Atlanta Visit

Hindi News Career ISRO GSLV Launch & S Jaishankar G20 Atlanta Visit | Current Affairs 7 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। नेशनल (NATIONAL) 1.ISRO ने GSLV-F18 मिशन लॉन्च किया 30 अक्टूबर की देर रात इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी ISRO ने GSLV-F18 मिशन को लॉन्च किया। ये लॉन्च रात 11 बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुआ। ये मिशन भारत की दूसरी पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट सीरीज के तीसरे उपग्रह NVS-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित करेगा। NVS-03 को ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ सैटेलाइट समूह को मजबूत करने और नेविगेशन सर्विस तय करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें मौजूदा L5 / S सिग्नल के अलावा L1 सिग्नल भी शामिल है, जिससे इसका कवरेज भारत और भारत से 1500 किमी आगे तक को कवरेज करता है। ये सैटेलाइट यूजर को सटीक पोजिशन, वेलोसिटी और टाइमिंग (पीवीटी) सेवाएं प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। इस सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ-साथ खरीदी गई एटॉमिक क्लॉक भी लगी हुई हैं। ISRO के अनुसार, GSLV-F18 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 20वीं उड़ान होगी। ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ दो तरह की सेवाएं देता है, जिनमें स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस और रिस्ट्रिक्टेड सर्विस शामिल हैं। पहला सैटेलाइट NVS-01, GSLV-F12 मिशन के तहत 29 मई 2023 को लॉन्च किया गया था। पहली बार 2023 में किसी भारतीय नेविगेशन सैटेलाइट पर स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक उड़ाई गई थी। 2. ‘नेक्स्ट-जनरेशन कोरवेट’ परियोजना को मंजूरी मिली 30 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹40,000 करोड़ की ‘नेक्स्ट-जनरेशन कोरवेट’ परियोजना को मंजूरी दी। इसके तहत 8 नेक्स्ट-जनरेशन कोरवेट (NGC) बनाए जाएंगे। ये NGC सतह-से-सतह और सतह-से-हवा में मार करने वाली उन्नत मिसाइल प्रणालियों से लैस होंगे ये लगभग 2,000 टन वजनी और करीब 120 मीटर लंबे सिंगल-हॉल युद्धपोत हैं। इनकी अधिकतम गति लगभग 30 नॉट्स (लगभग 55 किमी/घंटा) होगी। ये ब्रह्मोस जैसी उन्नत जहाज-रोधी और भूमि-हमला करने वाली मिसाइलों, टॉरपीडो और आधुनिक सेंसर से लैस होंगे। ये युद्धपोत तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) और गश्त अभियानों में तैनात किए जाएंगे इन युद्धपोतों को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) मिलकर तैयार करेंगे। इन युद्धपोतों में 70% से ज्यादा सामान भारत में बनाया जाएगा। सभी 8 युद्धपोत भारत में ही बनाए जाएंगे। पहले युद्धपोत का निर्माण एक साल के भीतर शुरू होने की उम्मीद है। इसे 2030 तक नौसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। इसी साल 21 जून को तीन स्वदेशी युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे। 3.पीएम मोदी ने गुजरात में 14 हजार करोड़ की परियोजनाएं का उद्घाटन 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा में ₹14 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन प्रोजेक्ट में एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (ET-IVF) प्रयोगशाला का उद्घाटन भी शामिल है साथ ही दो नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई और 12 बागवानी क्लस्टरों का उद्घाटन भी किया जाएगा। इन क्लस्टरों के माध्यम से हाई-वैल्यू वाली बागवानी फसलों के प्रोडक्शन, प्रसंस्करण और मार्केटिंग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पीएम ने इस दौरान किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत 9.34 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों को ₹18,690 करोड़ से अधिक की रकम मिलेगी। पीएम ने इस दौरान बनासकांठा में रोड शो भी किया। 4. डॉ. एस जयशंकर ने G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया 30 अक्टूबर को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए। इस बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की और बैठक में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को आसान बनाने और साझा आर्थिक तथा सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने पर बात हुई। G20 बैठक के दौरान ‘क्वाड’ देशों अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी हिस्सा लेंगे। ये इस साल की दूसरी ‘क्वाड’ विदेश मंत्री स्तरीय बैठक होगी। जयशंकर कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग’ (CHOGM) अटलांटा से एंटीगुआ और बारबुडा के सेंट जॉन्स जाएंगे। ये मीटिंग 1 नवंबर से 4 तक चलेगी। एस जय शंकर अटलांटा से एंटीगुआ और बारबुडा के सेंट जॉन्स जाएंगे। निधन (DEATH) 5. हॉलीवुड एक्टर सर पैट्रिक स्टीवर्ट का निधन 30 अक्टूबर को हॉलीवुड एक्टर सर पैट्रिक स्टीवर्ट का लॉस एंजिल्स में 86 साल की उम्र में निधन हो गया। पैट्रिक स्टीवर्ट ‘एक्स-मेन ‘ और ‘स्टार ट्रेक’ फ्रेंचाइजी में काम किया था। स्टीवर्ट ने 1966 में रॉयल शेक्सपियर कंपनी से जुड़कर थिएटर में अपनी पहचान बनाई। स्टीवर्ट साइंस-फिक्शन सीरीज ‘स्टार ट्रेक: द नेक्स्ट जेनरेशन’ में कैप्टन जीन-ल्यूक पिकार्ड के किरदार से दुनियाभर में पहचान मिली। इसके अलावा, स्टीवर्ट ने ‘एक्स-मेन ‘ फिल्मों में प्रोफेसर चार्ल्स जेवियर यानी प्रोफेसर एक्स का किरदार निभाया। पैट्रिक स्टीवर्ट को उनके शानदार अभिनय के लिए कई सम्मान मिले थे। इनमें ब्रिटेन का प्रतिष्ठित नाइटहुड सम्मान भी शामिल था। थिएटर में उनके बेहतरीन काम के लिए स्टीवर्ट को प्रतिष्ठित लॉरेंस ओलिवियर भी अवॉर्ड मिले। स्टीवर्ट अपने करियर में चार एमी अवॉर्ड, तीन गोल्डन ग्लोब और एक टोनी अवॉर्ड के लिए भी नॉमिनेट हुए। स्टीवर्ट ने 60 साल से ज्यादा समय तक थिएटर, टीवी और फिल्मों में काम किया। मिसलीनियस 6. नॉर्थ डकोटा में महात्मा गांधी की पहली लाइफ साइज प्रतिमा का अनावरण 30 अक्टूबर को अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य में महात्मा गांधी की पहली लाइफ साइज प्रतिमा का अनावरण हुआ। इस प्रतिमा को नॉर्थ डकोटा की राजधानी बिस्मार्क स्थित ‘पीस पार्क’ में स्थापित किया गया। ये नॉर्थ डकोटा राज्य में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित पहली प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना दुनिया भर में शांति, अहिंसा और सत्य के संदेश को फैलाने के उद्देश्य से की गई है। संयुक्त राष्ट्र हर साल 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ भी मनाता है। यह प्रतिमा भारत और अमेरिका के बीच पीपल टू पीपल को मजबूत बनाने के लिए की गई है। आज का इतिहास 1984 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षाकर्मियों ने नई दिल्ली में हत्या की। 1966 में भारत के प्रसिद्ध तैराक मिहिर सेन ने 34 घंटे 15 मिनट में पनामा नहर को तैरकर पार किया। —————— ये खबर भी
Get ₹1 Lakh Stipend & Research Grant

Hindi News Career Jawaharlal Nehru Fellowship Program: Get ₹1 Lakh Stipend & Research Grant 12 मिनट पहले कॉपी लिंक जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड स्टूडेंट्स के लिए एक ऐसा फेलोशिप प्रोग्राम लेकर आया है। जिसमें स्टूडेंट्स को हर महीने 1 लाख रुपए का स्टाइपेंड दिया जाएगा। इस फेलोशिप का फायदा वे सभी लोग उठा सकते हैं, जो भारत से जुड़े ऐसे मुद्दों पर रिसर्च कर रहे हैं, जो देश के विकास में योगदान दे सकें। क्या है जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप प्रोग्राम ये फेलोशिप प्रोग्राम जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड की तरफ से चलाया जाता है। इसमें ऐसे सभी लोग जो साइंस, ह्यूमैनिटी, पत्रकारिता, कला जैसे क्षेत्रों में रिसर्च कर रहे हैं। वे सभी इस फेलोशिप के लिए अप्लाई कर सकते हैं, जिससे उनकी स्टडी में मदद मिल सके। इस प्रोग्राम में ऐसे सभी लोगों को 2 साल तक हर महीने 1 लाख रुपए के साथ-साथ सालाना 75 हजार रुपए एक्ट्रा दिए जाते हैं। जिसे आप यात्रा और रिसर्च में आने वाले एक्ट्रा खर्चों पर इस्तेमाल कर सकतें हैं। कौन-कौन कर सकता हैं अप्लाई इस फेलोशिप के लिए ऐसे लोग अप्लाई कर सकते हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अच्छा काम किया हो और आगे कुछ नया करने की सोच रखते हों। उनके पास कोई ऐसा आइडिया या प्रोजेक्ट होना चाहिए, जिस पर वे रिसर्च करना चाहते हैं या कुछ नया करना चाहते हैं। इस फेलोशिप के लिए सिर्फ भारतीय नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि आप भारत में कहीं भी रहकर अपने प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं। इस योजना में उम्र की कोई सीमा नहीं है, किसी भी उम्र के लोग लोग इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसका मकसद लोगों को अपने क्षेत्र में और बेहतर काम करने, नई चीजें सीखने और देश के विकास में योगदान देने का मौका देना है। सिलेक्शन प्रोसेस इस फेलोशिप के लिए कैंडिडेट्स का सिलेक्शन अलग-अलग फील्ड के अनुभवी और जाने-माने लोगों की एक कमेटी करती है। कमेटी यह देखती है कि किस कैंडिडेट ने अपनी फील्ड में अच्छा काम किया है और किसके पास कुछ नया करने का आइडिया है। सिलेक्शन के दौरान अलग-अलग फील्ड के टैलेंटेड लोगों को मौका देने की कोशिश की जाती है। 1968 में शुरू हुई थी फेलोशिप जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप की शुरुआत साल 1968 में हुई थी। तब से अब तक इस प्रोग्राम के तहत कुल 155 फेलोशिप दी जा चुकी हैं। इसका मकसद अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले टैलेंटेड लोगों को रिसर्च और कुछ नया करने के लिए आर्थिक मदद और समय देना है। PhD के लिए भी मिलती है स्कॉलरशिप साल 1987 से फेलोशिप PhD के लिए भी शुरू की गई है। उस समय इसे भारत और विदेश में हायर स्टडीज के लिए शुरू किया गया था। बाद में मार्च 1993 में इस स्कीम को शुरू करने की जिम्मेदारी जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड को दी गई। इसके बाद एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई और साल 1994 में इस स्कीम को जवाहरलाल नेहरू स्कॉलरशिप फॉर डॉक्टोरल स्टडीज नाम से शुरू किया गया। इस स्कीम के लिए मंत्रालय की तरफ से 7 करोड़ रुपए दिए गए थे। स्कॉलरशिप का खर्च इसी रकम पर मिलने वाले ब्याज से चलाया जाता है। साल 2017 तक इस स्कीम के तहत PhD की पढ़ाई के लिए कुल 688 स्कॉलरशिप दी जा चुकी थीं। ——————– IIT खड़गपुर में बनेगा देश का पहला AI स्कूल:35 करोड़ खर्च, IISER पुणे, IIM बैंगलोर ने जारी की नई पॉलिसी IIT खड़गपुर देश का पहला AI स्कूल खोलने जा रहा है। इसके लिए संस्थान ने अपने पूर्व छात्र विनोद गुप्ता और IIT खड़गपुर फाउंडेशन अमेरिका के साथ MoU साइन किया है। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
CBSE Syllabus Update | Class 9 & 10 Subjects Change & Optional List

Hindi News Career CBSE Syllabus Update | Class 9 & 10 Subjects Change & Optional List 6 मिनट पहले कॉपी लिंक सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई (CBSE) ने 29 अक्टूबर को एक नया सर्कुलर जारी। इसमें यह बताया गया कि कक्षा 9वीं के स्टूडेंट्स को कौन से सब्जेक्ट पढ़ने होंगे और कक्षा 10वीं में उनका असेसमेंट कैसे किया जाएगा। CBSE ने इस साल कक्षा 9वीं से अगले साल कक्षा 10वीं में जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए स्कीम ऑफ स्टडीज में बदलाव किया है। इस सर्कुलर के मुताबिक, अब कक्षा 10वीं में ‘एनवायरमेंटल एजुकेशन’ विषय नहीं पढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही कक्षा 9वीं में इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मॉड्यूल भी इन बैचेस के सिलेबस का हिस्सा नहीं होंगे। जो छात्र अभी 2026-27 में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा बल्कि उनकी पढ़ाई पुराने सिलेबस के अनुसार ही चलेगी। नई योजना के तहत अब छात्रों को कुल 9 अनिवार्य विषय पढ़ना होंगे। इसमें वोकेशनल एजुकेशन को अनिवार्य किया गया है। यह नई योजना छात्रों से अतिरिक्त विषयों का बोझ कम करने के लिए बनाई गई है। इसका मकसद यह है कि छात्र किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रोफेशनल और प्रैक्टिकल स्किल्स भी सीख सकें। इससे उन्हें बेहतर करियर बनाने में मदद मिल सकेगी। हर मेन सब्जेक्ट में 33% मार्क्स जरूरी दसवीं में पास होने के लिए दोनों मेन लैंग्वेज, मैथ्स, साइंस और सोशल साइंस में अलग-अलग 33%अंक लाना जरूरी होगा। इसमें रिटन और इंटरनल एसेसमेंट के मार्क्स जुड़ेंगे। अगर कोई स्टूडेंट्स मैथ्स, साइंस या सोशल साइंस में से किसी एक विषय में फेल होता है और स्किल विषय की बोर्ड परीक्षा पास कर चुका है, तो स्किल विषय से उस विषय को बदला जा सकेगा यानी वह फेल नहीं होगा। बोर्ड का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ऑप्शनल सब्जेक्ट के लिए 57 सब्जेक्ट की लिस्ट जारी कक्षा 9वीं और आगामी 2028 की कक्षा 10वीं के स्टूडेंट्स एक ऑप्शनल सब्जेक्ट भी चुन सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए 57 सब्जेक्ट की लिस्ट जारी की है। स्टूडेंट्स अपनी रूचि के अनुसार, लैंग्वेज, कंप्यूटर एप्लिकेशन, होम साइंस, पेंटिंग, संगीत और बिजनेस से जुड़े विषयों में से कोई एक ऑप्शन चुन सकते हैं। स्पेशल एजुकेशन स्टूडेंट्स को 4 अन्य विषय चुनने की छूट इंटरनल असेसमेंट वाले सब्जेक्ट में 33 से 40 अंक पर डी ग्रेड और 33 से कम पर ई ग्रेड मिलेगा। डी या उससे ऊपर ग्रेड पाने वाले स्टूडेंट्स को स्कूल, सर्टिफिकेट जारी करेगा। स्पेशल एजुकेशन वाले स्टूडेंट्स को एक अनिवार्य भाषा के साथ चार अन्य विषय चुनने की छूट भी दी जाएगी। कक्षा 9वीं में आर्ट एजुकेशन और फिजिकल एजुकेशन के लिए स्कूल मार्क्स के बजाय ग्रेड देंगे और ग्रेड D या उससे ऊपर लाने वाले स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। एडवांस लेवल विषय चुनने का विकल्प भी मौजूद नए सर्कुलर के अनुसार, इस साल से कक्षा 9वीं और अगले साल से कक्षा 10वीं के छात्रों के पास अब मुख्य विषयों के तौर पर एडवांस लेवल मैथ्स और एडवांस लेवल साइंस को चुनने का विकल्प भी मौजूद रहेगा। जो छात्र आगे चलकर इंजीनियरिंग या साइंटिफिक रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, वे इन एडवांस विषयों को चुनकर अपने फंडामेंटल्स क्लियर कर सकते हैं। स्किल एजुकेशन के नए ऑप्शन शामिल CBSE ने स्किल एजुकेशन ने नए ऑप्शन के तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी, डाटा साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर और डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन को शामिल किया है। अप्रैल 2026 से ये विषय भी हटा इस साल अप्रैल 2026 से कक्षा 9वीं के सिलेबस से इंग्लिश कम्युनिकेटिव सब्जेक्ट बंद हुआ। अब सिर्फ इंग्लिश कोर्स शामिल है। वहीं 10वीं कक्षा में पहले से इंग्लिश कम्युनिकेटिव पढ़ रहे स्टूडेंट्स इसे जारी रख सकते हैं। सीबीएसई के एकेडमिक सर्कुलर का नोटिफिकेशन लिंक सीबीएसई स्किल एजुकेशनल नोटिफिकेशन लिंक ये खबर भी पढ़ें DU में PhD एडमिशन के लिए इंटरव्यू रद्द:JNU में विवाद, एससी, एसटी को सीटें कम, सिलेक्शन प्रोसेस में गड़बड़ी का आरोप दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हिंदी पीएचडी एडमिशन के लिए जारी नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है। इसकी वजह स्टूडेंट्स ने इंटरव्यू के लिए बहुत कम समय दिए जाने और सिलेक्शन प्रोसेस के लिए शॉर्टलिस्ट किए उम्मीदवारों की संख्या को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें ये खबर भी पढ़ें DU में PhD एडमिशन के लिए इंटरव्यू रद्द:JNU में विवाद, एससी, एसटी को सीटें कम, सिलेक्शन प्रोसेस में गड़बड़ी का आरोप दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हिंदी पीएचडी एडमिशन के लिए जारी नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है। इसकी वजह स्टूडेंट्स ने इंटरव्यू के लिए बहुत कम समय दिए जाने और सिलेक्शन प्रोसेस के लिए शॉर्टलिस्ट किए उम्मीदवारों की संख्या को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Ex-VP Launches AI Startup Warp Sciences

Hindi News Career Manohar Paluri Quits Meta: Ex VP Launches AI Startup Warp Sciences 10 मिनट पहले कॉपी लिंक IIIT हैदराबाद से पढ़ाई करने वाले मनोहर पलूरी ने Meta में 14 साल तक काम किया और फिर नौकरी छोड़कर अपनी नई कंपनी Warp Sciences की शुरुआत की है। जिसे हाल ही में 215 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,800 करोड़ रुपये की फंडिंग मिल गई है। यह कंपनी AI से नई दवाएं बनाने में मदद करेगी। IIIT हैदराबाद से Meta तक का सफर मनोहर पलूरी ने साल 2006 में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद (IIIT Hyderabad) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने सार्नोफ कॉर्पोरेशन में काम शुरू किया। यहां वे कंप्यूटर विजन से जुड़े उनके काम में वीडियो का एनालिसिस करना, किसी चीज की एक्टिविटी पर नजर रखना और कैमरे से जुड़े काम को ऑटोमेट करना शामिल था। इसके बाद वे अमेरिका चले गए और जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से आगे की पढ़ाई की। यहां उन्होंने कंप्यूटर विजन और रोबोटिक्स के क्षेत्र में रिसर्च की। इतना ही नहीं उनके करियर में IBM वॉटसन लैब्स और Google जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल रहीं। Google में उन्होंने रिसर्च इंटर्न के तौर पर काम किया, जहां उनका काम 3D मैपिंग से जुड़ा था। फिर आया साल 2012 जब मनोहर पलूरी ने Facebook में कंप्यूटर विजन रिसर्चर के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने लगातार तरक्की की। साल 2015 में वे AI के डायरेक्टर बने, 2021 में सीनियर डायरेक्टर और 2024 में कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट बन गए। Meta में उनका काम AI की रिसर्च को ऐसे प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करने से जुड़ा था, जिनका उपयोग कंपनी के अलग-अलग ऐप्स में किया जाता है। इस तरह उन्होंने एक रिसर्चर से लेकर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को साथ Meta में वाइस प्रेसिडेंट तक का सफर तय किया। कैसे काम करती है Warp Sciences Warp Sciences एक ऐसी कंपनी है, जो AI, रोबोटिक्स और केमिस्ट्री को मिलाकर नई दबाओं की खोज से जुड़ी रिसर्च को तेज करेगा। बता दें आमतौर पर नई दवा बनाने के लिए साइंटिस्ट्स को कई तरह के एक्सपेरिमेंट करने पड़ते हैं। जसके लिए वे अलग-अलग केमिकल्स को टेस्ट करते हैं, उनके रिजल्ट देखते हैं और फिर पता लगाते हैं कि कौन-सा केमिकल किसी बीमारी के इलाज में काम आ सकता है। इस पूरी प्रोसेस में काफी समय और पैसा लगता है। Warp Sciences इसी काम को आसान और तेज बनाना चाहती है। जहां कंपनी AI की मदद से यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि किन केमिकल्स पर एक्सपेरिमेंट करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। इसके बाद रोबोटिक लैब में उन केमिकल्स को टेस्ट किया जाएगा। यानी AI यह समझने में मदद करेगा कि आगे क्या टेस्ट करना चाहिए और रोबोट लैब में कई एक्सपेरिमेंट अपने आप करने में मदद करेंगे। 215 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई Warp Sciences को शुरुआती फंडिंग में 215 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,800 करोड़ रुपए मिले हैं। इस राउंड को लाइट स्पीड पार्टनर्स ने लीड किया। इसके अलावा IVP, माईफील्ड, लक्स कैपिटल और प्रेमजी इंवेस्ट जैसे इन्वेस्टर्स ने भी पैसा लगाया। बता दें इसकी बड़ी वजह AI और नई दवाओं की खोज का सेक्टर है। अगर AI और रोबोटिक्स की मदद से दवाएं बनाने की प्रोसेस तेज और सस्ती हो जाए, तो फार्मा कंपनियों को बड़ा फायदा हो सकता है। कैसे काम करेगी कंपनी? 1. AI से रिसर्च: AI अलग-अलग केमिकल्स और उनसे जुड़ी जानकारी का एनालिसिस करेगा। इससे साइंटिस्ट्स को नए एक्सपेरिमेंट की प्लानिंग करने में मदद मिलेगी। 2. रोबोट करेंगे टेस्टिंग: कंपनी अपनी ऑटोमेटेड लैब में रोबोट और आधुनिक मशीनों की मदद से केमिकल्स की टेस्टिंग करेगी। इससे बार-बार किए जाने वाले कई काम तेजी से हो सकेंगे। 3. रिजल्ट से सीखेगा AI: हर एक्सपेरिमेंट के रिजल्ट रिकॉर्ड किए जाएंगे। इन रिजल्ट के आधार पर साइंटिस्ट्स और एआई यह समझ सकेंगे कि आगे किस तरह के एक्सपेरिमेंट करने चाहिए। करियर में नई शुरुआत की मिसाल मनोहर के पास अभी Warp Sciences के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी टेक्नोलॉजी को सफल साबित करने की है। अगर कंपनी इसमें कामयाब होती है, तो भविष्य में AI की मदद से नई दवाएं खोजने का तरीका बदल सकता है। ——————– दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
‘रंग दे बसंती’ के बाद फिर जयपुर पहुंचे कुणाल कपूर:नए प्रोजेक्ट की शूटिंग के लिए आए, एयरपोर्ट पर फैंस के साथ खिंचवाई तस्वीरें

बॉलीवुड एक्टर कुणाल कपूर शुक्रवार को जयपुर पहुंचे। वे मुंबई से एयर इंडिया की फ्लाइट से गुलाबी नगरी आए हैं। अभिनेता यहां एक नए प्रोजेक्ट की शूटिंग के सिलसिले में पहुंचे हैं। जयपुर एयरपोर्ट पर उनके पहुंचने की जानकारी मिलते ही फैंस उनके आसपास जुट गए। कुणाल भी प्रशंसकों से मिलकर काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन किया और फैंस के साथ तस्वीरें भी क्लिक करवाईं। एक्टर कुणाल कपूर का जयपुर से पुराना जुड़ाव कुणाल कपूर का जयपुर से पुराना जुड़ाव रहा है। वे इससे पहले आमिर खान के साथ चर्चित फिल्म ‘रंग दे बसंती’ की शूटिंग के सिलसिले में भी शहर आ चुके हैं। वर्ष 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने असलम खान का किरदार निभाया था। फिल्म में आमिर खान, सिद्धार्थ, आर. माधवन, शरमन जोशी और सोहा अली खान जैसे कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिला और यह कुणाल के करियर की अहम फिल्मों में शामिल हुई। करीब दो दशक बाद एक बार फिर शूटिंग के सिलसिले में जयपुर पहुंचना उनके लिए पुराने अनुभवों को ताजा करने वाला मौका है। ‘रंग दे बसंती’ से मिली खास पहचान कुणाल कपूर ने हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में एम.एफ. हुसैन की फिल्म ‘मीनाक्षी : ए टेल ऑफ थ्री सिटीज’ से की थी। हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘रंग दे बसंती’ से मिली। ‘रंग दे बसंती’ की सफलता के बाद कुणाल ने अलग-अलग तरह के किरदारों में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। ‘हैट्रिक’, ‘आजा नचले’, ‘लागा चुनरी में दाग’ और ‘बचना ऐ हसीनों’ जैसी फिल्मों में वे नजर आए। इसके बाद शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘डॉन 2’ में समीर अली के किरदार ने भी उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलाई। कुणाल कपूर ने रोमांटिक, कॉमेडी, ऐतिहासिक और एक्शन फिल्मों में काम किया है। वर्ष 2012 में आई फिल्म ‘लव शव ते चिकन खुराना’ में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को सराहना मिली। इसके बाद ‘कौन कितने पानी में’, ‘डियर जिंदगी’, ‘वीरम’, ‘राग देश’ और ‘गोल्ड’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। हाल के वर्षों में कुणाल ने फिल्मों के साथ ओटीटी और दूसरे रचनात्मक माध्यमों में भी काम किया है। वर्ष 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘ज्वेल थीफ : द हीस्ट बिगिन्स’ में वे विक्रम पटेल के किरदार में नजर आए। इस फिल्म में सैफ अली खान और जयदीप अहलावत भी अहम भूमिकाओं में थे। अभिनय के साथ उद्यमिता में भी बनाई पहचान कुणाल कपूर की पहचान केवल अभिनेता के तौर पर ही नहीं है। वे उद्यमिता और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘केट्टो’ की सह-स्थापना की, जिसके जरिए जरूरतमंद लोगों और सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने का मंच उपलब्ध कराया जाता है। अभिनय और उद्यमिता के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
पाकिस्तान के मंदिर में लगा ‘रामायण’ का पोस्टर:लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए, फिल्म को ऑस्कर मिलने की प्रार्थना की

रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर पाकिस्तान में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान के कराची में एक मंदिर में फिल्म ‘रामायण’ का पोस्टर लगाया गया है। यूट्यूब पर सामने आए एक वीडियो में यहां हिंदू समुदाय के कुछ लोग ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते नजर आए। वीडियो में कराची के एक मंदिर में फिल्म का पोस्टर दिखाई दे रहा है। पोस्टर में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश नजर आ रहे हैं। ये फिल्म में भगवान राम, सीता और रावण की भूमिकाएं निभा रहे हैं। वीडियो में लोग फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते दिख रहे हैं। कुछ लोगों ने इसके ऑस्कर जीतने की उम्मीद भी जताई। पाकिस्तान में क्या फिल्म रामायण रिलीज होगी? रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भले ही पाकिस्तान में भी चर्चा हो रही है, लेकिन वहां फिल्म की थिएटर रिलीज को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। द फ्री प्रेस जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सैन्य तनाव के चलते वहां भारतीय फिल्मों की रिलीज पर पाबंदियां हैं। वहीं, अगस्त 2026 में प्रकाशित पाकिस्तान शोबिज की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारतीय फिल्मों के लिए NOC जारी करना बंद कर दिया था। फिल्म के मेकर्स ने इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन के लिए सोनी पिक्चर्स के साथ साझेदारी की है। हालांकि, दुनियाभर में रिलीज की योजना होने का मतलब यह नहीं है कि फिल्म को हर देश में रिलीज करने की अनुमति मिल गई है। रकुल का शूर्पणखा के रोल में पहला लुक जारी शुक्रवार को फिल्म के मेकर्स ने रकुल प्रीत सिंह के किरदार का पहला पोस्टर जारी किया। इसमें वह जनस्थान की राजकुमारी शूर्पणखा के शाही अंदाज में नजर आ रही हैं। उन्होंने खास परिधान, सोने के गहने और सिर पर आकर्षक हेडपीस पहना हुआ है। पोस्टर के साथ मेकर्स ने लिखा, ‘जनस्थान की राजकुमारी, शूर्पणखा। शूर्पणखा के रूप में रकुल प्रीत सिंह।’ फिल्म में अपने किरदार को लेकर रकुल ने कहा कि शूर्पणखा की भूमिका निभाना उनके लिए खास अनुभव है। उन्होंने इस किरदार की दुनिया को समझने और पर्दे पर उतारने के सफर को शानदार बताया। रकुल ने कहा कि वह दर्शकों के सामने अपना लुक और परफॉर्मेंस लाने के लिए उत्साहित हैं। ………………… यह खबर भी पढ़ें… ‘रामायण’ के ट्रेलर की पाकिस्तान में हुई तारीफ: कंटेंट क्रिएटर्स ने VFX और मेकिंग को बताया शानदार, रणबीर कपूर की भी सराहना की पाकिस्तान के कंटेंट क्रिएटर्स और फिल्म क्रिटिक्स ने रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ के ट्रेलर की तारीफ की थी। उन्होंने फिल्म के VFX, स्टार कास्ट और मेकिंग को शानदार बताया था। क्रिएटर्स ने रणबीर कपूर और यश की एक्टिंग की भी सराहना की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Naseeruddin Shah Controversy | Gajendra Chauhan & Ashok Pandit Statement

7 मिनट पहले कॉपी लिंक महाभारत में युधिष्ठिर का रोल निभाने वाले गजेंद्र चौहान एक्टर नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर भड़क गए हैं। गजेंद्र चौहान ने शाह को सीधे चुनाव लड़ने की चुनौती दी और कहा कि वे उनके खिलाफ मैदान में उतरकर उन्हें चुनाव हराएंगे। वहीं फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने शाह के आचरण पर सवाल उठाते हुए उनके व्यवहार को बेकाबू बताया और कहा कि उन्हें मेडिकल मदद की जरूरत है। महाभारत में युधिष्ठिर का रोल निभाने वाले एक्टर गजेंद्र चौहान। ‘अगर सरकार का विरोध पसंद है तो चुनाव लड़कर दिखाएं’ गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन शाह को सीधे चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि देश ने एक कलाकार के तौर पर नसीरुद्दीन शाह को बहुत सम्मान और प्यार दिया, लेकिन अपने बयानों से उन्होंने इस सम्मान को नुकसान पहुंचाया है। गजेंद्र चौहान ने कहा, “अगर आपको सरकार का विरोध करने का इतना ही शौक है, तो चुनाव लड़कर दिखाइए। आप जहां से भी चुनाव लड़ेंगे, मैं भाजपा कार्यकर्ता के नाते अपनी पार्टी से आपके खिलाफ टिकट मांगूंगा और आपको चुनाव में हराकर दिखाऊंगा।” अशोक पंडित बोले- हताशा में मर्यादा भूल चुके हैं नसीरुद्दीन फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी नसीरुद्दीन शाह के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। IANS से बातचीत में अशोक पंडित ने कहा कि पिछले एक साल से शाह की भाषा और बर्ताव में लगातार गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि शाह का व्यवहार किसी गुंडे जैसा हो गया है और वे अपनी मर्यादाएं खो चुके हैं। पंडित ने कहा कि पढ़े-लिखे इंसान होने का दावा करने वाले व्यक्ति की ऐसी भाषा उनकी हताशा और अनकंट्रोल्ड व्यवहार को दर्शाती है। फिल्म निर्माता अशोक पंडित। नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था? नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे कहते हैं- “मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब (उपनाम) दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।” उन्होंने आगे कहा, “टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?” उन्होंने यह भी कहा कि पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), फिर सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और अब जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों पर जो जुल्म किया जा रहा है, वो याद रखा जाएगा। सब याद रखा जाएगा। नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो में मीडिया और बीजेपी आईटी सेल के लिए अपशब्दों का भी प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद देश के युवाओं का हौसला नहीं टूटेगा, शिक्षा संस्थान बर्बाद नहीं होंगे और लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ेगा। वीडियो के आखिर में उन्होंने देश के युवाओं को सलाम किया और कहा कि उनकी दुआएं उनके साथ हैं। बीजेपी के लिए अपशब्द कहे थे; झूठी पार्टी बताया था इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर किया था। अभिनेता ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद बीजेपी उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों का मुद्दा भी उठाया। शाह ने वीडियो में कहा था कि संस्थान के छात्र प्रशासन से जवाब मांग रहे थे। इसके बदले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी में रखा गया और धमकियां दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया है। अभिनेता ने बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वह अपने पक्ष में प्रचार को बढ़ावा दे रही है और असहमत लोगों को डराने या उनकी सोच बदलने की कोशिश कर रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘ईठा’ का ट्रेलर रिलीज:विठाबाई के किरदार में छाईं एक्ट्रेस, डायलॉग्स ने छोड़ी छाप; अजय-अतुल का म्यूजिक भी कमाल

श्रद्धा कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘ईठा’ का ट्रेलर आज दोपहर रिलीज हुआ। फिल्म में श्रद्धा मशहूर लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर का किरदार निभा रही हैं। लक्ष्मण उतेकर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 4 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में रणदीप हुड्डा, मोहम्मद जीशान अय्यूब और नाना पाटेकर भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म ‘ईठा’ का ट्रेलर महाराष्ट्र की लोककला तमाशा और लावणी की दुनिया दिखाता है। ट्रेलर में कला, संघर्ष और अपने सम्मान के लिए लड़ाई नजर आती है। श्रद्धा विठाबाई के किरदार में दमदार लग रही हैं। उनके डायलॉग भी असर छोड़ते हैं। एक जगह वह कहती हैं, “देखते हैं क्या टूटता है, मेरा भरोसा या मेरा घमंड। मेरा भरोसा ही मेरा घमंड था रे। जब वो टूट गया ना, सब टूट गया।” मोहम्मद जीशान अय्यूब के डायलॉग्स भी ध्यान खींचते हैं मोहम्मद जीशान अय्यूब का अंदाज भी ध्यान खींचता है। उनके डायलॉग्स भी शानदार हैं। ट्रेलर में वह श्रद्धा कपूर के किरदार ईठा से कहते हैं, “तुझसे तो नाच के मुकाबले में तकदीर भी नहीं जीत सकती, ईठा। बिना नाचे जाएगी क्या? देख, आसमान का मंडप है, चांद की लाइट है, हवाओं के स्पीकर हैं। कोई हो न हो, तेरा रिवाज तो है। तू ही कहती थी न कि पड़े-पड़े मरी तो बेचारी कहलाऊंगी।” इसके बाद ईठा कहती है, “पर नाचते हुए मरी तो मिसाल बन जाऊंगी।” ट्रेलर की जान इसका संगीत है। अजय-अतुल का म्यूजिक कहानी के माहौल को और मजबूत बनाता है। नववारी साड़ी को लेकर श्रद्धा का डायलॉग भी खास है, वो कहती हैं, “ये सिर्फ कपड़ा नहीं, अभिमान है। जिसे पहनने मिले, वो भाग्यवान है।” फिल्म में अन्ना सावंत मर्चेंट का किरदार निभाएंगे फिल्म ‘ईठा’ से कल रणदीप हुड्डा का फर्स्ट लुक भी जारी हुआ था। पोस्टर में रणदीप अपने किरदार अन्ना सावंत मर्चेंट के रूप में नजर आ रहे हैं। रणदीप हुड्डा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह पोस्टर शेयर किया। पोस्टर में वह बड़ी मूंछों और भारी-भरकम शरीर के साथ दिख रहे हैं। ‘ईठा’ से 28 अक्टूबर को श्रद्धा कपूर का नया पोस्टर जारी किया गया था। पोस्टर में श्रद्धा पारंपरिक लावणी डांसर के रूप में नजर आ रही हैं। वह हाथों में घुंघरू थामे गंभीर और प्रभावशाली अंदाज में दिख रही हैं। लीजेंड्री कलाकार विठाबाई के बारे में जानिए-
मूवी रिव्यू – ‘झाड़ फूंक’:एक खंडहरनुमा तहखाना, गायब प्रेमी और रहस्य, आखिर किस सच से सामना करेगी आस्था?

फिल्म- झाड़ फूंक कलाकार: यशपाल शर्मा, पद्मिनी कोल्हापुरे, सुम्बुल तौकीर खान, हर्ष राजपूत, अप्रतिम सिंह निर्देशक: राजन रामगोपाल वर्मा निर्माता: शैलेश परिहार शैली: हॉरर ड्यूरेशन: 1 घंटा 53 मिनट रिलीज: 30 अक्टूबर 2026, हॉटस्टार रेटिंग: 3/5 कभी कभी डर किसी अंधेरे कमरे में नहीं, बल्कि उन सवालों में छिपा होता है, जिनके जवाब हमारे पास नहीं होते। जब जिंदगी, रिश्ते और अनजाना खौफ एक ही मोड़ पर आकर खड़े हो जाएं, तो सच तक पहुंचना आसान नहीं होता। फिल्म ‘झाड़ फूंक’ की कहानी भी ऐसे ही रहस्यों के बीच आगे बढ़ती है, जहां हर नया सवाल अपने साथ एक अनजाना डर लेकर आता है। फिल्म की कहानी आस्था (सुम्बुल तौकीर खान) प्रेग्नेंट है और राजवीर (हर्ष राजपूत) के साथ उत्तराखंड से दिल्ली की ओर सफर कर रही है। आस्था चाहती है कि राजवीर उससे शादी कर ले, लेकिन रास्ते में हुए एक हादसे के बाद राजवीर अचानक गायब हो जाता है। इसके बाद आस्था ऐसी परिस्थितियों में पहुंच जाती है, जहां उसकी मुलाकात मोहन ठाकुर (यशपाल शर्मा) और कामिनी ठाकुर (पद्मिनी कोल्हापुरे) से होती है। एक खंडहरनुमा तहखाना, वहां का रहस्यमयी माहौल और मंजरी से जुड़ी घटनाएं उसके डर को बढ़ाने लगती हैं। धीरे धीरे इस जगह से जुड़े राज सामने आते हैं और आस्था ऐसे अनुभवों से गुजरती है, जो उसके लिए सब कुछ बदल देते हैं। इन घटनाओं के पीछे क्या है, यही फिल्म के सस्पेंस का अहम हिस्सा है। फिल्म का डायरेक्शन, स्टोरी और स्क्रीनप्ले निर्देशक राजन रामगोपाल वर्मा की फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है। एक गर्भवती महिला, अचानक गायब हुआ प्रेमी और रहस्यमयी तहखाने का माहौल कहानी को रोमांचक बना सकता था। फिल्म के प्रीक्लाइमैक्स में सस्पेंस पैदा होता है और कुछ देर के लिए कहानी दर्शकों को बांधने में सफल रहती है। हालांकि, फिल्म की रफ्तार कई जगह धीमी पड़ जाती है। कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जबकि कई घटनाओं के बीच जुड़ाव साफ नजर नहीं आता। कहानी जिस सवाल के साथ शुरू होती है, वह बीच में अपनी अहमियत खोने लगता है। इससे मुख्य कहानी का प्रभाव कम होता है और दर्शकों की उत्सुकता भी कमजोर पड़ सकती है। हॉरर के साथ आस्था और अंधविश्वास का पहलू जोड़ा गया है, लेकिन डर पैदा करने वाले दृश्य हर बार असर नहीं छोड़ते। कई जगह माहौल बनाने की कोशिश दिखती है, मगर वह प्रभावशाली डर में नहीं बदल पाती। स्क्रीनप्ले ज्यादा कसा हुआ होता और गैरजरूरी दृश्यों को छोटा किया जाता, तो फिल्म का असर बेहतर हो सकता था। कहानी में मौजूद संभावनाओं को पूरी तरह पर्दे पर उतारने के लिए निर्देशन और तकनीकी प्रस्तुति में और कसावट की जरूरत महसूस होती है। फिल्म में एक्टिंग यशपाल शर्मा अपने अनुभव के साथ किरदार में गंभीरता लाते हैं। पद्मिनी कोल्हापुरे भी रहस्यमयी माहौल के अनुरूप अभिनय करती हैं। सुम्बुल तौकीर खान आस्था के डर और परेशानी को पर्दे पर उतारने की कोशिश करती हैं, जबकि हर्ष राजपूत की भूमिका कहानी की शुरुआती कड़ी में अहम है। हालांकि, कमजोर लेखन के कारण कलाकारों को अपने किरदारों के जरिए पूरी छाप छोड़ने का मौका नहीं मिल पाता। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में सिर्फ एक गाना बेतहाशा है, जो सुनने में अच्छा लगता है और कहानी के माहौल के साथ मेल खाता है। बैकग्राउंड म्यूजिक थोड़ा और इम्पैक्टफुल हो सकता था फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘झाड़ फूंक’ के पास एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट और रहस्य रचने की गुंजाइश है। प्रीक्लाइमैक्स में कहानी रोमांच पैदा करती है, लेकिन धीमी रफ्तार, लंबे दृश्य और कमजोर स्क्रीनप्ले इसके असर को सीमित कर देते हैं। फिल्म कुछ सवाल खड़े करती है, मगर उनके जरिए लगातार रोमांच बनाए रखने में पूरी तरह सफल नहीं होती। हॉरर पसंद करने वाले दर्शक इसे एक बार देख सकते हैं।
मूवी रिव्यू – ‘झाड़ फूंक’:एक खंडहरनुमा तहखाना, गायब प्रेमी और रहस्य, आखिर किस सच से सामना करेगी आस्था?

फिल्म- झाड़ फूंक कलाकार: यशपाल शर्मा, पद्मिनी कोल्हापुरे, सुम्बुल तौकीर खान, हर्ष राजपूत, अप्रतिम सिंह निर्देशक: राजन रामगोपाल वर्मा निर्माता: शैलेश परिहार ड्यूरेशन: 1 घंटा 53 मिनट रेटिंग: 3/5 कभी कभी डर किसी अंधेरे कमरे में नहीं, बल्कि उन सवालों में छिपा होता है, जिनके जवाब हमारे पास नहीं होते। जब जिंदगी, रिश्ते और अनजाना खौफ एक ही मोड़ पर आकर खड़े हो जाएं, तो सच तक पहुंचना आसान नहीं होता। फिल्म ‘झाड़ फूंक’ की कहानी भी ऐसे ही रहस्यों के बीच आगे बढ़ती है, जहां हर नया सवाल अपने साथ एक अनजाना डर लेकर आता है। फिल्म की कहानी आस्था (सुम्बुल तौकीर खान) प्रेग्नेंट है और राजवीर (हर्ष राजपूत) के साथ उत्तराखंड से दिल्ली की ओर सफर कर रही है। आस्था चाहती है कि राजवीर उससे शादी कर ले, लेकिन रास्ते में हुए एक हादसे के बाद राजवीर अचानक गायब हो जाता है। इसके बाद आस्था ऐसी परिस्थितियों में पहुंच जाती है, जहां उसकी मुलाकात मोहन ठाकुर (यशपाल शर्मा) और कामिनी ठाकुर (पद्मिनी कोल्हापुरे) से होती है। एक खंडहरनुमा तहखाना, वहां का रहस्यमयी माहौल और मंजरी से जुड़ी घटनाएं उसके डर को बढ़ाने लगती हैं। धीरे धीरे इस जगह से जुड़े राज सामने आते हैं और आस्था ऐसे अनुभवों से गुजरती है, जो उसके लिए सब कुछ बदल देते हैं। इन घटनाओं के पीछे क्या है, यही फिल्म के सस्पेंस का अहम हिस्सा है। फिल्म का डायरेक्शन, स्टोरी और स्क्रीनप्ले निर्देशक राजन रामगोपाल वर्मा की फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है। एक गर्भवती महिला, अचानक गायब हुआ प्रेमी और रहस्यमयी तहखाने का माहौल कहानी को रोमांचक बना सकता था। फिल्म के प्रीक्लाइमैक्स में सस्पेंस पैदा होता है और कुछ देर के लिए कहानी दर्शकों को बांधने में सफल रहती है। हालांकि, फिल्म की रफ्तार कई जगह धीमी पड़ जाती है। कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जबकि कई घटनाओं के बीच जुड़ाव साफ नजर नहीं आता। कहानी जिस सवाल के साथ शुरू होती है, वह बीच में अपनी अहमियत खोने लगता है। इससे मुख्य कहानी का प्रभाव कम होता है और दर्शकों की उत्सुकता भी कमजोर पड़ सकती है। हॉरर के साथ आस्था और अंधविश्वास का पहलू जोड़ा गया है, लेकिन डर पैदा करने वाले सीन हर बार असर नहीं छोड़ते। कई जगह माहौल बनाने की कोशिश दिखती है, मगर वह प्रभावशाली डर में नहीं बदल पाती। स्क्रीनप्ले ज्यादा कसा हुआ होता और गैरजरूरी दृश्यों को छोटा किया जाता, तो फिल्म का असर बेहतर हो सकता था। कहानी में मौजूद संभावनाओं को पूरी तरह पर्दे पर उतारने के लिए निर्देशन और तकनीकी प्रस्तुति में और कसावट की जरूरत महसूस होती है। फिल्म में एक्टिंग यशपाल शर्मा अपने अनुभव के साथ किरदार में गंभीरता लाते हैं। पद्मिनी कोल्हापुरे भी रहस्यमयी माहौल के अनुरूप अभिनय करती हैं। सुम्बुल तौकीर खान आस्था के डर और परेशानी को पर्दे पर उतारने की कोशिश करती हैं, जबकि हर्ष राजपूत की भूमिका कहानी की शुरुआती कड़ी में अहम है। हालांकि, कमजोर लेखन के कारण कलाकारों को अपने किरदारों के जरिए पूरी छाप छोड़ने का मौका नहीं मिल पाता। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में सिर्फ एक गाना बेतहाशा है, जो सुनने में अच्छा लगता है और कहानी के माहौल के साथ मेल खाता है। बैकग्राउंड म्यूजिक थोड़ा और इम्पैक्टफुल हो सकता था फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘झाड़ फूंक’ के पास एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट और रहस्य रचने की गुंजाइश है। प्रीक्लाइमैक्स में कहानी रोमांच पैदा करती है, लेकिन धीमी रफ्तार, लंबे सीन और कमजोर स्क्रीनप्ले इसके असर को सीमित कर देते हैं। फिल्म कुछ सवाल खड़े करती है, मगर उनके जरिए लगातार रोमांच बनाए रखने में पूरी तरह सफल नहीं होती। हॉरर पसंद करने वाले दर्शक इसे एक बार देख सकते हैं।









